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Don't depend on your luck. The best way if you are performing your work is with pure heart right actions and pure speech. You will achieve success in your life. This is the basic of reiki healing and astrology science. भाग्य के भरोसे बैठना नहीं है मन वचन कर्म की शुद्धता के साथ जीवन में सफलता की ओर बढ़ना यही रेकी हीलिंग और ज्योतिष विज्ञान का मूल आधार है.


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रेकी किस प्रकार रोग के मूल तक जाकर उसे ठीक करती है विषय पर प्रेस वार्ता Press conference about reiki healing for root cause
श्री नरेन्द्र मोदी: लोकसभा चुनाव 2019 - दूसरी बार लोकसभा चुनाव की सही भविष्यवाणी Second time correct prediction about Loksabha election
क्रिकेट मैच भारत बनाम अफगानिस्तान, भविष्यवाणी सही हुई Cricket match prediction India vs Afghanistan Prediction got correct

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प्रतिदिन सभी आयु वर्ग के लोगों, छात्रों और अस्पताल के रोगियों के लिए रेकी हीलिंग और ज्योतिष परामर्श

Reiki healing and astrology counseling for students hospital patients and general for all age groups everyday.

प्रतिदिन रेकी I II III A और B रेकी मास्टर, क्रिस्टल हीलिंग और करुणा रेकी हीलिंग क्लासेस

Reiki I II III A and B Reiki master, Crystal healing and Karuna reiki healing classes everyday.

Reiki Circle  
Reiki cases | Astrology cases ________________________________________________________________________________________________________________________________________________
Feedback and experiences प्रतिक्रिया और अनुभव

केस: इस मातृदिवस पर मुझे रेकी ने दिया एक विशेष उपहार मेरा खोया हुआ बेटा मुझे वापस मिला. मेरा २३ साल का बेटा एक दिन अचानक घर छोड़ के चला गया. हमें उसके बारे मे कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी. मुझे हाई बी.पी. और डााइबिटीज की परेशानी है और इस घटना ने मेरे स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डाला. हमने अपनी सारी कोशिशे की उपाय किये और फिर हमने रेकी सेण्टर सर्च किया और हमें आपका मोबाइल न. मिला. आपने मुझे उसी दिन मिलने का कहा पत्रिका लाने के लिए भी कहा. मेरे अस्वस्थता की कारण मै बैठ पाने मे भी समर्थ नहीं थी. मैंने रेकी ली फिर आपने मुझे कुछ उपाय भी बताये और बताया बेटा सुरक्षित है और जल्दी ही (और एक निश्चित तारीख लिखी) आ जायेगा. मै उस दिन आश्चर्यचकित रह गयी यह वही तारीख थी और मेरा बेटा मेरे सामने था. मै अपने भावनाओं को यहाँ शेयर करना चाहती हूँ और आपको हार्दिक धन्यवाद देती हूँ आज आपकी और रेकी उर्जा की वजह से मेरा बेटा मुझे मिला. मेरे बेटे के वापस आने के बाद उसने भी 7 दिन रेकी ली.

Case: Kidney stone:Hi, I was taking Reiki healing for my kidney stone problem in 2003-04. It was really bad and painful when stones blocked the path of passing urine. I used to cry with the pain. There were 5 stones the biggest was 8-9 mm other 7, 5, 4, 2 mm in size. I started taking reiki healing for 7 days then continued to 21 days. In those days when I was taking healing the pain was continued, I met my Dr. to and we planned to operate it. The operation was fixed after few days later and I continued taking reiki healing. I saw white color while passing the urine as well relief in pain too. I asked to Mr. Antas Billorey, he told me it may be possible the stone got removed. The day arrived when I was ready for operation. My Dr. checked again and did the required tests. He found there were no stone. I just called to Mr. Antas Billorey told about it and went to meet him with some sweets. I thank to reiki healing it’s a noble work.

मेरी आयु ४१ वर्ष है, मै एक मल्टीनेशनल कंपनी मे कार्यरत हूँ. पिछले कुछ दिनों मे मैंने अनुभव किया कि मेरी स्मरण शक्ति कम हो रही है. मै अपने साथ काम करने वालो के नाम तक याद नहीं रख पा रहा हूँ. इसका प्रभाव मेरी काम करने की क्षमता को प्रभावित कर रही थी. मैंने रेकी सेण्टर मुंबई मे विजिट किया. मैंने २१ दिन रेकी ली और अपने अंदर सुधर पाया. मेरी रेकी के दौरान सर ने मेरी एक बड़ी समस्या से मुक्ति दिलायी जो की मै भी पूरी तरह से भूल चूका था. सर ने पूछा “ क्या आपको सोने से कोई कडवी याद है या कुछ हादसा जो सोने से जुडा है?” मै अचंभित था ये जो मुझे मुश्किल से ५ -६ दिन से जानते है इन्हें ये कैसे पता चला. मैंने कहा “ जी हाँ, जब यह घटना मेरे बचपन की है, मै ८ साल का था और तब मै कनाडा मे रहता था. मेरे पापा के पास एक सोने की ईट थी और एक बार हमारे घर मे रेड पड़ी थी मजबूरन हमें उस फ्लश करना पड़ा था.”तब उन्होंने कहा “यही जड़ है आपकी परेशानी की हालाँकि ये आपके सूक्ष्म मस्तिष्क मे मौजूद थी और आप पर प्रभाव डाल रही थी.” ये रेकी ऊर्जा ही है जिसने इस कारण को ढूँढा और दूर किया. अब मै पहले से अधिक आत्मविश्वास और स्ट्रोंग मेमोरी पॉवर से काम कर पा रहा हूँ.

Case: Reiki healing for patients in hospital: I have always seen positive changes and fast recovery in all cases when people suffering from chronic disease or admitted for any operation. It is also suggested whatever treatment is taken by the patient it should be continued as their doctor suggested. In last few days also given reiki healing to people who were facing problem with their past. They were facing trouble to make better their life due to their past. One of my friend who is talented actor of television and film industry facing some stomach and headache problem, he also recovered in 14 to 21 days distance reiki healing sessions. Keep practicing Reiki healing it works for everyone.

Case: B.E. student got relive from depression: Hi everyone Reiki means wonder for me thank you sir for building my confidence. I am a 21 years B.E. student during my exam I came under depression. My result is not good enough what I suppose, so I eat lots of sleeping pills that time you are my neighbor you help me lot. After that I came to know about reiki I take reiki more than 1 month. I feel completely change. It gives me concentration in my studies. Now I don’t have stress in exam time. My grades are also improved after this. Thank you very much.

रेकी मेरे लिए एक चमत्कार है. सर आपको धन्यवाद मेरा आत्मविश्वास जगाने के लिये. मैं २३ साल का बी. ई. का छात्र हूँ, मै अपनी पढाई के लिए पूर्णतः समर्पित था मेरी परीक्षा के समय मे मै अपने मित्रों को भी पढ़ता था. अधिक से अधिक मेहनत के बाद भी मै फ़ैल हो गया पिछली बार भी मै कुछ विषयों मे अटक गया जिन मित्रो को मै पढ़ता था वे पास हो गये. अपनी असफलता से मै इतना अधिक परेशान हो गया की मैंने पेरासिटामोल की गोलियां आवश्यकता से अधिक खा ली थी. उस समय सर मेरे पडोसी थे जब मेरी मम्मी ने घबरा कर सबको बुलाया सर भी आये मुझे उल्टी करवाई गयी. उस समय मेरी नानी मौसी मम्मी से चर्चा के दौरान सर ने मेरी जन्मपत्रिका से बताया की मेरा ये समय ठीक नहीं है पर गुस्सा करने से गलत काम करने से और बिगड़ेगा. ये समय मैडिटेशन करो, मन्त्र करो. उन्होंने मुझसे पूछा क्या तुम गवर्नमेंट सर्विस मे इंटेरेस्टेड हो? मैंने कहा हाँ. मेरे दोस्त Night study करके ही पास हो जाते है पर मेरे पेपर्स बैक हो गये. सर ने मुझे कहा की अपने दोस्तों की नक़ल मत करो यदि वो रात को जागते हैं तो सकता है की उन्हें रात का टाइम साईकल सूट करता हो पर तुम्हारी होरोस्कोप से पता चलता है की तुम्हे सुबह जल्दी उठ कर ही पढ़ना ज्यादा फलदायी रहेगा. आगे का समय अच्छा है. मेहनत करोगे तो सफलता मिलेगी. क्रोध पर नियंत्रण रखो. आगे समय अच्छा है वाइफ supportive रहेगी. इस समय मैंने रेकी के बारे मे भी जाना. एक महीने से अधिक रेकी लेने के बाद मुझे positive परिणाम मिलने लगे रेकी ने मेरे जीवन को नयी दिशा दी. मुझे मूड स्विंग की परेशानी से भी निजात मिला. सर आपको बहुत – बहुत धन्यवाद.

Case: Mother got his lost son: Reiki gives me the best gift on this mother’s day. My 23 year old son left home. We don’t have any idea about him. As I am a high BP patient it affects my health. I do all remedies to find my son. At that time I searched about reiki and I got sir’s number. On the same date I got the opportunity to meet him. He also told me to bring horoscope of my son. Due to my sickness I was not able to sit. After taking reiki he also suggest me some remedies. He assured me that my son is fine and soon (on a particular date he wrote) he will come. And I was wonder that on the same date my son is with me. This feeling I want to share to show my gratitude for you and for reiki, thank you so much.

Case: Better preparation of IIT exams: Hi I am a student of class XII. I had taken reiki for my IIT exam. I am feeling blessed by taking reiki from you. This reiki energy changes a lot in my day to day routine. I wonder that how you came to know about my weakness in my studies. My concentration power increase now I feel more concentrate and energetic in my studies and waiting for my results.

मै कक्षा बारहवी का छात्र हूँ. मै अपनी IIT परीक्षा के लिए रेकी ले रहा हूँ. मै अपने आपको भाग्यशाली समझता हूँ की मुझे सही समय पर आप मिले. रेकी ऊर्जा ने मेरी दिनचर्या पर सकारात्मक प्रभाव डाला. मै उस समय अचंभित हो गया जब आपने रेकी द्वारा मेरी कमज़ोरियो से अवगत कराया और उसका निदान किया. मेरी एकाग्रता बढ़ी और मै अधिक ऊर्जा से जुट गया. अब इंतजार है परिणाम का, आपको धन्यवाद. मै पूर्णतः आश्वस्त हूँ आपकी रेकी सेवाओं से.

Case: Got bail from court: First Thank you sir, it was 10 o’clock in night when I was at sir’s place. I have done a big mistake sir and now I am in a big problem. It was my first sentence. “Due to some property matter I had fight with my Uncle. Now it was my mistake that I am in judicial custody. How can you help me?” I asked sir. By seeing my horoscope he told me do some remedies and takes reiki for 7 days, after one month I am in court and I got bail on same day. my hearty wishes sir for his job and fully satisfied from his services.

सबसे पहले आपको मेरा प्रणाम, उस दिन रात की १० बज रही थी और मै सर आपके सामने सर मुझसे गलती हो गयी. मेरा अपने ताऊ से प्रॉपर्टी से सम्बंधित विवाद चल रहा था और मेरी ही एक गलती से मै आज कोर्ट के झमेले मे फंस गया हूँ. मेरी जन्मपत्रिका से देख कर और रेकी देकर सर ने मुझे उपाय बताये. लगभग एक महीने उपाय करके जब वह दिन आ गया. अब मै जज के सामने था मुझे सजा मिली पर उसी दिन मुझे जमानत भी मिल गयी.

Case: Memory loss problem: Hi I am a 41 years man working in an MNC. I had short term memory loss problem even sometime I forgot my colleagues name. In this competitive world it is big problem. I went in reiki center in Mumbai. After taking reiki for 21 days I found change in my problem. During my reiki days he also removes one of my mind hurdles that even I was completely forgotten. He asked me that did you had something bad memories related to Gold, I was completely shocked this man don’t know me even it is hardly 5-6 days when I met how he know about me? I replied “yes sir I am only 8 years old and that time I was in Canada. We have big gold brick in our house. One day it was raid and we flush that brick.” Now he said “This is your problem although it is in your subconscious mind it affects you.” It is reiki energy that finds the main reason. Now I feel more confident and strong memory power.

Case: Good relationship in future: Hi I am a government officer. I had problems with boss. I heard about reiki than I search for reiki center at Indore and I came to know about you. I take reiki for more than 21 days and I know many things related to my problem. Some weakness that I had in my past but it affects my present. Now I have good relationship with my boss. I wonder even colors related to my cloths gives me good result and all it is I feel that even I was not believed before. I thank you sir for being with me when I need support.

Case: Bed wetting (child) problem: Hello I am 27 old year’s old mother and my 8 years daughter was suffering this problem. She is embarrassed when we are visiting our relative’s home and staying one night. One day she asks me mummy I feel very shameful and depress when it happens. That day I talk this with my friend she suggest me about reiki. When I met sir in reiki center Indore he gave my daughter reiki and it continue for 21 days. From 3rd day we observed that now that problem is no more. I am very happy that reiki is not having any side effects but it removes other obstacles related to a person. My best complements to you to boost up confidence in my daughter’s life, thank you sir.

Some other cases handled by us

Three cases 4 to 8 years kids: 1. Kid hyperactive restless not able to concentrate in studies. When came to my center with his parents not able to sit properly. He was touching everything moving here and there. He picked up reiki healing crystals. I was on that time and his parents was not able to control him. His parents mentioned kid is adopted so we much take care of him. 2. Kid is hyperactive, very sensitive and asthmatic. Very fast affected by allergies. When we start reiki healing he was in lie down position crystal kept on his forehead and body, crystals fell down on the left and right side because of his restlessness. 3. Kid is very restless and sad with bed wetting. His parents were more concentrated to resolve the problem of bed wetting. We started Reiki healing. First of all in all three cases kids got asleep with 1 or one and half minutes. Hyperactivity controlled in 2-3 days. Bed wetting was controlled from 3rd day. Reiki was given till 7 days. Asthmatic patient got relief from 8th day. Reiki was given till 21 days. Kid 1 taken reiki 21 days and now very normal in behavior. Now he is able to understand and enjoying study with teacher and parents. I seen in most of cases kids and children recover faster than young or elders.

Case: One of my friend, good television and film artist asked reiki healing last month. I asked to tell her the objective of healing. She told me for her better work, to get rid of frustration and to avoid smoking. I asked her, does she like smoking or do occasionally. She said during tension she used to smoke. We started healing sessions, after 2-3 days I felt she is not disturbed with smoking habit and asked the exact reason. We discussed in detail. Later on after another session I realized the reason and it was less work in a month and shooting dates. She also agreed. Then we started reiki healing for her work only and did 21 days session. we took a break for 2-3 days then again started reiki healing sessions. Now she is getting more work as well as calmness and peace of mind. We are also working together to control her addiction completely in coming days.

Case: A thalassemia patient 14 year’s boy, in Kokilaben hospital Mumbai. I am giving distance healing from Indore. Yesterday successfully blood changed. During the process of blood transfusion he got unconscious later on all fine with the grace of God.

Case: I was giving healing to a cancer patient since last 6 days. She was not able to take her diet too. On 7th day when I reached to the hospital I knew yesterday evening she started liquid diet. Thanks to Reiki healing.

Case: A patient was suffering with stomach cancer. During reiki healing I was able to see her wounds inside the stomach and asked about it. Her family members agreed that wounds were hurt yesterday and blood in vomiting. So it is possible to scan the problem inside the body by reiki healing.

Case: A person age of 70 to 75 asked me reiki for acidity, Insomnia (sleeping disorder) blood pressure, memory. He said because of improper sleep he is facing problem in digestion and its creating acidity. So we decided first to heal and reiki treatment for proper sleep. We started reiki, his wife was also present in the room and watching the process too. In next ten minutes person got asleep. His wife was also so surprised to see that he is now snoring. We keep doing reiki for next 15 to 20 minutes. He had taken reiki for next 7 days and he found the healing was helpful.

Case: A lady age 62 years asked reiki for her knee pain. She was facing the problem since long time and due to weight gain pain was increased day by day. We started reiki for 7 days. She told in few days the pain is reduced gradually. We completed healing for 7 days. When next time we talked about her pain after 4-6 month, she told even now the pain is not same as before reiki healing. Due to some reason she couldn't continue the reiki healing.

Case: A person from Malaysia contacted me on whatsapp. He told about his injuries in accident pain in leg and spinal injury. I asked how you will take reiki in paid sessions or free sessions. He told me free sessions. We started it in evening for couple of days then took a break then started again. In most cases he was also able to feel the healing and relief. When we started second time he asked me to contact me on a mail and to share about my website link, i sent an email. In a reply he told me that he want to pay or donate something for my healing. I told as i offered you free healing not any intention to get money from you and you can also continue reiki healing in future too. He forced to share some money not to pay, we exchanged the ac details and he transferred good amount on the same day. Now we are continuing reiki for his relief. Sometimes I asked about his pain what i feel or scanned during the healing he also accepts about it. Now we share about our self. He told me he is also a reiki master and before sometime in an accident he was injured badly. I am grateful that with the reiki and distance healing i could be able to serve him from my country. There are many cases where people ask reiki and get relief. I love to keep doing my healing work.

Case: A female asked reiki for her job marriage and physical problem of irregular menses cycle. In next 4-5 days she told she find completely relief in her physical problem. Now she is taking reiki for her other wishes to be fulfilled. Hope she will get all well soon.

Case: A guy was taking reiki for quitting tobacco chewing and for good job. He taken reiki regularly and he always say he can feel reiki energy. He is having good sleep nowadays. He also accepted he can feel strong feeling of quitting chewing tobacco. Now he is taking Reiki continuously for his wish. Hope he will get all well soon.

Case: A person was taking reiki for his health and wellness of his son and daughter. In the beginning 3-4 days I found at the time of sending him distance healing his running name is different and in past another name. I asked him after distance healing session about it, he said yes it is different. So in Reiki it can be also scanned as well the reason of sickness or illness. Now he is taking Reiki continuously for his wish. Hope he will get all well soon.

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Heart विनम्र निवेदन - इस नवरात्रि में प्लास्टिक निषेध करें
Posted by: admin - 09-29-2019, 08:49 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

विनम्र निवेदन - इस नवरात्रि में प्लास्टिक निषेध करें 
Reiki and Astrology Predictions ›Menu › Share your stuff
नवरात्रि का त्योहार है प्रथा अनुसार अष्टमी और नवमी के दिन बालिका रूपी देवियों को हम कंजक के रूप में पूजते हैं, और उपहार स्वरूप भेंट भी देते हैं।
आमतौर पर देखा गया है कि यह उपहार सस्ते प्लास्टिक या पुनर्नवीनीकरण किए गए प्लास्टिक से बनाए जाते हैं,  जिससे सिर्फ व्यापारियों को भरपूर मुनाफा होता है । प्लास्टिक की बनी ये प्लेटें, कटोरिया और डिब्बे बहुत ही निम्न स्तर के प्लास्टिक के मेटेरियल से बनाए जाते हैं, और उनमें गरम गरम हलवा पूरी परोसा जाता है, जो की सेहत के लिए बहुत ही घातक और जानलेवा है ।
हमारी पृथ्वी पहले ही प्रदूषण का संताप झेल रही है ।
अतःआप सबसे आग्रह है कि हम सब इस प्लास्टिक को त्यागें और देवी रूपी कंजको को लेखन सामग्री ( Pencil, Eraser, Sharpner, Notebooks etc.) का उपहार भेंट करते हुए शिक्षा का प्रसार करें।
कृप्या अपने मित्रों, सहेलियों और सगे संबंधियों को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करें और स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर हों ।
आइए हम सब पृथ्वी को प्लास्टिक रहित बनाने की ओर कदम बढ़ाए ।
NO PLASTIC IN NAVRATRI विनम्र निवेदन - इस नवरात्रि में प्लास्टिक निषेध करें 

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Heart निशुल्क होम्योपैथिक औषधि वितरण
Posted by: admin - 09-28-2019, 02:35 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

निशुल्क होम्योपैथिक औषधि वितरण

विभिन्न प्रकार की होम्योपैथिक मेडिसिन हमारे सेंटर रेकी एंड एस्ट्रोलॉजी प्रिडिक्शंस पर एकत्रित की गई हैं और वह हम किसी संस्था किसी वृद्ध आश्रम महिला आश्रम या बच्चों के लिए निशुल्क देना चाहते हैं इन मेडिसिंस में आयरन टॉनिक पेट के लिए या महिलाओं की समस्याओं के लिए या अन्य तरह की मेडिसिंस है जो भी इच्छुक हो व्हाट्सएप नंबर 810 9812284  संपर्क करें या वेबसाइट लिंक के कांटेक्ट सेक्शन में संपर्क करें।
   

आज श्री महेश दृष्टिहीन कल्याण संघ में होम्योपैथिक दवाइयों का वितरण संपन्न हुआ और वहां के इंचार्ज श्रीमती दत्ता जी को दवाइयां दी गईं।
   
   
   
   

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Heart हर जीव की पीड़ा को समझें और सभी के साथ शेयर करें
Posted by: admin - 09-24-2019, 08:43 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

हर जीव की पीड़ा को समझें और सभी के साथ शेयर करें

नगर में सड़क पर घूम रहे पशुओं को नियंत्रण करने के लिए सरकार उनके नसबंदी ऑपरेशन करती है यह इसलिए जिससे कि सड़क पर आवारा पशुओं की संख्या अधिक ना बढ़े पर दूसरी ओर उन्हें चिन्हित करने के लिए कर्मचारियों द्वारा उनके कान पर कट लगाया जाता है जिससे कि सड़क पर दूर से ही उन्हें देखकर पहचाना जा सके कि इस पशु की नसबंदी की जा चुकी है किंतु यह जो कट कैची से लगाया जाता है और वह जो घाव होता है वह कान में बाहरी ओर वह बढ़ जाता है और उस घाव में इन्फेक्शन भी हो जाता है क्या एक पहचान लगाने के लिए या चिन्ह लगाने के लिए उसके कान की बाहरी चमड़ी को काटना ही जरूरी है क्या कोई रंग से या डाई लगाकर या जैसे हम चुनाव की स्याही जो कि एक पक्का डाई होते हैं वह लगाकर एक परमानेंट निशान उस पर नहीं लगा सकते जिससे कि उस पशु को भी पीड़ा ना हो और वह बीमार ना पड़े क्या यह पीड़ादायक नहीं है क्या पशु इस दर्द को सह पाता होगा हमारी यही इच्छा है की पशु को इस प्रकार चिन्हित करने का या पहचान लगाने का तरीका बदला जाए और उसके दर्द को समझ कर किसी स्याही से या किसी डाई से किसी रंग से उसकी पहचान को बताया जाए और यह दुखद प्रक्रिया से पशु को मुक्ति मिले।

हर जीव की पीड़ा को समझें और सभी के साथ शेयर करें

   
   
   

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  triche jeux vidéos
Posted by: MichaelKag - 09-12-2019, 04:55 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

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Galaxys9

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Star Shooting equipment and accessories
Posted by: admin - 09-05-2019, 11:38 AM - Forum: Post Advertisement - Replies (1)

Shooting equipment and accessories list
(Mumbai)
EDITING FACILITIES :
(I) Editing room with facility of Meg. Opt. Sound ola, Syncronometer, Vertical rewinder
(ii) Editing room with Sten beck
Editor (video)
Editor (Films)
Asstt. Editor
Editing Room with inter cine machine (16mm / 35mm combine)
Video Editing Room with A+B Roll Beta Editing equipment, sound dubbing facility with DFS – 500 effects generator / 16 channel mixer . DAT – DA- 98                  Recorder / DVD / VCD / CD Player 
Sony Video Projector with Screen / Professional Audio System (surround) with Speaker VCD / DVD + Beta Player
OLEGA,O DVC PRO DIGITAL CAM-CORDER
DVD Player
Protable DAT with TC inclduing Two operator
Portable Beta Recorder B.V.W.50
Public Address System with cordless mike
VCR
9″ / 14″ Monitor
Video Titler
Cordless Mike

Camera
637 Sony CCD Camera Monitor / Tripod / Portable Recorder
AVID MC-9000 NON LINEAR
From VHS to VHS (NTSC to PAL & PAL to NTSC )
From VHS to BETA (NTSC to PAL )
35mm BL Arriflex Camera (old) 
35mm Arriflex Camera with accessories (Old) ARRI II C
16mm Arriflex SR-III Camera (New) with accessories
35mm Arriflex camera with fibre glass blimp plus lenses
Phase Adjusted (video copying system)
35mm Arriflex Camera (435) (video assist) New
ZOOM LENS :
(i) 25mm to 250mm
(ii) 250mm to 625mm)
High speed Camera
Block lens (35mm / 16mm) (5.6mm, 9.5mm, 12mm. 16mm, 25mm, 35mm and 85mm) + 90mm Macro Lenses
cinematographers Cristal Motor 2 C (to expose from 1 frame to 120 frames)
Mini studio for interviews etc.
Set of fast lenses (aspherical lenses) for 35mm & 16mm cameras
Sony Video HD Camera
Digital Camera Thomson+BVW-50 recorder with 2 attendants
Cameraman
Asstt. Cameraman
16mm Arriflex SR I / SR II camera with accessories
Siky Camera


RECORDING FACILITIES :
Pre-dub, Re-recording, Mixing
Commentary Recording 
Music / Song Recording 
Transfer work of Magnetic of Optical Film (Sound Negative Film) 
Transfer work of 1/4th tape or 35mm Magnetic tape to 35mm Magnetic tape or Vice versa 
Sound Transfer from final print / any optical track to 35mm Magnetic tape 
Lip Sync. Dubbing
Language Dubbing 
Effects Recording ( with picture ) 
Effects Recording (without picture) 
Previewing of rough cut with sound tracks 
Recordist 
Astt. Recordist
Boom-man
Projection Room Operator
Asstt. Projection Room Operator



Accesories

2.5 K.W. HMI Light
1.2 KW HMI light with bulb
1.2 K.W. HMI Softy light
575 Watts HMI light
1KW Baby (Halogen) light
1 KW multi 10 Hard / Soft light
Cutter stands with atti patti & cutters
2 KW Solar (Ord.) light
2 KW Solar (Halogen) light
1 KW Sungun light
1 KW Porta light
Multi 20 light
Electric Trolley Board
Socket Boards
500 watts (ord. Baby light)
Inky dinky lights
Low Base
Extra rod
Switch board
Extension cables
Dimmer trolly (5 K.W.)
Reflector with stands

   
Contact N. 8109812284

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Heart त्यौहारों के नये संकल्प 1
Posted by: admin - 09-03-2019, 12:07 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

त्यौहारों के नये संकल्प 1
Reiki and Astrology Predictions › Menu › Share your stuff › त्यौहारों के नये संकल्प 1 

1) हफ्ते में 5 दिन exercise करना /To exercise 5 days a week.
2) रोज Morning या Evening Walk पर जाना/To go on morning or evening walk daily.
3) रात में सोने से पहले brush करना/To brush your teeth before going to bed.
4) हफ्ते में एक बार अपने parents को phone करना/To call your parents once in a week.
5) हफ्ते में तीन बार पौधों में पानी डालना/To water the plants thrice a week.
6) Office time से पहुंचना/To reach office on time.
7) गाड़ी चलाते वक़्त phone पे बात ना करना/Not to talk while driving.
8) हर महीने एक नयी book पढना/To read a new book every month.
9) रोज Newspaper पढना/To read newspaper daily.
10) हर हफ्ते अपने loved ones को फ़ोन या message करना/To call or message or phone your loved ones every week.
11) अपने servant के बच्चों को पढ़ाना/To teach your servant’s children.
12) अपने परिवार को महीने में एक बार बाहर घुमाने ले जाना/To take your family on outing every month.
13) महीने में एक नया पौधा लगाना या किसी से लगवाना/To plant a tree every month or motivate someone else to do the same.
14) बच्चों की Parents-Teachers Meeting attend करना/To attend Parents-Teachers meeting every month.
15) रोज अपनी personal diary लिखना/To write your personal diary every day.
16) किसी NGO को हर महीने कुछ वक़्त देना/To give some of your time to an NGO every month.
17) ना कहना सीखना/To learn to say NO.
18) साल में कम से कम एक बार अपने parents को किसी तीर्थ या घूमने की जगह ले जाना. To take your parents to some pilgrimage or to a tourist place once in a year.
19) Seat Belt बाँध कर कार चलाना./To tie the seat belt while driving your car.
20) Helmet पहन कर ही bike चलाना/Not to ride your bike without wearing helmet.
21) 6 महीने में एक बार अपना और परिवार का Health Checkup करवाना. To get the health checkup done for yourself and your family once in six months
22) घर की सफाई में मदद करना. To help in cleaning the house.
23) Birthdays/Anniversaries wish करना/To wish Birthdays/Anniversaries
24) महीने में एक बार गाड़ी साफ़ करना./To clean your vehicle every month.
25) किसी कि बुराई ना करना/Not to talk bad about anybody.
26) हर चीज का positive aspect देखना/To look at the positive aspect of everything.
27) साल में कोई नया instrument बजाना सीखना/To learn to play a new instrument in a year.
28) दिन भर में 3 घंटे से ज्यदा TV ना देखना/Not to see television for more than 3 hours a day.
29) दिन भर में 1/2 घंटे से ज्यादा Facebook पे ना रहना/Not to be on Facebook for more than half-an hour a day.
30) दिन भर में अपने blog या websites कि statistics दो बार से अधिक ना देखना/To look at your Blog or website statistics at most twice a day.
31) रोज कम से कम 4 घंटे self-study करना (for students)/To do 4 hours of self study everyday.
32) साल में कोई एक नया certification करना/To do one certification in a year.
33) 6 महीने में अपना वज़न 5 किलो कम करना/To reduce your weight by 5kg in 6 months.
34) अपना वज़न 5 किलो बढ़ाना/To increase your weight by 5 Kg in a month.
35) हफ्ते में एक बार से अधिक मिठाई ना खाना/Not to eat sweets more than once a week.
36) रात में चावल ना खाना/Not to eat rice in dinner.
37) अपने काम करने के स्थान को neat and clean रखना./To keep your working place neat and clean.
38) सिगरेट/शराब पीना छोड़ना./To quit smoking/ boozing
39) बच्चों के सामने सिगरेट/शराब नहीं पीना. /Not to smoke/booze in front of children.
40) Non-Veg खाना छोड़ना/To stop eating non-veg food.
41) Type करना सीखना/To learn typing.
42) सुबह जल्दी उठने की आदत डालना./To become an early riser
43) कोई नयी चीज सीखना जैसे Driving या Swimming/To learn a new thing such as Driving or Swimming.
44) दिन में एक बार खिलखिला कर हँसना/To laugh out loudly once a day.
45) किसी का मज़ाक ना उड़ाना/Not to ridicule anybody.
46) महीने में कोई एक नया व्यंजन बनाना सीखना/To learn a new dish every month.
47) हर महीने पांच ज़रूरतमंद लोगों का निःशुल्क इलाज़ करना.( For Doctors)/To give free consultation to at least 5 patients.
48) किसी एक ज़रूरतमंद बच्चे को निःशुल्क tuition पढ़ना/To provide free tuition to at least one needy student.
49) रोज कम से कम 7 घंटे सोना/To sleep for at least 7 hours a day
50) अपनी Life insure करना/To insure your life.
51) अपनी वहसीयत बनाना/To make your will.
52) हर महीने पैसे बचाना/To save some amount monthly.
53) रोज कम से कम 5 मिनट पूजा करना/To pray for at least 5 minutes a day.
54) हफ्ते में एक दिन मंदिर /मस्जिद /चर्च या गुरुद्वारा जाना./To go to temple/mosque/church/gurudwara at least once a week.
55) Lift की जगह सीढ़ियों का प्रयोग करना./To use stairs instead of lift.
56) आस पास पैदल या साइकिल से जाना./To go to near by places on foot or on bicycle.
57) दिन भर में अधिक से अधिक दो बार चाय पीना/To drink maximum two cups of tea per day.
58) खुद से home work पूरा करना ( for students)/To do your home work yourself.
59) Exam में cheating ना करना (for students)/ Not to cheat in exam.
60) Office का काम घर पे ना करना/Not to do the office work at home.
61) कोई नयी भाषा बोलना सीखना – English, German, Tamil, etc/ To learn to speak a new language.
62) आय का नया स्रोत शुरू करना करना – Insurance adviser बन कर, Amway distributor बन कर, tuition पढ़ा कर etc\ To star an alternative source of income.
63) कभी घूस नहीं लेना/Never to take bribe.
64) कभी घूस नहीं देना/Never to give bribe.
65) क्रोध पर काबू रखना/To control your anger.
66) रोज समय से खाना खाना/To eat on time everyday.
67) रोज कम से कम 8 glass पानी पीना/To drink at least 8 glass of water everyday.
68) रोज किसी की प्रशंशा करना/To praise somebody every day.
69) कमरे से बाहर निकलते वक़्त पंखे , light इत्यादि बंद करना./To switch off the fan, light, etc while leaving the room.
70) झरने की बजाये बाल्टी में पानी भर कर नहाना/To use a bucket instead of a shower while taking bath.
71) Brush या shave करते वक़्त Tap खुला ना छोड़ना./Not to leave the tap open while brushing or shaving.
72) उतना ही खाना लेना जितना कि खा सकें/To take only as much food as you can eat.
73) अपने और अभिभावकों के लिए स्वास्थय बीमा लेना/To buy a health insurance plan for your family and parents.
74) Mobile पर रोज़ 2 घंटे से अधिक बात ना करना/Not to talk more than 2 hours on mobile phone every day.
75) Public places में mobile पे तेज़ आवाज़ में बात नहीं करना/Not to talk loudly on phone in public places.
76) Public transport में बुजुर्ग लोगों को अपनी सीट देना/To offer your seat to elderly people while travelling in bus or train.
77) Line तोड़ कर आगे नहीं लगाना/Not to break the queue and go to the front.
78) गलती होने पर उसे accept करना/To accept your mistakes.
79) कूड़ा कूड़ेदान में ही फेंकना/To throw the waste in dustbin only.
80) Red light jump ना करना/Not to jump the red light.
81) साल में एक बार अपने native place जाना/To go to one’s native place once in a year.
82) एक महीने तक सिर्फ शाकाहारी खाना खाना/To eat only veg food for one month.
83) खाना बनाना सीखना/To learn how to cook,
84) अपना knowledge दूसरों से share करना/To share your knowledge with others.
85) हर महीने किसी ऐसे friend को phone करना जिससे बहुत समय से बात ना हुई हो. To talk to a friend with whom you haven’t talked for a while every month.
86) हर साल किसी अच्छी NGO को financially support करना/To financially support a good NGO every year.
87) अपने मन की job पाना/To get the job you really like.
88) कोई competition निकालना/To beat a competition.
89) अपने society या locality की कोई समस्या सुलझाना/To resolve an issue related to your society or locality.
90) Computer shut down कर के office से लौटना/To shut down your computer before leaving from the office.
91) अपने subordinate के साथ अच्छा व्यवहार करना/To behave in a good manner with your subordinates.
92) चिड़ियों के पीने के लिए रोज़ छत पे पानी रखना/To keep water for birds on the roof.
93) बेकार में print-out ना लेना/ Not to take print-out uselessly.
94) व्यर्थ के कामों में समय ना नष्ट करना/Not to waste time in doing useless things.
95) किसी और धर्म के बारे में कोई पुस्तक पढना/To read some book related to a religion other than yours.
96) लोगों से मिलकर कर smile करना (genuine)/ To give a smile to the people you meet.
97) गर्मजोशी से हाथ मिलाना/To shake your hands firmly.
98) नज़रें मिला कर बात करना/To look into eyes and talk.
99) बैठ कर TV देखना/To sit and watch TV.
100) कुर्सी पर सही position में बैठ कर काम करना/To sit in the right position on chair.
101) Well dressed होकर काम पे जाना/To go the work well dressed.

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Heart त्यौहारों के नये संकल्प
Posted by: admin - 09-03-2019, 11:49 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

त्यौहारों के नये संकल्प
Reiki and Astrology Predictions › Menu › Share your stuff › त्यौहारों के नये संकल्प 

1. प्रतिदिन 10 से 30 मिनट टहलने की आदत बनायें. चाहे समय ना हो तो घर मे ही टहले , टहलते समय चेहरे पर मुस्कराहट रखें.
2. प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट चुप रहकर बैठें. 
3. पिछले साल की तुलना में इस साल ज्यादा पुस्तकें पढ़ें.
4. 70 साल की उम्र से अधिक आयु के बुजुर्गों और 6 साल से कम आयु के बच्चों के साथ भी कुछ समय व्यतीत करें.
5. प्रतिदिन खूब पानी पियें.
6. प्रतिदिन कम से कम तीन बार ये सोचे की मैने आज कुछ गलत तो नही किया.
7. गपशप पर अपनी कीमती ऊर्जा बर्बाद न करें.
http://www.reikiandastrologypredictions.com
8. अतीत के मुद्दों को भूल जायें, अतीत की गलतियों को अपने जीवनसाथी को याद न दिलायें.
https://www.facebook.com/reikimaster.astrologer
9. एहसास कीजिये कि जीवन एक स्कूल है और आप यहां सीखने के लिये आये हैं. जो समस्याएं आप यहाँ देखते हैं, वे पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं. 
10. एक राजा की तरह नाश्ता, एक राजकुमार की तरह दोपहर का भोजन और एक भिखारी की तरह रात का खाना खायें.
11. दूसरों से नफरत करने में अपना समय व ऊर्जा बर्बाद न करें. नफरत के लिए ये जीवन बहुत छोटा है.
https://www.facebook.com/REIKIANDASTROLOGYPREDICTIONS
12. आपको हर बहस में जीतने की जरूरत नहीं है, असहमति पर भी अपनी सहमति दें.
13. अपने जीवन की तुलना दूसरों से न करें.
14. गलती के लिये गलती करने वाले को माफ करना सीखें.? 15. ये सोचना आपका काम नहीं कि दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं.?
16. समय ! सब घाव भर देता है. 
17. ईर्ष्या करना समय की बर्बादी है. जरूरत का सब कुछ आपके पास है. 
18. प्रतिदिन दूसरों का कुछ भला करें. 
19. जब आप सुबह जगें तो अपने माता-पिता को धन्यवाद दें, क्योंकि माता-पिता की कुशल परवरिश के कारण आप इस दुनियां में हैं.
20. हर उस व्यक्ति को ये संदेश शेयर करें जिसकी आप परवाह करते हैं..l

·        ध्येय निश्चित करे और उसे एक पेपर पर लिखे। और उस पेपर को हर रोज़ पढ़े।

·        योजना बनाये जो आपके लक्ष्यप्राप्ति में सहायक हो।

·        अपने लक्ष्य को पाने के लिये ज्यादा से ज्यादा इच्छाशक्ति को बढाने की कोशिश करे।

·        अपने लक्ष्य पर हमेशा ध्यान केन्द्रित करे।

·        आपकी कोशिशे लगातार और परिश्रम भरी होनी चाहिये। आपको हर रोज़ अपने लक्ष्य को पाने के लिये कोशिश करनी चाहिये।

·        लक्ष्य को पाने के लिये सकारात्मक रवैये को अपनाने की कोशिश करे।

·        अपने लक्ष्यप्राप्ति के बारे में हमेशा सोचते रहे और आंतरिक दिमाग में उसका एक चित्र बना ले। हर दिन ऐसा दो बार कम से कम 15 मिनट तक करते रहे।

·        सकारात्मक रवैये को अपनाये रखे और खुद पर भरोसा रखे।

·        अपने द्वारा चुने हुए रास्तो को कभी न छोड़े।

·        कभी हार न माने और हमेशा कोशिश करते रहे। क्योकि, “डरने वाले कभी नही जीतते और जीतने वाले कभी नहीं डरते

·        अपने और दूसरो के लिये हमेशा सकारात्मक रवैया अपनाये।

·        किसी भी परिस्थिति में अपना 100% देने की कोशिश करे।

·        अपने आशीर्वादो की सूचि बनाये। और उस सूचि को हमेशा अपने दिलदिमाग और शरीर के पास ही रखेक्योकि उसी सूचि में आपके सहकर्मियों कासंबंधियों का और परीवार वालो का प्यार छुपा होगा। हर दिन उस सूचि को पढ़ते रहे और उन लोगो का शुक्रियादा करते रहे।

·        आपके जीवन में होने वाले ख़ुशी के पलो को रिकॉर्ड करके रखे और रोज़ उन्हें याद करते रहेविशेषतः तब जब आप मायूस हो। ख़ुशी के पलो को कभी न भूले।

·        आपके जीवन में जो कुछ भी अच्छा हो रहा है उन सब की भी एक सूचि बनाये। उस सूचि की बहोत सी प्रतिया निकाले और उन्हें अलग-अलग जगहों पर रखे ताकि आप उसे दिन में बहोत सी बार पढ़ सके।

·        हमेशा मुस्कुराते रहे। परिस्थिति चाहे कितनी ही कठिन क्यों न हो हमेशा मुस्कुराते रहे और खुद पर भरोसा रखे।

·        भूतकाल के बारे में ज्यादा चिंता न करे और भविष्य के बारे में सोचकर अपना वर्तमान न बिगाड़े।

·        महापुरुषों की कहानियो को पढ़ते रहेमहान लोगो के सफलता और असफलता की कहानियो को पढ़कर उनसे कुछ सिखने का प्रयास करे।Nor ·       गुस्साअहंकारचिंताइर्ष्यालालच को हमेशा के लिये छोड़ने की कोशिश करे।

·        माफ़ करना सीखे। दूसरी से हुई गलतियों को माफ़ करना सीखे। और अपने द्वारा की गयी गलतियों से सीखकर खुद को भी माफ़ करे। गलती चाहे आपके दोस्त से हुई हो शत्रु से आपको माफ़ी दोनों को ही देनी चाहिये। और अपनी इसी आदत को दोहराते रहे।

·        अपने नकारात्मक विचारो को सकारात्मक विचारो में परीवर्तित करे। हमेशा सभी के आभारी रहे। जिन लोगो की कठिन परिस्थितियों में आपकी सहायता की उन लोगो का हमेशा आभार व्यक्त करे।

·        धन्यवाद् की डायरी हमेशा अपने पास रखे। और उसमे वो सब कुछ लिखे जो आपको ख़ुशी प्रदान करते हो। जिन्होंने आपकी सहायता की उनका धन्यवाद् करे और उनका नाम और सहायता करने का कारण भी अपनी डायरी में लिखे।

·        दूसरो की सहायता करने की आदत को बढाने की कोशिश करे। जिन्हें आपकी जरुरत है उनकी दिल से सहायता करे। आप जितना ज्यादा लोगो की सहायता करोगे उतना ही आपके लिये अच्छा होगा।

·        बाटने की कोशिश करे। आपके पास जो कुछ भी है या आप जो कुछ भी पा सकते हो उसे बाटने की कोशिश करे। अपने पैसो को बाटेसहकर्मियों को बातेअपने समय को बाटे और अपने संसाधनों को भी बाटना सीखे। दुसरो की सहायता करने के अवसर को ढूंढे।

·        दूसरो का सम्मान करे। दूसरो के प्रति हमेशा नम्र स्वभाव रखे और आदर के साथ बात करे।

·        अपने सभी कामो और व्यवहारों में इमानदार रहे। क्योकि एक बेईमान इंसान कभी शांति से नहीं रह सकता। किसीने सही कहा है, “इमानदारी ही सबसे अच्छी प्रणाली है।

·        विपरीत परिस्थितियों में भी अपने नम्र स्वभाव को न खोये। गुस्सा करना हमेशा के लिये छोड़ने की कोशिश करे।

·        सकारात्मक सोचे। विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लिये सकारात्मक शब्द खोजने की कोशिश करे। बुरी आदतों के लालच में कभी अच्छी आदतों को न छोड़े। आपको हमेशा दयालुप्यार भरासच्चाध्यान रखने वालानम्र होना चाहिये।

1.  रोज़ साधारण व्यायाम (योगा) अवश्य करे।
2.  रोज़ कुछ समय ध्यान लगाये। दिन में दो बार 15 से 30 मिनट तक ध्यान करने से आपको चमत्कारीक परीणाम मिल सकते है।
3.  प्राकृतिक अनाज खायेखाने में सब्जियों को प्राधान्य दे और फास्टफूड को हो सके तो अनदेखा करे।
4.  आपका आहार संतुलित होना चाहियेआपके आहार में प्रोटीनफेट्समिनरल्स और विटामिन्स की पर्याप्त मात्रा होनी चाहिये।
5.  हर रोज़ ज्यादा से ज्यादा पानी पिने की कोशिश करे। क्योकि पानी की गुणवत्ता समय-समय परजगह-जगह पर बदलती रहती हैहो सके तो समान गुणवत्ता वाला पानी पिने की ही कोशिश करे।
6.  एसिडिक अन्न को खाने से इंकार करे।
7.  ड्रग्सतम्बाखूशराबकोकीन इत्यादि का सेवन न करे।
8.  पर्याप्त समय सोयेबहोत ज्यादा या बहोत कम न सोये।
9.  अपने चेहरे पर हमेशा हसी रखे और खुश रहेजितना ज्यादा हो सके उतना ज्यादा हसे। किसी ने बहोत सही कहा है कि, “हसना ही सबसे अच्छी दवा है
10. अपने विचारो को हमेशा सकारात्मक रखेगुस्सा न करे और ज्यादा विचार न करे।

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Heart श्री गणेश जी की स्तुति संग्रह
Posted by: admin - 09-02-2019, 04:55 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

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गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचरुभक्षणं ।।

उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विध्नेश्वरपादपङकजम् ।।

गजानन, भूतगणों से सेवित, कपित्थ, जम्बू जिसका प्रिय भोजन है, पार्वतीपुत्र, शोकविनाशक गणेश जी को मेरा नमन ।।

प्रथम पूज्य गजानंदजी के जन्मोत्सव की आपको सपरिवार कोटि कोटि हार्दिक मंगल शुभकामनाएँ ।।

श्री गणेशजी  आपकी सर्व मनोकामनाएं पूर्ण करे

।।गणपति बप्पा मोरया ।।
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एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।

मंगल मूर्ति ... का आगमन आप सभी के परिवार में 
सुख-शांति , अच्छा स्वास्थ्य और समृद्धि के लेकर आए, 
गौरा के लाल कि कृपा हमेशा बनी रहे , जय श्री गणे

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प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यम् आयुःकामार्थसिद्धये  ॥

दीर्घायुष्य-प्राप्ति, इच्छा-पूर्ति एवं धनोपार्जन में साफल्य पाने हेतु भक्तजनों के शरणस्थल, पार्वती-पुत्र, विनायक (विघ्न हरने वाले) देव, श्री गणेश, का नित्यप्रति सिर नवाते हुए स्मरण करे ।

संकट हर्ता श्री गणेश जी  आप सभी का मंगल करें ।

गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं  ।।

गणपति बप्पा मोरया

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श्री गणेश स्थापना विधान, नियम तथा सावधानियां।


1-श्री गणेश की मूर्ति 1फुट से अधिक बड़ी (ऊंची) नहीं होना चाहिए ।


2-एक व्यक्ति के द्वारा सहजता से उठाकर लाई जा सके ऐसी मूर्ति हो ।


3-सिंहासन पर बैठी हुई, लोड पर टिकी हुई प्रतिमा सर्वोत्तम है ।


4-सांप,गरुड,मछली आदि पर आरूढ अथवा युद्ध करती हुई या चित्रविचित्र आकार प्रकार की प्रतिमा बिलकुल ना रखें ।


5-शिवपार्वती की गोद में बैठे हुए गणेश जी कदापि ना लें। क्येंकि शिवपार्वती की पूजा लिंगस्वरूप में ही किये जाने का विधान है। शास्त्रों में शिवपार्वती की मूर्ति बनाना और उसे विसर्जित करना निषिद्ध है ।


6-श्रीगणेश की मूर्ति की आंखों पर पट्टी बांधकर घरपर ना लाएं ।


7-श्रीगणेश की जबतक विधिवत प्राणप्रतिष्ठा नहीं होती तब तक देवत्व नहीं आता। अत: विधिवत् प्राणप्रतिष्ठा करें।


8-परिवार मेंअथवा रिश्तेदारी में मृत्युशोक होने पर, सूतक में पडोसी या मित्रों द्वारा पूजा, नैवेद्य आदि कार्य करायें । विसर्जित करने की शीघ्रता ना करें।


9-श्रीगणेश की प्राणप्रतिष्ठा होने के बाद  घर में वादविवाद, झगड़ा, मद्यपान, मांसाहार आदि तामसी व्यवहार ना करें ।


10- श्रीगणेशजी को मोदक (लड्डू) सर्वाधिक प्रिय है जैसे हमें भी भोजन में कोई चीज सर्वाधिक प्रिय होती है लेकिन क्या यह हम रोज खाते हैं..? इसी प्रकार गणेश जी को भी ताजी सब्जीरोटी का भी प्रसाद नैवेद्य के रूप में चलता है केवल उसमें खट्टा, तीखा, तेज मिर्चमसाला ना हो ।


11-दही+शक्कर+भात यह सर्वोत्तम नैवेद्य है ।


12-विसर्जन के जुलूस में झांज- मंजीरा,भजन आदि गाकर प्रभु को शांति पूर्वक विदा करें. डी. जे. पर जोर जोर से अश्लील नाच, गाने, होहल्ला करके विकृत हावभाव के साथ श्रीगणेश की बिदाई ना करें ।


ध्यान रहे कि इस प्रकार के अश्लील गाने अन्यधर्मावलंबियों के उत्सवों  पर भी नहीं बजते हैं आप उनसे कुछ शिक्षा लें ।


13-यदि ऊपर वर्णित बातों पर अमल करना संभव ना हो तो श्रीगणेश की स्थापना कर उस मूर्ति का अपमान ना करें ।

अंत में घर में रखी हुई गणेशमूर्ति के सामने 1घंटे तक शांत बैठे. अपना आत्मनिरीक्षण करें, अच्छा व्यवहार करें विचार शुद्ध सात्विक रखें यदि आत्मिक शांति मिलती है तो इस व्यव्हार को निरंतर रखें.... अवश्य ही श्री गणेश आप पर कृपा बरसायेंगे ....।



प्रेम से कहो जय श्री गणेश
बप्पा काटेंगे हमारे सारे कलेश

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Heart Karuna Reiki करुणा रेकी
Posted by: admin - 08-26-2019, 12:12 PM - Forum: Karuna Reiki करुणा रेकी - No Replies

Karuna Reiki करुणा रेकी

करुणा रेकी हीलिंग का ही एडवांस लर्निंग है और करुणा रेकी सीख कर बहुत से क्रॉनिक समस्याओं में और हमारे उद्देश्य को पाने में शीघ्र सफलता मिलती है। करुणा रेकी सीख कर या करुणा रेकी लेकर हम अपने काम को शीघ्र और आसानी से कर सकते हैं। Learn Karuna Reiki.

   
   

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Heart मिजोरम के ब्रू (रियांग) की व्यथा कथा
Posted by: admin - 08-20-2019, 08:50 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

मिजोरम के ब्रू (रियांग) की व्यथा कथा 
अपील (पेटिशन) पर हस्ताक्षर करके इनका सपोर्ट करें अधिक से अधिक लोगों को जोड़ें एवं शेयर करें. sign the petition and share with maximum people.
   
   
   
   

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Rainbow Wishes of Independence Day Rakshabandhan Birthday Celebration of Dr. Mikao Usui
Posted by: admin - 08-14-2019, 11:06 PM - Forum: Free Reiki Healing - No Replies

Wishes of Independence Day Rakshabandhan & Inviting you for Birthday Celebration of Reiki Master - Dr. Mikao Usui

   

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Star Happy Independence day
Posted by: admin - 08-14-2019, 11:00 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

Happy Independence day

   

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  Pooja thali
Posted by: Harshita - 08-08-2019, 04:08 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

Pooja thali

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Heart पौधारोपण कार्यक्रम 31 जुलाई
Posted by: admin - 07-31-2019, 02:54 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

पौधारोपण कार्यक्रम 31 जुलाई

पौधारोपण कार्यक्रम 31 जुलाई बुधवार को वेबसाइट रेकी एंड एस्ट्रोलॉजी प्रिडिक्शन और अंतस् बिल्लौरे प्रोडक्शन्स द्वारा पौधारोपण का कार्यक्रम मिलेनियम स्कूल, सिल्वर स्प्रिंग 2, नायता मुन्डला, इंदौर में किया गया  यहाँ  200 पौधे लगाए गए। इस कार्यक्रम में  स्कूल के विद्यार्थियों, स्टाफ द्वारा भी पौधारोपण किया गया। श्रीमती संगीता उप्पल, प्रिंसिपल. श्री निलेश मंडलोई, श्री दिनेश पहलवानी. श्री संजय राजवैद्य एवं अन्य स्टाफ मेंबर्स के मार्गदर्शन में कार्यक्रम संपन्न हुआ।

? पेड़ लगाओ पानी बचाओ?
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वेबसाइट रेकी एंड एस्ट्रोलोजी प्रिडिक्शंस www.reikiandastrologypredictions.com और अंतस् बिल्लौरे प्रोडक्शन्स द्वारा इंदौर शहर में पौधारोपण किया जाएगा। आप भी अपने क्षेत्र में यदि पौधारोपण करवाना चाहते हैं तो आप संपर्क कर सकते हैं। 5 - 10 - 20 - 50 पौधे। आपके आवेदन अनुसार। पौधारोपण के बाद पौधों का संरक्षण हो सके वहीं हम पौधारोपण करेंगे। संपर्क: अंतस् बिल्लौरे। मोबाइल नं 8109812284। जिन्हें भी आवश्यकता हो उन्हें ये मैसेज फारवर्ड कर दीजिये हम कुछ ही दिनों में वहां पौधारोपण कर देंगे। जो भी व्यक्ति इस कार्य में हमारे साथ सहभागी बनना चाहते हैं उनका स्वागत है।

   
   
   
   
   
   
   
   
   
   
   
   
   

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Star Crystal Reiki Healing क्रिस्टल रेकी हीलिंग
Posted by: admin - 07-24-2019, 01:32 PM - Forum: Crystal Reiki - No Replies

Crystal Reiki Healing क्रिस्टल रेकी हीलिंग

Crystal reiki healing can be taken for all purpose. We can also provide you best suitable crystal for you.



Crystal reiki healing can be taken for all purpose. We can also provide you best suitable crystal for you.  क्रिस्टल रेकी  भी किसी भी उद्देश्य के लिए या पॉजिटिव उर्जा पाने के लिए की जा सकती है। धनात्मक या सकारात्मक ऊर्जा के लिए क्रिस्टल रेकी का प्रयोग किया जा सकता है हमारे पास संबंधित उद्देश्य के अलग अलग क्रिस्टल उपलब्ध हैं जो आप उचित मूल्य पर खरीद सकते हैं।


   
   
   
   

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Thumbs Up सफलता क्या है ?
Posted by: admin - 07-22-2019, 08:55 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

सफलता क्या है ?

4 वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप अपने कपड़ों को गीला नहीं करते।

8 वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप अपने घर वापिस आने का रास्ता जानते है।

12 वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप अपने अच्छे मित्र बना सकते है।

18 वर्ष की उम्र में मदिरा और सिगरेट से दूर रह पाना सफलता है।

25 वर्ष की उम्र तक नौकरी पाना सफलता है।

30 वर्ष की उम्र में एक पारिवारिक व्यक्ति बन जाना सफलता है।

35 वर्ष की उम्र में आपने कुछ जमापूंजी बनाना सीख लिया ये सफलता है।

45 वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप अपना युवावस्था बरकरार रख पाते हैं।

55 वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप अपनी जिम्मेदारियाँ पूरी करने में सक्षम हैं।

65 वर्ष की आयु में सफलता है निरोगी रहना।

70 वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप आत्मनिर्भर हैं किसी पर बोझ नहीं।

75 वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप अपने पुराने मित्रों से रिश्ता कायम रखे हैं।

80 वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आपको अपने घर वापिस आने का रास्ता पता है।

और 85  वर्ष की उम्र में फिर सफलता ये है कि आप अपने कपड़ों को गीला नहीं करते।

अंततः यही तो जीवन चक्र है.. जो घूम फिर कर वापस वहीं आ जाता है जहाँ से उसकी शुरुआत हुई है और

यही जीवन का परम सत्य है।

::संभाल कर रखिए अपने आप को::
 आपका मंगल हो सबका मंगल हो

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Star पौधारोपण कार्यक्रम
Posted by: admin - 07-15-2019, 12:54 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

पौधारोपण कार्यक्रम



14 जुलाई रविवार को वेबसाइट रेकी एंड एस्ट्रोलॉजी प्रिडिक्शन और अंतस् बिल्लौरे प्रोडक्शन्स द्वारा पौधारोपण का कार्यक्रम महालक्ष्मी नगर के एमआर 4 क्षेत्र के महालक्ष्मी नगर गार्डन में किया गया इसमें विधायक श्री महेंद्र हार्डिया जी और पार्षद श्री संजय कटारिया जी को भी आमंत्रित किया गया उन्होंने संबोधित करने के बाद वहां पर पौधारोपण भी किया रेकी एंड एस्ट्रोलॉजी प्रिडिक्शंस से जुड़े रेकी हीलिंग करने वाले सभी हीलर्स और अन्य सभी ने भी पौधारोपण किया। उनके नाम इस प्रकार हैं सर्वश्री संजीव बोरेल्ला अजय गुर्जर संदीप जैन भावेश वोरा जयंती कुमावत वैशाली जैन रिमी जैन कनिका निगोती अंकिता लालवानी प्राची जैन प्रीति मिश्रा आशा बिल्लौरे डॉ ओमप्रकाश बिल्लौरे दीपा बिल्लौरे कार्तिकेय बिल्लौरे आदि ने वृक्षारोपण किया इस कार्यक्रम में 150 पौधे लगाए गए और रेकी हीलर्स टीम मेंबर्स और रहवासियों द्वारा पौधारोपण किया गया इसके बाद रेकी हीलर्स द्वारा रेकी एंड एस्ट्रोलॉजी प्रिडिक्शंस की वेबसाइट पर के सेंटर पर रेकी सर्कल द्वारा रेकी डिस्टेंस हीलिंग का कार्यक्रम भी किया गया.


MR 4 महालक्ष्मी नगर सेवा समिति इन्दौर के संरक्षक श्री रमेश पाटिल जी, श्री रामेश्वर जी खरे जी, श्री राजेन्द्र जैन साहब  अध्यक्ष श्री निर्भय सिंग जी यदुवन्शी उपाध्यक्ष, श्री अनिल  भाटिया जी, सचिव अमित त्रिवेदी जी, सह सचिव अशोक गुप्ता, संगठन सचिव श्री मुकेश वर्मा जी श्री नीलेश शाह एवं श्री पगारे जी, श्री आनंद  शर्मा जी। इस के साथ ही  हेमन्त गीते, श्री गिरीश आचार्य जी आदि इस पौधारोपण कार्यक्रम में उपस्थित थे और रहवासियों ने भी पौधारोपण में भाग लिया

   
   
   
   
   
   
   
   

   
   
   
   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   
   
   

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  музыка онлайн 2000 х русские
Posted by: BobbyThiTy - 07-06-2019, 12:23 AM - Forum: Post Advertisement - No Replies

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Heart पेड़ लगाओ पानी बचाओ
Posted by: admin - 07-01-2019, 07:27 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

पेड़ लगाओ पानी बचाओ

वेबसाइट रेकी एंड एस्ट्रोलोजी प्रिडिक्शंस www.reikiandastrologypredictions.com और अंतस् बिल्लौरे प्रोडक्शन्स द्वारा इंदौर शहर में पौधारोपण किया जाएगा। आप भी अपने क्षेत्र में यदि पौधारोपण करवाना चाहते हैं तो आप संपर्क कर सकते हैं। 5 - 10 - 20 - 50 पौधे। आपके आवेदन अनुसार। पौधारोपण के बाद पौधों का संरक्षण हो सके वहीं हम पौधारोपण करेंगे। संपर्क: अंतस् बिल्लौरे। मोबाइल नं 8109812284। जिन्हें भी आवश्यकता हो उन्हें ये मैसेज फारवर्ड कर दीजिये हम कुछ ही दिनों में वहां पौधारोपण कर देंगे। जो भी व्यक्ति इस कार्य में हमारे साथ सहभागी बनना चाहते हैं उनका स्वागत है।

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Star Water harvesting जल संचयन
Posted by: admin - 07-01-2019, 09:37 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

Water harvesting जल संचयन
    जल है तो कल है।
Promote water harvesting. Government also helping to do it in garden lands and agriculture area.
जल संरक्षण एवं संचयन को बढ़ावा दीजिये। सरकार भी बगीचे और कृषि क्षेत्र में जल संचयन के लिए हर संभव प्रयास और मदद कर रही है।

   
   

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Star व्यास विदुषी साधना जी शर्मा के श्रीमुख से, श्रीमद भागवत कथा का आयोजन पुष्कर में
Posted by: admin - 06-26-2019, 03:13 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

अत्यंत हर्ष के साथ सूचित किया जाता है माँ नर्मदा की मानस पुत्री, व्यास विदुषी साधना जी शर्मा के श्री मुख से, श्रीमद भागवत कथा का आयोजन  पुष्कर राज (राजस्थान) में।
    दिनांक 25 जुलाई 2019 से 31 जुलाई 2019तक आयोजित की जा रहीं है  कथा स्थल श्री अखिल भारतीय महेश्वरी सेवा सदन पुष्कर राजमेंजो भी धर्मप्रमी इस संगीतमय ज्ञान गंगा मे सम्मिलित होना चाहते हैवे सादर आमंत्रित है
                संम्पर्क सूत्र :
  1श्री राजेन्द्र जी शर्मा हरदा मो० न० 9977168762
2 श्री एस. एन. पाराशर जी (इटारसी) मो० न० 9425043898
3 श्री अशोक जी उपरित (इन्दौर)मो० न० 9893132435
4. श्री उमेश जी शंकरगाये उज्जैन मो० न० 9301945925
  5. श्री कान्तू भैय्या पारे (रहटगावं) मो० न० 9977845959
6 श्रीमती सोनम पंकज पगारे (इन्दाैर) मो० न० 9575930671
7 श्रीमती शीला प्रमोद पाराशर  (हो०बाद)
मो० न० 990749308
8 श्रीमती ऊर्मिला जी  राजवैद्य (भोपाल ) मो० न० 9425025413
9 श्री अमित जी पाराशर
मो० न० 9977654231

      आवास एंव भोजन इत्यादि हेतु प्रति व्यक्ति
₹  3500 /नान एसी रूम
  एंव रु 5100/ए सी रुम
    आने जाने का खर्च अलग से

  नोटः- ट्रेन सुविधा
1 भोपाल से अज़मेर ट्रेन न०19712 शाम 4.55 
  दिनांक 24 जुलाई
2 इन्दौर से अजमेर ट्रेन न०
59307 शाम 6बजे  24 जुलाई ?????
            वापसी हेतु
31 जुलाई को 1अजमेर से भोपाल एंव इन्दौर ट्रेन न० 19711
2 अजमेर से भोपाल इटारसी एंव खण्डवा हेतु
  ट्रेन न०12719
विशेष नोट : अजमेर  स्टेशन से पुष्कर आने जाने के लिये प्राइवेट बस की सुविधा की गई है 
   नर्मदे हर
   

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Thumbs Up India vs Afghanistan
Posted by: admin - 06-22-2019, 09:08 PM - Forum: Cricket predictions - Replies (12)

India vs Afghanistan

Don't lose hope, India may win this match.
उम्मीद मत खोइए, भारत यह मैच जीत सकता है।

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Star योग आसन...स्वास्थ्य साधन
Posted by: admin - 06-21-2019, 10:32 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

योग आसन...स्वास्थ्य साधन
अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं
Reiki and Astrology Predictions › Menu › Share your stuff › योग आसन...स्वास्थ्य साधन

सुन लो सुन लो काम की बात
योगासन के बहुत हैं लाभ।

तन मन रख्खे निर्विकार
करें रोज सूर्य नमस्कार

अंतर्मन मे हो अनुशासन
जब करते हम पद्मासन

भोजन का हो अच्छा पाचन
करें नित्य हम वज्रासन

करें फेफड़े अच्छा काम
रोज करेंगे प्राणायाम

ओज से मस्तक दमकाती
बड़े काम की कपालभाति
स्नायुओं मेरहे तरी
जब हो गुंजित भ्रामरी

लंबाई का पाता धन
नित्य करें जो ताड़ासन

रीढ़ मे आए लचीलापन
करलो भैय्या हल आसन

सर्व अंग पुष्टि का साधन
होता है सर्वांगासन

जोड़ों का अच्छा संचालन
करते जब हम गरुड़ासन

उदर अंगो का हो नियमन
जब हम करें मयूरासन

याद दाश्त होती अनुपम
जो नित करता शीर्षासन

कमर लचीली का कारण
बनता है त्रिकोणासन

चौड़ी छाती का साधन
रोज लगाओ दण्डासन

मन का होता शुद्धि करण
जब लगता है सिद्धासन

हो थकान का पूर्ण शमन
अंत मे कर लो शवासन

और अंत मे रख लो याद
यम नियम बिन बने न बात

करें योग का नित्य प्रयोग
दूर रहेंगे सारे रोग
आदि व्याधि सेन होंगें त्रस्त
तन मन होगा पूर्ण स्वस्थ  

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं

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Star कैलाश पर्वत एक अनसुलझा रहस्य, कैलाश पर्वत के इन 8 रहस्यों से नासा भी हो चुका है हैरान
Posted by: admin - 06-16-2019, 10:09 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

कैलाश पर्वत एक अनसुलझा रहस्य, कैलाश पर्वत के इन 8 रहस्यों से नासा भी हो चुका है हैरान!!

कैलाश पर्वत के रहस्य - कैलाश पर्वत, यह एतिहासिक पर्वत को आज तक हम सनातनी भारतीय लोग *शिव का निवास स्थान* मानते हैं। शास्त्रों में भी यही लिखा है कि कैलाश पर शिव का वास है।

किन्तु वहीँ नासा जैसी वैज्ञानिक संस्था के लिए कैलाश एक रहस्यमयी जगह है। नासा के साथ-साथ कई रूसी वैज्ञानिकों ने कैलाश पर्वत पर अपनी रिपोर्ट पेश की है।

उन सभी का मानना है कि कैलाश वाकई कई अलौकिक शक्तियों का केंद्र है। विज्ञान यह दावा तो नहीं करता है कि यहाँ शिव देखे गये हैं किन्तु यह सभी मानते हैं कि, यहाँ पर कई पवित्र शक्तियां जरुर काम कर रही हैं। तो आइये आज हम आपको कैलाश पर्वत से जुड़े हुए कुछ रहस्य बताते हैं।
*कैलाश पर्वत के रहस्य*

*रहस्य 1*– रूस के वैज्ञानिको का ऐसा मानना है कि, कैलाश पर्वत आकाश और धरती के साथ इस तरह से केंद्र में है जहाँ पर *चारों दिशाएँ* मिल रही हैं। वहीँ रूसी विज्ञान का दावा है कि यह स्थान एक्सिस मुंडी है और इसी स्थान पर व्यक्ति अलौकिक शक्तियों से आसानी से संपर्क कर सकता है। धरती पर यह स्थान सबसे अधिक *शक्तिशाली स्थान* है।

*रहस्य 2* - दावा किया जाता है कि आज तक कोई भी व्यक्ति *कैलाश पर्वत के शिखर पर नहीं पहुच पाया है।* वहीँ 11 सदी में तिब्बत के योगी मिलारेपी के यहाँ जाने का दावा किया जाता रहा है। किन्तु इस योगी के पास इस बात के सबूत नहीं थे या फिर वह खुद सबूत पेश नहीं करना चाहता था। इसलिए यह भी एक रहस्य है कि इन्होनें यहाँ कदम रखा या फिर वह कुछ बताना नहीं चाहते थे।

*रहस्य 3* - कैलाश पर्वत पर दो झीलें हैं और यह दोनों ही रहस्य बनी हुई हैं। आज तक इनका भी रहस्य कोई खोज नहीं पाया है। *एक झील साफ़ और पवित्र जल की है।* इसका आकार *सूर्य के समान* बताया गया है। वहीँ *दूसरी झील अपवित्र और गंदे जल की है* तो इसका आकार *चन्द्रमा* के समान है। ऐसा कैसे हुआ है यह भी कोई नहीं जानता है।

*रहस्य 4* - यहाँ के आध्यात्मिक और शास्त्रों के अनुसार रहस्य की बात करें तो कैलाश पर्वत पे कोई भी व्यक्ति *शरीर के साथ उच्चतम शिखर पर नहीं पहुच सकता है।* ऐसा बताया गया है कि, यहाँ पर *देवताओं का आज भी निवास हैं।* पवित्र संतों की आत्माओं को ही यहाँ निवास करने का अधिकार दिया गया है।

*रहस्य 5* - कैलाश पर्वत का एक रहस्य यह भी बताया जाता है कि जब कैलाश पर *बर्फ पिघलती* है तो यहाँ से *डमरू* जैसी आवाज आती है। इसे कई लोगों ने सुना है। लेकिन इस रहस्य को आज तक कोई हल नहीं कर पाया है।

*रहस्य 6* – कई बार कैलाश पर्वत पर *सात तरह के प्रकाश* आसमान में देखें गयें है। इसपर नासा का ऐसा मानना है कि यहाँ चुम्बकीय बल है और आसमान से मिलकर वह कई बार इस तरह की चीजों का निर्माण करता है।

*रहस्य 7* - कैलाश पर्वत दुनिया के *4 मुख्य धर्म का केंद्र* माना गया है। यहाँ कई साधू और संत अपने देवों से टेलीपेथी से संपर्क करते हैं। असल में यह आध्यात्मिक संपर्क होता है।

*रहस्य 8* - कैलाश पर्वत का सबसे बड़ा रहस्य खुद विज्ञान ने साबित किया है कि यहाँ पर *प्रकाश और ध्वनी* के बीच इस तरह का  समागम होता है कि यहाँ से *ॐ* की आवाजें सुनाई देती हैं।

अब आप समझ गये होंगे कि, कैलाश पर्वत क्यों आज भी इतना धार्मिक और वैज्ञानिक महत्त्व रखे हुए है। हर साल यहाँ दुनियाभर से कई लोग अनुभव लेने आते हैं, और सनातन धर्म के लिए कैलाश सबसे बड़ा *आदिकालीन धार्मिक स्थल* भी बना हुआ है।

      *? ॐ नमः शिवाय ?*

_जनजागृति हेतु लेख को पढ़ने के बाद साझा अवश्य करें...!!_
*जय श्री राम ⛳⛳*
*वंदेमातरम् ⛳⛳*
                ⚜?⛳?⚜

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Star हिंदू धर्म और संस्कृति
Posted by: admin - 06-14-2019, 09:14 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं -
1. युधिष्ठिर    2. भीम    3. अर्जुन
4. नकुल।      5. सहदेव

( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है )

यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन
की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी ।

वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र…..
कौरव कहलाए जिनके नाम हैं -
1. दुर्योधन      2. दुःशासन  3. दुःसह
4. दुःशल        5. जलसंघ    6. सम
7. सह            8. विंद        9. अनुविंद
10. दुर्धर्ष      11. सुबाहु।  12. दुषप्रधर्षण
13. दुर्मर्षण।  14. दुर्मुख    15. दुष्कर्ण
16. विकर्ण    17. शल      18. सत्वान
19. सुलोचन  20. चित्र      21. उपचित्र
22. चित्राक्ष    23. चारुचित्र 24. शरासन
25. दुर्मद।      26. दुर्विगाह  27. विवित्सु
28. विकटानन्द 29. ऊर्णनाभ 30. सुनाभ
31. नन्द।        32. उपनन्द  33. चित्रबाण
34. चित्रवर्मा    35. सुवर्मा    36. दुर्विमोचन
37. अयोबाहु  38. महाबाहु  39. चित्रांग 40. चित्रकुण्डल41. भीमवेग  42. भीमबल
43. बालाकि    44. बलवर्धन 45. उग्रायुध
46. सुषेण      47. कुण्डधर  48. महोदर
49. चित्रायुध  50. निषंगी    51. पाशी
52. वृन्दारक  53. दृढ़वर्मा    54. दृढ़क्षत्र
55. सोमकीर्ति  56. अनूदर    57. दढ़संघ 58. जरासंघ  59. सत्यसंघ 60. सद्सुवाक
61. उग्रश्रवा  62. उग्रसेन    63. सेनानी
64. दुष्पराजय        65. अपराजित
66. कुण्डशायी        67. विशालाक्ष
68. दुराधर  69. दृढ़हस्त    70. सुहस्त
71. वातवेग  72. सुवर्च    73. आदित्यकेतु
74. बह्वाशी  75. नागदत्त 76. उग्रशायी
77. कवचि    78. क्रथन। 79. कुण्डी
80. भीमविक्र 81. धनुर्धर  82. वीरबाहु
83. अलोलुप  84. अभय  85. दृढ़कर्मा
86. दृढ़रथाश्रय    87. अनाधृष्य
88. कुण्डभेदी।    89. विरवि
90. चित्रकुण्डल    91. प्रधम
92. अमाप्रमाथि    93. दीर्घरोमा
94. सुवीर्यवान    95. दीर्घबाहु
96. सुजात।        97. कनकध्वज
98. कुण्डाशी        99. विरज
100. युयुत्सु

( इन 100 भाइयों के अलावा कौरवों की एक बहनभी थी… जिसका नाम""दुशाला""था,
जिसका विवाह"जयद्रथ"सेहुआ था )

"श्री मद्-भगवत गीता"के बारे में-

ॐ . किसको किसने सुनाई?
उ.- श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई।

ॐ . कब सुनाई?
उ.- आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई।

ॐ. भगवान ने किस दिन गीता सुनाई?
उ.- रविवार के दिन।

ॐ. कोनसी तिथि को?
उ.- एकादशी

ॐ. कहा सुनाई?
उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में।

ॐ. कितनी देर में सुनाई?
उ.- लगभग 45 मिनट में

ॐ. क्यू सुनाई?
उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए।

ॐ. कितने अध्याय है?
उ.- कुल 18 अध्याय

ॐ. कितने श्लोक है?
उ.- 700 श्लोक

ॐ. गीता में क्या-क्या बताया गया है?
उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है।

ॐ. गीता को अर्जुन के अलावा
और किन किन लोगो ने सुना?
उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने

ॐ. अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था?
उ.- भगवान सूर्यदेव को

ॐ. गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है?
उ.- उपनिषदों में

ॐ. गीता किस महाग्रंथ का भाग है....?
उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है।

ॐ. गीता का दूसरा नाम क्या है?
उ.- गीतोपनिषद

ॐ. गीता का सार क्या है?
उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना

ॐ. गीता में किसने कितने श्लोक कहे है?
उ.- श्रीकृष्ण जी ने- 574
अर्जुन ने- 85
धृतराष्ट्र ने- 1
संजय ने- 40.

अपनी युवा-पीढ़ी को गीता जी के बारे में जानकारी पहुचाने हेतु इसे ज्यादा से ज्यादा शेअर करे। धन्यवाद

अधूरा ज्ञान खतरना होता है।

33 करोड नहीँ  33 कोटी देवी देवता हैँ हिँदू
धर्म मेँ।

कोटि = प्रकार।
देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते है,

कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता।

हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं...

कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मे :-

12 प्रकार हैँ
आदित्य , धाता, मित, आर्यमा,
शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष,
सविता, तवास्था, और विष्णु...!

8 प्रकार हे :-
वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।

11 प्रकार है :-
रुद्र: ,हर,बहुरुप, त्रयँबक,
अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी,
रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।

एवँ
दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार।

कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी

अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है
तो इस जानकारी को अधिक से अधिक
लोगो तक पहुचाएं। ।

?????????
१ हिन्दु हाेने के नाते जानना ज़रूरी है

This is very good information for all of us ... जय श्रीकृष्ण ...

अब आपकी बारी है कि इस जानकारी को आगे बढ़ाएँ ......

अपनी भारत की संस्कृति
को पहचाने.
ज्यादा से ज्यादा
लोगो तक पहुचाये.
खासकर अपने बच्चो को बताए
क्योकि ये बात उन्हें कोई नहीं बताएगा...

??  दो पक्ष-

कृष्ण पक्ष ,
शुक्ल पक्ष !

??  तीन ऋण -

देव ऋण ,
पितृ ऋण ,
ऋषि ऋण !

??  चार युग -

सतयुग ,
त्रेतायुग ,
द्वापरयुग ,
कलियुग !

??  चार धाम -

द्वारिका ,
बद्रीनाथ ,
जगन्नाथ पुरी ,
रामेश्वरम धाम !

??  चारपीठ -

शारदा पीठ ( द्वारिका )
ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम )
गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) ,
शृंगेरीपीठ !

?? चार वेद-

ऋग्वेद ,
अथर्वेद ,
यजुर्वेद ,
सामवेद !

??  चार आश्रम -

ब्रह्मचर्य ,
गृहस्थ ,
वानप्रस्थ ,
संन्यास !

?? चार अंतःकरण -

मन ,
बुद्धि ,
चित्त ,
अहंकार !

??  पञ्च गव्य -

गाय का घी ,
दूध ,
दही ,
गोमूत्र ,
गोबर !

??  पञ्च देव -

गणेश ,
विष्णु ,
शिव ,
देवी ,
सूर्य !

?? पंच तत्त्व -

पृथ्वी ,
जल ,
अग्नि ,
वायु ,
आकाश !

??  छह दर्शन -

वैशेषिक ,
न्याय ,
सांख्य ,
योग ,
पूर्व मिसांसा ,
दक्षिण मिसांसा !

??  सप्त ऋषि -

विश्वामित्र ,
जमदाग्नि ,
भरद्वाज ,
गौतम ,
अत्री ,
वशिष्ठ और कश्यप!

??  सप्त पुरी -

अयोध्या पुरी ,
मथुरा पुरी ,
माया पुरी ( हरिद्वार ) ,
काशी ,
कांची
( शिन कांची - विष्णु कांची ) ,
अवंतिका और
द्वारिका पुरी !

??  आठ योग -

यम ,
नियम ,
आसन ,
प्राणायाम ,
प्रत्याहार ,
धारणा ,
ध्यान एवं
समािध !

?? आठ लक्ष्मी -

आग्घ ,
विद्या ,
सौभाग्य ,
अमृत ,
काम ,
सत्य ,
भोग ,एवं
योग लक्ष्मी !

?? नव दुर्गा --

शैल पुत्री ,
ब्रह्मचारिणी ,
चंद्रघंटा ,
कुष्मांडा ,
स्कंदमाता ,
कात्यायिनी ,
कालरात्रि ,
महागौरी एवं
सिद्धिदात्री !

??  दस दिशाएं -

पूर्व ,
पश्चिम ,
उत्तर ,
दक्षिण ,
ईशान ,
नैऋत्य ,
वायव्य ,
अग्नि
आकाश एवं
पाताल !

??  मुख्य ११ अवतार -

मत्स्य ,
कच्छप ,
वराह ,
नरसिंह ,
वामन ,
परशुराम ,
श्री राम ,
कृष्ण ,
बलराम ,
बुद्ध ,
एवं कल्कि !

?? बारह मास -

चैत्र ,
वैशाख ,
ज्येष्ठ ,
अषाढ ,
श्रावण ,
भाद्रपद ,
अश्विन ,
कार्तिक ,
मार्गशीर्ष ,
पौष ,
माघ ,
फागुन !

??  बारह राशी -

मेष ,
वृषभ ,
मिथुन ,
कर्क ,
सिंह ,
कन्या ,
तुला ,
वृश्चिक ,
धनु ,
मकर ,
कुंभ ,
मीन!

?? बारह ज्योतिर्लिंग -

सोमनाथ ,
मल्लिकार्जुन ,
महाकाल ,
ओमकारेश्वर ,
बैजनाथ ,
रामेश्वरम ,
विश्वनाथ ,
त्र्यंबकेश्वर ,
केदारनाथ ,
घुष्नेश्वर ,
भीमाशंकर ,
नागेश्वर !

?? पंद्रह तिथियाँ -

प्रतिपदा ,
द्वितीय ,
तृतीय ,
चतुर्थी ,
पंचमी ,
षष्ठी ,
सप्तमी ,
अष्टमी ,
नवमी ,
दशमी ,
एकादशी ,
द्वादशी ,
त्रयोदशी ,
चतुर्दशी ,
पूर्णिमा ,
अमावास्या !

?? स्मृतियां -

मनु ,
विष्णु ,
अत्री ,
हारीत ,
याज्ञवल्क्य ,
उशना ,
अंगीरा ,
यम ,
आपस्तम्ब ,
सर्वत ,
कात्यायन ,
ब्रहस्पति ,
पराशर ,
व्यास ,
शांख्य ,
लिखित ,
दक्ष ,
शातातप ,
वशिष्ठ !

******************* ***

इस पोस्ट को अधिकाधिक शेयर करें जिससे सबको हमारी संस्कृति का ज्ञान हो।

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Thumbs Up ।। पूजा से जुड़ी हुईं अति महत्वपूर्ण बातें।।
Posted by: admin - 06-14-2019, 08:20 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

।। पूजा से जुड़ी हुईं अति महत्वपूर्ण बातें।।

★ एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए।

★ सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए।

★ बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छूकर प्रणाम करें।

★ जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं। इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं।

★ जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए।

★ जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए।

★ संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सन्ध्या के समय तुलसी तोड़ना निषिद्ध हैं।

★ दीपक से दीपक को नही जलाना चाहिए।

★ यज्ञ, श्राद्ध आदि में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए, सफेद तिल का नहीं।

★ शनिवार को पीपल पर जल चढ़ाना चाहिए। पीपल की सात परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा करना श्रेष्ठ है,

★ कूमड़ा-मतीरा-नारियल आदि को स्त्रियां नहीं तोड़े या चाकू आदि से नहीं काटें। यह उत्तम नही माना गया हैं।

★ भोजन प्रसाद को लाघंना नहीं चाहिए।

★  देव प्रतिमा देखकर अवश्य प्रणाम करें।

★  किसी को भी कोई वस्तु या दान-दक्षिणा दाहिने हाथ से देना चाहिए।

★  एकादशी, अमावस्या, कृृष्ण चतुर्दशी, पूर्णिमा व्रत तथा श्राद्ध के दिन क्षौर-कर्म (दाढ़ी) नहीं बनाना चाहिए ।

★ बिना यज्ञोपवित या शिखा बंधन के जो भी कार्य, कर्म किया जाता है, वह निष्फल हो जाता हैं।

★ शंकर जी को बिल्वपत्र, विष्णु जी को तुलसी, गणेश जी को दूर्वा, लक्ष्मी जी को कमल प्रिय हैं।

★ शंकर जी को शिवरात्रि के सिवाय कुंुकुम नहीं चढ़ती।

★ शिवजी को कुंद, विष्णु जी को धतूरा, देवी जी  को आक तथा मदार और सूर्य भगवानको तगर के फूल नहीं चढ़ावे।

★ अक्षत देवताओं को तीन बार तथा पितरों को एक बार धोकर चढ़ावंे।

★ नये बिल्व पत्र नहीं मिले तो चढ़ाये हुए बिल्व पत्र धोकर फिर चढ़ाए जा सकते हैं।

★ विष्णु भगवान को चावल गणेश जी  को तुलसी, दुर्गा जी और सूर्य नारायण  को बिल्व पत्र नहीं चढ़ावें।

★ पत्र-पुष्प-फल का मुख नीचे करके नहीं चढ़ावें, जैसे उत्पन्न होते हों वैसे ही चढ़ावें।

★ किंतु बिल्वपत्र उलटा करके डंडी तोड़कर शंकर पर चढ़ावें।

★पान की डंडी का अग्रभाग तोड़कर चढ़ावें।

★ सड़ा हुआ पान या पुष्प नहीं चढ़ावे।

★ गणेश को तुलसी भाद्र शुक्ल चतुर्थी को चढ़ती हैं।

★ पांच रात्रि तक कमल का फूल बासी नहीं होता है।

★ दस रात्रि तक तुलसी पत्र बासी नहीं होते हैं।

★ सभी धार्मिक कार्यो में पत्नी को दाहिने भाग में बिठाकर धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न करनी चाहिए।

★ पूजन करनेवाला ललाट पर तिलक लगाकर ही पूजा करें।

★ पूर्वाभिमुख बैठकर अपने बांयी ओर घंटा, धूप तथा दाहिनी ओर शंख, जलपात्र एवं पूजन सामग्री रखें।

★ घी का दीपक अपने बांयी ओर तथा देवता को दाहिने ओर रखें एवं चांवल पर दीपक रखकर प्रज्वलित करें।

आप सभी को निवेदन है अगर हो सके तो और लोगों को भी आप इन महत्वपूर्ण बातों से अवगत करा सकते हैं।                               जय श्री कृष्णा

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  Reiki healing courses
Posted by: admin - 06-13-2019, 12:24 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

Reiki healing courses:

   
   
   
   
   

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Thumbs Up 100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए
Posted by: admin - 06-10-2019, 10:43 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए website: Reiki and Astrology Predictions > share your stuff
www.reikiandastrologypredictions.com
1. योग, भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है।
2. लकवा - सोडियम की कमी के कारण होता है।
3. हाई बी पी में -  स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे।
4. लो बी पी - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें।
5. कूबड़ निकलना- फास्फोरस की कमी।
6. कफ - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है। गुड व शहद खाएं 
7. दमा, अस्थमा - सल्फर की कमी।
8. सिजेरियन आपरेशन - आयरन, कैल्शियम की कमी।
9. सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें
10. अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें
11. जम्भाई - शरीर में आक्सीजन की कमी।
12. जुकाम - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें।
13. ताम्बे का पानी - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें।
14.  किडनी - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये।
15. गिलास एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्शन अधिक होता है। गिलास अंग्रेजो (पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें,  लोटे का कम सर्फेसटेन्शन होता है।
16. अस्थमा, मधुमेह, कैंसर से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं।
17. वास्तु के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा।
18. परम्परायें वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं।
19. पथरी - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है। 
20. RO का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता। कुएँ का पानी पियें। बारिस का पानी सबसे अच्छा, पानी की सफाई के लिए सहिजन की फली सबसे बेहतर है।
21. सोकर उठते समय हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का स्वर चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें।
22. पेट के बल सोने से हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है। 
23.  भोजन के लिए पूर्व दिशा, पढाई के लिए उत्तर दिशा बेहतर है।
24.  HDL बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा।
25. गैस की समस्या होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें।
26.  चीनी के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है, यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से पित्त बढ़ता है। 
27.  शुक्रोज हजम नहीं होता है फ्रेक्टोज हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है।
28.  वात के असर में नींद कम आती है।
29.  कफ के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है।
30.  कफ के असर में पढाई कम होती है।
31.  पित्त के असर में पढाई अधिक होती है।
33.  आँखों के रोग - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा, आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है।
34.  शाम को वात - नाशक चीजें खानी चाहिए।
35.  प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए।
36. सोते समय रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है।
37. व्यायाम - वात रोगियों के लिए मालिश के बाद व्यायाम, पित्त वालों को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए। कफ के लोगों को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए।
38. भारत की जलवायु वात प्रकृति की है, दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए।
39. जो माताएं घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं।
40.  निद्रा से पित्त शांत होता है, मालिश से वायु शांति होती है , उल्टी से कफ शांत होता है तथा उपवास (लंघन) से बुखार शांत होता है।
41.  भारी वस्तुये शरीर का रक्तदाब बढाती है, क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है।
42.  दुनियां के महान वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों. 
43.  माँस खाने वालों के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं।
44.  तेल हमेशा गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का, दूध हमेशा पतला पीना चाहिए।
45. छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है।
46. कोलेस्ट्रोल की बढ़ी हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है। ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है ।
47.  मिर्गी दौरे में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए। 
48.  सिरदर्द में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें।
49. भोजन के पहले मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है। 
50. भोजन के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें। 
51. अवसाद में आयरन, कैल्शियम , फास्फोरस की कमी हो जाती है। फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है 
52.  पीले केले में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है। हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है। हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है।
53.  छोटे केले में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है।
54. रसौली की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं।
55.  हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है।
56. एंटी टिटनेस के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे।
57. ऐसी चोट जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें। 
58. मोटे लोगों में कैल्शियम की कमी होती है अतः त्रिफला दें। त्रिकूट (सोंठ+कालीमिर्च+ मघा पीपली) भी दे सकते हैं।
59. अस्थमा में नारियल दें। नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है। दालचीनी + गुड + नारियल दें।
60. चूना बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है। 
61.  दूध का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है।
62.  गाय की घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है।
63.  जिस भोजन में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए 
64.  गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें।
65.  गाय के दूध में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है।
66.  मासिक के दौरान वायु बढ़ जाता है, 3-4 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे  गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है। दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें।
67. रात में आलू खाने से वजन बढ़ता है।
68. भोजन के बाद बज्रासन में बैठने से वात नियंत्रित होता है।
69.  भोजन के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए। बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगा।
70.  अजवाईन अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है 
71.  अगर पेट में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें 
72.  कब्ज होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए। 
73.  रास्ता चलने, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए। 
74.  जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है।
75.  बिना कैल्शियम की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है।
76.  स्वस्थ्य व्यक्ति सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है।
77.  भोजन करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है।
78.  सुबह के नाश्ते में फल , *दोपहर को दही* व *रात्रि को दूध* का सेवन करना चाहिए। 
79.  रात्रि को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे - दाल , पनीर , राजमा , लोबिया आदि। 
80.  शौच और भोजन के समय मुंह बंद रखें , भोजन के समय टी वी ना देखें। 
81.  मासिक चक्र के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान , व आग से दूर रहना चाहिए। 
82.  जो बीमारी जितनी देर से आती है, वह उतनी देर से जाती भी है।
83.  जो बीमारी अंदर से आती है, उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए।
84.  एलोपैथी ने एक ही चीज दी है, दर्द से राहत। आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी, लीवर, आतें, हृदय ख़राब हो रहे हैं। एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है। 
85. खाने की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए, ब्लड-प्रेशर बढ़ता है। 
86 . रंगों द्वारा चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें , पहले जामुनी , फिर नीला ..... अंत में लाल रंग। 
87 . छोटे बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए , क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है, स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए 
88. जो सूर्य निकलने के बाद उठते हैं, उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है, क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है। 
89. बिना शरीर की गंदगी निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है, मल-मूत्र से 5%, कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने लगभग 70 % शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं। 
90. चिंता, क्रोध, ईर्ष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज, बबासीर, अजीर्ण, अपच, रक्तचाप, थायरायड की समस्या उतपन्न होती है।
91.  गर्मियों में बेल, गुलकंद, तरबूजा, खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली, सोंठ का प्रयोग करें।
92.  प्रसव के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है। बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती  है।
93. रात को सोते समय सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा 
94.  दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं, हमें उपयोग करना आना चाहिए।
95. जो अपने दुखों को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है, वही मोक्ष का अधिकारी है। 
96. सोने से आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है, लकवा, हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है। 
97. स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है। 
98 . तेज धूप में चलने के बाद, शारीरिक श्रम करने के बाद, शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है।  
99. त्रिफला अमृत है जिससे वात, पित्त, कफ तीनो शांत होते हैं । इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना।  देशी गाय का घी, गौ-मूत्र भी त्रिदोष नाशक है।
100. इस विश्व की सबसे मँहगी दवा। लार है, जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है, इसे ना थूके।

जनजागृति हेतु लेख को पढ़ने के बाद साझा अवश्य करें।☘☘

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Star Press conference about reiki healing for root cause
Posted by: admin - 06-04-2019, 12:03 PM - Forum: Free Reiki Healing - No Replies

Press conference with different channels at reiki and astrology predictions Indore. Main topic of discussion is how reiki help to know, heal and cure the root cause of problem.

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Star वट सावित्री व्रत
Posted by: admin - 06-03-2019, 08:49 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

वट सावित्री व्रत
पति की दीर्घायु हेतु वट वृक्ष की पूजा
********************
 पूरे छत्तीसगढ़ में इस दिन सुहागिनें 16 श्रृंगार करके बरगद के पेड़ की पूजा कर फेरें लगाती हैं ताकि उनके पति दीर्घायु हों । प्यार, श्रद्धा और समर्पण का यह भाव इस देश में सच्चे और पवित्र प्रेम की कहानी कहता है।
वट वृक्ष बरगद को जल चढ़ाना केवल एक प्रथा नहीं बल्कि सुख शांति तरक्की का माध्यम है...
आपको बता दें कि ऐसी मान्यता है कि इसी दिन देवी सावित्री ने यमराज के फंदे से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी। सनातन परंपरा में वट सावित्री पूजा स्त्रियों का महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे करने से हमेशा अखंड सौभाग्यवती रहने का आशीष प्राप्त होता है।
कथाओं में उल्लेख है कि जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे तब सावित्री भी यमराज के पीछे-पीछे चलने लगी। यमराज ने सावित्री को ऐसा करने से रोकने के लिए तीन वरदान दिये। एक वरदान में सावित्री ने मांगा कि वह सौ पुत्रों की माता बने। यमराज ने ऐसा ही होगा कह दिया। इसके बाद सावित्री ने यमराज से कहा कि मैं पतिव्रता स्त्री हूं और बिना पति के संतान कैसे संभव है।
सावित्री की बात सुनकर यमराज को अपनी भूल समझ में आ गयी कि,वह गलती से सत्यवान के प्राण वापस करने का वरदान दे चुके हैं।
जब सावित्री पति के प्राण को यमराज के फंदे से छुड़ाने के लिए यमराज के पीछे जा रही थी उस समय वट वृक्ष ने सत्यवान के शव की देख-रेख की थी। पति के प्राण लेकर वापस लौटने पर सावित्री ने वट वृक्ष का आभार व्यक्त करने के लिए उसकी परिक्रमा की इसलिए वट सावित्री व्रत में वृक्ष की परिक्रमा का भी नियम है।
सुहागन स्त्रियां वट सावित्री व्रत के दिन सोलह श्रृंगार करके सिंदूर, रोली, फूल, अक्षत, चना, आम फल और मिठाई से वट वृक्ष की पूजा कर सावित्री, सत्यवान और यमराज की कथा श्रवण कर पूजा करें। ब्राह्मण देव को दक्षिणा आदि सामग्री दान करें।
वट वृक्ष की जड़ को दूध और जल से सींचें। इसके बाद कच्चे सूत को हल्दी में रंगकर वट वृक्ष में लपेटते हुए कम से कम तीन बार, 5 बार, 8 बार, 11 बार, 21 बार, 51, 108 जितनी परिक्रमा कर सके करें। पूजा के बाद वटवृक्ष से सावित्री और यमराज से पति की लंबी आयु एवं संतान हेतु प्रार्थना करें।
बरगद की पूजा जरूर करें.....
************
ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या तिथि के दिन वटवृक्ष की पूजा का विधान है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन
वटवृक्ष की पूजा से सौभाग्य एवं स्थायी धन और 
सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
बरगद के पेड़ को वट का वृक्ष कहा जाता है।
पुराणों में यह स्पष्ट लिखा गया है कि वटवृक्ष की
जड़ों में ब्रह्माजी, तने में विष्णुजी और डालियों
एवं पत्तों में शिव का वास है। इसके नीचे बैठकर 
पूजन, व्रत कथा कहने और सुनने से मनोकामना पूरी होती है।
हिन्दू धर्मानुसार 5 वटवृक्षों का महत्व अधिक है 
*********************
अक्षयवट, पंचवट, वंशीवट, गयावट और सिद्धवट
इनकी प्राचीनता के बारे में कोई नहीं जानता। संसार में उक्त 5 वटों को पवित्र वट की श्रेणी में रखा गया है।
प्रयाग में अक्षयवट, 
नासिक में पंचवट, 
वृंदावन में वंशीवट, 
गया में गयावट 
और 
उज्जैन में पवित्र सिद्धवट है। 
जहाँ प्रत्येक चौदस अमावस्या
के पहले वाली तिथि को पित्रो को
दूध अर्पित किया जाता है।
मानस से-
तहं पुनि संभु समुझिपन आसन। 
बैठे वटतर, करि कमलासन।।
भावार्थ- अर्थात कई सगुण साधकों, ऋषियों यहां तक 
कि देवताओं ने भी वटवृक्ष में भगवान विष्णु की उपस्थिति के दर्शन किए हैं।
 ?
वट और पीपल के वृक्ष पहले बहुत लगाये जाते थे, ये धर्म से जुड़ा हुआ वृक्ष है, लेकिन आज वर्तमान के लिए यह वृक्ष अति आवश्यक है। क्या आप जानते हैं कि वर्तमान में पड़ रहे सूखे, अत्यधिक गर्मी और प्रदूषण की वजह क्या है ?
 ?बरगद और पीपल के वृक्षों की कमी होना।
.विकास के नाम पर इस प्रकार के बड़े पेड़ों को काटना, इनके नए पेड़ नहीं लगाना, इन पेड़ों के संरक्षण, संवर्धन में कमी।।
आप को लगेगा अजीब बकवास है किन्तु यही अटल सत्य है.. .।
पीपल, बरगद और नीम के पेडों को सरकारी स्तर पर लगाना बन्द कर दिया गया है।
पीपल कार्बन डाई ऑक्साइड को 100% सोख लेता है, बरगद़ 80% और नीम 75 %
हमने इन पेड़ों से दूरी बना लिया तथा इसके बदले यूकेलिप्टस को लगाना शुरू कर दिया जो जमीन को जल विहीन कर देता है।
.
अब जब वायुमण्डल में रिफ्रेशर ही नही रहेगा तो गर्मी तो बढ़ेगी ही और जब गर्मी बढ़ेगी तो जल भाप बनकर उड़ेगा ही ।
हर 500 मीटर की दूरी पर एक बरगद का, पीपल का पेड़ लगाये तो आने वाले कुछ साल भर बाद प्रदूषण मुक्त हिन्दुस्तान होगा।
वैसे आपको एक और जानकारी दे दी जाए, बरगद और पीपल के पत्ते का फलक अधिक और डंठल पतला होता है जिसकी वजह से शांत मौसम में भी पत्ते हिलते रहते हैं और स्वच्छ ऑक्सीजन देते रहते हैं। वैसे भी बरगद और पीपल को वृक्षों का राजा कहते है।
इसकी वंदना में एक श्लोक देखिए-
मूलम् ब्रह्मा, त्वचा विष्णु,सखा शंकरमेवच।
पत्रे-पत्रेका सर्वदेवानाम,वृक्षराज नमस्तुते।
भावार्थ तो समझ ही गए होंगे।
अब करने योग्य कार्य
***************
इन जीवनदायी पेड़ों को ज्यादा से ज्यादा लगायें तथा यूकेलिप्टस पर बैन लगाया जाये इसके साथ नीम और आम के पौधे भी लगाएं । हर शहरों में ऐसा नियम बनाया जाये की हर घर के आसपास पेड़ जरूर लगाना है, जैसे वाटर हार्वेस्टिंग को जरूरी नियम बनाया गया है वैसे ही हर घर में वृक्ष का नियम भी होना चाहिए।
जिसके घर में ये बड़े पेड़ लगाने की जग़ह न हो वह तुलसी जी का पौधा जरूर लगाये*
आइये हम सब मिलकर अपने "हिंदुस्तान" को प्राकृतिक आपदाओं से बचायें, सूखे से बचायें, अत्यधिक गर्मी से बचायें।।
प्रतिवर्ष एक फलदार पेड़ जो अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुसार जरूर लगावे व विलुप्त होती प्रजातियां जंगली फलो की बचावे।
 ✍ ☘ ?

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Thumbs Up ॐ (OM) उच्चारण के 11 शारीरिक लाभ
Posted by: admin - 05-30-2019, 03:31 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

ॐ (OM)  उच्चारण के 11 शारीरिक लाभ :
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ॐ : ओउम् तीन अक्षरों से बना है।
अ उ म् ।
"अ" का अर्थ है उत्पन्न होना,
"उ" का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास,
"म" का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना।
ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है।
ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है।
जानीए
ॐ कैसे है स्वास्थ्यवर्द्धक और अपनाएं आरोग्य के लिए ॐ के उच्चारण का मार्ग...

● *उच्चारण की विधि*

प्रातः उठकर पवित्र होकर ओंकार ध्वनि का उच्चारण करें। ॐ का उच्चारण पद्मासन, अर्धपद्मासन, सुखासन, वज्रासन में बैठकर कर सकते हैं। इसका उच्चारण 5, 7, 10, 21 बार अपने समयानुसार कर सकते हैं। ॐ जोर से बोल सकते हैं, धीरे-धीरे बोल सकते हैं। ॐ जप माला से भी कर सकते हैं।

01)  *ॐ और थायराॅयडः*

ॐ का उच्चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

*02)  *ॐ और घबराहटः-*
अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं।

*03) *..ॐ और तनावः-*
यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है। 

*04)  *ॐ और खून का प्रवाहः-*
यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।

*5)  ॐ और पाचनः-*

ॐ के उच्चारण से पाचन शक्ति तेज़ होती है।

*06)  ॐ लाए स्फूर्तिः-*
इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।

*07)  ॐ और थकान:-*
थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।

*08) .ॐ और नींदः-*
नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है। रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चिंत नींद आएगी।

*09) .ॐ और फेफड़े:-*
कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती आती है।

*10)  ॐ और रीढ़ की हड्डी:-*
ॐ के पहले शब्द का उच्चारण करने से कंपन पैदा होती है। इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।

*11)  ॐ दूर करे तनावः-*
ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है।

आशा है आप अब कुछ समय जरुर ॐ का उच्चारण करेंगे । साथ ही साथ इसे उन लोगों तक भी जरूर पहुंचायेगे जिनकी आपको फिक्र है ।
अपना ख्याल रखिये, खुश रहें ।

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Thumbs Up भाजपा के लिए नया मंत्रिमंडल
Posted by: admin - 05-29-2019, 11:04 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

भाजपा के लिए नया मंत्रिमंडल

 खेल मंत्री- गौतम गंभीर

 विदेश मंत्री- स्मृति ईरानी

 वित्त मंत्री: जयंत सिन्हा

 रक्षा मंत्री: राजीव प्रताप रूडी

 गृह मंत्री: अमित शाह

 वाणिज्य मंत्री: वरुण गांधी

 रेल मंत्री: पीयूष गोयल

 कृषि मंत्री: राजनाथ सिंह

 मानव संसाधन मंत्री: श्रीमती निर्मला सीतारमन

 परिवहन मंत्री: नीतीश गडकरी

 उद्योग मंत्री: अरविंद सावंत (एसएस)

 संसद मंत्री: शाहनवाज़ हुसैन

 अल्पसंख्यक का मामला: मुख्तार अब्बास नकवी

 नागरिक उड्डयन: पवन वर्मा (JDU)

 सूचना प्रसारण: बाबुल सुप्रियो

 पेट्रोलियम मंत्री: किरण रिजिजू

 ऊर्जा मंत्री: डॉ। अरविंद

 परिवार नियोजन मंत्री: अनंतकुमार हेगड़े

 ग्रामीण विकास: शिवराज सिंह चौहान

 महिला सशक्तिकरण: मिनाक्षी लेखी

 शहरी विकास: गोपाल शेट्टी

 कानून मंत्री: रविशंकर प्रसाद

 खाद्य प्रसंस्करण मंत्री: चिराग पासवान (एलपी)

 पर्यटन मंत्री: अनुराग ठाकुर

 मेक इन इंडिया मंत्री: धर्मेंद्र प्रधान

 स्वास्थ्य: जे पी नड्डा

 कोयला और खनिज: गिरिराज सिंह

 स्किल इंडिया: जज्यवर्धन राठौर

 पर्यावरण: सदानंद गावड़ा

 विज्ञान और प्रौद्योगिकी: हरिप्रिया सुरेश

 श्रम मंत्री: अनुप्रिया पटेल (AD)

 पंचायती राज: दुष्यंत सिंह

 कपड़ा मंत्री: मिस सरोज पांडे

 उपभोक्ता मामले: हरकीरत कौर बादल

 नमामि गंगे: रीता बहुगुणा जोशी

 रासायनिक मंत्री: डॉ। हर्षवर्धन

 नया पोर्टफोलियो: रोजगार सृजन मंत्री:: राम माधव

 भाजपा के नए अध्यक्ष: भूपेंद्र यादव

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Heart Offers ऑफर्स
Posted by: admin - 05-08-2019, 12:58 PM - Forum: Offers ऑफर्स - No Replies

Offers ऑफर्स

Reiki healing special discount for students 10% on showing their ID cards.
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Heart Reiki circle
Posted by: admin - 05-06-2019, 08:49 AM - Forum: Free Reiki Healing - No Replies

Reiki circle

Big reiki circle with my students. We sent reiki healing to our city state country and lovely earth for green pollution free with decreasing crime rate job for everyone, respect and safety for women, safety for nation success of army police and all government departments. We also sent reiki healing to family members of this reiki circle group and students. May Guruji and God always bless all. Love and light. ❤❤❤


रेकी सर्कल
मेरे छात्रों के साथ रेकी सर्कल। हमने अपने शहर राज्य देश और प्रदूषण मुक्त हरी भरी पृथ्वी हो इसके लिए रेकी हीलिंग दी हर व्यक्ति के लिये नौकरी, अपराध दर कम करने, महिलाओं के लिए सम्मान और सुरक्षा, सेना पुलिस और राष्ट्र की सुरक्षा और सफलता के लिए, सभी सरकारी विभागों और प्राइवेट जॉब करने वालों  की सफलता हेतु  रेकी हीलिंग दी। हमने इस रेकी सर्कल समूह के छात्रों के परिवार के सदस्यों और छात्रों को रेकी हीलिंग दी। गुरुजी और भगवान हमेशा सभी को आशीर्वाद दें और सदा कृपा रखें। प्रेम और प्रकाश। 

Reiki Master Astrologer: Antas Billorey



   
   
   
   
   
   
   
   
   
   
   
   


Free download attachments below नीचे दी गई अटैचमेंट्स फाइल्स फ्री डाउनलोड करें



Attached Files
.pdf   Reiki for students.pdf (Size: 236.67 KB / Downloads: 272)
.pdf   Fees details and course Karma.pdf (Size: 464.91 KB / Downloads: 278)
.pdf   reiki breaking news.pdf (Size: 389.03 KB / Downloads: 366)
.pdf   JAY SHREE RAM.pdf (Size: 585.8 KB / Downloads: 278)
.pdf   JUST FOR YOU.pdf (Size: 585.8 KB / Downloads: 266)
.pdf   Reiki Astrology-English.pdf (Size: 225.27 KB / Downloads: 312)
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Thumbs Up मोदी ने क्या किया
Posted by: admin - 05-02-2019, 11:05 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

मोदी ने क्या किया

   
   
   
   
   
   
   
   
   
   
   
   
   
   
   

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Star श्री नरेन्द्र मोदी: लोकसभा चुनाव 2019
Posted by: admin - 04-24-2019, 12:32 AM - Forum: Astrology - No Replies

श्री नरेन्द्र मोदी
17 सितंबर 1950 (रविवार)

   
   

आज सभी यही जानना चाहते हैं कि लोकसभा चुनाव 2019 का परिणाम क्या होगा? क्या मोदी जी पुनः प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे? क्या सफलतापूर्वक देश उन्नति के पथ पर बढ़ पायेगा?

मेरे मत से मोदी जी इस बार पूर्ण बहुमत से सत्ता में आयेंगे। वे सफलतापूर्वक देश विदेश में अपनी कर्मशीलता से सबको फिर से अचम्भित कर देंगे। देश के आंतरिक और बाह्य शत्रुओं को कड़े कूटनीतिक कदमों से सबक सिखाने में भी समर्थ होंगे। पार्टी में और भी कर्मठ ईमानदार लीडर्स जुड़ेंगे। मोदी जी का राजयोग अभी प्रबल और स्थायी है यह देश में भी स्थिरता के संकेत देता है। देश की प्रगति और विकास तेजी के साथ होगा। विश्व में भारत के राजनैतिक संबंधो मे सुधार होगा। भारत की आर्थिक स्थित सुदृढ़ होगी। आम आदमी के जीवन स्तर मे सुधार होगा। मोदी जी के नेतृत्व मे जिस प्रकार देश का नाम विश्वस्तर पर प्रसिद्ध हुआ है वह और भी बढ़ेगा। वे आने वाले वर्षों में प्रधानमंत्री बने रहेंगे।

रेकी मास्टर एस्ट्रोलोजर: अंतस बिल्लौरे

   

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Star नार्मदीय समाज द्वारा पारमार्थिक हास्पीटल का शुभारंभ।
Posted by: admin - 04-23-2019, 12:11 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

मात् श्री नर्मदे हर।
इंदौर शहर में नार्मदीय समाज द्वारा पारमार्थिक हास्पीटल का शुभारंभ।

   

751 नार्मदीय मांगलिक भवन द्वारकापुरी इंदौर

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Heart श्री रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं
Posted by: admin - 04-13-2019, 07:40 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

श्री रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं

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  HIGHLY VISITED HEALER IN SANDTON
Posted by: HealerandPsychic - 04-08-2019, 05:38 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

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Thumbs Up चैत्र नवरात्रि
Posted by: Navin Sharma - 04-05-2019, 06:14 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

चैत्र नवरात्रि

नवरात्र वह समय है, जब दोनों रितुओं का मिलन होता है। इस संधि काल मे ब्रह्मांड से असीम शक्तियां ऊर्जा के रूप में हम तक पहुँचती हैं। मुख्य रूप से हम दो नवरात्रों के विषय में जानते हैं - चैत्र नवरात्र एवं आश्विन नवरात्र। चैत्र नवरात्रि गर्मियों के मौसम की शुरूआत करता है और प्रकृति माँ एक प्रमुख जलवायु परिवर्तन से गुजरती है।

यह चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथमा से प्रारंभ होती है और रामनवमी को इसका समापन होता है।  चैत्र  नवरात्रि में माँ भगवती के सभी नौ रूपों की उपासना की जाती है। इस समय आध्यात्मिक ऊर्जा ग्रहण करने के लिए लोग विशिष्ट अनुष्ठान करते हैं। इस अनुष्ठान में देवी के रूपों की साधना की जाती है।

 (पहला दिन)
प्रतिपदा - इस दिन पर "घटत्पन", "चंद्र दर्शन" और "शैलपुत्री पूजा" की जाती है।

   

 (दूसरा दिन)
दिन पर "सिंधारा दौज" और "माता ब्रह्राचारिणी पूजा" की जाती है।

   

(तीसरा दिन)
यह दिन "गौरी तेज" या "सौजन्य तीज" के रूप में मनाया जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान "चन्द्रघंटा की पूजा" है।

   

 (चौथा दिन)
"वरद विनायक चौथ" के रूप में भी जाना जाता है, इस दिन का मुख्य अनुष्ठान "कूष्मांडा की पूजा" है।

   

 (पांचवा दिन)
इस दिन को "लक्ष्मी पंचमी" कहा जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान "नाग पूजा" और "स्कंदमाता की पूजा" जाती है।

   

 (छटा दिन)
इसे "यमुना छत" या "स्कंद सस्थी" के रूप में जाना जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान "कात्यायनी की पूजा" है।

   

 (सातवां दिन)
सप्तमी को "महा सप्तमी" के रूप में मनाया जाता है और देवी का आशीर्वाद मांगने के लिए “कालरात्रि की पूजा” की जाती है।

   

(आठवां दिन)
अष्टमी को "दुर्गा अष्टमी" के रूप में भी मनाया जाता है और इसे "अन्नपूर्णा अष्टमी" भी कहा जाता है। इस दिन "महागौरी की पूजा" और "संधि पूजा" की जाती है।

   

(नौंवा दिन)
"नवमी" नवरात्रि उत्सव का अंतिम दिन "राम नवमी" के रूप में मनाया जाता है और इस दिन "सिद्धिंदात्री की पूजा महाशय" की जाती है।

   

चैत्र नवरात्रि के दौरान अनुष्ठान -
बहुत भक्त नौ दिनों का उपवास रखते हैं। भक्त अपना दिन देवी की पूजा और नवरात्रि मंत्रों का जप करते हुए बिताते हैं।
चैत्र नवरात्रि के पहले तीन दिनों को ऊर्जा माँ दुर्गा को समर्पित है। अगले तीन दिन, धन की देवी, माँ लक्ष्मी को समर्पित है और आखिर के तीन दिन ज्ञान की देवी, माँ सरस्वती को समर्पित हैं। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में से प्रत्येक के पूजा अनुष्ठान नीचे दिए गए हैं।

पूजा विधि -
घट स्थापना नवरात्रि के पहले दिन सबसे आवश्यक है, जो ब्रह्मांड का प्रतीक है और इसे पवित्र स्थान पर रखा जाता है, घर की शुद्धि और खुशाली के लिए।

१. अखण्ड ज्योति :
नवरात्रि ज्योति घर और परिवार में शांति का प्रतीक है। इसलिए, यह जरूरी है कि आप नवरात्रि पूजा शुरू करने से पहले देसी घी का दीपक जलतें हैं। यह आपके घर की नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में मदद करता है और भक्तों में मानसिक संतोष बढ़ाता है।

२. जौ की बुवाई :
नवरात्रि में घर में जौ की बुवाई करते है। ऐसी मान्यता है की जौ इस सृष्टी की पहली फसल थी इसीलिए इसे हवन में भी चढ़ाया जाता है। वसंत ऋतू में आने वाली पहली फसल भी जौ ही है जिसे देवी माँ को चैत्र नवरात्रि के दौरान अर्पण करते है।

३. नव दिवस भोग (9 दिन के लिए प्रसाद) :
प्रत्येक दिन एक देवी का प्रतिनिधित्व किया जाता है और प्रत्येक देवी को कुछ भेंट करने के साथ भोग चढ़ाया जाता है।

सभी नौ दिन देवी के लिए 9 प्रकार भोग निम्न अनुसार हैं:
• 1 दिन: केले
• 2 दिन: देसी घी (गाय के दूध से बने)
• 3 दिन: नमकीन मक्खन
• 4 दिन: मिश्री
• 5 दिन: खीर या दूध
• 6 दिन: माल पोआ
• 7 दिन: शहद
• 8 दिन: गुड़ या नारियल
• 9 दिन: धान का हलवा

४. दुर्गा सप्तशती :
दुर्गा सप्तशती शांति, समृद्धि, धन और शांति का प्रतीक है, और नवरात्रि के 9 दिनों के दौरान दुर्गा सप्तशती के पाठ को करना, सबसे अधिक शुभ कार्य माना जाता है।

५. नौ दिनों के लिए नौ रंग :
शुभकामना के लिए और प्रसंता के लिए, नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान लोग नौ अलग-अलग रंग पहनते हैं:
• 1 दिन: हरा
• 2 दिन: नीला
• 3 दिन: लाल
• 4 दिन: नारंगी
• 5 दिन: पीला
• 6 दिन: नीला
• 7 दिन: बैंगनी रंग
• 8 दिन: गुलाबी
• 9 दिन: सुनहरा रंग

६. कन्या पूजन :
कन्या पूजन माँ दुर्गा की प्रतिनिधियों (कन्या) की प्रशंसा करके, उन्हें विदा करने की विधि है। उन्हें फूल, इलायची, फल, सुपारी, मिठाई, श्रृंगार की वस्तुएं, कपड़े, घर का भोजन (खासकर: जैसे की हलवा, काले चने और पूरी) प्रस्तुत करने की प्रथा है।

अनुष्ठान के कुछ विशेष नियम :

बहुत सारे भक्त निचे दिए गए अनुष्ठानों का पालन करते हैं:

1. प्रार्थना और उपवास चैत्र नवरात्रि समारोह का प्रतीक है। त्योहार के आरंभ होने से पहले, अपने घर में देवी का स्वागत करने के लिए घर की साफ सफाई करते हैं।
2. सात्विक जीवन व्यतीत करते हैं। भूमि शयन करते हैं। सात्त्विक आहार करते हैं।
3. उपवास करते वक्त सात्विक भोजन जैसे कि आलू, कुट्टू का आटा, दही, फल, आदि खाते हैं।
4. नवरात्रि के दौरान, भोजन में सख्त समय का अनुशासन बनाए रखते हैं और अपने व्यवहार की निगरानी भी करते हैं, जैसे की
• अस्वास्थ्यकर खाना (Junk Food) नहीं खाते।
• सत्संग करते हैं।
• ज्ञान सूत्र से जुड़ते हैं।
• ध्यान करते हैं।
• चमड़े का प्रयोग नहीं करते हैं।
• क्रोध से बचे रहते हैं।
• कम से कम 2 घंटे का मौन रहते हैं।
• अनुष्ठान समापन पर क्षमा प्रार्थना का विधान है तथा विसर्जन करते हैं।

चैत्र नवरात्री का महत्व :
यह माना जाता है कि यदि भक्त बिना किसी इच्छा की पूर्ति के लिए महादुर्गा की पूजा करते हैं, तो वे मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर कर मोक्ष प्राप्त करते हैं।

   
   
   
   
   
   
   

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Thumbs Up ND Masale
Posted by: admin - 04-01-2019, 01:11 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

ND Masale
   

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Thumbs Up First aid homoeopathy
Posted by: admin - 04-01-2019, 01:09 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

First aid homoeopathy

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Thumbs Up High alert of temperatures in coming days
Posted by: Vinay Goyal - 03-31-2019, 11:17 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

Dear all, 
 
the Equinox phenomenon  will affect us  in the next 5 days. Please stay indoors and keep animals indoor or protected   especially from 12pm-3pm daily. The temperature will fluctuate  and may reach  40 degrees Celsius. This can easily cause dehydration and sun stroke. (Ps: this phenomena is due to the sun directly positioned above the equator line. )
Please keep everyone inclusive of yourself hydrated. Everyone should be consuming about 3 litres of fluid everyday. Monitor everyone's blood pressure as frequent as possible. Many may get heat stroke.

Take Cold showers as frequent as possible. Reduce meat 
increase fruits & veg.

Heat wave is no joke! Place a new unused candle outside home area or exposed area. If candle can melt, its at a dangerous level.

Always place a pail or 2 of water half filled in living room & each in every room to keep temperature down.

 heat stroke has no indicative symptoms. Once you faint, its serious & dangerous as organ failure kicks in.

Always check lips, eye balls for  moisture.
Please inform others...
 Stay safe friends!

India: Dangerous heat to intensify this week after arriving unusually early AccuWeather.com - 10h ago A dangerous, widespread heat wave will continue across India this week, putting millions of people at risk for heat-related illnesses.

http://www.accuweather.com/en/weather-ne...y/70001217

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Thumbs Up Paytm offer and joining links
Posted by: admin - 03-31-2019, 10:01 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

Paytm offer and joining links 

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Star भारतीय नववर्ष, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2076 की आप सभी को हार्दिक बधाई।
Posted by: admin - 03-30-2019, 02:33 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

कहाँ चले गये भाई लोग ???

जो अंग्रेजों के नये साल में एक एक

माह पहले ही बधाई देने के लिये

लाईन लगाए हुए थे । 

एक सप्ताह बाद हम हिंदुओ का नया साल आ रहा है । मित्रो

किसी का भी मेसेज नही मिला है अभी तक ??

चलो मैं शुरुआत करता हूं।

चैत्र नवरात्र 
हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2076
की 
आपको और आपके परिवार जनो को बहुत बहुत शुभ कामनाएँ.. ????

"भारतीय नववर्ष, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2076 (6 अप्रेल 2019)" की आप सभी को अग्रिम हार्दिक बधाई  एवं शुभकामनाएँ ।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व :

1. इस दिन के सूर्योदय से ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की।

2. सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है।

3. प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक का दिन भी यही है।  

4.*यह शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात् नवरात्र का पहला दिन है। 

*5.* सिक्खों के द्वितीय गुरू श्री अंगद देव जी का जन्म दिवस भी इसी दिन  है।  

*6.* स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना की एवं कृणवंतो विश्वमार्यम का संदेश दिया |

*7.* सिंध प्रान्त के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार भगवान झूलेलाल इसी दिन प्रगट हुए।

*8.* विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना। विक्रम संवत की स्थापना की ।

*9.* युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ।

10 संघ संस्थापक प.पू .डॉ केशवराव बलिराम हेडगेवार का जन्म दिन भी यही है।

11 महिर्षि गौतम जयंती भी इसी दिन आती है।

*भारतीय नववर्ष का प्राकृतिक महत्व :*

*1.* बसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंध से भरी होती है।

*2.* फसल पकने का प्रारंभ यानि किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है।

*3.* नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात् किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिये यह शुभ मुहूर्त होता है।

*भारतीय नववर्ष कैसे मनाएँ :*

*1.* हम परस्पर एक दुसरे को नववर्ष की शुभकामनाएँ दें। 
पत्रक बांटें , 
झंडे, बैनर....आदि लगावें ।

2.*अपने परिचित मित्रों, रिश्तेदारों को नववर्ष के शुभ संदेश भेजें। 

*3 .* इस मांगलिक अवसर पर अपने-अपने घरों पर भगवा पताका फहराएँ। 

*4.* अपने घरों के द्वार, आम के पत्तों की वंदनवार से सजाएँ। 

*5.* घरों एवं धार्मिक स्थलों की सफाई कर रंगोली तथा फूलों से सजाएँ। 

*6.* इस अवसर पर होने वाले धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लें अथवा कार्यक्रमों का आयोजन करें।

7 प्रतिष्ठानों की सज्जा एवं प्रतियोगिता करें । झंडी और फरियों से सज्जा करें ।

8 इस दिन के महत्वपूर्ण देवताओं, महापुरुषों से सम्बंधित प्रश्न मंच के आयोजन करें 


9 वाहन रैली, कलश यात्रा, विशाल शोभा यात्राएं, कवि सम्मेलन, भजन संध्या , महाआरती आदि का आयोजन करें ।

10 चिकित्सालय, गौशाला में सेवा, रक्तदान जैसे कार्यक्रम । 



आप सभी से विनम्र निवेदन है कि "भारतीय नववर्ष" हर्षोउल्लास के साथ मनाने के लिए "समाज को अवश्य प्रेरित" करें।
           धन्यवाद 
   ? भारतमाता की जय

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Thumbs Up JOB and OPPORTUNITIES
Posted by: admin - 03-26-2019, 01:43 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

JOB and OPPORTUNITIES

Urgent Requirement 

EA to MD – based at Indore, with min 5-8 years experience in relevant field, good !communication skills (written & verbal), Computer and Tech Savy, Ready to travel with MD (if required), etc  Package range – 4-5 Lacs pa
Mail your resume swati@walkinsolutions.com

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I am Sameer Gite.

Territory Manager 

Star Health Insurance 

Indore 



We have job opening for Managerial Cadre in Sales profile for Indore & up country locations



Any graduate with 2 years+ experience in Sales & Marketing can apply for the job.



My mobile number is 9826034999
E-mail sameer.gite@starhealth.in

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Urgent Manpower Requirement 

CA – based at Indore with min 8-10 years in relevant field, good communication skills (written & verbal), Gooad in Accounting & Finance, Preparation of Project reports, Excellent analytical skills of financial figures like P & L and Balance Sheet, Rigorous & Aggressive Follow-ups with concerned departments, etc. Package range – 8-10 Lacs pa. Pl.  Share your resume at swati@walkinsolutions.com To know company details call me.


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Star माँ नर्मदा परिक्रमा यात्रा- सोमनाथ, नागेश्वर, ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन
Posted by: admin - 03-24-2019, 04:31 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

माँ नर्मदा परिक्रमा यात्रा- सोमनाथ, नागेश्वर, ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन

माँ नर्मदा परिक्रमा यात्रा 

माँ नर्मदा की सम्पूर्ण परिक्रमा ,के साथ द्वारकाधीश धाम ,पावागढ़ , सलकनपुर , मैहर माताजी दर्शन 
 लक्ज़री बस द्वारा    
 स्लीपिंग   15000 
 सिटिंग     8501 
यात्रा प्रारंभ  दि  15 अप्रैल 
यात्रा विवरण एवम बुकिंग हेतु सम्पर्क निम्न नम्बर एवम पते पर सम्पर्क करें 
   ताराशंकर गीते
    इंद्राणी ट्रेवल्स 
18  निलिन्द्रा भवन 
 टैगोर कॉलोनी   खण्डवा 
  मो न 9826475002 ,7999376954 
  शीघ्र बुकिंग करवाकर अपनी सीट सुनिश्चित करने की कृपा करें
साथही सोमनाथ ,नागेश्वर ,ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन
   
   

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Posted by: admin - 03-23-2019, 09:59 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

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Posted by: Namit Gupta - 03-23-2019, 09:51 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

महत्वपूर्ण पुस्तकें और उनके लेखक

Mission SSC For Students


1.     पंचतंत्र — विष्णु शर्मा

2.      प्रेमवाटिका — रसखान

3.      मृच्छकटिकम् — शूद्रक

4.       कामसूत्र् — वात्स्यायन

5.     दायभाग — जीमूतवाहन

6.      नेचुरल हिस्द्री — प्लिनी

7.      दशकुमारचरितम् — दण्डी

8.      अवंती सुन्दरी — दण्डी

9.      बुध्दचरितम् — अश्वघोष

10. कादम्बरी् — बाणभटृ

11. अमरकोष — अमर सिहं

12. शाहनामा — फिरदौसी

13. साहित्यलहरी — सुरदास

14. सूरसागर — सुरदास

15. हुमायूँनामा — गुलबदन बेगम

16. नीति शतक — भर्तृहरि

17. श्रृंगारशतक — भर्तृहरि

18. वैरण्यशतक — भर्तृहरि

19. हिन्दुइज्म — नीरद चन्द्र चौधरी

20. पैसेज टू इंगलैंड — नीरद चन्द्र चौधरी

21. अॉटोबायोग्राफी अॉफ ऐन अननोन इण्डियन — नीरद चन्द्र चौधरी

22. कल्चर इन द वैनिटी वैग — नीरद चन्द्र चौधरी

23. मुद्राराक्षस — विशाखदत्त

24. अष्टाध्यायी — पाणिनी

25. भगवत् गीता — वेदव्यास

26. महाभारत — वेदव्यास

27. मिताक्षरा — विज्ञानेश्वर

28. राजतरंगिणी — कल्हण

29. अर्थशास्त्र — चाणक्य

30. कुमारसंभवम् — कालिदास

31. रघुवंशम् — कालिदास

32. अभिज्ञान शाकुन्तलम् — कालिदास

33. गीतगोविन्द — जयदेव

34. मालतीमाधव — भवभूति

35. उत्तररामचरित — भवभूति

36. पद्मावत् — मलिक मो. जायसी

37. आईने अकबरी — अबुल फजल

38. अकबरनामा — अबुल फजल

39. बीजक — कबीरदास

40. रमैनी — कबीरदास

41. सबद — कबीरदास

42. किताबुल हिन्द — अलबरूनी

43. कुली — मुल्कराज आनन्द

44. कानफैंशंस अॉफ ए लव — मुल्कराज आनन्द

45. द डेथ अॉफ ए हीरो— मुल्कराज आनन्द

46. जजमेंट — कुलदीप नैयर

47. डिस्टेंन्ट नेवर्स— कुलदीप नैयर

48. इण्डिया द क्रिटिकल इयर्स— कुलदीप नैयर

49. इन जेल — कुलदीप नैयर

50. इण्डिया आफ्टर नेहरू — कुलदीप नैयर

51. बिटवीन द लाइन्स — कुलदीप नैयर

52. चित्रांगदा — रविन्द्र नाथ टैगौर

53. गीतांजली— रविन्द्र नाथ टैगौर

54. विसर्जन — रविन्द्र नाथ टैगौर

55. गार्डनर — रविन्द्र नाथ टैगौर

56. हंग्री स्टोन्स — रविन्द्र नाथ टैगौर

57. गोरा — रविन्द्र नाथ टैगौर

58. चाण्डालिका— रविन्द्र नाथ टैगौर

59. भारत-भारती — मैथलीशरण गुप्त

60. डेथ अॉफ ए सिटी— अमृता प्रीतम

61. कागज ते कैनवास— अमृता प्रीतम

62. फोर्टी नाइन डेज— अमृता प्रीतम

63. इन्दिरा गाँधी रिटर्नस — खुशवंत सिहं

64. दिल्ली — खुशवंत सिहं

65. द कम्पनी अॉफ वीमैन — खुशवंत सिहं

66. सखाराम बाइण्डर — विजय तेंदुलकर

67. इंडियन फिलॉस्पी — डॉ. एस. राधाकृष्णन

68. इंटरनल इंडिया — इंदिरा गाँधी

69. कामयानी — जयशंकर प्रसाद

70. आँसू — जयशंकर प्रसाद

71. लहर — जयशंकर प्रसाद

72. लाइफ डिवाइन — अरविन्द घोष

73. ऐशेज अॉन गीता — अरविन्द घोष

74. अनामिका — सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'

75. परिमल — सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'

76. यामा — महादेवी वर्मा

77. ए वाइस अॉफ फ्रिडम — नयन तारा सहगल

78. एरिया अॉफ डार्कनेस — वी. एस. नायपॉल

79. अग्निवीणा — काजी नजरुल इस्लाम

80. डिवाइन लाइफ — शिवानंद

81. गोदान — प्रेमचन्द्र

82. गबन — प्रेमचन्द्र

83. कर्मभूमि — प्रेमचन्द्र

84. रंगभूमि — प्रेमचन्द्र

85. अनटोल्ड स्टोरी — बी. एम. कौल

86. कन्फ्रन्डेशन विद पाकिस्तान — बी. एम. कौल

87. कितनी नावों में कितनी बार — अज्ञेय

88. गोल्डेन थेर्सहोल्ड — सरोजिनी नायडू

89. ब्रोकेन विंग्स — सरोजिनी नायडू

90. दादा कामरेड — यशपाल

91. पल्लव — सुमित्रानन्दन पंत्त

92. चिदम्बरा— सुमित्रानन्दन पंत्त

93. कुरूक्षेत्र — रामधारी सिहं 'दिनकर'

94. उर्वशी — रामधारी सिहं 'दिनकर'

95. द डार्क रूम — आर. के. नारायण

96. मालगुड़ी डेज — आर. के. नारायण

97. गाइड — आर. के. नारायण

98. माइ डेज — आर. के. नारायण

99. नेचर क्योर — मोरारजी देसाई

100.चन्द्रकान्ता — देवकीनन्दन खत्री

101.देवदास — शरतचन्द्र चटोपाध्याय

102.चरित्रहीन — शरतचन्द्र चटोपाध्याय     

103.इंडिका — मेगास्थनीज

104.स्पीड पोस्ट — सोभा-डे

105.माई टुथ — इंदिरा गांधी

106.मिलिन्दपन्हो — नागसेन

107.बाबरनामा — बाबर

108.विनय पत्रिका — तुलसीदास

109.यंग इंडिया — महात्मा गांधी

110.काव्य मीमांसा — राजशेखर

111.हर्षचरित — वाणभट्ट

112.सत्यार्थ-प्रकाश — दयानंद सरस्वती

113.मेघदूत — कालिदास

114.हितोपदेश — नारायण पंडित

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Posted by: Namit Gupta - 03-23-2019, 09:46 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

Mission SSC For Students

प्रश्न➜मध्यप्रदेश राज्य की कौन सी नदी सर्वाधिक मृदा अपरदन करती हैं ?
उत्तर➜चम्बल
प्रश्न➜मध्यप्रदेश की बेतवा नदी का उद्
गम स्थान हैं ?
उत्तर➜रायसेन जिले का कुमरा नामक गॉंव
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में श्यामा प्रसाद मुखर्जी छात्रवृति योजना किसके लिए चलाई गई ?
उत्तर➜सभी वर्ग के छात्र, छात्राओं के लिए
प्रश्न➜नागदा (उज्जैन) के निकट से किस धातु के संस्कृति के प्रमाण मिले हैं ?
उत्तर➜लौह
प्रश्न➜सिंगरौली जिला विधिवत रूप में कब अस्तित्व में आया?
उत्तर➜24 मई, 2008
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में गुप्तकालीन शिव मन्दिर कहा पर हैं ?
उत्तर➜भूमरा
प्रश्न➜”चॉंद का मुंह टेढ़ा हैं” किसकी रचना हैं ?
उत्तर➜गजानन माधव मुक्तिबोध
प्रश्न➜ग्रामीण महिलाओ को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौन सी योजना प्रारम्भ की गई?
उत्तर➜ग्राम्या
प्रश्न➜मध्य प्रदेश के 47.6% भाग पर कौन-सी मिट्टी पाई जाती हैं ?
उत्तर➜काली मिट्टी
प्रश्न➜राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना लागू करने में मध्य्प्रदेश राज्य का कौनसा स्थान हैं?
उत्तर➜प्रथम
प्रश्न➜देश का प्रथम सौर चालित टेलिफोन एक्सचेंज मध्यप्रदेश में कहाँ पर हैं?
उत्तर➜शिवपुरी
प्रश्न➜गोंड जनजाति के भाग नही हैं?
उत्तर➜हल्बागोंड
प्रश्न➜श्योपुर किस संभाग में शामिल हैं?
उत्तर➜चम्बल
प्रश्न➜देश का कला भवन मध्यप्रदेश के किस जिले में हैं?
उत्तर➜उज्जैन
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में किस स्थान पर यूरेनियम होने के अवशेष मिले हैं?
उत्तर➜शहडोल
प्रश्न➜भरहुत के विश्व प्रसिद्ध स्तूप जिनका निर्माण मौर्यकाल मे हुआ वर्तमान मे किस जिले में है?
उत्तर➜सतना
प्रश्न➜कुषाणों के उन्मूलन के लिए किस वंश के राजाओं ने दस अश्वमेघ यज्ञ करवाये थें?
उत्तर➜नाग वंश
प्रश्न➜म.प्र मे किस प्रकार का बांस पाया जाता है?
उत्तर➜डेंड्रोकैलमस
प्रश्न➜अनुसूचित जातियो की सर्वाधिक जनसंख्या किस जिले में है?
उत्तर➜उज्जैन
प्रश्न➜खजुराहो को महाकाव्य काल में किस नाम से जाना जाता था?
उत्तर➜चेदि
प्रश्न➜प्रदेश में कोरडम निम्न से कौन से जिले में है?
उत्तर➜सीधी
प्रश्न➜मध्यप्रदेश के किस जिले में सबसे अधिक आरक्षित वन हैं?
उत्तर➜उज्जैन
प्रश्न➜इब्राहिम लोदी से किस तोमर वंश के शासक ने संघर्ष किया था?
उत्तर➜विक्रमादित्य
प्रश्न➜ग्वालियर में सिंधिया वंश की स्थापना किसने की थी?
उत्तर➜रानोजी सिंधिया
प्रश्न➜बुन्देलखण्ड पठार की सबसे ऊंची चोटी हैं?
उत्तर➜सिद्धबाबा
प्रश्न➜मालवा के पठार में सबसे ऊंची चोटी कौनसी हैं?
उत्तर➜जनापाव
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में इकबाल सम्मान किस क्षेत्र के लिये दिया जाता है?
उत्तर➜रचनात्मक उर्दू लेखन
प्रश्न➜मध्यप्रदेश राज्य की पूर्व से पश्चिम की लम्बाई कितनी किमी. हैं?
उत्तर➜870 किमी.
प्रश्न➜जहाज महल कहाँ स्थित है?
उत्तर➜माण्डवगढ़ में
प्रश्न➜15 अगस्त, 2003 में अशोक नगर जिले को किस जिले से अलग करके बनाया गया हैं?
उत्तर➜गुना
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में कर्क रेखा कितने जिलों में होकर गुजरती हैं?
उत्तर➜11
सतना स्थित सीमेण्ट कारखाना किस कंपनी ने स्थापित किया हैं?
उत्तर➜बिरला कॉर्पोरेशन द्वारा
प्रश्न➜मध्यप्रदेश राज्य में” कपास अनुसंधान केन्द्र” कहाँ पर हैं?
उत्तर➜खरगौन में
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में कितने संभाग हैं?
उत्तर➜10
प्रश्न➜भारत भवन के वास्तुकार कौन है ?
उत्तर➜चार्ल्स कोरिया
प्रश्न➜ भीलों का निवास स्थल क्या कहलाता है ?
उत्तर➜ फाल्या
प्रश्न➜ नागाजी का मेला किस जिला में लगता है ?
उत्तर➜ मुरैना
प्रश्न➜होशंगाबाद शहर के संस्थापक कौन है ?
उत्तर➜ होशंगशाह
प्रश्न➜ हीरा भूमिया का मेला कहाँ लगता है ?
उत्तर➜ ग्वालियर
प्रश्न➜राज्य जनजातीय संग्रहालय कहाँ स्थित है ?
उत्तर➜ भोपाल
प्रश्न➜ मध्यप्रदेश का राज्य पशु क्या है ?
उत्तर➜जलमगन हिरण
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून कब प्रभावी हुआ था ?
उत्तर➜ 1 मार्च 2014
प्रश्न➜ निम्न में से किस अभ्यारण में कई रॉक आश्रय है ?
उत्तर➜ नरसिंहगढ़
प्रश्न➜बाज बहादुर का महल कहाँ स्थित है ?
उत्तर➜ मांडू
प्रश्न➜व्हाइट टाइगर क्षेत्र का दूसरा नाम क्या है ?
उत्तर➜ बांधवगढ़
प्रश्न➜होशंगशाह का मकबरा कहाँ स्थित है ?
उत्तर➜ असीरगढ़
प्रश्न➜ पंडित कुमार गंर्धव समारोह कहाँ आयोजित किया जाता है ?
उत्तर➜ देवास
प्रश्न➜ रातापानी बाँध कहाँ स्थित है ?
उत्तर➜ रायसेन जिले में
प्रश्न➜काली सिंध नदी किस जिले से निकलती है ?
उत्तर➜ इंदौर
प्रश्न➜ राजवाड़ा महल कहाँ स्थित है ?
उत्तर➜ इंदौर
प्रश्न➜बटेश्वर मंदिर समूह कहाँ स्थित है ?
उत्तर➜ मुरैना
प्रश्न➜ पहसरी बांध कहाँ स्थित है ?
उत्तर➜ ग्वालियरप्रश्न➜Patwari &all exam related Gk.
प्रश्न➜ग्वालियर के किले का निर्माण किस शासक ने करवाया था ?
उत्तर➜सूरज सेन
प्रश्न➜ब्रेडरी नामक जाति का बारहसिंगा केवल एक ही राष्ट्रीय उद्यान मे पाया जाता है?
उत्तर➜कान्हा किसली
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में भिलाव वन उपज कहां से एकत्रित की जाती हैं ?
उत्तर➜छिन्दवाड़ा
प्रश्न➜चन्द्रगुप्त द्वितीय की राजधानी कहां पर थी ?
उत्तर➜उज्जयिनी
प्रश्न➜बान्धवगढ राष्ट्रीय उद्यान पूर्व मे शहडो
ल जिले मे आता था अब किस जिले में आता है?
उत्तर➜उमरिया
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में “संजीवनी संस्थान” कहां स्थित हैं ?
उत्तर➜भोपाल
प्रश्न➜किस जनजाति का मूल निवास कोटा(राजस्थान) और गुना(मध्यप्रदेश) तक का क्षेत्र हैं ?
उत्तर➜सहरिया
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में कपड़ो का शहर कहा जाता हैं ?
उत्तर➜इन्दौर
प्रश्न➜कौनसा नगर ताम्रपाषाणयुगीन मालवा संस्कृति का प्रमुख केन्द्र था ?
उत्तर➜नवदाटोली (इन्दौर)
प्रश्न➜राज्य में 11वीं पंचवर्षीय योजना में सर्वाधिक बजट किस क्षेत्र में दिया गया हैं ?
उत्तर➜सामाजिक सेवाएं
प्रश्न➜1956 ई. में मध्यप्रदेश का कौनसा क्षेत्र महाराष्ट्र मे मिला दिया गया ?
उत्तर➜विदर्भ
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में 1857 की क्रांति का विद्रोह सर्वप्रथम कहा हुआ था ?
उत्तर➜बानपुर और सागर
प्रश्न➜धार के दुर्ग का पुनर्निमाण किस मुस्लिम शासक ने करवाया था?
उत्तर➜मुहम्मद तुगलक
प्रश्न➜मध्यभारत के पठार का प्रमुख चीनी कारखाना डबरा किस जिले मे है?
उत्तर➜ग्वालियर
मध्यप्रदेश का कौनसा संभाग क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा हैं ?
उत्तर➜जबलपुर संभाग
प्रश्न➜मध्यप्रदेश राज्य में कितने प्रतिशत सिंचाई तालाबों द्वारा होती हैं ?
उत्तर➜23 प्रतिशत
प्रश्न➜झाबुआ में मंहगाई विरोधी आन्दोलन कब चलाया गया था ?
उत्तर➜1935
प्रश्न➜कपिलधारा व दुग्धधारा जलप्रपात किस जिले मे है?
उत्तर➜शहडोल
प्रश्न➜निम्न में से ग्रेफाइट का उत्पादन मध्यप्रदेश के किस स्थान से होता हैं ?
उत्तर➜बैतूल
प्रश्न➜मध्य्प्रदेश राज्य का सबसे पुराना चिकित्सा महाविद्यालय कहां पर हैं ?
उत्तर➜गजराराजे चिकित्सा महाविश्वविद्यालय (ग्वालियर)
प्रश्न➜मध्यप्रदेश के किस जिले में सर्वाधिक वन पाया जाता हैं ?
उत्तर➜मण्डला
प्रश्न➜म.प्र. मे प्रथम ग्राम न्यायालय कहा प्रारम्भ किया गया?
उत्तर➜झातला(नीमच)
प्रश्न➜1923 मे कहा से झण्डा सत्याग्रह क शुभारम्भ हुआ?
उत्तर➜जबलपुर
प्रश्न➜मध्यप्रदेश का एक मात्र शहर जहां पर IIT और IIM विश्वविद्यालय खोले गये हैं ?
उत्तर➜इन्दौर
प्रश्न➜मध्य भारत पर हूणों ने किस शताब्दी में आक्रमण किया था ?
उत्तर➜छठी शताब्दी
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में पगल्या किस अंचल की लोकचित्र कला हैं ?
उत्तर➜मालवा
प्रश्न➜म.प्र. उत्सव कहा होता है?
उत्तर➜दिल्ली
मध्यप्रदेश के सॉंची में किस समुदाय का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं ?
उत्तर➜बौद्ध

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Posted by: Namit Gupta - 03-23-2019, 09:42 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

Mission SSC For Students
जानकारियां दुनिया की

1✔विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप - एशिया ( विश्व के क्षेत्रफल का 30%)
2✔विश्व का सबसे छोटा महाद्वीप - आस्ट्रेलिया
3✔विश्व का सबसे बड़ा महासागर - प्रशांत महासागर
4✔विश्व का सबसे छोटा महासागर - आर्कटिक महासागर
5✔विश्व का सबसे गहरा महासागर - प्रशांत महासागर
6✔विश्व का सबसे बड़ा सागर - दक्षिणी चीन सागर
7✔विश्व की सबसे बड़ी खाड़ी - मेक्सिको की खाड़ी
8✔विश्व का सबसे बड़ा द्वीप - ग्रीनलैण्ड
9✔विश्व का सबसे बड़ा द्वीप समूह - इण्डोनेशिया
10✔विश्व की सबसे लम्बी नदी - नील नदी ल. 6650 किमी
11✔विश्व की सबसे बड़ी अपवाह क्षेत्र वाली नदी - अमेजन नदी
12✔विश्व की सबसे बड़ी सहायक नदी - मेडिरा ( अमेजन की )
13✔विश्व की सबसे व्यस्त व्यापारिक नदी - राइन नदी
6✔विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप - माजुली, भारत
17✔विश्व का सबसे बड़ा देश - रूस
18✔विश्व का सबसे छोटा देश - वेटिकन सिटी ( 44 हेक्टेयर)
19✔विश्व में सर्वाधिक मतदाताओं वाला देश - भारत
20✔विश्व में सबसे लंबी सीमा रेखा वाला देश - कनाडा
21✔विश्व में सबसे ज्यादा सीमा रेखा वाला देश - चीन ( 13 देश )
22✔विश्व का सबसे बड़ा रेगिस्तान - सहारा ( आफ्रीका )
23✔एशिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान - गोबी
24✔विश्व की सबसे ऊंची पर्वत चोटी - माउण्ट एवरेस्ट ( 8848 मी. )
25✔विश्व की सबसे लम्बी पर्वतमाला - एणडीज ( दक्षिण अमेरिका )
26✔विश्व का सबसे गर्म प्रदेश - अल्जीरिया ( लीबिया )
27✔विश्व का सबसे ठंडा स्थान - वोस्तोक अंटार्कटिका
32✔विश्व की सबसे बड़ी खारे पानी की झील - केस्पियन सागर
33✔विश्व की सबसे बड़ी ताजा पानी की झील - लेक सुपीरियर
34✔विश्व की सबसे गहरी झील - बैकाल झील
35✔विश्व सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित झील - टिटिकाका
36✔विश्व की सबसे बड़ी कृत्रिम झील - वोल्गा झील
37✔विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा - सुन्दरवन डेल्टा
38✔विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य - महाभारत
39✔विश्व का सबसे बड़ा अजायबघर - अमेरिकन म्यूजियम आँफ नेचुरल हिस्ट्री
40✔विश्व का सबसे बड़ा चिड़ियाघर - क्रूजर नेशनल पार्क ( द. आफ्रीका )
41✔विश्व का सबसे बड़ा पक्षी - आस्ट्रिच ( शुतुरमुर्ग )
42✔विश्व का सबसे छोटा पक्षी - हमिंग बर्ड
43✔विश्व का सबसे बड़ा स्तनधारी - नीली व्हेल
44✔विश्व का सबसे विशाल मंदिर - अंकोरवाट का मंदिर
46✔विश्व की सबसे ऊंची मीनार - कुतुबमीनार
47✔विश्व का सबसे बड़ा घंटाघर - द ग्रेट बेल आँफ मास्को
48✔विश्व की सबसे बड़ी मूर्ति - स्टैच्यू आँफ लिबर्टी
49✔विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर परिसर - अक्षरधाम मंदिर दिल्ली
50✔विश्व की सबसे बड़ी मस्जिद -अल हयात,रियाध, सऊदी अरब
51✔विश्व की सबसे ऊंची मस्जिद - सुल्तान हसन मस्जिद,कहिरा
52✔विश्व की सबसे ऊँची ईमारत -बुर्ज खलीफा, दुबई(यूनाइटेड अरब एमिरेट्स)
52✔विश्व का सबसे बड़ा चर्च - वेसिलिका आँफ सेंट पीटर ( वेटिकन सिटी )
53✔दुनिया की सबसे बड़ी हिन्दू आबादी-भारत
54✔दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी -इंडोनिशिया
55✔दुनिया की सबसे बड़ी ख्रिस्ती (ईसाई)आबादी -नेकोटिना वालाकिसी
56✔दुनिया की सबसे बड़ी यहूदी आबादी - इजराइल
57✔दुनिया की सबसे बड़ी बुद्धिस्ट अबादी-चाइना
58✔विश्व का सबसे बड़ा आतंकी संगठन-आईएसआईएस,इराक-सीरिया
59✔दुनिया का सबसे मोस्ट वॉन्टेड -अबु-बक्र अल-बगदादी(आईएस का सरगना)
60✔ दुनिया का सबसे बड़ा डोनर-बिल गेट्स
61✔दुनिया की सबसे शक्तिशाली व्यक्ति -बराक ओबामा
62✔विश्व का सबसे लम्बा रेलवे प्लेटफार्म - कज़ाख़िस्तान
63✔विश्व का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन - ग्रांड सेंट्रल टर्मिनल न्यूयॉर्क
64✔विश्व में सबसे व्यस्त हवाई अड्डा - शिकागो - इंटरनेशनल एयरपोर्ट
65✔विश्व का सबसे बड़ा हवाई अड्डा - किंग खालिद हवाई अड्डा रियाद, सऊदी अरब
66✔विश्व का सबसे बड़ा बंदरगाह - उज़्बेकिस्तान
67✔विश्व का सबसे लंबा बांध - हीराकुण्ड बांध उड़ीसा
68✔विश्व का सबसे ऊंचा बांध - रेगुनस्की ( ताजिकिस्तान )
69✔विश्व की सबसे ऊंची सड़क - लेह मनाली मार्ग
70✔विश्व का सबसे बड़ा सड़क पुल - महात्मा गांधी सेतु पटना
65✔विश्व का सबसे ऊंचा ज्वालामुखी - माउंट कॅाटोपैक्सी
66✔विश्व में सबसे अधिक कर्मचारियों वाला विभाग - भारतीय रेलवे
67✔विश्व में सबसे ऊंचा क्रिकेट मैदान - चैल हिमाचल प्रदेश
68✔विश्व का सबसे बड़ा पुस्तकालय - कांग्रेस पुस्तकालय लंदन
69✔विश्व का सबसे बड़ा संग्रहालय - ब्रिटिश संग्रहालय लंदन
70✔विश्व की सबसे बड़ी कार्यलयी इमारत - पेट

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Posted by: Namit Gupta - 03-23-2019, 09:40 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

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रक्त से संबंधित कुछ जानकारी 

 ☞. सर्वग्राही रक्त समूह है : → ?‌?‌
☞. सर्वदाता रक्त समूह है : → ?‌
☞. आर० एच० फैक्टर सबंधित है : → रक्त से
☞. ?‌?‌ फैक्टर के खोजकर्ता : → लैंड स्टीनर एवं विनर
☞. रक्त को शुद्ध करता है : → वॄक्क (?‌?‌?‌?‌?‌?‌)
☞. वॄक्क का भार होता है : → ❶❺⓿ ग्राम
☞. रक्त एक विलयन है : → क्षारीय
☞. रक्त का ?‌?‌ मान होता है : → ❼.❹
☞. ह्र्दय की धडकन का नियंत्रक है : → पेसमेकर
☞. शरीर से ह्रदय की ओर रक्त ले जाने वाली रक्तवाहिनी कहलाती है : → शिरा
☞. ह्रदय से शरीर की ओर रक्त ले जाने वाली रक्तवाहिनी कहलाती है : → धमनी
☞. जराविक-❼ है : → कृत्रिम ह्रदय
☞. शरीर में आक्सीजन का परिवहन : → रक्त द्वारा
☞. सबसे छोटी अस्थि : → स्टेपिज़ (मध्य कर्ण में)
☞. सबसे बड़ी अस्थि : → फिमर (जंघा में)
☞. सबसे लम्बी पेशी : → सर्टोरियास
☞. सबसे बड़ी ग्रंथि : → यकृत
☞. सर्वाधिक पुनरुदभवन की क्षमता : → यकृत में
☞. सबसे कम पुनरुदभवन की क्षमता : → मस्तिष्क में
☞. शरीर का सबसे कठोर भाग : → दांत का इनेमल
☞. सबसे बड़ी लार ग्रंथि : → पैरोटिड ग्रंथि
☞. सबसे छोटी ?‌?‌?‌ : → लिम्फोसाइट
☞. सबसे बड़ी ?‌?‌?‌ : → मोनोसाइट

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Posted by: Namit Gupta - 03-23-2019, 09:37 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

Mission ? SSC For Students


Q.1 आहड़ सभ्यता में मिले बर्तनों का रंग कौनसा है ?
Ans. भूरा व लाल

Q.2 कालीबंगा सभ्यता के लोग किस लिपि का उपयोग करते थे ? 
Ans. सैन्धव

Q.3 किस पुरातात्विक स्थल का प्राचीन नाम मालव नगर था ?
Ans. नगर

Q.4 बड़ी मात्रा में मालव सिक्के व आहत मुद्राएं कहां से प्राप्त हुई हैं ?
Ans. नगर

Q.5 शिवि जनपद सिक्के राजस्थान के किस शहर से प्राप्त हुए ?
Ans. नगरी

Q.6 गणेश्वर सभ्यता कौनसी है ?
Ans. ताम्र सभ्यता

Q.7 रणथम्भौर के चौहान वंश का संस्थापक कौन था ?
Ans. गोविन्द राय

Q.8 राजस्थान का कौनसा दुर्ग कायनगिरी के नाम से जाना जाता है ?
Ans. जालौर दुर्ग

Q.9 बनी - ठनी पेंटिंग शैली का संबंध किस शहर से है ?
Ans. किशनगढ़

Q.10 जीण माता का मंदिर कहां स्थित है ?
Ans. सीकर

Q.11 बीकानेर के 'राठोरान री ख्यात' के लेखक कौन है ?
Ans. दयालदास

Q.12 तारागढ़ का किला कहां स्थित है ?
Ans. अजमेर

Q.13 भरतपुर का संबंध किस राजघराने से है ?
Ans. जाट

Q.14 जैसलमेर का गुंडाराज के लेखक कौन है ?
Ans. सागरमल गोपा

Q.15 मीराबाई के पति का नाम क्या था ?
Ans. भोजराज

Q.16 शेखावाटी क्षेत्र का प्रमुख नृत्य है ?
Ans. गीदड़

Q.17 बादशाह का मेला कहां लगता है ?
Ans. ब्यावर

Q.18 चौरासी खंभों वाली छतरी कहां स्थित है ?
Ans. बूंदी

Q.19 ऊंट के बीमार होने पर किस लोक देवता की पूजा की जाती है ?
Ans. पाबूजी

Q.20 गोगुंदा राजस्थान के किस जिले में स्थित है ?
Ans. उदयपुर

Q.21 आनासागर कहां स्थित है ?
Ans. अजमेर

Q.22 जोधपुर से पहले राठौड़ों की राजधानी कहां पर थी ?
Ans. मंडोर

Q.23 तराइन के प्रथम युद्ध का परिणाम क्या रहा ?
Ans. पृथ्वीराज चौहान की विजय

Q.24 हल्दीघाटी राजस्थान के किस जिले में स्थित है ?
Ans. राजसमंद

Q.25 राजस्थान का राज्य वृक्ष खेजड़ी को राज्य वृक्ष कब घोषित किया गया ?
Ans. सन् 1983 में

Q.26 मूसी महारानी की छतरी राजस्थान के किस जिले में स्थित है ?
Ans. अलवर

Q.27 बापा रावल का वास्तविक नाम क्या था ?
Ans. कालभोज

Q.28 किसने पिछोला झील का निर्माण करवाया था ?
Ans. बनजारे ने

Q.29 सन् 1576 ई. में हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर की सेना का नेतृत्व किसने किया था ?
Ans. राजा मानसिंह

Q.30 राजा मानसिंह ने आमेर के महल का निर्माण कब करवाया था ?
Ans. सन् 1592 ई. में

Q.31 8 जून 1576 को कौनसा प्रसिद्ध युद्ध लड़ा गया ?
Ans. हल्दीघाटी

Q.32 राजस्थान में बाला दुर्ग किस जिले में स्थित है ?
Ans. अलवर

Q.33 राजस्थान में चांदी के गोले दागने हेतु चर्चित दुर्ग कौनसा है ?
Ans. चूरू का किला

Q.34 मिर्जा राजा मानसिंह का संबंध किस वंश से है ?
Ans. कच्छवाह

Q.35 राजस्थान राज्य के किस जिले को अन्न का कटोरा कहते हैं ?
Ans. श्री गंगानगर

Q.36 राजस्थान राज्य का सबसे गर्म जिला कौनसा है ?
Ans. चूरू

Q.37 राजस्थान राज्य का सबसे पूर्वी जिला है ?
Ans. धौलपुर

Q.38 राजस्थान राज्य की सबसे पुरानी डेयरी पदमा डेयरी किस जिले में स्थित है ?
Ans. अजमेर

Q.39 कचरे से बिजली बनाने का प्रथम कारखाना राजस्थान में कहां लगाया गया है ?
Ans. पदमपुर [ गंगानगर ]

Q.40 दीनबंधु मॉडल का संबंध किससे है ?
Ans. बायोगैस ऊर्जा से

Q.41 राजस्थान राज्य की इकाई ऑयल इंडिया का कार्यालय स्थित हैं ?
Ans. बीकानेर

Q.42 सरिस्का अभ्यारण को राष्ट्रीय पार्क का स्तर कब घोषित किया गया ?
Ans. सन् 1990 में

Q.43 राजस्थान के राज्य पक्षी का नाम है ?
Ans. गोडावन

Q.44 महारानी कॉलेज कहां स्थित है ?
Ans. जयपुर

Q.45 राजस्थान में मार्बल नगरी के नाम से मशहूर शहर का नाम है ?
Ans. किशनगढ़

Q.46 श्री तेजाजी धाम सुरसुरा राजस्थान के किस जिले में स्थित है ?
Ans. अजमेर

Q.47 उदयपुर क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा है ?
Ans. मेवाड़ी

Q.48 राजस्थान में झिलो की नगरी किस शहर को कहा जाता है ?
Ans. उदयपुर

Q.49 पांचना बांध किस जिले में स्थित है ?
Ans. करौली

Q.50 सेवन घास किस जिले में पाई जाती है ?
Ans. जैसलमेर

Q.51 अंता पावर प्लांट किस प्रकार का है ?
Ans. गैस

Q.52 राजस्थान के किन दो जिलों में होकर कर्क रेखा गुजरती है ?
Ans. बांसवाड़ा व डूंगरपुर

Q.53 राजस्थान की सर्वाधिक लंबी सीमा किस राज्य से लगती है ?
Ans. मध्य प्रदेश

Q.54 राजस्थान राज्य की स्थलीय सीमा की कुल कितनी लंबाई है ?
Ans. 5920 कि. मी.

Q.55 राजस्थान की पाकिस्तान से लगने वाली सीमा रेखा को क्या कहते हैं ?
Ans. रैडक्लिप रेखा

Q.56 राजस्थान के किस जिले की सीमा मध्यप्रदेश को स्पर्श नहीं करती हैं ?
Ans. सिरोही

Q.57 राजस्थान के किस जिले का मुख्यालय सर्वाधिक पाक सीमा के नजदीक है ?
Ans. श्रीगंगानगर

Q.58 राजस्थान की किस जिले की सीमा सर्वाधिक आठ जिलों में लगती हैं ?
Ans. पाली

Q.59 राजस्थान राज्य का एकमात्र ऐसा जिला जिसमें एक भी उप तहसील नहीं है ?
Ans. पाली

Q.60 स्वतंत्रता प्राप्ति के समय राजस्थान राज्य में कितने जिले थे ?
Ans. 25 जिले

Q.61 राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावन को राज्य पक्षी घोषित किस वर्ष किया गया ?
Ans. सन् 1981 में

Q.62 राजस्थान के राज्य पशु चिंकारा को राज्य पशु कब घोषित किया गया ?
Ans. सन् 1981 में

Q.63 राजस्थान के जिला बांसवाड़ा और डूंगरपुर के मध्य के भू भाग को क्या कहते हैं ?
Ans. मेवल

Q.64 काठल किस नदी के आसपास के क्षेत्र को कहा जाता है ?
Ans. माही

Q.65 राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान कौनसा है ?
Ans. माउंट आबू

Q.66 राजस्थान का सर्वाधिक वर्षा वाला जिला कौनसा है ?
Ans. झालावाड़

Q.67 राजस्थान मे सबसे कम वर्षा किस जिले में होती है ?
Ans. जैसलमेर

Q.68 चित्तौड़ जिले के निर्माता शासक चित्रागंद का संबंध किस राजवंश से है ?
Ans. मोरी 

Q.69 राजा रायसिंह राठौर द्वारा बनाया गया जूनागढ़ दुर्ग राजस्थान के किस जिले में स्थित है ?
Ans. बीकानेर

Q.70 पोथीखाना चित्रकला संग्रहालय कहां स्थित है ?
Ans. जयपुर

Q.71 रागमाला का चित्र किस चित्र शैली का है ?
Ans. अलवर शैली का

Q.72 राजस्थानी लोक कला में कपड़ों पर निर्मित चित्रों को क्या कहते हैं ?
Ans. पटचित्र

Q.73 राजस्थानी लोक चित्र शैली में 'पाने' क्या है ?
Ans. कागज पर चित्रण

Q.74 पिछवाइयों के चित्रण का मुख्य विषय है ?
Ans. श्री कृष्ण लीला

Q.75 पट चित्रण को राजस्थानी में क्या कहा जाता है ?
Ans. फड़

Q.76 मोरध्वज व निहालचंद किस चित्रकला शैली से संबंधित है ?
Ans. किशनगढ़ शैली

Q.77 कौनसा चित्रकार भैंसों के चितेरे के रूप में विख्यात हैं ?
Ans. परमानंद चोयल

Q.78 कौनसा चित्रकार भीलो के चितेरे के रूप में विख्यात है ?
Ans. गोवर्धन लाल बाबा

Q.79 किस चित्र शैली में पीला रंग प्रधान रहा है ?
Ans. बीकानेर शैली

Q.80 राजस्थान की कौनसी चित्रकला सबसे प्राचीन मानी जाती है ?
Ans. मेवाड़ शैली

Q.81 ऊट की खाल पर किया गया चित्रांकन किस चित्र शैली की विशेषता है ?
Ans. बीकानेर शैली

Q.82 किस शैली पर मुगल प्रभाव अधिक पड़ा है ?
Ans. आमेर शैली

Q.83 किस राजस्थानी रियासत में प्रधानमंत्री को 'मुसाहिब' कहा जाता था ?
Ans. जयपुर रियासत

Q.84 नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना धौलपुर की जनता को जागृत करने के लिए किस वर्ष की गई थी ?
Ans. सन् 1934 में

Q.85 मिहिर भोज का राज्यारोपण कब हुआ था ?
Ans. सन् 836 ई. में

Q.86 सन् 967 ई. में किस वंश द्वारा आमेर राज्य की स्थापना की गई थी ?
Ans. कछावाहा वंश

Q.87 सन् 967 ई. में कछावाहा वंश के किस शासक ने आमेर राज्य की स्थापना की थी ?
Ans. धोलाराय

Q.88 पहिए का आविष्कार किस काल में हुआ था ?
Ans. नव पाषाण काल

Q.89 जैसलमेर में सागरमल गोपा का देहांत कैसे हुआ था ?
Ans. हत्या कर दी गई थी

Q.90 वंश भास्कर के रचयिता कौन है ?
Ans. सूर्यमल्ल मिश्रण

Q.91 राजस्थान के किस जिले में चिरवा अभिलेख है ?
Ans. उदयपुर

Q.92 कौन हड़प्पा सभ्यता के उत्खनन कर्ता है ?
Ans. उदयपुर

Q.93 राजस्थान में गणेश्वर सभ्यता किस नदी के किनारे विकसित हुई ?
Ans. कांतली

Q.94 राजस्थान की किस सभ्यता को ताम्रवती सभ्यता के नाम से जाना जाता है ?
Ans. आहड़ सभ्यता

Q.95 राजस्थान दिवस किस तिथि को मनाया जाता है ?
Ans. 30 मार्च

Q.96 राजस्थान में कालीबंगा किस जिले में है ?
Ans. हनुमानगढ़

Q.97 सहायक संधि का जन्मदाता कौन था ?
Ans. लॉ - वेलेजली

Q.98 राजस्थान के किस जिले में नीमूचाणा है ?
Ans. अलवर

Q.99 किसी व्यक्ति द्वारा सम्प सभा की स्थापना की गई ?
Ans. गोविंद गुरु

Q.100 किस राज्य ने सबसे पहले अंग्रेजों के साथ संधि की थी ?
Ans. करौली

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Star निमाड़ी साहित्य: डॉ. मीना साकल्ले Nimadi sahitya: Dr. Meena Sakalle
Posted by: admin - 03-19-2019, 06:37 AM - Forum: Post Advertisement - No Replies

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डॉ. मीना साकल्ले द्वारा निमाड़ी साहित्य एवं लोक-संस्कृति को सहेजने संजोने का अनूठा प्रयास.

   
   
   
   
   
   
   
   
   

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Posted by: Jyot singh - 03-16-2019, 01:15 PM - Forum: Share your stuff - No Replies


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Star जन्म शताब्दी महोत्सव !!
Posted by: admin - 03-11-2019, 11:49 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

जन्म शताब्दी महोत्सव !!

जय गुरूदेव !

सभी भूदेवताओ को प्रणाम,हर्ष का विषय है परमपूज्य गुरुदेव श्री बालीपुर वाले बाबा के जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में  गुरु आशीर्वाद से "गायत्री पुरूश्चरण" का आयोजन दिनांक 13 से 20 मार्च तक होना तय हुआ है , जिसमे 24 लाख गायत्री मंत्र जप होंगे,जिसमें आप सभी सादर आमंत्रित है। निवेदन है इस दिव्य आयोजन का हिस्सा बनें और यथाशक्ति गायत्री जप कर ब्रह्म शक्ति को बढ़ाएं। आयोजन में अंशकालिक रूप से भी हिस्सा लिया जा सकता है। अतः ब्राह्मण समाज से निवेदन है कम से कम एक दिन अवश्य आश्रम पधारें और यथाशक्ति जप समर्पण करें।

आयोजन मे ठहरने ,भोजन प्रसादी, की पूर्ण व्यवस्था रहेगी।



   

   

   

   

   

   

नोट:-- कृपया अपनी स्वीकृति व अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें 
श्री अंबिका आश्रम बालीपुर  धाम
ते. -मनावर जि.- धार (म.प्र.)
जन्म शताब्दी महोत्सव !!

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Thumbs Up अमेरिकी वैज्ञानिक का केस रेकी हीलिंग और ज्योतिष से हल A case of an American scientist
Posted by: admin - 03-08-2019, 06:16 PM - Forum: Reiki cases - No Replies

एक अमेरिकी वैज्ञानिक का केस, रेकी हीलिंग के साथ-साथ ज्योतिष परामर्श से हल किया गया.

नमस्ते,  मैं एक अमेरिकी वैज्ञानिक हूं और मुझे अपने शोध कार्य के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार मिला. सबकुछ ठीक चल रहा था लेकिन पुरस्कार मिलने के कुछ महीनों बाद बाद, मेरे सीनियर्स ने मेरे साथ काम करने से इनकार कर दिया और बताया कि वे नहीं चाहते कि मैं उनके साथ रहूँ या इस विभाग में कार्य करूँ. उनका कहना था की मेरी कार्य-कुशलता में कमी आ गई है. उन्होंने मेरे सामने मेरे विगत वर्ष का ट्रेक रिकॉर्ड भी प्रस्तुत किया. मैं आश्चर्यचकित थी कि यह कैसे हुआ मेरे प्रदर्शन के लिए मुझे पुरस्कार भी मिला. मैंने बेहतर स्थिति और सामंजस्य बनाने के लिए रेकी करने का अनुरोध किया. मैं रेकी लेने लगी और कुछ दिनों तक रेकी सेशन चलते रहे. जैसा कि रेकी मास्टर ज्योतिष का भी अभ्यास करते हैं, उन्होंने मुझे सुझाव दिया "यदि आप चाहें तो हम ज्योतिष द्वारा समस्या का निदान भी कर सकते हैं लेकिन मैं इसके लिये आपको मजबूर नहीं कर सकता". मैं सहमत थी,  उन्होंने मेरे जन्म विवरण के बारे में पूछा और उस पर काम करना शुरू किया. उन्होंने अपनी रीडिंग की और मुझे बताया कि वर्तमान में नौकरी छोड़ने की कोई संभावना नहीं है इसलिए यह निश्चित है कि आने वाले समय के लिए आप अपनी नौकरी जारी रखेंगे. उन्होंने मुझे समस्या के जल्द से जल्द हल करने के लिए कुछ उपाय करने का भी सुझाव दिया. मैंने भी ज्यादातर सभी उपायों का पालन किया. इस बीच हमने रेकी भी जारी रखी. यहाँ एक ओर वरिष्ठ पैनल मुझे स्वीकार करने के लिए सहमत नहीं थे. जब भी मैं संगोष्ठी या प्रस्तुति के लिए जाना चाहती थी, मैं हमेशा रेकी मास्टर से सलाह लेती थी. उन्होंने मुझे रत्न पहनने के लिए, विशेष रंग की पोशाक पहनने, खाने की आदतों आदि के लिए उपाय दिए, मैं अपने प्रयोगों की सफलता भी पूछती थी, कुंडली पढ़कर उन्होंने मुझे इसके बारे में भविष्यवाणी बताई जिससे मुझे भी मदद मिली. एक बार उन्होंने मुझसे कहा कि आपका प्रयोग इस बार सफल नहीं होगा, लेकिन अगले प्रयास में आपको सफलता मिलेगी. इस तरह की कई भविष्यवाणियां कीं जो मैंने पाया बिल्कुल सही थीं. हम साथ ही रेकी भी करते रहे. कई बार जब सीनियर्स के साथ मेरी जॉब को लेकर मीटिंग चलती थी, उन्होंने यह भी भविष्यवाणी की कि सीनियर्स मुझे कैसे जवाब देने वाले हैं या वे मेरी मदद कैसे करेंगे या नहीं करेंगे, मुझे यह भी सही लगा. हमारे सभी प्रयासों के अंत में मेरे विभाग ने मुझे जॉब पर बने रहने के लिये कहा मैंने अपने उसी पद पर नौकरी जारी रखी. इस प्रकार मैंने रेकी हीलिंग और ज्योतिषीय परामर्श द्वारा अपने कैरियर को स्थिर रख पाई. मैं आभारी हूँ, धन्यवाद.

A case of an American scientist solved with Reiki healing as well astrology counseling.

Hi, I am U.S. based scientist and I got my national award for my research work. Everything was going fine but after few months later getting award, my seniors rejected to work with me and reported that they don’t want me to be with them. I was also surprised how it was happened even for my performance I received the award too. I asked for Reiki to make better the situation and harmony. I started taking Reiki and continued. As Reiki master also practice astrology he suggested me “we can also diagnose the problem by astrology if you wish but I can’t force it too”. I agreed, he asked about my birth details and started working on that. He did his reading and told me there is no possibility of leaving job at present so it is sure for coming time you will going to continue your job. He also suggested me to do some remedies to sort the problem out as early as possible. I also followed all remedies mostly. Meanwhile we continued Reiki too. Here the senior panel was not agreed to accept me. Whenever I supposed to go for seminar or presentation I always used to consult with reiki master. He gave me remedies for wearing gems, wearing particular color dress, eating habit etc. I used to ask success of my experiments also, by horoscope reading he gave me predictions about it that also helped me. Once he told me your experiment will not be successful this time but in next occurrence you will be get successful this kind predictions also I saw, was correct. We keep doing Reiki along with. Many times meeting about my job with seniors was going on. He also predicted how they will be going to reply me or how they will help me, I found it right. In the end of our all efforts I continued my job on my same post. Thanks.

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Posted by: Shreyas Gupta - 03-07-2019, 08:59 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

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Thumbs Up निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव 2019 की तारीख निर्धारित कर दी गयी है।
Posted by: Kapil mohan - 03-07-2019, 10:55 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव 2019 की तारीख निर्धारित कर दी  गयी है जिसकी प्रदेश अनुसार तिथि निम्न है ।

1)Bihar : April 10, 17, 24, 30 and May 7,12.
2)Odisha : April 10, 17
3)West Bengal : April 17, 24, 30 and may 7, 12
4)Jhadkhand : April 10, 17, 24
5) Chatisgarh : 10, 17, 24
6)MP : April 10, 17, 24
7) Goa : April 17
8)Gujarat : April 30
9) Maharashtra :April 17, 24
10) Rajasthan : April 17, 24
11) Haryana : April 10
12)Himnchal P : May 17
13)J&K : April 10, 17, 24, 30 and May 7
14) Uttarakhand : May
15) Karnataka : April 17
16) Kerala : April 10
17)Tamilnadu : April 24
18)AP : April 30,May
19)Manipur : April 9,17
20) Meghalaya : April 9
21) Mijoram : April 9
22) Nagaland : April 9
23) Arunanchal Pradesh : April 9
24) Assam : April 7,12,24
25)Simon : April 12
25)Tripura : April 7,12
26) Andaman : April 10
27) Chandigarh : April 10
28) Badranagar habeli : April 30
29) Laxyadip : April 10
30) Delhi : April 10
31)Punjab : April 10
32)Utter Prdesh : Aprill 10, 17, 24, 30 and May 7, 12
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Heart गीता दर्शन भाग–5, अध्‍याय—11 ओशो
Posted by: Osho Prem - 03-07-2019, 08:27 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

एक बहुत अदभुत घटना मुझे याद आती है। बंगाल में एक बहुत अनूठे संन्यासी हुए, युक्तेश्वर गिरि। वे योगानंद के गुरु थे। योगानंद ने पश्चिम में फिर बहुत ख्याति पाई। गिरि अदभुत आदमी थे। ऐसा हुआ एक दिन कि गिरि का एक शिष्य गांव में गया। किसी शैतान आदमी ने उसको परेशान किया, पत्थर मारा, मार—पीट भी कर दी। वह यह सोचकर कि मैं संन्यासी हूं क्या उत्तर देना, चुपचाप वापस लौट आया। और फिर उसने सोचा कि जो होने वाला है, वह हुआ होगा, मैं क्यों अकारण बीच में आऊं। तो वह अपने को सम्हाल लिया। सिर पर चोट आ गई थी। खून भी थोड़ा निकल आया था। खरोंच भी लग गई थी। लेकिन यह मानकर कि जो होना है, होगा। जो होना था, वह हो गया है। वह भूल ही गया।

जब वह वापस लौटा आश्रम कहीं से भिक्षा मांगकर, तो वह भूल ही चुका था कि रास्ते में क्या हुआ। गिरि ने देखा कि उसके चेहरे पर चोट है, तो उन्होंने पूछा, यह चोट कहां लगी? तो वह एकदम से खयाल ही नहीं आया उसे कि क्या हुआ। फिर उसे खयाल आया। उसने कहा कि आपने अच्छी याद दिलाई। रास्ते में एक आदमी ने मुझे मारा। तो गिरि ने पूछा, लेकिन तू भूल गया इतनी जल्दी! तो उसने कहा कि मैंने सोचा कि जो होना था, वह हो गया। और जो होना ही था, वह हो गया, अब उसको याद भी क्या रखना! अतीत भी निश्चिंतता से भर जाता है, भविष्य भी। लेकिन एक और बड़ी बात इस घटना में है आगे।

गिरि ने उसको कहा, लेकिन तूने अपने को रोका तो नहीं था? जब वह तुझे मार रहा था, तूने क्या किया? तो उसने कहा कि एक क्षण तो मुझे खयाल आया था कि एक मैं भी लगा दूं। फिर मैंने अपने को रोका कि जो हो रहा है, होने दो। तो गिरि ने कहा कि फिर तूने ठीक नहीं किया। फिर तूने थोड़ा रोका। जो हो रहा था, वह पूरा नहीं होने दिया। तूने थोड़ी बाधा डाली। उस आदमी के कर्म में तूने बाधा डाली, गिरि ने कहा।

उसने कहा, मैंने बाधा डाली! मैंने उसको मारा नहीं, और तो मैंने कुछ किया नहीं। क्या आप कहते हैं, मुझे मारना था! गिरि ने कहा, मैं यह कुछ नहीं कहता। मैं यह कहता हूं जो होना था, वह होने देना था। और तू वापस जा, क्योंकि तू तो निमित्त था। कोई और उसको मार रहा होगा।

और बड़े मजे की बात है कि वह संन्यासी वापस गया। वह आदमी बाजार में पिट रहा था। लौटकर वह गिरि के पैरों में पड़ गया। और उसने कहा कि यह क्या मामला है?
 गिरि ने कहा कि जो तू नहीं कर पाया, वह कोई और कर रहा है। तू क्या सोचता है, तेरे बिना नाटक बंद हो जाएगा!
 तू निमित्त था।

बड़ी अजीब बात है यह। और सामान्य नीति के नियमों के बड़े पार चली जाती है।

कृष्ण अर्जुन को यही समझा रहे हैं। वे यह कह रहे हैं कि जो होता है, तू होने दे। तू मत कह कि ऐसा करूं, वैसा करूं, संन्यासी हो जाऊं, छोड़ जाऊं। कृष्‍ण उसको रोक नहीं रहे हैं संन्यास लेने से। क्योंकि अगर संन्यास होना ही होगा, तो कोई नहीं रोक सकता, वह हो जाएगा।

इस बात को ठीक से समझ लें।

अगर संन्यास ही घटित होने को हो अर्जुन के लिए, तो कृष्ण रोकने वाले नहीं हैं। वे सिर्फ इतना कह रहे हैं कि तू चेष्टा करके कुछ मत कर। तू निश्चेष्ट भाव से, निमित्त मात्र हो जा और जो होता है, वह हो जाने दे। अगर युद्ध हो, तो ठीक। और अगर तू भाग जाए और संन्यास ले ले, तो वह भी ठीक। तू बीच में मत आ, तू स्रष्टा मत बन। तू केवल निमित्त हो।

गीता दर्शन 
 भाग–5, 
अध्‍याय—11
 ओशो

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Heart अचेतन को सजगता के द्वारा रूपांतरित करना कठिन है, और पर्याप्त भी नहीं है, इसलिए सजगता
Posted by: Osho Prem - 03-07-2019, 08:24 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

अचेतन को सजगता के द्वारा रूपांतरित करना कठिन है, और पर्याप्त भी नहीं है, इसलिए सजगता के अलावा और क्या अभ्यास करें?


कृपया इसके बारे में इसके प्रायोगिक आयाम को अधिक ध्यान में रखते हुए समझाए।


अचेतन को रूपांतरित केवल सजगता से ही किया जा सकता है। यह कठिन है, किंतु दूसरा कोई मार्ग नहीं है। सजग होने के लिए कितनी ही विधियां हैं। परंतु सजगता अनिवार्य है। आप विधियां का उपयोग जागरण के लिए कर सकते हैं; किंतु आपको जागना तो पड़ेगा ही।


 
यदि कोई पूछता है कि क्या कोई विधि है अंधकार को मिटाने की सिवा प्रकाश के, तो वह चाहे कितना ही कठिन हो, किंतु वही एकमात्र उपाय है, क्योंकि अंधकार केवल अभाव है, प्रकाश का। इसलिए आपकोप्रकाश का उपस्थित करना होगा और तब अंधकार वहां नहीं होगा।

 

अचेतना, मूर्च्छा-कुछ और नहीं है बल्कि चेतना का अभाव है। वह अपने में कोई विधायक वस्तु नहीं है, इसलिए आप कुछ और नहीं कर सकते सिवाय जागने के। यदि मूर्च्छा अपने ही आप में कुछ होती, तो फिर बात ही दूसरी होती। परंतु वह अपने आप में कुछ भी नहीं है। अचेतना-मूर्च्छा-इसका मतलब कुछ विधायक होना नहीं होता। इसका मतलब है सिर्फ चैतन्य का अभाव। यह सिर्फ अभाव है। इसकी अपनी कोई सत्ता नहीं है। इसका अपना कोई अस्तित्व नहीं है। अचेतन शब्द केवल चैतन्य का अभाव दर्शाता है, इससे अधिक कुछ भी नहीं। जब हम कहते हैं-अंधकार, तो यह शब्द एक गलतफहमी की ओर ले जाता है, क्योंकि जैसी ही हम कहते हैं, अंधकार तो ऐसा प्रतीत होता है कि अंधकार कुछ ऐसी चीज है जो कि है। वस्तुतः वह है नहीं। इसलिए सीधे अंधकार के साथ आप कुछ भी नहीं कर सकते। कैसे कर सकते हैं आप?


आपने चाहे इस तथ्य को कभी न देखा हो, परंतु अंधकार के साथ सीधे आप कुछ भी नहीं कर सकते। जो कुछ भी आप अंधकार के साथ करना चाहते हैं, उसके लिए आपकी प्रकाश के ही साथ कुछ करना पड़ेगा, न कि अंधकार के साथ। यदि आप चाहते हैं कि अंधेरा हो जाए, तो प्रकाश बुझा दें। यदि आप अंधकार को नहीं चाहते, तो प्रकाश जला दें। परंतु सीधे अंधकार के साथ आप कुछ भी नहीं कर सकते। आपको प्रकाश के मार्फत ही कुछ करना पड़ेगा।



क्यों? आप सीधे कुछ नहीं कर सकते? आप सीधे कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि अंधकार जैसी कोई चीज है ही नहीं, इसलिए प्रत्यक्ष आप उसे नहीं छू सकते। आपको कुछ प्रकाश के साथ ही करना पड़ेगा। और तब अंधकार के साथ भी कुछ किया जा सकेगा।



यदि प्रकाश है, तो अंधेरा नहीं है। यदि प्रकाश नहीं है, तो अंधेरा है। आप इस कमरे में प्रकाश ला सकते हैं, किंतु आप अंधेरा नहीं ला सकते। आप यहां से प्रकाश ले जा सकते हैं, अंधेरा नहीं। आप में और अंधकार में कोई संबंध नहीं है। क्यों? यदि अंधकार हो तभी न आदमी उससे संबंधित हो सकता है? परंतु अंधेरा तो है ही नहीं।



भाषा से यह भ्रम पैदा होता है, कि अंधकार जैसी कोई वस्तु है। अंधकार एक नकारात्मक शब्द है। वह इतना ही बतलाता है कि प्रकाश नहीं है, इससे यादा कुछ नहीं; और वही बात के अलावा और क्या करें, तो आप एक असंगत प्रश्न पूछते हैं। आपको सजग होना पड़ेगा, आप इसके अलावा कुछ और नहीं कर सकते।



सचमुच, बहुत सी विधियां हैं, सजग होने के लिए; यह एक दूसरी बात है। प्रकाश को पैदा करने की कितनी ही विधियां हैं, परंतु प्रकाश को ही पैदा करना पड़ेगा। आप आग जला सकते हैं और अंधकार नहीं होगा; आप एक मिट्टी के तेल का दिया जला सकते हैं। और तब भी कोई अंधकार नहीं होगा। और बिजली का उपयोग कर सकते हैं और तब भी कोई अंधेरा नहीं होगा। परंतु कुछ भी किया जाए, कोई भी विधिप्रकाश को उत्पन्न करने की काम में लाई जाए पैदा प्रकाश ही करना होगा।


आत्मपूजा उपनिषद 


ओशो

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Thumbs Up Hattrik Indore N. 1
Posted by: Lalit Vyas - 03-06-2019, 04:04 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

Hattrik Indore N. 1
   
   
   
   

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Exclamation बहुत से हिन्दुओं को कहते हम सभी ने सुना है की सालों से पूजा पाठ कर रहा हूँ लेकिन अभी
Posted by: Govind Acharya - 03-05-2019, 12:42 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

महाशिवरात्रि का महापर्व

बहुत से हिन्दुओं को कहते हम सभी ने सुना है की सालों से पूजा पाठ कर रहा हूँ लेकिन अभी तक कुछ मिला नहीं , कोई फायदा नहीं हुआ  ...........

हिन्दू पूजा पाठ तो करते हैं लेकिन ...बस करते हैं ...न उसके कारण की समझ न उसके तरीके की न नियम न को कानून बस हम पूजा पाठ करते हैं .....और फल नहीं मिल रहा?

*?इसका मुख्य कारण है धर्म ज्ञान का अभाव ... साधना आरधना , धर्म शास्त्रों के पठन पठान का अभाव और ईस्वरीय आराधना में स्वार्थ का समावेश* 

*एक छोटासा उदाहरण देखिये सायद कुछ समझ आ जाए???*
 
?शिव पुराण में कहीं भी यह वर्णन नहीं आया कि भगवान शिव ने गांजा या चीलम व चरस फुकी हो
?किसी भी वेद पुराण में इसका वर्णन नही मिलता 
?भगवान शिव के कुल 108 नाम है कोई भी एक नाम का जुड़ाव इन चीजों से नही है , 


?विपरीत इसके महादेव जी ने संसार की रक्षा के लिए हलाहल विष पिया था , लेकिन इसके बारे में कोई बात तक भी नहीं करता (विष पीने से डॉ जो लगता है ) 




?80 % गंजेडी - चरसी जब गांजा चरस फुकते है तो वे यही कहते हैं कि फिर क्या हुआ यह तो भोले का प्रसाद है । इन जैसे लोगों ने ना तो कभी भगवान शिव को जाना होता है ना कभी पढ़ा और ना कभी जानने की कोशिश करते हैं परंतु कश लगाते  समय इनको शिव जी की याद आ जाती है । 

?ऐसे लोग फ़र्ज़ी फूहड़  भोजपुरी और हरियाणवी भक्ति गाने सुन प्रभावित होते है जिन गानों में शिव जी की भांग और गाजा पीते दिखाया जाता है जो कि बहुत ही शर्मनाक है। ऐसे लोग नकल करने से पहले शिव जी बारे पूरा ज्ञान क्यों नही लेते ऐसी भक्ति के नाम पर वे हम हिन्दुओ की बदनामी करवा रहे। 

?ऐसे लोगों को मैं कहना चाहूंगा कि ज़रा सोचो जो शिव ब्रह्मांड के पिता है ब्रह्मांड के  रचियता व ब्रह्मांड की आत्मा है , जो कण कण में समाए हुए है , जिसका त्रिनेत्र खुलते ही भयंकर प्रलय आ जाए । जो आदियोगी है महातपस्वी व मार्शल आर्ट के जनक है क्या ऐसे शिव को किसी भी तरह के नशे की क्या जरूरत है ? ? 

?वे भगवान है ना कि हम जैसे तुच्छ मानव । उनको किसी सहारे की जरूरत नहीं है , अपने आप में ही संपूर्ण हैं शिव। 
हां उन्हें भांग के पत्ते अवश्य चढ़ते हैं क्योंकि आयुर्वेद में भांग को एक बहुत ही उपयोगी औषधि माना जाता है और आज इसे  पूरा विश्व भी स्वीकार कर रहा है । 

?शिव पुराण के अनुसार समुद्र मंथन सावन के महीने में हुआ था तो जब मंथन में से अमृत निकला था तो उस अमृत को पाने के लिए तो देवता दैत्यों में भगदड़ मच गई थी परंतु ठीक जब अमृत के बाद पृथ्वी को नष्ट कर देने वाला हलाहल विष निकला तो कोई आगे ना आया , तब भगवान शिव आए और उन्होंने उस भयानक विष को अपने कंठ में धारण किया , जिसके कारण वे नीलकंठ व देवों के देव महादेव कहलाए । 

?भगवान शिव के सहस्त्र नाम में एक नाम है कर्पूरगौरम , जिसका अर्थ है पूर्णतः सफेद । लेकिन उस हलाहल विष के सेवन के बाद उनका शरीर नीला पड़ना शुरू हो गया था , भगवान शिव का शरीर तपने लगा लेकिन शिव फिर भी पूर्णतः शांत थे लेकिन देवताओं ने सेवा भावना से भगवान शिव की तपण शांत करने  के लिए उन्हें जल चढ़ाया और विष के प्रभाव कम करने के लिए विजया ( भांग का पौधा ) को दूध में मिला कर भगवान शिव को औषधि रूप में पिलाया । बस यही एक प्रमाण है भगवान शिव के भांग सेवन का , और हमने उन्हें चरस गांजा फुकने वाला एक साधारण सा इंसान  बना दिया , अब आप ही बताइए कि क्या हम सही न्याय कर रहे हैं उस ब्रह्मांड पिता की छवि के साथ ? ?
हम शिव जी के पूजा करते है तो हमने अपने आराध्य से उनकी दी गयी शिक्षा से सीख ले कर तपस्वी, योगी और पवित्र बनाना है और सनातन धर्म की रक्षा करनी है समय समय पर होने वाली मिलावटों को रोकना है

*?महाशिवरात्रि  पर शिवलिंग और जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करे साथ ही अपने मन और आत्मा का भी अभिषेक तप संयम और ज्ञान से करे शिव जी की तरह*

*अपने आराध्यों पर चुटुकुला न बनाये न शेयर करे यह सभी एक निवेदन है?*

*?हमारी कमी यह है कि जब हमारे सामने कुछ गलत हो रहा हो हम उसे बर्दास्त कर जाते है अगर हम उसी समय उन गलत चीजो का उपचार न करे तो वही आगे फैल और समस्या खड़ी कर सकती है*

एक जागरूक सच्चा सनातनी व शिव भक्त होने के नाते। यह मैसेज औरो को भी शेयर कीजियेगा

हर हर महादेव

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  महाशिवरात्रि के दुर्लभ संयोग के बारे में...
Posted by: Govind Acharya - 03-04-2019, 06:06 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

महाशिवरात्रि के दुर्लभ संयोग के बारे में...

1. महाशिवरात्रि का दुर्लभ संयोग

महाशिवरात्रि का पहला दुर्लभ संयोग तो ये है कि इस वर्ष 'महाशिवरात्रि सोमवार' के दिन है। सोमवार को भगवान शिव का दिन माना जाता है। सोमवार को शिवरात्रि का व्रत रखने वाले अविवाहितों का जल्द विवाह हो जाता है। इस दिन शिवजी का अभिषेक पंचामृत से करें तो अविवाहितों का विवाह का योग बन जाता है।



2. महाशिवरात्रि का दुर्लभ संयोग

महाशिवरात्रि का दूसरा दुर्लभ संयोग यह है कि मानशिवरात्रि तिथि के अनुसार सर्वश्रेष्ठ 'श्रवण नक्षत्र' का संयोग बना है। चन्द्रमा इस नक्षत्र के स्वामी हैं और शिवजी के सिर पर चंद्रमा विराजमान है और इसे भगवान विष्णु के वामन अवतार का चरण चिह्न भी माना गया है। इस नक्षत्र में शिवपुराण के अनुसार धन, वैभव, सुख और समृद्धि के लिए शिवलिंग का अभिषेक गन्ने के रस से करना चाहिए।



3. महाशिवरात्रि का दुर्लभ संयोग

महाशिवरात्रि का तीसरा दुर्लभ संयोग ये है कि इस साल महाशिवरात्रि का व्रत 5 मार्च को है और इस दिन 'शिव योग' बन रहा है। शिवरात्रि पर शिव योग में शिव की पूजा करने से पुण्य प्राप्त होता है। शिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा में केसर युक्त दूध से शिव का अभिषेक करने से नौकरी में सफलता का योग बनता है और घर में सुख समृद्धि आती है। शिवलिंग का अभिषेक करने के बाद शिवजी को भोग में खीर अर्पित करने से आत्मा को शांति, पितरों को शांति और नव गृह शांति के योग बनते हैं।



4. महाशिवरात्रि का दुर्लभ संयोग

महाशिवरात्रि का चौथा दुर्लभ संयोग यह है कि महाशिवरात्रि पर योगों में महायोग कहे जाने वाले सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि को सर्वसिद्धि योग भी कहा जाता है, इस योग में शिवरात्रि का व्रत भी है जिससे महाशिवरात्रि का महत्व कई गुना बढ़ गया है। सर्वार्थ सिद्धि में शिवरात्रि पर शिवतांडव स्तोत्र या शिव सहस्रनाम का पाठ करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है और इस सर्वसिद्धि योग में रुद्राभिषेक करने से आरोग्य जीवन प्राप्त होता है और जीवन में आने वाली सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है और आपके सभी कार्य सफल होते हैं।



5. महाशिवरात्रि का दुर्लभ संयोग

महाशिवरात्रि का पांचवा दुर्लभ संयोग ये है कि शिवरात्रि का व्रत पांच मार्च को है और इस दिन 'धनिष्ठा नक्षत्र' है। वैदिक ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार 'धनिष्ठा नक्षत्र' में महाशिवरात्रि पूजाविधि अनुसार करने से रंक भी राजा बन जाता है। 27 नक्षत्रों में से 23वां 'धनिष्ठा नक्षत्र' का स्वामी मंगल और देवता वसु को माना गया है। 'धनिष्ठा नक्षत्र' में शिवलिंग की पूजा में शहद, लाल चंदन और गुलाब के इत्र से पूजा करना शुभ फलदाई माना गया है। शिवलिंग का अभिषेक इन तीनों चीजों से करने से गरीब भी धनवान बन जाता है।

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  महा​शिवरात्रि 2019
Posted by: Govind Acharya - 03-04-2019, 06:04 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

महाशिवरात्रि 2019

 महाशिवरात्रि 4 मार्च को है। इस दिन शिव जी को रुद्राक्ष चढ़ाने से लेकर कुछ अन्य उपाय करने से भोलेनाथ को प्रसन्न किया जा सकता है। इससे रुपए-पैसों की दिक्कत दूर होने के साथ विवाह में हो रही देरी या दूसरी समस्याएं भी सुलझ जाएंगी।*
*यदि किसी जातक के विवाह में अड़चन आ रही है तो उसे महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर केसर मिला हुआ मीठा दूध चढ़ाना चाहिए। इससे विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती है उत्तम विवाह के योग बनने लगते है*
*धन लाभ के लिए महाशिवरात्रि के दिन नंदी(बैल) को हरा चारा खिलाना चाहिए। इससे जीवन में हर्ष उल्लास, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है*। 
*शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर एक आँवला अथवा आँवले के मुरब्बे का पीस चढ़ाकर उसके ऊपर शहद चढ़ाएं , इससे भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते है । ऐसा करने से भगवान आशुतोष की कृपा से जीवन में प्रेम, पारिवारिक सहयोग, यश और प्रचुर मात्रा में स्थाई धन सम्पति के योग प्रबल होते है । इस उपाय को प्रत्येक सोमवार को भी अवश्य ही करना चाहिए ।*
*शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर अनार के फूल चढ़ाकर उसपर शहद चढ़ाएं , इसको करने से उस जातक के जीवन में , घर कारोबार में कभी भी किसी भी प्रकार का आर्थिक संकट नहीं आता है ।*
*अगर कोई व्यक्ति किसी रोग से पीड़ित है तो उसे शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर काले तिल अवश्य ही चढ़ाने चाहिए । इससे रोग दूर होते है और जातक को दीर्घायु की प्राप्ति होती है । इस उपाय को शिवरात्रि से शुरू करते हुए प्रत्येक सोमवार को अवश्य ही करना चाहिए ।*
*?1.जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है उन्हें महाशिवरात्रि के दिन 3 मुखी रुद्राक्ष की पूजा करके, उसे गले में धारण करना चाहिए। आप चाहें तो उसका ब्रेसलेट बनावाकर हाथ में भी धारण कर सकते हैं। इससे धन लाभ होगा।*
*?2.कई बार ग्रहों की खराब हालत के चलते भी धन का नाश होता है। इससे बचने के लिए शिवरात्रि के दिन शिव मन्दिर में जाकर भगवान को चावल अर्पित करने चाहिए और चरण छूकर भगवान का आशीर्वाद लें, इससे समस्या दूर होगी।*
*?3.जिन लोगों की कुंडली में मृत्यु योग है या बुरा समय है तो आप महाशिवरात्रि के दिन घर में महामृत्युंजय यंत्र की स्थापना करें और इसके मंत्र का जाप करें।*
*?4.महाशिवरात्रि को सुबह स्नान आदि के बाद शिवलिंग पर 5 बेल पत्र चढ़ाएं और हर बार बेलपत्र चढ़ाते समय "ऊँ नमः शिवाय" मंत्र का जप करें। इससे आपको हर कार्य में सफलता मिलेगी।*
*?5.अगर व्यापार में नुकसान हो रहा है तो काली गुंजा के 11 दाने लेकर, उन्हें भगवान शिव को अर्पण करके अपनी दुकान में रख दें। इससे हालात सुधर जाएंगे।*
*?6.अगर वैवाहिक जीवन में दिक्कतें आ रही हैं तो महाशिवरात्रि के दिन किसी सुहागन स्त्री को लाल साड़ी और श्रृंगार की वस्तुएं दान दें। इससे समस्या हल हो जाएगी।*
*?7.मोक्ष की प्राप्ति के लिए एक मुखी रुद्राक्ष में गंगाजल छिड़ककर इसे शुद्ध कर लें। अब रोजाना ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। इससे मृत्यु के बाद आपको मोक्ष मिलेगा।*
*?8.शिव जी की कृपा पाने के लिए उन्हें खीर समेत दूसरी सफेद वस्तुओं का भोग लगाएं। इससे आपके जीवन में भी खुशियों की मिठास बढ़ेगी।*
*?9.अगर आपके शत्रु आप पर हावी हो जाते हैं तो महाशिवरात्रि के दिन से रुद्राष्टक का पाठ करें। अब ये प्रक्रिया नियमित रूप से जारी रखें। इससे आपके दुश्मन घुटने टेक देंगे।*
*?10.महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का पंचामृत से स्नान और जलाभिषेक करने से व्यक्ति को सफलता की प्राप्ति होती है।*
*जो व्यक्ति घोर आर्थिक संकट से जूझ रहे हों, कर्ज में डूबे हों, व्यापार व्यवसाय की पूंजी बार-बार फंस जाती हो उन्हें दारिद्रय दहन स्तोत्र से शिवजी की आराधना करनी चाहिए.*
*?महर्षि वशिष्ठ द्वारा रचित यह स्तोत्र बहुत असरदायक है. यदि संकट बहुत ज्यादा है तो शिवमंदिर में या शिव की प्रतिमा के सामने प्रतिदिन तीन बार इसका पाठ करें तो विशेष लाभ होगा.*
*?जो व्यक्ति कष्ट में हैं अगर वह स्वयं पाठ करें तो सर्वोत्तम फलदायी होता है लेकिन परिजन जैसे पत्नी या माता-पिता भी उसके बदले पाठ करें तो लाभ होता है.*
*?शिवजी का ध्यान कर मन में संकल्प करें. जो मनोकामना हो उसका ध्यान करें फिर पाठ आरंभ करें.*
*?श्लोकों को गाकर पढ़े तो बहुत अच्छा, अन्यथा मन में भी पाठ कर सकते हैं. आर्थिक संकटों के साथ-साथ परिवार में सुख शांति के लिए भी इस मंत्र का जप बताया गया है.*
*।।दारिद्रय दहन स्तोत्रम्।।*
विश्वेशराय नरकार्ण अवतारणाय
कर्णामृताय शशिशेखर धारणाय।
कर्पूर कान्ति धवलाय, जटाधराय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।1
गौरी प्रियाय रजनीश कलाधराय,
कलांतकाय भुजगाधिप कंकणाय।
गंगाधराय गजराज विमर्दनाय
द्रारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।2
भक्तिप्रियाय भवरोग भयापहाय
उग्राय दुर्ग भवसागर तारणाय।
ज्योतिर्मयाय गुणनाम सुनृत्यकाय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।3
चर्माम्बराय शवभस्म विलेपनाय,
भालेक्षणाय मणिकुंडल-मण्डिताय।
मँजीर पादयुगलाय जटाधराय
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।4
पंचाननाय फणिराज विभूषणाय
हेमांशुकाय भुवनत्रय मंडिताय।
आनंद भूमि वरदाय तमोमयाय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।5
भानुप्रियाय भवसागर तारणाय,
कालान्तकाय कमलासन पूजिताय।
नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।6
रामप्रियाय रधुनाथ वरप्रदाय
नाग प्रियाय नरकार्ण अवताराणाय।
पुण्येषु पुण्य भरिताय सुरार्चिताय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।7
मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय
गीतप्रियाय वृषभेश्वर वाहनाय।
मातंग चर्म वसनाय महेश्वराय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।8
वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्व रोग निवारणम्
सर्व संपत् करं शीघ्रं पुत्र पौत्रादि वर्धनम्।।
शुभदं कामदं ह्दयं धनधान्य प्रवर्धनम्
त्रिसंध्यं यः पठेन् नित्यम् स हि स्वर्गम् वाप्युन्यात्।।9
।।इति श्रीवशिष्ठरचितं दारिद्रयुदुखदहन शिवस्तोत्रम संपूर्णम्।।

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  महाशिवरात्रि पर कैसे करे शिव पूजा
Posted by: Govind Acharya - 03-04-2019, 06:01 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

महाशिवरात्रि पर कैसे करे शिव पूजा :--

सामान्य मंत्रो से सम्पूर्ण शिवपूजन प्रकार और पद्धति:---
देवों के देव भगवान भोले नाथ के भक्तों के लिये श्री महाशिवरात्रि का व्रत विशेष महत्व रखता हैं। यह पर्व फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस वर्ष यह उपवास 4 मार्च - सोमवार के दिन का रहेगा। इस दिन का व्रत रखने से भगवान भोले नाथ शीघ्र प्रसन्न होकर, उपवासक की मनोकामना पूरी करते हैं। इस व्रत को सभी स्त्री-पुरुष, बच्चे, युवा, वृद्धों के द्वारा किया जा सकता हैं।

4 मार्च के दिन विधिपूर्वक व्रत रखने पर तथा शिवपूजन,रुद्राभिषेक, शिवरात्रि कथा, शिव स्तोत्रों का पाठ व "ॐ नम: शिवाय" का पाठ करते हुए रात्रि जागरण करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता हैं। व्रत के दूसरे दिन  यथाशक्ति वस्त्र-क्षीर सहित भोजन, दक्षिणादि प्रदान करके संतुष्ट किया जाता हैं।

चार प्रहर पूजन अभिषेक विधान :--
प्रथम प्रहर- सायं 6:48 से रात्रि 9:58 तक

द्वितीय प्रहर- रात्रि 9:58 से रात्रि 1:08 तक

तृतीय प्रहर- रात्रि 1:08 से रात्रि 4:18 तक

चतुर्थ प्रहर- रात्रि 4:18 से प्रातः 7:28 बजे तक पहर की गणना अपने स्थानीय सूर्योदय से करना विधि सम्मत है।

शिवरात्री व्रत की महिमा :--
इस व्रत के विषय में यह मान्यता है कि इस व्रत को जो जन करता है, उसे सभी भोगों की प्राप्ति के बाद, मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत सभी पापों का क्षय करने वाला है, व इस व्रत को लगातार 14 वर्षो तक करने के बाद विधि-विधान के अनुसार इसका उद्धापन कर देना चाहिए।

महाशिवरात्री व्रत की विधि :--
महाशिवरात्री व्रत को रखने वालों को उपवास के पूरे दिन, भगवान भोले नाथ का ध्यान करना चाहिए। प्रात: स्नान करने के बाद भस्म का तिलक कर रुद्राक्ष की माला धारण की जाती है। इसके ईशान कोण दिशा की ओर मुख कर शिव का पूजन धूप, पुष्पादि व अन्य पूजन सामग्री से पूजन करना चाहिए।

इस व्रत में चारों पहर में पूजन किया जाता है। प्रत्येक पहर की पूजा में "उँ नम: शिवाय" व " शिवाय नम:" का जाप करते रहना चाहिए। अगर शिव मंदिर में यह जाप करना संभव न हों, तो घर की पूर्व दिशा में, किसी शान्त स्थान पर जाकर इस मंत्र का जाप किया जा सकता हैं। चारों पहर में किये जाने वाले इन मंत्र जापों से विशेष पुन्य प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त उपावस की अवधि में 4 पहर का रुद्राभिषेक करने से भगवान शंकर अत्यन्त प्रसन्न होते है।

शिवपूजन में ध्यान रखने जैसे कुछ खास बाते 
(१)? स्नान कर के ही पूजा में बेठे
(२)? साफ सुथरा वस्त्र धारण कर ( हो शके तो शिलाई बिना का तो बहोत अच्छा )
(३)? आसन एक दम स्वच्छ चाहिए ( दर्भासन हो तो उत्तम )
(४)? पूर्व या उत्तर दिशा में मुह कर के ही पूजा करे
(५)? बिल्व पत्र पर जो चिकनाहट वाला भाग होता हे वाही शिवलिंग पर चढ़ाये ( कृपया खंडित बिल्व पत्र मत चढ़ाये )
(६)? संपूर्ण परिक्रमा कभी भी मत करे ( जहा से जल पसार हो रहा हे वहा से वापस आ जाये )
(७)? पूजन में चंपा के पुष्प का प्रयोग ना करे
(८)? बिल्व पत्र के उपरांत आक के फुल, धतुरा पुष्प या नील कमल का प्रयोग अवश्य कर शकते हे
(९)? शिव प्रसाद का कभी भी इंकार मत करे ( ये सब के लिए पवित्र हे )

  पूजन सामग्री :--
शिव की मूर्ति या शिवलिंगम, अबीर- गुलाल, चन्दन ( सफ़ेद ) अगरबत्ती धुप ( गुग्गुल ) बिलिपत्र बिल्व फल, तुलसी, दूर्वा, चावल, पुष्प, फल,मिठाई, पान-सुपारी,जनेऊ, पंचामृत, आसन, कलश, दीपक, शंख, घंट, आरती यह सब चीजो का होना आवश्यक है।

पूजन करने का विधि-विधान:--
महाशिवरात्री के दिन शिवभक्त का जमावडा शिव मंदिरों में विशेष रुप से देखने को मिलता है। भगवान भोले नाथ अत्यधिक प्रसन्न होते है, जब उनका पूजन बेल- पत्र आदि चढाते हुए किया जाता है। व्रत करने और पूजन के साथ जब रात्रि जागरण भी किया जाये, तो यह व्रत और अधिक शुभ फल देता है। इस दिन भगवान शिव की शादी हुई थी, इसलिये रात्रि में शिव की बारात निकाली जाती है। सभी वर्गों के लोग इस व्रत को कर पुन्य प्राप्त कर सकते हैं।

पूजन विधि :--
महाशिव रात्रि के दिन शिव अभिषेक करने के लिये सबसे पहले एक मिट्टी का बर्तन लेकर उसमें पानी भरकर, पानी में बेलपत्र, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग को अर्पित किये जाते है। व्रत के दिन शिवपुराण का पाठ सुनना चाहिए और मन में असात्विक विचारों को आने से रोकना चाहिए। शिवरात्रि के अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है।

जो इंसान भगवन शंकर का पूजन करना चाहता हे उसे प्रातः कल जल्दी उठकर प्रातः कर्म पुरे करने के बाद पूर्व दिशा या इशान कोने की और अपना मुख रख कर .. प्रथम आचमन करना चाहिए बाद में खुद के ललाट पर तिलक करना चाहिए बाद में निन्म मंत्र बोल कर शिखा बांधनी चाहिए

शिखा मंत्र?  ह्रीं उर्ध्वकेशी विरुपाक्षी मस्शोणित भक्षणे। तिष्ठ देवी शिखा मध्ये चामुंडे ह्य पराजिते।।

आचमन मंत्र :--
ॐ केशवाय नमः / ॐ नारायणाय नमः / ॐ माधवाय नमः 
तीनो बार पानी हाथ में लेकर पीना चाहिए और बाद में ॐ गोविन्दाय नमः बोल हाथ धो लेने चाहिए बाद में बाये हाथ में पानी ले कर दाये हाथ से पानी .. अपने मुह, कर्ण, आँख, नाक, नाभि, ह्रदय और मस्तक पर लगाना चाहिए और बाद में ह्रीं नमो भगवते वासुदेवाय बोल कर खुद के चारो और पानी के छीटे डालने चाहिए
ह्रीं नमो नारायणाय बोल कर प्राणायाम करना चाहिए

स्वयं एवं सामग्री पवित्रीकरण:--

'ॐ अपवित्र: पवित्रो व सर्वावस्था गतोपी व।
 य: स्मरेत पूंडरीकाक्षम सह: बाह्याभ्यांतर सूचि।।

(बोल कर शरीर एवं पूजन सामग्री पर जल का छिड़काव करे - शुद्धिकरण के लिए )

न्यास?  निचे दिए गए मंत्र बोल कर बाजु में लिखे गए अंग पर अपना दाया हाथ का स्पर्श करे।
ह्रीं नं पादाभ्याम नमः / ( दोनों पाव पर ),
ह्रीं मों जानुभ्याम नमः / ( दोनों जंघा पर )
ह्रीं भं कटीभ्याम नमः / ( दोनों कमर पर )
ह्रीं गं नाभ्ये नमः / ( नाभि पर )
ह्रीं वं ह्रदयाय नमः / ( ह्रदय पर )
ह्रीं ते बाहुभ्याम नमः / ( दोनों कंधे पर )
ह्रीं वां कंठाय नमः / ( गले पर )
ह्रीं सुं मुखाय नमः / ( मुख पर )
ह्रीं दें नेत्राभ्याम नमः / ( दोनों नेत्रों पर )
ह्रीं वां ललाटाय नमः / ( ललाट पर )
ह्रीं यां मुध्र्ने नमः / ( मस्तक पर )
ह्रीं नमो भगवते वासुदेवाय नमः / ( पुरे शरीर पर )
तत्पश्चात भगवन शंकर की पूजा करे

(पूजन विधि निम्न प्रकार से है):--
तिलक मन्त्र?   स्वस्ति तेस्तु द्विपदेभ्यश्वतुष्पदेभ्य एवच / स्वस्त्यस्त्व पादकेभ्य श्री सर्वेभ्यः स्वस्ति सर्वदा //

नमस्कार मंत्र? हाथ मे अक्षत पुष्प लेकर निम्न मंत्र बोलकर नमस्कार करें।
 श्री गणेशाय नमः 
 इष्ट देवताभ्यो नमः 
 कुल देवताभ्यो नमः 
 ग्राम देवताभ्यो नमः 
 स्थान देवताभ्यो नमः 
 सर्वेभ्यो देवेभ्यो नमः 
 गुरुवे नमः  
 मातृ पितरेभ्यो नमः
ॐ शांति शांति शांति

गणपति स्मरण :--
 सुमुखश्चैकदंतश्च कपिलो गज कर्णक  लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायक।।
धुम्र्केतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः  द्वाद्शैतानी नामानी यः पठेच्छुनुयादापी।।
विध्याराम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमेस्त्था। संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते।।
शुक्लाम्बर्धरम देवं शशिवर्ण चतुर्भुजम। प्रसन्न वदनं ध्यायेत्सर्व विघ्नोपशाताये।।
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि सम प्रभु। निर्विघम कुरु में देव सर्वकार्येशु सर्वदा।।

संकल्प? 
(दाहिने हाथ में जल अक्षत और द्रव्य लेकर निम्न संकल्प मंत्र बोले Smile
'ऊँ विष्णु र्विष्णुर्विष्णु : श्रीमद् भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्त्तमानस्य अद्य श्री ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय परार्धे श्री श्वेत वाराह कल्पै वैवस्वत मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे युगे कलियुगे कलि प्रथमचरणे भूर्लोके जम्बूद्वीपे भारत वर्षे भरत खंडे आर्यावर्तान्तर्गतैकदेशे ---*--- नगरे ---**--- ग्रामे वा बौद्धावतारे विजय नाम संवत्सरे श्री सूर्ये दक्षिणायने वर्षा ऋतौ महामाँगल्यप्रद मासोत्तमे शुभ भाद्रप्रद मासे शुक्ल पक्षे चतुर्थ्याम्‌ तिथौ भृगुवासरे हस्त नक्षत्रे शुभ योगे गर करणे तुला राशि स्थिते चन्द्रे सिंह राशि स्थिते सूर्य वृष राशि स्थिते देवगुरौ शेषेषु ग्रहेषु च यथा यथा राशि स्थान स्थितेषु सत्सु एवं ग्रह गुणगण विशेषण विशिष्टायाँ चतुर्थ्याम्‌ शुभ पुण्य तिथौ -- +-- गौत्रः --++-- अमुक शर्मा, वर्मा, गुप्ता, दासो ऽहं मम आत्मनः श्रीमन्‌ महागणपति प्रीत्यर्थम्‌ यथालब्धोपचारैस्तदीयं पूजनं करिष्ये।''
इसके पश्चात्‌ हाथ का जल किसी पात्र में छोड़ देवें।

नोट?  ------ यहाँ पर अपने नगर का नाम बोलें ------ यहाँ पर अपने ग्राम का नाम बोलें ---- यहाँ पर अपना कुल गौत्र बोलें ---- यहाँ पर अपना नाम बोलकर शर्मा/ वर्मा/ गुप्ता आदि बोलें

द्विग्रक्षण - मंत्र?  यादातर संस्थितम भूतं स्थानमाश्रित्य सर्वात:/ स्थानं त्यक्त्वा तुं तत्सर्व यत्रस्थं तत्र गछतु //
यह मंत्र बोल कर चावालको अपनी चारो और डाले।

वरुण पूजन?  
अपाम्पताये वरुणाय नमः। 
सक्लोप्चारार्थे गंधाक्षत पुष्पह: समपुज्यामी।
यह बोल कर कलश के जल में चन्दन - पुष्प डाले और कलश में से थोडा जल हाथ में ले कर निन्म मंत्र बोल कर पूजन सामग्री और खुद पर वो जल के छीटे डाले

दीप पूजन? दिपस्त्वं देवरूपश्च कर्मसाक्षी जयप्रद:। 
साज्यश्च वर्तिसंयुक्तं दीपज्योती जमोस्तुते।।
( बोल कर दीप पर चन्दन और पुष्प अर्पण करे )

शंख पूजन?   लक्ष्मीसहोदरस्त्वंतु विष्णुना विधृत: करे। निर्मितः सर्वदेवेश्च पांचजन्य नमोस्तुते।।
( बोल कर शंख पर चन्दन और पुष्प चढ़ाये )

घंट पूजन? देवानं प्रीतये नित्यं संरक्षासां च विनाशने।
 घंट्नादम प्रकुवर्ती ततः घंटा प्रपुज्यत।।
( बोल कर घंट नाद करे और उस पर चन्दन और पुष्प चढ़ाये )

ध्यान मंत्र?  ध्यायामि दैवतं श्रेष्ठं नित्यं धर्म्यार्थप्राप्तये। 
धर्मार्थ काम मोक्षानाम साधनं ते नमो नमः।।
( बोल कर भगवान शंकर का ध्यान करे )

आहवान मंत्र?   आगच्छ देवेश तेजोराशे जगत्पतये।
पूजां माया कृतां देव गृहाण सुरसतम।।
( बोल कर भगवन शिव को आह्वाहन करने की भावना करे )

आसन मंत्र?   सर्वकश्ठंयामदिव्यम नानारत्नसमन्वितम। कर्त्स्वरसमायुक्तामासनम प्रतिगृह्यताम।।
( बोल कर शिवजी कोई आसन अर्पण करे )

खाध्य प्रक्षालन? उष्णोदकम निर्मलं च सर्व सौगंध संयुत। 
पद्प्रक्षलानार्थय दत्तं ते प्रतिगुह्यतम।।
( बोल कर शिवजी के पैरो को पखालने हे )

अर्ध्य मंत्र?  जलं पुष्पं फलं पत्रं दक्षिणा सहितं तथा। गंधाक्षत युतं दिव्ये अर्ध्य दास्ये प्रसिदामे।।
( बोल कर जल पुष्प फल पात्र का अर्ध्य देना चाहिए )

पंचामृत स्नान? पायो दाढ़ी धृतम चैव शर्करा मधुसंयुतम। पंचामृतं मयानीतं गृहाण परमेश्वर।।
( बोल कर पंचामृत से स्नान करावे )

स्नान मंत्र? गंगा रेवा तथा क्षिप्रा पयोष्नी सहितास्त्था। स्नानार्थ ते प्रसिद परमेश्वर।।
(बोल कर भगवन शंकर को स्वच्छ जल से स्नान कराये और चन्दन पुष्प चढ़ाये )

संकल्प मन्त्र? अनेन स्पन्चामृत पुर्वरदोनोने आराध्य देवता: प्रियत्नाम। ( तत पश्यात शिवजी कोई चढ़ा हुवा पुष्प ले कर अपनी आख से स्पर्श कराकर उत्तर दिशा की और फेक दे ,बाद में हाथ को धो कर फिर से चन्दन पुष्प चढ़ाये )

अभिषेक मंत्र?  सहस्त्राक्षी शतधारम रुषिभी: पावनं कृत। तेन त्वा मभिशिचामी पवामान्य : पुनन्तु में।।
( बोल कर जल शंख में भर कर शिवलिंगम पर अभिषेक करे ) बाद में शिवलिंग या प्रतिमा को स्वच्छ जल से स्नान कराकर उनको साफ कर के उनके स्थान पर विराजमान करवाए

वस्त्र मंत्र? सोवर्ण तन्तुभिर्युकतम रजतं वस्त्र्मुत्तमम। परित्य ददामि ते देवे प्रसिद गुह्यतम।।
( बोल कर वस्त्र अर्पण करने की भावना करे )

जनेऊ मन्त्र?  नवभिस्तन्तुभिर्युकतम त्रिगुणं देवतामयम। उपवीतं प्रदास्यामि गृह्यताम परमेश्वर।।
( बोल कर जनेऊ अर्पण करने की भावना करे )

चन्दन मंत्र? मलयाचम संभूतं देवदारु समन्वितम। विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रति गृह्यताम।।
( बोल कर शिवजी को चन्दन का लेप करे )

अक्षत मंत्र? अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ कंकुमुकदी सुशोभित। 
माया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वर।। 
(बोल चावल चढ़ाये )

पुष्प मंत्र? नाना सुगंधी पुष्पानी रुतुकलोदभवानी च। मायानितानी प्रीत्यर्थ तदेव प्रसिद में।।
( बोल कर शिवजी को विविध पुष्पों की माला अर्पण करे )

तुलसी मंत्र? तुलसी हेमवर्णा च रत्नावर्नाम च मजहीम / प्रीती सम्पद्नार्थय अर्पयामी हरिप्रियाम।।
( बोल कर तुलसी पात्र अर्पण करे )

बिल्वपत्र मन्त्र?  त्रिदलं त्रिगुणा कारम त्रिनेत्र च त्र्ययुधाम। 
त्रिजन्म पाप संहारमेकं बिल्वं शिवार्पणं।।
( बोल कर बिल्वपत्र अर्पण करे )

दूर्वा मन्त्र?  दुर्वकुरण सुहरीतन अमृतान मंगलप्रदान।
आतितामस्तव पूजार्थं प्रसिद परमेश्वर शंकर :।।
( बोल करे दूर्वा दल अर्पण करे )

सौभाग्य द्रव्य?  हरिद्राम सिंदूर चैव कुमकुमें समन्वितम।
सौभागयारोग्य प्रीत्यर्थं गृहाण परमेश्वर शंकर :।।
( बोल कर अबिल गुलाल चढ़ाये और होश्के तो अलंकर और आभूषण शिवजी को अर्पण करे )

धुप मन्त्र? वनस्पति रसोत्पन्न सुगंधें समन्वित :।
देव प्रितिकारो नित्यं धूपों यं प्रति गृह्यताम।।
( बोल कर सुगन्धित धुप करे )

दीप मन्त्र?  त्वं ज्योति : सर्व देवानं तेजसं तेज उत्तम :.।
आत्म ज्योति: परम धाम दीपो यं प्रति गृह्यताम।।
( बोल कर भगवन शंकर के सामने दीप प्रज्वलित करे )

नैवेध्य मन्त्र?  नैवेध्यम गृह्यताम देव भक्तिर्मेह्यचलां कुरु।
इप्सितम च वरं देहि पर च पराम गतिम्।।
( बोल कर नैवेध्य चढ़ाये )

भोजन (नैवेद्य मिष्ठान मंत्र) ?
ॐ प्राणाय स्वाहा.
ॐ अपानाय स्वाहा.
ॐ समानाय स्वाहा
ॐ उदानाय स्वाहा.
ॐ समानाय स्वाहा 
( बोल कर भोजन कराये )

नैवेध्यांते हस्तप्रक्षालानं मुख्प्रक्षालानं आरामनियम च समर्पयामि 

निम्न ५ मंत्र से भोजन करवाए और ३ बार जल अर्पण करें और बाद में देव को चन्दन चढ़ाये।

मुखवास मंत्र? एलालवंग संयुक्त पुत्रिफल समन्वितम। 
नागवल्ली दलम दिव्यं देवेश प्रति गुह्याताम।। 
( बोल कर पान सोपारी अर्पण करे )

दक्षिणा मंत्र? ह्रीं हेमं वा राजतं वापी पुष्पं वा पत्रमेव च।
दक्षिणाम देवदेवेश गृहाण परमेश्वर शंकर।।
( बोल कर अपनी शक्ति अनुसार दक्षिणा अर्पण करे )

आरती मंत्र? सर्व मंगल मंगल्यम देवानं प्रितिदयकम।
निराजन महम कुर्वे प्रसिद परमेश्वर।। ( बोल कर एक बार आरती करे )
बाद में आरती की चारो और जल की धरा करे और आरती पर पुष्प चढ़ाये सभी को आरती दे और खुद भी आरती ले कर हाथ धो ले।

अथवा भगवान गंगाधर की आरती करें

? भगवान् गंगाधर की आरती ?

ॐ जय गंगाधर जय हर जय गिरिजाधीशा। त्वं मां पालय नित्यं कृपया जगदीशा॥ हर...॥ 
कैलासे गिरिशिखरे कल्पद्रमविपिने। गुंजति मधुकरपुंजे कुंजवने गहने॥ 
कोकिलकूजित खेलत हंसावन ललिता। रचयति कलाकलापं नृत्यति मुदसहिता ॥ हर...॥ 
तस्मिंल्ललितसुदेशे शाला मणिरचिता। तन्मध्ये हरनिकटे गौरी मुदसहिता॥ 
क्रीडा रचयति भूषारंचित निजमीशम्‌। इंद्रादिक सुर सेवत नामयते शीशम्‌ ॥ हर...॥ 
बिबुधबधू बहु नृत्यत नामयते मुदसहिता। किन्नर गायन कुरुते सप्त स्वर सहिता॥ 
धिनकत थै थै धिनकत मृदंग वादयते। क्वण क्वण ललिता वेणुं मधुरं नाटयते ॥हर...॥ 
रुण रुण चरणे रचयति नूपुरमुज्ज्वलिता। चक्रावर्ते भ्रमयति कुरुते तां धिक तां॥ 
तां तां लुप चुप तां तां डमरू वादयते। अंगुष्ठांगुलिनादं लासकतां कुरुते ॥ हर...॥ 
कपूर्रद्युतिगौरं पंचाननसहितम्‌। त्रिनयनशशिधरमौलिं विषधरकण्ठयुतम्‌॥ 
सुन्दरजटायकलापं पावकयुतभालम्‌। डमरुत्रिशूलपिनाकं करधृतनृकपालम्‌ ॥ हर...॥ 
मुण्डै रचयति माला पन्नगमुपवीतम्‌। वामविभागे गिरिजारूपं अतिललितम्‌॥ 
सुन्दरसकलशरीरे कृतभस्माभरणम्‌। इति वृषभध्वजरूपं तापत्रयहरणं ॥ हर...॥ 
शंखनिनादं कृत्वा झल्लरि नादयते। नीराजयते ब्रह्मा वेदऋचां पठते॥ 
अतिमृदुचरणसरोजं हृत्कमले धृत्वा। अवलोकयति महेशं ईशं अभिनत्वा॥ हर...॥ 
ध्यानं आरति समये हृदये अति कृत्वा। रामस्त्रिजटानाथं ईशं अभिनत्वा॥ 
संगतिमेवं प्रतिदिन पठनं यः कुरुते। शिवसायुज्यं गच्छति भक्त्या यः श्रृणुते ॥ हर...॥

पुष्पांजलि मंत्र? पुष्पांजलि प्रदास्यामि मंत्राक्षर समन्विताम।
तेन त्वं देवदेवेश प्रसिद परमेश्वर।।
( बोल कर पुष्पांजलि अर्पण करे )

प्रदक्षिणा? यानी पापानि में देव जन्मान्तर कृतानि च।
तानी सर्वाणी नश्यन्तु प्रदिक्षिने पदे पदे।।
( बोल कर प्रदिक्षिना करे )
बाद में शिवजी के कोई भी मंत्र स्तोत्र या शिव शहस्त्र नाम स्तोत्र का पाठ करे अवश्य शिव कृपा प्राप्त होगी।

पूजा में हुई अशुद्धि के लिये निम्न स्त्रोत्र पाठ से क्षमा याचना करें।

।।देव्पराधक्षमापनस्तोत्रम्।।

न मन्त्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो
न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथा:।
न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं
परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम्

विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया
विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत्।
तदेतत् क्षन्तव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे
कुपुत्रो जायेत क्व चिदपि कुमाता न भवति

पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहव: सन्ति सरला:
परं तेषां मध्ये विरलतरलोहं तव सुत:।
मदीयोऽयं त्याग: समुचितमिदं नो तव शिवे
कुपुत्रो जायेत क्व चिदपि कुमाता न भवति

जगन्मातर्मातस्तव चरणसेवा न रचिता
न वा दत्तं देवि द्रविणमपि भूयस्तव मया।
तथापि त्वं स्नेहं मयि निरुपमं यत्प्रकुरुषे
कुपुत्रो जायेत क्व चिदपि कुमाता न भवति

परित्यक्ता देवा विविधविधिसेवाकुलतया
मया पञ्चाशीतेरधिकमपनीते तु वयसि।
इदानीं चेन्मातस्तव यदि कृपा नापि भविता
निरालम्बो लम्बोदरजननि कं यामि शरणम्

श्वपाको जल्पाको भवति मधुपाकोपमगिरा
निरातङ्को रङ्को विहरित चिरं कोटिकनकै:।
तवापर्णे कर्णे विशति मनुवर्णे फलमिदं
जन: को जानीते जननि जपनीयं 

चिताभस्मालेपो गरलमशनं दिक्पटधरो
जटाधारी कण्ठे भुजगपतिहारी पशुपति:।
कपाली भूतेशो भजति जगदीशैकपदवीं
भवानि त्वत्पाणिग्रहणपरिपाटीफलमिदम्

न मोक्षस्याकाड्क्षा भवविभववाञ्छापि च न मे
न विज्ञानापेक्षा शशिमुखि सुखेच्छापि न पुन:।
अतस्त्वां संयाचे जननि जननं यातु मम वै
मृडानी रुद्राणी शिव शिव भवानीति जपत:

नाराधितासि विधिना विविधोपचारै:
किं रुक्षचिन्तनपरैर्न कृतं वचोभि:।
श्यामे त्वमेव यदि किञ्चन मय्यनाथे
धत्से कृपामुचितमम्ब परं तवैव

आपत्सु मग्न: स्मरणं त्वदीयं
करोमि दुर्गे करुणार्णवेशि।
नैतच्छठत्वं मम भावयेथा:
क्षुधातृषार्ता जननीं स्मरन्ति

जगदम्ब विचित्रमत्र किं परिपूर्णा करुणास्ति चेन्मयि।
अपराधपरम्परापरं न हि माता समुपेक्षते सुतम्

मत्सम: पातकी नास्ति पापन्घी त्वत्समा न हि।
एवं ज्ञात्वा महादेवि यथा योग्यं तथा कुरु।।

टंकण अशुद्धि के लिए क्षमा प्रार्थी।

भगवान भोलेनाथ आपकी मनोकामना पूर्ण करें

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Heart महाशिवरात्रि
Posted by: Rajat Gupta - 03-04-2019, 02:15 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

महाशिवरात्रि,  
4 मार्च सोमवार


संस्कृति में रात्रि शब्द का अर्थ है- वह जो तीन प्रकार की व्यथाओं से आप को मुक्त करे। यह तीन साधनों-शरीर, मन और वाणी को विश्राम देती है। 

? शाब्दिक अर्थ
शिवरात्रि का शाब्दिक अर्थ है वह रात्रि जो तीन साधनों में शिवतत्व को समाहित करती है, वह तत्व जो सबसे परे है। समाधि को शिवसंयुज्ञ्न, शिव की उपस्थिति भी कहा जाता है, जिसका का वर्णन अत्याधिक कठिन है। कबीरदास जी ने इसे कोटि कल्प विश्राम- एक क्षण में समाहित करोड़ों वर्षो का विश्राम, कहा है। यह सजगता से युक्त गहनतम विश्राम की स्थिति है जो सभी प्रकार की पहचान से मुक्ति दिलाती है। 

? शिवतत्व
शिवतत्व सर्वव्याप्त है। अभिज्ञान, गहन समाधि में, स्वयं की चेतना में इसके अद्वैत स्वरूप के प्रति सजग रहते हुए, इसकी सघन व्यापकता के प्रति सजग होता है। यह ऐसे ही है जैसे कोई लहर कुशलतापूर्वक समुद्र की व्यापक विशालता के प्रति सजग रहे। जागरण का अर्थ केवल ऊंची आवाज में भजन गाना या बलपूर्वक स्वयं को जगाए रखना नहीं है। यह है स्वयं को जागृत रखना, आत्मोन्मुख होना एवं अपने अंदर उस विश्राम के प्रति सजग होना, जो नींद में आप को वैसे भी प्राप्त होता है। 

? रात्रिजागरण अभिप्राय
जागरण का अर्थ है अपने मन को आत्मोन्मुख करना। जब भी आप का मन स्वयं की ओर मुड़ता है, यह असजगता से पूर्ण नींद में चला जाता है। कई बार जब लोग ध्यान करते हैं, वे समझ नहीं पाते कि वे ध्यान में थे या सो रहे थे। जब वे इससे बाहर आते हैं, वे मन तथा इंद्रियों को अतुल्य विश्राम देने वाले, एक निश्चित सुख तथा स्थिरता का अनुभव करते हैं। शिव तथा शक्ति के मिलन की एक कहानी शिवरात्रि से संबंधित है। आदि तथा चैतन्य शक्ति का विश्वातीत से  गठबंधन है। शिव मौन साक्षी, चिदाकाश है तथा शक्ति, चित्ति अथवा चित्तविलास है, वह शक्ति जो इस अनंत आकाश में भिन्न-भिन्न आकार, विचार रचती है। केवल जागृत अवस्था में ही यह ज्ञान चेतना में प्राप्त होता है और शिवरात्रि सर्वव्याप्त चेतना की जागृति के उत्सव की रात है, निश्चेतन नींद में न जाते हुए, निश्चेतन नींद के स्वरूप के टूटने से आपको आभास होता है कि आप केवल यांत्रिक ढांचा नहीं बल्कि सृष्टि में एक महान कृति हैं। 

शिव तत्त्व के अनुभव के लिए आप को जागृत होना होगा।

? शिव हैं शाश्वत का प्रतीक
शिव को अपनी प्रिया देवी के साथ देखो। वे दो नहीं मालूम होते, एक ही हैं। यह एकता इतनी गहरी है कि प्रतीक बन गई है। ध्यान की पहली विधि शिव प्रेम से शुरू करते हैं: प्रिय देवी, प्रेम किए जाने के क्षण में प्रेम में ऐसे प्रवेश करो जैसे कि वह नित्य जीवन हो।
शिव प्रेम से शुरू करते हैं। पहली विधि प्रेम से संबंधित है क्योंकि तुम्हारे शिथिल होने के अनुभव में प्रेम का अनुभव निकटतम है। अगर तुम प्रेम नहीं कर सकते हो तो तुम शिथिल भी नहीं हो सकते। अगर तुम शिथिल हो सके तो तुम्हारा जीवन प्रेमपूर्ण हो जाएगा। एक तनावग्रस्त आदमी प्रेम नहीं कर सकता, क्योंकि तनावग्रस्त आदमी सदा उद्देश्य से, प्रयोजन से जीता है। हिसाब-किताब रखने वाला मन, तार्किक मन, प्रयोजन की भाषा में सोचने वाला मन प्रेम नहीं कर सकता। प्रेम सदा यहां है और अभी है। प्रेम का कोई भविष्य नहीं है। यही वजह है कि प्रेम ध्यान के इतने करीब है। मृत्यु भी ध्यान के इतने करीब है क्योंकि मृत्यु भी यहां है और अभी है, वह भविष्य में नहीं घटती। मृत्यु, प्रेम, ध्यान, सब वर्तमान में घटित होते हैं। इन तीनों को एक साथ रखना अजीब मालूम पड़ेगा। वह अजीब नहीं है। वे समान अनुभव हैं। इसलिए अगर तुम एक में प्रवेश कर गए तो शेष दो में भी प्रवेश पा जाओगे।

? शिव-शक्ति संवाद वर्णित प्रेम 
‘प्रिय देवी, प्रेम किए जाने के क्षण में प्रेम में ऐसे प्रवेश करो जैसे कि वह नित्य जीवन हो।’ पहली चीज कि प्रेम के क्षण में अतीत व भविष्य नहीं होते हैं। जब अतीत व भविष्य नहीं रहते तब क्या तुम इस क्षण को वर्तमान कह सकते हो? यह वर्तमान है दो के बीच, अतीत व भविष्य के बीच, यह सापेक्ष है। अगर अतीत व भविष्य नहीं रहे तो इसे वर्तमान कहने में क्या तुक है! इसलिए शिव वर्तमान शब्द का व्यवहार नहीं करते। वे कहते हैं, नित्य जीवन। उनका मतलब शाश्वत से है। शाश्वत में प्रवेश करो। अगर यह यात्रा क्षणिक न रहे, यह यात्रा ध्यानपूर्ण हो जाए, अर्थात अगर तुम अपने को भूल जाओ व प्रेमी-प्रेमिका विलीन हो जाएं व केवल प्रेम प्रवाहित होता रहे, 

तो शिव कहते हैं- शाश्वत जीवन तुम्हारा है। 
ॐ शिव पार्वती

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Star नार्मदीय समाज वार्षिकोत्सव 2019
Posted by: admin - 03-03-2019, 09:02 AM - Forum: Gift Voucher - No Replies

नार्मदीय समाज वार्षिकोत्सव 2019

नर्मदे-हर !!

नार्मदीय समाज वार्षिकोत्सव 2019 में अलंकृत सभी वर्ग में वेबसाइट द्वारा रू. 1000 के कुल 28 वाउचर उपहार स्वरुप भेंट किये गए. सम्मानित समस्त समाजजनों को हार्दिक बधाई. आशा करते हैं की जिस प्रकार पिछले 6 वर्षों में देश-विदेश के करीब 5000 से अधिक लोगों ने फ्री और पेड सेवाओं का लाभ लिया है आपको और आपके परिवार को भी इस सेवा का अधिकतम लाभ प्राप्त हो. नार्मदीय समाज के विवाह योग्य युवक-युवती फ्री परामर्श सेवा का लाभ भी ले सकते हैं.

   

   



.pdf   Gift Voucher.pdf (Size: 345.75 KB / Downloads: 139)



सम्मानित समस्त समाजजनों के नाम निम्न प्रकार से हैं.

   


   
   
   
   
   

विशिष्ट युवा परिचय सम्मलेन "मीत-मिलन" 9 मार्च 2019

ईश्वर और माँ नर्मदा से प्रार्थना करते है हर युवक-युवती जीवनसाथी की खोज में शीघ्र सफल हो और उनका जीवन मंगलमय हो।


   

नार्मदीय समाज वार्षिकोत्सव 10 मार्च 2019

   

   

   

   

   

   



नर्मदे-हर !!

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Heart एक ओंकार सतनाम (गुरू नानक) प्रवचन--10
Posted by: Osho Prem - 03-03-2019, 08:52 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

सूफी फकीर हुआ, बायजीद। 
वह अपनी प्रार्थना में परमात्मा से कहता था, 
मेरी प्रार्थनाओं का खयाल मत करना। 
तू उन्हें पूरी मत करना। 
क्योंकि मेरे पास इतनी बुद्धिमत्ता कहां है 
कि मैं वही मांग लूं जो शुभ है!

आदमी बिलकुल बुद्धिहीन है। 
वह जो भी मांगता है, 
उसी के जाल में भटकता है। 
अगर पूरा हो जाता है, 
तो मुश्किल खड़ी हो जाती है। 

पूरा नहीं होता, 
तो मुश्किल खड़ी होती है। 
तुम सोच कर देखो, अतीत में लौटो। 

अपनी जिंदगी का एक दफा लेखा-जोखा करो। 
तुमने जो मांगा, उसमें से कुछ पूरा हुआ है, 
उससे तुम्हें सुख मिला? तुमने जो मांगा, 
उसमें से कुछ पूरा नहीं हुआ है, उससे तुम्हें सुख मिला? 

तुम दोनों हालत में दुख पा रहे हो। 
जो मांगा है, उससे उलझ गए। 
जो मिला है, उससे उलझ गए। 
जो नहीं मिला है, उससे उलझे हुए हो।

बुद्धिमानी क्या है? 
बुद्धिमत्ता का लक्षण क्या है? 
बुद्धिमत्ता का लक्षण है, 

उस सूत्र को मांग लेना जिसे मांग 
लेने से फिर दुख नहीं होता। 
इसलिए धार्मिक व्यक्ति के 
अतिरिक्त कोई बुद्धिमान नहीं है। 

क्योंकि सिर्फ परमात्मा को 
मांगने वाला ही पछताता नहीं। 
बाकी तुम जो भी मांगोगे, पछताओगे। 

इसे तुम गांठ बांध कर रख लो। 
तुम जो भी मांगोगे, पछताओगे। 
सिर्फ परमात्मा को मांगने वाला कभी नहीं पछताता। 

उससे कम में काम भी नहीं चलेगा। 
वही जीवन का गंतव्य है।
लेकिन क्या तुम उस 
परमात्मा को शास्त्रों में पा सकोगे?

नानक कहते हैं, वहां तुम उसे न पा सकोगे। 
वहां तुम्हें शब्द मिल जाएंगे, सिद्धांत मिल जाएंगे, 
सत्य नहीं मिलेगा। सत्य कहां मिलेगा? 
सत्य, नानक कहते हैं--

वह सबसे महान है। 
और वह अपने को आप ही जानता है।'
तुम उसे दूर-दूर रह कर न जान सकोगे। 
तुम जब उसमें डूब जाओगे, 
तभी उसे जान सकोगे। 

सत्य का वही एक मार्ग है। 
परमात्मा के साथ एक हुए बिना 
कोई सत्य को नहीं जान सकता।

हम पदार्थ के संबंध में जानकारी ले सकते हैं। 
विज्ञान इसी तरह की जानकारी है। 

दूर खड़े हो कर, बाहर खड़े हो 
कर वैज्ञानिक परीक्षण करते हैं, 
पदार्थ के संबंध में ज्ञान हो जाता है। 
लेकिन परमात्मा के संबंध में कोई 
ज्ञान बाहर से नहीं हो सकता। 

वहां तो भीतर ही जाना होगा। 
वहां तो इतने भीतर जाना होगा जहां 
कि तुम्हारी और उसकी सीमा खो जाती है। 

तुम उसके हृदय की धड़कन बन जाते हो, 
वह तुम्हारे हृदय की धड़कन बन जाता है। 
जहां इतनी एकता सध जाती है, वहीं ज्ञान है।

शास्त्रों से यह कैसे होगा? 
शब्दों से यह कैसे होगा? 
यह तो प्रेम से ही हो सकता है।

इसलिए नानक कहते हैं, बस, प्रेम कुंजी है। 
और अगर उसके नाम का प्रेम जग जाए, 
अगर उसकी धुन तुम्हारे भीतर बजने लगे, 
और तुम उसके प्रेम में पागल हो जाओ, 
तो तुम जान सकोगे।

एक ओंकार सतनाम (गुरू नानक) प्रवचन--10

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Heart समर्पण की महिमा
Posted by: Osho Prem - 03-03-2019, 08:50 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

समर्पण की महिमा


अहंकार सलाह लेने से डरता है। अहंकार अपनी उलझन खुद ही सुलझा लेना चाहता है। यह भी स्वीकार करने में कि मैं उलझा हूं, अहंकार को चोट लगती है। अहंकार गुरु के पास इसीलिए नहीं जा सकता है।

 
और मजा यह है कि तुम्हारी सारी उलझन अहंकार से पैदा होती है और तुम उसी से सुलझाने की कोशिश करते हो। सुलझाने में और उलझ जाते हो। उलझोगे ही, क्योंकि अहंकार उलझाने का सूत्र है, सुलझाने का नहीं। 

तुम्हारे जीवन की जैसी दशा है, जैसी विकृती है, जैसी रुग्ण अराजकता है, जिसके कारण पैदा हुई उस बीमारी को ही तुम औषधि बना रहे हो। औषधि तुम्हें और मारे डालती है। बीमारी से शायद तुम बच भी जाते, लेकिन औषधि से बचने का कोई उपाय नहीं। और जिसने बीमारी को ही औषधि समझ रखा हो, उसकी उलझन का तो कोई अंत कभी भी न होगा।


एक बात सबसे पहले समझ लेनी जरूरी है..अपने भीतर सदा खोजना, किसके कारण उलझन है और तब कुछ विपरीत की तरफ जाना, वहां से सुलझाव आ सकेगा।

 
अहंकार उलझन है, समर्पण सुलझाव होगा। अहंकार ने रोग निर्मित किया है; समर्पण से मिटेगा। इसलिए तो समस्त शास्त्रों ने, समस्त परंपराओं ने समर्पण की महिमा गायी है।


 
समर्पण का अर्थ हैः मैं नहीं सुलझा पाता हूं अपने को, और उलझाए चला जाता हूं तो अब मैं अपने को छोड़ता हूं और अपने से बाहर, अपने से विपरीत से सलाह मांगता हूं।



गुरु के पास जाना अहंकार को छोड़े बिना नहीं हो सकता। और तुम अगर गुरु के पास भी जाते हो तो भी अहंकार से ही पूछ के जाते हो। जब वह कह देता है, हां ठीक, तभी तुम्हारी गाड़ी आगे बढ़ती है। तब तो तुम्हारा अहंकार तुम्हारे गुरु से भी बड़ा हो गया; तुम्हारे अहंकार की स्वीकृति से ही गुरु निर्मित हुआ। ऐसे गुरु से भी बहुत सहारा न मिलेगा।



अहंकार के कारण ही सारी दुनिया में हमने विशेषज्ञ पैदा किये। वे ऐसे गुरु हैं जिनके चरणों में तुम्हें समर्पण नहीं करना पड़ता; ज्यादा से ज्यादा फीस चुका दी, उसमें कुछ हर्जा नहीं है। तुम विशेषज्ञ के पास जाते हो, क्योंकि विशेषज्ञ तुम्हारा नौकर हो जाता है। वहां तुम्हें समर्पण नहीं करना पड़ता। बिना समर्पण किये विशेषज्ञ तुम्हारे उलझाव को सुल झाने की कोशिश करता है। विशेषज्ञ दुनिया में बढ़ते जाते हैं, लेकिन उलझाव कम नहीं होता।


गूंगे केरी सर्करा 


ओशो

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Exclamation तो ये है हमारे भयानक मीडिया
Posted by: Rimmi Kapoor - 03-03-2019, 08:15 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

Angel Angel

विंग कमांडर अभिनंदन पैराशूट से पाकिस्तान में उतरने के बाद पाकिस्तानी आतंकियों और सेना के कब्जे में आ गए ।

लेकिन उसके बाद
 भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया
ने जिस तरह जाने या अनजाने में सेना के अभियान को *बर्बाद* करने का प्रयास किया वह पूरी तरह निंदनीय है ।

पाकिस्तानियों ने अभिनंदन से पूछताछ का वीडियो वायरल किया उसके अंश और साथ में भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया की महामूर्खता

आइए इसे समझे कि क्या हुआ ?

पाक :- आप वास्तव में भारत में कहां से हैं?

विंग कमांडर अभिनंदन :- मैं आपको यह बताने वाला नहीं हूं

(ठीक उसी समय)
भारतीय मीडिया एवं सोशल मीडिया :- हम इस वक्त चेन्नई में विंग कमांडर अभिनंदन के घर से रिपोर्ट कर रहे हैं । उनके माता पिता पत्नी उनके घर पर है । उनके पिताजी रिटायर्ड एयर मार्शल है ।



पाक : आप कौन सा विमान उड़ाते हैं

विंग कमांडर अभिनंदन :- क्षमा करें, मैं आपको यह बताने वाला नहीं हूं

(ठीक उसी समय)
भारतीय मीडिया :-  विंग कमांडर अभिनंदन मिग 21 बाइसन उड़ा रहे थे । आइये अब हम आपको मिग 21 बाइसन के बारे मे विस्तार से बतायें 



पाक :- आपका मिशन क्या था ?
विंग कमांडर अभिनंदन :- क्षमा करें, मैं आपको यह बताने वाला नहीं हूं

(ठीक उसी समय)
भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया :- विंग कमांडर अभिनंदन पाक लड़ाकू विमानों को रोकने के मिशन में था। वह एक एफ-16 को गिराने में सफल रहा



पाक :- धन्यवाद भारतीय मीडिया ।
*आप हमेशा से हमारे मददगार रहे है ।*
आपकी मदद से ही हम 26/11 वाले हमले में ज्यादा लोगो को मार सके थे ।

और आपका इसी तरह सहयोग रहा तो ये युद्ध भी हम जीत ही जाएंगे


तो ये है हमारे भयानक मीडिया
 और अपरिपक्व सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की आज की विडंबना । 




भगवान हमारे देश को इन नालायकों से बचाएं .... 
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Thumbs Up तंत्र-सूत्र-(भाग-5)-प्रवचन-72 असुरक्षा में जीना बुद्धत्व का मार्ग है। भाग-II
Posted by: Osho Prem - 03-02-2019, 05:03 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

तंत्र-सूत्र-(भाग-5)-प्रवचन-72


असुरक्षा में जीना बुद्धत्व का मार्ग है-

दूसरा प्रश्न :

कल रात आपने कहा कि प्रेम जीवंत होता है क्योंकि असुरक्षित होता है, और विवाह मृत
होता है क्योंकि सुरक्षित होता है। लेकिन क्या यह सच नहीं है कि प्रेम ही। आध्यात्मिक गहरई में विवाह बन जाता है?

नहीं। प्रेम कभी विवाह नहीं बनता। वह जितना गहरा जाता है उतना ही अधिक प्रेम बन जाता है लेकिन विवाह कभी नहीं बनता। विवाह से मेरा अर्थ है एक बाह्य बंधन, एक कानूनी स्वीकृति, एक सामाजिक समर्थन। और मैं कहता हूं कि प्रेम कभी विवाह नहीं बनता क्योंकि वह कभी सुरक्षित नहीं होता। वह प्रेम ही रहता है। वह अधिक प्रेम और अधिक प्रेम होता चला जाता है, लेकिन जितना अधिक होता है उतना ही असुरक्षित होता जाता है। कोई सुरक्षा नहीं होती। लेकिन यदि तुम प्रेम करते हो तो सुरक्षा की कोई फिक्र नहीं करते। जब तुम प्रेम नहीं करते तभी सुरक्षा की फिक्र होती है।
जब तुम प्रेम करते हो तो वह क्षण ही इतना पर्याप्त होता है कि तुम दूसरे क्षण की चिंता
नहीं करते भविष्य की चिंता नहीं करते। तुम्हें इससे कुछ मतलब नहीं होता कि कल क्या होगा, क्योंकि अभी जो हो रहा है पर्याप्त है, बहुत अधिक है। इतना अधिक है कि संभलता नहीं। तुम कोई चिंता नहीं करते।
मन में सुरक्षा की बात क्यों उठती है? यह चिंता भविष्य के कारण उठती है। वर्तमान पर्याप्त नहीं है इसलिए तुम भविष्य की चिंता करते हो। वास्तव में तुम वर्तमान में नहीं हो। तुम वर्तमान में नहीं जी रहे। तुम इसका आनंद नहीं ले रहे। यह क्षण आनंद नहीं है। वर्तमान आनंद नहीं है। इसलिए तुम भविष्य की आशा करते हो। फिर तुम भविष्य की योजना बनाते हो, फिर तुम भविष्य के लिए हर सुरक्षा जुटा लेना चाहते हो।

प्रेम कभी भी सुरक्षा जुटाना नहीं चाहता, वह स्वयं में ही सुरक्षित होता है। यही सत्य है। प्रेम स्वयं में ही इतना सुरक्षित होता है कि किसी और सुरक्षा की बात ही नहीं सोचता; भविष्य में क्या होगा, इससे कुछ मतलब ही नहीं है। क्योंकि भविष्य इसी वर्तमान से विकसित होगा। उसके बारे में चिंता क्यों करें?
जब वर्तमान आनंदपूर्ण नहीं होता, विषाद होता है, तब तुम भविष्य के लिए चिंतित होते हो। तब तुम उसे सुरक्षित करना चाहते हो। लेकिन याद रखी, कोई भी कुछ भी सुरक्षित नहीं कर सकता। प्रकृति का ऐसा स्वभाव नहीं है। भविष्य तो असुरक्षित रहेगा ही। तुम केवल एक काम कर सकते हो : वर्तमान को और गहनता से जी लो। तुम इतना ही कर सकते हो। यदि उससे कोई सुरक्षा होती है तो वही एकमात्र सुरक्षा है। और यदि सुरक्षा नहीं हो रही तो नहीं हो रही, कुछ भी किया नहीं जा सकता।
लेकिन हमारा मन सदा आत्मघाती ढंग से व्यवहार करता है। वर्तमान जितना विषादयुक्त होता है उतना ही तुम भविष्य के बारे में सोचते हो और उसे सुरक्षित करना चाहते हो। और जितने तुम भविष्य में जाओगे, वर्तमान उतना ही विषादयुक्त होता चला जाएगा। फिर तुम एक दुम्बक्र में फंस गए। यह चक्र तोड़ा जा सकता है, लेकिन इसे तोड़ने का एकमात्र उपाय यही है : वर्तमान क्षण इतनी गहनता से जीया जाए कि यह क्षण ही अपनी गहराई में शाश्वतता बन जाए। इसी से भविष्य पैदा होगा, भविष्य अपना मार्ग स्वयं बना लेगा, तुम्हें इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है।
तो मैं कहता हूं कि प्रेम सुरक्षा के बारे में कभी नहीं सोचता, क्योंकि वह स्वयं में ही इतना सुरक्षित होता है। प्रेम कभी असुरक्षा से भयभीत नहीं होता। यदि जरा भी प्रेम है तो वह असुरक्षा से भयभीत नहीं होता। प्रेम असुरक्षित है, लेकिन प्रेम असुरक्षा से भयभीत नहीं होता। बल्कि, प्रेम असुरक्षा का आनंद लेता है क्योंकि असुरक्षा जीवन को रंग देती है, बदलती हुई ऋतुएं और मौसम देती है धार देती है। यही सौंदर्य है। बदलता हुआ जीवन सुंदर होता है, क्योंकि सदा ही आविष्कृत करने के लिए कुछ शेष रहता है, सदा ही किसी ऐसी चीज से साक्षात्कार होता है जो नई है।
वास्तव में दो प्रेमी सतत एक-दूसरे में नए-नए आविष्कार करते रहते हैं। और गहराई असीम है। एक प्रेम से भरा हृदय असीम है अनंत है। तुम उसे कभी समाप्त नहीं कर सकते। उसका कोई अंत नहीं है। वह बढ़ता ही चला जाता है, आगे फैलता चला जाता है। वह आकाश जैसा ही विशाल है।
प्रेम असुरक्षा की परवाह नहीं करता, प्रेम उसका आनंद ले सकता है। इससे एक पुलक मिलती है। जो प्रेम नहीं कर सकते वे ही असुरक्षा से डरते हैं, क्योंकि उनकी जड़ें जीवन में नहीं जमी हुई हैं। जो प्रेम नहीं कर सकते, वे जीवन में सदा सुरक्षित रहते हैं। वे सुरक्षित करने में ही अपना जीवन व्यर्थ कर देते हैं, और जीवन सुरक्षित कभी होता नहीं, हो नहीं सकता।

सुरक्षा मृत्यु का गुण है; सुरक्षा मृत्यु का गुणधर्म है। जीवन असुरक्षित है, अरि प्रेम इससे नहीं डरता। प्रेम जीवन से, असुरक्षा से नहीं डरता, क्योंकि वह धरती में थिर होता है।’ यदि तुम धरती में थिर नहीं हो और देखो कि झंझावात आ रहा है तो तुम डर जाओगे। लेकिन यदि तुम धरती में थिर हो तो तुम झंझावात का स्वागत करोगे, वह एक पुलक बन जाएगा। यदि तुम थिर हो तो आता हुआ झंझावात एक चुनौती बन जाएगा, उससे तुम्हारी जड़ें हिल जाएंगी, हर तंतु जीवंत हो उठेगा। फिर जब झंझावात गुजर जाएगा तो तुम यह नहीं सोचोगे कि यह बुरा था, कोई दुर्भाग्य था। तुम कहोगे कि यह तो सौभाग्य था, एक आशीर्वाद था, क्योंकि झंझावात ने सारी मृतवत्ता दूर कर दी। जो कुछ भी मृत था वह उसके साथ बह गया और जो भी जीवंत था वह और जीवंत हो गया।
जब झंझावात गुजर जाए तो वृक्षों की ओर देखो। वे जीवन से तरंगायित हैं, जीवन से धड़क रहे हैं, दीप्तिमान हैं, जीवंत हैं ऊर्जा उन्हें ओत-प्रोत कर रही है। क्योंकि झंझावात ने एक अवसर दिया उन्हें अपनी जड़ों को अनुभव करने का, अपनी थिरता को अनुभव करने का। यह स्वयं के अनुभव का एक अवसर था।
तो जो प्रेम में थिर है वह किसी भी चीज से नहीं डरता। जो कुछ भी आए सुंदर है-परिवर्तन आए, असुरक्षा आए। जो भी होता है शुभ है 1 लेकिन प्रेम कभी विवाह नहीं बनता। और जब मैं कहता हूं कि प्रेम विवाह नहीं बन सकता तो मेरा यह अर्थ नहीं है कि प्रेमियों को विवाह नहीं करना चाहिए, लेकिन यह विवाह प्रेम का विकल्प नहीं बन जाना चाहिए। यह केवल बाहरी आवरण होना चाहिए, यह विकल्प नहीं होना चाहिए।
और प्रेम कभी विवाह नहीं बनता, क्योंकि प्रेमी कभी एक-दूसरे के प्रति सुनिश्चित धारणा नहीं रखते कोई प्रतिमा नहीं रखते। मेरा जो अर्थ है वह गहन रूप से मनोवैज्ञानिक है, प्रेमी एक-दूसरे के प्रति कभी तय नहीं होते, कोई धारणा नहीं रखते। एक बार तुम एक-दूसरे के प्रति सुनिश्चित हो जाओ तो दूसरा एक वस्तु बन गया। अब वह व्यक्ति न रहा। तो विवाह प्रेमियों को वस्तुओं में बदल देता है। पति एक वस्तु है पत्नी एक वस्तु है, उनके बारे में पहले से ही भविष्यवाणी की जा सकती है।
मैं पूरे देश में बहुत से परिवारों में ठहरता रहा हूं और मुझे बहुत से पति-पत्नियों को जानने का अवसर मिला है। वे व्यक्ति हैं ही नहीं। उनके बारे में पहले से सब कुछ बताया जा सकता है। यदि पति कुछ कहे तो यह बताया जा सकता है कि पत्नी क्या कहेगी, कैसे व्यवहार करेगी। और यदि पत्नी यंत्रवत रूप से कुछ कहती है तो पति भी यंत्रवत उत्तर देगा।
यह सब सुनिश्चित है। वे वही अभिनय बार-बार कर रहे हैं। उनका जीवन बस उस ग्रामोफोन रिकार्ड की तरह है जिसमें कुछ गड़बड़ी हो जाए जिसमें सुई एक जगह अटक जाए और वह बार-बार वही दोहराता जाए। यह इतना ही सुनिश्चित है। तुम बता सकते हो कि आगे क्या होने वाला है। पति और पत्नी कहीं अटक गए हैं वे ग्रामोफोन रिकार्ड बन गए हैं और दोहराए चले जाते हैं। वह पुनरुक्ति ही ऊब पैदा करती है।
मैं एक घर में ठहरा हुआ था। पति ने मुझसे कहा, 'मैं तो अपनी पत्नी के साथ अकेला रहने से डरने लगा हूं। जब कोई और साथ होता है तभी हम दोनों सुखी होते हैं। हम किसी दूसरे को साथ लिए बिना छुट्टी पर भी नहीं जा सकते, क्योंकि वह दूसरा कुछ नवीनता लाता है। वरना तो हम जानते ही हैं कि क्या होने वाला है। यह सब इतना सुनिश्चित हो गया है कि किसी योग्य ही नहीं रहा। हम पहले से ही सब जानते हैं। यह ऐसे ही है जैसे तुम उसी किताब को बार-बार और बार-बार पढ़ते जाओ।'
प्रेमियों के बारे में पहले से भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। यही असुरक्षा है। तुम नहीं जानते कि क्या होने वाला है। और यही सौंदर्य है। तुम नए और युवा और जीवंत रह सकते हो। लेकिन हम एक-दूसरे को वस्तु बना लेना चाहते हैं, क्योंकि वस्तु आसानी से नियंत्रित की जा सकती है। और तुम्हें वस्तु से डरने की भी जरूरत नहीं होती। तुम जानते हो कि वह कहां है उसका व्यवहार क्या है। तुम पहले से ही योजना बना सकते हो कि क्या करना है और क्या नहीं करना है।
विवाह से मेरा अर्थ है एक ऐसी व्यवस्था जिसमें दो व्यक्ति वस्तुओं के तल पर गिर जाते हैं। प्रेम कोई व्यवस्था नहीं है यह तो एक साक्षात्कार है- क्षण- क्षण, जीवंत। निश्चित ही खतरे से भरा है, पर जीवन ऐसा ही है। विवाह सुरक्षित है उसमें कोई खतरा नहीं है; प्रेम असुरक्षित है। तुम नहीं जानते कि क्या होने वाला है अगला क्षण अज्ञात है, और अज्ञात ही रहता है।
तो प्रेम हर क्षण अज्ञात में प्रवेश है। जब जीसस कहते हैं 'परमात्मा प्रेम है', तो उनका यही अर्थ है। परमात्मा उतना ही अज्ञात है जितना प्रेम। और यदि तुम जीवंत होने को, प्रेम में होने को, असुरक्षित होने को तैयार नहीं हो तो तुम परमात्मा में प्रवेश नहीं कर सकते, क्योंकि वह तो परम असुरक्षा है परम अज्ञात है।
तो प्रेम तुम्हें प्रार्थना के लिए तैयार करता है। यदि तुम प्रेम कर सको, और किसी अज्ञात व्यक्ति को बिना वस्तु बनाए, बिना यंत्रवत व्यवहार के क्षण- क्षण जीते हुए प्रेम कर सको तो तुम प्रार्थना के लिए तैयार हो रहे हो।
प्रार्थना और कुछ नहीं प्रेम ही है समस्त अस्तित्व के प्रति प्रेम। तुम अस्तित्व के साथ ऐसे जीते हो जैसे अपने प्रेमी के साथ जी रहे हो। न तुम्हें भाव-दशा का पता है, न ऋतु का पता है, तुम्हें कुछ पता ही नहीं कि क्या होने वाला है। कुछ भी ज्ञात नहीं है। तुम बस उघाडते चले जाते हो-यह एक अनंत यात्रा है।

तीसरा प्रश्न :

क्या ऐसा हो सकता है कि जो व्यक्ति संबुद्ध नहीं है वह पूर्ण असुरक्षा में जीए और फिर
भी संतप्त, हताश और दुखी न हो?

पूर्ण असुरक्षा और उसमें जीने की क्षमता बुद्धत्व के पर्याय हैं। तो जो व्यक्ति संबुद्ध नहीं है वह पूर्ण असुरक्षा में नहीं रह सकता और जो पूर्ण असुरक्षा में नहीं रह सकता वह संबुद्ध नहीं हो सकता। ये दो बातें नहीं हैं, ये एक ही बात को कहने के दो ढंग हैं। तो तुम असुरक्षा में रहने की तब तक प्रतीक्षा न करो जब तक तुम संबुद्ध न हो जाओ, नहीं! क्योंकि फिर तो तुम कभी संबुद्ध न हो पाओगे।
असुरक्षा में जीना शुरू करो, यही बुद्धत्व का मार्ग है। और पूर्ण असुरक्षा के बारे में मत सोचो। जहां तुम हो वहीं से शुरू करो। जैसे तुम हो वैसे तो किसी चीज में समग्र नहीं हो सकते लेकिन कहीं से तो शुरू करना ही होता है। शुरू में इससे संताप होगा, शुरू में इससे दुख होगा। लेकिन बस शुरू में ही। यदि तुम शुरुआत पार कर सको, यदि तुम शुरुआत सह का, दुख मिट जाएगा, सताप मिट जाएगा।
इस प्रक्रिया को समझना पड़ेगा। जब तुम असुरक्षित अनुभव करते हो तो संतप्त क्यों होते हो? यह असुरक्षा के कारण नहीं बल्कि सुरक्षा की मांग के कारण है। जब तुम असुरक्षित अनुभव करते हो तो संतप्त हो जाते हो संताप पैदा होता है। वह असुरक्षा के कारण पैदा नहीं हो रहा बल्कि जीवन को एक सुरक्षा बनाने की मांग से पैदा हो रहा है। यदि तुम असुरक्षा में रहने तंगी और सुरक्षा की मांग न करो तो जब मांग चली जाएगी तो संताप भी चला जाएगा। वह मांग ही संताप पैदा कर रही है।
असुरक्षा जीवन का स्वभाव है। बुद्ध के लिए संसार असुरक्षित है; जीसस के लिए भी असुरक्षित है। लेकिन वे संतप्त नहीं हैं क्योंकि उन्होंने इस तथ्य को स्वीकार कर लिया है। वे इस वास्तविकता की स्वीकृति के लिए प्रौढ़ हो गए हैं।
प्रौढ़ता और अप्रौढ़ता की मेरी यही परिभाषा है। उस व्यक्ति को मैं अपरिपक्व कहता हूं जो कल्पनाओं और सपनों के लिए वास्तविकता से लड़ता रहता है। वह व्यक्ति अपरिपक्व है। प्रौढ़ता का अर्थ है वास्तविकता का साक्षात्कार करना, सपनों को एक ओर फेंक देना और वास्तविकता जैसी है वैसी स्वीकार कर लेना।
बुद्ध प्रौढ़ हैं। वह स्वीकार कर लेते हैं कि यह ऐसा ही है।
उदाहरण के लिए, हालांकि मृत्यु सुनिश्चित है, पर अपरिपक्व व्यक्ति सोचे चला जाता है कि बाकी सब चाहे मर जाएं लेकिन वह नहीं मरने वाला। अपरिपक्व व्यक्ति सोचता है कि उसके मरने के समय तक कुछ खोज लिया जाएगा, कोई दवा खोज ली जाएगी, जिससे वह नहीं मरेगा। अपरिपक्व व्यक्ति सोचता है कि मरना कोई नियम नहीं है। निश्चित ही, बहुत से लोग मरे हैं लेकिन हर चीज में अपवाद होते हैं और वह सोचता है कि वह अपवाद है।
जब भी कोई मरता है तो तुम सहानुभूति अनुभव करते हो, तुम्हें लगता है, बेचारा मर गया। लेकिन तुम्हारे मन में यह कभी नहीं आता कि उसकी मृत्यु तुम्हारी मृत्यु भी है। नहीं, तुम उससे बचकर निकल जाते हो। इतनी सूक्ष्म बातों को तो तुम छूते ही नहीं। तुम सोचते रहते हो कि कुछ न कुछ तुम्हें बचा लेगा-कोई मंत्र, कोई चमत्कारी गुरु। कुछ हो जाएगा और तुम बच जाओगे। तुम कहानियों में बच्चों की कहानियों में जी रहे हो।
प्रौढ़ व्यक्ति वह है जो इस तथ्य की ओर देखता है और स्वीकार कर लेता है कि जीवन और मृत्यु साथ-साथ हैं। मृत्यु जीवन का अंत नहीं है वह तो जीवन का शिखर है। वह जीवन के साथ घटी कोई दुर्घटना नहीं है वह तो जीवन के हृदय में विकसित होती है। विकसित होती है और एक शिखर पर पहुंचती है। तो प्रौढ़ व्यक्ति स्वीकार कर लेता है और मृत्यु का कोई भय नहीं रहता। वह समझ लेता है कि सुरक्षा असंभव है।
तुम चाहे एक चारदीवारी बना लो, बैंक बैलेंस रख लो, स्वर्ग में सुरक्षा पाने के लिए धन दान दे दो तुम सब कर लो लेकिन गहरे में तुम जानते हो कि असल में कुछ भी सुरक्षित नहीं है। बैंक तुम्हें धोखा दे सकता है। और पुरोहित धोखेबाज हो सकता है, वह सबसे बड़ा धोखेबाज हो सकता है, कोई नहीं जानता। वे चिट्ठियां लिख देते...... ।
भारत में मुसलमानों का एक संप्रदाय है, उसका प्रधान पुरोहित परमात्मा के नाम चिड़िया लिखता है। तुम कुछ धन दान दे दो और वह चिट्ठी लिख देगा। चिट्ठी तुम्हारे साथ तुम्हारे मकबरे में, तुम्हारी कब में रख दी जाएगी। वह तुम्हारे साथ रख दी जाएगी ताकि तुम उसे दिखा सको। धन पुरोहित के पास चला जाता है और चिट्ठी तुम्हारे साथ चली जाती लेकिन कुछ भी तो सुरक्षित नहीं हुआ।
परिपक्व व्यक्ति वास्तविकता का सामना करता है, वह उसको जैसी है वैसी ही स्वीकार कर लेता है। वह कुछ मांग नहीं करता। वह मांगने वाला नहीं होता। वह यह नहीं कहता कि यह ऐसे होना चाहिए। वह तथ्य की ओर देखता है और कहता है, 'हा, यह ऐसा है।’ वास्तविकता का सीधा साक्षात्कार तुम्हारे लिए दुखी होना असंभव कर देगा। क्योंकि दुख तभी आता है जब तुम कुछ मांग करते हो। असल में दुख और कुछ नहीं बस इसी बात का संकेत है कि तुम वास्तविकता के विपरीत चल रहे हो। और वास्तविकता तुम्हारे अनुसार नहीं बदल सकती, तुम्हें वास्तविकता के अनुसार बदलना पड़ेगा। तुम्हें स्वयं को छोड़ना पड़ेगा। तुम्हें समर्पण करना पड़ेगा।
समर्पण का यही अर्थ है : तुम्हें स्वयं को छोड़ना पड़ेगा। वास्तविकता समर्पण नहीं कर सकती, वह तो जैसी है वैसी है। जब तक तुम समर्पण न करो, तुम दुखी रहोगे। दुख तुम्हारे द्वारा ही निर्मित होता है क्योंकि तुम संघर्ष करते हो।
यह ऐसे ही है जैसे नदी की धारा सागर की तरफ बह रही हो और तुम धारा के विपरीत तैरने की कोशिश कर रहे हो। तुम्हें लगता है कि नदी तुम्हारे विरुद्ध है। नदी तुम्हारे विरुद्ध नहीं है। उसने तो तुम्हारे बारे में सुना भी नहीं है। वह तुम्हें जानती भी नहीं है। नदी तो बस सागर की ओर बहे जा रही है। यह नदी का स्वभाव है कि सागर की ओर बहे, सागर की ओर चले और उसमें समाहित हो जाए। तुम धारा के विपरीत जाने की कोशिश कर रहे हो।
और हो सकता है किनारे पर कुछ मूरख खड़े हों जो तुम्हें बढ़ावा दे रहे हों : 'तुम बहुत अच्छा कर रहे हो। कोई फिक्र न करो देर-अबेर नदी को समर्पण करना पड़ेगा। तुम तो महान हो, चलते रहो! जो महान हैं उन्होंने नदी पर विजय पाई है !' सदा ऐसे मूरख लोग होते ही हैं जो तुम्हें प्रेरणा देते हैं, तुम्हारा हौसला बढ़ाते हैं। लेकिन कोई सिकंदर, कोई नेपोलियन, कोई महान व्यक्ति उलटा स्रोत तक नहीं पहुंच सका। देर-अबेर नदी की विजय होती है। लेकिन मरने के बाद तुम वह आनंद नहीं ले सकते जो तब संभव था जब तुम जीवित थे : समर्पण का आनंद, स्वीकृति का आनंद, नदी के साथ ऐसे एक हो जाने का आनंद कि कोई संघर्ष न बचे। लेकिन किनारे पर खड़े वे मूर्ख लोग कहेंगे 'तुमने समर्पण कर दिया, तुम हार गए, तुम असफल हुए।’ उनकी मत सुनो उस तरिक स्वतंत्रता का आनंद लो जो समर्पण से आती है। उनकी मत सुनो।
जब बुद्ध ने धारा के विपरीत तैरने की कोशिश छोड़ दी तो जो उनको जानते थे, उन्होंने कहा, तुम भगोड़े हो। तुम पराजित हो। तुमने हार मान ली। दूसरे क्या कहते हैं वह मत सुनो। भीतर के भाव को अनुभव करो। तुम्हें क्या घट रहा है उसको अनुभव करो। यदि धारा के साथ बहने में तुम्हें अच्छा लगता है तो यही मार्ग है। यही ताओ है तुम्हारे लिए। किसी की मत सुनो, बस अपने हृदय की सुनो। प्रौढ़ता है यथार्थ का स्वीकार।
मैंने एक कहानी सुनी है। एक मुसलमान, एक ईसाई और एक यहूदी से एक प्रश्न पूछा गया। प्रश्न एक ही था। किसी ने उन तीनों से पूछा, 'यदि तूफानी लहरें सागर को जमीन पर आएं तुम उसमें डूब जाओ तो तुम क्या करोगे?' ईसाई ने कहा, 'मैं अपने हृदय पर क्रास का चिह्न बनाऊंगा और परमात्मा से प्रार्थना करूंगा कि मुझे स्वर्ग में आने के लिए द्वार खोल दे।’ मुसलमान ने कहा, 'मैं अल्लाह का नाम लूंगा और कहूंगा कि यही किस्मत है, यही भाग्य है, और डूब जाऊंगा।’ यहूदी ने कहा, 'मैं परमात्मा को धन्यवाद दूंगा, उसकी मर्जी को स्वीकार करूंगा और पानी के नीचे रहना सीख लूंगा।’
यही करना है। अस्तित्व की मर्जी को, विराट की मर्जी को स्वीकार करना है और उसमें जीना सीखना है। यही सारी कला है। प्रौढ़ व्यक्ति यथार्थ को स्वीकार कर लेता है, कोई मांग नहीं करता, किसी स्वर्ग की बात नहीं करता। ईसाई मांग कर रहा था, वह मांग रहा था, वह कह रहा था, स्वर्ग के द्वार खोल दो। लेकिन वह भी निराशावादी है जो बस स्वीकार कर लेता है और डूब जाता है। मुसलमान भी यही कर रहा था। यहूदी ने स्वीकार किया, बल्कि स्वागत किया और कहा, यही उसकी मर्जी है, अब मुझे पानी के नीचे रहना सीखना है। यही परमात्मा की मर्जी है। वास्तविकता को ऐसा का ऐसा स्वीकार कर लो, और सीखो कि समर्पित हृदय, समर्पित चित्त के साथ उसमें कैसे जीना है।


अंतिम प्रश्न :

कल आपने कहा कि जीवन और मृत्यु साथ-साथ हैं। फिर कृपया बताएं कि अतिक्रमण
की क्या आवश्यकता है? 

यही आवश्यकता है। इसीलिए आवश्यकता है। जीवन मृत्यु के साथ ही हैं--यदि तुम इसे समझ सको तो तुमने अतिक्रमण कर लिया।
तुम जीवन को स्वीकार करते हो, मृत्यु को स्वीकार नहीं करते। या कि करते हो? तुम जीवन को स्वीकार करते हो लेकिन मृत्यु को अस्वीकार करते हो, और इसी कारण तुम सदा कठिनाई में रहते हो। तुम कठिनाई में पड़ते हो क्योंकि मृत्यु जीवन का अंग है, जब तुम जीवन को अस्वीकार करते हो तो मृत्यु तो होगी ही, लेकिन तुम मृत्यु को अस्वीकार कर देते हो। जब तुमने मृत्यु को अस्वीकार किया तो जीवन को भी अस्वीकार कर दिया, क्योंकि वे दो नहीं हैं। तो तुम कठिनाई में रहोगे। या तो पूरे को स्वीकार करो या पूरे को अस्वीकार करो। यही अतिक्रमण है।
और अतिक्रमण करने के दो उपाय है। या तो जीवन और मृत्यु दोनों को एक साथ स्वीकार करो, या दोनों को एक साथ अस्वीकार करो, तब तुम अतिक्रमण कर गए। यही दो उपाय हैं, विधायक और नकारात्मक। नकारात्मक कहता है, 'दोनों को अस्वीकार कर दो।’ विधायक कहता है, 'दोनों को स्वीकार कर लो।’ लेकिन जोर इस बात पर है कि दोनों साथ होने चाहिए, चाहे स्वीकार करो चाहे अस्वीकार करो। जब जीवन और मृत्यु दोनों होते हैं तो एक-दूसरे को काट डालते हैं। और जब वे दोनों ही नहीं रहते तो तुम अतिक्रमण कर जाते हो।
तुम या तो जीवन से जुड़े होते हो या कभी-कभी मृत्यु से, लेकिन तुम कभी दोनों को स्वीकार नहीं करते। मैं कई लोगों से मिला हूं जो जीवन से इतने हताश हो गए हैं. कि वे आत्महत्या करने की सोचने लगते हैं। पहले उनका जीवन में रस होता है, फिर जीवन उबाने लगता है। ऐसा नहीं कि जीवन उबाता है, वह मोह उबाता है, लेकिन लोग सोचते हैं कि जीवन उबा रहा है। तो वे मृत्यु में रस लेने लगते हैं। अब वे सोचने लगते हैं कि अपने को कैसे नष्ट कर लें और कैसे आत्महत्या कर लें, कैसे मर जाएं। लेकिन मोह तो है ही। पहले जीवन का था, अब मृत्यु का है। तो जो व्यक्ति जीवन के मोह में है और जो व्यक्ति मृत्यु के मोह में है, वे भिन्न नहीं हैं। मोह तो है ही और मोह ही समस्या है। दोनों को स्वीकार करो।
जरा सोचो, यदि तुम जीवन और मृत्यु दोनों को स्वीकार कर लोगे तो क्या होगा? तत्क्षण एक मौन उतर आएगा, क्योंकि वे दोनों एक-दूसरे को काट डालेंगे। जब तुम स्वीकार कर लेते हो तो जीवन और मृत्यु दोनों समाप्त हो जाते हैं, तब तुम अतिक्रमण कर गए तुम पार चले गए। या दोनों को अस्वीकार कर दो-यह एक ही बात है।
अतिक्रमण का अर्थ है द्वैत के पार चले जाना। मोह का अर्थ है द्वैत में रहना, एक में रस लेना और दूसरे के विपरीत होना। जब तुम दोनों को स्वीकार करते हो या दोनों को अस्वीकार करते हो तो मोह गिर जाता है। तुम्हारी गांठ खुल जाती है। अचानक तुम अपने प्राणों के तीसरे आयाम पर पहुंच जाते हो, जहां न जीवन है न मृत्यु। वही निर्वाण है, वही मोक्ष है। वहां द्वैत नहीं है, अद्वैत है, तथाता है। और जब तक तुम अतिक्रमण न कर जाओ, तुम सदा दुख में ही रहोगे। भले ही तुम अपने मोह को इससे हटाकर उस पर लगा लो, लेकिन तुम दुख में ही रहोगे।
मोह दुख पैदा करता है। अस्वीकार भी दुख पैदा करता है। तुम कुछ भी चुन सकते हो, यह तुम पर निर्भर है। तुम कृष्ण की तरह विधायक मार्ग चुन सकते हो। वह कहते हैं, 'स्वीकार करो। दोनों को स्वीकार करो।’ या तुम बुद्ध का मार्ग चुन सकते हो। बुद्ध कहते हैं, 'दोनों को अस्वीकार करो।’ लेकिन दोनों को साथ-साथ कर लो, फिर अतिक्रमण तत्क्षण होता है। यदि तुम दोनों के बारे में सोचो भी तो भी अतिक्रमण हो जाएगा। और यदि वास्तविक जीवन में तुम यह कर पाओ तो एक नई चेतना का आविर्भाव होगा। वह चेतना द्वैत के जगत की नहीं है, वह एक अज्ञात जगत की चेतना है-निर्वाण के जगत की।

आज इतना ही।

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Thumbs Up तंत्र-सूत्र-(भाग-5)-प्रवचन-72 असुरक्षा में जीना बुद्धत्व का मार्ग है। भाग-I
Posted by: Osho Prem - 03-02-2019, 04:57 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

तंत्र-सूत्र-(भाग-5)-प्रवचन-72

असुरक्षा में जीना बुद्धत्व का मार्ग है-

प्रश्नसार-
1-कृपया बुद्ध के प्रेम को समझाएं।
2-क्या प्रेम गहरा होकर विवाह नहीं बन सकता?
3-क्या व्यक्ति असुरक्षा में जीते हुए निशिंचत रह सकता है? 
4-अतिक्रमण की क्या अवश्यकता है? 
पहला प्रश्न : 
 आपने कहा कि प्रेम केवल मृत्यु के साथ ही संभव है। फिर क्या आप कृपया बुद्ध पुरुष के प्रेम के विषय में समझाएंगे?
व्यक्ति के लिए तो प्रेम सदा घृणा का ही अंग होता है सदा घृणा के साथ ही आता है। अज्ञानी मन के लिए तो प्रेम और घृणा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अज्ञानी मन के लिए प्रेम कभी शुद्ध नहीं होता। और यही प्रेम का विषाद है क्योंकि वह घृणा जो है, विष बन जाती है। तुम किसी से प्रेम करते हो और उसी से घृणा भी करते हो।

लेकिन हो सकता है, तुम घृणा और प्रेम दोनों एक साथ न कर रहे होओ तो तुम्हें कभी इसका पता ही नहीं चलता। जब तुम किसी से प्रेम करते हो तो तुम घृणा वाले हिस्से को भूल जाते हो वह नीचे चला जाता है, अचेतन मन में चला जाता है और वहां प्रतीक्षा करता है। फिर जब तुम्हारा प्रेम थक जाता है तो वह अचेतन में गिर जाता है और घृणा वाला हिस्सा ऊपर आ जाता है।
फिर तुम उसी व्यक्ति से घृणा करने लगते हो। और जब तुम घृणा करते हो तो तुम्हें पता भी नहीं होता कि तुम प्रेम भी करते हो, अब प्रेम गहरे अचेतन में चला गया है। यह चलता रहता है बिलकुल दिन और रात की तरह यह एक वर्तुल में चलता चला जाता है। यही विषाद बन जाता है।


लेकिन एक बुद्ध, एक जाग्रत व्यक्ति के लिए दुई, द्वैत मिट जाते हैं। सब तरफ-न केवल प्रेम के ही संबंध में बल्कि पूरा जीवन एक अद्वैत बन जाता है। फिर कोई दुई नहीं रहती, विरोधाभास नहीं बचता।
तो वास्तव में, बुद्ध के प्रेम को प्रेम कहना ठीक नहीं है, लेकिन हमारे पास और कोई शब्द नहीं है। बुद्ध ने स्वयं कभी प्रेम शब्द का उपयोग नहीं किया। उन्होंने करुणा शब्द का उपयोग किया। लेकिन वह भी कोई बहुत अच्छा शब्द नहीं है। क्योंकि तुम्हारी करुणा सदा तुम्हारी क्रूरता के साथ संबंधित है, तुम्हारी अहिंसा सदा तुम्हारी हिंसा के साथ संबंधित है। तुम कुछ भी करो उसका विपरीत सदा ही साथ होगा। तुम विरोधाभासों में जीते हो; इसीलिए तनाव, दुख और संताप होते हैं।
तुम एक नहीं हो, तुम हमेशा बंटे हुए हो। तुम बहुत से खंडों में बंटी हुई एक भीड़ हो। और वे सब खंड एक-दूसरे का विरोध कर रहे हैं। तुम्हारा होना एक तनाव है; बुद्ध का होना एक गहन विश्राम है। स्मरण रखो, तनाव दो विरोधी ध्रुवों के बीच में होता है, और विश्राम होता है ठीक मध्य में, जहां दो विरोधी ध्रुव विरोधी नहीं रहते। वे एक-दूसरे को काट देते हैं, और एक रूपांतरण घटित होता है।
तो बुद्ध का प्रेम उससे मूलत: भिन्न होता है, जिसे तुम प्रेम जानते हो। तुम्हारा प्रेम तो एक बेचैनी है; बुद्ध का प्रेम है पूर्ण विश्राम 1 उसमें मस्तिष्क का कोई भाग नहीं होता, इसलिए उसका गुणधर्म पूर्ण्त: बदल जाता है। बुद्ध के प्रेम में ऐसा बहुत कुछ होगा जो साधारण प्रेम में नहीं होता।
पहली बात तो यह कि वह ऊष्ण नहीं होगा। ऊष्णता आती है घृणा से। बुद्ध का प्रेम वासना नहीं, करुणा होता है; ऊष्ण नहीं, शीतल होता है। हमारे लिए तो शीतल प्रेम का अर्थ होता है कि इसमें कुछ कमी है। बुद्ध का प्रेम शीतल होता है, उसमें कोई ऊष्णता नहीं होती 1 वह सूर्य की तरह नहीं होता, चांद की तरह होता है। वह तुम में उत्तेजना नहीं लाता, वरन एक गहन शीतलता निर्मित करता है।
दूसरे, बुद्ध का प्रेम वास्तव में कोई संबंध नहीं होता, तुम्हारा प्रेम एक संबंध होता है। बुद्ध का प्रेम तो उनके होने की अवस्था ही है। असल में वह तुम्हें प्रेम नहीं करते वह प्रेम ही हैं। यह भेद स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए। यदि तुम किसी व्यक्ति को प्रेम करते हो तो तुम्हारा प्रेम एक कृत्य होता है, तुम कुछ करते हो, कोई निश्चित व्यवहार करते हो, कोई संबंध कोई सेतु निर्मित करते हो। बुद्ध का प्रेम तो बस उनका होना ही है, बस ऐसे ही वह हैं। वह तुम्हें प्रेम नहीं कर रहे, वह प्रेम ही हैं। वह तो बगीचे में खिले फूल की तरह हैं। तुम उधर से गुजरी, और सुगंध तुम तक पहुंच जाती है। ऐसा नहीं है कि फूल विशेष रूप से तुम तक सुगंध पहुंचा रहा है; जब कोई नहीं भी गुजर रहा था, तब भी वहां सुगंध थी। और यदि कभी भी कोई नहीं गुजरे, तब भी सुगंध रहेगी।
जब तुम्हारा प्रेमी तुम्हारे साथ नहीं होता, तुम्हारी प्रेमिका तुम्हारे साथ नहीं होती, प्रेम विदा हो जाता है, सुवास नहीं रहती। यह प्रेम तुम्हारा प्रयास है, तुम्हारा होना मात्र नहीं है। इसे लाने के लिए तुम्हें कुछ करना पड़ता है। जब कोई भी नहीं है और बुद्ध अकेले अपने बोधिवृक्ष के नीचे बैठे हैं तो भी वह प्रेम में होते हैं। अब यह जरा अजीब लगता है कि तब भी वह प्रेम में होते हैं। वहां कोई भी नहीं है जिसे प्रेम किया जाए लेकिन फिर भी वह प्रेम में हैं। यह प्रेमपूर्ण होना उनकी अवस्था है। और क्योंकि यह उनकी अवस्था है, इसलिए उसमें तनाव नहीं होता। बुद्ध अपने प्रेम से थक नहीं सकते।
तुम थक जाओगे, क्योंकि तुम्हारा प्रेम ऐसा है जिसे तुम कर रहे हो। तो यदि बहुत प्रेम होता है तो प्रेमी एक-दूसरे से थक जाते हैं। वे थक जाते हैं, और दोबारा ऊर्जा से भरने के लिए उन्हें अवकाश की, अंतराल की जरूरत पड़ती है। यदि तुम चौबीस घंटे अपने प्रेमी के साथ रहो तो वह ऊब जाएगा, क्योंकि इतना ध्यान देना बहुत अधिक हो जाएगा। कुछ भी चौबीसों घंटे करते रहना अति हो जाती है।
बुद्ध कुछ कर नहीं रहे, वह अपने प्रेम से थकते नहीं हैं। यह तो उनका होना ही है, यह तो ऐसे ही है जैसे वह श्वास ले रहे हों। जैसे तुम श्वास लेने से कभी थकते नहीं, अपने होने से कभी थकते नहीं, ऐसे ही वह भी कभी अपने प्रेम से थकते नहीं।
और तीसरी बात यह है कि तुम्हें पता चलता है कि तुम प्रेम कर रहे हो, बुद्ध बिलकुल पता नहीं होता। क्योंकि पता चलने के लिए विपरीत की आवश्यकता होती है। तो प्रेम से इतने भरे हैं कि उन्हें पता ही न चलेगा। यदि तुम उनसे पूछो तो वह कहेंगे, 'मैं तुमसे प्रेम करता है।' लेकिन इसका उन्हें पता नहीं होगा। प्रेम इतना चुपचाप उनसे बह रहा है, उनका इतना अंतरंग हिस्सा बन गया है, कि उन्हें इसका पता हो ही नहीं सकता।
तुम्हें पता चलेगा कि वह प्रेम करते हैं, और यदि तुम खुले तथा ग्रहणशील हो तो तुम्हें अधिक पता चलेगा कि वह तुम्हें और भी प्रेम करते हैं। तो यह तुम्हारी क्षमता पर निर्भर करता है कि तुम कितना ग्रहण कर सकते हो। लेकिन उनकी तरफ से यह कोई भेंट नहीं है। वह तुम्हें कुछ दे नहीं रहे हैं ऐसे वह हैं ही, यही उनका होना है। जब भी तुम अपने समग्र अस्तित्व के प्रति जागते हो, प्रबुद्ध होते हो मुक्त होते हो, तो तुम्हारे जीवन से विरोधाभास मिट जाता है। फिर कोई द्वैत नहीं रहता। फिर जीवन एक लयबद्धता बन जाता है कुछ भी किसी भी चीज के विरुद्ध नहीं होता।
इस लयबद्धता के कारण एक गहन शांति घटित होती है, कोई अशांति नहीं रहती। अशांति बाहर पैदा नहीं होती, तुम्हारे भीतर ही होती है। विरोधाभास ही अशांति पैदा करता रहता है, जब कि बहाने तुम बाहर खोज ले सकते हो। उदाहरण के लिए जरा गौर से देखो कि अपने प्रेमी या किसी मित्र, किसी गहन, अंतरंग, निकटस्थ मित्र के साथ होने पर तुम्हें क्या होता है। उसके साथ रहो और बस देखो कि तुम्हें क्या हो रहा है। जब तुम मिलते हो तो तुम बहुत उत्साहित, आनंदित और नृत्यपूर्ण होते हो। लेकिन कितना नृत्य तुम कर सकते हो? और कितने आनंदित तुम हो सकते हो?
कुछ ही मिनटों में तुम नीचे उतरने लगते हो, उत्साह चला जाता है। और कुछ घंटों बाद तो तुम ऊब जाते हो तुम कहीं और भाग जाने की सोचने लगते हो। और कुछ दिनों बाद तो तुम लड़ने लगोगे। जरा गौर से देखो कि क्या हो रहा है। यह सब भीतर से आ रहा है लेकिन तुम बाहर बहाने खोज लोगे। तुम कहोगे कि यह व्यक्ति अब उतना प्रेमपूर्ण नहीं रहा जितना कि जब यह आया था, तब था; अब यह व्यक्ति मुझे अशांत कर रहा है मुझे क्रोधित
कर रहा है। और तुम हमेशा ही कोई बहाना खोज लोगे कि वह तुम्हें कुछ कर रहा है, तुम्हें
कभी भी पता न चलेगा कि तुम्हारा विरोधाभास, तुम्हारे मन का द्वैत या अंतर्द्वंद्व कुछ कर रहा
है। हमें कभी भी हमारे अपने मन के कृत्यों का पता नहीं चल पाता।
मैंने सुना है कि एक बहुत प्रसिद्ध, सुंदर, हालीवुड अभिनेत्री एक स्ट्रडयो में अपना फोटो लेने गई। फोटो एक दिन पहले खींचा गया था। फोटोग्राफर ने फोटो उसे दिया, पर वह तो बहुत नाराज हो गई, तमतमा गई। उसने कहा, 'यह तुमने क्या कर डाला है? पहले भी तुमने मेरे फोटो लिए हैं, पर वे सब कितने गजब के थे !' फोटोग्राफर ने अभिनेत्री को कहा, 'ही, लेकिन आप यह भूल रही हैं कि जब मैंने वे फोटो खींचे थे तो मैं बारह वर्ष छोटा था। मैं तब बारह वर्ष छोटा था, यह आप भूल रही हैं।’
हम भीतर कभी नहीं देखते कि क्या हो रहा है। यदि फोटो तुम्हें ठीक नहीं लग रहा हो तो फोटोग्राफर में कुछ गड़बड़ है। यह नहीं कि बारह वर्ष बीत चुके हैं और अब तुम बड़ी हो गई हो। यह तो एक आंतरिक प्रक्रिया है, फोटोग्राफर का इससे कुछ भी लेना-देना नहीं है। लेकिन फोटोग्राफर बड़ा बुद्धिमान रहा होगा! उसने कहा, 'आप भूल रही हैं कि मैं तब बारह वर्ष छोटा था।’
बुद्ध का प्रेम बिलकुल भिन्न है, लेकिन उसके -लिए हमारे पास कोई और शब्द नहीं है। सबसे अच्छा शब्द जो हमारे पास है, वह प्रेम ही है। लेकिन यदि तुम यह स्मरण रख सकी तो उसका गुणधर्म बिलकुल बदल जाता है।
और एक बात गौठ बांध लो इस पर गहन विचार करो : यदि बुद्ध तुम्हारे प्रेमी हों तो क्या तुम संतुष्ट ही जाओगे? तुम संतुष्ट नहीं होओगे। क्योंकि तुम्हें लगेगा कि यह प्रेम तो शीतल है इसमें कोई उत्तेजना नहीं है। तुम्हें लगेगा कि वह तुम्हें ऐसे ही प्रेम करते हैं जैसे वह सबको करते है तुम कोई विशेष नहीं हो। तुम्हें लगेगा कि उनका प्रेम कोई भेंट नहीं है वह तो ऐसे है ही इसीलिए प्रेम कर रहे हैं। तुम्हें उनका प्रेम इतना स्वाभाविक लगेगा कि तुम उससे संतुष्ट नहीं होओगे।
भीतर विचार करो। जो प्रेम घृणा-रहित है उससे तुम कभी भी तृप्त नहीं हो सकते। और उस प्रेम से भी तुम कभी तृप्त नहीं हो सकते जिसमें घृणा हो। यही समस्या है। किसी भी तरह तुम अतृप्त ही रहोगे। यदि प्रेम घृणा के साथ है तो तुम अतृप्त रहोगे, सदा रुग्ण रहोगे, क्योंकि वह घृणा का अंश तुम्हें अशांत करेगा। यदि प्रेम घृणा-रहित है तो तुम्हें लगेगा कि यह शीतल है। और बुद्ध को यह इतने स्वाभाविक रूप से घटित हो रहा है कि तुम न भी होते तो भी होता तो यह कोई विशेष रूप से तुम्हारे लिए नहीं है। इसलिए तुम्हारा अहंकार तृप्त नहीं होता। और मुझे ऐसा लगता है कि यदि तुम्हारे सामने किसी बुद्ध और अबुद्ध में से अपना प्रेमी चुनने का सवाल हो तो तुम अबुद्ध को चुनोगे क्योंकि उसकी भाषा तुम समझ सकते हो। अबुद्ध कम से कम तुम्हारे जैसा तो है। तुम लड़ोगे-झगडोगे, सब अस्तव्यस्त हो जाएगा, सब गड़बड़ हो जाएगा, लेकिन फिर भी तुम अबुद्ध को ही चुनोगें। क्योंकि बुद्ध इतने ऊंचे होंगे कि जब तक तुम भी ऊंचे न उठो तुम नहीं समझ पाओगे कि बुद्ध कैसे प्रेम करते हैं।
एक अबुद्ध के साथ, एक अज्ञानी के साथ, तुम्हें स्वयं को रूपांतरित करने की जरूरत नहीं होती। तुम वैसे के वैसे ही बने रह सकते हो। वह प्रेम कोई चुनौती नहीं है। वास्तव में प्रेमियों के साथ बिलकुल विपरीत ही होता है। जब दो प्रेमी मिलते हैं और प्रेम में पड़ते हैं तो वे दोनों एक-दूसरे को विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि वे बहुत महान हैं। जो भी सर्वोत्तम गुण हैं उन्हें वे बाहर लाते हैं। ऐसा लगता है कि वे शिखर पर हैं। लेकिन इसमें बहुत प्रयास करना पड़ता है! इस शिखर पर तुम टिके नहीं रह सकते। तो जब तुम थोड़े व्यवस्थित होने लगते हो तो धरती पर वापस लौट आते हो।
तो प्रेमी सदा एक-दूसरे से असंतुष्ट रहते हैं क्योंकि उन्होंने सोचा था कि दूसरा तो बस दिव्य है और जब वे कुछ परिचित होते हैं, थोड़ा समय साथ होते हैं, तो सब कुछ धूमिल हो जाता है, साधारण हो जाता है। तो उन्हें लगता है कि दूसरा धोखा दे रहा था।
नहीं, वह धोखा नहीं दे रहा था, वह तो सर्वोत्तम रंगों में स्वयं को प्रस्तुत कर रहा था। बस इतना ही था। वह किसी को धोखा नहीं दे रहा था, वह जान-बूझकर कुछ भी नहीं कर रहा था। वह तो बस अपने सर्वोत्तम रंगों में स्वयं को प्रस्तुत कर रहा था। और ऐसा ही दूसरे ने भी किया था। लेकिन तुम स्वयं को बहुत देर तक इसी तरह प्रस्तुत नहीं कर सकते, क्योंकि यह बड़ा दुष्कर हो जाता है, कठिन हो जाता है, बोझिल हो जाता है। तो तुम नीचे उतर आते है।
जब दो प्रेमी व्यवस्थित हो जाते हैं, जब वे मानने लगते हैं कि दूसरा तो उपलब्ध ही है तब वे बड़े निकृष्ट, बड़े सामान्य, बड़े साधारण दिखाई पड़ने लगते हैं। जैसे वे पहले दिखाई पड़ते थे उसके बिलकुल विपरीत दिखाई पड़ने लगते हैं। उस समय तो वे फरिश्ते थे; अब तो बस शैतान के शिष्य नजर आते हैं। तुम नीचे गिर जाते हो तुम अपने सामान्य तल पर लौट आते हो।
साधारण प्रेम कोई चुनौती नहीं है लेकिन किसी बुद्ध पुरुष के प्रेम में पड़ जाना बड़ी दुर्लभ घटना है। केवल बहुत सौभाग्यशाली ही ऐसे प्रेम में पड़ते हैं। यह बड़ी दुर्लभ घटना है। ऐसा तो केवल तभी होता है जब तुम जन्मों-जन्मों से किसी बुद्ध पुरुष की खोज करते रहे होओ। यदि ऐसा हुआ हो, केवल तभी तुम बुद्ध पुरुष के प्रेम में पड़ते हो। एक बुद्ध पुरुष के प्रेम में पड़ना स्वयं में ही एक महान उपलब्धि है 1 लेकिन फिर एक कठिनाई होती है। कठिनाई यह है कि बुद्ध पुरुष एक चुनौती है। वह तुम्हारे तल पर तो उतर नहीं सकता, ऐसा संभव ही नहीं है, यह असंभव है। तुम्हें ही उसके शिखर पर जाना होगा; तुम्हें यात्रा करनी होगी, तुम्हें रूपांतरित होना होगा।
तो यदि तुम किसी बुद्ध पुरुष के प्रेम में पड़ जाओ तो प्रेम एक साधना बन जाता है। प्रेम साधना बन जाता है महानतम साधना बन जाता है। इसी कारण से जब भी कोई बुद्ध होते हैं, या कोई जीसस, या कोई लाओत्से तो उनके आस-पास बहुत से लोग एक ही जन्म में उन शिखरों पर पहुंच जाते हैं जहां वे कई जन्मों में भी न पहुंच पाते। लेकिन इसका सारा राज इतना है कि वे प्रेम में पड़ सकें। यह अकल्पनीय नहीं है, कल्पनीय है। हो सकता है तुम बुद्ध के समय में रहे होओ तुम जरूर कहीं आस-पास रहे होओगे। बुद्ध शायद तुम्हारे गांव या नगर से गुजरे होंगे। और हो सकता है तुमने उन्हें सुना भी न हो, तुमने उन्हें देखा भी न हो। क्योंकि किसी बुद्ध को सुनने या किसी बुद्ध को देखने या उसके करीब जाने के लिए भी एक प्रेम चाहिए तुम्हारी ओर से एक खोज चाहिए।
जब कोई बुद्ध पुरुष के प्रेम में पड़ता है तो यह बात अर्थपूर्ण होती है बहुत अर्थपूर्ण होती है। लेकिन कठिन होता है मार्ग। बहुत सरल है किसी साधारण व्यक्ति के प्रेम में पड़ जाना, उसमें कोई चुनौती नहीं है। लेकिन बुद्ध पुरुष के साथ चुनौती बड़ी होगी, मार्ग कठिन होगा, क्योंकि तुम्हें ऊपर उठना होगा। और ये सब बातें तुम्हें दिक्कत देंगी। उसका प्रेम शीतल होगा, उसका प्रेम तो लगेगा कि सबके लिए है, उसके प्रेम में घृणा नहीं होगी।
ऐसा मेरा अनुभव रहा है। कई लोग मेरे प्रेम में पड़ जाते हैं, और फिर वे चाल चलने लगते हैं, साधारण चालें। जाने या अनजाने वे ऐसा करते हैं। एक तरह से यह स्वाभाविक भी है। वे मुझसे अपेक्षाएं करने लगते हैं-साधारण सी अपेक्षाएं-और उनका मन द्वैत की भाषा में सोचता है। उदाहरण के लिए, तुम मुझे प्रेम करते हो तो यदि तुम मुझे सुखी कर सको तो तुम सुखी अनुभव करोगे; लेकिन तुम मुझे सुखी नहीं कर सकते मैं तो सुखी हूं ही।
इसलिए यदि तुम मेरे प्रेम में पड़ते हो तो तुम बहुत हताशा अनुभव करोगे, बहुत निराश होओगे, क्योंकि तुम मुझे सुखी नहीं कर सकते और कुछ करने को बचा नहीं। यदि तुम मुझे सुखी न कर सको तो तुम दुखी हो जाओगे और फिर तुम मुझे दुखी करने का प्रयास करोगे! क्योंकि कम से कम यदि तुम उतना भी कर सको तो तुम्हें तृप्ति मिलेगी। तुम मुझे दुखी करने का प्रयास करोगे-अनजाने, तुम जागरूक नहीं हो, तुम्हें इसकी खबर नहीं है। यदि तुम्हें पता हो तो तुम ऐसा नहीं करोगे। लेकिन तुम प्रयास करोगे, तुम्हारा अचेतन मन मुझे दुखी करने का प्रयास करेगा।
यदि तुम मुझे दुखी कर सको तो तुम्हें पक्का हो जाएगा कि तुम मुझे सुखी भी कर सकते हो। लेकिन यदि तुम मुझे दुखी न कर सको के तुम बिलकुल निराश हो जाते हो। फिर तुम्हें लगेगा कि तुम मुझसे संबंधित नहीं हो, क्योंकि संबंध का तुम्हारे लिए यही अर्थ है।
साधारण प्रेम तो एक रोग है क्योंकि द्वंद्व चलता रहता है। और बुद्ध पुरुष के प्रेम को समझना कठिन है। उसे बौद्धिक रूप से समझने का कोई उपाय नहीं है। तुम्हें प्रेम में पड़ना होगा। और फिर तुम्हें अपने ही मन के प्रति सजग रहना होगा, क्योंकि वह मन उलझनें खड़ी करता रहेगा।
बुद्ध शान को उपलब्ध हुए फिर वह अपने घर लौटे बारह वर्षों बाद वापस लौटे। उनकी पत्नी जिसे उन्होंने बहुत प्रेम किया था, बहुत क्रोधित थी, बहुत नाराज थी। इन बारह वर्षो में वह प्रतीक्षा ही करती रही थी कि किसी दिन यह व्यक्ति लौटेगा। और उसके मन में बदले की बड़ी भावना थी क्योंकि इस व्यक्ति ने उसके साथ अन्याय किया था, वह उचित नहीं था। एक रात अचानक ही वह गायब हो गया था। कम से कम वह कुछ कह तो सकता था। तब बात न्यायसंगत हो जाती। लेकिन बिना कुछ कहे उसे और अपने छोटे से बच्चे को छोड्‌कर वह गायब हो गया था। बारह वर्ष तक उसने प्रतीक्षा की, और फिर बुद्ध आए। वह आग-बबूला थी पागल हो रही थी।
बुद्ध का सबसे निकट का, निकटस्थ शिष्य था आनंद। आनंद सदा छाया की तरह उनका अनुसरण करता था। जब बुद्ध महल में प्रवेश कर रहे थे तो उन्होंने आनंद से कहा, 'तू मेरे साथ मत आ।’
आनंद ने पूछा कि क्यों? क्योंकि उसके पास तो साधारण मन था, वह संबुद्ध नहीं था। वह तो जब बुद्ध मरे तभी संबुद्ध हुआ। उसने पूछा, 'क्यों? क्या आप अभी भी पति और पत्नी की भाषा में सोच रहे हैं? कि आप अपनी पत्नी से मिलने जा रहे हैं? क्या आप अभी भी पति-पत्नी की भाषा में सोच रहे हैं?' उसे तो धक्का लगा। एक बुद्ध, एक प्रज्ञावान व्यक्ति कैसे कह सकता है कि मेरे साथ मत आ, मैं अपनी पत्नी से मिलने जा रहा हूं?
बुद्ध ने कहा 'यह बात नहीं है। यह देखकर कि मैं किसी के साथ आया हूं वह और भी नाराज हो जाएगी। वह बारह वर्ष से प्रतीक्षा कर रही है। उसे अकेले ही पागल हो लेने दो। वह बड़े प्रतिष्ठित, सुसंस्कृत कुल से है। तो वह तुम्हारे सामने नाराज नहीं होगी, वह कुछ भी प्रकट नहीं करेगी, और बारह वर्ष से वह प्रतीक्षा कर रही है। तो उसे विस्फोट कर लेने दो। मेरे साथ मत आओ। मैं अब उसका पति नहीं हूं लेकिन वह तो अभी भी पत्नी है। मैं बदल गया हूं लेकिन वह नहीं बदली है।’
बुद्ध अकेले ही गए। निश्चित ही वह नाराज थी, वह रोने और चीखने-चिल्लाने लगी और तरह-तरह की बातें कहने लगी। और बुद्ध सुनते रहे। वह बार-बार पूछती, 'यदि तुम मुझे थोड़ा भी प्रेम करते थे तो छोड्‌कर क्यों चले गए? तुम क्यों चले गए? और वह भी मुझे बिना बताए। यदि तुम मुझे थोड़ा भी प्रेम करते थे तो कहो मुझे!' और बुद्ध ने कहा, 'यदि मैं तुझे प्रेम न करता तो मैं वापस क्यों आता?'
लेकिन ये दो अलग बातें हैं, बिलकुल अलग बातें हैं। वह क्या कह रहे हैं उसे सुनने को वह तैयार ही नहीं थी। वह पूछती ही रही, 'तुम मुझे अकेला क्यों छोड्‌कर गए? तुम इतना कह दो कि तुमने मुझे कभी प्रेम नहीं किया तो फिर सब ठीक है।’ और बुद्ध ने कहा, 'मैं तुझे प्रेम करता था, मैं तुझे अभी भी प्रेम करता हूं। इसीलिए तो बारह वर्ष बाद मैं वापस लौटा हूं।’ लेकिन यह प्रेम भिन्न है। वह क्रोधित थी और बुद्ध क्रोधित नहीं थे। यदि वह भी क्रोधित हो जाते, क्योंकि वह रो रही थी और चीख-चिल्ला रही थी तो वह समझ सकती थी। यदि वह भी क्रोधित हो जाते और उसकी पिटाई करते तो वह समझ सकती थी। तो सब कुछ ठीक हो जाता। तो वह पुराने ही व्यक्ति होते। बारह वर्ष पूरी तरह मिट जाते और वे दोबारा प्रेम करने लगते। उसमें कोई कठिनाई न थी। लेकिन वह तो चुपचाप खड़े थे और वह पागल हो रही थी। बस वही पागल हो रही थी, वह तो मुस्कुरा रहे थे। यह जरा ज्यादा था। यह कैसा प्रेम? यह समझना उसके लिए बहुत कठिन रहा होगा।
बुद्ध को ताना देने के लिए उसने अपने बेटे से जो अब बारह वर्ष का था, कहा, 'ये तेरे पिता हैं देख इनकी ओर, भगोड़े की ओर। तू बस एक दिन का था जब ये भाग गए थे। ये तेरे पिता हैं। ये एक भिखारी हैं और इन्होंने तुझे जन्म दिया था। अब अपना उत्तराधिकार मांग। इनके सामने अपने हाथ फैला, ये तेरे पिता है। पूछ इनसे कि तुझे देने के लिए इनके पास क्या है?' वह तो बुद्ध को ताना दे रही थी, वह नाराज थी, स्वभावत:।
और बुद्ध ने आनंद को बुलाया जो बाहर खड़ा था और कहा, 'आनंद, मेरा भिक्षा-पात्र ले आ।’ जब भिक्षा-पात्र बुद्ध को. दिया गया तो वह उन्होंने अपने बेटे राहुल को दे दिया और कहा, 'यही मेरा उत्तराधिकार है मैं तुझे संन्यास में दीक्षित करता हूं।’
यह उनका प्रेम था। लेकिन यशोधरा तो और भी पागल हो गई। उसने कहा, 'यह तुम क्या कर रहे हो? यदि तुम अपने बेटे को प्रेम करते हो तो उसे भिखारी नहीं बनाओगे, संन्यासी नहीं बनाओगे।’ बुद्ध ने कहा, 'मैं उसे इसीलिए भिखारी बना रहा हूं क्योंकि मैं उसे प्रेम करता हूं। मैं जानता हूं कि वास्तविक उत्तराधिकार क्या है और वही मैं उसे दे रहा हूं। मेरे पिता इतने बुद्धिमान नहीं थे, लेकिन मैं जानता हूं कि क्या देने योग्य है और वही मैं दे रहा हूं।’
ये दो अलग-अलग आयाम हैं, दो अलग-अलग भाषाएं हैं जिनका कहीं मिलन नहीं होता। वह प्रेम कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पत्नी से जरूर प्रेम किया होगा, इसीलिए वह वापस आए। उन्होंने अपने बेटे को प्रेम किया होगा, इसीलिए उन्होंने उसे दीक्षा दी। लेकिन कोई पिता यह नहीं समझ सकता।
जब बुद्ध के पिता ने इस बारे में सुना-वह बूढ़े थे बीमार थे-वह बाहर दौड़े आए और बोले, 'यह तूने क्या किया? क्या तू मेरे पूरे वंश को नष्ट करने पर तुला है? तू घर से भाग गया, तू मेरा इकलौता बेटा था। अब राहुल पर मेरी आशाएं टिकी हैं, वह तेरा इकलौता बेटा है। और तूने उसे भी संन्यास दे दिया! तो मेरा वंश तो अब समाप्त हो गया। अब भविष्य की कोई संभावना न रही। तू क्या कर रहा है? क्या तू मेरा शत्रु है? 
और बुद्ध ने कहा, 'क्योंकि मैं अपने बेटे को प्रेम करता हूं इसलिए इसे वही दे रहा हूं जो देने योग्य है। न तो आपका राज्य, न आपका वंश और वंश-वृक्ष ही किसी महत्व का है। संसार को इससे कोई अंतर नहीं पड़ता कि यह वंश-वृक्ष आगे बढ़ता है या नहीं। लेकिन यह संन्यास जिसमें मैं राहुल को दीक्षित कर रहा हूं बहुत महत्वपूर्ण है। मैं भी अपने पुत्र को प्रेम करता हूं।’
दो पिता बारत कर रहे हैं! बुद्ध के पिता फिर उनसे प्रार्थना करने लगे 'तू वापस आ जा। मैं तेरा पिता-हूं। मैं आ हूं। मैं नाराज हूं। तूने मुझे निराश किया है। लेकिन फिर भी मेरे पास पिता का हृदय है और मैं तुझे क्षमा कर दूंगा। आ जा, मेरे द्वार खुले हैं। वापस आ जा। छोड़ दे यह संन्यास, वापस आ जा, मेरे द्वार खुले हैं। यह राज्य तेरा है, मैं प्रतीक्षा कर रहा हूं। मै बहुत बूढ़ा हूं लेकिन मेरे मन में तेरे लिए बहुत प्रेम है और मैं क्षमा कर सकता हूं।’
यह एक प्रेम है। फिर यह दूसरे पिता, गौतम बुद्ध स्वयं हैं, जो संसार छोड़ने के लिए अपने बेटे को संन्यास दे रहे हैं। यह भी प्रेम है।
लेकिन दोनों प्रेम इतने भिन्न हैं कि दोनों को एक ही नाम से, एक ही शब्द से बुलाना ठीक नहीं है। लेकिन हमारे पास कोई दूसरा शब्द नहीं है।

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Star Why and what we are promoting
Posted by: admin - 03-01-2019, 08:45 AM - Forum: About us - No Replies

Why and what we are promoting


   


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क्यों हम दुनिया की पहली वेबसाइट हैं: 2013 से हम अपनी वेबसाइट द्वारा सेवायें प्रदान कर रहे हैं. हमारी वेबसाइट पर दिये गये भविष्यफल सही होने पर विसिटर्स द्वारा भी सोशल मीडिया पर शेयर किये गये. 
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Smile गुजरात के साड़ी निर्माताओं ने निकाली सर्जिकल स्ट्राइक साड़ी
Posted by: Nisha Jain - 02-28-2019, 10:27 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

गुजरात के साड़ी निर्माताओं ने निकाली सर्जिकल स्ट्राइक साड़ी
Smile Smile
   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

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Star Our Responsibilities As Civilians When India Is On High Alert
Posted by: Manmeet Chhabra - 02-28-2019, 08:03 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

Our Responsibilities As Civilians When India Is On High Alert

For the next six months at least India is under threat of retaliation by our enemies. Here are some ways to behave as a responsible citizen during this time of national emergency. 

1. What's done is done. Forwarding jokes is fine but the situation is grim. So let's come back to senses and ask ourselves, "What is my responsibility in a crisis". Understand that *this is an hour of national high alert in India.*  STOP and THINK for a moment.

2. "Loose lips, sink ships". *Your facebook, Whatsapp & Instagram messages could go to our enemies within minutes.* if you have friends in defence, DO NOT share their messages to civilian groups. Just be silent for a few months on security matters. Your brilliant insights may be just what the enemy needs to understand the Indian psyche.

4. *Do not photograph or take videos of anything related to local or national security. No selfies with tanks or jawans*.  The enemy is monitoring social media activity, city by city and tracking our forces.

5. *Do not take pictures in airports, railway stations, government facilities, etc. or circulate them*.

6. *Do not forward any sensitive videos and if anyone sends it in a group, caution the sender and insist on the admin removing it immediately.* 

7. *Be on high alert personally,  in public spaces* and in case of any security threat,  alert local authorities immediately ( suspicious packages, panicked drivers near sensitive facilities, etc.) Become the eyes and ears of India's security forces.

8. *If you have a flight/train to catch, arrive early* and help make the security checks smooth. Don't throw tantrums and become a headache for the CRPF/security teams there. Instead greet them with a Jai Hind or Thank you, and receive a broad smile.
 
9.  *Prepare yourself to be useful to the country in its time of need.* What can you offer:  Learn first aid. Or traffic management. Or volunteer somewhere. Become useful in real life.

10. *Sensitize others* - family, children, youth, drivers, maids, friends, -  that this is a time of national emergency. Make them feel their responsibility.

Google  to see what your responsibility is as a civilian in times of war. Share more of what you find. Be a responsible Indian citizen.

Jai Hind ! Vande Mataram !! 

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Heart ब्लड डोनेशन में दूसरों के साथ अपना फायदा भी
Posted by: admin - 02-28-2019, 07:58 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

ब्लड डोनेशन में दूसरों के साथ अपना फायदा भी

?ब्लड डोनेशन को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट न होने के चलते बहुत से लोगों के मन में ब्लड डोनेशन को लेकर दुविधा बनी रहती है। ब्लड डोनेट करना क्यों जरूरी है और जरूरत पड़ने पर क्या करें, बता रहे हैं  मित्र:

क्यों है जरूरी

? ब्लड डोनेट कर एक शख्स दूसरे शख्स की जान बचा सकता है।

? ब्लड का किसी भी प्रकार से उत्पादन नहीं किया जा सकता और न ही इसका कोई विकल्प है।

? देश में हर साल लगभग 250 सीसी की 4 करोड़ यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। सिर्फ 5,00,000 यूनिट ब्लड ही मुहैया हो पाता है।

? हमारे शरीर में कुल वजन का 7% हिस्सा खून होता है।

? आंकड़ों के मुताबिक 25 प्रतिशत से अधिक लोगों को अपने जीवन में खून की जरूरत पड़ती है।

*क्या हैं फायदे*

? ब्लड डोनेशन से हार्ट अटैक की आशंका कम हो जाती है। डॉक्टर्स का मानना है कि डोनेशन से खून पतला होता है, जो कि हृदय के लिए अच्छा होता है।

? एक नई रिसर्च के मुताबिक नियमित ब्लड डोनेट करने से कैंसर व दूसरी बीमारियों के होने का खतरा भी कम हो जाता है, क्योंकि यह शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है।

? ब्लड डोनेट करने के बाद बोनमैरो नए रेड सेल्स बनाता है। इससे शरीर को नए ब्लड सेल्स मिलने के अलावा तंदुरुस्ती भी मिलती है।

? ब्लड डोनेशन सुरक्षित व स्वस्थ परंपरा है। इसमें जितना खून लिया जाता है, वह 21 दिन में शरीर फिर से बना लेता है। ब्लड का वॉल्यूम तो शरीर 24 से 72 घंटे में ही पूरा बन जाता है।

   *ब्लड डोनेट करने से पहले*
?ब्लड देने से पहले मिनी ब्लड टेस्ट होता है, जिसमें हीमोग्लोबिन टेस्ट, ब्लड प्रेशर व वजन लिया जाता है। ब्लड डोनेट करने के बाद इसमें हेपेटाइटिस बी व सी, एचआईवी, सिफलिस व मलेरिया आदि की जांच की जाती है। इन बीमारियों के लक्षण पाए जाने पर डोनर का ब्लड न लेकर उसे तुरंत सूचित किया जाता है।

? ब्लड की कमी का एकमात्र कारण जागरूकता का अभाव है।

? 18 साल से अधिक उम्र के स्त्री-पुरुष, जिनका वजन 50 किलोग्राम या अधिक हो, वर्ष में तीन-चार बार ब्लड डोनेट कर सकते हैं।

? ब्लड डोनेट करने योग्य लोगों में से अगर मात्र 3 प्रतिशत भी खून दें तो देश में ब्लड की कमी दूर हो सकती है। ऐसा करने से असमय होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।

? ब्लड डोनेट करने से पहले व कुछ घंटे बाद तक धूम्रपान से परहेज करना चाहिए।

? ब्लड डोनेट करने वाले शख्स को रक्तदान के 24 से 48 घंटे पहले ड्रिंक नहीं करनी चाहिए।

? ब्लड डोनेट करने से पहले पूछे जाने वाले सभी प्रश्नों के सही व स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

       *नोट:*
 ब्लड डोनेट करने के बाद आप पहले की तरह ही कामकाज कर सकते हैं। इससे शरीर में किसी भी तरह की कमी नहीं होती।

?इस मैसेज को हर आदमी व हर ग्रुप में पहुचाऎ ताकि रक्तदान करने वालो की गलतफहमी दूर हो सके तथा रक्तदान नहीं करने वाले भी ज्यादा से ज्यादा रक्तदान करके खुद भी स्वस्थ रहे तथा कई लोगों की जान बचा सके|                   

_मौका दीजिये अपने खून को, किसी की रगों में बहने का......_

_ये लाजवाब तरीका है , कई जिस्मों में ज़िंदा रहने का......._

❣❣❣

? *ब्लड ग्रुप की तुलना*  ?

आपका ब्लड कौनसा है और उसकी उपलब्धता कितनी है?

O+       1 in 3        37.4%
(प्रचुरता में उपलब्ध)

A+        1 in 3        35.7%

B+        1 in 12       8.5%

AB+     1 in 29        3.4%

O-        1 in 15        6.6%

A-        1 in 16        6.3%

B-        1 in 67        1.5%

AB-     1 in 167        .6%
*(दुर्लभ)*

*Compatible Blood Types*

O-    ले सकता है      O-

O+   ले सकता है      O+, O-

A-    ले सकता है       A-, O-

A+ले सकता है A+, A-,O+,O-

B- ले सकता है  B-, O-

B+ ले सकता है B+,B-,O+,O-

AB-ले सकता है AB-,B-,A-,O-

AB+ ले सकता है  AB+, AB-, B+, B-, A+,  A-,  O+,  O-

?ये एक महत्वपूर्ण मेसेज है जो किसी की जिंदगी बचा सकता है ...?
         Donate blood ....                       ?

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Heart Jai Hind
Posted by: admin - 02-28-2019, 11:55 AM - Forum: Share your stuff - No Replies



Jai hind 

#AirSurgicalStrikes #JaiHind #VandeMataram #Abhinandan #AbhinandanVarthaman #AbhinandanMyHero #IndiaStrikesBack #indianairforce

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Exclamation एक जरुरी सूूचना....कृपया पूरी पढ़ें।
Posted by: Navin Sharma - 02-28-2019, 09:37 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

एक जरुरी सूचना....कृपया पूरी पढ़ें।

भारत की वायुसेना ने जो अदम्य साहस दिखाया है पाक को घर में घुस कर मारा है उसके लिए सेना को ढेर सारी बधाई।
आज इस मुश्किल घडी में हम सब देश के साथ है देश की सेना के साथ है हर उस फैसले के साथ है जो राष्ट्र हित में होगा।
पर आज अब कुछ जिम्मेदारी हम आम नागरिको की भी बनती है पाक अभी बौखलाया हुआ है तनाव में है और ये भी तय है कि वो अब हमारी इस AirStrike का जवाब भी ढूंढ रहा होगा।
अब हमे बहुत सचेत और सावधान रहना होगा। अपने आसपास बस स्टेण्ड..रेलवे स्टेशन..मंदिर..होटल..मॉल..भीड़भाड़ वाले बाजार..सिनेमा हॉल..अन्य ऐसी जगह जन्हा बहुत ज्यादा भीड़ रहती है वँहा हमे सतर्क रहना होगा।
कुछ भी जो आपको संदिग्ध लगे..अप्रत्याशित सा लगे तो तुरन्त पुलिस को खबर करे।
हमे आज पाक से खतरा कम है और देश के अंदर बेठे गद्दारो और पाक परस्त लोगो से ज्यादा है। उन्हें कोई LOC या बोर्डर पार नही करना पड़ेगा और वो हमारी थोड़ी सी लापरवाही से हमे और हमारे देश को बड़ा नुकसान पहुँचा सकते है।
इसीलिए आप सभी से गुजारिश है कि आने वाले कुछ दिनों तक अत्यंत सावधानी रखे और सदैव हरपल सतर्क रहे और आसपास के लोगो को भी ऐसा करने को कहे।

पाकिस्तान से तो देश की सेना आराम से निपट लेगी पर आस्तीनों के सांपो से तो हमे ही निपटना होगा।
कृपया इस सन्देश को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाये।

भारत माता की जय
जय हिन्द

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Heart भगवान उनके भक्त और प्रेम
Posted by: Payal Singh - 02-28-2019, 09:33 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

भगवान उनके भक्त और प्रेम
एक गांव में भोली-भाली गरीब लड़की पंजिरी रहती थी। वह भगवान मदनमोहन जी की अनन्य भक्त थी। भगवान मदनमोहन भी उससे बहुत प्रसन्न रहते थे।वे उसे स्वप्न में दर्शन देते और उससे कभी कुछ खाने को माँगते, कभी कुछ।

*वह दूसरे दिन ही उन्हें वह चीज भेंट कर आती, पर वह उनकी दूध की सेवा नित्य करती। वह रोज उनके दर्शन करने जाती और दूध दे आती।सबसे पहले उनके लिए प्रसाद निकालती।*

दूध वह नगर में दूसरे लोगों को भी देती। लेकिन मदनमोहन जी को दूध अपनी ओर से देती।उसके पैसे न लेती।

इस प्रकार वह दूध बेच कर अपनी जीवन नैय्या चलाती थी। लेकिन वह गरीब पंजिरी को चढ़ावे के बाद बचे दूध से इतने पैसे मिलते कि दो वक्त का खाना भी खा पाये।

अतः मंदिर जाते समय पास की नदी से थोड़ा सा जल  दूध में सहज रुप से मिला लेती । फिर लौटकर अपने प्रभु की आराधना में मस्त बाकी समय अपनी कुटिया में बाल गोपाल के भजन कीर्तन करके बिताती।

*कृष्ण कन्हैया तो अपने भक्तों की टोह में रहते ही हैं ,नित नए रुप में प्रकट होते,कभी प्रत्यक्ष में और वह पंजिरी संसार की सबसे धनी स्त्री हो जाती।*

लेकिन एक दिन उसके सुंदर जीवन क्रम में रोड़ा आ गया। दूध में जल के साथ-साथ एक छोटी मछली दूध में आ गई और संयोगवश वह मदनमोहन जी के चढ़ावे में चली गई।

दूध डालते समय मंदिर के गोसाई की दृष्टि पड़ गई। गोसाईं जी को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने दूध वापस कर पंजिरी को खूब डांटा फटकारा और मंदिर में उस का प्रवेश निषेध कर दिया।

*पंजिरी पर तो आसमान टूट पड़ा ।रोती-बिलखती घर पहुंची-" ठाकुर मुझसे बड़ा अपराध हो गया ।क्षमा करो ,पानी तो रोज मिलाती हूं ,तुमसे कहां छिपा है ।ना मिलाओ तो गुजारा कैसे हो*। 

लेकिन, प्रभु आज तक तो तुमने कोई आपत्ति कि नहीं प्रेम से पीते रहे ,हां मेरा दोष था कि पानी छानकर नहीं मिलाया । लेकिन दुख इसलिए है कि तुम्हारे मंदिर के गोसाई ने पानी मिलाने पर मुझे इतनी खरी खोटी सुनाई और तुम कुछ ना बोले। 

ठाकुर अगर यही मेरा अपराध है तो में प्रतिज्ञा करती हूं कि ऐसा काम आगे ना करूंगी और अगर रूठे रहोगे, मेरा चढ़ावा स्वीकार न करोगे तो मैं यहीं प्राण त्याग दूंगी।
 
*तभी पंजिरी के कानों में एक मधुर कंठ सुनाई दिया-"माई ओ माई ।उठी दरवाजे पर देखा तो द्वार पर एक सुदर्शन किंतु थका-हारा भूखा-प्यासा एक युवक कुटिया में झांक रहा है।*

"कौन हो बालक"

 मैया बृजवासी हूं मदन मोहन के दर्शन करने आया था। बड़ी भूख लगी है कुछ खाने का मिल जाए और रात भर सोने की जगह दे दो तो बड़ा आभारी रहूंगा।"

पंजिरी के शरीर में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई। "कोई पूछने की बात है बेटा, घर तुम्हारा है। ना जाने तुम कौन हो जिसने आते ही मेरे जीवन में ऐसा जादू बिखेर दिया।दूर से आए हो क्या भोजन करोगे।"

*"दूध के सिवा कुछ लेता नहीं ।तनिक दूध दे दो वही पी कर सो जाऊंगा।" दूध की बात सुनते ही पंजिरी की आंखें डबडबा आयी, फिर अपने आप को संभालते हुए बोली-"पुत्र दूध तो है पर सवेरे का बासी है, जरा ठहरो अभी गाय को सेहला कर थोड़ा ताजा दूध दूह लेती हूं।"*

"अरे मैया नहीं नहीं ।उसमें समय लगेगा। सवेरे का भूखा प्यासा हूं दूध का नाम लेकर तूने मुझे अधीर बना दिया ।अरे वही सुबह का दे दो, तुम बाद में दूहते रहना।"

डबडबायीआंखों से बोली" थोडा पानी मिला हुआ दूध है, पर उसमें मछली आ गई थी।" "अरे मैया तुम मुझे भूखा मारोगी क्या? जल्दी से कच्चा दूध छान कर ऐसे ही दे दो वरना मैं यही दम तोड़ दूंगा।"

पंजिरी को आश्चर्य हुआ कि कैसी बात कर बैठा यह युवक,दौड़ी-दौड़ी गई झटपट दूध दे दिया। इधर दूध पीकर युवक का चेहरा खिल उठा।                          

*"मैया कितना स्वादिष्ट दूध है। तू तो यूं ही ना जाने क्या-क्या कह रही थी ,अब तो मेरी आंखों में नींद उतर आई है इतना कहकर युवक वही सो गया।*

पंजिरी अकेली हो गई है तो दिन भर की कांति, दुख और अवसाद ने उसे फिर घेर लिया।जाड़े के दिन थे ,भूखे पेट उसकी आंखों में नींद कहां।

जाडा़ बढ़ने लगा तो अपनी ओढ़नी बालक को ओढा दी।
रात के अंतिम प्रहर जो आंख लगी कि कृष्ण कन्हैया को सामने खड़ा पाया।
 
मदन मोहन भगवान ने आज फिर से स्वप्न मे दर्शन दिए और बोले,"यह क्या मैया, मुझे को मारेगी क्या?

*गोसाई की बात का बुरा मान कर रूठ गयी। खुद पेट में अन्न का एक दाना तक न डाला और मुझे दूध पीने का कह रही हो।*

मैंने तो आज तुम्हारे घर आकर दूध पी लिया अब तू भी अपना व्रत तोड़ कर के कुछ खा पी ले और देख दूध की प्रतीक्षा में व्याकुल रहता हूं, उसी से मुक्ति मिलती है। अपना नियम कभी मत तोड़ना।

गोसाईं भी अब तेरे को कुछ ना कहेंगे। दूध में पानी मिलाती हो, तो, क्या हुआ?वह तो जल्दी हज़म हो जाता है।अब उठो और भोजन करो। पंजिरी हड़बड़ाकर के उठी देखा बालक तो कुटिया में कहीं नहीं था।

सचमुच भेस बदल कर कृष्ण कन्हैया ही कुटिया में पधारे थे। पंजिरी का रोम-रोम हर्षोल्लास का सागर बन गया। झटपट दो टिक्कड़ बनाए और मदन मोहन को भोग लगाकर के साथ आनंदपूर्वक खाने लगी। उसकी आंखों से अश्रुधारा बह रही थी। 

थोड़ी देर में सवेरा हो गया पंजिरी ने देखा कि कृष्ण कन्हैया उसकी ओढ़नी ले गये हैं और अपना पीतांबर कुटिया में ही छोड़ गए हैं।

*इधर मंदिर के पट खुलते ही पुजारी ने मदन मोहनजी को देखा तो पाया की प्रभु फटी ओढ़नी ओडे़ आनंद के सागर में डूबे हैं। पुजारी समझ गये कि  प्रभु तुमने अवश्य फिर कोई लीला की है, लेकिन इसका रहस्य मेरी समझ में नहीं आ रहा है।*

लीलाउद्घाटन के लिए पंजिरी मंदिर के द्वार पर पहूंची। खड़ी होकर पुजारी जी से कह रही थी,"गुसाई महाराज देखो तो प्रभु की लीला और माया,पीतांबर मेरे घर छोड़ आये  है और मेरी फटी ओढ़नी ले आये।

*कल सवेरे आपने मुझे भगा दिया था ,लेकिन भूखा प्यासा मेरा कन्हैया दूध के लिये घर आ गया।"* 

पुजारी देवी के सामने बैठ गए। "भक्त और भगवान के बीच मेंने क्या कर डाला ,भक्ति बंधन को ठेस पहुंचा कर मैंने कितना बड़ा अपराध कर डाला देवी मुझे क्षमा कर दो "पंजिरी के चरणों में रो-रो कर कह रहे थे पुजारी।

लेकिन उनका भक्ति सागर था जो भक्त में भगवान के दर्शन पाकर निर्बाध बह चला था।पंजिरी भी क्या कम भावावेश मे थी ।आनंद भक्ति के सागर मे हिलोरे लेती हुई कह रही थी।

"गुसाई जी देखी तुमने बाल गोपाल की चतुराई अपना पीतांबर मेरी कुटिया मे जानबूझकर छोड मेरी फटी-चिथड़ी ओढ़नी उठा लाये।लो भक्तों को सम्मान देना तो की पुरानी इनकी पुरानी आदत है।"

मूर्ति में विराजमान कन्हैया धीरे-धीरे मुस्कुरा कर कह रहे थे अरे मैया तू क्या जाने कि तेरे प्रेम से भरी ओढ़नी ओढ़ने में जो सुख है वो पीतांबर में कहां!!

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Thumbs Up नरेंद्र मोदी के बारे में 25 अज्ञात और रोचक तथ्य
Posted by: Nirmal Jain - 02-28-2019, 08:45 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

नरेंद्र मोदी के बारे में 25 अज्ञात और रोचक तथ्य

1. नरेंद्र मोदी भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री है जो आजादी के बाद पैदा हुए हैं।

2. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नरेंद्र मोदी की कुंडली काफी हद तक बाल गंगाधर तिलक से मिलती है

3.1958 को 8 साल की उम्र में नरेंद्र मोदी ने दिवाली के दिन rss की शपथ ली थी।

4. मोदी बचपन में एक्टिंग और नाटकों में भाग लेते थे, मोदी NCC में भी शामिल थे।

5. नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेची है।

6. बचपन में मोदी पास के तालाब से मगरमच्छ पकड़कर घर ले आए थे, बाद में माँ के कहने पर वापिस छोड़ कर आए।

7. नरेंद्र मोदी की शादी 18 वर्ष की उम्र में ही कर दी गई थी. लेकिन शादी के 2 साल बाद ही उन्होनें घर छोड़कर सन्यासी बनने का फैसला किया। 

8. मोदी ने अमेरिका में मैनेजमेंट और पब्लिक रिलेशन से संबंधित कोर्स किया था।

9. मोदी कोई भी नया काम करने से पहले अपनी माँ का आशीर्वाद लेते हैं और स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श मानते हैं।

10. मोदी शाकाहारी है और सिगरेट, शराब को कभी हाथ नही लगाते।

11. जब मोदी 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे तब उनकी माँ ने कहा था कि बेटा कभी रिश्वत मत लेना।

12. गुजरात के 13 साल के शासन में मोदी ने एक भी छुट्टी नही ली।

13. नरेन्द्र मोदी जब अहमदाबाद संघ मुख्यालय में रहते थे तो वहां सारे छोटे काम करते जैसे साफ-सफाई, चाय बनाना, और बुर्जुग नेताओं के कपड़े धोना शामिल हैं।

14. RSS के प्रचारक दाढ़ी नहीं रखते, लेकिन मोदी दाढ़ी रखते थे।

15. 1975 में आपातकाल के दौरान RSS जैसी संस्थाओं पर प्रतिबंध लग गया था. उस समय मोदी सरदार का भेष बदलकर रहते थे।

16. नरेंद्र मोदी की शिक्षा: मोदी पोस्ट ग्रेजुएट हैं, उन्होने Political Science से M.A की हैं।

17. नरेंद्र मोदी की जाति ‘मोध घांची’ है।

18. नरेंद्र मोदी की एक साल की सैलरी 19 लाख रूपए हैं।

19. भारत के कई लोगो के विरोध के कारण 2004 से 2013 तक अमेरिका ने मोदी को वीजा नही दिया था, लेकिन PM बनने के बाद अमेरिका का खुद बुलावा आया था।

20. नरेन्द्र मोदी को नई तकनीकों का इस्तेमाल करने में अच्छा लगता हैं 2014 के लोकसभा इलेक्शन में सबसे पहले मोदी ने ही 3D तकनीक का प्रयोग कर भाषण दिया था।

21. मोदी ने कई साल हिमालय में सन्यासी बनकर तपस्या भी की है। किसी साधु के कहने पर वो राजनीति में आ गए।

22. नरेद्र मोदी स्विट्जरलैंड के फेमस ब्रांड मोवादो की घड़ी पहनते है। इस घड़ी की कीमत 39 हजार से 1 लाख रूपए तक है, एक बात ये भी है कि पीएम उल्टी घड़ी पहनते है क्योंकि वो इसे लकी मानते है।

24. नरेंद्र मोदी के कपड़े बिपिन और जीतेंद्र चौहान की दुकान पर सिले जाते है,  1989 के बाद से नरेंद्र मोदी के कपड़े यही सिलते आ रहे है। मोदी अपने सूट का फैब्रिक, कलर और डिजाइन खुद सेलेक्ट करते हैं।

25.नरेंद्र मोदी अपने पुराने कपड़ो की नीलामी करते है साथ ही साल में मीले 200 से 500 गिफ्ट की भी करोड़ो में नीलामी होती है जिसे वो नमामि गंगे प्रोजेक्ट को दान में देते है।

26.नरेंद्र मोदी ने 5 साल में भारत की इकोनॉमी को दुनिया की टॉप 5 इकोनॉमी में लाकर खड़ा कर दिया और अमेरिका से लेकर कोरिया,ईरान से लेकर अफगानिस्तान तक सबको भारत के समर्थन में ले लिया।

27.पिछले 5 साल से भारत दुनिया का सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वाला देश है जिस कारण पाकिस्तानी न्यूज़ चेनल इसे मोदी का जंगी जुनून भी कहते है।
हाल ही में भारत को न्यूक्लियर सबमरीन मिली ,स्वदेशी तेजस,धनुष,से लेकर स्वदेशी की लहर दौड़ पड़ी।
ओर भारत का डिफेंस बजट रशिया के बराबर ला दिया।

28.नरेन्द्र मोदी पर आजतक रिश्वत या घोटाले का आरोप नही है जिस कारण उनकी संपत्ति कम ओर प्रसिद्धि ज्यादा है।

29.पढ़ने के बाद शेयर जरूर करे ?‍?‍?‍??‍?‍?‍??‍?‍?‍?

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Tongue SOME IRONIES THAT - EXIST IN INDIA
Posted by: Priyaka Mishra - 02-27-2019, 05:33 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

*SOME IRONIES THAT*
             *EXIST IN INDIA :*






1.
Politicians *Divide* Us, 
          Terrorists *Unite* Us.
  





2. 
Everyone Is In Hurry ,
But 
*NO ONE* Reaches In Time






3. 
Priyanka Chopra Earned More Money Playing *Mary Kom*, 
Than The Mary Kom Earned In Her Entire Career. 






4. 
Most People Who Fight Over *Gita And Quran*, 
Have Probably Never Read Any Of Them.






5. 
We Rather Spend More On Our Daughter's *WEDDING* 
Than On Her *EDUCATION*






6. 
The *SHOES* That We Wear Are Sold In Air Conditioned Show Rooms,
The *VEGETABLES* That We Eat Are Sold On The Footpaths.






7. 
We Live In A Country Where Seeing A *POLICEMAN* Makes Us Nervous Rather Than Feeling Safe.






8. 
In IAS Exam, A Person Writes A Brilliant 1500 Words Essay About How Dowry Is A Social Evil And *CRACKS THE EXAM* By Impressing Everyone. 
One Year Later His Parents Demand  A Dowry In Crores, Because He Is An IAS Officer.






9. 
Indians Are Obsessed With Screen Guards On Their Smartphones Even Though Most Come With Scratch Proof Gorilla Glass But Never Bother Wearing A HELMET While Riding Bikes















      
One Of The Best Ever Lines :



                      
Try To Understand People Before Trusting Them
BECAUSE
We Are Living In Such A World,
Where Artificial Lemon Flavor Is Used For 
"WELCOME DRINK"
And Real Lemon Is Used In 
"FINGER BOWL"

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Thumbs Up छाछ, जानिए इसे पीने के फायदे और नुस्खे
Posted by: Vinay Goyal - 02-27-2019, 04:36 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

अत्यधिक तनाव कम कर दिमाग को ठंडा रखती है छाछ, जानिए इसे पीने के फायदे और नुस्खे
 
1 छाछ का सेवन भुने जीरे के साथ किया जाए, तो पाचन अच्छे से होता है और पेट की गर्मी व अन्य समस्याओं से बचा जा सकता है। यह तरलता बनाए रखने में भी मददगार है।
2 मोटापा अधिक होने पर छाछ को छौंककर सेंधा नमक डालकर पीने से फायदा होता है। उच्च रक्तचाप होने पर गिलोय का चूर्ण मट्ठे के साथ लेना चाहिए। वहीं सुबह-शाम मट्ठा या दही की पतली लस्सी पीने से स्मरण शक्ति तेज होती है।
3 बार-बार हिचकी आने की समस्या हो, तो छाछ में एक चम्मच सौंठ डालकर सेवन करना लाभदायक होगा। ऊल्टी आने या जी मचलाने पर छाछ में जायफल घिसकर इसके मिश्रण को पीने से लाभ मिलता है।
4 सौंदर्य समस्याओं के लिए भी छाछ बेहद फायदेमंद चीज है। छाछ में आटा मिलाकर बनाए गए लेप को लगाने से त्वचा की झुर्रियां कम होती हैं। इसके अलावा गुलाब की जड़ को छाछ में पीसकर चेहरे पर लगाने से मुहांसे खत्म हो जाते हैं।
5 अगर आप अत्यधिक तनाव से गुजर रहे हैं, तो नियमित छाछ का सेवन आपके लिए लाभदायक होगा। वहीं शरीर के साथ-साथ दिमाग की गर्मी को कम करने में भी छाछ का सेवन लाभप्रद है।
6 शरीर के किसी भाग में जल जाने पर तुरंत छाछ लगाने से लाभ होता है। खुजली की समस्या होने पर अमलतास के पत्ते छाछ में पीस लें और शरीर पर मलें। कुछ देर बाद स्नान करें। शरीर की खुजली नष्ट हो जाती है।
7 बाल झड़ने पर भी छाछ असरकारी है। इसके लिए बासी छाछ से सप्ताह में दो दिन बालों को धोना लाभप्रद होता है।

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Thumbs Up चमेली के फूल जहां खुशबू देते हैं, वहीं इन्हें कई बीमारियों में उपयोगी माना गया है।
Posted by: Vinay Goyal - 02-27-2019, 04:33 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

*चमेली के फूल जहां खुशबू देते हैं, वहीं इन्हें कई बीमारियों में उपयोगी माना गया है।*
??????
_आयुर्वेद के अनुसार चमेली स्वाद में कड़वी व कसैली, पचने में हल्की, तासीर में गर्म और कफ व पित्त नाशक होती है। जानते हैं इसके फायदों के बारे में।_

1. चमेली के पत्तों को मुंह में रखकर पान की तरह चबाने से मुंह के छाले, घाव व इस अंग से जुडे सभी प्रकार के रोगों में राहत मिलती है।

2. आंखों में दर्द होने पर चमेली के फूलों का लेप लगाएं, लाभ होगा।

3. चमेली के पत्तों को पीसकर पीने से पेट में कीड़े नष्ट हो जाते हैं।

4. चमेली के फूलों को पीसकर लेप बनाकर लगाने से दाद, खाज और खुजली जैसे त्वचा रोगों में आराम मिलता है।

5. बवासीर होने पर चमेली, बरगद और गिलोय के पत्तों को पीसकर सोंठ, सेंधा नमक और छाछ के साथ पीने से लाभ होता है। 

6. पुराना सिर दर्द होने पर चमेली के फूलों का लेप सिर पर लगाने से सिरदर्द में आराम मिलता है।

7. चेहरे पर नियमित रूप से चमेली के फूलों का रस लगाने से चमक बढ़ती है।

8. चमेली के फूलों की डंडी व मिश्री समान अनुपात में मिलाकर आंखों पर लगाने से थकान दूर होती है।

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Thumbs Up शक्तिवर्धक भोजन
Posted by: Vinay Goyal - 02-27-2019, 04:30 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

शक्तिवर्धक भोजन
?परिचय-
            किसी भी व्यक्ति को जब कोई रोग हो जाता है तो उसके कुछ दिनों के बाद वह कहता है कि मुझे बहुत कमजोरी सी लग रही है। लेकिन कोई स्वस्थ व्यक्ति भी अगर थोड़ी दूर पैदल चल लेता है या कोई भारी काम करता है तो वह भी बोलता है कि वह थक गया है। अब तो मुझे कमजोरी दूर करने वाली और ताकत बढ़ाने वाली दवा लेनी पड़ेगी। ये कुछ न होकर लोगों की एक दिमागी सोच बन गई है कि चिकित्सा में कोई ऐसी औषधि भी होनी चाहिए जिससे कि शरीर में ताकत बढ़ जाए। परन्तु ऐसी औषधि बस थोड़े समय तक ही अपना असर दिखाती है। यह नशे की तरह थोड़े समय के लिए ताकत को बढ़ाकर अपनी क्रिया को समाप्त कर देती है।
         
          ?  मनुष्य सिर्फ अपने खाने वाले भोजन के सहारे ही जिंदा रहता है। अगर उसी भोजन को सही तरीके से और पौष्टिकता के आधार पर किया जाए तो वह ही किसी भी व्यक्ति के लिए ताकत बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।
ताकत बढ़ाने वाले पदार्थ-  

?1. नींबू-
1 नींबू को 1 गिलास गर्म पानी में (बिना नमक या चीनी मिलाएं) निचोड़कर पीने से पूरे शरीर में एक नई ताकत सी पैदा हो जाती है। इससे आंखों की रोशनी तेज हो जाती है, दिमागी कमजोरी, सिर में दर्द रहना आदि रोग समाप्त हो जाते हैं। इसको पीने से किसी भी काम को करने से जल्दी थकान नहीं होती है।

6 मुनक्के, 6 बादाम, 40 ग्राम किशमिश और 6 पिस्तों को रात में करीब आधा लीटर पानी में डालकर किसी कांच के बर्तन में भीगने के लिए रख दें। सुबह इन सबको पीसकर और छानकर इसमें 1 चम्मच शहद और 1 नींबू को निचोड़कर खाली पेट पीने से दिमागी और शारीरिक थकान दूर हो जाती है। ये इन्द्रियों की ताकत बढ़ाने का भी एक बहुत ही नायाब नुस्खा है।
किसी कांच के गिलास में लगभग 3 चौथाई तक अजवाइन को भर दें। फिर इसमे नींबू का रस भरकर इसके मुंह पर कपड़ा डालकर धूप में रख दें। जब इसके अन्दर का नींबू का रस सूख जाए तो इसे दुबारा नींबू के रस से भर दें और धूप में ही पड़ा रहने दें। इस तरह से इसमें लगभग 7 बार नींबू का रस भरकर अजवाइन को सुखा लें। फिर इस सुखाई हुई अजवाइन को कांच की बोतल में भर दें। रोजाना चौथाई चम्मच इस अजवाइन की फंकी लेने से शरीर में ताकत बढ़ जाती है तथा यौन शक्ति में भी बढ़ोतरी होती है। इस अजवाइन का सेवन करने के दौरान दूध और घी का सेवन भी करते रहना चाहिए।
?2. मौसमी- मौसमी का रस दिमाग, जिगर और भोजन पचाने की क्रिया को ताकत देता है। इस रस को पीने से खाया हुआ भोजन शरीर में लगता है और शरीर में ताकत बढ़ती है। बुखार और काफी पुराने रोगों में मौसमी का रस पीने से रोगी को कमजोरी महसूस नहीं होती है। इसके द्वारा रोगी के शरीर से रोगों का जहरीला पदार्थ बाहर निकल जाता है। इसका रस कई दिनों तक पीते रहने से दस्त प्राकृतिक रूप में आने लगते हैं। कब्ज, सिरदर्द, काम करने में मन न लगना, कोई सा भी काम करने पर थक जाना, रात को नींद न आना आदि रोग दूर हो जाते हैं। इससे नई चुस्ती और फुर्ती आ जाती है।  
?3. सेब- सेब में `मैलिक एसिड होता है। यह खटाई आंतों, जिगर और दिमाग के लिए लाभकारी है। इसके अन्दर फॉस्फोरस होता है यानी कि जलन पैदा करने वाला पदार्थ जिसे खाने से पेट साफ रहता है और आमाशय मजबूत बनता है। सेब और सेब के रस में काफी मात्रा में खनिज पदार्थ होते हैं। सेब के 2 छोटे-छोटे टुकड़ों को लगभग आधा सेर पानी में डालकर रख दें। जब यह पानी ठंडा हो जाए तो इसमें सेब के टुकड़ों को मसलकर और छानकर उस पानी को पी लें। अगर इसमें स्वाद बढ़ाना हो तो चीनी की जगह मिश्री डालकर पी सकते हैं। यह सेब का बहुत ही पौष्टिक और स्वादिष्ट शर्बत होता है। यह खून में मिलकर दिल, दिमाग, जिगर और शरीर के हर भाग में चुस्ती-फुर्ती पैदा करता है। सेब के रस को पीने से दिल को ताकत मिलती है, आंखों की रोशनी तेज होती है। यह शरीर के अन्दर से खून के अन्दर के जहरीले पदार्थों को बाहर निकालकर व्यक्ति को हष्ट-पुष्ट बनाता है। जो लोग चाहते हैं कि वे हमेशा ताकतवर और सुन्दर बने रहें उनको रोजाना सेब का रस पीना चाहिए। खाली पेट सेब खाने से शरीर की गर्मी और खुश्की समाप्त हो जाती है। 
4. ?4. पपीता- पपीता अगर देखकर लिया जाए कि वह अच्छी तरह से पका हुआ है या नहीं तो ठीक है क्योंकि अच्छी तरह से पका हुआ पपीता ही सबसे ज्यादा गुणों वाला होता है। सुबह उठते ही खाली पेट पपीता खाना सबसे ज्यादा गुणकारी होता है। इसके बाद दोपहर का भोजन करने के बाद पपीता खाने से भोजन आसानी से पच जाता है। शाम को 5-6 बजे भी पपीते को नाश्ते के रूप में खाया जा सकता है। पपीते में मिलने वाला एन्जाइम कठोर मांस-तंतुओं और रोग के कीटाणुओं को समाप्त कर देता है। पपीता टी.बी. रोग के कीटाणुओं को बिल्कुल समाप्त कर देता है। पपीते को खाने से खून को बहाने वाली नसें कठोर नहीं होती हैं और रक्तसंचार सही तरीके से काम करता है। दिल के रोग में भी पपीता खाने से लाभ होता है। स्वस्थ जीवन जीने की राह में पपीता खाना बहुत ही लाभदायक है।  
?5. आम- रोजाना आम खाने से शरीर के अन्दर खून काफी मात्रा में बनता है। इससे जिन लोगों का शारीरिक वजन कम होता है वह बढ़ जाता है। आम खाने से पेशाब खुलकर आता है, शरीर में चुस्ती-फुर्ती पैदा होती है। आम का मुरब्बा खाना भी काफी लाभकारी होता है। शरीर में ताकत बढ़ाने के लिए रोजाना भोजन करने के बाद आम खाना लाभकारी होता है।
?6. अंगूर- कमजोर व्यक्तियों के लिए रोजाना ताजे अंगूरों का रस पीना काफी लाभकारी सिद्ध होता है। अंगूर शरीर में खून को बनाता है और उसे पतला भी करता है। इससे शरीर मोटा-ताजा हो जाता है। रोजाना दिन में 2 बार अंगूर का रस पीने से भोजन पचाने की क्रिया तेज हो जाती है, कब्ज का रोग समाप्त हो जाता है, पेट में गैस नही बनती। अगूंर का रस सिरदर्द, बेहोशी, चक्कर आना, छाती के रोग तथा टी.बी. के रोग में लाभकारी है। यह खून की खराबी को भी दूर करता है। अंगूर का सेवन करने से शरीर मे मौजूद जहर बाहर निकल जाता है। यह स्त्रियों के श्वेतप्रदर के रोग में भी काफी लाभकारी है। अंगूर खून में आयरन की मात्रा को बढ़ाता है।
?7. केला- भोजन करने के बाद केला खाने से शरीर में ताकत बढ़ती है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। केला वीर्य और शुक्राणुओं को बढ़ाने वाला है। यह आंखों के रोगों को दूर करता है। केला किसी तरह का फल नहीं है, इसे रोटी की जगह भी खाया सकता है। ताजा केला सबसे अच्छा है। एक समय में ज्यादा से ज्यादा 3 केले खाने चाहिए लेकिन थोड़ा सा घी लगाकर। सुबह दो केलों को खाकर ऊपर से दूध पीने से शरीर में ताकत बढ़ती है। इसी तरह से संभोग करने के बाद केला खाने से शक्ति बढ़ती है।
8. ?8. मुनक्का-
सर्दियों के मौसम में रोजाना मुनक्का खाने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
रात को सोने से पहले 20 मुनक्कों को गर्म पानी से धोकर पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उठते ही जिस पानी में मुनक्के भीगे हुए हो उस पानी को पीकर मुनक्कों को खा लें। इस तरह रोजाना मुनक्कों को खाने से शरीर की कमजोरी दूर हो जाती है। इससे शरीर में खून की मात्रा बढ़ जाती है और ताकत भी पैदा होती है। फेफड़ों को ताकत मिलती है।स्नेहा समुह
सर्दियों में 250 मिलीलीटर दूध में 20 मुनक्कों को डालकर उबाल लें। फिर इन मुनक्कों को खा लें और उस दूध को पी लें। सर्दियों के मौसम में रोजाना दूध और मुनक्का सेवन करने से बुखार के कारण आई हुई शारीरिक कमजोरी समाप्त हो जाती है। इससे पुराना बुखार भी उतर जाता है।
6 मुनक्के, 6 बादाम, 25 किशमिश और 2 अंजीर को रात में सोने से पहले एक कांच के बर्तन में इतना पानी डालकर भिगो लें कि ये सारे पानी को सोख लें। सुबह इन सब चीजों को खाने के बाद बचे हुए पानी को पीने से कमजोर व्यक्ति की कमजोरी दूर हो जाती है और वह ताकतवर बन जाता है।

?9.  आंवला-
आंवले का मुरब्बा रोजाना खाने से शरीर में ताकत पैदा होती है। यह गर्भवती स्त्रियों के लिए बहुत ही लाभकारी है। एक आंवला शरीर में एक अण्डे से ज्यादा ताकत बढ़ाता है। इसके सेवन से दिल में घबराहट होना, तिल्ली का रोग, ब्लडप्रेशर का रोग आदि दूर हो जाते हैं।
आंवला का सेवन करने से हर तरह के रोग दूर होते हैं। आंवला का सेवन करने से बूढ़ों में भी जवानों जैसी ताकत पैदा हो जाती है।
आंवला का नियमित सेवन करने से वीर्य की कमजोरी समाप्त हो जाती है।
1 चम्मच पिसे हुए आंवले को लगभग 2 चम्मच शहद में मिलाकर चाटने से और ऊपर से दूध पीने से स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है।
2 चम्मच पिसा हुआ आंवला, 1 चम्मच देशी घी और 3 चम्मच शहद को एकसाथ मिलाकर कुछ सप्ताह तक रोजाना खाने से बदसूरत व्यक्ति भी सुन्दर हो जाता है।
गर्मियों के मौसम में दिल घबराना, धूप में चक्कर आना आदि परेशानियों में आंवले का शर्बत पीने से लाभ होता है।
दिल की तेज धड़कन को सामान्य बनाने के लिए आंवले का मुरब्बा खाना उपयोगी होता है।
किसी भी व्यक्ति को रोजाना कम से कम 50 मिलीग्राम विटामिन `सी´ की जरूरत पड़ती है और आंवले में सबसे ज्यादा मात्रा में विटामिन `सी´ पाया जाता है। लगभग आधा लीटर आंवले के रस को रोजाना पीने से शरीर में विटामिन `सी´ की जरूरत पूरी हो जाती है।
गुणों की दृष्टि से एक आंवला लगभग 2 संतरों के बराबर होता है।
आंवला के सेवन से दांत और मसूढ़े स्वस्थ बनते हैं और शरीर में रोगों से लड़ने की ताकत पैदा होती है।
घर में सब्जी आदि बनाते समय आंवला को खटाई के रूप में डालने से उसका स्वाद बढ़ जाता है।
आंवले की चटनी बनाकर खानी चाहिए।
आंवले के रस में शहद को मिलाकर शर्बत की तरह पीएं।
आंवले का अचार या मुरब्बा बनाकर खाना लाभकारी होता है।
अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति भी रोजाना आंवले का सेवन करता रहे तो उसके शरीर की सारी शारीरिक क्रियाएं अच्छी होकर उसका स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है।
10. अनन्नास-
अनन्नास दिल की घबराहट को समाप्त कर देता है। यह बढ़ी हुई प्यास को शान्त कर देता है। अनन्नास शरीर को मजबूत बनाकर तरोताजगी पैदा करता है।
अनन्नास शरीर में कफ की मात्रा को बढ़ाता है लेकिन खांसी-जुकाम को नहीं होने देता।
सुबह खाली पेट अनन्नास खाने से भोजन पचाने की क्रिया तेज होती है।
अनन्नास का शर्बत पीने से पेट की गर्मी दूर हो जाती है, पेशाब काफी मात्रा में आता है। इसी कारण से डाक्टर पथरी होने पर अनन्नास का शर्बत पीने की राय देते हैं।
अनन्नास का सेवन करने से दिल और दिमाग को ताकत मिलती है।

?11. अमरूद-
100 ग्राम अमरूद में 300 मिलीग्राम से लेकर 450 मिलीग्राम विटासिन `सी´ पाया जाता है।
अमरूद का सेवन करने से दिल को ताकत मिलती है और शरीर में चुस्ती-फुर्ती पैदा होती है।
अमरूद बढ़ी हुई प्यास को कम करता है और दिमाग को तेज करता है।
12. खजूर:
रोजाना खजूर खाने से आमाशय और दिल को ताकत मिलती है।
रोजाना खजूर का सेवन करने से शरीर में खून की मात्रा बढ़ जाती है और शरीर में मोटापा भी बढ़ता है।
खजूर को खाने से व्यक्ति की संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है।
 
?13. टिंडा- टिंडा शरीर को ताकत देता है और दिमाग को तेज करता है।
?14. गाजर- आधा गिलास गाजर का रस और आधा गिलास दूध को एकसाथ मिलाकर उसमें स्वाद के मुताबिक शहद मिलाकर रोजाना पीने से शरीर में खून बढ़ता है और कमजोरी भी दूर हो जाती है।
?15. छुहारा- छुहारे में काफी ज्यादा मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है। छुआरे खाकर उसके ऊपर गर्म-गर्म दूध पीने से शरीर में कैल्शियम की कमी के कारण होने वाले रोग जैसे- हड्डियों का कमजोर होना, दांतों का हिलना आदि दूर हो जाते हैं और इससे व्यक्ति का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।
?16. बबूल-   बबूल एक जंगली और कांटे वाला पेड़ होता है। बबूल की गोंद को घी में भूनकर इसके लड्डू बनाकर गर्भवती स्त्री को रोजाना खिलाने से उसके शरीर में ताकत पैदा होती है।स्नेहा समुह
?17. तुलसी-
सुबह उठते ही तुलसी के 5 पत्ते लेकर पानी के साथ निगलने से याद्दाश्त तेज होती है और शारीरिक ताकत बढ़ती है।
रोजाना 8 बून्द पानी में तुलसी का रस मिलाकर पीने से शरीर की मांसपेशियां और हडि्डयां मजबूत बन जाती हैं।
तुलसी के बीजों को दूध में डालकर उबाल लें। फिर इसमें शक्कर मिलाकर पीने से शरीर में शक्ति बढ़ती है।
?18. शकरकंदी-
रोजाना शकरकंदी खाने से शरीर में खून की मात्रा बढ़ जाती है और शरीर मोटा-ताजा बनता है।
शकरकंदी का सेवन करने से यौनशक्ति बढ़ जाती है।
शकरकंदी को चीनी के साथ खाना ज्यादा उपयोगी होता है।
??19. शक्कर-2 चम्मच चीनी और 2 चम्मच घी में लगभग 10 काली मिर्च के दाने मिलाकर रोजाना सुबह खाली पेट चाटने से दिमाग तेज होता है और कमजोरी के कारण होने वाला सिर का दर्द भी ठीक हो जाता है।
?20. नमक-  अगर कोई व्यक्ति किसी लंबे रोग के ठीक होने के बाद शरीर में कमजोरी महसूस करे तो उसे गर्म पानी में नमक मिलाकर नहलाने से उसकी कमजोरी दूर हो जाती है।
?21. खसखस -
खसखस की खीर बनाकर सेवन करने से शरीर में ताकत बढ़ जाती है।
2 चम्मच खसखस को रात के समय पानी में भिगोकर रख दें। फिर सुबह उठने पर उसे पीसकर उसमें स्वाद के मुताबिक मिश्री मिलाकर पानी में घोलकर लस्सी बनाकर पीने से गर्मी के मौसम में दिमाग ताजा रहता है और गर्मी भी कम लगती है।
खसखस का शर्बत पीना भी काफी लाभदायक होता है।
?22. सहजन- सहजन के फूलों की सब्जी का नियमित सेवन करने से शरीर में ताकत बढ़ती है।
?23. हींग- भुनी हुई हींग, कालीमिर्च, पीपल और सोंठ को बराबर मात्रा में मिलाकर पीसकर रोजाना चौथाई चम्मच की गर्म पानी से फंकी लेने से शरीर में ताकत बढ़ जाती है।
?24. पापड़-  किसी व्यक्ति के किसी खतरनाक रोग से उठने के कारण उसकी भोजन पचाने की क्रिया कमजोर हो जाती है। उस व्यक्ति को भोजन में पापड़ खिलाने से भोजन जल्दी पच जाता है और शरीर में खून ज्यादा मात्रा में बनता है।
?25. दूध-
लगभग आधा लीटर दूध में 250 मिलीलीटर गाजर को घिसकर उबालने से और सेवन करने से दूध जल्दी हजम हो जाता है, दस्त साफ आते हैं तथा दूध में आयरन (लोहे) की मात्रा बढ़ जाती है।
1 गिलास दूध में 1 चम्मच देशी घी और लगभग 3 चम्मच शहद मिलाकर रोजाना पीने से शरीर में ताकत, वीर्य और खूबसूरती बढ़ जाती है। इसका नियमित सेवन करने से व्यक्ति को जल्दी से बुढ़ापा भी नहीं आता।
1 गिलास दूध के अन्दर लगभग 15 बीज निकाले हुए मुनक्के डालकर उबाल लें। फिर इस दूध को हल्का सा ठंडा होने पर इसमें 1 चम्मच देशी घी ओर 3 चम्मच शहद डालकर पीने से शरीर का वजन बढ़ जाता है।
तिल और गुड़ को बराबर मात्रा में मिलाकर लड्डू बना लें। इस 1 लड्डू को रोजाना सुबह के समय खाकर दूध पीने से शरीर को ताकत मिलती है तथा दिमागी कमजोरी तथा तनाव समाप्त हो जाते हैं। इससे ज्यादा भारी शारीरिक काम करने पर व्यक्ति की सांस भी नही फूलती है। तिल व्यक्ति पर जल्दी बुढ़ापा आने से रोकता है।
?26. बेल-  पके हुए बेल के गूदे को सुखाकर और पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को एक चम्मच रोजाना फंकी के रूप में गर्म दूध के साथ लेने से सिर्फ 1-2 महीनों में ही शरीर और दिमाग चुस्त-दुरूस्त बन जाता है।स्नेहा समुह
?27. बादाम-  रात को सोने से पहले 12 बादाम की गिरियों को पानी में भिगो दें। सुबह इसे पीसकर किसी पीतल की कढ़ाई में घी के साथ सेक लें। सिकते समय इसके लाल होने से पहले ही इसके अन्दर 125 मिलीलीटर दूध डाल दे और इसे गर्म-गर्म ही पी लें। इससे शरीर की कमजोरी दूर होकर शरीर मजबूत बन जाता है।
?28. तिल-
तिल और गुड़ को बराबर मात्रा में मिलाकर लड्डू बना लें। इस 1 लड्डू रोजाना सुबह के समय खाकर दूध पीने से शरीर को ताकत मिलती है तथा दिमागी कमजोरी और तनाव समाप्त हो जाते हैं। इससे ज्यादा भारी शारीरिक काम करने पर व्यक्ति की सांस भी नहीं फूलती है। तिल व्यक्ति पर जल्दी बुढ़ापा आने से रोकता है।
 
?भारतीयों में एक त्यौहार आता है संक्राति जिसमें ज्यादातर तिल से बनी हुई चीजें इस्तेमाल की जाती हैं। तिल की चीजें और शरीर पर तिल के तेल की मालिश करने से शरीर की ताकत बढ़ जाती है।
है।
??29. अखरोट- अखरोट को खाने से दिमाग तेज होता है। 8 अखरोटों की गिरी, 4 बादामों की गिरी और 10 मुनक्के रोजाना खाकर उसके ऊपर दूध पीने से शरीर में ताकत बढ़ जाती है।
?30. गन्ना-  गन्ना भोजन को जल्दी हजम कराता है, कब्ज के रोग को ठीक करता है, शरीर को मोटा करता है, इसको खाने से पेट की गर्मी और दिल की जलन समाप्त हो जाती है।
?31. अजवाइन-  अजवाइन, इलायची, कालीमिर्च और सोंठ को बराबर मात्रा में मिलाकर पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की आधा चम्मच सुबह और शाम 2 बार पानी के साथ फंकी लेने से शरीर में ताकत पैदा हो जाती है।
?32. शहद- 
शहद के अंदर विटामिन ए और बी काफी मात्रा में पाये जाते हैं। जिनसे आंखों की रोशनी तेज होती है और शरीर में खून भी ज्यादा बनता है।
शहद के अंदर खून बनाने वाले तत्व होते हैं। शहद भोजन पचाने वाले अंगों में गैस बनने से रोकता है। यह भूख न लगने वाले रोगों को दूर करके भूख को बढ़ाता है।
बच्चों को रोजाना 3 बार शहद चटाने से वे ताकतवर औऱ चुस्त-दुरुस्त बन जाते हैं। इससे बच्चों का स्नायविक संस्थान काफी मजबूत हो जाता है।
गर्म पानी में शहद और नींबू मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से सारे दिन शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी रहती है।
लंबे समय तक शारीरिक रोग रहने के कारण शरीर में आई हुई कमजोरी को दूर करने के लिए दोपहर का भोजन करने के बाद 1 चम्मच शहद पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है।
?33. मेथी-  2 चम्मच दाना मेथी को 1 गिलास पानी में लगभग 5 घंटे तक भिगोने के लिए रख दें। फिर इसको आग पर रखकर इतनी देर तक उबालें कि पानी सिर्फ चौथाई हिस्सा बाकी रह जाए। इसके बाद इसको छानकर इसमें 2 चम्मच शहद मिलाकर रोजाना 1 बार पीने से शरीर में ताकत बढ़ती है।
?34. मक्का-
जिस मौसम में मक्के की खेती होती है उस मौसम में मक्के का सिरा और भुट्टा खाने से आमाशय मजबूत बनता है। यह शरीर में खून को भी बढ़ाता है।
मक्के के तेल की मालिश करने से शरीर में ताकत बढ़ती है। तेल बनाने की विधि- ताजी दूधिया मक्का के दानों को पीसकर किसी कांच की शीशी में भरकर शीशी को खोलकर धूप में रखें। दूध सूखकर उड़ जाएगा और तेल शीशी में रह जाएगा। इसे छानकर तेल को शीशी में भर लें और मालिश करें। कमजोर बच्चों के पैरों पर मालिश करने से बच्चा जल्दी चलने लगता है। एक चम्मच तेल शर्बत में मिलाकर पीने से शरीर में ताकत बढ़ती है।
?35. हरड़:
हरड़ आमाशय को मजबूत बनाती है और बुद्धि को तेज करती है। इसके सेवन से याद्दाश्त तेज होती है। यह बुद्धि पर पड़ी हुई परत को हटाकर ज्ञान को बढ़ाती है। हरड़ को किसी बेहोश व्यक्ति को सुंघाने से उसकी बेहोशी दूर हो जाती है।
छोटी हरड़ को घी में मिलाकर सेंककर पीस लेना चाहिए। फिर इसके एक चम्मच चूर्ण में थोड़ा सा घी मिलाकर भोजन करते समय खाएं। इसे ऐसे ही सुबह और शाम दोनों समय भोजन करते समय सेवन करने से शरीर में ताकत बढ़ती है। इस चूर्ण का इस्तेमाल कम से कम 1 महीने तक करने से लाभ होता है।स्नेहा समुह
?36. असगंध-   असगंध को अच्छी तरह से पीसकर उसमें बराबर मात्रा में पिसी हुई मिश्री मिलाकर रोजाना रात को 2 चम्मच की मात्रा में गर्म दूध के साथ फंकी लेते रहने से शरीर में बल और वीर्य दोनों की बढ़ोत्तरी होती है।
?37. टमाटर-
सुबह नाश्ता करते समय एक गिलास टमाटर के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर पीने से चेहरा बिल्कुल टमाटर की तरह लाल हो जाता है।
टमाटर शरीर में जिगर और फेफड़ों को ताकत देता है और याद्दाश्त को तेज करता है।
टमाटर का सेवन करने से हाई ब्लडप्रेशर कम हो जाता है।
टमाटर का रस दस्तों को साफ तरह से लाकर पेट को ठीक करता है तथा मोटापे को बढ़ने से रोकता है।
टमाटर का सेवन शरीर में से खून की कमी को दूर करके थकावट और कमजोरी को समाप्त कर देता है और चेहरे पर रौनक पैदा करता है।
टमाटर में तांबे के गुण ज्यादा मात्रा में होते हैं जो खून में मौजूद लाल कणों को बढ़ाते हैं।
टमाटर भूख को तेज करता है और शरीर में ताकत पैदा करता है।
1 बड़ा ताजा लाल टमाटर रोजाना खाने से व्यक्ति के बहुत से रोग दूर हो जाते हैं।
टमाटर में लोहे की मात्रा दूध से दोगुनी होती है।
?38. चुकन्दर-
चुकन्दर का सेवन करने से स्त्रियों के स्तनों में दूध की बढ़ोत्तरी होती है।
चुकन्दर खाने से जोड़ों का दर्द नष्ट हो जाता है।
चुकन्दर को रोजाना सेवन करने से जिगर मजबूत बनता है और दिमाग तरोताजा रहता है।
 
?39. आलू-बढ़ती हुई उम्र के लोगों के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी होता है। आलुओं को खाने से बूढ़े लोगों के शरीर में प्रोटीन की कमी पूरी हो जाती है। आलू के अन्दर मुर्गी के चूजों की ही तरह प्रोटीन होती है।
?40. प्याज-
2 चम्मच प्याज के रस को 2 चम्मच शहद में मिलाकर चाटने से लाभ होता है।
?2 चम्मच प्याज के रस में थोड़ा सा गुड़ मिलाकर रोजाना 1 बार बच्चों को पिलाने से लाभ होता है।
?41. चने-
लगभग 250 ग्राम चनों को रात में सोते समय 1 लीटर पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इनको उबालने के लिए रख दें। जब उबलने पर इनका पानी चौथाई हिस्सा बाकी रह जाए तो इसको उतारकर ठंडा करके पीने से शरीर में ताकत बढ़ जाती है।
?हरे ताजे चने खाने से शरीर में ताकत की वृद्धि होती है।
?42. उड़द-
उड़द खाने में भारी होते हैं। उड़द सबसे ज्यादा गुणकारी भी होती है। उड़द को किसी भी रूप में सेवन करने से शरीर में ताकत बढ़ती है।
?रात को सोते समय लगभग 30 ग्राम उड़द की दाल को पानी में भिगों दें। फिर सुबह उठकर इस दाल को पीसकर इसमें दूध और मिश्री मिलाकर पीने से दिल, दिमाग और वीर्य की ताकत बढ़ती है।
?जिन लोगों की पाचनशक्ति तेज होती है, उन्हें उड़द का सेवन करना चाहिए।
?छिलके वाली उड़द की दाल को खाने से शरीर में मांस की बढ़ोत्तरी होती है।
?उड़द की दाल को भिगोकर उसे पीसकर उसमें 1 चम्मच देशी घी, आधा चम्मच शहद मिलाकर चाटे। इसके ऊपर से मिश्री मिला हुआ दूध लगातार सेवन करने से व्यक्ति काफी ताकतवर बन जाता है।
?43. मूंग:
मूंग के लड्डू खाने से ताकत बढ जाती है।
काफी समय तक भयंकर रोग से घिरे रहने के बाद ठीक होने पर शरीर में कमजोरी आने पर रोजाना मूंग की दाल खाने से कमजोरी दूर होकर शरीर में ताकत बढ़ जाती है।
कमजोर रोगियों को जिन्हें भोजन में अन्न देना मना हो, उनको साबुत मूंग पानी में उबालकर फिर पानी को छानकर और थोड़ी-थोड़ी देर बाद उस पानी को पीना चाहिए। यह स्वादिष्ट, जल्दी पचने वाला अन्न का रस है जो शरीर को ताकत भी देता है।

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Thumbs Up नमो का हवाई हमला
Posted by: Rohit Shukta - 02-26-2019, 02:54 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

   
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नोट बंदी रात में, जी एस टी रात में सर्जिकल स्ट्राइक रात में और एयर स्ट्राइक फिर रात में

मतलब चोकीदार जाग रहा है.

   

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पाक को डरने की जरूरत नही ये तो उन आतंकियों पर हमला हो रहा है जिनका पता पाकिस्तान को नही है।पाकिस्तान तो हमारा पड़ोसी देश है।
Big Grin Big Grin Big Grin

   

ये जो पाकिस्तान पर हवाई हमला देख रहे हैं ना आप, इसका बटन आपने ही 2014 में दबाया था।

मोदी है तो मुमकिन है!!
#विश्वास_है

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त्रेतायुग- श्रीराम ने केवट के पाँव धोये
द्वापरयुग- श्रीकृष्ण ने सुदामा के पाँव धोये

कलयुग- नमो ने सफाई कर्मियों के पांव धोये

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आज शाम सभी अपने अपने घर दीपावली मनाएँ। भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम के प्रकटीकरण का उत्साह हर हिंदुस्तानी में दिखना चाहिए। आज सेना के जवानों के दिलों को ठंडक मिली होगी।

हम भी घर घर दीप जलाकर सेना के सम्मान में आज की शाम को प्रकाश से भर देंगे।

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