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Star किससे सीखें रेकी.! कितने समय के अभ्यास में मिलने लगती है सफलता.! क्यों सीखें रेकी.!
Posted by: admin - 02-13-2022, 06:17 PM - Forum: Reiki cases - Replies (46)

किससे सीखें रेकी.! कितने समय के अभ्यास में मिलने लगती है सफलता.!

क्यों सीखें रेकी.! कब होंगे प्रसिद्द रेकी करने से.!



Reiki healing रेकी क्या है कैसे सीखें और आपके बहुत से प्रश्नों के उत्तर सीधे LIVE Chat में session about to start in few minutes.
सेशन कुछ ही समय में प्रारम्भ हो रहा है। link लिंक
https://youtu.be/Bzm5fwGLeII
??????⚘❤?
आप सभी का स्वागत है।
#reiki #reikihealing #reikiteacher #reikiusui #reikilove #reikimaster #reikienergy #reikiandastrologypredictions #antasbillorey #youtube #instagram #viral #online #follow #Explore

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Thumbs Up शब्द...!! पता नहीं, किस रचनाकार की रचना है... लेकिन, है लाजवाब...!
Posted by: admin - 12-28-2021, 10:24 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

शब्द
पता नहीं, किस रचनाकार की रचना है... लेकिन, है लाजवाब...!

✍️✍️ शब्द

शब्द रचे जाते हैं,
शब्द गढ़े जाते हैं,
  शब्द मढ़े जाते हैं,
  शब्द लिखे जाते हैं,
    शब्द पढ़े जाते हैं,
    शब्द बोले जाते हैं,
      शब्द तौले जाते हैं,
      शब्द टटोले जाते हैं,
        शब्द खंगाले जाते हैं,

              ... इस प्रकार

शब्द बनते हैं,
शब्द संवरते हैं,
  शब्द सुधरते हैं,
  शब्द निखरते हैं,
    शब्द हंसाते हैं,
    शब्द मनाते हैं,
      शब्द रुलाते हैं,
      शब्द मुस्कुराते हैं,
        शब्द खिलखिलाते हैं,
        शब्द गुदगुदाते हैं,
          शब्द मुखर हो जाते हैं
          शब्द प्रखर हो जाते हैं
            शब्द मधुर हो जाते हैं

              ... इतना होने के बाद भी

शब्द चुभते हैं,
शब्द बिकते हैं,
  शब्द रूठते हैं,
  शब्द घाव देते हैं,
    शब्द ताव देते हैं,
    शब्द लड़ते हैं,
      शब्द झगड़ते हैं,
      शब्द बिगड़ते हैं,
        शब्द बिखरते हैं
        शब्द सिहरते हैं

              ... परन्तु

शब्द कभी मरते नहीं
शब्द कभी थकते नहीं
  शब्द कभी रुकते नहीं
  शब्द कभी चुकते नहीं

              ... अतएव

शब्दों से खेले नहीं
बिन सोचे बोले नहीं
  शब्दों को मान दें
  शब्दों को सम्मान दें
  शब्दों पर ध्यान दें
    शब्दों को पहचान दें
    ऊंची लंबी उड़ान दें
      शब्दों को आत्मसात करें
      उनसे उनकी बात करें,
        शब्दों का अविष्कार करें
          गहन सार्थक विचार करें

              ... क्योंकि

शब्द अनमोल हैं
ज़ुबाँ से निकले बोल हैं
  शब्दों में धार होती है
  शब्दों की महिमा अपार होती है
    शब्दों का विशाल भंडार होता है

और

              ... सच तो यह है कि

शब्दों
  का
    भी
      अपना
        एक ? संसार होता है

                  ???
                    शब्दों को
                    सम्मान दें...♟♟

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Star अकर्मा दस्यु:।। ऋग्वेद १०।२२।८
Posted by: admin - 12-28-2021, 09:06 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

अकर्मा दस्यु:।।
        ऋग्वेद १०।२२।८

कर्म न करने वाला मनुष्य राक्षस है। कर्म न करनेवाला व्यक्ति अपने व्यक्तिगत जीवन की तो हानि करता ही है अपितु वह समाज, देश व मानवता की उन्नति में भी बाधक होता है।

ऐसी परिस्थितियों को समझकर महात्मा विदुर जी को कहना पड़ा था कि:-
जो धनवान हो कर दान नहीं करता और जो निर्धन होकर पुरूषार्थ नहीं करता, उन दोनों के गले में (राजा द्वारा) भारी पत्थर की शिला बांधकर जल में डुबा देना चाहिए।

धर्मात्मा राजर्षि चाणक्य जी के अनुसार:-
निर्धन और अशिक्षित परिवार में पैदा होना कोई अपराध नहीं हैं, परन्तु निर्धन और अशिक्षित होकर मरना इस पृथ्वी का सबसे बड़ा अपराध है।(क्योंकि निर्धन और अशिक्षित व्यक्ति समाज में विकास नहीं करता। मनुष्य होकर जो विकास नहीं करता वह घोर अपराधी है। इसलिए मनुष्य को आत्मिक मानसिक बौद्धिक और आर्थिक विकास की तरफ ध्यान देना चाहिए।)
          सुप्रभात

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Star ॐत्र्यंबकम् मंत्र के 33 अक्षर
Posted by: admin - 12-28-2021, 09:03 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

ॐत्र्यंबकम् मंत्र के 33 अक्षर
〰〰?〰〰?〰〰
जो महर्षि वशिष्ठ के अनुसार 33 देवताआं के घोतक हैं।
उन तैंतीस देवताओं में 8 वसु 11 रुद्र और 12 आदित्यठ 1 प्रजापति तथा 1 षटकार हैं।
इन तैंतीस देवताओं की सम्पूर्ण शक्तियाँ महामृत्युंजय मंत्र से निहीत होती है
जिससे महा महामृत्युंजय का पाठ करने वाला प्राणी दीर्घायु तो प्राप्त करता ही हैं ।
साथ ही वह नीरोग, ऐश्व‍र्य युक्ता धनवान भी होता है ।
महामृत्युंरजय का पाठ करने वाला प्राणी हर दृष्टि से सुखी एवम समृध्दिशाली होता है । भगवान शिव की अमृतमययी कृपा उस निरन्तंर बरसती रहती है।
• त्रि - ध्रववसु प्राण का घोतक है जो सिर में स्थित है।
• यम - अध्ववरसु प्राण का घोतक है, जो मुख में स्थित है।
• ब - सोम वसु शक्ति का घोतक है, जो दक्षिण कर्ण में स्थित है।
• कम - जल वसु देवता का घोतक है, जो वाम कर्ण में स्थित है।
• य - वायु वसु का घोतक है, जो दक्षिण बाहु में स्थित है।
• जा- अग्नि वसु का घोतक है, जो बाम बाहु में स्थित है।
• म - प्रत्युवष वसु शक्ति का घोतक है, जो दक्षिण बाहु के मध्य में स्थित है।
• हे - प्रयास वसु मणिबन्धत में स्थित है।
• सु -वीरभद्र रुद्र प्राण का बोधक है। दक्षिण हस्त के अंगुलि के मुल में स्थित है।
• ग -शुम्भ् रुद्र का घोतक है दक्षिणहस्त् अंगुलि के अग्र भाग में स्थित है।
• न्धिम् -गिरीश रुद्र शक्ति का मुल घोतक है। बायें हाथ के मूल में स्थित है।
• पु- अजैक पात रुद्र शक्ति का घोतक है। बाम हस्तह के मध्य भाग में स्थित है।
• ष्टि - अहर्बुध्य्त् रुद्र का घोतक है, बाम हस्त के मणिबन्धा में स्थित है।
• व - पिनाकी रुद्र प्राण का घोतक है। बायें हाथ की अंगुलि के मुल में स्थित है।
• र्ध - भवानीश्वपर रुद्र का घोतक है, बाम हस्त अंगुलि के अग्र भाग में स्थित है।
• नम् - कपाली रुद्र का घोतक है । उरु मूल में स्थित है।
• उ- दिक्पति रुद्र का घोतक है । यक्ष जानु में स्थित है।
• र्वा - स्था णु रुद्र का घोतक है जो यक्ष गुल्फ् में स्थित है।
• रु - भर्ग रुद्र का घोतक है, जो चक्ष पादांगुलि मूल में स्थित है।
• क - धाता आदित्यद का घोतक है जो यक्ष पादांगुलियों के अग्र भाग में स्थित है।
• मि - अर्यमा आदित्यद का घोतक है जो वाम उरु मूल में स्थित है।
• व - मित्र आदित्यद का घोतक है जो वाम जानु में स्थित है।
• ब - वरुणादित्या का बोधक है जो वाम गुल्फा में स्थित है।
• न्धा - अंशु आदित्यद का घोतक है । वाम पादंगुलि के मुल में स्थित है।
• नात् - भगादित्यअ का बोधक है । वाम पैर की अंगुलियों के अग्रभाग में स्थित है।
• मृ - विवस्व्न (सुर्य) का घोतक है जो दक्ष पार्श्वि में स्थित है।
• र्त्यो् - दन्दाददित्य् का बोधक है । वाम पार्श्वि भाग में स्थित है।
• मु - पूषादित्यं का बोधक है । पृष्ठै भगा में स्थित है ।
• क्षी - पर्जन्य् आदित्यय का घोतक है । नाभि स्थिल में स्थित है।
• य - त्वणष्टान आदित्यध का बोधक है । गुहय भाग में स्थित है।
• मां - विष्णुय आदित्यय का घोतक है यह शक्ति स्व्रुप दोनों भुजाओं में स्थित है।
• मृ - प्रजापति का घोतक है जो कंठ भाग में स्थित है।
• तात् - अमित वषट्कार का घोतक है जो हदय प्रदेश में स्थित है।
उपर वर्णन किये स्थानों पर उपरोक्त देवता, वसु आदित्य आदि अपनी सम्पुर्ण शक्तियों सहित विराजत हैं । जो प्राणी श्रध्दा सहित महामृत्युजय मंत्र का पाठ करता है उसके शरीर के अंग - अंग ( जहां के जो देवता या वसु अथवा आदित्यप हैं ) उनकी रक्षा होती है ।

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Rainbow अपने माता पिता का सम्मान करने के 35 तरीके।
Posted by: admin - 12-28-2021, 09:01 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

अपने माता पिता का सम्मान करने के 35 तरीके।

1. उनकी उपस्थिति में अपने फोन को दूर रखो.
2. वे क्या कह रहे हैं इस पर ध्यान दो.
3. उनकी राय स्वीकारें.
4. उनकी बातचीत में सम्मिलित हों.
5. उन्हें सम्मान के साथ देखें.
6. हमेशा उनकी प्रशंसा करें.
7. उनको अच्छा समाचार जरूर बताएँ.
8. उनके साथ बुरा समाचार साझा करने से बचें.
9. उनके दोस्तों और प्रियजनों से अच्छी तरह से बोलें.
10. उनके द्वारा किये गए अच्छे काम सदैव याद रखें.
11. वे यदि एक ही कहानी दोहरायें तो भी ऐसे सुनें जैसे पहली बार सुन रहे हो.
12. अतीत की दर्दनाक यादों को मत दोहरायें.
13. उनकी उपस्थिति में कानाफ़ूसी न करें.
14. उनके साथ तमीज़ से बैठें.
15. उनके विचारों को न तो घटिया बताये न ही उनकी आलोचना करें.
16. उनकी बात काटने से बचें.
17. उनकी उम्र का सम्मान करें.
18. उनके आसपास उनके पोते/पोतियों को अनुशासित करने अथवा मारने से बचें.
19. उनकी सलाह और निर्देश स्वीकारें.
20. उनका नेतृत्व स्वीकार करें.
21. उनके साथ ऊँची आवाज़ में बात न करें.
22. उनके आगे अथवा सामने से न चलें.
23. उनसे पहले खाने से बचें.
24. उन्हें घूरें नहीं.
25. उन्हें तब भी गौरवान्वित प्रतीत करायें जब कि वे अपने को इसके लायक न समझें.
26. उनके सामने अपने पैर करके या उनकी ओर अपनी पीठ कर के बैठने से बचें.
27. न तो उनकी बुराई करें और न ही किसी अन्य द्वारा की गई उनकी बुराई का वर्णन करें.
28. उन्हें अपनी प्रार्थनाओं में शामिल करें.
29. उनकी उपस्थिति में ऊबने या अपनी थकान का प्रदर्शन न करें.
30. उनकी गलतियों अथवा अनभिज्ञता पर हँसने से बचें.
31. कहने से पहले उनके काम करें.
32. नियमित रूप से उनके पास जायें.
33. उनके साथ वार्तालाप में अपने शब्दों को ध्यान से चुनें.
34. उन्हें उसी सम्बोधन से सम्मानित करें जो वे पसन्द करते हैं.
35. अपने किसी भी विषय की अपेक्षा उन्हें प्राथमिकता दें...!!!

माता – पिता इस दुनिया में सबसे बड़ा खज़ाना हैं..!!यह मेसेज हर घर तक पहुंचने मे मदद करे तो बड़ी कृपा होगी मानव जाति का उद्धार संभव हैं, यदि ऊपर लिखी बातों को जीवन में उतार लिया तो। सबसे पहले भगवान, गुरु माता पिता ही हैं, हर धर्म में इस बात का उल्लेख है ...!!!

सभी के माता पिता को नमन...

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Star भगवान कब याद आते हैं??
Posted by: admin - 12-28-2021, 08:58 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

भगवान कब याद आते हैं??

?️‍?️धर्मात्मा को हर समय !
?️‍?️पापी को मृत्यु के समय !
?️‍?️चोर को पकड़े जाने पर !
?️‍?️गरीब को भूख लगने पर !
?️‍?️धनी को बीमार हो जाने पर !
?️‍?️कंजूस को पैसा खो जाने पर !
?️‍?️किसान को वर्षा नहीं होने पर !
?️‍?️मुसाफिर को ट्रेन छूट जाने पर !
?️‍?️व्यापारी को नुकसान हो जाने पर !
?️‍?️राजनीतिज्ञ को चुनाव हार जाने पर !
?️‍?️अफसर को रिश्वत लेते समय पकड़े जाने पर !
?️‍?️विद्यार्थी को परीक्षा फल के समय !
?️‍?️सच्चे इंसान को पूरी दुनिया के साथ ईमानदारी के साथ व्यवहार करने के बाद भी धोखा मिलने पर !

लेकिन जो प्रभु के अत्यन्त सच्चे भक्त है उनको तो हर समय सुख में, दुख में,  सोते , जागते, उठते, बैठते,हर समय हर जगह प्रभु ही प्रभु याद आते हैं .....!!

लगन में रहिये हमेशा, मग्न रहिये अपने प्रभु की याद में।


जय श्रीराम
जय हिंद

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Star "रामायण" कितने प्रकार की है - संभवतः यह सूची पूर्ण नहीं हो और भी रामायण हो सकती है।
Posted by: admin - 12-28-2021, 08:50 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

"रामायण" कितने प्रकार की है - संभवतः यह सूची पूर्ण नहीं हो और भी रामायण हो सकती है।

वाल्मीकि रामायण ;
अध्यात्म रामायण ;
आनंद रामायण ;
वशिष्ठ रामायण ;
याज्ञवल्क्य रामायण ;
रामचरितमानस ;
कंब रामायण ;
कृत्तिवास रामायण ;
अद्भुत रामायण ;
तत्वार्थ रामायण ;
संजीवनी रामायण ;
सर्वार्थ रामायण ;
उत्तर रामचरितम् ;
प्रतिमानाटकम् ;
राघवेन्द्रचरितम् ;
हनुमन्नाटकम् ;
रघुवंशम् ;
अभिषेकनाटकम् ;
जानकीहरणम् ;
राधेश्याम रामायण के अतिरिक्त  ...

लोमश संहिता में रामायण ;
हनुमत् संहिता में रामायण ;
शुक संहिता ;
बृहत्कौशल खंड ;
भुशुण्डी रामायण ;
विलंका रामायण ( सारलादास कृत उड़िया ) ;
के साथ साथ  ...

दशरथ जातकम् ;
अनामक जातकम् ;
दशरथ कहानम् आदि ( बौद्ध ग्रन्थों में रामायण ) ;

पउमचरिउ ( 21 ई. ) ;
विमलसूरि कृत रामायण ( प्राकृत में ) ;
रविवेषणाचार्य कृत रामचरित ( संस्कृत में ) ;
स्वयंभू कृत् पउमचरिउ अपभ्रंश ( नवम्, 21ई. ) ;
अभिनव पम्पकृत ( कन्नड़ ) ;
रामचन्द्रचरित पुराण ( 1121ई. ) ;
गुणभद्र कृत् रामायण ( संस्कृत ) ;
उत्तरपुराण ( नवम् -21 ई. ) ;
जैन ग्रन्थों में रामायण के साथ-साथ  ...

हिंदी भाषा में 11 ;
मराठी भाषा में 8 ;
बांग्ला भाषा में 25 ;
तमिल भाषा में 12 ;
तेलगू भाषा में 12 ;
उड़िया लिपि में 6 रामायण प्राप्त हैं ।

"राम चरित शतकोटि अपारा"    ----
सहस्रों करोड़ बार रामायण लिखी-गाई गई है ।

अन्य देशों के उदाहरण देखें , तो  ---

नेपाल में भानुभक्त कृत " नेपाली रामायण " ;

भूटान में पदमपाहुस रामायण ;

श्रीलंका में कुमारदास रचित " जानकी हरण " रामायण ( 512-521ई. ) ;
सिंहली भाषा में राम कथा " मलेराज की कथा " ( 700 bc ) ;

बर्मा में " रामवत्थु " रामायण ;

चीन में यूतोकी रामयागन ;
इंडोचीन क्षेत्र में खमैर रामायण ;

तुर्की में खोतानी रामायण ;

जावा में रामकैलिंग रामायण ;
सेरतराम रामायण ;
सैरीराम रामायण ;

थाईलैंड में रामकियैन रामायण ;

फिलीपींस की मारनव भाषा में संकलित " मसलादिया लाबन " , जो विकृत रामायण है ;

इंडोनेशिया में सबसे प्राचीन शास्त्रीय भाषा कावी में काकावीन द्वारा रचित " रामायण काकावीन " ;

कतर के दोहा में मुझ गल रामायण नाम से रामायण का अरेबिक अनुवाद , जिसे हमीदा बानो ने अनुवाद कराया था , जो 16 मई 1594 को पूर्ण हुआ था ;

मलेशिया के इस्लामीकरण के बाद 1633 में मलय रामायण की सबसे प्राचीन पांडुलिपि बोडलियन पुस्तकालय में संरक्षित कर दी गई थी । मलेशिया में " हिकायत सेरीराम " रामायण ;

जापान में कथा संग्रह ग्रन्थ " होबुत्सुशू " में रामकथा संकलित ;

मंगोलिया में अनेक रामायण प्राप्त हुई है । मंगोलियन भाषा में लिखित चार रामायण दम्दिन सुरेन ने खोजी थी । इनमें " राजा जीवक की कथा " सबसे प्रसिद्ध है । वर्तमान में लेनिनग्राद में मंगोलियन रामायण सुरक्षित है ।

तिब्बत में " किंरस-पुंस-पा " नाम से रामायण ;

इनके अतिरिक्त संसार भर से तीन सौ से अधिक रामायण प्राप्त हुई है ।

अन्त में पुनः  -------------

" राम चरित शतकोटि अपारा।
  श्रुति सारदा न बरने पारा  ।।"

नानाविध रूपों में , अनेक देशों , अनेक भाषाओं में रामकथा का प्राप्त होना ही यह सिद्ध करता है कि श्रीराम सकल विश्व में व्याप्त हैं । यह केवल अवधपति श्रीराम जी के मन्दिर का शिलान्यास नहीं हो रहा , वरन् अखिल कोटि ब्रह्माण्ड नायक राजराजेश्वर प्रभु श्रीराम के मंदिर का शिलान्यास होने जा रहा है । इसीलिए 5 अगस्त , 2020 से प्रभु श्रीराम-मंदिर के निर्माण प्रारंभ होने के साथ ही पूरा विश्व अयोध्या की सीमा में सम्मिलित हो जाएगा और विश्व-प्रजा राघवेन्द्र भगवान की विधिवत् प्रजा बन जाएगी ।

जय श्री राम जय परशुराम नर्मदे हर

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Rainbow ये कथा रात को सोने से पहले घर मे सबको सुनायें...!
Posted by: admin - 12-28-2021, 08:49 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

ये कथा रात को सोने से पहले घर मे सबको सुनायें...!

तन्वी को सब्जी मण्डी जाना था..
उसने जूट का बैग लिया और सड़क के किनारे सब्जी मण्डी की ओर चल पड़ी...

  तभी पीछे से एक ऑटो वाले ने आवाज़ दी : —'कहाँ जायेंगी माता जी...?''

तन्वी ने ''नहीं भैय्या'' कहा तो ऑटो वाला आगे निकल गया.

अगले दिन तन्वी अपनी बिटिया मानवी को स्कूल बस में बैठाकर घर लौट रही थी...

  तभी पीछे से एक ऑटो वाले ने आवाज़ दी :—बहनजी चन्द्रनगर जाना है क्या...?''

तन्वी ने मना कर दिया...

  पास से गुजरते उस ऑटोवाले को देखकर तन्वी पहचान गयी कि ये कल वाला ही ऑटो वाला था.

    आज तन्वी को अपनी सहेली के घर जाना था.

  वह सड़क किनारे खड़ी होकर ऑटो की प्रतीक्षा करने लगी.

तभी एक ऑटो आकर रुका :—''कहाँ जाएंगी मैडम...?''

तन्वी ने देखा ये वो ही ऑटोवाला है जो कई बार इधर से गुज़रते हुए उससे पूछता रहता है चलने के लिए..

तन्वी बोली :— ''मधुबन कॉलोनी है ना सिविल लाइन्स में, वहीँ जाना है.. चलोगे...?''

ऑटोवाला मुस्कुराते हुए बोला :— ''चलेंगें क्यों नहीं मैडम..आ जाइये...!"

ऑटो वाले के ये कहते ही तन्वी ऑटो में बैठ गयी.

    ऑटो स्टार्ट होते ही तन्वी ने जिज्ञासावश उस ऑटोवाले से पूछ ही लिया :—''भैय्या एक बात बताइये..?-

        दो-तीन दिन पहले आप मुझे माताजी कहकर चलने के लिए पूछ रहे थे,

कल बहनजी और आज मैडम, ऐसा क्यूँ...?''

ऑटोवाला थोड़ा झिझककर शरमाते हुए बोला :—''जी सच बताऊँ... आप चाहे जो भी समझेँ पर किसी का भी पहनावा हमारी सोच पर असर डालता है.

आप दो-तीन दिन पहले साड़ी में थीं तो एकाएक मन में आदर के भाव जागे,

क्योंकि,

मेरी माँ हमेशा साड़ी ही पहनती है.

    इसीलिए मुँह से स्वयं ही "माताजी'" निकल गया.

      कल आप सलवार-कुर्ती में थीँ, जो मेरी बहन भी पहनती है

    इसीलिए आपके प्रति स्नेह का भाव मन में जागा और मैंने ''बहनजी'' कहकर आपको आवाज़ दे दी.

आज आप जीन्स-टॉप में हैं, और इस लिबास में माँ या बहन के भाव तो नहीँ जागते.

इसीलिए मैंने आपको "मैडम" कहकर पुकारा.

कथासार
हमारे परिधान का न केवल हमारे विचारों पर वरन दूसरे के भावों को भी बहुत प्रभावित करता है.

टीवी, फिल्मों या औरों को देखकर पहनावा ना बदलें, बल्कि विवेक और संस्कृति की ओर भी ध्यान दें.

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Rainbow पढिये और सोचिये कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भारत माता के प्रति भावना क्या है.
Posted by: admin - 12-28-2021, 08:47 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

भारत माता की जय... !!!


RSS की प्रार्थना का हिन्दी में अनुवाद ... पढ़ो और सोचिये  कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भारत माता के प्रति भावना क्या है 

1. नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे, त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोsहम्। 
हे प्यार करने वाली मातृभूमि! मैं तुझे सदा (सदैव) नमस्कार करता हूँ। तूने मेरा सुख से पालन-पोषण किया है। 

2. महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे, पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते।। १।। 
हे महामंगलमयी पुण्यभूमि! तेरे ही कार्य में मेरा यह शरीर अर्पण हो। मैं तुझे बारम्बार नमस्कार करता हूँ। 

3. प्रभो शक्ति मन्हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता, इमे सादरं त्वाम नमामो वयम् त्वदीयाय कार्याय बध्दा कटीयं, शुभामाशिषम देहि तत्पूर्तये। 
हे सर्वशक्तिशाली परमेश्वर! हम हिन्दूराष्ट्र के सुपुत्र तुझे आदर सहित प्रणाम करते है। तेरे ही कार्य के लिए हमने अपनी कमर कसी है। उसकी पूर्ति के लिए हमें अपना शुभाशीर्वाद दे। 

4. अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम, सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्, श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं, स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत्।। २।। 
हे प्रभु! हमें ऐसी शक्ति दे, जिसे विश्व में कभी कोई चुनौती न दे सके, ऐसा शुद्ध चारित्र्य दे जिसके समक्ष सम्पूर्ण विश्व नतमस्तक हो जाये। ऐसा ज्ञान दे कि स्वयं के द्वारा स्वीकृत किया गया यह कंटकाकीर्ण मार्ग सुगम हो जाये। 

5. समुत्कर्षनिःश्रेयसस्यैकमुग्रं, परं साधनं नाम वीरव्रतम्
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा, हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्राsनिशम्। 
उग्र वीरव्रती की भावना हम में उत्स्फूर्त होती रहे, जो उच्चतम आध्यात्मिक सुख एवं महानतम ऐहिक समृद्धि प्राप्त करने का एकमेव श्रेष्ठतम साधन है। तीव्र एवं अखंड ध्येयनिष्ठा हमारे अंतःकरणों में सदैव जागती रहे। 

6. विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्, विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्। परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं, समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्।। ३।। ।। भारत माता की जय।। 
हे माँ  तेरी कृपा से हमारी यह विजयशालिनी संघठित कार्यशक्ति हमारे धर्म का सरंक्षण कर इस राष्ट्र को वैभव के उच्चतम शिखर पर पहुँचाने में समर्थ हो। भारत माता की जय।.. 

अब आप ही विचार करे कि RSS की विचारधारा कैसी है...!!!

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Star जय श्रीकृष्ण
Posted by: admin - 12-28-2021, 08:45 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

जय श्रीकृष्ण


1. प्रतिदिन 10 से 30 मिनट टहलने की आदत बनायें. टहलते समय चेहरे पर मुस्कराहट रखें.

        ꧁ ||जय श्रीकृष्ण ||꧂

2. प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट चुप रहकर बैठें.

        ꧁ ||जय श्रीकृष्ण||꧂

3. पिछले साल की तुलना में इस साल ज्यादा पुस्तकें पढ़ें.

        ꧁ ||जय श्रीकृष्ण||꧂

4. 70 साल की उम्र से अधिक आयु के बुजुर्गों और 6 साल से कम आयु के बच्चों के साथ भी कुछ समय व्यतीत करें.

        ꧁ ||जय श्रीकृष्ण ||꧂

5. प्रतिदिन खूब पानी पियें.

        ꧁ ||जय श्रीकृष्ण||꧂

6. प्रतिदिन कम से कम तीन लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करें.

        ꧁ ||जय श्रीकृष्ण||꧂

7. गपशप पर अपनी कीमती ऊर्जा बर्बाद न करें.

      ꧁ ||जय श्रीकृष्ण||꧂

8. अतीत के मुद्दों को भूल जायें, अतीत की गलतियों को अपने जीवनसाथी को याद न दिलायें.

        ꧁ ||जय श्रीकृष्ण||꧂

9. एहसास कीजिये कि जीवन एक स्कूल है और आप यहां सीखने के लिये आये हैं. जो समस्याएं आप यहाँ देखते हैं, वे पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं.

      ꧁ ||जय श्रीकृष्ण ||꧂

10. एक राजा की तरह नाश्ता, एक राजकुमार की तरह दोपहर का भोजन और एक भिखारी की तरह रात का खाना खायें.

      ꧁ ||जय श्रीकृष्ण ||꧂

11. दूसरों से नफरत करने में अपना समय व ऊर्जा बर्बाद न करें. नफरत के लिए ये जीवन बहुत छोटा है.

      ꧁ ||जय श्रीकृष्ण ||꧂

12. आपको हर बहस में जीतने की जरूरत नहीं है, असहमति पर भी अपनी सहमति दें.

          ꧁ ||जय श्रीकृष्ण ||꧂

13. अपने जीवन की तुलना दूसरों से न करें.

      ꧁ ||जय श्रीकृष्ण ||꧂

14. गलती के लिये गलती करने वाले को माफ करना सीखें.

        ꧁ ||जय श्रीकृष्ण||꧂

15. ये सोचना आपका काम नहीं कि दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं.

        ꧁ ||जय श्रीकृष्ण||꧂

16. समय ! सब घाव भर देता है.

          ꧁ ||जय श्रीकृष्ण||꧂

17. ईर्ष्या करना समय की बर्बादी है. जरूरत का सब कुछ आपके पास है.

            ꧁ ||जय श्रीकृष्ण ||꧂

18. प्रतिदिन दूसरों का कुछ भला करें.

          ꧁ ||जय श्रीकृष्ण||꧂

19. जब आप सुबह जगें तो अपने माता-पिता को धन्यवाद दें, क्योंकि माता-पिता की कुशल परवरिश के कारण आप इस दुनियां में हैं.

            ꧁ ||जय श्रीकृष्ण||꧂

20. हर उस व्यक्ति को ये संदेश शेयर करें जिसकी आप परवाह करते हैं 
       
꧁ ||जय श्रीकृष्ण||

21  सदा प्रसन्न रहो, एवं बोलो जय श्री कृष्ण

अब देखो पढ़ते पढ़ते 21 बार भगवान का नाम भी जप लिया,  अब फिर बोलो जय श्री कृष्णा

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Star चप्पल बाहर क्यों उतारते हैं...!!!
Posted by: admin - 12-28-2021, 08:43 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

चप्पल बाहर क्यों उतारते हैं...!!!

मंदिर में प्रवेश नंगे पैर ही करना पड़ता है, यह नियम दुनिया के हर हिंदू मंदिर में है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि मंदिर की फर्शों का निर्माण पुराने समय से अब तक इस प्रकार किया जाता है कि ये इलेक्ट्रिक और मैग्नैटिक तरंगों का सबसे बड़ा स्त्रोत होती हैं। जब इन पर नंगे पैर चला जाता है तो अधिकतम ऊर्जा पैरों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाती है।

    दीपक के ऊपर हाथ
      घुमाने का वैज्ञानिक   
              कारण

आरती के बाद सभी लोग दिए पर या कपूर के ऊपर हाथ रखते हैं और उसके बाद सिर से लगाते हैं और आंखों पर स्पर्श करते हैं। ऐसा करने से हल्के गर्म हाथों से दृष्टि इंद्री सक्रिय हो जाती है और बेहतर महसूस होता है।

      मंदिर में घंटा लगाने
          का कारण

जब भी मंदिर में प्रवेश किया जाता है तो दरवाजे पर घंटा टंगा होता है जिसे बजाना होता है। मुख्य मंदिर (जहां भगवान की मूर्ति होती है) में भी प्रवेश करते समय घंटा या घंटी बजानी होती है, इसके पीछे कारण यह है कि इसे बजाने से निकलने वाली आवाज से सात सेकंड तक गूंज बनी रहती है जो शरीर के सात हीलिंग सेंटर्स को सक्रिय कर देती है।

      भगवान की मूर्ति

मंदिर में भगवान की मूर्ति को गर्भ गृह के बिल्कुल बीच में रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस जगह पर सबसे अधिक ऊर्जा होती है जहां सकारात्मक सोच से खड़े होने पर शरीर में सकारात्मक ऊर्जा पहुंचती है और नकारात्मकता दूर भाग जाती है।

परिक्रमा करने के
      पीछे वैज्ञानिक कारण

हर मुख्य मंदिर में दर्शन करने और पूजा करने के बाद परिक्रमा करनी होती है। परिक्रमा 8 से 9 बार करनी होती है। जब मंदिर में परिक्रमा की जाती है तो सारी सकारात्मक ऊर्जा, शरीर में प्रवेश कर जाती है और मन को शांति मिलती है।
            ??: कृपया सनातन धर्म के मंदिर पूजन के प्रति इन वैज्ञानिक आधारों को ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए ताकि आम जन मंदिर की इन व्यवस्थाओं को समझ सके..

जय श्री राम

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Star गुड़ खाने से 18 फायदे
Posted by: admin - 12-28-2021, 08:41 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

गुड़ खाने से 18 फायदे

1- गुड़ खाने से नहीं होती गैस
की दिक्कत

2- खाना खाने के बाद अक्सर
मीठा खाने का मन करता हैं।
इसके लिए सबसे बेहतर है
कि आप गुड़ खाएं।
गुड़ का सेवन करने से आप
हेल्दी रह सकते हैं

3 - पाचन क्रिया को सही रखना

4 - गुड़ शरीर का रक्त साफ
करता है और मेटाबॉल्जिम
ठीक करता है।
रोज एक गिलास पानी या दूध
के साथ गुड़ का सेवन पेट को
ठंडक देता है। इससे गैस की
दिक्कत नहीं होती।
जिन लोगों को गैस की परेशानी है,
वो रोज़ लंच या डिनर के बाद
थोड़ा गुड़ ज़रुर खाएं..

5 - गुड़ आयरन का मुख्य स्रोत है।
इसलिए यह एनीमिया के मरीज़ों
के लिए बहुत फायदेमंद है।
खासतौर पर महिलाओं के
लिए इसका सेवन बहुत
अधिक ज़रुर है.

6 - त्वचा के लिए, गुड़ ब्लड से
खराब टॉक्सिन दूर करता है,
जिससे त्वचा दमकती है और
मुहांसे की समस्या नहीं होती है।

7 - गुड़ की तासीर गर्म है,
इसलिए इसका सेवन जुकाम
और कफ से आराम दिलाता है।
जुकाम के दौरान अगर आप
कच्चा गुड़ नहीं खाना चाहते हैं
तो चाय या लड्डू में भी
इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

8 - एनर्जी के लिए -बुहत
ज़्यादा थकान और कमजोरी
महसूस करने पर गुड़ का
सेवन करने से आपका एनर्जी
लेवल बढ़ जाता है।
गुड़ जल्दी पच जाता है, इससे
शुगर का स्तर भी नहीं बढ़ता.
दिनभर काम करने के बाद
जब भी आपको थकान हो,
तुरंत गुड़ खाएं।

9 - गुड़ शरीर के टेंपरेचर को
नियंत्रित रखता है।
इसमें एंटी एलर्जिक तत्व हैं,
इसलिए दमा के मरीज़ों के
लिए इसका सेवन काफी
फायदेमंद होता है।

10 - जोड़ों के दर्द में आराम--
रोज़ गुड़ के एक टुकड़े के
साथ अदरक का सेवन करें,
इससे जोड़ों के दर्द की
दिक्कत नहीं होगी।

11- गुड़ के साथ पके चावल
खाने से बैठा हुआ गला व
आवाज खुल जाती है।

12 - गुड़ और काले तिल के
लड्डू खानेसे सर्दी में अस्थमा
की परेशानी नहीं होती है।

13 - जुकाम जम गया हो, तो
गुड़ पिघलाकर उसकी पपड़ी
बनाकर खिलाएं।

14 - गुड़ और घी मिलाकर खाने
से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

15 - भोजन के बाद गुड़ खा
लेने से पेट में गैस नहीं बनती.
16 - पांच ग्राम सौंठ दस ग्राम
गुड़ के साथ लेने से पीलिया
रोग में लाभ होता है।

17 - गुड़ का हलवा खाने से
स्मरण शक्ति बढती है।

18 - पांच ग्राम गुड़ को इतने ही
सरसों के तेल में मिलाकर खानेसे
श्वास रोग से छुटकारा मिलता है।

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Star ब्राह्मणों का मर्यादित गरिमामय जीवन इतिहास.. !
Posted by: admin - 12-28-2021, 08:35 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

ब्राह्मणों  का  मर्यादित गरिमामय  जीवन इतिहास.. !

इतिहास में यह घटना अंकित है कि एक ब्राह्मण के  घर  की  स्त्री  स्नान  कर  रही  थी तभी  संयोग  से  वहां  से  "ब्राह्मण  कुल  शिरोमणि  "वाजीराव  पेशवा " की  सवारी निकल रही  थी।

हाथी  पर  बेठे  महाराज  वाजीराव  पेशवा  को  घर  के  अंदर  आँगन  में  स्नान  कर  रही स्त्री  का  चेहरा  गर्दन  तक  दिख  गया, संयोग  से  ब्राह्मण  स्त्री  की  नज़र भी  पेशवा  जी  से  टकरा गयी।

महाराज  बाजीराव  पेशवा  जी  तत्काल  हाथी  से  नीचे  उतरकर  पैदल  चलने  लगे..

साथ  चल  रहे  उनके  अंग रक्षक  ने  हिम्मत  जुटा  कारण  पूछा  तो  पेशवा  जी  बोले  अनजाने  में मैने  एक  ब्राह्मण  स्त्री  की  हत्या  कर  दी..

आज के  बाद  हाथी  की  सवारी  नहीं  करुँगा  घोड़े  की सवारी  करुँगा और  वास्तव  में  थोड़ी  देर  बाद  खबर  मिली  कि  उस  ब्राह्मण  स्त्री  ने  लज्जावश  प्राण  त्याग  दिए... 

मेरे  भाई  बहनों  ऐसा  रहा  ब्राह्मणों  का  मर्यादित गरिमामय  जीवन इतिहास.. !

अतः  आप  लोग  भले  ही  आधुनिक  रहें  लेकिन  पूर्वजों  की  अर्जित  की  हुई  महानता  को  याद  रखे ब्राह्मण ऐसे  ही  पूज्य  नहीं  हुए  हमारे  पूर्वजो  का  त्याग  तपस्या, बलिदान, त्रिकाल संध्या  सहित जीवन  सदैव  पवित्रता पूर्ण  मर्यादित  गरिमामय  रहा  अतः सदैव  ब्राह्मण  धर्म  का  पालन  करे l

फूहड़ वस्त्र  अमर्यादित भोजन  और  अमर्यादित  व्यवहार  का  त्याग  करे  जीवन  ऐसा  गरिमामय जियें  कि अन्य लोग  आपसे  प्रेरणा लें l

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Star 29 Nov 2021 Stock Market Prediction
Posted by: admin - 11-29-2021, 10:55 AM - Forum: Stock Market - Replies (2)

29 Nov 2021 Stock Market Prediction 

In today's trade we may see some pressure profit booking and negative sentiment in present levels in market. We can see upside resistance between 17100-17150 levels.

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Star 1 Nov 2021 Stock Market Prediction
Posted by: admin - 11-01-2021, 09:34 AM - Forum: Stock Market - No Replies

1 Nov 2021 Stock Market Prediction


In today's trade we may see some positive sentiment in present levels in market. We can see upside resistance between 17900-17950 levels.

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Star 29 Oct 2021 Stock Market Prediction
Posted by: admin - 10-29-2021, 09:13 AM - Forum: Stock Market - Replies (1)

29 Oct 2021 Stock Market Prediction


In today's trade we may see selling pressure less than yesterday's trade in present levels in market. We can see upside resistance between 18900-18950 levels. IT Aviation banking telecommunications railway pharma Infrastructure stocks may perform well. Market sentiment will be negative.



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Star 28 Oct 2021 Stock Market Prediction
Posted by: admin - 10-28-2021, 09:34 AM - Forum: Stock Market - Replies (1)

28 Oct 2021 Stock Market Prediction

In today's trade we may see selling pressure in present levels in market. We can also see negative closing in maket.

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Star 27 Oct 2021 Stock Market Prediction
Posted by: admin - 10-27-2021, 09:24 AM - Forum: Stock Market - No Replies

27 Oct 2021 Stock Market Prediction

In today's trade we may see support in present levels and buying in market. Best sectors for today intraday trade are banking finance IT FMCG telecommunication.


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Star 26 Oct 2021 Stock Market Prediction
Posted by: admin - 10-26-2021, 09:16 AM - Forum: Stock Market - Replies (1)

26 Oct 2021 Stock Market Prediction

In today's trade we may see upside resistance and selling on high levels.


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  25-Oct-21 Free ICC T20 World Cup 2021 Predictions
Posted by: admin - 10-25-2021, 05:53 PM - Forum: Free ICC T20 World Cup 2021 Predictions - No Replies

25-Oct-21 Free ICC T20 World Cup 2021 Predictions

25-Oct-21 Afghanistan Vs Scotland 7:30 PM IST (6 PM UAE) at Sharjah



Free ICC T20 World Cup 2021 Predictions on website free section link
https://www.reikiandastrologypredictions...php?fid=12

YouTube channel video link https://youtu.be/e6tJVeRAqxU

Live ICC T20 World Cup 2021 Predictions on YouTube channel
Link https://www.youtube.com/channel/UCvHuv-N...tah6VihyEQ






Free ICC T20 World Cup 2021 Predictions

When more runs will be scored wicket will fall who win the match all updates soon in comments below and live video on YouTube channel.

Free ICC T20 World Cup 2021 Predictions

Match Report:

Why Cricket Predictions by astrology?

Yes it is challenging difficult many calculations required to know which team will win. This work is only to show that Astrology is accurate and scientific and can't go wrong, yes but the astrologer may go wrong if does wrong calculations and mistakes in giving predictions by reading horoscope charts.

OPEN FOR ALL. FREE CRICKET PREDICTIONS ONLY FOR ENTERTAINMENT
Astrology can be used for any good cause in life. Be positive and find right ways. Good Karma is the only key to success in life.

We see Afghanistan won the toss and chose to Bat.

Today's Prediction: In today's match possibility of winning _____________ is More/Less than _____________.

Few points will be covered everyday.
1. Which team will have big partnership in scoring runs.
2. Today more catch out / run out or bold.
3. Which team hit more 4s and 6s.
4. Which team will have good bowler with best economy for today.
5. Which team will have good batsman and score high.

Please do not miss to check YouTube channel, on main post, sometimes in replies you will get only wicket fall and high score predictions. Who will win in beginning of the post.

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Star 25 Oct 2021 Stock Market Prediction
Posted by: admin - 10-25-2021, 09:07 AM - Forum: Stock Market - Replies (1)

Today we may see support in market from present levels. We can also see panic trade as more than usual. Avoid short selling today.


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Rainbow इंदिरा एकादशी व्रत की कथा Indira Ekadashi Vrat Katha
Posted by: admin - 10-02-2021, 09:12 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

इंदिरा एकादशी व्रत की कथा Indira Ekadashi Vrat Katha

हरे कृष्णा
2 अक्टूबर शनिवार इंदिरा एकादशी है किसी प्रकार का अनाज ग्रहण नहीं करना चाहिए और किसी को अन्न दान भी नहीं करना चाहिए और ना ही गो माता को अन्न देना चाहिए गुड़ या फल खिलाना चाहिए ????
3 अक्टूबर रविवार पारण का समय मतलब व्रत खोलने का समय 3/10/2021 को सुबह
6.19 से -10.17 बजे तक है इस समय मे ही व्रत को खोले तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है.
हरे कृष्णा
2/10/2021 इंदिरा एकादशी व्रत की कथा
इंदिरा एकादशी का व्रत जरूर करे नही व्रत करते है तो एकादशी के दिन चावल बिल्कुल भी नहीं खाए ना अन्न खाए ना अन्न दान करें और गो माता को भी अन्न ना दे उनको फल या गुड़ दे
एकादशी के दिन हरे कृष्ण महा मंत्र का ज्यादा से ज्यादा जप करे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
युधिष्ठिर ने पूछा : हे मधुसूदन ! कृपा करके मुझे यह बताइये कि आश्विन के कृष्णपक्ष में कौन सी एकादशी होती है ?
भगवान श्रीकृष्ण बोले : राजन् ! आश्विन (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार भाद्रपद) के कृष्णपक्ष में ‘इन्दिरा’ नाम की एकादशी होती है । उसके व्रत के प्रभाव से बड़े-बड़े पापों का नाश हो जाता है । नीच योनि में पड़े हुए पितरों को भी यह एकादशी सदगति देनेवाली है ।
राजन् ! पूर्वकाल की बात है । सत्ययुग में इन्द्रसेन नाम से विख्यात एक राजकुमार थे, जो माहिष्मतीपुरी के राजा होकर धर्मपूर्वक प्रजा का पालन करते थे । उनका यश सब ओर फैल चुका था ।
राजा इन्द्रसेन भगवान विष्णु की भक्ति में तत्पर हो गोविन्द के मोक्षदायक नामों का जप करते हुए समय व्यतीत करते थे और विधिपूर्वक अध्यात्मतत्त्व के चिन्तन में संलग्न रहते थे । एक दिन राजा राजसभा में सुखपूर्वक बैठे हुए थे, इतने में ही देवर्षि नारद आकाश से उतरकर वहाँ आ पहुँचे । उन्हें आया हुआ देख राजा हाथ जोड़कर खड़े हो गये और विधिपूर्वक पूजन करके उन्हें आसन पर बिठाया । इसके बाद वे इस प्रकार बोले: ‘मुनिश्रेष्ठ ! आपकी कृपा से मेरी सर्वथा कुशल है । आज आपके दर्शन से मेरी सम्पूर्ण यज्ञ क्रियाएँ सफल हो गयीं । देवर्षे ! अपने आगमन का कारण बताकर मुझ पर कृपा करें ।
नारदजी ने कहा : नृपश्रेष्ठ ! सुनो । मेरी बात तुम्हें आश्चर्य में डालनेवाली है । मैं ब्रह्मलोक से यमलोक में गया था । वहाँ एक श्रेष्ठ आसन पर बैठा और यमराज ने भक्तिपूर्वक मेरी पूजा की । उस समय यमराज की सभा में मैंने तुम्हारे पिता को भी देखा था । वे व्रतभंग के दोष से वहाँ आये थे । राजन् ! उन्होंने तुमसे कहने के लिए एक सन्देश दिया है, उसे सुनो । उन्होंने कहा है: ‘बेटा ! मुझे ‘इन्दिरा एकादशी’ के व्रत का पुण्य देकर स्वर्ग में भेजो ।’ उनका यह सन्देश लेकर मैं तुम्हारे पास आया हूँ । राजन् ! अपने पिता को स्वर्गलोक की प्राप्ति कराने के लिए ‘इन्दिरा एकादशी’ का व्रत करो ।
राजा ने पूछा : भगवन् ! कृपा करके ‘इन्दिरा एकादशी’ का व्रत बताइये । किस पक्ष में, किस तिथि को और किस विधि से यह व्रत करना चाहिए ।
नारदजी ने कहा : राजेन्द्र ! सुनो । मैं तुम्हें इस व्रत की शुभकारक विधि बतलाता हूँ । आश्विन मास के कृष्णपक्ष में दशमी के उत्तम दिन को श्रद्धायुक्त चित्त से प्रतःकाल स्नान करो । फिर मध्याह्नकाल में स्नान करके एकाग्रचित्त हो एक समय भोजन करो तथा रात्रि में भूमि पर सोओ । रात्रि के अन्त में निर्मल प्रभात होने पर एकादशी के दिन दातुन करके मुँह धोओ । इसके बाद भक्तिभाव से निम्नांकित मंत्र पढ़ते हुए उपवास का नियम ग्रहण करो :
अघ स्थित्वा निराहारः सर्वभोगविवर्जितः ।
श्वो भोक्ष्ये पुण्डरीकाक्ष शरणं मे भवाच्युत ॥
कमलनयन भगवान नारायण ! आज मैं सब भोगों से अलग हो निराहार रहकर कल भोजन करुँगा । अच्युत ! आप मुझे शरण दें |
इस प्रकार नियम करके मध्याह्नकाल में पितरों की प्रसन्नता के लिए शालग्राम शिला के सम्मुख विधिपूर्वक श्राद्ध करो तथा दक्षिणा से ब्राह्मणों का सत्कार करके उन्हें भोजन कराओ । पितरों को दिये हुए अन्नमय पिण्ड को सूँघकर गाय को खिला दो । फिर धूप और गन्ध आदि से भगवान ह्रषिकेश का पूजन करके रात्रि में उनके समीप जागरण करो । तत्पश्चात् सवेरा होने पर द्वादशी के दिन पुनः भक्तिपूर्वक श्रीहरि की पूजा करो । उसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर भाई बन्धु, नाती और पुत्र आदि के साथ स्वयं मौन होकर भोजन करो ।
राजन् ! इस विधि से आलस्यरहित होकर यह व्रत करो । इससे तुम्हारे पितर भगवान विष्णु के वैकुण्ठधाम में चले जायेंगे ।
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं : राजन् ! राजा इन्द्रसेन से ऐसा कहकर देवर्षि नारद अन्तर्धान हो गये । राजा ने उनकी बतायी हुई विधि से अन्त: पुर की रानियों, पुत्रों और भृत्योंसहित उस उत्तम व्रत का अनुष्ठान किया ।
कुन्तीनन्दन ! व्रत पूर्ण होने पर आकाश से फूलों की वर्षा होने लगी । इन्द्रसेन के पिता गरुड़ पर आरुढ़ होकर श्रीविष्णुधाम को चले गये और राजर्षि इन्द्रसेन भी निष्कण्टक राज्य का उपभोग करके अपने पुत्र को राजसिंहासन पर बैठाकर स्वयं स्वर्गलोक को चले गये । इस प्रकार मैंने तुम्हारे सामने ‘इन्दिरा एकादशी’ व्रत के माहात्म्य का वर्णन किया है । इसको पढ़ने और सुनने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है । 


प्रेषक: सुश्री स्वाति जायसवाल

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Posted by: stive - 09-07-2021, 05:18 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

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Star Hare Krishna haribol ekadashi vrat ki mahima ke bare me jane
Posted by: admin - 09-03-2021, 09:24 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

Hare Krishna haribol ekadashi vrat ki mahima ke bare me jane or
.?vrat kese karna
?kyo karna chahiye
?kon si ekadashi karna chahiye

? Jane YouTube par search kare✡️ #swati520ekadashi

Swati ?????
Only 2  min and 5 min ki video hai jarur sune hare Krishna

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Star Happy Shri Krishna Janmashtami श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें और बधाई
Posted by: admin - 08-30-2021, 11:55 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

Happy Shri Krishna Janmashtami 
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें और बधाई
   

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  дизайн квартиры москва
Posted by: Dscissdwest - 08-22-2021, 09:03 PM - Forum: Post Advertisement - Replies (1)

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Posted by: stive - 08-18-2021, 06:56 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

Мы знаем, насколько важны для вас сроки поставки товара из Китая!

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Rainbow Wishes of Independence Day & Inviting you for Birthday Celebration of Dr. Mikao Usui
Posted by: admin - 08-14-2021, 06:55 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

Wishes of Independence Day & Inviting you for Birthday Celebration of Dr. Mikao Usui



   


   


Great Guru founder of Reiki healing Dr Mikao Usui

Dear all Reiki healers and Reiki lovers on the occasion of Dr Mikao Usui's death anniversary we have organize offline & online gathering to give tribute to our great Guru Dr Mikao Usui and we'll discuss about reiki healing. As we know our Great guru healer reiki master Dr Mikao Usui who was the promoter of healing therapy, a form of spiritual practice known as Reiki, used as an alternative therapy for the treatment of physical, emotional, and mental diseases. Dr Usui taught Reiki to over 2,000 people during his lifetime.



Born: 15 August 1865, Japan

Died: 9 March 1926, Fukuyama, Hiroshima, Japan

Duration of session: 3 hours
1 Prayer
2 Reiki learning basic questions and answers
3 Case discussion
4 process of giving reiki healing (Offline)
5 Tips to improve reiki healing practice
Time: 4 to 7 pm
We all grateful to our ?? Guru Dr Mikao Usui for lifetime. ?❤
May Guruji and God bless you all love and light ????❤

Website https://www.reikiandastrologypredictions.com

Mob. N. 8109812284


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Star Updates for this Month
Posted by: admin - 08-13-2021, 02:06 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

Hello Everyone,

Hope you are doing good.
Updates for this month.

मन वचन और कर्म से अच्छा करते रहिये आपका सब अच्छा होगा. रेकी हीलिंग और ज्योतिष विद्या का उपयोग देशसेवा के लिए करें.
LIVE NOW FREE HOROSCOPE READING SESSION ONLINE & Reiki free distance healing session Link
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2. https://www.youtube.com/watch?v=2EkuHcn5...3aDFPFYH4q
3. https://www.youtube.com/watch?v=mzLQxCMI...w239EUT7qR
4. https://www.youtube.com/watch?v=KM9SJ2eP...YPgDuy40Op
5. https://www.youtube.com/watch?v=0etP5-al..._X-uE0D4H8
6. https://www.youtube.com/watch?v=fhMt13GG...1cS4YDr4Ie
7. https://www.youtube.com/watch?v=KM9SJ2eP...KOQzOB5zMP 
8. https://www.youtube.com/watch?v=aQuM29d8...RqIUHHfJi9

Regards

Team
Reiki and Astrology Predictions


REPLY TO ALL ON YOUTUBE CHANNEL. Join next session here, timings and updates link https://www.youtube.com/channel/UCvHuv-N...tah6VihyEQ

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Posted by: Donaldiyx - 06-30-2021, 07:19 AM - Forum: Post Advertisement - No Replies

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Regards.
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  Marketplace
Posted by: amilesqtvanov2816 - 06-26-2021, 10:37 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

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Hope you are doing good.
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Posted by: badaastivanova8164 - 05-22-2021, 12:33 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

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Rainbow Reiki healing for removal and to control the Mucormycosis infection
Posted by: admin - 05-14-2021, 01:16 PM - Forum: Reiki cases - No Replies

Reiki healing for removal and to control the Mucormycosis infection.

Patient recovered from Covid-19, after that in his eye there was a fungal infection Mucormycosis Symptoms. Patient's eye had to be removed.
Reiki healing given for removal and to control the infection.
Brain surgery done to remove fungus. 
Dr said after operation in brain there is no infection.
Reiki healing continued till full recovery. We pray for patient, good health and wellness. Love and Light.  Heart Heart Heart 

   

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  Updates for this month.
Posted by: MichaelCip - 05-06-2021, 12:19 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

Updates for this month.

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  An Intro
Posted by: MichaelCip - 05-04-2021, 10:44 AM - Forum: Post Advertisement - No Replies

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  An Introduction
Posted by: MichaelCip - 04-26-2021, 09:13 AM - Forum: Post Advertisement - No Replies

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  NMT
Posted by: Marthadefly - 04-24-2021, 06:51 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

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  Indian Premier League 5th Match KOLKATA KNIGHT RIDERS Vs MUMBAI INDIANS
Posted by: admin - 04-13-2021, 11:26 AM - Forum: IPL T-20 2021 - No Replies

Indian Premier League 

5th Match, Chennai, April 13 2020, IST 07:30 PM

KOLKATA KNIGHT RIDERS Vs MUMBAI INDIANS


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YouTube channel video link https://youtu.be/e6tJVeRAqxU

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Indian Premier League

When more runs will be scored wicket will fall who win the match all updates soon in comments below and live video on YouTube channel.

IPL T-20

Match Report:

Why Cricket Predictions by astrology?

Yes it is challenging difficult many calculations required to know which team will win. This work is only to show that Astrology is accurate and scientific and can't go wrong, yes but the astrologer may go wrong if does wrong calculations and mistakes in giving predictions by reading horoscope charts.

OPEN FOR ALL. FREE CRICKET PREDICTIONS ONLY FOR ENTERTAINMENT
Astrology can be used for any good cause in life. Be positive and find right ways. Good Karma is the only key to success in life.

We see ................ won the toss and chose to Field/Bat.

Today's Prediction: In today's match possibility of winning KOLKATA KNIGHT RIDERS is More/Less than MUMBAI INDIANS.

Few points will be covered everyday.
1. Which team will have big partnership in scoring runs.
2. Today more catch out / run out or bold.
3. Which team hit more 4s and 6s.
4. Which team will have good bowler with best economy for today.
5. Which team will have good batsman and score high.

Please do not miss to check YouTube channel, on main post, sometimes in replies you will get only wicket fall and high score predictions. Who will win in beginning of the post.

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  Indian Premier League 4th Match RAJASTHAN ROYALS Vs PUNJAB KINGS
Posted by: admin - 04-12-2021, 01:35 PM - Forum: IPL T-20 2021 - Replies (1)

Indian Premier League 

4th Match, Mumbai, April 12 2020, IST 07:30 PM

RAJASTHAN ROYALS Vs PUNJAB KINGS


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Indian Premier League

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Match Report:

Why Cricket Predictions by astrology?

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Today's Prediction: In today's match possibility of winning RAJASTHAN ROYALS is More than PUNJAB KINGS.

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2. Today more catch out / run out or bold.
3. Which team hit more 4s and 6s.
4. Which team will have good bowler with best economy for today.
5. Which team will have good batsman and score high.

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Star सभी फ्री क्रिकेट प्रिडिक्शंस कैसे ज्वाइन करें How to join all free Cricket Prediction
Posted by: admin - 04-12-2021, 01:06 PM - Forum: Cricket predictions: Only for entertainment and in free section. - No Replies

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Star Indian Premier League 3rd Match SUN RISERS HYDERABAD Vs KOLKATA KNIGHT RIDERS
Posted by: admin - 04-11-2021, 06:51 PM - Forum: IPL T-20 2021 - Replies (1)

Indian Premier League 

3rd Match, Chennai, April 11 2020, IST 07:30 PM

SUN RISERS HYDERABAD Vs KOLKATA KNIGHT RIDERS


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Indian Premier League

When more runs will be scored wicket will fall who win the match all updates soon in comments below and live video on YouTube channel.

IPL T-20

Match Report:

Why Cricket Predictions by astrology?

Yes it is challenging difficult many calculations required to know which team will win. This work is only to show that Astrology is accurate and scientific and can't go wrong, yes but the astrologer may go wrong if does wrong calculations and mistakes in giving predictions by reading horoscope charts.

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Today's Prediction: In today's match possibility of winning SUN RISERS HYDERABAD is More than KOLKATA KNIGHT RIDERS.

Few points will be covered everyday.
1. Which team will have big partnership in scoring runs.
2. Today more catch out / run out or bold.
3. Which team hit more 4s and 6s.
4. Which team will have good bowler with best economy for today.
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Rainbow श्री गणेश अथर्वशीर्ष एवं शांति पाठ Shree Ganesh Atharvasheersha Mantra & shanti paath
Posted by: admin - 04-10-2021, 08:32 PM - Forum: Astrology - No Replies

श्री गणेश अथर्वशीर्ष एवं शांति पाठ 
Shree Ganesh Atharvasheersha Mantra and shanti paath


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Star Indian Premier League 2nd Match CHENNAI SUPERKINGS Vs DELHI CAPTAINS
Posted by: admin - 04-10-2021, 02:02 PM - Forum: IPL T-20 2021 - Replies (3)

Indian Premier League 

2nd Match, Mumbai, April 10 2020, IST 07:30 PM

CHENNAI SUPERKINGS Vs DELHI CAPTAINS


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Indian Premier League

When more runs will be scored wicket will fall who win the match all updates soon in comments below and live video on YouTube channel.

IPL T-20

Match Report:

Why Cricket Predictions by astrology?

Yes it is challenging difficult many calculations required to know which team will win. This work is only to show that Astrology is accurate and scientific and can't go wrong, yes but the astrologer may go wrong if does wrong calculations and mistakes in giving predictions by reading horoscope charts.

OPEN FOR ALL. FREE CRICKET PREDICTIONS ONLY FOR ENTERTAINMENT
Astrology can be used for any good cause in life. Be positive and find right ways. Good Karma is the only key to success in life.

We see DELHI CAPTAINS won the toss and chose to Field.

Today's Prediction: In today's match possibility of winning CHENNAI SUPERKINGS is less than DELHI CAPTAINS.

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1. Which team will have big partnership in scoring runs.
2. Today more catch out / run out or bold.
3. Which team hit more 4s and 6s.
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Star Indian Premier League 1st Match MUMBAI INDIANS Vs ROYAL CHALLENGERS BANGALORE
Posted by: admin - 04-09-2021, 03:07 PM - Forum: IPL T-20 2021 - Replies (1)

Indian Premier League 

1st Match, Chennai, April 9 2020, IST 07:30 PM

MUMBAI INDIANS Vs ROYAL CHALLENGERS BANGALORE


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Indian Premier League

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Match Report:

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OPEN FOR ALL. FREE CRICKET PREDICTIONS ONLY FOR ENTERTAINMENT
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We see ROYAL CHALLENGERS BANGALORE won the toss and chose to field.

Today's Prediction: In today's match possibility of winning MUMBAI INDIANS is less than ROYAL CHALLENGERS BANGALORE.

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2. Today more catch out / run out or bold.
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Star IPL T-20 2021 Free Predictions
Posted by: admin - 04-07-2021, 03:03 PM - Forum: IPL T-20 2021 - No Replies

IPL T-20 2021 Free Predictions

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YouTube channel video link https://youtu.be/e6tJVeRAqxU

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Indian Premier League

When more runs will be scored wicket will fall who win the match all updates soon in comments below and live video on YouTube channel.

IPL T-20

Match Report: 

Why Cricket Predictions by astrology?

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We see .............. won the toss and chose to bat.

Today's Prediction: In today's match possibility of winning TEAM A is less/more than TEAM B.

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Posted by: agnesof69 - 03-10-2021, 08:28 AM - Forum: Post Advertisement - No Replies

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Rainbow Tribute to our great Guru Dr Mikao Usui
Posted by: admin - 03-09-2021, 09:17 AM - Forum: Reiki - No Replies

Tribute to our great Guru Dr Mikao Usui

   
Tribute to our great Guru
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Born: 15 August 1865, Japan

Died: 9 March 1926, Fukuyama, Hiroshima, Japan

Duration of session: 1 hour
1 Prayer
2 Reiki learning basic questions and answers
3 Case discussion
4 process of giving reiki healing (Offline)
5 Tips to improve reiki healing practice
Time: 4 to 5 pm
We all grateful to our ?? Guru Dr Mikao Usui for lifetime. ?❤
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To Join
Zoom meeting invitation - Tribute to Dr Mikao Usui
Celebrity Reiki Grand Master Astrologer Filmmaker is inviting you to a scheduled Zoom meeting.

Topic: Tribute to Dr Mikao Usui
Time: Mar 9, 2021 04:00 PM Mumbai, Kolkata, New Delhi

Join Zoom Meeting
https://us04web.zoom.us/j/74695980669?pw...FKYXg3dz09

Meeting ID: 746 9598 0669
Passcode: 6sL3Wt

Website https://www.reikiandastrologypredictions.com
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Rainbow मूल कारण को जानकर रेकी द्वारा समाधान Reiki healing. Amazing effects of reiki healing
Posted by: admin - 02-22-2021, 10:07 AM - Forum: Reiki cases - No Replies

Reiki cases: मूल कारण को जानकर रेकी द्वारा समाधान Reiki healing case solved by its root cause. 

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Star शैलनट नाट्य संस्था स्व० ललित मोहन थपलियाल जी कृत गढ़वाली हास्य नाटक खाडू लापता का मंच
Posted by: admin - 01-26-2021, 10:58 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

शैलनट नाट्य संस्था स्व० ललित मोहन थपलियाल जी कृत गढ़वाली हास्य नाटक खाडू लापता का मंचन

सभी बंधु बांधवों को प्रणाम। हमें आप सभी को यह बताते हुए बहुत हर्ष हो रहा है कि शैलनट नाट्य संस्था स्व० ललित मोहन थपलियाल जी कृत गढ़वाली हास्य नाटक खाडू लापता का मंचन करने जा रहा है। जिसका लाइव प्रसारण विभिन्न फेसबुक पेजों जैसे शैलनट श्रीनगर, बदलता श्रीनगर, बेमिसाल गढ़देश और श्रीनगर दर्शन  द्वारा किया जाएगा। आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके 26 जनवरी 2021 शाम 6 बजे खाडू लापता का लाइव प्रसारण देख सकते हैं।
सहयोग - अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन श्रीनगर गढ़वाल।


शैलनट श्रीनगर
https://www.facebook.com/shailnat/


बदलता श्रीनगर
https://www.facebook.com/%E0%A4%AC%E0%A4...905773204/

श्रीनगर दर्शन
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बेमिसाल गढ़देश
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Posted by: SaraNUS - 12-09-2020, 08:30 AM - Forum: Post Advertisement - No Replies

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Star भाईदूज की कथा bhai dujh ki katha
Posted by: स्वाति जायसवाल - 11-16-2020, 10:20 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

हरे कृष्णा

थोड़ा बड़ा लिखा है पर अपने भाई के लिए पढे जरूर 2 मिनिट ही लगेंगे ज्यादा नहीं हरिबोल

Hare Krishna bhai dujh ki katha भाईदूज की कथा

मथुरा। पांच दिवसीय दीपोत्सव के अंतिम दिन यानि यम द्वितीया को जो भी भाई बहन यमुना में स्नान करते हैं, उन्हें यम फांस से मुक्ति मिलती है। वहीं इस दिन बहिनें भाइयों के उन्नत मस्तक पर टीका कर उनकी लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं।

ये है कहानी
सूर्य की पुत्री यमुना शापित होकर नदी के रूप में अपने उद्गम स्थल हिमालय से प्रवाहित होती हुई विभिन्न स्थानों पर भ्रमण करते हुए मथुरा पहुंची। यहां यमुना महारानी ने विश्राम (विश्राम घाट) किया। यमुना के ज्येष्ठ भ्राता और सूर्यपुत्र यमराज बहिन यमुना से मिलने आए। यहां भाई-बहिन का भावुक मिलन हुआ। यमुना ने भाई के माथे पर मंगल तिलक किया तो यमराज ने बहिन से उपहार मांगने को कहा। यमुना ने वर मांगा कि जिस स्थान पर हमारा मिलन हुआ है वहां कोई भी भाई बहिन मेरे जल में स्नान करेगा तो वो यमलोक के कष्टों (यम की फांस) से मुक्त हो जाए। प्रसन्न यमराज ने यमुना को उपहार स्वरूप वरदान प्रदान किया। तभी से प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल द्वितीया को बहिन-भाई एक साथ यमुना में स्नान करने को आते हैं।
यमुना जी और धर्मराज की होती है पूजा
यमुना के 25 घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पर्व को मनाते हैं। स्नान के बाद विश्राम घाट स्थित यमुना महारानी व धर्मराज मंदिर में पूजा अर्चना कर वस्त्र, श्रृंगार सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद बहिनें भाइयों के तिलक करती हैं भाई उन्हें उपहार प्रदान करते हैं।


Hare Krishna
भैया दूज के दिन ऐसे करें पूजा: भैया दूज वाले दिन बहने आसन पर चावल के घोल से चौक बनाएं। इस चौक पर अपने भाई को बिठाकर उनके हाथों की पूजा करें। सबसे पहले बहन अपने भाई के हाथों पर चावलों का घोल लगाए। उसके ऊपर सिंदूर लगाकर फूल, पान, सुपारी तथा मुद्रा रख कर धीरे-धीरे हाथों पर पानी छोड़ते हुए मंत्र बोले ‘गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज को। सुभद्रा पूजे कृष्ण को गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें फूले फलें।’ इसके उपरांत बहन भाई के मस्तक पर तिलक लगाकर कलावा बांधे और भाई के मुंह में मिठाई, मिश्री और माखन लगाएं। घर पर भाई सभी प्रकार से प्रसन्नचित्त जीवन व्यतीत करें, ऐसी मंगल कामना करें। उसकी लम्बी उम्र की प्रार्थना करें। उसके उपरांत यमराज के नाम का चौमुखा दीपक जला कर घर की दहलीज के बाहर रखें। जिससे भाई के घर में किसी प्रकार का विघ्न-बाधां न आए और वह सुखमय जीवन व्यतीत करें।


भाईदूज
भाईदूज के दिन भाई बहिन के घर का ही खाना खाए। ऐसा करने से भाई की आयुवृद्धि होती है। पहला कौर बहिन के हाथ से खाएं। स्कंदपुराण के अनुसार इस दिन जो बहिन के हाथ से भोजन करता है, वह धन एव उत्तम सम्पदा को प्राप्त होता है। अगर बहिन न हो तो मुँहबोली बहिन या मौसी/मामा की पुत्री को बहिन मान ले। अगर वह भी न हो तो किसी गाय अथवा नदी को ही बहिन बना ले और उसके पास भोजन करे। कहने का आश्रय यह है की यमद्वितीया को कभी भी अपने घर भोजन न करे।
?? आज के दिन बहिन अपने भाई की 3 बार आरती जरूर उतारे।
?? आज के दिन बहिन भाई को तथा भाई बहिन को कदन कोई उपहार जरूर दे स्कंदपुराण के अनुसार विशेषतः वस्त्र तथा आभूषण। आज के दिन भाई बहिन का यमुना जी में नहाना भी बहुत शुभ है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना जी में स्नान करने वाला पुरुष यमलोक का दर्शन नहीं करता।

नारदपुराण के अनुसार

ऊर्ज्जशुक्लद्वितीयायां यमो यमुनया पुरा ।।
भोजितः स्वगृहे तेन द्वितीयैषा यमाह्वया ।।
पुष्टिप्रवर्द्धनं चात्र भगिन्या भोजनं गृहे ।।
वस्त्रालंकारपूर्वं तु तस्मै देयमतः परम् ।।
यस्यां तिथौ यमुनया यमराजदेवः संभोजितो निजकरात्स्वसृसौहृदेन ।।
तस्यां स्वसुः करतलादिह यो भुनक्ति प्राप्नोति रत्नधनधान्यमनुत्तमं सः ।।

कार्तिक शुक्ल द्वितीया को पूर्वकाल में यमुनाजी ने यमराज को अपने घर भोजन कराया था, इसलिए यह ‘यमद्वितीया’ कहलाती है। इसमें बहिन के घर भोजन करना पुष्टिवर्धक बताया गया है। अतः बहिन को उस दिन वस्त्र और आभूषण देने चाहिए। उस तिथि को जो बहिन के हाथ से इस लोक में भोजन करता है, वह सर्वोत्तम रत्न, धन और धान्य पाता है ।
         

          भाई दूज

दीपावली पर्व के पांचवे दिन यानी कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 16 नवम्बर, सोमवार को है। यह पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन बहन के घर भोजन करने से भाई की उम्र बढ़ती है। इस पर्व का महत्व इस प्रकार है-

धर्म ग्रंथों के अनुसार, कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन ही यमुना ने अपने भाई यम को अपने घर बुलाकर सत्कार करके भोजन कराया था। इसीलिए इस त्योहार को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। तब यमराज ने प्रसन्न होकर उसे यह वर दिया था कि जो व्यक्ति इस दिन यमुना में स्नान करके यम का पूजन करेगा, मृत्यु के पश्चात उसे यमलोक में नहीं जाना पड़ेगा। सूर्य की पुत्री यमुना समस्त कष्टों का निवारण करने वाली देवी स्वरूपा है।

उनके भाई मृत्यु के देवता यमराज हैं। यम द्वितीया के दिन यमुना नदी में स्नान करने और वहीं यमुना और यमराज की पूजा करने का बड़ा माहात्म्य माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई को तिलक कर उसकी लंबी उम्र के लिए हाथ जोड़कर यमराज से प्रार्थना करती है। स्कंद पुराण में लिखा है कि इस दिन यमराज को प्रसन्न करने से पूजन करने वालों को मनोवांछित फल मिलता है। धन-धान्य, यश एवं दीर्घायु की प्राप्ति होती है।

भाई की उम्र बढ़ानी है तो करें यमराज से प्रार्थना
सबसे पहले बहन-भाई दोनों मिलकर यम, चित्रगुप्त और यम के दूतों की पूजा करें तथा सबको अर्घ्य दें। बहन भाई की आयु-वृद्धि के लिए यम की प्रतिमा का पूजन करें। प्रार्थना करें कि मार्कण्डेय, हनुमान, बलि, परशुराम, व्यास, विभीषण, कृपाचार्य तथा अश्वत्थामा इन आठ चिरंजीवियों की तरह मेरे भाई को भी चिरंजीवी कर दें।

भाई की लंबी उम्र के लिए11 बार
हरे कृष्ण महा मंत्र जरूर बोले

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे

इसके बाद बहन भाई को भोजन कराती हैं। भोजन के बाद भाई की तिलक लगाती हैं। इसके बाद भाई यथाशक्ति बहन को भेंट देता है। जिसमें स्वर्ग, आभूषण, वस्त्र आदि प्रमुखता से दिए जाते हैं। लोगों में ऐसा विश्वास भी प्रचलित है कि इस दिन बहन अपने हाथ से भाई को भोजन कराए तो उसकी उम्र बढ़ती है और उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं।


Hare Krishna

Aaj apne Bhaiya ko raksha sutr jaur badhe matlab  ye mantr bol kar badhe bahane bhai ko kalawa

रक्षासूत्र का मंत्र है- 'येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:।' इसका अर्थ है- अर्थात् जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी बंधन से मैं तुम्हें बांधती हूं, जो तुम्हारी रक्षा करेगा|

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Thumbs Up राधारानी जी की तुलसी सेवा
Posted by: स्वाति जायसवाल - 11-16-2020, 10:18 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

हरे कृष्णा

तुलसी जी की सेवा कैसे करना चाहिए हमे राधा रानी जी से सीखना चाहिए

राधारानी जी की तुलसी सेवा??

                हरिप्रिया तुलसी देवी की जय

          एक बार राधा जी सखी से बोलीं, सखी ! तुम श्री कृष्ण की प्रसन्नता के लिए किसी देवता की ऐसी पूजा बताओ जो परम सौभाग्यवर्द्धक हो ?
          तब समस्त सखियों में श्रेष्ठ चन्द्रनना ने अपने हदय में एक क्षण तक कुछ विचार किया। फिर बोली चंद्रनना ने कहा, "राधे ! परम सौभाग्यदायक और श्रीकृष्ण की भी प्राप्ति के लिए वरदायक व्रत है, "तुलसी की सेवा" तुम्हें तुलसी सेवन का ही नियम लेना चाहिय *क्योंकि तुलसी का यदि स्पर्श अथवा ध्यान, नाम, संकीर्तन, आरोपण, सेचन, किया जाये तो महान पुण्यप्रद होता है। हे राधे ! जो प्रतिदिन तुलसी की नौ प्रकार से भक्ति करते है। वे कोटि सहस्त्र युगों तक अपने उस सुकृत्य का उत्तम फल भोगते हैं
          मनुष्यों की लगायी हुई तुलसी जब तक शाखा, प्रशाखा, बीज, पुष्प, और सुन्दर दलों, के साथ पृथ्वी पर बढ़ती रहती है तब तक उनके वंश मैं जो-जो जन्म लेता है, वे सभी सौ हजार कल्पों तक श्रीहरि के धाम में निवास करते हैं जो तुलसी मंजरी सिर पर रखकर प्राण त्याग करता है। वह सैकड़ों पापों से युक्त क्यों न हो यमराज उनकी ओर देख भी नहीं सकते" इस प्रकार चन्द्रनना की कहीं बात सुनकर रासेश्वरी श्री राधा ने साक्षात् श्री हरि को संतुष्ट करने वाले तुलसी सेवन का व्रत आरंभ किया।
          केतकी वन में सौ हाथ गोलाकार भूमि पर बहुत ऊँचा और अत्यंत मनोहर श्री तुलसी का मंदिर बनवाया, जिसकी दीवार सोने से जड़ी थीं और किनारे-किनारे पद्मरागमणि लगी थीं वह सुन्दर-सुन्दर पन्ने हीरे और मोतियों के परकोटे से अत्यंत सुशोभित था, और उसके चारोंं ओर परिक्रमा के लिए गली बनायीं गई थी जिसकी भूमि चिंतामणि से मण्डित थी ऐसे तुलसी मंदिर के मध्य भाग में हरे पल्लवों से सुशोभित तुलसी की स्थापना करके श्री राधा ने अभिजित मुहूर्त में उनकी सेवा प्रारम्भ की।
          श्री राधा जी ने आश्र्विन शुक्ला पूर्णिमा से लेकर चैत्र पूर्णिमा तक तुलसी सेवन व्रत का अनुष्ठान किया। व्रत आरंभ करके उन्होंने प्रतिमास पृथक-पृथक रस से तुलसी को सींचा
*कार्तिक में दूध से, "मार्गशीर्ष में ईख(गन्ने)के रस से
"पौष में द्राक्षा रस से
"माघ में बारहमासी आम के रस से",
"फाल्गुन मास में अनेक वस्तुओ से मिश्रित मिश्री के रस से"
"चैत्र मास में पंचामृत से" उनका सेचन किया,
वैशाख कृष्ण प्रतिपदा के दिन उद्यापन का उत्सव किया।
          उन्होंने दो लाख ब्राह्मणों को छप्पन भोगों से तृप्त करके वस्त्र और आभूषणों के साथ दक्षिणा दी। मोटे-मोटे दिव्य मोतियों का एक लाख भार और सुवर्ण का एक कोटि भार श्री गर्गाचार्य को दिया उस समय आकाश से देवता तुलसी मंदिर पर फूलों की वर्षा करने लगे।
          उसी समय सुवर्ण सिंहासन पर विराजमान हरिप्रिया तुलसी देवी प्रकट हुईं। उनके चार भुजाएँ थीं कमल दल के समान विशाल नेत्र थे सोलह वर्ष की सी अवस्था और श्याम कांति थी। मस्तक पर हेममय किरीट प्रकाशित था और कानों में कंचनमय कुंडल झलमला रहे थे गरुड़ से उतरकर तुलसी देवी ने रंग वल्ली जैसी श्री राधाजी को अपनी भुजाओं से अंक में भर लिया और उनके मुखचन्द्र का चुम्बन किया।
          तुलसी जी बोली, "कलावती राधे ! मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूँ, यहाँ इंद्रिय, मन, बुद्धि, और चित् द्वारा जो-जो मनोरथ तुमने किया है वह सब तुम्हारे सम्मुख सफल हो।"
          इस प्रकार हरिप्रिया तुलसी को प्रणाम करके वृषभानु नंदिनी राधा ने उनसे कहा, "देवी ! गोविंद के युगल चरणों में मेरी अहैतुकी भक्ति बनी रहे।" तब तथास्तु कहकर हरिप्रिया अंतर्धान हो गईं। इस प्रकार पृथ्वी पर जो मनुष्य श्री राधिका के इस विचित्र उपाख्यान को सुनता है वह भगवान को पाकर कृतकृत्य हो जाता है।
                     
आप इतना नही कर सकते तो तुलसी जी मे रोज कच्चा दूध जल में मिलाकर चढ़ा दे तांबे के लोटे में दूध ना डाले कोटा चाँदी या इसटिल का ले और कपूर से आरती करें और घी का दीप प्रज्वलित करें इतना जरूर करें संध्या के समय कपूर से आरती ओर दीप प्रज्वलित जरूर करें


  जय जय श्री राधे श्याम
      जय वृंदा देवी तुलसी महारानी की जय
वृंदावन धाम की जय
जय प्रभुपाद



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Thumbs Up रमा एकादशी व्रत कथा- कार्तिक कृष्ण एकादशी
Posted by: स्वाति जायसवाल - 11-16-2020, 10:16 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

Hare Krishna
Ekadashi vrat Katha
Ekadashi vrat ke din jarur pade 11/11/2020 aaj vart kare or Deep daan ? jarur kare or vart na kare to bhi katha jarur pade or hare Krishn maha mantr ka jap jarur kare or jo ekadashi vrat ke din jo puri shradha ke sath vart karta hai or Sirf fruits kha kar vart kare to sab se achha hota hai nhi to jese bane vese kare par vart jarur kare or puri ratri hari naam jap, kirtan, kata sunte huye jagran karta hai vo or uske sare pitro ko Krishn ka dham vekund dham milta hai ????????????????


Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hàre Hàre
Hare ram Hare ram ram ram Hare Hare

रमा एकादशी व्रत कथा
कार्तिक कृष्ण एकादशी

धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! कार्तिक कृष्ण एकादशी का क्या नाम है? इसकी विधि क्या है? इसके करने से क्या फल मिलता है। सो आप विस्तारपूर्वक बताइए। भगवान श्रीकृष्ण बोले कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम रमा है। यह बड़े-बड़े पापों का नाश करने वाली है। इसका माहात्म्य मैं तुमसे कहता हूँ, ध्यानपूर्वक सुनो।

हे राजन! प्राचीनकाल में मुचुकुंद नाम का एक राजा था। उसकी इंद्र के साथ मित्रता थी और साथ ही यम, कुबेर, वरुण और विभीषण भी उसके मित्र थे। यह राजा बड़ा धर्मात्मा, विष्णुभक्त और न्याय के साथ राज करता था। उस राजा की एक कन्या थी, जिसका नाम चंद्रभागा था। उस कन्या का विवाह चंद्रसेन के पुत्र शोभन के साथ हुआ था। एक समय वह शोभन ससुराल आया। उन्हीं दिनों जल्दी ही पुण्यदायिनी एकादशी (रमा) भी आने वाली थी।

जब व्रत का दिन समीप आ गया तो चंद्रभागा के मन में अत्यंत सोच उत्पन्न हुआ कि मेरे पति अत्यंत दुर्बल हैं और मेरे पिता की आज्ञा अति कठोर है। दशमी को राजा ने ढोल बजवाकर सारे राज्य में यह घोषणा करवा दी कि एकादशी को भोजन नहीं करना चाहिए। ढोल की घोषणा सुनते ही शोभन को अत्यंत चिंता हुई औ अपनी पत्नी से कहा कि हे प्रिये! अब क्या करना चाहिए, मैं किसी प्रकार भी भूख सहन नहीं कर सकूँगा। ऐसा उपाय बतलाओ कि जिससे मेरे प्राण बच सकें, अन्यथा मेरे प्राण अवश्य चले जाएँगे।

चंद्रभागा कहने लगी कि हे स्वामी! मेरे पिता के राज में एकादशी के दिन कोई भी भोजन नहीं करता। हाथी, घोड़ा, ऊँट, बिल्ली, गौ आदि भी तृण, अन्न, जल आदि ग्रहण नहीं कर सकते, फिर मनुष्य का तो कहना ही क्या है। यदि आप भोजन करना चाहते हैं तो किसी दूसरे स्थान पर चले जाइए, क्योंकि यदि आप यहीं रहना चाहते हैं तो आपको अवश्य व्रत करना पड़ेगा। ऐसा सुनकर शोभन कहने लगा कि हे प्रिये! मैं अवश्य व्रत करूँगा, जो भाग्य में होगा, वह देखा जाएगा।

धर्मराज युधिष्ठिर द्वारा कार्तिक कृष्ण एकादशी का नाम, इसकी विधि, उसका फल कैसे मिलता हैं यह मिलता है यह विस्तारपूर्वक बताइए। ऐसा पूछने पर भगवान श्रीकृष्ण बोले कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम रमा है। यह बड़े-बड़े पापों का नाश करने वाली है।

इस प्रकार से विचार कर शोभन ने व्रत रख लिया और वह भूख व प्यास से अत्यंत पीडि़त होने लगा। जब सूर्य नारायण अस्त हो गए और रात्रि को जागरण का समय आया जो वैष्णवों को अत्यंत हर्ष देने वाला था, परंतु शोभन के लिए अत्यंत दु:खदायी हुआ। प्रात:काल होते शोभन के प्राण निकल गए। तब राजा ने सुगंधित काष्ठ से उसका दाह संस्कार करवाया। परंतु चंद्रभागा ने अपने पिता की आज्ञा से अपने शरीर को दग्ध नहीं किया और शोभन की अंत्येष्टि क्रिया के बाद अपने पिता के घर में ही रहने लगी।

रमा एकादशी के प्रभाव से शोभन को मंदराचल पर्वत पर धन-धान्य से युक्त तथा शत्रुओं से रहित एक सुंदर देवपुर प्राप्त हुआ। वह अत्यंत सुंदर रत्न और वैदुर्यमणि जटित स्वर्ण के खंभों पर निर्मित अनेक प्रकार की स्फटिक मणियों से सुशोभित भवन में बहुमूल्य वस्त्राभूषणों तथा छत्र व चँवर से विभूषित, गंधर्व और अप्सराअओं से युक्त सिंहासन पर आरूढ़ ऐसा शोभायमान होता था मानो दूसरा इंद्र विराजमान हो।

एक समय मुचुकुंद नगर में रहने वाले एक सोम शर्मा नामक ब्राह्मण तीर्थयात्रा करता हुआ घूमता-घूमता उधर जा निकला और उसने शोभन को पहचान कर कि यह तो राजा का जमाई शोभन है, उसके निकट गया। शोभन भी उसे पहचान कर अपने आसन से उठकर उसके पास आया और प्रणामादि करके कुशल प्रश्न किया। ब्राह्मण ने कहा कि राजा मुचुकुंद और आपकी पत्नी कुशल से हैं। नगर में भी सब प्रकार से कुशल हैं, परंतु हे राजन! हमें आश्चर्य हो रहा है। आप अपना वृत्तांत कहिए कि ऐसा सुंदर नगर जो न कभी देखा, न सुना, आपको कैसे प्राप्त हुआ।

तब शोभन बोला कि कार्तिक कृष्ण की रमा एकादशी का व्रत करने से मुझे यह नगर प्राप्त हुआ, परंतु यह अस्थिर है। यह स्थिर हो जाए ऐसा उपाय कीजिए। ब्राह्मण कहने लगा कि हे राजन! यह स्थिर क्यों नहीं है और कैसे स्थिर हो सकता है आप बताइए, फिर मैं अवश्यमेव वह उपाय करूँगा। मेरी इस बात को आप मिथ्या न समझिए। शोभन ने कहा कि मैंने इस व्रत को श्रद्धारहित होकर किया है। अत: यह सब कुछ अस्थिर है। यदि आप मुचुकुंद की कन्या चंद्रभागा को यह सब वृत्तांत कहें तो यह स्थिर हो सकता है।

ऐसा सुनकर उस श्रेष्ठ ब्राह्मण ने अपने नगर लौटकर चंद्रभागा से सब वृत्तांत कह सुनाया। ब्राह्मण के वचन सुनकर चंद्रभागा बड़ी प्रसन्नता से ब्राह्मण से कहने लगी कि हे ब्राह्मण! ये सब बातें आपने प्रत्यक्ष देखी हैं या स्वप्न की बातें कर रहे हैं। ब्राह्मण कहने लगा कि हे पुत्री! मैंने महावन में तुम्हारे पति को प्रत्यक्ष देखा है। साथ ही किसी से विजय न हो ऐसा देवताओं के नगर के समान उनका नगर भी देखा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्थिर नहीं है। जिस प्रकार वह स्थिर रह सके सो उपाय करना चाहिए।

चंद्रभागा कहने लगी हे विप्र! तुम मुझे वहाँ ले चलो, मुझे पतिदेव के दर्शन की तीव्र लालसा है। मैं अपने किए हुए पुण्य से उस नगर को स्थिर बना दूँगी। आप ऐसा कार्य कीजिए जिससे उनका हमारा संयोग हो क्योंकि वियोगी को मिला देना महान पु्ण्य है। सोम शर्मा यह बात सुनकर चंद्रभागा को लेकर मंदराचल पर्वत के समीप वामदेव ऋषि के आश्रम पर गया। वामदेवजी ने सारी बात सुनकर वेद मंत्रों के उच्चारण से चंद्रभागा का अभिषेक कर दिया। तब ऋषि के मंत्र के प्रभाव और एकादशी के व्रत से चंद्रभागा का शरीर दिव्य हो गया और वह दिव्य गति को प्राप्त हुई।

इसके बाद बड़ी प्रसन्नता के साथ अपने पति के निकट गई। अपनी प्रिय पत्नी को आते देखकर शोभन अति प्रसन्न हुआ। और उसे बुलाकर अपनी बाईं तरफ बिठा लिया। चंद्रभागा कहने लगी कि हे प्राणनाथ! आप मेरे पुण्य को ग्रहण कीजिए। अपने पिता के घर जब मैं आठ वर्ष की थी तब से विधिपूर्वक एकादशी के व्रत को श्रद्धापूर्वक करती आ रही हूँ। इस पुण्य के प्रताप से आपका यह नगर स्थिर हो जाएगा तथा समस्त कर्मों से युक्त होकर प्रलय के अंत तक रहेगा। इस प्रकार चंद्रभागा ने दिव्य आभू‍षणों और वस्त्रों से सुसज्जित होकर अपने पति के साथ आनंदपूर्वक रहने लगी।

हे राजन! यह मैंने रमा एकादशी का माहात्म्य कहा है, जो मनुष्य इस व्रत को करते हैं, उनके ब्रह्म हत्यादि समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों की एका‍दशियाँ समान हैं, इनमें कोई भेदभाव नहीं है। दोनों समान फल देती हैं। जो मनुष्य इस माहात्म्य को पढ़ते अथवा सुनते हैं, वे समस्त पापों से छूटकर विष्णुलोक को प्राप्त होता हैं।

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Star भगवान कब याद आते हैं?
Posted by: Shorya Singh Kushwah - 11-11-2020, 08:30 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

भगवान कब याद आते हैं?

धर्मात्मा को हर समय !
पापी को मृत्यु के समय !
चोर को पकड़े जाने पर !
गरीब को भूख लगने पर !
धनी को बीमार हो जाने पर !
कंजूस को पैसा खो जाने पर !
किसान को वर्षा नहीं होने पर !
मुसाफिर को ट्रेन छूट जाने पर !
व्यापारी को नुकसान हो जाने पर !
राजनीतिज्ञ को चुनाव हार जाने पर !
अफसर को रिश्वत लेते समय पकड़े जाने पर !
विद्यार्थी को परीक्षा फल के समय !
सच्चे इंसान को पूरी दुनिया के साथ ईमानदारी के साथ व्यवहार करने के बाद भी धोखा मिलने पर !

लेकिन जो प्रभु के अत्यन्त सच्चे भक्त है उनको तो हर समय सुख में, दुख में,  सोते , जागते, उठते, बैठते,हर समय हर जगह प्रभु ही प्रभु याद आते हैं .....!!

लगन में रहिये हमेशा, मग्न रहिये अपने प्रभु की याद में।

जय श्रीराम 
जय हिंद

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Thumbs Up आख़िर तक हार न मानने वाले एक दिन जीत ही जाते हैं।
Posted by: Shorya Singh Kushwah - 11-11-2020, 08:29 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

आख़िर तक हार न मानने वाले एक दिन जीत ही जाते हैं।
                                                                                                   
बाइडन 7 नवम्बर 1972 को पहली बार अमेरिकी सीनेट के लिए चुने गए थे।
आज 48 साल बाद 7 नवम्बर 2020 के दिन पहली बार राष्ट्रपति बने।

आज जब बाइडन राष्ट्रपति पद के लिए चुने गए हैं तब उनकी उम्र 78 वर्ष है, वो अमेरिकी इतिहास के सबसे जवान सीनेटर बने थे और सबसे बूढ़े राष्ट्रपति बने हैं।

आम भारतीयों को इससे कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता कि अमेरिका का राष्ट्रपति कोई डेमोक्रेट बनता है या रिपब्लिकन लेकिन इस बात से ज़रूर फ़र्क़ पड़ता है कि दुनिया में कुछ भी सम्भव है या कहा जाए कि सब कुछ सम्भव है। ट्रम्प पिछली बार राष्ट्रपति बनने के सिर्फ़ एक साल पहले राजनीति में आए थे और बाइडन पिछले 48 साल से राजनीति में हैं लेकिन राष्ट्रपति बने वो अब जाकर।

इस बीच एक और बात जो जानने योग्य है वो ये कि बाइडन का बेटा राष्ट्रपति पद का तगड़ा उम्मीदवार माना जाने लगा था लेकिन 46 वर्ष की उम्र में उसकी मौत हो गयी और अपने बेटे का अधूरा सपना पूरा करने के लिए जो बाइडन देश के 46 वें राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं।

तो कुल मिलाकर ऐसा है कि दुनिया में सब कुछ सम्भव है, और आख़िर तक हार न मानने वाले एक दिन जीत ही जाते हैं।

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Thumbs Up दिवाली के दिन लक्ष्मीजी का कौनसा चित्र लगाकर पूजा करें??
Posted by: admin - 11-09-2020, 03:19 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

दिवाली के दिन लक्ष्मीजी का कौनसा चित्र लगाकर पूजा करें?

⭕दीपावली पर माता लक्ष्मी का कौनसा चित्र लगाना चाहिए यह सभी के मन में सवाल होगा तो आओ जानते हैं कि दिवाली पर माता लक्ष्मी के पूजन हेतु कौसा चित्र लगाकर उनकी पूजा करना शुभ होता है।

⚜️ऐसे चित्र ना लगाएं :-

माता लक्ष्मी को चित्र में उल्लू, हाथी या कमल पर विराजमान बताया जाता है। उल्लू पर बैठी हुई मां लक्ष्मी का चित्र पूजन में रखने से लक्ष्मी नकारात्मकता लेकर आती है। क्योंकि उल्लू वाहन से आई लक्ष्मी गलत दिशा से आने और जाने वाले धन की ओर इशारा करती हैं। इसलिए उल्लू पर लक्ष्मी का आना उतना शुभ नहीं होता।

?जिस चित्र या तस्वीर में अकेली लक्ष्मी हो ऐसा चित्र भी पूजा हेतु दीपावली के दिन नहीं लगाएं। मान्यता अनुसार अकेली लक्ष्मी मां के चित्र का पूजन करने की अपेक्षा गणेश व सरस्वती के साथ उनका पूजन अति कल्याणकारी होता है।

⚜️ऐसे चित्र लगाएं :-

लक्ष्मी जी का वह चित्र जिसमें वे उनके एक ओर श्रीगणेश और दूसरी ओर सरस्वती हो तथा माता लक्ष्मी दोनों हाथों से धन बरसा रही हों, धन प्राप्ति के लिए बहुत शुभ होता है। यदि बैठी हुई लक्ष्मी माता के चित्र ला रहे हैं तो लक्ष्मी मां का वह चित्र लेकर आएं, जिसमें कमल के आसन पर बैठी हुई हों और उनके आसमान सुंड उठाए हाथी हों। इस तरह के चित्र का पूजन करने से मां लक्ष्मी सदैव आपके घर में विराजमान रहेंगी। चित्र में माता लक्ष्मी के पैर दिखाई नहीं देते हों अन्यथा लक्ष्मी घर में लंबे समय तक नहीं टिकती। इसलिए बैठी हुई लक्ष्मी को ही सर्वश्रेृष्ठ माना गया है।

चित्र में मां लक्ष्मी के साथ अगर ऐरावत हाथी भी है, तो वह अद्भुत और शुभ फलों को प्रदान करेगा। कुछ तस्वीरों में लक्ष्मी मां के दोनों ओर दो हाथी बहते पानी में खड़े होते हैं और सिक्कों की बारिश करते हैं। इस तरह का चित्र पूजने से किसी भी स्थिति में घर में धन की कमी नहीं होती। इसके अलावा यदि सूंड में कलश लिए हुए हाथी भी खड़े हों तो शुभ माना जाता है।

भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मी के चित्र हो तो आप उसकी पूजा भी कर सकते हैं। नारायण को आमंत्रित करके मां लक्ष्मी को घर में विराजित किया जाता है। भगवान विष्णु के साथ घर में पधारने वाली मां लक्ष्मी गरुड़ वाहन पर आती हैं, जो कि बेहद शुभ और कल्याणकारी होता है। इस प्रकार घर में आया हुआ धन सदैव कल्याण करता है।

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Star मधुररात्री
Posted by: admin - 11-09-2020, 03:17 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

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                              मधुररात्री 

  एक सेठ जी ने अपने छोटे भाई को तीन लाख रूपये व्यापार के लिये दिये। उसका व्यापार बहुत अच्छा जम गया, लेकिन उसने रूपये बड़े भाई को वापस नहीं लौटाये।
    आखिर दोनों में झगड़ा हो गया, झगड़ा भी इस सीमा तक बढ़ गया कि दोनों का एक दूसरे के यहाँ आना जाना बिल्कुल बंद हो गया। घृणा व द्वेष का आंतरिक संबंध अत्यंत गहरा हो गया। सेठ जी, हर समय हर संबंधी के सामने अपने छोटे भाई की निंदा-निरादर व आलोचना करने लगे।
      सेठ जी अच्छे साधक भी थे, लेकिन इस कारण उनकी साधना लड़खड़ाने लगी। भजन पूजन के समय भी उन्हें छोटे भाई का चिंतन होने लगा। मानसिक व्यथा का प्रभाव तन पर भी पड़ने लगा। बेचैनी बढ़ गयी। समाधान नहीं मिल रहा था। आखिर वे एक संत के पास गये और अपनी व्यथा सुनायी।
    संतश्री ने कहाः- 'बेटा ! तू चिंता मत कर। ईश्वरकृपा से सब ठीक हो जायेगा। तुम कुछ फल व मिठाइयाँ लेकर छोटे भाई के यहाँ जाना और मिलते ही उससे केवल इतना कहना, 'अनुज ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे "क्षमा" कर दो।'
    सेठ जी ने कहाः- "महाराज ! मैंने ही उनकी मदद की है और "क्षमा" भी मैं ही माँगू !"
    संतश्री ने उत्तर दियाः- "परिवार में ऐसा कोई भी संघर्ष नहीं हो सकता, जिसमें दोनों पक्षों की गलती न हो। चाहे एक पक्ष की भूल एक प्रतिशत हो दूसरे पक्ष की निन्यानवे प्रतिशत, पर भूल दोनों तरफ से होगी।"
    सेठ जी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था। उसने कहाः- "महाराज ! मुझसे क्या भूल हुई ?"
    "बेटा ! तुमने मन ही मन अपने छोटे भाई को बुरा समझा– यही है तुम्हारी पहली भूल।
      तुमने उसकी निंदा, आलोचना व तिरस्कार किया– यह है तुम्हारी दूसरी भूल।
    क्रोध पूर्ण आँखों से उसके दोषों को देखा– यह है तुम्हारी तीसरी भूल।
      अपने कानों से उसकी निंदा सुनी– यह है तुम्हारी चौथी भूल।
      तुम्हारे हृदय में छोटे भाई के प्रति क्रोध व घृणा है– यह है तुम्हारी आखिरी भूल।
    अपनी इन भूलों से तुमने अपने छोटे भाई को दुःख दिया है। तुम्हारा दिया दुःख ही कई गुना हो तुम्हारे पास लौटा है। जाओ, अपनी भूलों के लिए "क्षमा" माँगों। नहीं तो तुम न चैन से जी सकोगे, न चैन से मर सकोगे। क्षमा माँगना बहुत बड़ी साधना है। ओर तुम तो एक बहुत अच्छे साधक हो।"
    सेठ जी की आँखें खुल गयीं। संतश्री को प्रणाम करके वे छोटे भाई के घर पहुँचे। सब लोग भोजन की तैयारी में थे। उन्होंने दरवाजा खटखटाया। दरवाजा उनके भतीजे ने खोला। सामने ताऊ जी को देखकर वह अवाक् सा रह गया और खुशी से झूमकर जोर-जोर से चिल्लाने लगाः "मम्मी ! पापा !! देखो कौन आये ! ताऊ जी आये हैं, ताऊ जी आये हैं....।"
    माता-पिता ने दरवाजे की तरफ देखा। सोचा, 'कहीं हम सपना तो नहीं देख रहे !' छोटा भाई हर्ष से पुलकित हो उठा, 'अहा ! पन्द्रह वर्ष के बाद आज बड़े भैया घर पर आये हैं।' प्रेम से गला रूँध गया, कुछ बोल न सका। सेठ जी ने फल व मिठाइयाँ टेबल पर रखीं और दोनों हाथ जोड़कर छोटे भाई को कहाः- "भाई ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे क्षमा करो ।"
    "क्षमा" शब्द निकलते ही उनके हृदय का प्रेम अश्रु बनकर बहने लगा। छोटा भाई उनके चरणों में गिर गया और अपनी भूल के लिए रो-रोकर क्षमा याचना करने लगा। बड़े भाई के प्रेमाश्रु छोटे भाई की पीठ पर और छोटी भाई के पश्चाताप व प्रेममिश्रित अश्रु बड़े भाई के चरणों में गिरने लगे।
    क्षमा व प्रेम का अथाह सागर फूट पड़ा। सब शांत, चुप, सबकी आँखों से अविरल अश्रुधारा बहने लगी। छोटा भाई उठ कर गया और रूपये लाकर बडे भाई के सामने रख दिये। बडे भाई ने कहा "भाई! आज मैं इन कौड़ियों को लेने के लिए नहीं आया हूँ। मैं अपनी भूल मिटाने, अपनी साधना को सजीव बनाने और द्वेष का नाश करके प्रेम की गंगा बहाने आया हूँ ।
    मेरा आना सफल हो गया, मेरा दुःख मिट गया। अब मुझे आनंद का एहसास हो रहा है।"
    छोटे भाई ने कहाः- "भैया ! जब तक आप ये रूपये नहीं लेंगे तब तक मेरे हृदय की तपन नहीं मिटेगी। कृपा करके आप ये रूपये ले लें।
    सेठ जी ने छोटे भाई से रूपये लिये और अपने इच्छानुसार अनुज बधू , भतीजे व भतीजी में बाँट दिये । सब कार में बैठे, घर पहुँचे।
      पन्द्रह वर्ष बाद उस अर्धरात्रि में जब पूरे परिवार, का मिलन हुआ तो ऐसा लग रहा था कि मानो साक्षात् प्रेम ही शरीर धारण किये वहाँ पहुँच गया हो।
    सारा परिवार प्रेम के अथाह सागर में मस्त हो रहा था। "क्षमा" माँगने के बाद उस सेठ जी के दुःख, चिंता, तनाव, भय, निराशारूपी मानसिक रोग जड़ से ही मिट गये और साधना सजीव हो उठी।
    हमें भी अपने दिल में "क्षमा" रखनी चाहिए अपने सामने छोटा हो या बडा अपनी गलती हो या ना हो क्षमा मांग लेने से सब झगडे समाप्त हो जाते है।

मेरी भूलो के लिये मैं क्षमाप्रार्थी हूँ
  जय श्री कृष्ण??
*─⊱━━━━⊱(राधे राधे)⊰━━━━━⊰─

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Star ज्ञानार्जन: हंस और कौवा
Posted by: admin - 11-09-2020, 03:13 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

ज्ञानार्जन

      !! हंस और कौवा !!

एक समय एक गांव में दो ब्राह्मण पुत्र रहते थे । एक गरीब था, दूसरा अमीर । दोनों पड़ोसी थे। गरीब ब्राम्हण की पत्नी उसे रोज ताने देती, झगड़ती ।

एक दिन ग्यारस के दिन गरीब ब्राह्मण पुत्र रोज-रोज की कलह से तंग आकर जंगल की ओर चल पड़ता है,
"ये सोचकर कि जंगल में शेर या कोई मांसाहारी जीव उसे मारकर खा जाएगा, उस जीव का पेट भर जाएगा और मरने से वह रोज की झिक-झिक से भी मुक्त हो जाएगा ।"

जंगल में पहुंचते ही उसे एक गुफा दिखाई देती है । वह गुफा की तरफ जाता है । गुफा में एक शेर सोया होता है, और शेर की नींद में खलल न पड़े, इसके लिए हंस का पहरा होता है ।

हंस जब दूर से ब्राह्मण पुत्र को आता देखता है, तो चिंता में पड़कर सोचता है,
"ये ब्राह्मण आएगा, शेर की नींद में व्यवधान पैदा होगा, वह क्रोध में उठेगा और इसे मारकर खा जाएगा । ग्यारस के दिन मुझे पाप लगेगा । इसे कैसे बचाया जाए...??"

हंस को एक उपाय सूझता है और वह शेर के भाग्य की तारीफ करते हुए कहता है,
"ओ जंगल के राजा, उठो, जागो, आज आपके भाग्य खुल गए हैं । देखो ग्यारस के दिन खुद विप्रदेव आपके घर पधारे हैं, जल्दी उठें और इन्हें दक्षिणा देकर विदा करें, आपका मोक्ष हो जाएगा, आपको पशु योनि से मुक्ति मिल जाएगी । ये दिन दुबारा आपकी जिंदगी में फिर कभी नहीं आएगा..!"

शेर दहाड़ मारकर उठता है । हंस की बात उसे सही लगती है और पूर्व में शिकार किए गए मनुष्यों के गहने वह ब्राह्मण के पैरों में रखकर अपना शीश नवाता है, जीभ से उसके पैर चाटकर उसका अभिवादन करता है ।

हंस ब्राह्मण को इशारा करता है, "विप्रदेव ये सब गहने, सोना-चांदी उठाओ और जितनी जल्दी हो सके वापस अपने घर चले जाओ । ये सिंह है, पता नहीं कब इसका मन बदल जाए..!"

ब्राह्मण हंस के इशारे को समझ जाता है और तुरंत घर लौट जाता है । उधर पड़ोसी अमीर ब्राह्मण की पत्नी को जब यह सब पता चलता है, तो वह भी अपने पति को जबरदस्ती अगली ग्यारस के दिन जंगल में उसी शेर की गुफा की ओर भेजती है ।

अब शेर का पहरेदार बदल गया है...नया पहरेदार होता है... "कौवा"

कौवे की जैसी प्रवृति होती है, वह सोचता है, "बहुत बढ़िया है, ब्राह्मण आया है, शेर को जगा दूं । शेर की नींद में खलल पड़ेगी, वह क्रोधित होगा, ब्राह्मण को मारेगा, तो कुछ मेरे भी हाथ लगेगा, मेरा भी पेट भर जाएगा ।"

यह सोचकर वह कांव... कांव... कांव... चिल्लाने लगता है ।
शेर अत्यंत क्रोधित होकर उठता है । दूसरे ब्राह्मण पर उसकी नजर पड़ती है । परंतु उसे हंस की बात याद आ जाती है । वह समझ जाता है, कौवा क्यों कांव... कांव...कर रहा है ।

वह अपने, हंस के कहने पर पहले किए गए धर्म-कर्म को खत्म नहीं करना चाहता । पर फिर भी शेर, शेर होता है, जंगल का राजा । वह दहाड़ कर ब्राह्मण को कहता है, "हंस उड़ सरवर गए और अब काग भये कोतवाल, रे तो विप्रा थारे घरे जाओ, मैं किनाइनी जजमान..!"

अर्थात, हंस जो अच्छी सोच वाले थे, अच्छी मनोवृत्ति वाले थे, वह उड़कर सरोवर चले गए, अब कौवा कोतवाल पहरेदार है, जो मुझे तुम्हें मारकर खा जाने के लिए उकसा रहा है । मेरी बुध्दि फिर जाए, उससे पहले ही हे ब्राह्मण, तुम यहां से चले जाओ, शेर किसी का जजमान नहीं होता, वह तो हंस था, जिसने मुझ शेर से भी पुण्य कर्म करवा दिया ।"

दूसरा ब्राह्मण सारी बात समझ जाता है और ड़र के मारे तुरंत प्राण बचाकर अपने घर की ओर भाग जाता है ।

कहने का तात्पर्य यह है कि हंस और कौवा कोई और नहीं, हमारे यानि आदमी के ही दो चरित्र हैं ।

हममें से जब कोई किसी का दु:ख देख दु:खी होता है, और उसका भला सोचता है, तब वह हंस होता है । और जो किसी को दु:खी देखना चाहता है, किसी का सुख जिसे सहन नहीं होता, वह कौवा है ।

जो आपस में मिल-जुलकर, भाईचारे से रहना चाहते हैं, वे हंस प्रवृत्ति के हैं ।
जो झगड़ा करके, कलह करके एक-दूसरे को मारने, लूटने, प्रताड़ित करने की प्रवृत्ति रखते हैं, वे कौवे की प्रवृति के होते हैं ।

अपने आस-पास छुपे बैठे कौवों को पहचानो, उनसे दूर रहो और जो हंस प्रवृत्ति के हैं, उनका साथ करो, उनकी संगति करो, इसी में हम सब का कल्याण निहित है ।


धन्यवाद..!

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Smile दिल को छू लेने वाला संदेश जरूर पढें...
Posted by: admin - 11-09-2020, 03:12 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

दिल को छू लेने वाला संदेश जरूर पढें...

पत्नी
ICU में थी..

पति
असमर्थ था,,
अपने आँसू को नियंत्रित करने कर पाने में...

चिकित्सक:
हम हैं..
हमारे सर्वश्रेष्ठ प्रयास के लिये
परंतु कुछ भी गारंटी नहीं दे सकते।

उसका शरीर
प्रतिक्रिया नहीं कर रहा है...
ऐसा लगता है कि वह कोमा में है..
.
.
पति: प्लीज डा०...
उसे बचा ली लीजिए...
उसकी उम्र ही क्या है...
अभी सिर्फ 31 साल की है..
एक बच्चा है हमारा..
परिवार को जरूरत है उसकी...
.
हमारे सपने, जो हमने साथ मिल के देखे,,, बोलते बोलते उसका गला भर आया...
.
.
.
.
.
.
.
अचानक से कुछ हुआ,
चमत्कारिक ढंग से...

ईसीजी में हरकत सी हुई...

उसके हाथ हिलने लगे,,,,

उसके होंठ कांपने लगे,,

हल्के से आंखे खोली ,,,

और धीरे से बुदबुदाई,,,,








"मैं 29 की हूँ..."
?????
  Wish u all a happy karwa chauth day




करवा चौथ की इससे बेहतर शुभकामनाएं नहीं हो सकती:-

श्रीरामचरित मानस की चौपाई...

अचल होउ अहिवातु तुम्हारा।
जब लगि गंग जमुन जल धारा॥

भावार्थ:- जब तक गंगाजी और यमुनाजी में जल की धारा बहे, तब तक तुम्हारा सुहाग अचल रहे।।
सभी को सपरिवार करवा चौथ व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं।।
नर्मदे हर
ज़िन्दगी भर ???



मंदी का करवा-चौथ

मेरे एक मित्र पुनीत कुमार जी को फ्लैट बेचने वाली कंपनी की सेल्स गर्ल के लगातार फ्लैट खरीदने के फोन आ रहे थे।तो उन्होंने टालने के हिसाब से बोल दिया कि आज रात ७-८ बजे के बीच आ जाऊंगा, हुआ यों कि उसी दिन करवा चौथ का दिन पड़ गया था।उसके बाद उनके घर से फोन आया कि आते समय बाजार से छलनी लेते आना , ऑफिस छूटने के बाद मित्र बाजार गये और एक छलनी खरीदी , मंदी के कारण एक छलनी पर एक छलनी  मुफ्त (free) में मिल रही थी । मित्र दोनों छलनी लेकर करीब ७:३० पर घर पहुंचे और फ्रेश होने चले गए। भाभी जी ने झोला चेक किया तो उनको दो छलनी दिखी तो उनका माथा ठनका।
तभी उस सेल्स गर्ल का फोन आ गया ,जिसे भाभी जी ने उठाया, तो वो बोली , "सर आपने वादा किया था कि आप आठ बजे तक आएंगे?" " मैं कब से तैयार होकर आपका इंतज़ार कर रही हूं।"

उसके बाद की घटना बताने लायक नहीं है

???????
Happy karwa Chouth






यदि आप चंद्रमा को देखते हैं तो आप ईश्वर के सौंदर्य को देखते हैं, यदि आप सूर्य को देखते हैं, तो आप ईश्वर की शक्ति को देखते हैं और यदि आप दर्पण को देखते हैं तो आप भगवान की सर्वश्रेष्ठ
रचना को देखते हैं इसलिए अपने पर विश्वास करे की दुनिया के सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति आप ही हैं आप हैं तो दुनिया है परंतु उसका अहंकार नहीं जीवन प्रभु का प्रसाद है  इस दृष्टि से देखना चाहिए
 
जय श्री कृष्णा


गिले-शिकवों का भी कोई अंत नहीं साहिब..!

पत्थरों को शिकायत ये कि पानी की मार से टूट रहे हैं हम

और पानी का गिला ये है कि पत्थर हमें खुलकर बहने नहीं देते
    ???  सुप्रभात ???



लोगों को इज्जत देना ओर उन्हें माफ कर देना ये दोनो कमजोरी अगर आप के अंदर है,

तो आप इस दुनिया के  सबसे ताकतवर इन्सान हो....!!!

जय श्री कृष्ण?

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Star जीवन मंत्र
Posted by: admin - 11-09-2020, 03:03 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

जीवन मंत्र

✹ दरिद्रता के कारण ✹
✹ सुबह देरी से उठाना ।
✹ बिना नहाये धोये खाना ।
✹ मैले कपडे पहने रहना ।
✹ बालों को सवारना नही ।
✹ घर में मकड़ी के जाले लगे रहना ।
✹ शाम को घर मे अंधेरा रखना ।
✹ दांतो से नाख़ून को काटना ।
✹ घर मे बात बात पर झगड़ना ।
✹ बाएं पैर से पैंट पहना ।
✹ मेहमान आने पर नाराज होना।
✹ आमदनी से ज्यादा खर्च करना।
✹ रोटी काट कर खाना।
✹ चालीस दिन से ज्यादा बाल रखना ।
✹ पीने का पानी रात में खुला रखना
✹ रात में मागने वाले को कुछ ना देना
✹ बुरे ख्याल लाना।
✹ पवित्रता के बगैर धर्मग्रंथ पढना।
✹ शौच करते वक्त बाते करना।
✹ हाथ धोए बगैर भोजन करना ।
✹ अपनी औलाद को कोसना।
✹ दरवाजे पर बैठना।
✹ लहसुन प्याज के छिलके जलाना।
✹ साधू फकीर को अपमानित करना ।
✹ फूंक मार के दीपक बुझाना।
✹ ईश्वर को धन्यवाद किए बगैर भोजन करना
✹ झूठी कसम खाना।
✹ जूते चप्पल उल्टा देख करउसको सीधा नही करना।

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Star जिन्दगी रहे ना रहे, जीवित रहने का स्वाभिमान जरूरी है।
Posted by: admin - 11-09-2020, 02:59 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

बात बात में मां बाप का टोकना हमें अखरता है । हम भीतर ही भीतर झल्लाते है कि कब इनके टोकने की आदत से हमारा पीछा जुटेगा । लेकिन हम ये भूल जाते है कि उनके टोकने से जो संस्कार हम  ग्रहण कर रहे हैं, उनकी जीवन में क्या अहमियत है । इसी पर एक लेख किसी भाई ने भेजा है, जिसे मैं आगे शेयर करने से अपने आप को रोक नहीं पाया ।

साक्षात्कार

बड़ी दौड़ धूप के बाद ,
मैं  आज एक ऑफिस में  पहुंचा,
आज मेरा पहला इंटरव्यू था ,
घर से निकलते हुए मैं  सोच रहा था,
काश ! इंटरव्यू में आज
कामयाब हो गया , तो अपने
पुश्तैनी मकान को अलविदा
कहकर यहीं शहर में सेटल हो जाऊंगा, मम्मी पापा की रोज़ की
चिक चिक, मग़जमारी से छुटकारा मिल जायेगा।

सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक होने वाली चिक चिक  से परेशान हो गया हूँ।

जब सो कर उठो , तो पहले
बिस्तर ठीक करो ,
फिर बाथरूम जाओ,
बाथरूम से निकलो तो फरमान जारी होता है
नल बंद कर दिया?
तौलिया सही जगह रखा या यूँ ही फेंक दिया?
नाश्ता करके घर से निकलो तो डांट पडती है
पंखा बंद किया या चल रहा है?
क्या - क्या सुनें यार ,
नौकरी मिले तो घर छोड़ दूंगा..

वहाँ उस ऑफिस में बहुत सारे उम्मीदवार बैठे थे, बॉस का इंतज़ार कर रहे थे।
दस बज गए।

मैने देखा वहाँ आफिस में बरामदे की बत्ती अभी तक जल रही है ,
माँ याद आ गई , तो मैने बत्ती बुझा दी।

ऑफिस में रखे वाटर कूलर से पानी टपक रहा था ,
पापा की डांट याद आ गयी, तो पानी बन्द कर दिया।

बोर्ड पर लिखा था, इंटरव्यू दूसरी मंज़िल पर होगा।

सीढ़ी की लाइट भी जल रही थी , बंद करके आगे बढ़ा ,
तो एक कुर्सी रास्ते में थी, उसे हटाकर ऊपर गया।

?देखा पहले से मौजूद उम्मीदवार जाते और फ़ौरन बाहर आते,
पता किया तो मालूम हुआ बॉस
फाइल लेकर कुछ पूछते नहीं,
वापस भेज देते हैं ।?

नंबर आने पर मैने फाइल
मैनेजर की तरफ बढ़ा दी ।
कागज़ात पर नज़र दौडाने के बाद उन्होंने कहा
"कब ज्वाइन कर रहे हो?"

उनके सवाल से मुझे यूँ लगा जैसे
मज़ाक़ हो,
वो मेरा चेहरा देखकर कहने लगे, ये मज़ाक़ नहीं हक़ीक़त है।

आज के इंटरव्यू में किसी से कुछ पूछा ही नहीं,
सिर्फ CCTV में सबका बर्ताव देखा ,
सब आये लेकिन किसी ने नल या लाइट बंद नहीं किया।

धन्य हैं तुम्हारे माँ बाप, जिन्होंने तुम्हारी इतनी अच्छी परवरिश की और अच्छे संस्कार दिए।

जिस इंसान के पास Self discipline नहीं वो चाहे कितना भी होशियार और चालाक हो , मैनेजमेंट और ज़िन्दगी की दौड़ धूप में कामयाब नहीं हो सकता।

घर पहुंचकर मम्मी पापा को गले लगाया और उनसे माफ़ी मांगकर उनका शुक्रिया अदा किया।

अपनी ज़िन्दगी की आजमाइश में उनकी छोटी छोटी बातों पर रोकने और टोकने से , मुझे जो सबक़ हासिल हुआ , उसके मुक़ाबले , मेरे डिग्री की कोई हैसियत नहीं थी और पता चला ज़िन्दगी के मुक़ाबले में सिर्फ पढ़ाई लिखाई ही नहीं , तहज़ीब और संस्कार का भी अपना मक़ाम है...

संसार में जीने के लिए संस्कार  जरूरी है।
संस्कार के  लिए मां  बाप का सम्मान  जरूरी है।

जिन्दगी रहे ना रहे, जीवित रहने का स्वाभिमान जरूरी है।

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Star गाय की पूरी शारीरिक संरचना विज्ञान पर आधारित है; जानें कैसे
Posted by: admin - 11-09-2020, 02:52 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

गाय की पूरी शारीरिक संरचना विज्ञान पर आधारित है; जानें कैसे

हम बीमार क्यों होते हैं इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि हमारा शरीर पंचभूतों से निर्मित है। मानव के अतिरिक्त मानव उपयोगी समस्त जीवों का भी शरीर भी पंचभूतों से ही निर्मित है । वर्तमान चिकित्सा पद्धतियाँ आज के समय रासायनिक तरीकों से चिकित्सा करती हैं , उन्हें पंचभूत को संतुलित करने का कोई ज्ञान नहीं है । आज के समय मानव निर्मित सारे पंचभूत चाहे वह मिट्टी हो , जल हो , वायु हो , अग्नि हो या आकाश हो सब कुछ दूषित हो चुका है ।

हमारे महान ऋषि-मुनियों की प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों में पंचभूतो को ध्यान में रखकर चिकित्सा की जाती थी । हमें हमारे वातावरण के अनुरूप आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का ज्ञान हमारे ऋषि-मुनियों से मिला जो मानव की नाड़ी देखकर यह ज्ञात कर लेते थे कि हमारे शरीर का कौन सा पंचभूत असंतुलित है और उसके अनुरूप ही वो चिकित्सा करते थे ।

विश्व में यदि कहीं भी चिकित्सा का ज्ञान सर्वप्रथम उद्भव हुआ तो वह हमारा देश आर्याव्रत भारत वर्ष ही है । सर्वप्रथम पूरे विश्व को ज्ञान हमारे महान ऋषि-मुनियों ने दिया चाहे वह अध्यात्मिक क्षेत्र हो या आयुर्वेदिक  का क्षेत्र हो ।  यदि  किसी भी व्यक्ति ज्ञान ना हो तो वह व्यक्ति उस ज्ञान को जानने का प्रयास करता है लेकिन यहाँ उल्टा हुआ। अनेक विदेशी लुटेरों ने हमारे ज्ञान को लूटा और हमारे अस्तित्व को मिटाने के लिए उसमे आग लगा दी । वर्षों तक हमारे ज्ञानपीठ गुरुकुल तक्षशिला की पुस्तके आग में धू-धू करके जलती रही , इतना ही नहीं बचा खुचा ज्ञान भी हमारी संस्कृति को भी नष्ट करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है ।

अब प्रश्न यह उठता है जिस धरती को हम अपनी माँ मानते हैं उस धरती पर प्रतिदिन लाखों लीटर रासायनिक जहर डाला जा रहा है ..? ऐसा क्यों…?  विदेशों से प्रतिवर्ष अरबों टन कचरे को लाकर हमारी धरती पर को मरुस्थल बनाया जा रहा है । क्या हमारी यही संस्कृति है कि हम अपनी माँ को जहर दें , उसे कूड़ाघर बनाकर दूषित कर दें। हमारे देव तत्व जल , अग्नि , वायु और आकाश सब कुछ दूषित हो चुके हैं ।

पूरी नदियों में उद्योंगो  के कचरे को डालकर गंदे नाले के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है । वायु में असंख्य कीटनाशक रसायन , रेडियोएक्टिव पदार्थ डालकर वायु को दूषित किया जा रहा है । रेडियोएक्टिव तरंगो द्वारा आकाश तत्व को दूषित किया जा रहा है । हमारे शास्त्रों में लिखा है अनावश्यक रूप से अग्नि का प्रयोग ना करें , लेकिन चाहे हमें बीडी -सिगरेट जलाना हो या बड़े-बड़े उद्योग कारखाने चलाने हो , आवश्यकता हो या ना हो हमेशा अग्नि को जलाया जाता है ।

इन सब तमाम बातों का हमारे स्वास्थ्य और चिकित्सा से गहरा सम्बन्ध है , हमारी संस्कृति और सभ्यता में जहाँ प्रकृति के संतुलन की बात कही गयी है वहीँ आज बिना कारण के भी दुरुपयोग करके पंचभूतों को दूषित किया जा रहा है । आज इस दूषित पंचभूत को ठीक करना मानव के बस की बात नहीं है फिर कौन करेगा इसे सही…?

यह जिम्मेदारी हमसे अधिक सरकार की है लेकिन सरकार तो अंग्रेजी उपभोगों की आदी है उसको हमारे स्वास्थ्य से कुछ मतलब नहीं …

यदि हमें स्वस्थ्य रहना है तो इस ओर हमें ही ध्यान देना होगा । इस सृष्टि में पंचभूतों को शुद्ध करने का एक ही विकल्प है वह है गौ-माता , लेकिन सरकार ने गौ को भी बचाने का कोई प्रयास नहीं किया है इसको बचाने का कार्य हमें करना होगा अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब मानव का अस्तित्व खतरे में पड़ जायेगा ।

मानव को विमारियों से बचने के लिए 21% आक्सीजन की जरुरत है । यदि शरीर में आक्सीजन की कमी हो जाती है तो कैंसर होता है । आजकल शहरों में बढ़ते प्रदूषण के कारण 14 -15 % से अधिक आक्सीजन नहीं मिलता है जिसके कारण शरीर को ना तो पूरा आक्सीजन मिलता है और ना ही शुद्ध रक्त । शरीर की कोशिकाएं तीव्रता से मरती हैं , जिनको पुनर्जीवित करना असंभव है ।

गाय की पूरी शारीरिक संरचना विज्ञान पर आधारित है । गाय से उत्सर्जित एक-एक पदार्थ में ब्रह्म उर्जा , विष्णु उर्जा और शिव उर्जा भरी हुई है । गाय को आप कितने ही प्रदूषित वातावरण में रख दीजिये या कितना ही प्रदूषित जल या भोजन करा दीजिये गाय उस जहर रूपी प्रदूषण को दूध , दही , गोबर , गौ-मूत्र , या साँस के रूप में कभी बाहर नहीं उत्सर्जित करती है बल्कि गाय उसे अपने शरीर में ही धारण कर लेती है । आपको जो भी देगी विशुद्ध देगी ।

गाय का गोबर : – गाय के गोबर में 23 % आक्सीजन की मात्रा होती है । गाय के गोबर से बनी भस्म में 45 % आक्सीजन की मात्रा मिलती है । गाय के गोबर में मिट्टी तत्व है यदि आपको परिक्षण के लिए शुद्ध मिट्टी चाहिए तो गाय के गोबर से शुद्ध मिट्टी तत्व का उदहारण आपको कही नहीं मिलेगा । आक्सीजन भी भरपूर है यानि गोबर से ही वायु तत्व की पूर्ति हो रही है ।

* यह ध्यान रखें कि गाय के गोबर की भस्म बनाने का एक तरीका है , तभी आपको परिष्कृत शुद्ध आक्सीजन तथा पूर्ण तत्व मिल पायेगा । गाय के गोबर की भस्म मकर संक्रांति के बाद बनायीं जाती है ।

गाय का दूध :- गाय के दूध में अग्नि तत्व है । तथा इस दूध के भीतर 85 % जल तत्व है ।

गाय की दही : – गाय की दही में 60 % जल तत्व है । गाय की छाछ गाय के दूध से 400 गुना ज्यादा लाभकारी है । इसलिए गाय के छाछ को अमृत कहा जाता है । इसमें इतने अधिक पोषक तत्व होते हैं कि आप सोच भी नहीं सकते है ।

छाछ बनाने की अलग-अलग विधियाँ है। छाछ को किस जलवायु में कितनी मात्रा में पानी मिलाकर बनाना है इसका अलग-अलग तरीका है । तभी यह पूरा लाभ प्रदान करती है ।

गाय का मक्खन घी : – गाय के मक्खन में 40% जल तत्व है । मक्खन अद्भुत है इसके अन्दर भरपूर ब्रह्म उर्जा होती है । ब्रह्म उर्जा के बिना मानव के अन्दर सत्वगुण नहीं आते हैं । विना सत्वगुण के सवेदनशीलता शून्य हो जाती है । मान लीजिये किसी ने गुंडेगर्दी से आपके गाल पर थप्पड़ मार दिया तो आपके अन्दर यदि संवेदनशीलता नहीं है तो आप वर्दास्त कर लेंगे अन्यथा आप उस थप्पड़ का जरुर जबाब देंगे ।
आज बाजार में बटरआयल चल रहा यानि दूध से निकाली गयी क्रीम का आयल जो आपके भीतर संवेदनशीलता ख़त्म कर रहा है । भगवान् श्री कृष्ण ने मक्खन के कारण ही इतनी आसुरी शक्तियों का नाश किया ।
जय गौ माता की

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Star ।।यही जीवन है।।
Posted by: admin - 11-09-2020, 02:47 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

।।यही जीवन है।।

कुछ लोग अपनी पढाई 22 साल की उम्र में पुर्ण कर लेते हैं मगर उनको कई सालों तक कोई अच्छी नौकरी नहीं मिलती,

कुछ लोग 25 साल की उम्र में किसी कंपनी के सीईओ बन जाते हैं और 50 साल की उम्र में हमें पता चलता है वह नहीं रहे,

जबकि कुछ लोग 50 साल की उम्र में सीईओ बनते हैं और 90 साल तक आनंदित रहते हैं,

बेहतरीन रोज़गार होने के बावजूद कुछ लोग अभी तक ग़ैर शादीशुदा है और कुछ लोग बग़ैर रोज़गार के भी शादी कर चुके हैं और रोज़गार वालों से ज़्यादा खुश हैं,

बराक ओबामा 55 साल की उम्र में रिटायर हो गये जबकि ट्रंप 70 साल की उम्र में शुरुआत करते है,

कुछ लीजेंड परीक्षा में फेल हो जाने पर भी मुस्कुरा देते हैं और कुछ लोग एक नंबर कम आने पर भी रो देते हैं,

किसी को बग़ैर कोशिश के भी बहुत कुछ मिल गया और कुछ सारी ज़िंदगी बस एड़ियां ही रगड़ते रहे,

इस दुनिया में हर शख़्स अपने टाइम ज़ोन की बुनियाद पर काम कर रहा है,

ज़ाहिरी तौर पर हमें ऐसा लगता है कुछ लोग हमसे बहुत आगे निकल चुके हैं,
और शायद ऐसा भी लगता हो कुछ हमसे अभी तक पीछे हैं,

लेकिन हर व्यक्ति अपनी अपनी जगह ठीक है अपने अपने वक़्त के मुताबिक़....!!

किसी से भी अपनी तुलना मत कीजिए..

अपने टाइम ज़ोन में रहें
इंतज़ार कीजिए और
इत्मीनान रखिए...

ना ही आपको देर हुई है और ना ही जल्दी,

परमपिता परमेश्वर ने हम सबको अपने हिसाब से डिजा़इन किया है वह जानता है कौन कितना बोझ उठा सकता है किस को किस वक़्त क्या देना है,

विश्वास रखिए भगवान की ओर से हमारे लिए जो फैसला किया गया है वह सर्वोत्तम ही है।

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Star कार्तिक माह में तुलसी सेवा
Posted by: admin - 11-09-2020, 02:42 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

कार्तिक माह में तुलसी सेवा
༺••═══••❁••═══••༻
☀ जय जय श्री राधे  ☀

⚜ कार्तिक माह में तुलसी सेवा ⚜

"तुलसी हमारी आस्था एवं श्रद्धा की प्रतीक हैं..!!"
वर्ष भर तुलसी में जल अर्पित करना एवं सायंकाल तुलसी के नीचे दीप जलाना अत्यंत ही श्रेष्ठ माना जाता है।

"कार्तिक मास में तुलसी जी के समीप दीपक जलाने से मनुष्य अनंत पुण्य का भागी बनता है..
इस मास में तुलसी के समीप दीपक जलाने से व्यक्ति को साक्षात लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, क्योंकि तुलसी में साक्षात लक्ष्मी का निवास माना गया है।

पौराणिक कथा के अनुसार'..
गुणवती नामक स्त्री ने कार्तिक मास में मंदिर के द्वार पर तुलसी की एक सुन्दर सी वाटिका लगाई उस पुण्य के कारण वह अगले जन्म में सत्यभामा बनी और सदैव कार्तिक मास का व्रत करने के कारण वह भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी बनी।
'यह है कार्तिक मास में तुलसी आराधना का फल।'

इस मास में तुलसी विवाह की भी परंपरा है, जो कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है।
इसमें तुलसी के पौधे को सजाया संवारा जाता है एवं भगवान शालिग्राम जी का पूजन किया जाता है और तुलसी जी का विधिवत विवाह किया जाता है। जो व्यक्ति यह चाहता है कि उसके घर में सदैव शुभ कर्म हो, सदैव सुख, शान्ति का निवास रहे.. उसे तुलसी की आराधना अवश्य करनी चाहिए।

कहते हैं कि जिस घर में शुभ कर्म होते हैं, वहां तुलसी हरी-भरी रहती हैं
एवं जहां अशुभ कर्म होते हैं, वहां तुलसी कभी भी हरी-भरी नहीं रहतीं।                                                                 

राधा रानी जी की तुलसी सेवा प्रसंग ?

एक बार राधा जी सखी से बोली: सखी ! तुम श्री कृष्ण की प्रसन्नता के लिए किसी देवता की ऐसी पूजा बताओ, जो परम सौभाग्यवर्द्धक हो..!!

तब समस्त सखियों में श्रेष्ठ चन्द्रनना ने अपने हदय में एक क्षण तक कुछ विचार किया। फिर चंद्रनना ने कहा- राधे ! परम सौभाग्यदायक और श्रीकृष्ण की भी प्राप्ति के लिए 'वरदायक व्रत है' “तुलसीजी की सेवा” और तुलसी सेवन का ही नियम लेना चाहिये..!!

क्योकि तुलसी का यदि स्पर्श अथवा ध्यान, नाम, संकीर्तन, आरोपण, सेचन, किया जाये तो महान पुण्यप्रद होता है। हे राधे ! जो प्रतिदिन तुलसी की नौ प्रकार से भक्ति करते है, वे कोटि सहस्त्र युगों तक अपने उस सुकृत्य का उत्तम फल भोगते है..!!

मनुष्यों की लगायी हुई तुलसी जब तक शाखा, प्रशाखा, बीज, पुष्प, और सुन्दर दलों, के साथ पृथ्वी पर बढ़ती रहती है तब तक उनके वंश मै जो-जो जन्म लेता है, वे सभी हो हजार कल्पों तक श्रीहरि के धाम में निवास करते है, जो तुलसी मंजरी सिर पर रखकर प्राण त्याग करता है, वह सैकड़ो पापों से युक्त क्यों न हो.. यमराज उनकी ओर देख भी नहीं सकते..!!

इस प्रकार चन्द्रनना की कही बात सुनकर रासेश्वरी श्री राधा ने साक्षात्
श्री हरि को संतुष्ट करने वाले तुलसी सेवन का व्रत आरंभ किया।                                                               

श्री राधा रानी जी ने तुलसी सेवा व्रत करते हुए केतकी वन में सौ हाथ गोलाकार भूमि पर बहुत ऊँचा और अत्यंत मनोहर श्री तुलसी का मंदिर बनवाया, जिसकी दीवार सोने से जड़ी थी और किनारे-किनारे पद्मरागमणि लगी थी, वह सुन्दर-सुन्दर पन्ने हीरे और मोतियों के परकोटे से अत्यंत सुशोभित था, और उसके चारो ओर परिक्रमा के लिए गली बनायीं गई थी जिसकी भूमि चिंतामणि से मण्डित थी..!!

ऐसे तुलसी मंदिर के मध्य भाग में हरे पल्लवो से सुशोभित तुलसी की स्थापना करके श्री राधा रानी ने अभिजित मुहूर्त में उनकी सेवा प्रारम्भ की..!!

श्री राधा जी ने आश्र्विन शुक्ला पूर्णिमा से लेकर चैत्र पूर्णिमा तक तुलसी सेवन व्रत का अनुष्ठान किया, व्रत आरंभ करने उन्होंने प्रतिमास पृथक-पृथक रस से तुलसी को सींचा..!!

“कार्तिक में दूध से”, “मार्गशीर्ष में ईख के रस से”, “पौष में द्राक्षा रस से”,
“माघ में बारहमासी आम के रस से”, “फाल्गुन मास में अनेक वस्तुओ से मिश्रित मिश्री के रस से” और “चैत्र मास में पंचामृत से” उनका सेवन किया और वैशाख कृष्ण प्रतिपदा के दिन उद्यापन का उत्सव किया..!!

उन्होंने दो लाख ब्राह्मणों को छप्पन भोगो से तृप्त करके वस्त्र और आभूषणों के साथ दक्षिणा दी। मोटे-मोटे दिव्य मोतियों का एक लाख भार और सुवर्ण का एक कोटि भार श्री गर्गाचार्य को दिया..!!

उस समय आकाश से देवता तुलसी मंदिर पर फूलो की वर्षा करने लगे,
उसी समय सुवर्ण सिंहासन पर विराजमान हरिप्रिया तुलसी देवी प्रकट हुई। उनके चार भुजाएँ थी कमल दल के समान विशाल नेत्र थे सोलह वर्ष की अवस्था और श्याम कांति थी..!!

मस्तक पर हेममय किरीट प्रकाशित था और कानो में कंचनमय कुंडल झलमला रहे थे, गरुड़ से उतरकर तुलसी देवी ने रंग वल्ली जैसी श्री राधा जी को अपनी भुजाओ से अंक में भर लिया और उनके मुखचन्द्र का चुम्बन किया..!!

जय श्रीराधे कृष्ण ?

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☀ तुलसी पूजन के पौराणिक मंत्र पौराणिक ग्रंथों में तुलसी का बहुत महत्व माना गया है। जहां तुलसी का प्रतिदिन दर्शन करना पापनाशक समझा जाता है, वहीं तुलसी पूजन करना मोक्षदायक माना गया है। हिन्दू धर्म में देव पूजा और श्राद्ध कर्म में तुलसी आवश्यक मानी गई है।
तुलसी पत्र से पूजा करने से व्रत, यज्ञ, जप, होम, हवन करने का पुण्य प्राप्त होता है।

? तुलसी जी के स्तुति मन्त्र ?

☀ तुलसी के पत्ते तोड़ते समय बोलने के मंत्र

ॐ सुभद्राय नमः…ॐ सुप्रभाय नमः

मातस्तुलसि गोविन्द हृदयानन्द कारिणी
      नारायणस्य पूजार्थं चिनोमि त्वां नमोस्तुते ।।

☀ तुलसी को जल देने का मंत्र

महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी
      आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।।

☀ तुलसी स्तुति का मंत्र

देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः
      नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।

☀ तुलसी पूजन के बाद बोलने का तुलसी मंत्र

तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
      धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
      लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
      तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।

☀ तुलसी नामाष्टक मंत्र

वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
      पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
      एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।
      य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।
     
☀ सुबह स्नान के बाद घर के आंगन या देवालय में लगे तुलसी के पौधे की गंध, फूल, लाल वस्त्र अर्पित कर पूजा करें। फल का भोग लगाएं। धूप व दीप जलाकर उसके नजदीक बैठकर तुलसी की ही माला से तुलसी गायत्री मंत्र का श्रद्धा से सुख की कामना से कम से कम 108 बार स्मरण अंत में तुलसी की पूजा करें

ॐ श्री तुलस्यै विद्महे।
      विष्णु प्रियायै धीमहि।
      तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।।

※✦✧✦✧۩═❁•✿•❖•✿•❁•═۩✧✦✧✦※

                  ॐ नमो भगवते वासुदेवाय               
       
─═✤═❖❥•◈❀°?°❀◈•❥❖═✤═─

  सुप्रभातम

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Smile हमारे पास तो पहले से ही अमृत से भरे कलश थे
Posted by: admin - 11-09-2020, 02:40 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

हमारे पास तो पहले से ही अमृत से भरे कलश थे...?

फिर हम वो अमृत फेंक कर उनमें कीचड़ भरने का काम क्यों कर रहे हैं...??

जरा इन पर विचार करें...???
० यदि मातृनवमी थी,
तो मदर्स डे क्यों लाया गया ?

० यदि कौमुदी महोत्सव था,
तो वेलेंटाइन डे क्यों लाया गया ?

० यदि गुरुपूर्णिमा थी,
तो टीचर्स डे क्यों लाया गया ?

० यदि धन्वन्तरि जयन्ती थी,
तो डाक्टर्स डे क्यों लाया गया ?

० यदि विश्वकर्मा जयंती थी,
तो प्रद्यौगिकी दिवस क्यों लाया गया ?

० यदि सन्तान सप्तमी थी,
तो चिल्ड्रन्स डे क्यों लाया गया ?

० यदि नवरात्रि और कन्या भोज था,
तो डॉटर्स डे क्यों लाया गया ?

० रक्षाबंधन है तो सिस्टर्स डे क्यों ?

० भाईदूज है ब्रदर्स डे क्यों ?

० आंवला नवमी, तुलसी विवाह मनाने वाले हिंदुओं को एनवायरमेंट डे की क्या आवश्यकता ?

० केवल इतना ही नहीं, नारद जयन्ती ब्रह्माण्डीय पत्रकारिता दिवस है...

० पितृपक्ष 7 पीढ़ियों तक के पूर्वजों का पितृपर्व है...

० नवरात्रि को स्त्री के नवरूप दिवस के रूप में स्मरण कीजिये...

सनातन पर्वों को अवश्य मनाईये...

आपकी सनातन संस्कृति में मनाए जाने वाले विभिन्न पर्व और त्योहार मिशनरीयों के धर्मांतरण की राह में बधक हैं, बस इसीलिए आपके धार्मिक परंपराओं से मिलते जुलते Program लाए जा रहे हैं।


अब पृथ्वी के सनातन भाव को स्वीकार करना ही होगा। यदि हम समय रहते नहीं चेते तो वे ही हमें वेद, शास्त्र, संस्कृत भी पढ़ाने आ जाएंगे !

इसका एक ही उपाय है कि अपनी जड़ों की ओर लौटिए। अपने सनातन मूल की ओर लौटिए, व्रत, पर्व, त्यौहारों को मनाइए, अपनी संस्कृति और सभ्यता को जीवंत कीजिये। जीवन में भारतीय पंचांग अपनाना चाहिए, जिससे भारत अपने पर्वों, त्यौहारों से लेकर मौसम की भी अनेक जानकारियां सहज रूप से जान व समझ लेता है...

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Star कौन से ऋषि का क्या है महत्व
Posted by: admin - 11-09-2020, 02:35 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

कौन से ऋषि का क्या है महत्व-
〰️〰️?〰️〰️〰️?〰️〰️
महत्वपूर्ण जानकारी
〰️〰️??〰️〰️
अंगिरा ऋषि? ऋग्वेद के प्रसिद्ध ऋषि अंगिरा ब्रह्मा के पुत्र थे। उनके पुत्र बृहस्पति देवताओं के गुरु थे। ऋग्वेद के अनुसार, ऋषि अंगिरा ने सर्वप्रथम अग्नि उत्पन्न की थी।

विश्वामित्र ऋषि? गायत्री मंत्र का ज्ञान देने वाले विश्वामित्र वेदमंत्रों के सर्वप्रथम द्रष्टा माने जाते हैं। आयुर्वेदाचार्य सुश्रुत इनके पुत्र थे। विश्वामित्र की परंपरा पर चलने वाले ऋषियों ने उनके नाम को धारण किया। यह परंपरा अन्य ऋषियों के साथ भी चलती रही।

वशिष्ठ ऋषि? ऋग्वेद के मंत्रद्रष्टा और गायत्री मंत्र के महान साधक वशिष्ठ सप्तऋषियों में से एक थे। उनकी पत्नी अरुंधती वैदिक कर्मो में उनकी सहभागी थीं।

कश्यप ऋषि? मारीच ऋषि के पुत्र और आर्य नरेश दक्ष की १३ कन्याओं के पुत्र थे। स्कंद पुराण के केदारखंड के अनुसार, इनसे देव, असुर और नागों की उत्पत्ति हुई।

जमदग्नि ऋषि? भृगुपुत्र यमदग्नि ने गोवंश की रक्षा पर ऋग्वेद के १६ मंत्रों की रचना की है। केदारखंड के अनुसार, वे आयुर्वेद और चिकित्साशास्त्र के भी विद्वान थे।

अत्रि ऋषि? सप्तर्षियों में एक ऋषि अत्रि ऋग्वेद के पांचवें मंडल के अधिकांश सूत्रों के ऋषि थे। वे चंद्रवंश के प्रवर्तक थे। महर्षि अत्रि आयुर्वेद के आचार्य भी थे।

अपाला ऋषि? अत्रि एवं अनुसुइया के द्वारा अपाला एवं पुनर्वसु का जन्म हुआ। अपाला द्वारा ऋग्वेद के सूक्त की रचना की गई। पुनर्वसु भी आयुर्वेद के प्रसिद्ध आचार्य हुए।

नर और नारायण ऋषि?  ऋग्वेद के मंत्र द्रष्टा ये ऋषि धर्म और मातामूर्ति देवी के पुत्र थे। नर और नारायण दोनों भागवत धर्म तथा नारायण धर्म के मूल प्रवर्तक थे।

पराशर ऋषि? ऋषि वशिष्ठ के पुत्र पराशर कहलाए, जो पिता के साथ हिमालय में वेदमंत्रों के द्रष्टा बने। ये महर्षि व्यास के पिता थे।

भारद्वाज ऋषि? बृहस्पति के पुत्र भारद्वाज ने 'यंत्र सर्वस्व' नामक ग्रंथ की रचना की थी, जिसमें विमानों के निर्माण, प्रयोग एवं संचालन के संबंध में विस्तारपूर्वक वर्णन है। ये आयुर्वेद के ऋषि थे तथा धन्वंतरि इनके शिष्य थे।

आकाश में सात तारों का एक मंडल नजर आता है उन्हें सप्तर्षियों का मंडल कहा जाता है। उक्त मंडल के तारों के नाम भारत के महान सात संतों के आधार पर ही रखे गए हैं। वेदों में उक्त मंडल की स्थिति, गति, दूरी और विस्तार की विस्तृत चर्चा मिलती है। प्रत्येक मनवंतर में सात सात ऋषि हुए हैं। यहां प्रस्तुत है वैवस्तवत मनु के काल में जन्में सात महान ‍ऋषियों का संक्षिप्त परिचय।

वेदों के रचयिता ऋषि ? ऋग्वेद में लगभग एक हजार सूक्त हैं, लगभग दस हजार मन्त्र हैं। चारों वेदों में करीब बीस हजार हैं और इन मन्त्रों के रचयिता कवियों को हम ऋषि कहते हैं। बाकी तीन वेदों के मन्त्रों की तरह ऋग्वेद के मन्त्रों की रचना में भी अनेकानेक ऋषियों का योगदान रहा है। पर इनमें भी सात ऋषि ऐसे हैं जिनके कुलों में मन्त्र रचयिता ऋषियों की एक लम्बी परम्परा रही। ये कुल परंपरा ऋग्वेद के सूक्त दस मंडलों में संग्रहित हैं और इनमें दो से सात यानी छह मंडल ऐसे हैं जिन्हें हम परम्परा से वंशमंडल कहते हैं क्योंकि इनमें छह ऋषिकुलों के ऋषियों के मन्त्र इकट्ठा कर दिए गए हैं।

वेदों का अध्ययन करने पर जिन सात ऋषियों या ऋषि कुल के नामों का पता चलता है वे नाम क्रमश: इस प्रकार है:- १.वशिष्ठ, २.विश्वामित्र, ३.कण्व, ४.भारद्वाज, ५.अत्रि, ६.वामदेव और ७.शौनक।

पुराणों में सप्त ऋषि के नाम पर भिन्न-भिन्न नामावली मिलती है। विष्णु पुराण अनुसार इस मन्वन्तर के सप्तऋषि इस प्रकार है :-

वशिष्ठकाश्यपो यात्रिर्जमदग्निस्सगौत।
विश्वामित्रभारद्वजौ सप्त सप्तर्षयोभवन्।।

अर्थात् सातवें मन्वन्तर में सप्तऋषि इस प्रकार हैं:- वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज।

इसके अलावा पुराणों की अन्य नामावली इस प्रकार है:- ये क्रमशः केतु, पुलह, पुलस्त्य, अत्रि, अंगिरा, वशिष्ट तथा मारीचि है।

महाभारत में सप्तर्षियों की दो नामावलियां मिलती हैं। एक नामावली में कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ के नाम आते हैं तो दूसरी नामावली में पांच नाम बदल जाते हैं। कश्यप और वशिष्ठ वहीं रहते हैं पर बाकी के बदले मरीचि, अंगिरस, पुलस्त्य, पुलह और क्रतु नाम आ जाते हैं। कुछ पुराणों में कश्यप और मरीचि को एक माना गया है तो कहीं कश्यप और कण्व को पर्यायवाची माना गया है। यहां प्रस्तुत है वैदिक नामावली अनुसार सप्तऋषियों का परिचय।

१. वशिष्ठ? राजा दशरथ के कुलगुरु ऋषि वशिष्ठ को कौन नहीं जानता। ये दशरथ के चारों पुत्रों के गुरु थे। वशिष्ठ के कहने पर दशरथ ने अपने चारों पुत्रों को ऋषि विश्वामित्र के साथ आश्रम में राक्षसों का वध करने के लिए भेज दिया था। कामधेनु गाय के लिए वशिष्ठ और विश्वामित्र में युद्ध भी हुआ था। वशिष्ठ ने राजसत्ता पर अंकुश का विचार दिया तो उन्हीं के कुल के मैत्रावरूण वशिष्ठ ने सरस्वती नदी के किनारे सौ सूक्त एक साथ रचकर नया इतिहास बनाया।

२. विश्वामित्र? ऋषि होने के पूर्व विश्वामित्र राजा थे और ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय को हड़पने के लिए उन्होंने युद्ध किया था, लेकिन वे हार गए। इस हार ने ही उन्हें घोर तपस्या के लिए प्रेरित किया। विश्वामित्र की तपस्या और मेनका द्वारा उनकी तपस्या भंग करने की कथा जगत प्रसिद्ध है। विश्वामित्र ने अपनी तपस्या के बल पर त्रिशंकु को सशरीर स्वर्ग भेज दिया था। इस तरह ऋषि विश्वामित्र के असंख्य किस्से हैं।

माना जाता है कि हरिद्वार में आज जहां शांतिकुंज हैं उसी स्थान पर विश्वामित्र ने घोर तपस्या करके इंद्र से रुष्ठ होकर एक अलग ही स्वर्ग लोक की रचना कर दी थी। विश्वामित्र ने इस देश को ऋचा बनाने की विद्या दी और गायत्री मन्त्र की रचना की जो भारत के हृदय में और जिह्ना पर हजारों सालों से आज तक अनवरत निवास कर रहा है।

३. कण्व? माना जाता है इस देश के सबसे महत्वपूर्ण यज्ञ सोमयज्ञ को कण्वों ने व्यवस्थित किया। कण्व वैदिक काल के ऋषि थे। इन्हीं के आश्रम में हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत की पत्नी शकुंतला एवं उनके पुत्र भरत का पालन-पोषण हुआ था।

४. भारद्वाज? वैदिक ऋषियों में भारद्वाज-ऋषि का उच्च स्थान है। भारद्वाज के पिता बृहस्पति और माता ममता थीं। भारद्वाज ऋषि राम के पूर्व हुए थे, लेकिन एक उल्लेख अनुसार उनकी लंबी आयु का पता चलता है कि वनवास के समय श्रीराम इनके आश्रम में गए थे, जो ऐतिहासिक दृष्टि से त्रेता-द्वापर का सन्धिकाल था। माना जाता है कि भरद्वाजों में से एक भारद्वाज विदथ ने दुष्यन्त पुत्र भरत का उत्तराधिकारी बन राजकाज करते हुए मन्त्र रचना जारी रखी।

ऋषि भारद्वाज के पुत्रों में १० ऋषि ऋग्वेद के मन्त्रदृष्टा हैं और एक पुत्री जिसका नाम 'रात्रि' था, वह भी रात्रि सूक्त की मन्त्रदृष्टा मानी गई हैं। ॠग्वेद के छठे मण्डल के द्रष्टा भारद्वाज ऋषि हैं। इस मण्डल में भारद्वाज के ७६५ मन्त्र हैं। अथर्ववेद में भी भारद्वाज के २३ मन्त्र मिलते हैं। 'भारद्वाज-स्मृति' एवं 'भारद्वाज-संहिता' के रचनाकार भी ऋषि भारद्वाज ही थे। ऋषि भारद्वाज ने 'यन्त्र-सर्वस्व' नामक बृहद् ग्रन्थ की रचना की थी। इस ग्रन्थ का कुछ भाग स्वामी ब्रह्ममुनि ने 'विमान-शास्त्र' के नाम से प्रकाशित कराया है। इस ग्रन्थ में उच्च और निम्न स्तर पर विचरने वाले विमानों के लिए विविध धातुओं के निर्माण का वर्णन मिलता है।

५. अत्रि? ऋग्वेद के पंचम मण्डल के द्रष्टा महर्षि अत्रि ब्रह्मा के पुत्र, सोम के पिता और कर्दम प्रजापति व देवहूति की पुत्री अनुसूया के पति थे। अत्रि जब बाहर गए थे तब त्रिदेव अनसूया के घर ब्राह्मण के भेष में भिक्षा मांगने लगे और अनुसूया से कहा कि जब आप अपने संपूर्ण वस्त्र उतार देंगी तभी हम भिक्षा स्वीकार करेंगे, तब अनुसूया ने अपने सतित्व के बल पर उक्त तीनों देवों को अबोध बालक बनाकर उन्हें भिक्षा दी। माता अनुसूया ने देवी सीता को पतिव्रत का उपदेश दिया था।

अत्रि ऋषि ने इस देश में कृषि के विकास में पृथु और ऋषभ की तरह योगदान दिया था। अत्रि लोग ही सिन्धु पार करके पारस (आज का ईरान) चले गए थे, जहां उन्होंने यज्ञ का प्रचार किया। अत्रियों के कारण ही अग्निपूजकों के धर्म पारसी धर्म का सूत्रपात हुआ। अत्रि ऋषि का आश्रम चित्रकूट में था। मान्यता है कि अत्रि-दम्पति की तपस्या और त्रिदेवों की प्रसन्नता के फलस्वरूप विष्णु के अंश से महायोगी दत्तात्रेय, ब्रह्मा के अंश से चन्द्रमा तथा शंकर के अंश से महामुनि दुर्वासा महर्षि अत्रि एवं देवी अनुसूया के पुत्र रूप में जन्मे। ऋषि अत्रि पर अश्विनीकुमारों की भी कृपा थी।

६. वामदेव? वामदेव ने इस देश को सामगान (अर्थात् संगीत) दिया। वामदेव ऋग्वेद के चतुर्थ मंडल के सूत्तद्रष्टा, गौतम ऋषि के पुत्र तथा जन्मत्रयी के तत्ववेत्ता माने जाते हैं।

७. शौनक? शौनक ने दस हजार विद्यार्थियों के गुरुकुल को चलाकर कुलपति का विलक्षण सम्मान हासिल किया और किसी भी ऋषि ने ऐसा सम्मान पहली बार हासिल किया। वैदिक आचार्य और ऋषि जो शुनक ऋषि के पुत्र थे।

फिर से बताएं तो वशिष्ठ, विश्वामित्र, कण्व, भरद्वाज, अत्रि, वामदेव और शौनक- ये हैं वे सात ऋषि जिन्होंने इस देश को इतना कुछ दे डाला कि कृतज्ञ देश ने इन्हें आकाश के तारामंडल में बिठाकर एक ऐसा अमरत्व दे दिया कि सप्तर्षि शब्द सुनते ही हमारी कल्पना आकाश के तारामंडलों पर टिक जाती है।

इसके अलावा मान्यता हैं कि अगस्त्य, कष्यप, अष्टावक्र, याज्ञवल्क्य, कात्यायन, ऐतरेय, कपिल, जेमिनी, गौतम आदि सभी ऋषि उक्त सात ऋषियों के कुल के होने के कारण इन्हें भी वही स्तर  प्राप्त है।

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Star निस्वार्थ भाव से कर्म करो
Posted by: admin - 11-09-2020, 02:32 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

निस्वार्थ भाव से कर्म करो

एक बार किसी रेलवे प्लैटफॉर्म पर जब गाड़ी रुकी तो एक लड़का पानी बेचता हुआ निकला।
ट्रेन में बैठे एक सेठ ने उसे आवाज दी,ऐ लड़के इधर आ।

लड़का दौड़कर आया।

उसने पानी का गिलास भरकर सेठ
की ओर बढ़ाया तो सेठ ने पूछा,
कितने पैसे में?

लड़के ने कहा - पच्चीस पैसे।

सेठ ने उससे कहा कि पंदह पैसे में देगा क्या?

यह सुनकर लड़का हल्की मुस्कान
दबाए पानी वापस घड़े में उड़ेलता हुआ आगे बढ़ गया।

उसी डिब्बे में एक महात्मा बैठे थे,
जिन्होंने यह नजारा देखा था कि लड़का मुस्कराय मौन रहा।

जरूर कोई रहस्य उसके मन में होगा।

महात्मा नीचे उतरकर उस लड़के के
पीछे- पीछे गए।

बोले : ऐ लड़के ठहर जरा, यह तो बता तू हंसा क्यों?

वह लड़का बोला,

महाराज, मुझे हंसी इसलिए आई कि सेठजी को प्यास तो लगी ही नहीं थी।
वे तो केवल पानी के गिलास का रेट पूछ रहे थे।

महात्मा ने पूछा -

लड़के, तुझे ऐसा क्यों लगा कि सेठजी को प्यास लगी ही नहीं थी।

लड़के ने जवाब दिया -

महाराज, जिसे वाकई प्यास लगी हो वह कभी रेट नहीं पूछता।

वह तो गिलास लेकर पहले पानी पीता है।
फिर बाद में पूछेगा कि कितने पैसे देने हैं?

पहले कीमत पूछने का अर्थ हुआ कि प्यास लगी ही नहीं है।

वास्तव में जिन्हें ईश्वर और जीवन में
कुछ पाने की तमन्ना होती है,
वे वाद-विवाद में नहीं पड़ते।

पर जिनकी प्यास सच्ची नहीं होती,
वे ही वाद-विवाद में पड़े रहते हैं।
वे साधना के पथ पर आगे नहीं बढ़ते.

अगर भगवान नहीं हे तो उसका ज़िक्र क्यो??

और अगर भगवान हे तो फिर फिक्र क्यों ???
:
" मंज़िलों से गुमराह भी ,कर देते हैं कुछ लोग ।।

हर किसी से रास्ता पूछना अच्छा नहीं होता..

अगर कोई पूछे जिंदगी में क्या खोया और क्या पाया ...

तो बेशक कहना...

जो कुछ खोया वो मेरी नादानी थी

और जो भी पाया वो रब की मेहेरबानी थी!

खुबसूरत रिश्ता है मेरा और भगवान के बीच में ज्यादा मैं मांगता नहीं और कम वो देता नही....
जन्म अपने हाथ में नहीं ;
मरना अपने हाथ में नहीं ;पर जीवन को अपने तरीके से जीना अपने हाथ में होता है
मस्ती करो मुस्कुराते रहो ;
सबके दिलों में जगह बनाते रहो ।I
जीवन का 'आरंभ' अपने रोने से होता हैं
और
जीवन का 'अंत' दूसरों के रोने से,
इस "आरंभ और अंत" के बीच का समय भरपूर हास्य भरा हो.
..बस यही सच्चा जीवन है..

    निस्वार्थ भाव से कर्म करो       
              क्योंकि.....
          इस धरा का...
          इस धरा पर...               
      सब धरा रह जायेगा।

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Thumbs Up I like this link
Posted by: Ram - 11-09-2020, 02:22 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

I like this link too much aap bhi suno ye mantra bahut aacha hain   https://www.reikiandastrologypredictions...php?tid=24

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Star ❇ BALANCE SHEET Of LIFE ❇
Posted by: admin - 11-09-2020, 02:00 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

❇ BALANCE SHEET Of LIFE ❇

              Birth is your
          Opening Stock
                 
    What comes to you
                  is
                Credit.
                 
    What goes from you
                  is
              Debit.

        Death is your
        Closing Stock.

    Your friends are your
              Assets.

    Your bad habits are 
        your Liabilities.

    Your happiness is
                your
              Profit.

    Your sorrow is your
                Loss.

        Your soul is your
              Goodwill.

    Your heart is your
                fixed Assets

    Your character is
            your
          Capital.

    Your knowledge is
            your
        Investment

      Your age is your
          Depreciation.
         
          And finally :

Always  Remember :
          GOD IS YOUR AUDITOR

Have a nice balance sheet of Life

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Star Indian Premier League Final DELHI CAPITALS Vs MUMBAI INDIANS
Posted by: admin - 11-09-2020, 12:18 PM - Forum: IPL T-20 - No Replies

Indian Premier League

Final, Dubai, Nov 10 2020, IST 07:30 PM UAE 6 PM 

DELHI CAPITALS Vs MUMBAI INDIANS

When more runs will be scored wicket will fall who win the match all updates soon in comments below.

IPL T20

Match Report: 

Why Cricket Predictions by astrology?

Yes it is challenging difficult many calculations required to know which team will win. This work is only to show that Astrology is accurate and scientific and can't go wrong, yes but the astrologer may go wrong if does wrong calculations and mistakes in giving predictions by reading horoscope charts.

OPEN FOR ALL. FREE CRICKET PREDICTIONS ONLY FOR ENTERTAINMENT
Astrology can be used for any good cause in life. Be positive and find right ways. Good Karma is the only key to success in life.

We see DELHI CAPITALS won the toss and chose to bat.

Today's Prediction: In today's match possibility of winning DELHI CAPITALS is less than MUMBAI INDIANS.

Few points will be covered everyday.
1. Which team will have big partnership in scoring runs.
2. Today more catch out / run out or bold.