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Posted by: Andrewten - 25 minutes ago - Forum: Share your stuff - No Replies

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Posted by: Glennnum - 11-25-2020, 03:34 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

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Star भाईदूज की कथा bhai dujh ki katha
Posted by: स्वाति जायसवाल - 11-16-2020, 10:20 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

हरे कृष्णा

थोड़ा बड़ा लिखा है पर अपने भाई के लिए पढे जरूर 2 मिनिट ही लगेंगे ज्यादा नहीं हरिबोल

Hare Krishna bhai dujh ki katha भाईदूज की कथा

मथुरा। पांच दिवसीय दीपोत्सव के अंतिम दिन यानि यम द्वितीया को जो भी भाई बहन यमुना में स्नान करते हैं, उन्हें यम फांस से मुक्ति मिलती है। वहीं इस दिन बहिनें भाइयों के उन्नत मस्तक पर टीका कर उनकी लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं।

ये है कहानी
सूर्य की पुत्री यमुना शापित होकर नदी के रूप में अपने उद्गम स्थल हिमालय से प्रवाहित होती हुई विभिन्न स्थानों पर भ्रमण करते हुए मथुरा पहुंची। यहां यमुना महारानी ने विश्राम (विश्राम घाट) किया। यमुना के ज्येष्ठ भ्राता और सूर्यपुत्र यमराज बहिन यमुना से मिलने आए। यहां भाई-बहिन का भावुक मिलन हुआ। यमुना ने भाई के माथे पर मंगल तिलक किया तो यमराज ने बहिन से उपहार मांगने को कहा। यमुना ने वर मांगा कि जिस स्थान पर हमारा मिलन हुआ है वहां कोई भी भाई बहिन मेरे जल में स्नान करेगा तो वो यमलोक के कष्टों (यम की फांस) से मुक्त हो जाए। प्रसन्न यमराज ने यमुना को उपहार स्वरूप वरदान प्रदान किया। तभी से प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल द्वितीया को बहिन-भाई एक साथ यमुना में स्नान करने को आते हैं।
यमुना जी और धर्मराज की होती है पूजा
यमुना के 25 घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पर्व को मनाते हैं। स्नान के बाद विश्राम घाट स्थित यमुना महारानी व धर्मराज मंदिर में पूजा अर्चना कर वस्त्र, श्रृंगार सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद बहिनें भाइयों के तिलक करती हैं भाई उन्हें उपहार प्रदान करते हैं।


Hare Krishna
भैया दूज के दिन ऐसे करें पूजा: भैया दूज वाले दिन बहने आसन पर चावल के घोल से चौक बनाएं। इस चौक पर अपने भाई को बिठाकर उनके हाथों की पूजा करें। सबसे पहले बहन अपने भाई के हाथों पर चावलों का घोल लगाए। उसके ऊपर सिंदूर लगाकर फूल, पान, सुपारी तथा मुद्रा रख कर धीरे-धीरे हाथों पर पानी छोड़ते हुए मंत्र बोले ‘गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज को। सुभद्रा पूजे कृष्ण को गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें फूले फलें।’ इसके उपरांत बहन भाई के मस्तक पर तिलक लगाकर कलावा बांधे और भाई के मुंह में मिठाई, मिश्री और माखन लगाएं। घर पर भाई सभी प्रकार से प्रसन्नचित्त जीवन व्यतीत करें, ऐसी मंगल कामना करें। उसकी लम्बी उम्र की प्रार्थना करें। उसके उपरांत यमराज के नाम का चौमुखा दीपक जला कर घर की दहलीज के बाहर रखें। जिससे भाई के घर में किसी प्रकार का विघ्न-बाधां न आए और वह सुखमय जीवन व्यतीत करें।


भाईदूज
भाईदूज के दिन भाई बहिन के घर का ही खाना खाए। ऐसा करने से भाई की आयुवृद्धि होती है। पहला कौर बहिन के हाथ से खाएं। स्कंदपुराण के अनुसार इस दिन जो बहिन के हाथ से भोजन करता है, वह धन एव उत्तम सम्पदा को प्राप्त होता है। अगर बहिन न हो तो मुँहबोली बहिन या मौसी/मामा की पुत्री को बहिन मान ले। अगर वह भी न हो तो किसी गाय अथवा नदी को ही बहिन बना ले और उसके पास भोजन करे। कहने का आश्रय यह है की यमद्वितीया को कभी भी अपने घर भोजन न करे।
?? आज के दिन बहिन अपने भाई की 3 बार आरती जरूर उतारे।
?? आज के दिन बहिन भाई को तथा भाई बहिन को कदन कोई उपहार जरूर दे स्कंदपुराण के अनुसार विशेषतः वस्त्र तथा आभूषण। आज के दिन भाई बहिन का यमुना जी में नहाना भी बहुत शुभ है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना जी में स्नान करने वाला पुरुष यमलोक का दर्शन नहीं करता।

नारदपुराण के अनुसार

ऊर्ज्जशुक्लद्वितीयायां यमो यमुनया पुरा ।।
भोजितः स्वगृहे तेन द्वितीयैषा यमाह्वया ।।
पुष्टिप्रवर्द्धनं चात्र भगिन्या भोजनं गृहे ।।
वस्त्रालंकारपूर्वं तु तस्मै देयमतः परम् ।।
यस्यां तिथौ यमुनया यमराजदेवः संभोजितो निजकरात्स्वसृसौहृदेन ।।
तस्यां स्वसुः करतलादिह यो भुनक्ति प्राप्नोति रत्नधनधान्यमनुत्तमं सः ।।

कार्तिक शुक्ल द्वितीया को पूर्वकाल में यमुनाजी ने यमराज को अपने घर भोजन कराया था, इसलिए यह ‘यमद्वितीया’ कहलाती है। इसमें बहिन के घर भोजन करना पुष्टिवर्धक बताया गया है। अतः बहिन को उस दिन वस्त्र और आभूषण देने चाहिए। उस तिथि को जो बहिन के हाथ से इस लोक में भोजन करता है, वह सर्वोत्तम रत्न, धन और धान्य पाता है ।
         

          भाई दूज

दीपावली पर्व के पांचवे दिन यानी कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 16 नवम्बर, सोमवार को है। यह पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन बहन के घर भोजन करने से भाई की उम्र बढ़ती है। इस पर्व का महत्व इस प्रकार है-

धर्म ग्रंथों के अनुसार, कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन ही यमुना ने अपने भाई यम को अपने घर बुलाकर सत्कार करके भोजन कराया था। इसीलिए इस त्योहार को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। तब यमराज ने प्रसन्न होकर उसे यह वर दिया था कि जो व्यक्ति इस दिन यमुना में स्नान करके यम का पूजन करेगा, मृत्यु के पश्चात उसे यमलोक में नहीं जाना पड़ेगा। सूर्य की पुत्री यमुना समस्त कष्टों का निवारण करने वाली देवी स्वरूपा है।

उनके भाई मृत्यु के देवता यमराज हैं। यम द्वितीया के दिन यमुना नदी में स्नान करने और वहीं यमुना और यमराज की पूजा करने का बड़ा माहात्म्य माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई को तिलक कर उसकी लंबी उम्र के लिए हाथ जोड़कर यमराज से प्रार्थना करती है। स्कंद पुराण में लिखा है कि इस दिन यमराज को प्रसन्न करने से पूजन करने वालों को मनोवांछित फल मिलता है। धन-धान्य, यश एवं दीर्घायु की प्राप्ति होती है।

भाई की उम्र बढ़ानी है तो करें यमराज से प्रार्थना
सबसे पहले बहन-भाई दोनों मिलकर यम, चित्रगुप्त और यम के दूतों की पूजा करें तथा सबको अर्घ्य दें। बहन भाई की आयु-वृद्धि के लिए यम की प्रतिमा का पूजन करें। प्रार्थना करें कि मार्कण्डेय, हनुमान, बलि, परशुराम, व्यास, विभीषण, कृपाचार्य तथा अश्वत्थामा इन आठ चिरंजीवियों की तरह मेरे भाई को भी चिरंजीवी कर दें।

भाई की लंबी उम्र के लिए11 बार
हरे कृष्ण महा मंत्र जरूर बोले

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे

इसके बाद बहन भाई को भोजन कराती हैं। भोजन के बाद भाई की तिलक लगाती हैं। इसके बाद भाई यथाशक्ति बहन को भेंट देता है। जिसमें स्वर्ग, आभूषण, वस्त्र आदि प्रमुखता से दिए जाते हैं। लोगों में ऐसा विश्वास भी प्रचलित है कि इस दिन बहन अपने हाथ से भाई को भोजन कराए तो उसकी उम्र बढ़ती है और उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं।


Hare Krishna

Aaj apne Bhaiya ko raksha sutr jaur badhe matlab  ye mantr bol kar badhe bahane bhai ko kalawa

रक्षासूत्र का मंत्र है- 'येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:।' इसका अर्थ है- अर्थात् जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी बंधन से मैं तुम्हें बांधती हूं, जो तुम्हारी रक्षा करेगा|

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Thumbs Up राधारानी जी की तुलसी सेवा
Posted by: स्वाति जायसवाल - 11-16-2020, 10:18 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

हरे कृष्णा

तुलसी जी की सेवा कैसे करना चाहिए हमे राधा रानी जी से सीखना चाहिए

राधारानी जी की तुलसी सेवा??

                हरिप्रिया तुलसी देवी की जय

          एक बार राधा जी सखी से बोलीं, सखी ! तुम श्री कृष्ण की प्रसन्नता के लिए किसी देवता की ऐसी पूजा बताओ जो परम सौभाग्यवर्द्धक हो ?
          तब समस्त सखियों में श्रेष्ठ चन्द्रनना ने अपने हदय में एक क्षण तक कुछ विचार किया। फिर बोली चंद्रनना ने कहा, "राधे ! परम सौभाग्यदायक और श्रीकृष्ण की भी प्राप्ति के लिए वरदायक व्रत है, "तुलसी की सेवा" तुम्हें तुलसी सेवन का ही नियम लेना चाहिय *क्योंकि तुलसी का यदि स्पर्श अथवा ध्यान, नाम, संकीर्तन, आरोपण, सेचन, किया जाये तो महान पुण्यप्रद होता है। हे राधे ! जो प्रतिदिन तुलसी की नौ प्रकार से भक्ति करते है। वे कोटि सहस्त्र युगों तक अपने उस सुकृत्य का उत्तम फल भोगते हैं
          मनुष्यों की लगायी हुई तुलसी जब तक शाखा, प्रशाखा, बीज, पुष्प, और सुन्दर दलों, के साथ पृथ्वी पर बढ़ती रहती है तब तक उनके वंश मैं जो-जो जन्म लेता है, वे सभी सौ हजार कल्पों तक श्रीहरि के धाम में निवास करते हैं जो तुलसी मंजरी सिर पर रखकर प्राण त्याग करता है। वह सैकड़ों पापों से युक्त क्यों न हो यमराज उनकी ओर देख भी नहीं सकते" इस प्रकार चन्द्रनना की कहीं बात सुनकर रासेश्वरी श्री राधा ने साक्षात् श्री हरि को संतुष्ट करने वाले तुलसी सेवन का व्रत आरंभ किया।
          केतकी वन में सौ हाथ गोलाकार भूमि पर बहुत ऊँचा और अत्यंत मनोहर श्री तुलसी का मंदिर बनवाया, जिसकी दीवार सोने से जड़ी थीं और किनारे-किनारे पद्मरागमणि लगी थीं वह सुन्दर-सुन्दर पन्ने हीरे और मोतियों के परकोटे से अत्यंत सुशोभित था, और उसके चारोंं ओर परिक्रमा के लिए गली बनायीं गई थी जिसकी भूमि चिंतामणि से मण्डित थी ऐसे तुलसी मंदिर के मध्य भाग में हरे पल्लवों से सुशोभित तुलसी की स्थापना करके श्री राधा ने अभिजित मुहूर्त में उनकी सेवा प्रारम्भ की।
          श्री राधा जी ने आश्र्विन शुक्ला पूर्णिमा से लेकर चैत्र पूर्णिमा तक तुलसी सेवन व्रत का अनुष्ठान किया। व्रत आरंभ करके उन्होंने प्रतिमास पृथक-पृथक रस से तुलसी को सींचा
*कार्तिक में दूध से, "मार्गशीर्ष में ईख(गन्ने)के रस से
"पौष में द्राक्षा रस से
"माघ में बारहमासी आम के रस से",
"फाल्गुन मास में अनेक वस्तुओ से मिश्रित मिश्री के रस से"
"चैत्र मास में पंचामृत से" उनका सेचन किया,
वैशाख कृष्ण प्रतिपदा के दिन उद्यापन का उत्सव किया।
          उन्होंने दो लाख ब्राह्मणों को छप्पन भोगों से तृप्त करके वस्त्र और आभूषणों के साथ दक्षिणा दी। मोटे-मोटे दिव्य मोतियों का एक लाख भार और सुवर्ण का एक कोटि भार श्री गर्गाचार्य को दिया उस समय आकाश से देवता तुलसी मंदिर पर फूलों की वर्षा करने लगे।
          उसी समय सुवर्ण सिंहासन पर विराजमान हरिप्रिया तुलसी देवी प्रकट हुईं। उनके चार भुजाएँ थीं कमल दल के समान विशाल नेत्र थे सोलह वर्ष की सी अवस्था और श्याम कांति थी। मस्तक पर हेममय किरीट प्रकाशित था और कानों में कंचनमय कुंडल झलमला रहे थे गरुड़ से उतरकर तुलसी देवी ने रंग वल्ली जैसी श्री राधाजी को अपनी भुजाओं से अंक में भर लिया और उनके मुखचन्द्र का चुम्बन किया।
          तुलसी जी बोली, "कलावती राधे ! मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूँ, यहाँ इंद्रिय, मन, बुद्धि, और चित् द्वारा जो-जो मनोरथ तुमने किया है वह सब तुम्हारे सम्मुख सफल हो।"
          इस प्रकार हरिप्रिया तुलसी को प्रणाम करके वृषभानु नंदिनी राधा ने उनसे कहा, "देवी ! गोविंद के युगल चरणों में मेरी अहैतुकी भक्ति बनी रहे।" तब तथास्तु कहकर हरिप्रिया अंतर्धान हो गईं। इस प्रकार पृथ्वी पर जो मनुष्य श्री राधिका के इस विचित्र उपाख्यान को सुनता है वह भगवान को पाकर कृतकृत्य हो जाता है।
                     
आप इतना नही कर सकते तो तुलसी जी मे रोज कच्चा दूध जल में मिलाकर चढ़ा दे तांबे के लोटे में दूध ना डाले कोटा चाँदी या इसटिल का ले और कपूर से आरती करें और घी का दीप प्रज्वलित करें इतना जरूर करें संध्या के समय कपूर से आरती ओर दीप प्रज्वलित जरूर करें


  जय जय श्री राधे श्याम
      जय वृंदा देवी तुलसी महारानी की जय
वृंदावन धाम की जय
जय प्रभुपाद



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Thumbs Up रमा एकादशी व्रत कथा- कार्तिक कृष्ण एकादशी
Posted by: स्वाति जायसवाल - 11-16-2020, 10:16 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

Hare Krishna
Ekadashi vrat Katha
Ekadashi vrat ke din jarur pade 11/11/2020 aaj vart kare or Deep daan ? jarur kare or vart na kare to bhi katha jarur pade or hare Krishn maha mantr ka jap jarur kare or jo ekadashi vrat ke din jo puri shradha ke sath vart karta hai or Sirf fruits kha kar vart kare to sab se achha hota hai nhi to jese bane vese kare par vart jarur kare or puri ratri hari naam jap, kirtan, kata sunte huye jagran karta hai vo or uske sare pitro ko Krishn ka dham vekund dham milta hai ????????????????


Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hàre Hàre
Hare ram Hare ram ram ram Hare Hare

रमा एकादशी व्रत कथा
कार्तिक कृष्ण एकादशी

धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! कार्तिक कृष्ण एकादशी का क्या नाम है? इसकी विधि क्या है? इसके करने से क्या फल मिलता है। सो आप विस्तारपूर्वक बताइए। भगवान श्रीकृष्ण बोले कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम रमा है। यह बड़े-बड़े पापों का नाश करने वाली है। इसका माहात्म्य मैं तुमसे कहता हूँ, ध्यानपूर्वक सुनो।

हे राजन! प्राचीनकाल में मुचुकुंद नाम का एक राजा था। उसकी इंद्र के साथ मित्रता थी और साथ ही यम, कुबेर, वरुण और विभीषण भी उसके मित्र थे। यह राजा बड़ा धर्मात्मा, विष्णुभक्त और न्याय के साथ राज करता था। उस राजा की एक कन्या थी, जिसका नाम चंद्रभागा था। उस कन्या का विवाह चंद्रसेन के पुत्र शोभन के साथ हुआ था। एक समय वह शोभन ससुराल आया। उन्हीं दिनों जल्दी ही पुण्यदायिनी एकादशी (रमा) भी आने वाली थी।

जब व्रत का दिन समीप आ गया तो चंद्रभागा के मन में अत्यंत सोच उत्पन्न हुआ कि मेरे पति अत्यंत दुर्बल हैं और मेरे पिता की आज्ञा अति कठोर है। दशमी को राजा ने ढोल बजवाकर सारे राज्य में यह घोषणा करवा दी कि एकादशी को भोजन नहीं करना चाहिए। ढोल की घोषणा सुनते ही शोभन को अत्यंत चिंता हुई औ अपनी पत्नी से कहा कि हे प्रिये! अब क्या करना चाहिए, मैं किसी प्रकार भी भूख सहन नहीं कर सकूँगा। ऐसा उपाय बतलाओ कि जिससे मेरे प्राण बच सकें, अन्यथा मेरे प्राण अवश्य चले जाएँगे।

चंद्रभागा कहने लगी कि हे स्वामी! मेरे पिता के राज में एकादशी के दिन कोई भी भोजन नहीं करता। हाथी, घोड़ा, ऊँट, बिल्ली, गौ आदि भी तृण, अन्न, जल आदि ग्रहण नहीं कर सकते, फिर मनुष्य का तो कहना ही क्या है। यदि आप भोजन करना चाहते हैं तो किसी दूसरे स्थान पर चले जाइए, क्योंकि यदि आप यहीं रहना चाहते हैं तो आपको अवश्य व्रत करना पड़ेगा। ऐसा सुनकर शोभन कहने लगा कि हे प्रिये! मैं अवश्य व्रत करूँगा, जो भाग्य में होगा, वह देखा जाएगा।

धर्मराज युधिष्ठिर द्वारा कार्तिक कृष्ण एकादशी का नाम, इसकी विधि, उसका फल कैसे मिलता हैं यह मिलता है यह विस्तारपूर्वक बताइए। ऐसा पूछने पर भगवान श्रीकृष्ण बोले कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम रमा है। यह बड़े-बड़े पापों का नाश करने वाली है।

इस प्रकार से विचार कर शोभन ने व्रत रख लिया और वह भूख व प्यास से अत्यंत पीडि़त होने लगा। जब सूर्य नारायण अस्त हो गए और रात्रि को जागरण का समय आया जो वैष्णवों को अत्यंत हर्ष देने वाला था, परंतु शोभन के लिए अत्यंत दु:खदायी हुआ। प्रात:काल होते शोभन के प्राण निकल गए। तब राजा ने सुगंधित काष्ठ से उसका दाह संस्कार करवाया। परंतु चंद्रभागा ने अपने पिता की आज्ञा से अपने शरीर को दग्ध नहीं किया और शोभन की अंत्येष्टि क्रिया के बाद अपने पिता के घर में ही रहने लगी।

रमा एकादशी के प्रभाव से शोभन को मंदराचल पर्वत पर धन-धान्य से युक्त तथा शत्रुओं से रहित एक सुंदर देवपुर प्राप्त हुआ। वह अत्यंत सुंदर रत्न और वैदुर्यमणि जटित स्वर्ण के खंभों पर निर्मित अनेक प्रकार की स्फटिक मणियों से सुशोभित भवन में बहुमूल्य वस्त्राभूषणों तथा छत्र व चँवर से विभूषित, गंधर्व और अप्सराअओं से युक्त सिंहासन पर आरूढ़ ऐसा शोभायमान होता था मानो दूसरा इंद्र विराजमान हो।

एक समय मुचुकुंद नगर में रहने वाले एक सोम शर्मा नामक ब्राह्मण तीर्थयात्रा करता हुआ घूमता-घूमता उधर जा निकला और उसने शोभन को पहचान कर कि यह तो राजा का जमाई शोभन है, उसके निकट गया। शोभन भी उसे पहचान कर अपने आसन से उठकर उसके पास आया और प्रणामादि करके कुशल प्रश्न किया। ब्राह्मण ने कहा कि राजा मुचुकुंद और आपकी पत्नी कुशल से हैं। नगर में भी सब प्रकार से कुशल हैं, परंतु हे राजन! हमें आश्चर्य हो रहा है। आप अपना वृत्तांत कहिए कि ऐसा सुंदर नगर जो न कभी देखा, न सुना, आपको कैसे प्राप्त हुआ।

तब शोभन बोला कि कार्तिक कृष्ण की रमा एकादशी का व्रत करने से मुझे यह नगर प्राप्त हुआ, परंतु यह अस्थिर है। यह स्थिर हो जाए ऐसा उपाय कीजिए। ब्राह्मण कहने लगा कि हे राजन! यह स्थिर क्यों नहीं है और कैसे स्थिर हो सकता है आप बताइए, फिर मैं अवश्यमेव वह उपाय करूँगा। मेरी इस बात को आप मिथ्या न समझिए। शोभन ने कहा कि मैंने इस व्रत को श्रद्धारहित होकर किया है। अत: यह सब कुछ अस्थिर है। यदि आप मुचुकुंद की कन्या चंद्रभागा को यह सब वृत्तांत कहें तो यह स्थिर हो सकता है।

ऐसा सुनकर उस श्रेष्ठ ब्राह्मण ने अपने नगर लौटकर चंद्रभागा से सब वृत्तांत कह सुनाया। ब्राह्मण के वचन सुनकर चंद्रभागा बड़ी प्रसन्नता से ब्राह्मण से कहने लगी कि हे ब्राह्मण! ये सब बातें आपने प्रत्यक्ष देखी हैं या स्वप्न की बातें कर रहे हैं। ब्राह्मण कहने लगा कि हे पुत्री! मैंने महावन में तुम्हारे पति को प्रत्यक्ष देखा है। साथ ही किसी से विजय न हो ऐसा देवताओं के नगर के समान उनका नगर भी देखा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्थिर नहीं है। जिस प्रकार वह स्थिर रह सके सो उपाय करना चाहिए।

चंद्रभागा कहने लगी हे विप्र! तुम मुझे वहाँ ले चलो, मुझे पतिदेव के दर्शन की तीव्र लालसा है। मैं अपने किए हुए पुण्य से उस नगर को स्थिर बना दूँगी। आप ऐसा कार्य कीजिए जिससे उनका हमारा संयोग हो क्योंकि वियोगी को मिला देना महान पु्ण्य है। सोम शर्मा यह बात सुनकर चंद्रभागा को लेकर मंदराचल पर्वत के समीप वामदेव ऋषि के आश्रम पर गया। वामदेवजी ने सारी बात सुनकर वेद मंत्रों के उच्चारण से चंद्रभागा का अभिषेक कर दिया। तब ऋषि के मंत्र के प्रभाव और एकादशी के व्रत से चंद्रभागा का शरीर दिव्य हो गया और वह दिव्य गति को प्राप्त हुई।

इसके बाद बड़ी प्रसन्नता के साथ अपने पति के निकट गई। अपनी प्रिय पत्नी को आते देखकर शोभन अति प्रसन्न हुआ। और उसे बुलाकर अपनी बाईं तरफ बिठा लिया। चंद्रभागा कहने लगी कि हे प्राणनाथ! आप मेरे पुण्य को ग्रहण कीजिए। अपने पिता के घर जब मैं आठ वर्ष की थी तब से विधिपूर्वक एकादशी के व्रत को श्रद्धापूर्वक करती आ रही हूँ। इस पुण्य के प्रताप से आपका यह नगर स्थिर हो जाएगा तथा समस्त कर्मों से युक्त होकर प्रलय के अंत तक रहेगा। इस प्रकार चंद्रभागा ने दिव्य आभू‍षणों और वस्त्रों से सुसज्जित होकर अपने पति के साथ आनंदपूर्वक रहने लगी।

हे राजन! यह मैंने रमा एकादशी का माहात्म्य कहा है, जो मनुष्य इस व्रत को करते हैं, उनके ब्रह्म हत्यादि समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों की एका‍दशियाँ समान हैं, इनमें कोई भेदभाव नहीं है। दोनों समान फल देती हैं। जो मनुष्य इस माहात्म्य को पढ़ते अथवा सुनते हैं, वे समस्त पापों से छूटकर विष्णुलोक को प्राप्त होता हैं।

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Star भगवान कब याद आते हैं?
Posted by: Shorya Singh Kushwah - 11-11-2020, 08:30 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

भगवान कब याद आते हैं?

धर्मात्मा को हर समय !
पापी को मृत्यु के समय !
चोर को पकड़े जाने पर !
गरीब को भूख लगने पर !
धनी को बीमार हो जाने पर !
कंजूस को पैसा खो जाने पर !
किसान को वर्षा नहीं होने पर !
मुसाफिर को ट्रेन छूट जाने पर !
व्यापारी को नुकसान हो जाने पर !
राजनीतिज्ञ को चुनाव हार जाने पर !
अफसर को रिश्वत लेते समय पकड़े जाने पर !
विद्यार्थी को परीक्षा फल के समय !
सच्चे इंसान को पूरी दुनिया के साथ ईमानदारी के साथ व्यवहार करने के बाद भी धोखा मिलने पर !

लेकिन जो प्रभु के अत्यन्त सच्चे भक्त है उनको तो हर समय सुख में, दुख में,  सोते , जागते, उठते, बैठते,हर समय हर जगह प्रभु ही प्रभु याद आते हैं .....!!

लगन में रहिये हमेशा, मग्न रहिये अपने प्रभु की याद में।

जय श्रीराम 
जय हिंद

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Thumbs Up आख़िर तक हार न मानने वाले एक दिन जीत ही जाते हैं।
Posted by: Shorya Singh Kushwah - 11-11-2020, 08:29 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

आख़िर तक हार न मानने वाले एक दिन जीत ही जाते हैं।
                                                                                                   
बाइडन 7 नवम्बर 1972 को पहली बार अमेरिकी सीनेट के लिए चुने गए थे।
आज 48 साल बाद 7 नवम्बर 2020 के दिन पहली बार राष्ट्रपति बने।

आज जब बाइडन राष्ट्रपति पद के लिए चुने गए हैं तब उनकी उम्र 78 वर्ष है, वो अमेरिकी इतिहास के सबसे जवान सीनेटर बने थे और सबसे बूढ़े राष्ट्रपति बने हैं।

आम भारतीयों को इससे कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता कि अमेरिका का राष्ट्रपति कोई डेमोक्रेट बनता है या रिपब्लिकन लेकिन इस बात से ज़रूर फ़र्क़ पड़ता है कि दुनिया में कुछ भी सम्भव है या कहा जाए कि सब कुछ सम्भव है। ट्रम्प पिछली बार राष्ट्रपति बनने के सिर्फ़ एक साल पहले राजनीति में आए थे और बाइडन पिछले 48 साल से राजनीति में हैं लेकिन राष्ट्रपति बने वो अब जाकर।

इस बीच एक और बात जो जानने योग्य है वो ये कि बाइडन का बेटा राष्ट्रपति पद का तगड़ा उम्मीदवार माना जाने लगा था लेकिन 46 वर्ष की उम्र में उसकी मौत हो गयी और अपने बेटे का अधूरा सपना पूरा करने के लिए जो बाइडन देश के 46 वें राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं।

तो कुल मिलाकर ऐसा है कि दुनिया में सब कुछ सम्भव है, और आख़िर तक हार न मानने वाले एक दिन जीत ही जाते हैं।

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Thumbs Up दिवाली के दिन लक्ष्मीजी का कौनसा चित्र लगाकर पूजा करें??
Posted by: admin - 11-09-2020, 03:19 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

दिवाली के दिन लक्ष्मीजी का कौनसा चित्र लगाकर पूजा करें?

⭕दीपावली पर माता लक्ष्मी का कौनसा चित्र लगाना चाहिए यह सभी के मन में सवाल होगा तो आओ जानते हैं कि दिवाली पर माता लक्ष्मी के पूजन हेतु कौसा चित्र लगाकर उनकी पूजा करना शुभ होता है।

⚜️ऐसे चित्र ना लगाएं :-

माता लक्ष्मी को चित्र में उल्लू, हाथी या कमल पर विराजमान बताया जाता है। उल्लू पर बैठी हुई मां लक्ष्मी का चित्र पूजन में रखने से लक्ष्मी नकारात्मकता लेकर आती है। क्योंकि उल्लू वाहन से आई लक्ष्मी गलत दिशा से आने और जाने वाले धन की ओर इशारा करती हैं। इसलिए उल्लू पर लक्ष्मी का आना उतना शुभ नहीं होता।

?जिस चित्र या तस्वीर में अकेली लक्ष्मी हो ऐसा चित्र भी पूजा हेतु दीपावली के दिन नहीं लगाएं। मान्यता अनुसार अकेली लक्ष्मी मां के चित्र का पूजन करने की अपेक्षा गणेश व सरस्वती के साथ उनका पूजन अति कल्याणकारी होता है।

⚜️ऐसे चित्र लगाएं :-

लक्ष्मी जी का वह चित्र जिसमें वे उनके एक ओर श्रीगणेश और दूसरी ओर सरस्वती हो तथा माता लक्ष्मी दोनों हाथों से धन बरसा रही हों, धन प्राप्ति के लिए बहुत शुभ होता है। यदि बैठी हुई लक्ष्मी माता के चित्र ला रहे हैं तो लक्ष्मी मां का वह चित्र लेकर आएं, जिसमें कमल के आसन पर बैठी हुई हों और उनके आसमान सुंड उठाए हाथी हों। इस तरह के चित्र का पूजन करने से मां लक्ष्मी सदैव आपके घर में विराजमान रहेंगी। चित्र में माता लक्ष्मी के पैर दिखाई नहीं देते हों अन्यथा लक्ष्मी घर में लंबे समय तक नहीं टिकती। इसलिए बैठी हुई लक्ष्मी को ही सर्वश्रेृष्ठ माना गया है।

चित्र में मां लक्ष्मी के साथ अगर ऐरावत हाथी भी है, तो वह अद्भुत और शुभ फलों को प्रदान करेगा। कुछ तस्वीरों में लक्ष्मी मां के दोनों ओर दो हाथी बहते पानी में खड़े होते हैं और सिक्कों की बारिश करते हैं। इस तरह का चित्र पूजने से किसी भी स्थिति में घर में धन की कमी नहीं होती। इसके अलावा यदि सूंड में कलश लिए हुए हाथी भी खड़े हों तो शुभ माना जाता है।

भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मी के चित्र हो तो आप उसकी पूजा भी कर सकते हैं। नारायण को आमंत्रित करके मां लक्ष्मी को घर में विराजित किया जाता है। भगवान विष्णु के साथ घर में पधारने वाली मां लक्ष्मी गरुड़ वाहन पर आती हैं, जो कि बेहद शुभ और कल्याणकारी होता है। इस प्रकार घर में आया हुआ धन सदैव कल्याण करता है।

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Star मधुररात्री
Posted by: admin - 11-09-2020, 03:17 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

─⊱━━━━━⊱ ⊰━━━━⊰─
                              मधुररात्री 

  एक सेठ जी ने अपने छोटे भाई को तीन लाख रूपये व्यापार के लिये दिये। उसका व्यापार बहुत अच्छा जम गया, लेकिन उसने रूपये बड़े भाई को वापस नहीं लौटाये।
    आखिर दोनों में झगड़ा हो गया, झगड़ा भी इस सीमा तक बढ़ गया कि दोनों का एक दूसरे के यहाँ आना जाना बिल्कुल बंद हो गया। घृणा व द्वेष का आंतरिक संबंध अत्यंत गहरा हो गया। सेठ जी, हर समय हर संबंधी के सामने अपने छोटे भाई की निंदा-निरादर व आलोचना करने लगे।
      सेठ जी अच्छे साधक भी थे, लेकिन इस कारण उनकी साधना लड़खड़ाने लगी। भजन पूजन के समय भी उन्हें छोटे भाई का चिंतन होने लगा। मानसिक व्यथा का प्रभाव तन पर भी पड़ने लगा। बेचैनी बढ़ गयी। समाधान नहीं मिल रहा था। आखिर वे एक संत के पास गये और अपनी व्यथा सुनायी।
    संतश्री ने कहाः- 'बेटा ! तू चिंता मत कर। ईश्वरकृपा से सब ठीक हो जायेगा। तुम कुछ फल व मिठाइयाँ लेकर छोटे भाई के यहाँ जाना और मिलते ही उससे केवल इतना कहना, 'अनुज ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे "क्षमा" कर दो।'
    सेठ जी ने कहाः- "महाराज ! मैंने ही उनकी मदद की है और "क्षमा" भी मैं ही माँगू !"
    संतश्री ने उत्तर दियाः- "परिवार में ऐसा कोई भी संघर्ष नहीं हो सकता, जिसमें दोनों पक्षों की गलती न हो। चाहे एक पक्ष की भूल एक प्रतिशत हो दूसरे पक्ष की निन्यानवे प्रतिशत, पर भूल दोनों तरफ से होगी।"
    सेठ जी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था। उसने कहाः- "महाराज ! मुझसे क्या भूल हुई ?"
    "बेटा ! तुमने मन ही मन अपने छोटे भाई को बुरा समझा– यही है तुम्हारी पहली भूल।
      तुमने उसकी निंदा, आलोचना व तिरस्कार किया– यह है तुम्हारी दूसरी भूल।
    क्रोध पूर्ण आँखों से उसके दोषों को देखा– यह है तुम्हारी तीसरी भूल।
      अपने कानों से उसकी निंदा सुनी– यह है तुम्हारी चौथी भूल।
      तुम्हारे हृदय में छोटे भाई के प्रति क्रोध व घृणा है– यह है तुम्हारी आखिरी भूल।
    अपनी इन भूलों से तुमने अपने छोटे भाई को दुःख दिया है। तुम्हारा दिया दुःख ही कई गुना हो तुम्हारे पास लौटा है। जाओ, अपनी भूलों के लिए "क्षमा" माँगों। नहीं तो तुम न चैन से जी सकोगे, न चैन से मर सकोगे। क्षमा माँगना बहुत बड़ी साधना है। ओर तुम तो एक बहुत अच्छे साधक हो।"
    सेठ जी की आँखें खुल गयीं। संतश्री को प्रणाम करके वे छोटे भाई के घर पहुँचे। सब लोग भोजन की तैयारी में थे। उन्होंने दरवाजा खटखटाया। दरवाजा उनके भतीजे ने खोला। सामने ताऊ जी को देखकर वह अवाक् सा रह गया और खुशी से झूमकर जोर-जोर से चिल्लाने लगाः "मम्मी ! पापा !! देखो कौन आये ! ताऊ जी आये हैं, ताऊ जी आये हैं....।"
    माता-पिता ने दरवाजे की तरफ देखा। सोचा, 'कहीं हम सपना तो नहीं देख रहे !' छोटा भाई हर्ष से पुलकित हो उठा, 'अहा ! पन्द्रह वर्ष के बाद आज बड़े भैया घर पर आये हैं।' प्रेम से गला रूँध गया, कुछ बोल न सका। सेठ जी ने फल व मिठाइयाँ टेबल पर रखीं और दोनों हाथ जोड़कर छोटे भाई को कहाः- "भाई ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे क्षमा करो ।"
    "क्षमा" शब्द निकलते ही उनके हृदय का प्रेम अश्रु बनकर बहने लगा। छोटा भाई उनके चरणों में गिर गया और अपनी भूल के लिए रो-रोकर क्षमा याचना करने लगा। बड़े भाई के प्रेमाश्रु छोटे भाई की पीठ पर और छोटी भाई के पश्चाताप व प्रेममिश्रित अश्रु बड़े भाई के चरणों में गिरने लगे।
    क्षमा व प्रेम का अथाह सागर फूट पड़ा। सब शांत, चुप, सबकी आँखों से अविरल अश्रुधारा बहने लगी। छोटा भाई उठ कर गया और रूपये लाकर बडे भाई के सामने रख दिये। बडे भाई ने कहा "भाई! आज मैं इन कौड़ियों को लेने के लिए नहीं आया हूँ। मैं अपनी भूल मिटाने, अपनी साधना को सजीव बनाने और द्वेष का नाश करके प्रेम की गंगा बहाने आया हूँ ।
    मेरा आना सफल हो गया, मेरा दुःख मिट गया। अब मुझे आनंद का एहसास हो रहा है।"
    छोटे भाई ने कहाः- "भैया ! जब तक आप ये रूपये नहीं लेंगे तब तक मेरे हृदय की तपन नहीं मिटेगी। कृपा करके आप ये रूपये ले लें।
    सेठ जी ने छोटे भाई से रूपये लिये और अपने इच्छानुसार अनुज बधू , भतीजे व भतीजी में बाँट दिये । सब कार में बैठे, घर पहुँचे।
      पन्द्रह वर्ष बाद उस अर्धरात्रि में जब पूरे परिवार, का मिलन हुआ तो ऐसा लग रहा था कि मानो साक्षात् प्रेम ही शरीर धारण किये वहाँ पहुँच गया हो।
    सारा परिवार प्रेम के अथाह सागर में मस्त हो रहा था। "क्षमा" माँगने के बाद उस सेठ जी के दुःख, चिंता, तनाव, भय, निराशारूपी मानसिक रोग जड़ से ही मिट गये और साधना सजीव हो उठी।
    हमें भी अपने दिल में "क्षमा" रखनी चाहिए अपने सामने छोटा हो या बडा अपनी गलती हो या ना हो क्षमा मांग लेने से सब झगडे समाप्त हो जाते है।

मेरी भूलो के लिये मैं क्षमाप्रार्थी हूँ
  जय श्री कृष्ण??
*─⊱━━━━⊱(राधे राधे)⊰━━━━━⊰─

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Star ज्ञानार्जन: हंस और कौवा
Posted by: admin - 11-09-2020, 03:13 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

ज्ञानार्जन

      !! हंस और कौवा !!

एक समय एक गांव में दो ब्राह्मण पुत्र रहते थे । एक गरीब था, दूसरा अमीर । दोनों पड़ोसी थे। गरीब ब्राम्हण की पत्नी उसे रोज ताने देती, झगड़ती ।

एक दिन ग्यारस के दिन गरीब ब्राह्मण पुत्र रोज-रोज की कलह से तंग आकर जंगल की ओर चल पड़ता है,
"ये सोचकर कि जंगल में शेर या कोई मांसाहारी जीव उसे मारकर खा जाएगा, उस जीव का पेट भर जाएगा और मरने से वह रोज की झिक-झिक से भी मुक्त हो जाएगा ।"

जंगल में पहुंचते ही उसे एक गुफा दिखाई देती है । वह गुफा की तरफ जाता है । गुफा में एक शेर सोया होता है, और शेर की नींद में खलल न पड़े, इसके लिए हंस का पहरा होता है ।

हंस जब दूर से ब्राह्मण पुत्र को आता देखता है, तो चिंता में पड़कर सोचता है,
"ये ब्राह्मण आएगा, शेर की नींद में व्यवधान पैदा होगा, वह क्रोध में उठेगा और इसे मारकर खा जाएगा । ग्यारस के दिन मुझे पाप लगेगा । इसे कैसे बचाया जाए...??"

हंस को एक उपाय सूझता है और वह शेर के भाग्य की तारीफ करते हुए कहता है,
"ओ जंगल के राजा, उठो, जागो, आज आपके भाग्य खुल गए हैं । देखो ग्यारस के दिन खुद विप्रदेव आपके घर पधारे हैं, जल्दी उठें और इन्हें दक्षिणा देकर विदा करें, आपका मोक्ष हो जाएगा, आपको पशु योनि से मुक्ति मिल जाएगी । ये दिन दुबारा आपकी जिंदगी में फिर कभी नहीं आएगा..!"

शेर दहाड़ मारकर उठता है । हंस की बात उसे सही लगती है और पूर्व में शिकार किए गए मनुष्यों के गहने वह ब्राह्मण के पैरों में रखकर अपना शीश नवाता है, जीभ से उसके पैर चाटकर उसका अभिवादन करता है ।

हंस ब्राह्मण को इशारा करता है, "विप्रदेव ये सब गहने, सोना-चांदी उठाओ और जितनी जल्दी हो सके वापस अपने घर चले जाओ । ये सिंह है, पता नहीं कब इसका मन बदल जाए..!"

ब्राह्मण हंस के इशारे को समझ जाता है और तुरंत घर लौट जाता है । उधर पड़ोसी अमीर ब्राह्मण की पत्नी को जब यह सब पता चलता है, तो वह भी अपने पति को जबरदस्ती अगली ग्यारस के दिन जंगल में उसी शेर की गुफा की ओर भेजती है ।

अब शेर का पहरेदार बदल गया है...नया पहरेदार होता है... "कौवा"

कौवे की जैसी प्रवृति होती है, वह सोचता है, "बहुत बढ़िया है, ब्राह्मण आया है, शेर को जगा दूं । शेर की नींद में खलल पड़ेगी, वह क्रोधित होगा, ब्राह्मण को मारेगा, तो कुछ मेरे भी हाथ लगेगा, मेरा भी पेट भर जाएगा ।"

यह सोचकर वह कांव... कांव... कांव... चिल्लाने लगता है ।
शेर अत्यंत क्रोधित होकर उठता है । दूसरे ब्राह्मण पर उसकी नजर पड़ती है । परंतु उसे हंस की बात याद आ जाती है । वह समझ जाता है, कौवा क्यों कांव... कांव...कर रहा है ।

वह अपने, हंस के कहने पर पहले किए गए धर्म-कर्म को खत्म नहीं करना चाहता । पर फिर भी शेर, शेर होता है, जंगल का राजा । वह दहाड़ कर ब्राह्मण को कहता है, "हंस उड़ सरवर गए और अब काग भये कोतवाल, रे तो विप्रा थारे घरे जाओ, मैं किनाइनी जजमान..!"

अर्थात, हंस जो अच्छी सोच वाले थे, अच्छी मनोवृत्ति वाले थे, वह उड़कर सरोवर चले गए, अब कौवा कोतवाल पहरेदार है, जो मुझे तुम्हें मारकर खा जाने के लिए उकसा रहा है । मेरी बुध्दि फिर जाए, उससे पहले ही हे ब्राह्मण, तुम यहां से चले जाओ, शेर किसी का जजमान नहीं होता, वह तो हंस था, जिसने मुझ शेर से भी पुण्य कर्म करवा दिया ।"

दूसरा ब्राह्मण सारी बात समझ जाता है और ड़र के मारे तुरंत प्राण बचाकर अपने घर की ओर भाग जाता है ।

कहने का तात्पर्य यह है कि हंस और कौवा कोई और नहीं, हमारे यानि आदमी के ही दो चरित्र हैं ।

हममें से जब कोई किसी का दु:ख देख दु:खी होता है, और उसका भला सोचता है, तब वह हंस होता है । और जो किसी को दु:खी देखना चाहता है, किसी का सुख जिसे सहन नहीं होता, वह कौवा है ।

जो आपस में मिल-जुलकर, भाईचारे से रहना चाहते हैं, वे हंस प्रवृत्ति के हैं ।
जो झगड़ा करके, कलह करके एक-दूसरे को मारने, लूटने, प्रताड़ित करने की प्रवृत्ति रखते हैं, वे कौवे की प्रवृति के होते हैं ।

अपने आस-पास छुपे बैठे कौवों को पहचानो, उनसे दूर रहो और जो हंस प्रवृत्ति के हैं, उनका साथ करो, उनकी संगति करो, इसी में हम सब का कल्याण निहित है ।


धन्यवाद..!

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Smile दिल को छू लेने वाला संदेश जरूर पढें...
Posted by: admin - 11-09-2020, 03:12 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

दिल को छू लेने वाला संदेश जरूर पढें...

पत्नी
ICU में थी..

पति
असमर्थ था,,
अपने आँसू को नियंत्रित करने कर पाने में...

चिकित्सक:
हम हैं..
हमारे सर्वश्रेष्ठ प्रयास के लिये
परंतु कुछ भी गारंटी नहीं दे सकते।

उसका शरीर
प्रतिक्रिया नहीं कर रहा है...
ऐसा लगता है कि वह कोमा में है..
.
.
पति: प्लीज डा०...
उसे बचा ली लीजिए...
उसकी उम्र ही क्या है...
अभी सिर्फ 31 साल की है..
एक बच्चा है हमारा..
परिवार को जरूरत है उसकी...
.
हमारे सपने, जो हमने साथ मिल के देखे,,, बोलते बोलते उसका गला भर आया...
.
.
.
.
.
.
.
अचानक से कुछ हुआ,
चमत्कारिक ढंग से...

ईसीजी में हरकत सी हुई...

उसके हाथ हिलने लगे,,,,

उसके होंठ कांपने लगे,,

हल्के से आंखे खोली ,,,

और धीरे से बुदबुदाई,,,,








"मैं 29 की हूँ..."
?????
  Wish u all a happy karwa chauth day




करवा चौथ की इससे बेहतर शुभकामनाएं नहीं हो सकती:-

श्रीरामचरित मानस की चौपाई...

अचल होउ अहिवातु तुम्हारा।
जब लगि गंग जमुन जल धारा॥

भावार्थ:- जब तक गंगाजी और यमुनाजी में जल की धारा बहे, तब तक तुम्हारा सुहाग अचल रहे।।
सभी को सपरिवार करवा चौथ व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं।।
नर्मदे हर
ज़िन्दगी भर ???



मंदी का करवा-चौथ

मेरे एक मित्र पुनीत कुमार जी को फ्लैट बेचने वाली कंपनी की सेल्स गर्ल के लगातार फ्लैट खरीदने के फोन आ रहे थे।तो उन्होंने टालने के हिसाब से बोल दिया कि आज रात ७-८ बजे के बीच आ जाऊंगा, हुआ यों कि उसी दिन करवा चौथ का दिन पड़ गया था।उसके बाद उनके घर से फोन आया कि आते समय बाजार से छलनी लेते आना , ऑफिस छूटने के बाद मित्र बाजार गये और एक छलनी खरीदी , मंदी के कारण एक छलनी पर एक छलनी  मुफ्त (free) में मिल रही थी । मित्र दोनों छलनी लेकर करीब ७:३० पर घर पहुंचे और फ्रेश होने चले गए। भाभी जी ने झोला चेक किया तो उनको दो छलनी दिखी तो उनका माथा ठनका।
तभी उस सेल्स गर्ल का फोन आ गया ,जिसे भाभी जी ने उठाया, तो वो बोली , "सर आपने वादा किया था कि आप आठ बजे तक आएंगे?" " मैं कब से तैयार होकर आपका इंतज़ार कर रही हूं।"

उसके बाद की घटना बताने लायक नहीं है

???????
Happy karwa Chouth






यदि आप चंद्रमा को देखते हैं तो आप ईश्वर के सौंदर्य को देखते हैं, यदि आप सूर्य को देखते हैं, तो आप ईश्वर की शक्ति को देखते हैं और यदि आप दर्पण को देखते हैं तो आप भगवान की सर्वश्रेष्ठ
रचना को देखते हैं इसलिए अपने पर विश्वास करे की दुनिया के सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति आप ही हैं आप हैं तो दुनिया है परंतु उसका अहंकार नहीं जीवन प्रभु का प्रसाद है  इस दृष्टि से देखना चाहिए
 
जय श्री कृष्णा


गिले-शिकवों का भी कोई अंत नहीं साहिब..!

पत्थरों को शिकायत ये कि पानी की मार से टूट रहे हैं हम

और पानी का गिला ये है कि पत्थर हमें खुलकर बहने नहीं देते
    ???  सुप्रभात ???



लोगों को इज्जत देना ओर उन्हें माफ कर देना ये दोनो कमजोरी अगर आप के अंदर है,

तो आप इस दुनिया के  सबसे ताकतवर इन्सान हो....!!!

जय श्री कृष्ण?

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Star जीवन मंत्र
Posted by: admin - 11-09-2020, 03:03 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

जीवन मंत्र

✹ दरिद्रता के कारण ✹
✹ सुबह देरी से उठाना ।
✹ बिना नहाये धोये खाना ।
✹ मैले कपडे पहने रहना ।
✹ बालों को सवारना नही ।
✹ घर में मकड़ी के जाले लगे रहना ।
✹ शाम को घर मे अंधेरा रखना ।
✹ दांतो से नाख़ून को काटना ।
✹ घर मे बात बात पर झगड़ना ।
✹ बाएं पैर से पैंट पहना ।
✹ मेहमान आने पर नाराज होना।
✹ आमदनी से ज्यादा खर्च करना।
✹ रोटी काट कर खाना।
✹ चालीस दिन से ज्यादा बाल रखना ।
✹ पीने का पानी रात में खुला रखना
✹ रात में मागने वाले को कुछ ना देना
✹ बुरे ख्याल लाना।
✹ पवित्रता के बगैर धर्मग्रंथ पढना।
✹ शौच करते वक्त बाते करना।
✹ हाथ धोए बगैर भोजन करना ।
✹ अपनी औलाद को कोसना।
✹ दरवाजे पर बैठना।
✹ लहसुन प्याज के छिलके जलाना।
✹ साधू फकीर को अपमानित करना ।
✹ फूंक मार के दीपक बुझाना।
✹ ईश्वर को धन्यवाद किए बगैर भोजन करना
✹ झूठी कसम खाना।
✹ जूते चप्पल उल्टा देख करउसको सीधा नही करना।

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Star जिन्दगी रहे ना रहे, जीवित रहने का स्वाभिमान जरूरी है।
Posted by: admin - 11-09-2020, 02:59 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

बात बात में मां बाप का टोकना हमें अखरता है । हम भीतर ही भीतर झल्लाते है कि कब इनके टोकने की आदत से हमारा पीछा जुटेगा । लेकिन हम ये भूल जाते है कि उनके टोकने से जो संस्कार हम  ग्रहण कर रहे हैं, उनकी जीवन में क्या अहमियत है । इसी पर एक लेख किसी भाई ने भेजा है, जिसे मैं आगे शेयर करने से अपने आप को रोक नहीं पाया ।

साक्षात्कार

बड़ी दौड़ धूप के बाद ,
मैं  आज एक ऑफिस में  पहुंचा,
आज मेरा पहला इंटरव्यू था ,
घर से निकलते हुए मैं  सोच रहा था,
काश ! इंटरव्यू में आज
कामयाब हो गया , तो अपने
पुश्तैनी मकान को अलविदा
कहकर यहीं शहर में सेटल हो जाऊंगा, मम्मी पापा की रोज़ की
चिक चिक, मग़जमारी से छुटकारा मिल जायेगा।

सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक होने वाली चिक चिक  से परेशान हो गया हूँ।

जब सो कर उठो , तो पहले
बिस्तर ठीक करो ,
फिर बाथरूम जाओ,
बाथरूम से निकलो तो फरमान जारी होता है
नल बंद कर दिया?
तौलिया सही जगह रखा या यूँ ही फेंक दिया?
नाश्ता करके घर से निकलो तो डांट पडती है
पंखा बंद किया या चल रहा है?
क्या - क्या सुनें यार ,
नौकरी मिले तो घर छोड़ दूंगा..

वहाँ उस ऑफिस में बहुत सारे उम्मीदवार बैठे थे, बॉस का इंतज़ार कर रहे थे।
दस बज गए।

मैने देखा वहाँ आफिस में बरामदे की बत्ती अभी तक जल रही है ,
माँ याद आ गई , तो मैने बत्ती बुझा दी।

ऑफिस में रखे वाटर कूलर से पानी टपक रहा था ,
पापा की डांट याद आ गयी, तो पानी बन्द कर दिया।

बोर्ड पर लिखा था, इंटरव्यू दूसरी मंज़िल पर होगा।

सीढ़ी की लाइट भी जल रही थी , बंद करके आगे बढ़ा ,
तो एक कुर्सी रास्ते में थी, उसे हटाकर ऊपर गया।

?देखा पहले से मौजूद उम्मीदवार जाते और फ़ौरन बाहर आते,
पता किया तो मालूम हुआ बॉस
फाइल लेकर कुछ पूछते नहीं,
वापस भेज देते हैं ।?

नंबर आने पर मैने फाइल
मैनेजर की तरफ बढ़ा दी ।
कागज़ात पर नज़र दौडाने के बाद उन्होंने कहा
"कब ज्वाइन कर रहे हो?"

उनके सवाल से मुझे यूँ लगा जैसे
मज़ाक़ हो,
वो मेरा चेहरा देखकर कहने लगे, ये मज़ाक़ नहीं हक़ीक़त है।

आज के इंटरव्यू में किसी से कुछ पूछा ही नहीं,
सिर्फ CCTV में सबका बर्ताव देखा ,
सब आये लेकिन किसी ने नल या लाइट बंद नहीं किया।

धन्य हैं तुम्हारे माँ बाप, जिन्होंने तुम्हारी इतनी अच्छी परवरिश की और अच्छे संस्कार दिए।

जिस इंसान के पास Self discipline नहीं वो चाहे कितना भी होशियार और चालाक हो , मैनेजमेंट और ज़िन्दगी की दौड़ धूप में कामयाब नहीं हो सकता।

घर पहुंचकर मम्मी पापा को गले लगाया और उनसे माफ़ी मांगकर उनका शुक्रिया अदा किया।

अपनी ज़िन्दगी की आजमाइश में उनकी छोटी छोटी बातों पर रोकने और टोकने से , मुझे जो सबक़ हासिल हुआ , उसके मुक़ाबले , मेरे डिग्री की कोई हैसियत नहीं थी और पता चला ज़िन्दगी के मुक़ाबले में सिर्फ पढ़ाई लिखाई ही नहीं , तहज़ीब और संस्कार का भी अपना मक़ाम है...

संसार में जीने के लिए संस्कार  जरूरी है।
संस्कार के  लिए मां  बाप का सम्मान  जरूरी है।

जिन्दगी रहे ना रहे, जीवित रहने का स्वाभिमान जरूरी है।

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Star गाय की पूरी शारीरिक संरचना विज्ञान पर आधारित है; जानें कैसे
Posted by: admin - 11-09-2020, 02:52 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

गाय की पूरी शारीरिक संरचना विज्ञान पर आधारित है; जानें कैसे

हम बीमार क्यों होते हैं इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि हमारा शरीर पंचभूतों से निर्मित है। मानव के अतिरिक्त मानव उपयोगी समस्त जीवों का भी शरीर भी पंचभूतों से ही निर्मित है । वर्तमान चिकित्सा पद्धतियाँ आज के समय रासायनिक तरीकों से चिकित्सा करती हैं , उन्हें पंचभूत को संतुलित करने का कोई ज्ञान नहीं है । आज के समय मानव निर्मित सारे पंचभूत चाहे वह मिट्टी हो , जल हो , वायु हो , अग्नि हो या आकाश हो सब कुछ दूषित हो चुका है ।

हमारे महान ऋषि-मुनियों की प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों में पंचभूतो को ध्यान में रखकर चिकित्सा की जाती थी । हमें हमारे वातावरण के अनुरूप आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का ज्ञान हमारे ऋषि-मुनियों से मिला जो मानव की नाड़ी देखकर यह ज्ञात कर लेते थे कि हमारे शरीर का कौन सा पंचभूत असंतुलित है और उसके अनुरूप ही वो चिकित्सा करते थे ।

विश्व में यदि कहीं भी चिकित्सा का ज्ञान सर्वप्रथम उद्भव हुआ तो वह हमारा देश आर्याव्रत भारत वर्ष ही है । सर्वप्रथम पूरे विश्व को ज्ञान हमारे महान ऋषि-मुनियों ने दिया चाहे वह अध्यात्मिक क्षेत्र हो या आयुर्वेदिक  का क्षेत्र हो ।  यदि  किसी भी व्यक्ति ज्ञान ना हो तो वह व्यक्ति उस ज्ञान को जानने का प्रयास करता है लेकिन यहाँ उल्टा हुआ। अनेक विदेशी लुटेरों ने हमारे ज्ञान को लूटा और हमारे अस्तित्व को मिटाने के लिए उसमे आग लगा दी । वर्षों तक हमारे ज्ञानपीठ गुरुकुल तक्षशिला की पुस्तके आग में धू-धू करके जलती रही , इतना ही नहीं बचा खुचा ज्ञान भी हमारी संस्कृति को भी नष्ट करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है ।

अब प्रश्न यह उठता है जिस धरती को हम अपनी माँ मानते हैं उस धरती पर प्रतिदिन लाखों लीटर रासायनिक जहर डाला जा रहा है ..? ऐसा क्यों…?  विदेशों से प्रतिवर्ष अरबों टन कचरे को लाकर हमारी धरती पर को मरुस्थल बनाया जा रहा है । क्या हमारी यही संस्कृति है कि हम अपनी माँ को जहर दें , उसे कूड़ाघर बनाकर दूषित कर दें। हमारे देव तत्व जल , अग्नि , वायु और आकाश सब कुछ दूषित हो चुके हैं ।

पूरी नदियों में उद्योंगो  के कचरे को डालकर गंदे नाले के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है । वायु में असंख्य कीटनाशक रसायन , रेडियोएक्टिव पदार्थ डालकर वायु को दूषित किया जा रहा है । रेडियोएक्टिव तरंगो द्वारा आकाश तत्व को दूषित किया जा रहा है । हमारे शास्त्रों में लिखा है अनावश्यक रूप से अग्नि का प्रयोग ना करें , लेकिन चाहे हमें बीडी -सिगरेट जलाना हो या बड़े-बड़े उद्योग कारखाने चलाने हो , आवश्यकता हो या ना हो हमेशा अग्नि को जलाया जाता है ।

इन सब तमाम बातों का हमारे स्वास्थ्य और चिकित्सा से गहरा सम्बन्ध है , हमारी संस्कृति और सभ्यता में जहाँ प्रकृति के संतुलन की बात कही गयी है वहीँ आज बिना कारण के भी दुरुपयोग करके पंचभूतों को दूषित किया जा रहा है । आज इस दूषित पंचभूत को ठीक करना मानव के बस की बात नहीं है फिर कौन करेगा इसे सही…?

यह जिम्मेदारी हमसे अधिक सरकार की है लेकिन सरकार तो अंग्रेजी उपभोगों की आदी है उसको हमारे स्वास्थ्य से कुछ मतलब नहीं …

यदि हमें स्वस्थ्य रहना है तो इस ओर हमें ही ध्यान देना होगा । इस सृष्टि में पंचभूतों को शुद्ध करने का एक ही विकल्प है वह है गौ-माता , लेकिन सरकार ने गौ को भी बचाने का कोई प्रयास नहीं किया है इसको बचाने का कार्य हमें करना होगा अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब मानव का अस्तित्व खतरे में पड़ जायेगा ।

मानव को विमारियों से बचने के लिए 21% आक्सीजन की जरुरत है । यदि शरीर में आक्सीजन की कमी हो जाती है तो कैंसर होता है । आजकल शहरों में बढ़ते प्रदूषण के कारण 14 -15 % से अधिक आक्सीजन नहीं मिलता है जिसके कारण शरीर को ना तो पूरा आक्सीजन मिलता है और ना ही शुद्ध रक्त । शरीर की कोशिकाएं तीव्रता से मरती हैं , जिनको पुनर्जीवित करना असंभव है ।

गाय की पूरी शारीरिक संरचना विज्ञान पर आधारित है । गाय से उत्सर्जित एक-एक पदार्थ में ब्रह्म उर्जा , विष्णु उर्जा और शिव उर्जा भरी हुई है । गाय को आप कितने ही प्रदूषित वातावरण में रख दीजिये या कितना ही प्रदूषित जल या भोजन करा दीजिये गाय उस जहर रूपी प्रदूषण को दूध , दही , गोबर , गौ-मूत्र , या साँस के रूप में कभी बाहर नहीं उत्सर्जित करती है बल्कि गाय उसे अपने शरीर में ही धारण कर लेती है । आपको जो भी देगी विशुद्ध देगी ।

गाय का गोबर : – गाय के गोबर में 23 % आक्सीजन की मात्रा होती है । गाय के गोबर से बनी भस्म में 45 % आक्सीजन की मात्रा मिलती है । गाय के गोबर में मिट्टी तत्व है यदि आपको परिक्षण के लिए शुद्ध मिट्टी चाहिए तो गाय के गोबर से शुद्ध मिट्टी तत्व का उदहारण आपको कही नहीं मिलेगा । आक्सीजन भी भरपूर है यानि गोबर से ही वायु तत्व की पूर्ति हो रही है ।

* यह ध्यान रखें कि गाय के गोबर की भस्म बनाने का एक तरीका है , तभी आपको परिष्कृत शुद्ध आक्सीजन तथा पूर्ण तत्व मिल पायेगा । गाय के गोबर की भस्म मकर संक्रांति के बाद बनायीं जाती है ।

गाय का दूध :- गाय के दूध में अग्नि तत्व है । तथा इस दूध के भीतर 85 % जल तत्व है ।

गाय की दही : – गाय की दही में 60 % जल तत्व है । गाय की छाछ गाय के दूध से 400 गुना ज्यादा लाभकारी है । इसलिए गाय के छाछ को अमृत कहा जाता है । इसमें इतने अधिक पोषक तत्व होते हैं कि आप सोच भी नहीं सकते है ।

छाछ बनाने की अलग-अलग विधियाँ है। छाछ को किस जलवायु में कितनी मात्रा में पानी मिलाकर बनाना है इसका अलग-अलग तरीका है । तभी यह पूरा लाभ प्रदान करती है ।

गाय का मक्खन घी : – गाय के मक्खन में 40% जल तत्व है । मक्खन अद्भुत है इसके अन्दर भरपूर ब्रह्म उर्जा होती है । ब्रह्म उर्जा के बिना मानव के अन्दर सत्वगुण नहीं आते हैं । विना सत्वगुण के सवेदनशीलता शून्य हो जाती है । मान लीजिये किसी ने गुंडेगर्दी से आपके गाल पर थप्पड़ मार दिया तो आपके अन्दर यदि संवेदनशीलता नहीं है तो आप वर्दास्त कर लेंगे अन्यथा आप उस थप्पड़ का जरुर जबाब देंगे ।
आज बाजार में बटरआयल चल रहा यानि दूध से निकाली गयी क्रीम का आयल जो आपके भीतर संवेदनशीलता ख़त्म कर रहा है । भगवान् श्री कृष्ण ने मक्खन के कारण ही इतनी आसुरी शक्तियों का नाश किया ।
जय गौ माता की

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Star ।।यही जीवन है।।
Posted by: admin - 11-09-2020, 02:47 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

।।यही जीवन है।।

कुछ लोग अपनी पढाई 22 साल की उम्र में पुर्ण कर लेते हैं मगर उनको कई सालों तक कोई अच्छी नौकरी नहीं मिलती,

कुछ लोग 25 साल की उम्र में किसी कंपनी के सीईओ बन जाते हैं और 50 साल की उम्र में हमें पता चलता है वह नहीं रहे,

जबकि कुछ लोग 50 साल की उम्र में सीईओ बनते हैं और 90 साल तक आनंदित रहते हैं,

बेहतरीन रोज़गार होने के बावजूद कुछ लोग अभी तक ग़ैर शादीशुदा है और कुछ लोग बग़ैर रोज़गार के भी शादी कर चुके हैं और रोज़गार वालों से ज़्यादा खुश हैं,

बराक ओबामा 55 साल की उम्र में रिटायर हो गये जबकि ट्रंप 70 साल की उम्र में शुरुआत करते है,

कुछ लीजेंड परीक्षा में फेल हो जाने पर भी मुस्कुरा देते हैं और कुछ लोग एक नंबर कम आने पर भी रो देते हैं,

किसी को बग़ैर कोशिश के भी बहुत कुछ मिल गया और कुछ सारी ज़िंदगी बस एड़ियां ही रगड़ते रहे,

इस दुनिया में हर शख़्स अपने टाइम ज़ोन की बुनियाद पर काम कर रहा है,

ज़ाहिरी तौर पर हमें ऐसा लगता है कुछ लोग हमसे बहुत आगे निकल चुके हैं,
और शायद ऐसा भी लगता हो कुछ हमसे अभी तक पीछे हैं,

लेकिन हर व्यक्ति अपनी अपनी जगह ठीक है अपने अपने वक़्त के मुताबिक़....!!

किसी से भी अपनी तुलना मत कीजिए..

अपने टाइम ज़ोन में रहें
इंतज़ार कीजिए और
इत्मीनान रखिए...

ना ही आपको देर हुई है और ना ही जल्दी,

परमपिता परमेश्वर ने हम सबको अपने हिसाब से डिजा़इन किया है वह जानता है कौन कितना बोझ उठा सकता है किस को किस वक़्त क्या देना है,

विश्वास रखिए भगवान की ओर से हमारे लिए जो फैसला किया गया है वह सर्वोत्तम ही है।

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Star कार्तिक माह में तुलसी सेवा
Posted by: admin - 11-09-2020, 02:42 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

कार्तिक माह में तुलसी सेवा
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☀ जय जय श्री राधे  ☀

⚜ कार्तिक माह में तुलसी सेवा ⚜

"तुलसी हमारी आस्था एवं श्रद्धा की प्रतीक हैं..!!"
वर्ष भर तुलसी में जल अर्पित करना एवं सायंकाल तुलसी के नीचे दीप जलाना अत्यंत ही श्रेष्ठ माना जाता है।

"कार्तिक मास में तुलसी जी के समीप दीपक जलाने से मनुष्य अनंत पुण्य का भागी बनता है..
इस मास में तुलसी के समीप दीपक जलाने से व्यक्ति को साक्षात लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, क्योंकि तुलसी में साक्षात लक्ष्मी का निवास माना गया है।

पौराणिक कथा के अनुसार'..
गुणवती नामक स्त्री ने कार्तिक मास में मंदिर के द्वार पर तुलसी की एक सुन्दर सी वाटिका लगाई उस पुण्य के कारण वह अगले जन्म में सत्यभामा बनी और सदैव कार्तिक मास का व्रत करने के कारण वह भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी बनी।
'यह है कार्तिक मास में तुलसी आराधना का फल।'

इस मास में तुलसी विवाह की भी परंपरा है, जो कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है।
इसमें तुलसी के पौधे को सजाया संवारा जाता है एवं भगवान शालिग्राम जी का पूजन किया जाता है और तुलसी जी का विधिवत विवाह किया जाता है। जो व्यक्ति यह चाहता है कि उसके घर में सदैव शुभ कर्म हो, सदैव सुख, शान्ति का निवास रहे.. उसे तुलसी की आराधना अवश्य करनी चाहिए।

कहते हैं कि जिस घर में शुभ कर्म होते हैं, वहां तुलसी हरी-भरी रहती हैं
एवं जहां अशुभ कर्म होते हैं, वहां तुलसी कभी भी हरी-भरी नहीं रहतीं।                                                                 

राधा रानी जी की तुलसी सेवा प्रसंग ?

एक बार राधा जी सखी से बोली: सखी ! तुम श्री कृष्ण की प्रसन्नता के लिए किसी देवता की ऐसी पूजा बताओ, जो परम सौभाग्यवर्द्धक हो..!!

तब समस्त सखियों में श्रेष्ठ चन्द्रनना ने अपने हदय में एक क्षण तक कुछ विचार किया। फिर चंद्रनना ने कहा- राधे ! परम सौभाग्यदायक और श्रीकृष्ण की भी प्राप्ति के लिए 'वरदायक व्रत है' “तुलसीजी की सेवा” और तुलसी सेवन का ही नियम लेना चाहिये..!!

क्योकि तुलसी का यदि स्पर्श अथवा ध्यान, नाम, संकीर्तन, आरोपण, सेचन, किया जाये तो महान पुण्यप्रद होता है। हे राधे ! जो प्रतिदिन तुलसी की नौ प्रकार से भक्ति करते है, वे कोटि सहस्त्र युगों तक अपने उस सुकृत्य का उत्तम फल भोगते है..!!

मनुष्यों की लगायी हुई तुलसी जब तक शाखा, प्रशाखा, बीज, पुष्प, और सुन्दर दलों, के साथ पृथ्वी पर बढ़ती रहती है तब तक उनके वंश मै जो-जो जन्म लेता है, वे सभी हो हजार कल्पों तक श्रीहरि के धाम में निवास करते है, जो तुलसी मंजरी सिर पर रखकर प्राण त्याग करता है, वह सैकड़ो पापों से युक्त क्यों न हो.. यमराज उनकी ओर देख भी नहीं सकते..!!

इस प्रकार चन्द्रनना की कही बात सुनकर रासेश्वरी श्री राधा ने साक्षात्
श्री हरि को संतुष्ट करने वाले तुलसी सेवन का व्रत आरंभ किया।                                                               

श्री राधा रानी जी ने तुलसी सेवा व्रत करते हुए केतकी वन में सौ हाथ गोलाकार भूमि पर बहुत ऊँचा और अत्यंत मनोहर श्री तुलसी का मंदिर बनवाया, जिसकी दीवार सोने से जड़ी थी और किनारे-किनारे पद्मरागमणि लगी थी, वह सुन्दर-सुन्दर पन्ने हीरे और मोतियों के परकोटे से अत्यंत सुशोभित था, और उसके चारो ओर परिक्रमा के लिए गली बनायीं गई थी जिसकी भूमि चिंतामणि से मण्डित थी..!!

ऐसे तुलसी मंदिर के मध्य भाग में हरे पल्लवो से सुशोभित तुलसी की स्थापना करके श्री राधा रानी ने अभिजित मुहूर्त में उनकी सेवा प्रारम्भ की..!!

श्री राधा जी ने आश्र्विन शुक्ला पूर्णिमा से लेकर चैत्र पूर्णिमा तक तुलसी सेवन व्रत का अनुष्ठान किया, व्रत आरंभ करने उन्होंने प्रतिमास पृथक-पृथक रस से तुलसी को सींचा..!!

“कार्तिक में दूध से”, “मार्गशीर्ष में ईख के रस से”, “पौष में द्राक्षा रस से”,
“माघ में बारहमासी आम के रस से”, “फाल्गुन मास में अनेक वस्तुओ से मिश्रित मिश्री के रस से” और “चैत्र मास में पंचामृत से” उनका सेवन किया और वैशाख कृष्ण प्रतिपदा के दिन उद्यापन का उत्सव किया..!!

उन्होंने दो लाख ब्राह्मणों को छप्पन भोगो से तृप्त करके वस्त्र और आभूषणों के साथ दक्षिणा दी। मोटे-मोटे दिव्य मोतियों का एक लाख भार और सुवर्ण का एक कोटि भार श्री गर्गाचार्य को दिया..!!

उस समय आकाश से देवता तुलसी मंदिर पर फूलो की वर्षा करने लगे,
उसी समय सुवर्ण सिंहासन पर विराजमान हरिप्रिया तुलसी देवी प्रकट हुई। उनके चार भुजाएँ थी कमल दल के समान विशाल नेत्र थे सोलह वर्ष की अवस्था और श्याम कांति थी..!!

मस्तक पर हेममय किरीट प्रकाशित था और कानो में कंचनमय कुंडल झलमला रहे थे, गरुड़ से उतरकर तुलसी देवी ने रंग वल्ली जैसी श्री राधा जी को अपनी भुजाओ से अंक में भर लिया और उनके मुखचन्द्र का चुम्बन किया..!!

जय श्रीराधे कृष्ण ?

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☀ तुलसी पूजन के पौराणिक मंत्र पौराणिक ग्रंथों में तुलसी का बहुत महत्व माना गया है। जहां तुलसी का प्रतिदिन दर्शन करना पापनाशक समझा जाता है, वहीं तुलसी पूजन करना मोक्षदायक माना गया है। हिन्दू धर्म में देव पूजा और श्राद्ध कर्म में तुलसी आवश्यक मानी गई है।
तुलसी पत्र से पूजा करने से व्रत, यज्ञ, जप, होम, हवन करने का पुण्य प्राप्त होता है।

? तुलसी जी के स्तुति मन्त्र ?

☀ तुलसी के पत्ते तोड़ते समय बोलने के मंत्र

ॐ सुभद्राय नमः…ॐ सुप्रभाय नमः

मातस्तुलसि गोविन्द हृदयानन्द कारिणी
      नारायणस्य पूजार्थं चिनोमि त्वां नमोस्तुते ।।

☀ तुलसी को जल देने का मंत्र

महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी
      आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।।

☀ तुलसी स्तुति का मंत्र

देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः
      नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।

☀ तुलसी पूजन के बाद बोलने का तुलसी मंत्र

तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
      धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
      लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
      तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।

☀ तुलसी नामाष्टक मंत्र

वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
      पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
      एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।
      य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।
     
☀ सुबह स्नान के बाद घर के आंगन या देवालय में लगे तुलसी के पौधे की गंध, फूल, लाल वस्त्र अर्पित कर पूजा करें। फल का भोग लगाएं। धूप व दीप जलाकर उसके नजदीक बैठकर तुलसी की ही माला से तुलसी गायत्री मंत्र का श्रद्धा से सुख की कामना से कम से कम 108 बार स्मरण अंत में तुलसी की पूजा करें

ॐ श्री तुलस्यै विद्महे।
      विष्णु प्रियायै धीमहि।
      तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।।

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                  ॐ नमो भगवते वासुदेवाय               
       
─═✤═❖❥•◈❀°?°❀◈•❥❖═✤═─

  सुप्रभातम

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Smile हमारे पास तो पहले से ही अमृत से भरे कलश थे
Posted by: admin - 11-09-2020, 02:40 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

हमारे पास तो पहले से ही अमृत से भरे कलश थे...?

फिर हम वो अमृत फेंक कर उनमें कीचड़ भरने का काम क्यों कर रहे हैं...??

जरा इन पर विचार करें...???
० यदि मातृनवमी थी,
तो मदर्स डे क्यों लाया गया ?

० यदि कौमुदी महोत्सव था,
तो वेलेंटाइन डे क्यों लाया गया ?

० यदि गुरुपूर्णिमा थी,
तो टीचर्स डे क्यों लाया गया ?

० यदि धन्वन्तरि जयन्ती थी,
तो डाक्टर्स डे क्यों लाया गया ?

० यदि विश्वकर्मा जयंती थी,
तो प्रद्यौगिकी दिवस क्यों लाया गया ?

० यदि सन्तान सप्तमी थी,
तो चिल्ड्रन्स डे क्यों लाया गया ?

० यदि नवरात्रि और कन्या भोज था,
तो डॉटर्स डे क्यों लाया गया ?

० रक्षाबंधन है तो सिस्टर्स डे क्यों ?

० भाईदूज है ब्रदर्स डे क्यों ?

० आंवला नवमी, तुलसी विवाह मनाने वाले हिंदुओं को एनवायरमेंट डे की क्या आवश्यकता ?

० केवल इतना ही नहीं, नारद जयन्ती ब्रह्माण्डीय पत्रकारिता दिवस है...

० पितृपक्ष 7 पीढ़ियों तक के पूर्वजों का पितृपर्व है...

० नवरात्रि को स्त्री के नवरूप दिवस के रूप में स्मरण कीजिये...

सनातन पर्वों को अवश्य मनाईये...

आपकी सनातन संस्कृति में मनाए जाने वाले विभिन्न पर्व और त्योहार मिशनरीयों के धर्मांतरण की राह में बधक हैं, बस इसीलिए आपके धार्मिक परंपराओं से मिलते जुलते Program लाए जा रहे हैं।


अब पृथ्वी के सनातन भाव को स्वीकार करना ही होगा। यदि हम समय रहते नहीं चेते तो वे ही हमें वेद, शास्त्र, संस्कृत भी पढ़ाने आ जाएंगे !

इसका एक ही उपाय है कि अपनी जड़ों की ओर लौटिए। अपने सनातन मूल की ओर लौटिए, व्रत, पर्व, त्यौहारों को मनाइए, अपनी संस्कृति और सभ्यता को जीवंत कीजिये। जीवन में भारतीय पंचांग अपनाना चाहिए, जिससे भारत अपने पर्वों, त्यौहारों से लेकर मौसम की भी अनेक जानकारियां सहज रूप से जान व समझ लेता है...

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Star कौन से ऋषि का क्या है महत्व
Posted by: admin - 11-09-2020, 02:35 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

कौन से ऋषि का क्या है महत्व-
〰️〰️?〰️〰️〰️?〰️〰️
महत्वपूर्ण जानकारी
〰️〰️??〰️〰️
अंगिरा ऋषि? ऋग्वेद के प्रसिद्ध ऋषि अंगिरा ब्रह्मा के पुत्र थे। उनके पुत्र बृहस्पति देवताओं के गुरु थे। ऋग्वेद के अनुसार, ऋषि अंगिरा ने सर्वप्रथम अग्नि उत्पन्न की थी।

विश्वामित्र ऋषि? गायत्री मंत्र का ज्ञान देने वाले विश्वामित्र वेदमंत्रों के सर्वप्रथम द्रष्टा माने जाते हैं। आयुर्वेदाचार्य सुश्रुत इनके पुत्र थे। विश्वामित्र की परंपरा पर चलने वाले ऋषियों ने उनके नाम को धारण किया। यह परंपरा अन्य ऋषियों के साथ भी चलती रही।

वशिष्ठ ऋषि? ऋग्वेद के मंत्रद्रष्टा और गायत्री मंत्र के महान साधक वशिष्ठ सप्तऋषियों में से एक थे। उनकी पत्नी अरुंधती वैदिक कर्मो में उनकी सहभागी थीं।

कश्यप ऋषि? मारीच ऋषि के पुत्र और आर्य नरेश दक्ष की १३ कन्याओं के पुत्र थे। स्कंद पुराण के केदारखंड के अनुसार, इनसे देव, असुर और नागों की उत्पत्ति हुई।

जमदग्नि ऋषि? भृगुपुत्र यमदग्नि ने गोवंश की रक्षा पर ऋग्वेद के १६ मंत्रों की रचना की है। केदारखंड के अनुसार, वे आयुर्वेद और चिकित्साशास्त्र के भी विद्वान थे।

अत्रि ऋषि? सप्तर्षियों में एक ऋषि अत्रि ऋग्वेद के पांचवें मंडल के अधिकांश सूत्रों के ऋषि थे। वे चंद्रवंश के प्रवर्तक थे। महर्षि अत्रि आयुर्वेद के आचार्य भी थे।

अपाला ऋषि? अत्रि एवं अनुसुइया के द्वारा अपाला एवं पुनर्वसु का जन्म हुआ। अपाला द्वारा ऋग्वेद के सूक्त की रचना की गई। पुनर्वसु भी आयुर्वेद के प्रसिद्ध आचार्य हुए।

नर और नारायण ऋषि?  ऋग्वेद के मंत्र द्रष्टा ये ऋषि धर्म और मातामूर्ति देवी के पुत्र थे। नर और नारायण दोनों भागवत धर्म तथा नारायण धर्म के मूल प्रवर्तक थे।

पराशर ऋषि? ऋषि वशिष्ठ के पुत्र पराशर कहलाए, जो पिता के साथ हिमालय में वेदमंत्रों के द्रष्टा बने। ये महर्षि व्यास के पिता थे।

भारद्वाज ऋषि? बृहस्पति के पुत्र भारद्वाज ने 'यंत्र सर्वस्व' नामक ग्रंथ की रचना की थी, जिसमें विमानों के निर्माण, प्रयोग एवं संचालन के संबंध में विस्तारपूर्वक वर्णन है। ये आयुर्वेद के ऋषि थे तथा धन्वंतरि इनके शिष्य थे।

आकाश में सात तारों का एक मंडल नजर आता है उन्हें सप्तर्षियों का मंडल कहा जाता है। उक्त मंडल के तारों के नाम भारत के महान सात संतों के आधार पर ही रखे गए हैं। वेदों में उक्त मंडल की स्थिति, गति, दूरी और विस्तार की विस्तृत चर्चा मिलती है। प्रत्येक मनवंतर में सात सात ऋषि हुए हैं। यहां प्रस्तुत है वैवस्तवत मनु के काल में जन्में सात महान ‍ऋषियों का संक्षिप्त परिचय।

वेदों के रचयिता ऋषि ? ऋग्वेद में लगभग एक हजार सूक्त हैं, लगभग दस हजार मन्त्र हैं। चारों वेदों में करीब बीस हजार हैं और इन मन्त्रों के रचयिता कवियों को हम ऋषि कहते हैं। बाकी तीन वेदों के मन्त्रों की तरह ऋग्वेद के मन्त्रों की रचना में भी अनेकानेक ऋषियों का योगदान रहा है। पर इनमें भी सात ऋषि ऐसे हैं जिनके कुलों में मन्त्र रचयिता ऋषियों की एक लम्बी परम्परा रही। ये कुल परंपरा ऋग्वेद के सूक्त दस मंडलों में संग्रहित हैं और इनमें दो से सात यानी छह मंडल ऐसे हैं जिन्हें हम परम्परा से वंशमंडल कहते हैं क्योंकि इनमें छह ऋषिकुलों के ऋषियों के मन्त्र इकट्ठा कर दिए गए हैं।

वेदों का अध्ययन करने पर जिन सात ऋषियों या ऋषि कुल के नामों का पता चलता है वे नाम क्रमश: इस प्रकार है:- १.वशिष्ठ, २.विश्वामित्र, ३.कण्व, ४.भारद्वाज, ५.अत्रि, ६.वामदेव और ७.शौनक।

पुराणों में सप्त ऋषि के नाम पर भिन्न-भिन्न नामावली मिलती है। विष्णु पुराण अनुसार इस मन्वन्तर के सप्तऋषि इस प्रकार है :-

वशिष्ठकाश्यपो यात्रिर्जमदग्निस्सगौत।
विश्वामित्रभारद्वजौ सप्त सप्तर्षयोभवन्।।

अर्थात् सातवें मन्वन्तर में सप्तऋषि इस प्रकार हैं:- वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज।

इसके अलावा पुराणों की अन्य नामावली इस प्रकार है:- ये क्रमशः केतु, पुलह, पुलस्त्य, अत्रि, अंगिरा, वशिष्ट तथा मारीचि है।

महाभारत में सप्तर्षियों की दो नामावलियां मिलती हैं। एक नामावली में कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ के नाम आते हैं तो दूसरी नामावली में पांच नाम बदल जाते हैं। कश्यप और वशिष्ठ वहीं रहते हैं पर बाकी के बदले मरीचि, अंगिरस, पुलस्त्य, पुलह और क्रतु नाम आ जाते हैं। कुछ पुराणों में कश्यप और मरीचि को एक माना गया है तो कहीं कश्यप और कण्व को पर्यायवाची माना गया है। यहां प्रस्तुत है वैदिक नामावली अनुसार सप्तऋषियों का परिचय।

१. वशिष्ठ? राजा दशरथ के कुलगुरु ऋषि वशिष्ठ को कौन नहीं जानता। ये दशरथ के चारों पुत्रों के गुरु थे। वशिष्ठ के कहने पर दशरथ ने अपने चारों पुत्रों को ऋषि विश्वामित्र के साथ आश्रम में राक्षसों का वध करने के लिए भेज दिया था। कामधेनु गाय के लिए वशिष्ठ और विश्वामित्र में युद्ध भी हुआ था। वशिष्ठ ने राजसत्ता पर अंकुश का विचार दिया तो उन्हीं के कुल के मैत्रावरूण वशिष्ठ ने सरस्वती नदी के किनारे सौ सूक्त एक साथ रचकर नया इतिहास बनाया।

२. विश्वामित्र? ऋषि होने के पूर्व विश्वामित्र राजा थे और ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय को हड़पने के लिए उन्होंने युद्ध किया था, लेकिन वे हार गए। इस हार ने ही उन्हें घोर तपस्या के लिए प्रेरित किया। विश्वामित्र की तपस्या और मेनका द्वारा उनकी तपस्या भंग करने की कथा जगत प्रसिद्ध है। विश्वामित्र ने अपनी तपस्या के बल पर त्रिशंकु को सशरीर स्वर्ग भेज दिया था। इस तरह ऋषि विश्वामित्र के असंख्य किस्से हैं।

माना जाता है कि हरिद्वार में आज जहां शांतिकुंज हैं उसी स्थान पर विश्वामित्र ने घोर तपस्या करके इंद्र से रुष्ठ होकर एक अलग ही स्वर्ग लोक की रचना कर दी थी। विश्वामित्र ने इस देश को ऋचा बनाने की विद्या दी और गायत्री मन्त्र की रचना की जो भारत के हृदय में और जिह्ना पर हजारों सालों से आज तक अनवरत निवास कर रहा है।

३. कण्व? माना जाता है इस देश के सबसे महत्वपूर्ण यज्ञ सोमयज्ञ को कण्वों ने व्यवस्थित किया। कण्व वैदिक काल के ऋषि थे। इन्हीं के आश्रम में हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत की पत्नी शकुंतला एवं उनके पुत्र भरत का पालन-पोषण हुआ था।

४. भारद्वाज? वैदिक ऋषियों में भारद्वाज-ऋषि का उच्च स्थान है। भारद्वाज के पिता बृहस्पति और माता ममता थीं। भारद्वाज ऋषि राम के पूर्व हुए थे, लेकिन एक उल्लेख अनुसार उनकी लंबी आयु का पता चलता है कि वनवास के समय श्रीराम इनके आश्रम में गए थे, जो ऐतिहासिक दृष्टि से त्रेता-द्वापर का सन्धिकाल था। माना जाता है कि भरद्वाजों में से एक भारद्वाज विदथ ने दुष्यन्त पुत्र भरत का उत्तराधिकारी बन राजकाज करते हुए मन्त्र रचना जारी रखी।

ऋषि भारद्वाज के पुत्रों में १० ऋषि ऋग्वेद के मन्त्रदृष्टा हैं और एक पुत्री जिसका नाम 'रात्रि' था, वह भी रात्रि सूक्त की मन्त्रदृष्टा मानी गई हैं। ॠग्वेद के छठे मण्डल के द्रष्टा भारद्वाज ऋषि हैं। इस मण्डल में भारद्वाज के ७६५ मन्त्र हैं। अथर्ववेद में भी भारद्वाज के २३ मन्त्र मिलते हैं। 'भारद्वाज-स्मृति' एवं 'भारद्वाज-संहिता' के रचनाकार भी ऋषि भारद्वाज ही थे। ऋषि भारद्वाज ने 'यन्त्र-सर्वस्व' नामक बृहद् ग्रन्थ की रचना की थी। इस ग्रन्थ का कुछ भाग स्वामी ब्रह्ममुनि ने 'विमान-शास्त्र' के नाम से प्रकाशित कराया है। इस ग्रन्थ में उच्च और निम्न स्तर पर विचरने वाले विमानों के लिए विविध धातुओं के निर्माण का वर्णन मिलता है।

५. अत्रि? ऋग्वेद के पंचम मण्डल के द्रष्टा महर्षि अत्रि ब्रह्मा के पुत्र, सोम के पिता और कर्दम प्रजापति व देवहूति की पुत्री अनुसूया के पति थे। अत्रि जब बाहर गए थे तब त्रिदेव अनसूया के घर ब्राह्मण के भेष में भिक्षा मांगने लगे और अनुसूया से कहा कि जब आप अपने संपूर्ण वस्त्र उतार देंगी तभी हम भिक्षा स्वीकार करेंगे, तब अनुसूया ने अपने सतित्व के बल पर उक्त तीनों देवों को अबोध बालक बनाकर उन्हें भिक्षा दी। माता अनुसूया ने देवी सीता को पतिव्रत का उपदेश दिया था।

अत्रि ऋषि ने इस देश में कृषि के विकास में पृथु और ऋषभ की तरह योगदान दिया था। अत्रि लोग ही सिन्धु पार करके पारस (आज का ईरान) चले गए थे, जहां उन्होंने यज्ञ का प्रचार किया। अत्रियों के कारण ही अग्निपूजकों के धर्म पारसी धर्म का सूत्रपात हुआ। अत्रि ऋषि का आश्रम चित्रकूट में था। मान्यता है कि अत्रि-दम्पति की तपस्या और त्रिदेवों की प्रसन्नता के फलस्वरूप विष्णु के अंश से महायोगी दत्तात्रेय, ब्रह्मा के अंश से चन्द्रमा तथा शंकर के अंश से महामुनि दुर्वासा महर्षि अत्रि एवं देवी अनुसूया के पुत्र रूप में जन्मे। ऋषि अत्रि पर अश्विनीकुमारों की भी कृपा थी।

६. वामदेव? वामदेव ने इस देश को सामगान (अर्थात् संगीत) दिया। वामदेव ऋग्वेद के चतुर्थ मंडल के सूत्तद्रष्टा, गौतम ऋषि के पुत्र तथा जन्मत्रयी के तत्ववेत्ता माने जाते हैं।

७. शौनक? शौनक ने दस हजार विद्यार्थियों के गुरुकुल को चलाकर कुलपति का विलक्षण सम्मान हासिल किया और किसी भी ऋषि ने ऐसा सम्मान पहली बार हासिल किया। वैदिक आचार्य और ऋषि जो शुनक ऋषि के पुत्र थे।

फिर से बताएं तो वशिष्ठ, विश्वामित्र, कण्व, भरद्वाज, अत्रि, वामदेव और शौनक- ये हैं वे सात ऋषि जिन्होंने इस देश को इतना कुछ दे डाला कि कृतज्ञ देश ने इन्हें आकाश के तारामंडल में बिठाकर एक ऐसा अमरत्व दे दिया कि सप्तर्षि शब्द सुनते ही हमारी कल्पना आकाश के तारामंडलों पर टिक जाती है।

इसके अलावा मान्यता हैं कि अगस्त्य, कष्यप, अष्टावक्र, याज्ञवल्क्य, कात्यायन, ऐतरेय, कपिल, जेमिनी, गौतम आदि सभी ऋषि उक्त सात ऋषियों के कुल के होने के कारण इन्हें भी वही स्तर  प्राप्त है।

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Star निस्वार्थ भाव से कर्म करो
Posted by: admin - 11-09-2020, 02:32 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

निस्वार्थ भाव से कर्म करो

एक बार किसी रेलवे प्लैटफॉर्म पर जब गाड़ी रुकी तो एक लड़का पानी बेचता हुआ निकला।
ट्रेन में बैठे एक सेठ ने उसे आवाज दी,ऐ लड़के इधर आ।

लड़का दौड़कर आया।

उसने पानी का गिलास भरकर सेठ
की ओर बढ़ाया तो सेठ ने पूछा,
कितने पैसे में?

लड़के ने कहा - पच्चीस पैसे।

सेठ ने उससे कहा कि पंदह पैसे में देगा क्या?

यह सुनकर लड़का हल्की मुस्कान
दबाए पानी वापस घड़े में उड़ेलता हुआ आगे बढ़ गया।

उसी डिब्बे में एक महात्मा बैठे थे,
जिन्होंने यह नजारा देखा था कि लड़का मुस्कराय मौन रहा।

जरूर कोई रहस्य उसके मन में होगा।

महात्मा नीचे उतरकर उस लड़के के
पीछे- पीछे गए।

बोले : ऐ लड़के ठहर जरा, यह तो बता तू हंसा क्यों?

वह लड़का बोला,

महाराज, मुझे हंसी इसलिए आई कि सेठजी को प्यास तो लगी ही नहीं थी।
वे तो केवल पानी के गिलास का रेट पूछ रहे थे।

महात्मा ने पूछा -

लड़के, तुझे ऐसा क्यों लगा कि सेठजी को प्यास लगी ही नहीं थी।

लड़के ने जवाब दिया -

महाराज, जिसे वाकई प्यास लगी हो वह कभी रेट नहीं पूछता।

वह तो गिलास लेकर पहले पानी पीता है।
फिर बाद में पूछेगा कि कितने पैसे देने हैं?

पहले कीमत पूछने का अर्थ हुआ कि प्यास लगी ही नहीं है।

वास्तव में जिन्हें ईश्वर और जीवन में
कुछ पाने की तमन्ना होती है,
वे वाद-विवाद में नहीं पड़ते।

पर जिनकी प्यास सच्ची नहीं होती,
वे ही वाद-विवाद में पड़े रहते हैं।
वे साधना के पथ पर आगे नहीं बढ़ते.

अगर भगवान नहीं हे तो उसका ज़िक्र क्यो??

और अगर भगवान हे तो फिर फिक्र क्यों ???
:
" मंज़िलों से गुमराह भी ,कर देते हैं कुछ लोग ।।

हर किसी से रास्ता पूछना अच्छा नहीं होता..

अगर कोई पूछे जिंदगी में क्या खोया और क्या पाया ...

तो बेशक कहना...

जो कुछ खोया वो मेरी नादानी थी

और जो भी पाया वो रब की मेहेरबानी थी!

खुबसूरत रिश्ता है मेरा और भगवान के बीच में ज्यादा मैं मांगता नहीं और कम वो देता नही....
जन्म अपने हाथ में नहीं ;
मरना अपने हाथ में नहीं ;पर जीवन को अपने तरीके से जीना अपने हाथ में होता है
मस्ती करो मुस्कुराते रहो ;
सबके दिलों में जगह बनाते रहो ।I
जीवन का 'आरंभ' अपने रोने से होता हैं
और
जीवन का 'अंत' दूसरों के रोने से,
इस "आरंभ और अंत" के बीच का समय भरपूर हास्य भरा हो.
..बस यही सच्चा जीवन है..

    निस्वार्थ भाव से कर्म करो       
              क्योंकि.....
          इस धरा का...
          इस धरा पर...               
      सब धरा रह जायेगा।

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Thumbs Up I like this link
Posted by: Ram - 11-09-2020, 02:22 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

I like this link too much aap bhi suno ye mantra bahut aacha hain   https://www.reikiandastrologypredictions...php?tid=24

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Star ❇ BALANCE SHEET Of LIFE ❇
Posted by: admin - 11-09-2020, 02:00 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

❇ BALANCE SHEET Of LIFE ❇

              Birth is your
          Opening Stock
                 
    What comes to you
                  is
                Credit.
                 
    What goes from you
                  is
              Debit.

        Death is your
        Closing Stock.

    Your friends are your
              Assets.

    Your bad habits are 
        your Liabilities.

    Your happiness is
                your
              Profit.

    Your sorrow is your
                Loss.

        Your soul is your
              Goodwill.

    Your heart is your
                fixed Assets

    Your character is
            your
          Capital.

    Your knowledge is
            your
        Investment

      Your age is your
          Depreciation.
         
          And finally :

Always  Remember :
          GOD IS YOUR AUDITOR

Have a nice balance sheet of Life

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Star Indian Premier League Final DELHI CAPITALS Vs MUMBAI INDIANS
Posted by: admin - 11-09-2020, 12:18 PM - Forum: IPL T-20 - No Replies

Indian Premier League

Final, Dubai, Nov 10 2020, IST 07:30 PM UAE 6 PM 

DELHI CAPITALS Vs MUMBAI INDIANS

When more runs will be scored wicket will fall who win the match all updates soon in comments below.

IPL T20

Match Report: 

Why Cricket Predictions by astrology?

Yes it is challenging difficult many calculations required to know which team will win. This work is only to show that Astrology is accurate and scientific and can't go wrong, yes but the astrologer may go wrong if does wrong calculations and mistakes in giving predictions by reading horoscope charts.

OPEN FOR ALL. FREE CRICKET PREDICTIONS ONLY FOR ENTERTAINMENT
Astrology can be used for any good cause in life. Be positive and find right ways. Good Karma is the only key to success in life.

We see DELHI CAPITALS won the toss and chose to bat.

Today's Prediction: In today's match possibility of winning DELHI CAPITALS is less than MUMBAI INDIANS.

Few points will be covered everyday.
1. Which team will have big partnership in scoring runs.
2. Today more catch out / run out or bold.
3. Which team hit more 4s and 6s.
4. Which team will have good bowler with best economy for today.
5. Which team will have good batsman and score high.

Please do not miss to check on main post, sometimes in replies you will get only wicket fall and high score predictions. Who will win in beginning of the post.

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Thumbs Up सोच का खेल
Posted by: iroffwerymoma - 11-08-2020, 11:09 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

सोच का खेल

ये कथा घर में सबको सुनायें

एक महिला को सब्जी मण्डी जाना था..

उसने जूट का बैग लिया और सड़क के किनारे सब्जी मण्डी की ओर चल पड़ी...

  तभी पीछे से एक ऑटो वाले ने आवाज़ दी : —'कहाँ जायेंगी माता जी...?''

महिला ने ''नहीं भैय्या'' कहा तो ऑटो वाला आगे निकल गया.

अगले दिन महिला अपनी बिटिया मानवी को स्कूल बस में बैठाकर घर लौट रही थी...

  तभी पीछे से एक ऑटो वाले ने आवाज़ दी :—बहनजी चन्द्रनगर जाना है क्या...?''

महिला ने मना कर दिया...

  पास से गुजरते उस ऑटोवाले को देखकर महिला पहचान गयी कि ये कल वाला ही ऑटो वाला था.

    आज महिला को अपनी सहेली के घर जाना था.

  वह सड़क किनारे खड़ी होकर ऑटो की प्रतीक्षा करने लगी.

तभी एक ऑटो आकर रुका :—''कहाँ जाएंगी मैडम...?''

महिला ने देखा ये वो ही ऑटोवाला है जो कई बार इधर से गुज़रते हुए उससे पूंछता रहता है चलने के लिए..

महिला बोली :— ''मधुबन कॉलोनी है ना सिविल लाइन्स में, वहीँ जाना है.. चलोगे...?''

ऑटोवाला मुस्कुराते हुए बोला :— ''चलेंगें क्यों नहीं मैडम..आ जाइये...!"

ऑटो वाले के ये कहते ही महिला ऑटो में बैठ गयी.

    ऑटो स्टार्ट होते ही महिला ने जिज्ञासावश उस ऑटोवाले से पूंछ ही लिया :—''भैय्या एक बात बताइये..?-

        दो-तीन दिन पहले आप मुझे माताजी कहकर चलने के लिए पूंछ रहे थे,

कल बहनजी और आज मैडम, ऐसा क्यूँ...?''

ऑटोवाला थोड़ा झिझककर शरमाते हुए बोला :—''जी सच बताऊँ... आप चाहे जो भी समझेँ पर किसी का भी पहनावा हमारी सोच पर असर डालता है.

आप दो-तीन दिन पहले साड़ी में थीं तो एकाएक मन में आदर के भाव जागे,

क्योंकि,

मेरी माँ हमेशा साड़ी ही पहनती है.

    इसीलिए मुँह से स्वयं ही "माताजी'" निकल गया.

      कल आप सलवार-कुर्ती में थीँ, जो मेरी बहन भी पहनती है

    इसीलिए आपके प्रति स्नेह का भाव मन में जागा और मैंने ''बहनजी'' कहकर आपको आवाज़ दे दी.

आज आप जीन्स-टॉप में हैं, और इस लिबास में माँ या बहन के भाव तो नहीँ जागते.

इसीलिए मैंने आपको "मैडम" कहकर पुकारा.

कथासार
हमारे परिधान का न केवल हमारे विचारों पर वरन दूसरे के भावों को भी बहुत प्रभावित करता है.

टीवी, फिल्मों या औरों को देखकर पहनावा ना बदलें, बल्कि विवेक और संस्कृति की ओर भी ध्यान दें.

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Star Indian Premier League Qualifier 2 DELHI CAPITALS Vs SUNRISERS HYDERABAD
Posted by: admin - 11-08-2020, 05:06 PM - Forum: IPL T-20 - No Replies

Indian Premier League

Qualifier 2, Abu Dhabi, Nov 8 2020, IST 07:30 PM UAE 6 PM 

DELHI CAPITALS Vs SUNRISERS HYDERABAD

When more runs will be scored wicket will fall who win the match all updates soon in comments below.

IPL T20

Match Report: 

Why Cricket Predictions by astrology?

Yes it is challenging difficult many calculations required to know which team will win. This work is only to show that Astrology is accurate and scientific and can't go wrong, yes but the astrologer may go wrong if does wrong calculations and mistakes in giving predictions by reading horoscope charts.

OPEN FOR ALL. FREE CRICKET PREDICTIONS ONLY FOR ENTERTAINMENT
Astrology can be used for any good cause in life. Be positive and find right ways. Good Karma is the only key to success in life.

We see DELHI CAPITALS won the toss and chose to bat.

Today's Prediction: In today's match possibility of winning DELHI CAPITALS is more than SUNRISERS HYDERABAD.

Few points will be covered everyday.
1. Which team will have big partnership in scoring runs.
2. Today more catch out / run out or bold.
3. Which team hit more 4s and 6s.
4. Which team will have good bowler with best economy for today.
5. Which team will have good batsman and score high.

Please do not miss to check on main post, sometimes in replies you will get only wicket fall and high score predictions. Who will win in beginning of the post.

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Star Indian Premier League Eliminator ROYAL CHALLENGERS BANGALORE Vs SUNRISERS HYDERABAD
Posted by: admin - 11-08-2020, 05:02 PM - Forum: IPL T-20 - No Replies

Indian Premier League

Eliminator, Abu Dhabi, Nov 6 2020, IST 07:30 PM UAE 6 PM 

ROYAL CHALLENGERS BANGALORE Vs SUNRISERS HYDERABAD

When more runs will be scored wicket will fall who win the match all updates soon in comments below.

IPL T20

Match Report: 

Why Cricket Predictions by astrology?

Yes it is challenging difficult many calculations required to know which team will win. This work is only to show that Astrology is accurate and scientific and can't go wrong, yes but the astrologer may go wrong if does wrong calculations and mistakes in giving predictions by reading horoscope charts.

OPEN FOR ALL. FREE CRICKET PREDICTIONS ONLY FOR ENTERTAINMENT
Astrology can be used for any good cause in life. Be positive and find right ways. Good Karma is the only key to success in life.

We see SUNRISERS HYDERABAD won the toss and chose to field.

Today's Prediction: In today's match possibility of winning ROYAL CHALLENGERS BANGALORE is less than SUNRISERS HYDERABAD.

Few points will be covered everyday.
1. Which team will have big partnership in scoring runs.
2. Today more catch out / run out or bold.
3. Which team hit more 4s and 6s.
4. Which team will have good bowler with best economy for today.
5. Which team will have good batsman and score high.

Please do not miss to check on main post, sometimes in replies you will get only wicket fall and high score predictions. Who will win in beginning of the post.

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Star Indian Premier League Qualifier 1 MUMBAI INDIANS Vs DELHI CAPITALS
Posted by: admin - 11-08-2020, 04:55 PM - Forum: IPL T-20 - No Replies

Indian Premier League

Qualifier 1, DUBAI, Nov 5 2020, IST 07:30 PM UAE 6 PM 

MUMBAI INDIANS Vs DELHI CAPITALS

When more runs will be scored wicket will fall who win the match all updates soon in comments below.

IPL T20

Match Report: 

Why Cricket Predictions by astrology?

Yes it is challenging difficult many calculations required to know which team will win. This work is only to show that Astrology is accurate and scientific and can't go wrong, yes but the astrologer may go wrong if does wrong calculations and mistakes in giving predictions by reading horoscope charts.

OPEN FOR ALL. FREE CRICKET PREDICTIONS ONLY FOR ENTERTAINMENT
Astrology can be used for any good cause in life. Be positive and find right ways. Good Karma is the only key to success in life.

We see DELHI CAPITALS won the toss and chose to field.

Today's Prediction: In today's match possibility of winning MUMBAI INDIANS is more than DELHI CAPITALS.

Few points will be covered everyday.
1. Which team will have big partnership in scoring runs.
2. Today more catch out / run out or bold.
3. Which team hit more 4s and 6s.
4. Which team will have good bowler with best economy for today.
5. Which team will have good batsman and score high.

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Thumbs Up एक पागल भिखारी?
Posted by: jehnzyndexty1007 - 11-08-2020, 06:51 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

दुर्जनस्य च सर्पस्य वरं सर्पो न दुर्जनः ।

सर्पो दंशति काले तु दुर्जनस्तु पदे पदे ॥३-४॥

[दुर्जनस्य च सर्पस्य वरम् सर्पः न दुर्जनः, सर्पः दंशति काले तु, दुर्जनः तु पदे पदे ।]

अर्थ – दुर्जन मनुष्य एवं सांप में सांप ही अपेक्षया बेहतर है। सांप तो तब डंसता  है जब समय वैसी परिस्थिति आ पड़े, किंतु दुर्जन तो पग-पग पर नुकसान पहुंचाता है।

दुर्जन वह है जिसके स्वभाव में सकारण-अकारण दूसरों को हानि पहुंचाना निहित होता है। जब भी मौका मिले वह दूसरे का अहित साधने में चूकता नहीं भले ही ऐसा करने में उसका कोई लाभ न हो। सांप ऐसी योजना नहीं बनाता; वह तो केवल अपने बचाव में डंसता है आवश्यक हो जाने पर।




एक पागल भिखारी


जब बुढ़ापे में अकेला ही रहना है तो औलाद क्यों पैदा करें उन्हें क्यों काबिल बनाएं जो हमें बुढ़ापे में दर-दर के ठोकरें खाने  के लिए छोड़ दे ।


क्यों दुनिया मरती है औलाद के लिए, जरा सोचिए इस विषय पर।

मराठी भाषा से हिन्दी ट्रांसलेशन की गई ये सच्ची कथा है ।

जीवन के प्रति एक नया दृष्टिकोण आपको प्राप्त होगा।समय निकालकर अवश्य पढ़ें।
?
हमेशा की तरह मैं आज भी, परिसर के बाहर बैठे भिखारियों की मुफ्त स्वास्थ्य जाँच में व्यस्त था। स्वास्थ्य जाँच और फिर मुफ्त मिलने वाली दवाओं के लिए सभी भीड़ लगाए कतार में खड़े थे।

अनायाश सहज ही मेरा ध्यान गया एक बुजुर्ग की तरफ गया, जो करीब ही एक पत्थर पर बैठे हुए थे। सीधी नाक, घुँघराले बाल, निस्तेज आँखे, जिस्म पर सादे, लेकिन साफ सुथरे कपड़े।
कुछ देर तक उन्हें देखने के बाद मुझे यकीन हो गया कि, वो भिखारी नहीं हैं। उनका दाँया पैर टखने के पास से कटा हुआ था, और करीब ही उनकी बैसाखी रखी थी।

फिर मैंने देखा कि,आते जाते लोग उन्हें भी कुछ दे रहे थे और वे लेकर रख लेते थे। मैंने सोचा ! कि मेरा ही अंदाज गलत था, वो बुजुर्ग भिखारी ही हैं।

उत्सुकतावश मैं उनकी तरफ बढ़ा तो कुछ लोगों ने मझे आवाज लगाई :
"उसके करीब ना जाएँ डॉक्टर साहब,
वो बूढा तो पागल है । "

लेकिन मैं उन आवाजों को नजरअंदाज करता, मैं उनके पास गया। सोचा कि, जैसे दूसरों के सामने वे अपना हाथ फैला रहे थे, वैसे ही मेरे सामने भी हाथ करेंगे, लेकिन मेरा अंदाज फिर चूक गया। उन्होंने मेरे सामने हाथ नहीं फैलाया।

मैं उनसे बोला : "बाबा, आपको भी कोई शारीरिक परेशानी है क्या ? "

मेरे पूछने पर वे अपनी बैसाखी के सहारे धीरे से उठते हुए बोले : "Good afternoon doctor...... I think I may have some eye problem in my right eye .... "

इतनी बढ़िया अंग्रेजी सुन मैं अवाक रह गया। फिर मैंने उनकी आँखें देखीं।
पका हुआ मोतियाबिंद था उनकी ऑखों में ।
मैंने कहा : " मोतियाबिंद है बाबा, ऑपरेशन करना होगा। "

बुजुर्ग बोले : "Oh, cataract ?
I had cataract operation in 2014 for my left eye in Ruby Hospital."

मैंने पूछा : " बाबा, आप यहाँ क्या कर रहे हैं ? "

बुजुर्ग : " मैं तो यहाँ, रोज ही 2 घंटे भीख माँगता हूँ  सर" ।

मैं : " ठीक है, लेकिन क्यों बाबा ? मुझे तो लगता है, आप बहुत पढ़े लिखे हैं। "

बुजुर्ग हँसे और हँसते हुए ही बोले : "पढ़े लिखे ?? "

मैंने कहा : "आप मेरा मजाक उड़ा रहे हैं, बाबा। "

बाबा : " Oh no doc... Why would I ?... Sorry if I hurt you ! "

मैं : " हर्ट की बात नहीं है बाबा, लेकिन मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है। "

बुजुर्ग : " समझकर भी, क्या करोगे डॉक्टर ? "
अच्छा "ओके, चलो हम, उधर बैठते हैं, वरना लोग तुम्हें भी पागल हो कहेंगे। "(और फिर बुजुर्ग हँसने लगे)

करीब ही एक वीरान टपरी थी। हम दोनों वहीं जाकर बैठ गए।

" Well Doctor, I am Mechanical Engineer...."--- बुजुर्ग ने अंग्रेजी में ही शुरुआत की--- "
मैं, *** कंपनी में सीनियर मशीन ऑपरेटर था।
एक नए ऑपरेटर को सिखाते हुए, मेरा पैर मशीन में फंस गया था, और ये बैसाखी हाथ में आ गई। कंपनी ने इलाज का सारा खर्चा किया, और बाद में  कुछ रकम और सौंपी, और घर पर बैठा दिया। क्योंकि लंगड़े बैल को कौन काम पर रखता है सर ? "
"फिर मैंने उस पैसे से अपना ही एक छोटा सा वर्कशॉप डाला। अच्छा घर लिया। बेटा भी मैकेनिकल इंजीनियर है। वर्कशॉप को आगे बढ़ाकर उसने एक छोटी कम्पनी और डाली। "

मैं चकराया, बोला : " बाबा, तो फिर आप यहाँ, इस हालत में कैसे ? "

बुजुर्ग : " मैं...?
किस्मत का शिकार हूँ ...."
" बेटे ने अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए, कम्पनी और घर दोनों बेच दिए। बेटे की तरक्की के लिए मैंने भी कुछ नहीं कहा। सब कुछ बेच बाचकर वो अपनी पत्नी और बच्चों के साथ जापान चला गया, और हम जापानी गुड्डे गुड़िया यहाँ रह गए। "
ऐसा कहकर बाबा हँसने लगे। हँसना भी इतना करुण हो सकता है, ये मैंने पहली बार अनुभव किया।

फिर बोला : " लेकिन बाबा, आपके पास तो इतना हुनर है कि जहाँ लात मारें वहाँ पानी निकाल दें। "

अपने कटे हुए पैर की ओर ताकते बुजुर्ग बोले : " लात ? कहाँ और कैसे मारूँ, बताओ मुझे  ? "

बाबा की बात सुन मैं खुद भी शर्मिंदा हो गया। मुझे खुद बहुत बुरा लगा।

प्रत्यक्षतः मैं बोला : "आई मीन बाबा, आज भी आपको कोई भी नौकरी दे देगा, क्योंकि अपने क्षेत्र में आपको इतने सालों का अनुभव जो है। "

बुजुर्ग : " Yes doctor, और इसी वजह से मैं एक वर्कशॉप में काम करता हूँ। 8000 रुपए तनख्वाह मिलती है मुझे। "

मेरी तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। मैं बोला :
"तो फिर आप यहाँ कैसे ? "

बुजुर्ग : "डॉक्टर, बेटे के जाने के बाद मैंने एक चॉल में एक टीन की छत वाला घर किराए पर लिया। वहाँ मैं और मेरी पत्नी रहते हैं। उसे Paralysis है, उठ बैठ भी नहीं सकती। "
" मैं 10 से 5 नौकरी करता हूँ । शाम 5 से 7 इधर भीख माँगता हूँ और फिर घर जाकर तीनों के लिए खाना बनाता हूँ। "

आश्चर्य से मैंने पूछा : " बाबा, अभी तो आपने बताया कि, घर में आप और आपकी पत्नी हैं। फिर ऐसा क्यों कहा कि, तीनों के लिए खाना बनाते हो ? "

बुजुर्ग : " डॉक्टर, मेरे बचपन में ही मेरी माँ का स्वर्गवास हो गया था। मेरा एक जिगरी दोस्त था, उसकी माँ ने अपने बेटे जैसे ही मुझे भी पाला पोसा। दो साल पहले मेरे उस जिगरी दोस्त का निधन हार्ट अटैक से हो गया तो उसकी 92 साल की माँ को मैं अपने साथ अपने घर ले आया तब से वो भी हमारे साथ ही रहती है। "

मैं अवाक रह गया। इन बाबा का तो खुद का भी हाल बुरा है। पत्नी अपंग है। खुद का एक पाँव नहीं, घरबार भी नहीं,
जो था वो बेटा बेचकर चला गया, और ये आज भी अपने मित्र की माँ की देखभाल करते हैं।
कैसे जीवट इंसान हैं ये ?

कुछ देर बाद मैंने समान्य स्वर में पूछा : " बाबा, बेटा आपको रास्ते पर ले आया, ठोकरें खाने को छोड़ गया। आपको गुस्सा नहीं आता उस पर ? "

बुजुर्ग : " No no डॉक्टर, अरे वो सब तो उसी के लिए कमाया था, जो उसी का था, उसने ले लिया। इसमें उसकी गलती कहाँ है ? "

" लेकिन बाबा "--- मैं बोला "लेने का ये कौन सा तरीका हुआ भला ? सब कुछ ले लिया। ये तो लूट हुई। "
" अब आपके यहाँ भीख माँगने का कारण भी मेरी समझ में आ गया है बाबा। आपकी तनख्वाह के 8000 रुपयों में आप तीनों का गुजारा नहीं हो पाता अतः इसीलिए आप यहाँ आते हो। "

बुजुर्ग : " No, you are wrong doctor. 8000 रुपए में मैं सब कुछ मैनेज कर लेता हूँ। लेकिन मेरे मित्र की जो माँ है, उन्हें, डाइबिटीज और ब्लडप्रेशर दोनों हैं। दोनों बीमारियों की दवाई चल रही है उनकी। बस 8000 रुपए में उनकी दवाईयां मैनेज नहीं हो पाती । "
" मैं 2 घंटे यहाँ बैठता हूँ लेकिन भीख में पैसों के अलावा कुछ भी स्वीकार नहीं करता। मेडिकल स्टोर वाला उनकी महीने भर की दवाएँ मुझे उधार दे देता है और यहाँ 2 घंटों में जो भी पैसे मुझे मिलते हैं वो मैं रोज मेडिकल स्टोर वाले को दे देता हूँ। "

मैंने अपलक उन्हें देखा और सोचा, इन बाबा का खुद का बेटा इन्हें छोड़कर चला गया है और ये खुद किसी और की माँ की देखभाल कर रहे हैं।
मैंने बहुत कोशिश की लेकिन खुद की आँखें भर आने से नहीं रोक पाया।

भरे गले से मैंने फिर कहा : "बाबा, किसी दूसरे की माँ के लिए, आप, यहाँ रोज भीख माँगने आते हो ? "

बुजुर्ग : " दूसरे की ? अरे, मेरे बचपन में उन्होंने बहुत कुछ किया मेरे लिए। अब मेरी बारी है। मैंने उन दोनों से कह रखा है कि, 5 से 7 मुझे एक काम और मिला है। "

मैं मुस्कुराया और बोला : " और अगर उन्हें पता लग गया कि, 5 से 7 आप यहाँ भीख माँगते हो, तो ? "

बुजुर्ग : " अरे कैसे पता लगेगा ? दोनों तो बिस्तर पर हैं। मेरी हेल्प के बिना वे करवट तक नहीं बदल पातीं। यहाँ कहाँ पता करने आएँगी.... हा....हा... हा...."

बाबा की बात पर मुझे भी हँसी आई। लेकिन मैं उसे छिपा गया और बोला : " बाबा, अगर मैं आपकी माँ जी को अपनी तरफ से नियमित दवाएँ दूँ तो ठीक रहेगा ना। फिर आपको भीख भी नहीं मांगनी पड़ेगी। "

बुजुर्ग : " No doctor, आप भिखारियों के लिए काम करते हैं। माजी के लिए आप दवाएँ देंगे तो माजी भी तो भिखारी कहलाएंगी। मैं अभी समर्थ हूँ डॉक्टर, उनका बेटा हूँ मैं। मुझे कोई भिखारी कहे तो चलेगा, लेकिन उन्हें भिखारी कहलवाना मुझे मंजूर नहीं। "
" OK Doctor, अब मैं चलता हूँ। घर पहुँचकर अभी खाना भी बनाना है मुझे। "

मैंने निवेदन स्वरूप बाबा का हाथ अपने हाथ में लिया और बोला : " बाबा, भिखारियों का डॉक्टर समझकर नहीं बल्कि अपना बेटा समझकर मेरी दादी के लिए दवाएँ स्वीकार कर लीजिए। "

अपना हाथ छुड़ाकर बाबा बोले : " डॉक्टर, अब इस रिश्ते में मुझे मत बांधो, please, एक गया है, हमें छोड़कर...."
" आज मुझे स्वप्न दिखाकर, कल तुम भी मुझे छोड़ गए तो ? अब सहन करने की मेरी ताकत नहीं रही...."

ऐसा कहकर बाबा ने अपनी बैसाखी सम्हाली। और जाने लगे, और जाते हुए अपना एक हाथ मेरे सिर पर रखा और भर भराई, ममता मयी आवाज में बोले : "अपना ध्यान रखना मेरे बच्चे..."

शब्दों से तो उन्होंने मेरे द्वारा पेश किए गए रिश्ते को ठुकरा दिया था लेकिन मेरे सिर पर रखे उनके हाथ के गर्म स्पर्श ने मुझे बताया कि, मन से उन्होंने इस रिश्ते को स्वीकारा था।

उस पागल कहे जाने वाले मनुष्य के पीठ फेरते ही मेरे हाथ अपने आप प्रणाम की मुद्रा में उनके लिए जुड़ गए।

हमसे भी अधिक दुःखी, अधिक विपरीत परिस्थितियों में जीने वाले ऐसे भी लोग हैं।
हो सकता है इन्हें देख हमें हमारे दु:ख कम प्रतीत हों, और दुनिया को देखने का हमारा नजरिया बदले....

हमेशा अच्छा सोचें, हालात का सामना करे...।
कहानी से आंखें नम हुई हो तो एक बार उत्साहवर्धन  जरूर करें एवं अधिक से अधिक शेयर करें।

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Thumbs Up बातचीत की कला:
Posted by: iroffwerymoma - 11-07-2020, 07:11 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

बातचीत की कला:

एक बार एक राजा अपने सहचरों के साथ शिकार खेलने जंगल में गया था
    वहाँ शिकार के चक्कर में एक दूसरे से बिछड गये और  एक दूसरे को खोजते हुये राजा एक नेत्रहीन संत की कुटिया में पहुँच कर अपने विछडे हुये साथियों के बारे में पूंछा !!
      नेत्र हीन संत ने कहा महाराज सबसे पहले आपके सिपाही गये हैं, बाद में आपके मंत्री गये, अब आप स्वयं पधारे हैं
      इसी रास्ते से आप आगे जायें तो मुलाकात हो जायगी
      संत के बताये हुये रास्ते में राजा ने घोडा दौड़ाया और जल्दी ही अपने सहयोगियों से जा मिला और नेत्रहीन संत के कथनानुसार ही एक दूसरे  से आगे पीछे पहुंचे थे
    यह बात राजा के दिमाग में घर कर गयी कि नेत्रहीन संत को कैसे पता चला कि कौन किस ओहदे  वाला जा रहा है
      लौटते समय राजा अपने अनुचरों को  साथ लेकर संत की कुटिया में पहुंच कर संत से प्रश्न किया कि आप नेत्र विहीन होते हुये कैसे जान गये कि कौन जा रहा है कौन आ रहा है ?
        राजा की बात सुन कर नेत्रहीन संत ने कहा महाराज आदमी की हैसियत का ज्ञान नेत्रों से नहीं उसकी बातचीत से होती है
    सबसे पहले जब आपके सिपाही मेरे पास से गुजरे तब उन्होने मुझसे पूछा कि ऐ अंधे इधर से किसी के जाते हुये की आहट सुनाई दी क्या ? तो मैं समझ गया कि     
    यह संस्कार विहीन व्यक्ति छोटी पदवी वाले सिपाही ही होंगे ॥
      जब आपके मंत्री जी आये तब उन्होंने पूछा बाबा जी इधर से किसी को जाते हुये..... तो मैं समझ गया कि यह किसी उच्च ओहदे वाला है
      क्योंकि बिना संस्कारित व्यक्ति किसी बडे पद पर आसीन नहीं होता
    इसलिये मैंने आपसे कहा कि सिपाहियों के पीछे मंत्री जी गये हैं
जब आप स्वयं आये तो
      आपने कहा सूरदास जी महाराज आपको इधर से निकल कर जाने वालों की आहट तो नहीं मिली  मैं समझ गया कि आप राजा ही हो सकते हैं 
    क्योंकि आपकी वाणी में आदर सूचक शब्दों का समावेश था और दूसरे का आदर वही कर सकता है जिसे दूसरों से आदर प्राप्त होता है।
      क्योंकि जिसे कभी कोई चीज नहीं मिलती तो वह उस वस्तु के गुणों को कैसे  जान सकता है
    दूसरी बात यह संसार एक वृक्ष स्वरूप है जैसे वृक्ष में डालियाँ तो बहुत होती हैं पर जिस डाली में ज्यादा फल लगते हैं वही झुकती है
     
जय जय श्री राम

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Thumbs Up उपयोगी टिप्स:
Posted by: iroffwerymoma - 11-04-2020, 03:28 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

उपयोगी टिप्स:

[1] मुख्य द्वार के पास कभी भी कूड़ादान ना रखें इससे पड़ोसी शत्रु हो जायेंगे |

[२] सूर्यास्त के समय किसी को भी दूध,दही या प्याज माँगने पर ना दें इससे घर की बरक्कत समाप्त हो जाती है |

[३] छत पर कभी भी अनाज या बिस्तर ना धोएं..हाँ सुखा सकते है इससे ससुराल से सम्बन्ध खराब होने लगते हैं |

[४] फल खूब खाओ स्वास्थ्य के लिए अच्छे है लेकिन उसके छिलके कूडादान में ना डालें वल्कि बाहर फेंकें इससे मित्रों से लाभ होगा |

[५] माह में एक बार किसी भी दिन घर में मिश्री युक्त खीर जरुर बनाकर परिवार सहित एक साथ खाएं अर्थात जब पूरा परिवार घर में इकट्ठा हो उसी समय खीर खाएं तो माँ लक्ष्मी की जल्दी कृपा होती है |

[६] माह में एक बार अपने कार्यालय में भी कुछ मिष्ठान जरुर ले जाएँ उसे अपने साथियों के साथ या अपने अधीन नौकरों के साथ मिलकर खाए तो धन लाभ होगा |

[७] रात्री में सोने से पहले रसोई में बाल्टी भरकर रखें इससे क़र्ज़ से शीघ्र मुक्ति मिलती है और यदि बाथरूम में बाल्टी भरकर रखेंगे तो जीवन में उन्नति के मार्ग में बाधा नही आवेगी |

[८] वृहस्पतिवार के दिन घर में कोई भी पीली वस्तु अवश्य खाएं हरी वस्तु ना खाएं तथा बुधवार के दिन हरी वस्तु खाएं लेकिन पीली वस्तु बिलकुल ना खाएं इससे सुख समृद्धि बड़ेगी |

[९] रात्रि को झूठे बर्तन कदापि ना रखें इसे पानी से निकाल कर रख सकते है हानि से बचोगें |

[१०] स्नान के बाद गीले या एक दिन पहले के प्रयोग किये गये तौलिये का प्रयोग ना करें इससे संतान हठी व परिवार से अलग होने लगती है अपनी बात मनवाने लगती है अतः रोज़ साफ़ सुथरा और सूखा तौलिया ही प्रयोग करें |

[११] कभी भी यात्रा में पूरा परिवार एक साथ घर से ना निकलें आगे पीछे जाएँ इससे यश की वृद्धि होगी |
ऐसे ही अनेक अपशकुन है जिनका हम ध्यान रखें तो जीवन में किसी भी समस्या का सामना नही करना पड़ेगा तथा सुख समृद्धि बड़ेगी |

Kuchh vaastu tips????

?१. घर में सुबह सुबह कुछ देर के लिए भजन अवशय लगाएं ।
?२. घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखें, उसे पैर नहीं लगाएं, न ही उसके ऊपर से गुजरे अन्यथा घर में बरकत की कमी हो जाती है। झाड़ू हमेशा छुपा कर रखें |
?३. बिस्तर पर बैठ कर कभी खाना न खाएं, ऐसा करने से धन की हानी होती हैं। लक्ष्मी घर से निकल जाती है1 घर मे अशांति होती है1
?४. घर में जूते-चप्पल इधर-उधर बिखेर कर या उल्टे सीधे करके नहीं रखने चाहिए इससे घर में अशांति उत्पन्न होती है।
?५. पूजा सुबह 6 से 8 बजे के बीच भूमि पर आसन बिछा कर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठ कर करनी चाहिए । पूजा का आसन जुट अथवा कुश का हो तो उत्तम होता है |
?६. पहली रोटी गाय के लिए निकालें। इससे देवता भी खुश होते हैं और पितरों को भी शांति मिलती है |
?७.पूजा घर में सदैव जल का एक कलश भरकर रखें जो जितना संभव हो ईशान कोण के हिस्से में हो |
?८. आरती, दीप, पूजा अग्नि जैसे पवित्रता के प्रतीक साधनों को मुंह से फूंक मारकर नहीं बुझाएं।
?९. मंदिर में धूप, अगरबत्ती व हवन कुंड की सामग्री दक्षिण पूर्व में रखें अर्थात आग्नेय कोण में |
?१०. घर के मुख्य द्वार पर दायीं तरफ स्वास्तिक बनाएं |
?११. घर में कभी भी जाले न लगने दें, वरना भाग्य और कर्म पर जाले लगने लगते हैं और बाधा आती है |
?१२. सप्ताह में एक बार जरुर समुद्री नमक अथवा सेंधा नमक से घर में पोछा लगाएं | इससे नकारात्मक ऊर्जा हटती है |
?१३. कोशिश करें की सुबह के प्रकाश की किरणें आपके पूजा घर में जरुर पहुचें सबसे पहले |
?१४. पूजा घर में अगर कोई प्रतिष्ठित मूर्ती है तो उसकी पूजा हर रोज निश्चित रूप से हो, ऐसी व्यवस्था करे |

"पानी पीने का सही वक़्त".
(1) 3 गिलास सुबह उठने के बाद,
.....अंदरूनी उर्जा को Activate
करता है...
(2) 1 गिलास नहाने के बाद,
......ब्लड प्रेशर का खात्मा करता है...
(3) 2 गिलास खाने से 30 Minute पहले,
........हाजमे को दुरुस्त रखता है..
(4) आधा गिलास सोने से पहले,
......हार्ट अटैक से बचाता है..

यह बहुत अच्छा Msg है

Please इसे सब ग्रुपस में Frwd कर दिया जाये, नहीं आ सकता दुबारा क्योंकि इस साल फरवरी में चार रविवार, चार सोमवार, चार मंगलवार, चार बुधवार, चार बृहस्पतिवार, चार शुक्रवार, चार शनिवार.

यह प्रत्येक 823 साल में एक बार होता है।

यह धन की पोटली कहलाता है।

इसलिए कम से कम पाँच लोगों को या पाँच ग्रुप में भेजें और पैसा चार दिन में आयेगा।

चाॅयनिज पर आधारित है।

पढ़ने के 1 1 मिनट के अंदर भेजें |

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Star Indian Premier League 56th Match SUNRISERS HYDERABAD Vs MUMBAI INDIANS
Posted by: admin - 11-03-2020, 12:25 PM - Forum: IPL T-20 - No Replies

Indian Premier League

56th Match, SHARJAH, Nov 3 2020, IST 07:30 PM UAE 6 PM 

SUNRISERS HYDERABAD Vs MUMBAI INDIANS

When more runs will be scored wicket will fall who win the match all updates soon in comments below.

IPL T20

Match Report: 

Why Cricket Predictions by astrology?

Yes it is challenging difficult many calculations required to know which team will win. This work is only to show that Astrology is accurate and scientific and can't go wrong, yes but the astrologer may go wrong if does wrong calculations and mistakes in giving predictions by reading horoscope charts.

OPEN FOR ALL. FREE CRICKET PREDICTIONS ONLY FOR ENTERTAINMENT
Astrology can be used for any good cause in life. Be positive and find right ways. Good Karma is the only key to success in life.

We see SUNRISERS HYDERABAD won the toss and chose to field.

Today's Prediction: In today's match possibility of winning MUMBAI INDIANS is less than SUNRISERS HYDERABAD.

Few points will be covered everyday.
1. Which team will have big partnership in scoring runs.
2. Today more catch out / run out or bold.
3. Which team hit more 4s and 6s.
4. Which team will have good bowler with best economy for today.
5. Which team will have good batsman and score high.

Please do not miss to check on main post, sometimes in replies you will get only wicket fall and high score predictions. Who will win in beginning of the post.

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Thumbs Up शयन के नियम !!!!!!!
Posted by: iroffwerymoma - 11-03-2020, 03:08 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

शयन के नियम !!!!!!!


1. सूने तथा निर्जन घर में अकेला नहीं सोना चाहिए। देव मन्दिर और श्मशान में भी नहीं सोना चाहिए। (मनुस्मृति)
2. किसी सोए हुए मनुष्य को अचानक नहीं जगाना चाहिए। (विष्णुस्मृति)
3. विद्यार्थी, नौकर औऱ द्वारपाल, यदि ये अधिक समय से सोए हुए हों, तो इन्हें जगा देना चाहिए। (चाणक्यनीति)
4. स्वस्थ मनुष्य को आयुरक्षा हेतु ब्रह्ममुहुर्त में उठना चाहिए। (देवीभागवत) बिल्कुल अँधेरे कमरे में नहीं सोना चाहिए। (पद्मपुराण)
5. भीगे पैर नहीं सोना चाहिए। सूखे पैर सोने से लक्ष्मी (धन) की प्राप्ति होती है। (अत्रिस्मृति) टूटी खाट पर तथा जूठे मुँह सोना वर्जित है। (महाभारत)
6. "नग्न होकर/निर्वस्त्र" नहीं सोना चाहिए। (गौतम धर्म सूत्र)
7. पूर्व की ओर सिर करके सोने से विद्या, पश्चिम की ओर सिर करके सोने से प्रबल चिन्ता, उत्तर की ओर सिर करके सोने से हानि व मृत्यु तथा दक्षिण की ओर सिर करके सोने से धन व आयु की प्राप्ति होती है।  (आचारमय़ूख)
8. दिन में कभी नहीं सोना चाहिए। परन्तु ज्येष्ठ मास में दोपहर के समय 1 मुहूर्त (48 मिनट) के लिए सोया जा सकता है। (दिन में सोने से रोग घेरते हैं तथा आयु का क्षरण होता है)
9. दिन में तथा सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सोने वाला रोगी और दरिद्र हो जाता है। (ब्रह्मवैवर्तपुराण)
10. सूर्यास्त के एक प्रहर (लगभग 3 घण्टे) के बाद ही शयन करना चाहिए।
11. बायीं करवट सोना स्वास्थ्य के लिये हितकर है।
12. दक्षिण दिशा में पाँव करके कभी नहीं सोना चाहिए। यम और दुष्ट देवों का निवास रहता है। कान में हवा भरती है। मस्तिष्क में रक्त का संचार कम को जाता है, स्मृति- भ्रंश, मौत व असंख्य बीमारियाँ होती है।
13. हृदय पर हाथ रखकर, छत के पाट या बीम के नीचे और पाँव पर पाँव चढ़ाकर निद्रा न लें।
14. शय्या पर बैठकर खाना-पीना अशुभ है।
15. सोते सोते पढ़ना नहीं चाहिए। (ऐसा करने से नेत्र ज्योति घटती है )
16. ललाट पर तिलक लगाकर सोना अशुभ है। इसलिये सोते समय तिलक हटा दें।
इन १६ नियमों का अनुकरण करने वाला यशस्वी, निरोग और दीर्घायु हो जाता है।
नोट :- यह सन्देश जन जन तक पहुँचाने का प्रयास करें। ताकि सभी लाभान्वित हों !
जय सनातन धर्म,जय सनातन संस्कृति और शिक्षा।

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Star Indian Premier League 55th Match DELHI CAPITALS Vs ROYAL CHALLENGERS BANGALORE
Posted by: admin - 11-02-2020, 07:29 PM - Forum: IPL T-20 - No Replies

Indian Premier League

55th Match, ABU DHABI, Nov 2 2020, IST 07:30 PM UAE 6 PM 

DELHI CAPITALS Vs ROYAL CHALLENGERS BANGALORE

When more runs will be scored wicket will fall who win the match all updates soon in comments below.

IPL T20

Match Report: 

Why Cricket Predictions by astrology?

Yes it is challenging difficult many calculations required to know which team will win. This work is only to show that Astrology is accurate and scientific and can't go wrong, yes but the astrologer may go wrong if does wrong calculations and mistakes in giving predictions by reading horoscope charts.

OPEN FOR ALL. FREE CRICKET PREDICTIONS ONLY FOR ENTERTAINMENT
Astrology can be used for any good cause in life. Be positive and find right ways. Good Karma is the only key to success in life.

We see DELHI CAPITALS won the toss and chose to field.

Today's Prediction: In today's match possibility of winning DELHI CAPITALS is less than ROYAL CHALLENGERS BANGALORE.

Few points will be covered everyday.
1. Which team will have big partnership in scoring runs.
2. Today more catch out / run out or bold.
3. Which team hit more 4s and 6s.
4. Which team will have good bowler with best economy for today.
5. Which team will have good batsman and score high.

Please do not miss to check on main post, sometimes in replies you will get only wicket fall and high score predictions. Who will win in beginning of the post.

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Star Indian Premier League 54th Match KOLKATA KNIGHT RIDERS Vs RAJASTHAN ROYALS
Posted by: admin - 11-01-2020, 11:43 AM - Forum: IPL T-20 - No Replies

Indian Premier League

54th Match, DUBAI, Nov 1 2020, IST 07:30 PM UAE 6 PM 

KOLKATA KNIGHT RIDERS Vs RAJASTHAN ROYALS

When more runs will be scored wicket will fall who win the match all updates soon in comments below.

IPL T20

Match Report: 

Why Cricket Predictions by astrology?

Yes it is challenging difficult many calculations required to know which team will win. This work is only to show that Astrology is accurate and scientific and can't go wrong, yes but the astrologer may go wrong if does wrong calculations and mistakes in giving predictions by reading horoscope charts.

OPEN FOR ALL. FREE CRICKET PREDICTIONS ONLY FOR ENTERTAINMENT
Astrology can be used for any good cause in life. Be positive and find right ways. Good Karma is the only key to success in life.