भाग्य के भरोसे बैठना नहीं है मन वचन कर्म की शुद्धता के साथ जीवन में सफलता की ओर बढ़ना यही रेकी हीलिंग और ज्योतिष विज्ञान का मूल आधार है. Don't depend on your luck. The best way if you are performing your work is with pure heart right actions and pure speech. You will achieve success in your life. This is the basic of reiki healing and astrology science.

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पत्नी क्या होती है।
#1
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??  पत्नी क्या होती है। ???...                          .
रामलाल तुम अपनी बीबी से इतना क्यों डरते हो ? मैने अपने नौकर से पुछा।।
"मै डरता नही साहब उसकी कद्र करता हूँ , उसका सम्मान करता हूँ।"उसने जबाव दिया।
मैं हंसा और बोला-" ऐसा क्या है उसमें।
ना सुरत ना पढी लिखी।"
जबाव मिला-" कोई फरक नही पडता साहब कि वो कैसी है पर मुझे सबसे प्यारा रिश्ता उसी का लगता है।"
"जोरू का गुलाम।"मेरे मुँह से निकला।"
और सारे रिश्ते कोई मायने नही रखते तेरे लिये।"मैने पुछा।
*उसने बहुत इत्मिनान से जबाव दिया-* साहब जी माँ बाप रिश्तेदार नही होते। वो भगवान होते हैं।उनसे रिश्ता नही निभाते उनकी पूजा करते हैं।
भाई बहन के रिश्ते जन्मजात होते हैं!
दोस्ती का रिश्ता भी मतलब का ही होता है।
आपका मेरा रिश्ता भी दजरूरत और पैसे का है।
*पर,*
पत्नी बिना किसी करीबी रिश्ते के होते हुए भी हमेशा के लिये हमारी हो जाती है
अपने सारे रिश्ते को पीछे छोडकर।
और हमारे हर सुख दुख की सहभागी बन जाती है
आखिरी साँसो तक।
*मै अचरज से उसकी बातें सुन रहा था।*
वह आगे बोला-"साहब जी, पत्नी अकेला रिश्ता नही है, बल्कि वो पुरा रिश्तों की *भण्डार* है।
जब वो हमारी सेवा करती है हमारी देख भाल करती है ,
हमसे दुलार करती है तो एक माँ जैसी होती है।
जब वो हमे जमाने के उतार चढाव से आगाह करती है,और मैं अपनी सारी कमाई उसके हाथ पर रख देता हूँ क्योकि जानता हूँ वह हर हाल मे मेरे घर का भला करेगी तब पिता जैसी होती है।
जब हमारा ख्याल रखती है हमसे लाड़ करती है, हमारी गलती पर डाँटती है, हमारे लिये खरीदारी करती है तब बहन जैसी होती है।
जब हमसे नयी नयी फरमाईश करती है, नखरे करती है, रूठती है , अपनी बात मनवाने की जिद करती है तब बेटी जैसी होती है।
जब हमसे सलाह करती है मशवरा देती है ,परिवार चलाने के लिये नसीहतें देती है, झगडे करती है तब एक दोस्त जैसी होती है।

जब वह सारे घर का लेन देन , खरीददारी , घर चलाने की जिम्मेदारी उठाती है तो एक मालकिन जैसी होती है।
और जब वही सारी दुनिया को यहाँ तक कि अपने बच्चो को भी छोडकर हमारे बाहों मे आती है. . तब वह पत्नी, प्रेमिका, अर्धांगिनी , हमारी प्राण और आत्मा होती है जो अपना सब कुछ सिर्फ हमपर न्योछावर करती है।"
*मैं उसकी इज्जत करता हूँ तो क्या गलत करता हूँ साहब ।"*
मैं उसकी बात सुनकर अकवका रह गया।।
? *एक अनपढ़ और सीमित साधनो मे जीवन निर्वाह करनेवाले से जीवन का यह मुझे एक नया अनुभव हुआ ।*
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