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Last Post: Jesse Tal
6 hours ago
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04-13-2019, 03:28 PM
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श्री रामनवमी की हार्दिक श...
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04-13-2019, 07:40 AM
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HIGHLY VISITED HEALER IN ...
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04-08-2019, 05:38 PM
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JTL Wawi Entwicklung
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04-08-2019, 03:46 AM
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04-05-2019, 12:37 PM
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चैत्र नवरात्रि
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Last Post: Navin Sharma
04-05-2019, 06:14 AM
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ND Masale
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04-01-2019, 01:11 PM
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First aid homoeopathy
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04-01-2019, 01:09 PM
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High alert of temperature...
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Last Post: Vinay Goyal
03-31-2019, 11:17 PM
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  Interesting offer
Posted by: Jesse Tal - 6 hours ago - Forum: Share your stuff - No Replies

where to look for yourself best self-supporting glass railings in your apartment

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  сайт
Posted by: Davidtox - 04-13-2019, 03:28 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

легок на помине кино смотреть

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Heart श्री रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं
Posted by: admin - 04-13-2019, 07:40 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

श्री रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं

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  HIGHLY VISITED HEALER IN SANDTON
Posted by: HealerandPsychic - 04-08-2019, 05:38 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

Powerful Healer Johannesburg. +27603749999. See Your Enemies in Apot Of Mbwankuru Spiritual Water To Determine Present And The Future . 
By A Highly Visited Powerful Native Spiritual Healer And Spell Caster . 
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Unlocking Your Life . 
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Safe & Private spiritual Healing . 
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 Come Get Political Powers ( Leadership ) For Higher Positions And Dominance. +27603749999

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  JTL Wawi Entwicklung
Posted by: Niklfus - 04-08-2019, 03:46 AM - Forum: Post Advertisement - No Replies

JTL erp
JTL Wawi Funktionen fur E-Commerce
Was ist JTL Wawi, welche Moglichkeiten bekommt damit ein Online-Unternehmer, wenn er sich fur die Verwendung dieser Software entscheidet? Die Funktionen der Plattform, ihre Vorteile fur Internet-Handler.
Bis heute hat der Online-Handel die gleichen Rechte wie alle anderen Arten des traditionellen Handels erhalten. In manchen Fallen ist er sogar rentabler.
Au?erdem sind die Entwickler auch im permanentem Rennen, um den Eigentumern des Online-Shops mehr und bequemere Werkzeuge fur ihr Geschaft anzubieten.
Die JTL wawi-Plattform, ist eine leistungsstarke und praktische Plattform, die die meisten Aufgaben mit minimalem Aufwand losen kann.
Laut Umfragen unter 585 kleinen und mittleren Geschaften im Internet zufolge nahm JTL wawi den ersten Platz bei Enterprise-Resource-Planning-Losungen ein. Die Plattform ist beliebt bei kleinen Unternehmen, die bis zu 100 Mitarbeiter beschaftigen.
Vorteile von JTL-Wawi fur Internetgeschafte
TL-Wawi ist eine kostenlose Software zur Planung von Unternehmensressourcen, die Sie in allen modernen Handelsprozessen mit Schwerpunkt auf Online-Handel unterstutzt. Tagliche Arbeitsablaufe wie Produkterstellung, Einkauf, Lagerverwaltung, Verkauf und Lieferung werden zentral bei JTL-Wawi verwaltet. Fur jeden wichtigen Prozess bei JTL-Wawi gibt es einen separaten Bereich, auf den Sie uber die Symbolleiste im Programm zugreifen konnen.
JTL Wawi Funktionen fur E-Commerce
Vorteile von JTL-Wawi fur Internetgeschafte

JTL Wawi
https://gbcoding.de/blog/jtl-wawi-funkti...e-commerce

<a href=https://gbcoding.de/blog/jtl-wawi-funktionen-f-r-e-commerce>JTL Wawi</a>
JTL Wawi

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  сайт
Posted by: RonaldBak - 04-05-2019, 12:37 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

голые амбиции 2014

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Thumbs Up चैत्र नवरात्रि
Posted by: Navin Sharma - 04-05-2019, 06:14 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

चैत्र नवरात्रि

नवरात्र वह समय है, जब दोनों रितुओं का मिलन होता है। इस संधि काल मे ब्रह्मांड से असीम शक्तियां ऊर्जा के रूप में हम तक पहुँचती हैं। मुख्य रूप से हम दो नवरात्रों के विषय में जानते हैं - चैत्र नवरात्र एवं आश्विन नवरात्र। चैत्र नवरात्रि गर्मियों के मौसम की शुरूआत करता है और प्रकृति माँ एक प्रमुख जलवायु परिवर्तन से गुजरती है।

यह चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथमा से प्रारंभ होती है और रामनवमी को इसका समापन होता है।  चैत्र  नवरात्रि में माँ भगवती के सभी नौ रूपों की उपासना की जाती है। इस समय आध्यात्मिक ऊर्जा ग्रहण करने के लिए लोग विशिष्ट अनुष्ठान करते हैं। इस अनुष्ठान में देवी के रूपों की साधना की जाती है।

 (पहला दिन)
प्रतिपदा - इस दिन पर "घटत्पन", "चंद्र दर्शन" और "शैलपुत्री पूजा" की जाती है।

   

 (दूसरा दिन)
दिन पर "सिंधारा दौज" और "माता ब्रह्राचारिणी पूजा" की जाती है।

   

(तीसरा दिन)
यह दिन "गौरी तेज" या "सौजन्य तीज" के रूप में मनाया जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान "चन्द्रघंटा की पूजा" है।

   

 (चौथा दिन)
"वरद विनायक चौथ" के रूप में भी जाना जाता है, इस दिन का मुख्य अनुष्ठान "कूष्मांडा की पूजा" है।

   

 (पांचवा दिन)
इस दिन को "लक्ष्मी पंचमी" कहा जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान "नाग पूजा" और "स्कंदमाता की पूजा" जाती है।

   

 (छटा दिन)
इसे "यमुना छत" या "स्कंद सस्थी" के रूप में जाना जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान "कात्यायनी की पूजा" है।

   

 (सातवां दिन)
सप्तमी को "महा सप्तमी" के रूप में मनाया जाता है और देवी का आशीर्वाद मांगने के लिए “कालरात्रि की पूजा” की जाती है।

   

(आठवां दिन)
अष्टमी को "दुर्गा अष्टमी" के रूप में भी मनाया जाता है और इसे "अन्नपूर्णा अष्टमी" भी कहा जाता है। इस दिन "महागौरी की पूजा" और "संधि पूजा" की जाती है।

   

(नौंवा दिन)
"नवमी" नवरात्रि उत्सव का अंतिम दिन "राम नवमी" के रूप में मनाया जाता है और इस दिन "सिद्धिंदात्री की पूजा महाशय" की जाती है।

   

चैत्र नवरात्रि के दौरान अनुष्ठान -
बहुत भक्त नौ दिनों का उपवास रखते हैं। भक्त अपना दिन देवी की पूजा और नवरात्रि मंत्रों का जप करते हुए बिताते हैं।
चैत्र नवरात्रि के पहले तीन दिनों को ऊर्जा माँ दुर्गा को समर्पित है। अगले तीन दिन, धन की देवी, माँ लक्ष्मी को समर्पित है और आखिर के तीन दिन ज्ञान की देवी, माँ सरस्वती को समर्पित हैं। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में से प्रत्येक के पूजा अनुष्ठान नीचे दिए गए हैं।

पूजा विधि -
घट स्थापना नवरात्रि के पहले दिन सबसे आवश्यक है, जो ब्रह्मांड का प्रतीक है और इसे पवित्र स्थान पर रखा जाता है, घर की शुद्धि और खुशाली के लिए।

१. अखण्ड ज्योति :
नवरात्रि ज्योति घर और परिवार में शांति का प्रतीक है। इसलिए, यह जरूरी है कि आप नवरात्रि पूजा शुरू करने से पहले देसी घी का दीपक जलतें हैं। यह आपके घर की नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में मदद करता है और भक्तों में मानसिक संतोष बढ़ाता है।

२. जौ की बुवाई :
नवरात्रि में घर में जौ की बुवाई करते है। ऐसी मान्यता है की जौ इस सृष्टी की पहली फसल थी इसीलिए इसे हवन में भी चढ़ाया जाता है। वसंत ऋतू में आने वाली पहली फसल भी जौ ही है जिसे देवी माँ को चैत्र नवरात्रि के दौरान अर्पण करते है।

३. नव दिवस भोग (9 दिन के लिए प्रसाद) :
प्रत्येक दिन एक देवी का प्रतिनिधित्व किया जाता है और प्रत्येक देवी को कुछ भेंट करने के साथ भोग चढ़ाया जाता है।

सभी नौ दिन देवी के लिए 9 प्रकार भोग निम्न अनुसार हैं:
• 1 दिन: केले
• 2 दिन: देसी घी (गाय के दूध से बने)
• 3 दिन: नमकीन मक्खन
• 4 दिन: मिश्री
• 5 दिन: खीर या दूध
• 6 दिन: माल पोआ
• 7 दिन: शहद
• 8 दिन: गुड़ या नारियल
• 9 दिन: धान का हलवा

४. दुर्गा सप्तशती :
दुर्गा सप्तशती शांति, समृद्धि, धन और शांति का प्रतीक है, और नवरात्रि के 9 दिनों के दौरान दुर्गा सप्तशती के पाठ को करना, सबसे अधिक शुभ कार्य माना जाता है।

५. नौ दिनों के लिए नौ रंग :
शुभकामना के लिए और प्रसंता के लिए, नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान लोग नौ अलग-अलग रंग पहनते हैं:
• 1 दिन: हरा
• 2 दिन: नीला
• 3 दिन: लाल
• 4 दिन: नारंगी
• 5 दिन: पीला
• 6 दिन: नीला
• 7 दिन: बैंगनी रंग
• 8 दिन: गुलाबी
• 9 दिन: सुनहरा रंग

६. कन्या पूजन :
कन्या पूजन माँ दुर्गा की प्रतिनिधियों (कन्या) की प्रशंसा करके, उन्हें विदा करने की विधि है। उन्हें फूल, इलायची, फल, सुपारी, मिठाई, श्रृंगार की वस्तुएं, कपड़े, घर का भोजन (खासकर: जैसे की हलवा, काले चने और पूरी) प्रस्तुत करने की प्रथा है।

अनुष्ठान के कुछ विशेष नियम :

बहुत सारे भक्त निचे दिए गए अनुष्ठानों का पालन करते हैं:

1. प्रार्थना और उपवास चैत्र नवरात्रि समारोह का प्रतीक है। त्योहार के आरंभ होने से पहले, अपने घर में देवी का स्वागत करने के लिए घर की साफ सफाई करते हैं।
2. सात्विक जीवन व्यतीत करते हैं। भूमि शयन करते हैं। सात्त्विक आहार करते हैं।
3. उपवास करते वक्त सात्विक भोजन जैसे कि आलू, कुट्टू का आटा, दही, फल, आदि खाते हैं।
4. नवरात्रि के दौरान, भोजन में सख्त समय का अनुशासन बनाए रखते हैं और अपने व्यवहार की निगरानी भी करते हैं, जैसे की
• अस्वास्थ्यकर खाना (Junk Food) नहीं खाते।
• सत्संग करते हैं।
• ज्ञान सूत्र से जुड़ते हैं।
• ध्यान करते हैं।
• चमड़े का प्रयोग नहीं करते हैं।
• क्रोध से बचे रहते हैं।
• कम से कम 2 घंटे का मौन रहते हैं।
• अनुष्ठान समापन पर क्षमा प्रार्थना का विधान है तथा विसर्जन करते हैं।

चैत्र नवरात्री का महत्व :
यह माना जाता है कि यदि भक्त बिना किसी इच्छा की पूर्ति के लिए महादुर्गा की पूजा करते हैं, तो वे मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर कर मोक्ष प्राप्त करते हैं।

   
   
   
   
   
   
   

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Thumbs Up ND Masale
Posted by: admin - 04-01-2019, 01:11 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

ND Masale
   

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Thumbs Up First aid homoeopathy
Posted by: admin - 04-01-2019, 01:09 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

First aid homoeopathy

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Thumbs Up High alert of temperatures in coming days
Posted by: Vinay Goyal - 03-31-2019, 11:17 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

Dear all, 
 
the Equinox phenomenon  will affect us  in the next 5 days. Please stay indoors and keep animals indoor or protected   especially from 12pm-3pm daily. The temperature will fluctuate  and may reach  40 degrees Celsius. This can easily cause dehydration and sun stroke. (Ps: this phenomena is due to the sun directly positioned above the equator line. )
Please keep everyone inclusive of yourself hydrated. Everyone should be consuming about 3 litres of fluid everyday. Monitor everyone's blood pressure as frequent as possible. Many may get heat stroke.

Take Cold showers as frequent as possible. Reduce meat 
increase fruits & veg.

Heat wave is no joke! Place a new unused candle outside home area or exposed area. If candle can melt, its at a dangerous level.

Always place a pail or 2 of water half filled in living room & each in every room to keep temperature down.

 heat stroke has no indicative symptoms. Once you faint, its serious & dangerous as organ failure kicks in.

Always check lips, eye balls for  moisture.
Please inform others...
 Stay safe friends!

India: Dangerous heat to intensify this week after arriving unusually early AccuWeather.com - 10h ago A dangerous, widespread heat wave will continue across India this week, putting millions of people at risk for heat-related illnesses.

http://www.accuweather.com/en/weather-ne...y/70001217

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Thumbs Up Paytm offer and joining links
Posted by: admin - 03-31-2019, 10:01 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

Paytm offer and joining links 

1.Click on the invite link

2.Download Paytm App
3.Use promocode *THIRTY* and do Mobile recharge or Bill Payment
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2- Watch this video to know more: goo.gl/M98zfT

3- Invite more people to Paytm Gold & get free Gold worth ₹5000 every month 
4- Click to buy Gold now and also avail exciting offers https://paytmapp.app.link/OJ22m6bguV

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Star भारतीय नववर्ष, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2076 की आप सभी को हार्दिक बधाई।
Posted by: admin - 03-30-2019, 02:33 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

कहाँ चले गये भाई लोग ???

जो अंग्रेजों के नये साल में एक एक

माह पहले ही बधाई देने के लिये

लाईन लगाए हुए थे । 

एक सप्ताह बाद हम हिंदुओ का नया साल आ रहा है । मित्रो

किसी का भी मेसेज नही मिला है अभी तक ??

चलो मैं शुरुआत करता हूं।

चैत्र नवरात्र 
हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2076
की 
आपको और आपके परिवार जनो को बहुत बहुत शुभ कामनाएँ.. ????

"भारतीय नववर्ष, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2076 (6 अप्रेल 2019)" की आप सभी को अग्रिम हार्दिक बधाई  एवं शुभकामनाएँ ।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व :

1. इस दिन के सूर्योदय से ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की।

2. सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है।

3. प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक का दिन भी यही है।  

4.*यह शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात् नवरात्र का पहला दिन है। 

*5.* सिक्खों के द्वितीय गुरू श्री अंगद देव जी का जन्म दिवस भी इसी दिन  है।  

*6.* स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना की एवं कृणवंतो विश्वमार्यम का संदेश दिया |

*7.* सिंध प्रान्त के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार भगवान झूलेलाल इसी दिन प्रगट हुए।

*8.* विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना। विक्रम संवत की स्थापना की ।

*9.* युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ।

10 संघ संस्थापक प.पू .डॉ केशवराव बलिराम हेडगेवार का जन्म दिन भी यही है।

11 महिर्षि गौतम जयंती भी इसी दिन आती है।

*भारतीय नववर्ष का प्राकृतिक महत्व :*

*1.* बसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंध से भरी होती है।

*2.* फसल पकने का प्रारंभ यानि किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है।

*3.* नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात् किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिये यह शुभ मुहूर्त होता है।

*भारतीय नववर्ष कैसे मनाएँ :*

*1.* हम परस्पर एक दुसरे को नववर्ष की शुभकामनाएँ दें। 
पत्रक बांटें , 
झंडे, बैनर....आदि लगावें ।

2.*अपने परिचित मित्रों, रिश्तेदारों को नववर्ष के शुभ संदेश भेजें। 

*3 .* इस मांगलिक अवसर पर अपने-अपने घरों पर भगवा पताका फहराएँ। 

*4.* अपने घरों के द्वार, आम के पत्तों की वंदनवार से सजाएँ। 

*5.* घरों एवं धार्मिक स्थलों की सफाई कर रंगोली तथा फूलों से सजाएँ। 

*6.* इस अवसर पर होने वाले धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लें अथवा कार्यक्रमों का आयोजन करें।

7 प्रतिष्ठानों की सज्जा एवं प्रतियोगिता करें । झंडी और फरियों से सज्जा करें ।

8 इस दिन के महत्वपूर्ण देवताओं, महापुरुषों से सम्बंधित प्रश्न मंच के आयोजन करें 


9 वाहन रैली, कलश यात्रा, विशाल शोभा यात्राएं, कवि सम्मेलन, भजन संध्या , महाआरती आदि का आयोजन करें ।

10 चिकित्सालय, गौशाला में सेवा, रक्तदान जैसे कार्यक्रम । 



आप सभी से विनम्र निवेदन है कि "भारतीय नववर्ष" हर्षोउल्लास के साथ मनाने के लिए "समाज को अवश्य प्रेरित" करें।
           धन्यवाद 
   ? भारतमाता की जय

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Thumbs Up JOB and OPPORTUNITIES
Posted by: admin - 03-26-2019, 01:43 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

JOB and OPPORTUNITIES

Urgent Requirement 

EA to MD – based at Indore, with min 5-8 years experience in relevant field, good !communication skills (written & verbal), Computer and Tech Savy, Ready to travel with MD (if required), etc  Package range – 4-5 Lacs pa
Mail your resume swati@walkinsolutions.com

***************************

I am Sameer Gite.

Territory Manager 

Star Health Insurance 

Indore 



We have job opening for Managerial Cadre in Sales profile for Indore & up country locations



Any graduate with 2 years+ experience in Sales & Marketing can apply for the job.



My mobile number is 9826034999
E-mail sameer.gite@starhealth.in

*********************************

Urgent Manpower Requirement 

CA – based at Indore with min 8-10 years in relevant field, good communication skills (written & verbal), Gooad in Accounting & Finance, Preparation of Project reports, Excellent analytical skills of financial figures like P & L and Balance Sheet, Rigorous & Aggressive Follow-ups with concerned departments, etc. Package range – 8-10 Lacs pa. Pl.  Share your resume at swati@walkinsolutions.com To know company details call me.


*********************************

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Star माँ नर्मदा परिक्रमा यात्रा- सोमनाथ, नागेश्वर, ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन
Posted by: admin - 03-24-2019, 04:31 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

माँ नर्मदा परिक्रमा यात्रा- सोमनाथ, नागेश्वर, ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन

माँ नर्मदा परिक्रमा यात्रा 

माँ नर्मदा की सम्पूर्ण परिक्रमा ,के साथ द्वारकाधीश धाम ,पावागढ़ , सलकनपुर , मैहर माताजी दर्शन 
 लक्ज़री बस द्वारा    
 स्लीपिंग   15000 
 सिटिंग     8501 
यात्रा प्रारंभ  दि  15 अप्रैल 
यात्रा विवरण एवम बुकिंग हेतु सम्पर्क निम्न नम्बर एवम पते पर सम्पर्क करें 
   ताराशंकर गीते
    इंद्राणी ट्रेवल्स 
18  निलिन्द्रा भवन 
 टैगोर कॉलोनी   खण्डवा 
  मो न 9826475002 ,7999376954 
  शीघ्र बुकिंग करवाकर अपनी सीट सुनिश्चित करने की कृपा करें
साथही सोमनाथ ,नागेश्वर ,ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन
   
   

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Thumbs Up Tweets
Posted by: admin - 03-23-2019, 09:59 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

Tweets

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Thumbs Up Mission SSC For Students
Posted by: Namit Gupta - 03-23-2019, 09:51 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

महत्वपूर्ण पुस्तकें और उनके लेखक

Mission SSC For Students


1.     पंचतंत्र — विष्णु शर्मा

2.      प्रेमवाटिका — रसखान

3.      मृच्छकटिकम् — शूद्रक

4.       कामसूत्र् — वात्स्यायन

5.     दायभाग — जीमूतवाहन

6.      नेचुरल हिस्द्री — प्लिनी

7.      दशकुमारचरितम् — दण्डी

8.      अवंती सुन्दरी — दण्डी

9.      बुध्दचरितम् — अश्वघोष

10. कादम्बरी् — बाणभटृ

11. अमरकोष — अमर सिहं

12. शाहनामा — फिरदौसी

13. साहित्यलहरी — सुरदास

14. सूरसागर — सुरदास

15. हुमायूँनामा — गुलबदन बेगम

16. नीति शतक — भर्तृहरि

17. श्रृंगारशतक — भर्तृहरि

18. वैरण्यशतक — भर्तृहरि

19. हिन्दुइज्म — नीरद चन्द्र चौधरी

20. पैसेज टू इंगलैंड — नीरद चन्द्र चौधरी

21. अॉटोबायोग्राफी अॉफ ऐन अननोन इण्डियन — नीरद चन्द्र चौधरी

22. कल्चर इन द वैनिटी वैग — नीरद चन्द्र चौधरी

23. मुद्राराक्षस — विशाखदत्त

24. अष्टाध्यायी — पाणिनी

25. भगवत् गीता — वेदव्यास

26. महाभारत — वेदव्यास

27. मिताक्षरा — विज्ञानेश्वर

28. राजतरंगिणी — कल्हण

29. अर्थशास्त्र — चाणक्य

30. कुमारसंभवम् — कालिदास

31. रघुवंशम् — कालिदास

32. अभिज्ञान शाकुन्तलम् — कालिदास

33. गीतगोविन्द — जयदेव

34. मालतीमाधव — भवभूति

35. उत्तररामचरित — भवभूति

36. पद्मावत् — मलिक मो. जायसी

37. आईने अकबरी — अबुल फजल

38. अकबरनामा — अबुल फजल

39. बीजक — कबीरदास

40. रमैनी — कबीरदास

41. सबद — कबीरदास

42. किताबुल हिन्द — अलबरूनी

43. कुली — मुल्कराज आनन्द

44. कानफैंशंस अॉफ ए लव — मुल्कराज आनन्द

45. द डेथ अॉफ ए हीरो— मुल्कराज आनन्द

46. जजमेंट — कुलदीप नैयर

47. डिस्टेंन्ट नेवर्स— कुलदीप नैयर

48. इण्डिया द क्रिटिकल इयर्स— कुलदीप नैयर

49. इन जेल — कुलदीप नैयर

50. इण्डिया आफ्टर नेहरू — कुलदीप नैयर

51. बिटवीन द लाइन्स — कुलदीप नैयर

52. चित्रांगदा — रविन्द्र नाथ टैगौर

53. गीतांजली— रविन्द्र नाथ टैगौर

54. विसर्जन — रविन्द्र नाथ टैगौर

55. गार्डनर — रविन्द्र नाथ टैगौर

56. हंग्री स्टोन्स — रविन्द्र नाथ टैगौर

57. गोरा — रविन्द्र नाथ टैगौर

58. चाण्डालिका— रविन्द्र नाथ टैगौर

59. भारत-भारती — मैथलीशरण गुप्त

60. डेथ अॉफ ए सिटी— अमृता प्रीतम

61. कागज ते कैनवास— अमृता प्रीतम

62. फोर्टी नाइन डेज— अमृता प्रीतम

63. इन्दिरा गाँधी रिटर्नस — खुशवंत सिहं

64. दिल्ली — खुशवंत सिहं

65. द कम्पनी अॉफ वीमैन — खुशवंत सिहं

66. सखाराम बाइण्डर — विजय तेंदुलकर

67. इंडियन फिलॉस्पी — डॉ. एस. राधाकृष्णन

68. इंटरनल इंडिया — इंदिरा गाँधी

69. कामयानी — जयशंकर प्रसाद

70. आँसू — जयशंकर प्रसाद

71. लहर — जयशंकर प्रसाद

72. लाइफ डिवाइन — अरविन्द घोष

73. ऐशेज अॉन गीता — अरविन्द घोष

74. अनामिका — सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'

75. परिमल — सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'

76. यामा — महादेवी वर्मा

77. ए वाइस अॉफ फ्रिडम — नयन तारा सहगल

78. एरिया अॉफ डार्कनेस — वी. एस. नायपॉल

79. अग्निवीणा — काजी नजरुल इस्लाम

80. डिवाइन लाइफ — शिवानंद

81. गोदान — प्रेमचन्द्र

82. गबन — प्रेमचन्द्र

83. कर्मभूमि — प्रेमचन्द्र

84. रंगभूमि — प्रेमचन्द्र

85. अनटोल्ड स्टोरी — बी. एम. कौल

86. कन्फ्रन्डेशन विद पाकिस्तान — बी. एम. कौल

87. कितनी नावों में कितनी बार — अज्ञेय

88. गोल्डेन थेर्सहोल्ड — सरोजिनी नायडू

89. ब्रोकेन विंग्स — सरोजिनी नायडू

90. दादा कामरेड — यशपाल

91. पल्लव — सुमित्रानन्दन पंत्त

92. चिदम्बरा— सुमित्रानन्दन पंत्त

93. कुरूक्षेत्र — रामधारी सिहं 'दिनकर'

94. उर्वशी — रामधारी सिहं 'दिनकर'

95. द डार्क रूम — आर. के. नारायण

96. मालगुड़ी डेज — आर. के. नारायण

97. गाइड — आर. के. नारायण

98. माइ डेज — आर. के. नारायण

99. नेचर क्योर — मोरारजी देसाई

100.चन्द्रकान्ता — देवकीनन्दन खत्री

101.देवदास — शरतचन्द्र चटोपाध्याय

102.चरित्रहीन — शरतचन्द्र चटोपाध्याय     

103.इंडिका — मेगास्थनीज

104.स्पीड पोस्ट — सोभा-डे

105.माई टुथ — इंदिरा गांधी

106.मिलिन्दपन्हो — नागसेन

107.बाबरनामा — बाबर

108.विनय पत्रिका — तुलसीदास

109.यंग इंडिया — महात्मा गांधी

110.काव्य मीमांसा — राजशेखर

111.हर्षचरित — वाणभट्ट

112.सत्यार्थ-प्रकाश — दयानंद सरस्वती

113.मेघदूत — कालिदास

114.हितोपदेश — नारायण पंडित

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Thumbs Up Mission SSC For Students
Posted by: Namit Gupta - 03-23-2019, 09:46 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

Mission SSC For Students

प्रश्न➜मध्यप्रदेश राज्य की कौन सी नदी सर्वाधिक मृदा अपरदन करती हैं ?
उत्तर➜चम्बल
प्रश्न➜मध्यप्रदेश की बेतवा नदी का उद्
गम स्थान हैं ?
उत्तर➜रायसेन जिले का कुमरा नामक गॉंव
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में श्यामा प्रसाद मुखर्जी छात्रवृति योजना किसके लिए चलाई गई ?
उत्तर➜सभी वर्ग के छात्र, छात्राओं के लिए
प्रश्न➜नागदा (उज्जैन) के निकट से किस धातु के संस्कृति के प्रमाण मिले हैं ?
उत्तर➜लौह
प्रश्न➜सिंगरौली जिला विधिवत रूप में कब अस्तित्व में आया?
उत्तर➜24 मई, 2008
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में गुप्तकालीन शिव मन्दिर कहा पर हैं ?
उत्तर➜भूमरा
प्रश्न➜”चॉंद का मुंह टेढ़ा हैं” किसकी रचना हैं ?
उत्तर➜गजानन माधव मुक्तिबोध
प्रश्न➜ग्रामीण महिलाओ को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौन सी योजना प्रारम्भ की गई?
उत्तर➜ग्राम्या
प्रश्न➜मध्य प्रदेश के 47.6% भाग पर कौन-सी मिट्टी पाई जाती हैं ?
उत्तर➜काली मिट्टी
प्रश्न➜राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना लागू करने में मध्य्प्रदेश राज्य का कौनसा स्थान हैं?
उत्तर➜प्रथम
प्रश्न➜देश का प्रथम सौर चालित टेलिफोन एक्सचेंज मध्यप्रदेश में कहाँ पर हैं?
उत्तर➜शिवपुरी
प्रश्न➜गोंड जनजाति के भाग नही हैं?
उत्तर➜हल्बागोंड
प्रश्न➜श्योपुर किस संभाग में शामिल हैं?
उत्तर➜चम्बल
प्रश्न➜देश का कला भवन मध्यप्रदेश के किस जिले में हैं?
उत्तर➜उज्जैन
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में किस स्थान पर यूरेनियम होने के अवशेष मिले हैं?
उत्तर➜शहडोल
प्रश्न➜भरहुत के विश्व प्रसिद्ध स्तूप जिनका निर्माण मौर्यकाल मे हुआ वर्तमान मे किस जिले में है?
उत्तर➜सतना
प्रश्न➜कुषाणों के उन्मूलन के लिए किस वंश के राजाओं ने दस अश्वमेघ यज्ञ करवाये थें?
उत्तर➜नाग वंश
प्रश्न➜म.प्र मे किस प्रकार का बांस पाया जाता है?
उत्तर➜डेंड्रोकैलमस
प्रश्न➜अनुसूचित जातियो की सर्वाधिक जनसंख्या किस जिले में है?
उत्तर➜उज्जैन
प्रश्न➜खजुराहो को महाकाव्य काल में किस नाम से जाना जाता था?
उत्तर➜चेदि
प्रश्न➜प्रदेश में कोरडम निम्न से कौन से जिले में है?
उत्तर➜सीधी
प्रश्न➜मध्यप्रदेश के किस जिले में सबसे अधिक आरक्षित वन हैं?
उत्तर➜उज्जैन
प्रश्न➜इब्राहिम लोदी से किस तोमर वंश के शासक ने संघर्ष किया था?
उत्तर➜विक्रमादित्य
प्रश्न➜ग्वालियर में सिंधिया वंश की स्थापना किसने की थी?
उत्तर➜रानोजी सिंधिया
प्रश्न➜बुन्देलखण्ड पठार की सबसे ऊंची चोटी हैं?
उत्तर➜सिद्धबाबा
प्रश्न➜मालवा के पठार में सबसे ऊंची चोटी कौनसी हैं?
उत्तर➜जनापाव
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में इकबाल सम्मान किस क्षेत्र के लिये दिया जाता है?
उत्तर➜रचनात्मक उर्दू लेखन
प्रश्न➜मध्यप्रदेश राज्य की पूर्व से पश्चिम की लम्बाई कितनी किमी. हैं?
उत्तर➜870 किमी.
प्रश्न➜जहाज महल कहाँ स्थित है?
उत्तर➜माण्डवगढ़ में
प्रश्न➜15 अगस्त, 2003 में अशोक नगर जिले को किस जिले से अलग करके बनाया गया हैं?
उत्तर➜गुना
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में कर्क रेखा कितने जिलों में होकर गुजरती हैं?
उत्तर➜11
सतना स्थित सीमेण्ट कारखाना किस कंपनी ने स्थापित किया हैं?
उत्तर➜बिरला कॉर्पोरेशन द्वारा
प्रश्न➜मध्यप्रदेश राज्य में” कपास अनुसंधान केन्द्र” कहाँ पर हैं?
उत्तर➜खरगौन में
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में कितने संभाग हैं?
उत्तर➜10
प्रश्न➜भारत भवन के वास्तुकार कौन है ?
उत्तर➜चार्ल्स कोरिया
प्रश्न➜ भीलों का निवास स्थल क्या कहलाता है ?
उत्तर➜ फाल्या
प्रश्न➜ नागाजी का मेला किस जिला में लगता है ?
उत्तर➜ मुरैना
प्रश्न➜होशंगाबाद शहर के संस्थापक कौन है ?
उत्तर➜ होशंगशाह
प्रश्न➜ हीरा भूमिया का मेला कहाँ लगता है ?
उत्तर➜ ग्वालियर
प्रश्न➜राज्य जनजातीय संग्रहालय कहाँ स्थित है ?
उत्तर➜ भोपाल
प्रश्न➜ मध्यप्रदेश का राज्य पशु क्या है ?
उत्तर➜जलमगन हिरण
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून कब प्रभावी हुआ था ?
उत्तर➜ 1 मार्च 2014
प्रश्न➜ निम्न में से किस अभ्यारण में कई रॉक आश्रय है ?
उत्तर➜ नरसिंहगढ़
प्रश्न➜बाज बहादुर का महल कहाँ स्थित है ?
उत्तर➜ मांडू
प्रश्न➜व्हाइट टाइगर क्षेत्र का दूसरा नाम क्या है ?
उत्तर➜ बांधवगढ़
प्रश्न➜होशंगशाह का मकबरा कहाँ स्थित है ?
उत्तर➜ असीरगढ़
प्रश्न➜ पंडित कुमार गंर्धव समारोह कहाँ आयोजित किया जाता है ?
उत्तर➜ देवास
प्रश्न➜ रातापानी बाँध कहाँ स्थित है ?
उत्तर➜ रायसेन जिले में
प्रश्न➜काली सिंध नदी किस जिले से निकलती है ?
उत्तर➜ इंदौर
प्रश्न➜ राजवाड़ा महल कहाँ स्थित है ?
उत्तर➜ इंदौर
प्रश्न➜बटेश्वर मंदिर समूह कहाँ स्थित है ?
उत्तर➜ मुरैना
प्रश्न➜ पहसरी बांध कहाँ स्थित है ?
उत्तर➜ ग्वालियरप्रश्न➜Patwari &all exam related Gk.
प्रश्न➜ग्वालियर के किले का निर्माण किस शासक ने करवाया था ?
उत्तर➜सूरज सेन
प्रश्न➜ब्रेडरी नामक जाति का बारहसिंगा केवल एक ही राष्ट्रीय उद्यान मे पाया जाता है?
उत्तर➜कान्हा किसली
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में भिलाव वन उपज कहां से एकत्रित की जाती हैं ?
उत्तर➜छिन्दवाड़ा
प्रश्न➜चन्द्रगुप्त द्वितीय की राजधानी कहां पर थी ?
उत्तर➜उज्जयिनी
प्रश्न➜बान्धवगढ राष्ट्रीय उद्यान पूर्व मे शहडो
ल जिले मे आता था अब किस जिले में आता है?
उत्तर➜उमरिया
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में “संजीवनी संस्थान” कहां स्थित हैं ?
उत्तर➜भोपाल
प्रश्न➜किस जनजाति का मूल निवास कोटा(राजस्थान) और गुना(मध्यप्रदेश) तक का क्षेत्र हैं ?
उत्तर➜सहरिया
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में कपड़ो का शहर कहा जाता हैं ?
उत्तर➜इन्दौर
प्रश्न➜कौनसा नगर ताम्रपाषाणयुगीन मालवा संस्कृति का प्रमुख केन्द्र था ?
उत्तर➜नवदाटोली (इन्दौर)
प्रश्न➜राज्य में 11वीं पंचवर्षीय योजना में सर्वाधिक बजट किस क्षेत्र में दिया गया हैं ?
उत्तर➜सामाजिक सेवाएं
प्रश्न➜1956 ई. में मध्यप्रदेश का कौनसा क्षेत्र महाराष्ट्र मे मिला दिया गया ?
उत्तर➜विदर्भ
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में 1857 की क्रांति का विद्रोह सर्वप्रथम कहा हुआ था ?
उत्तर➜बानपुर और सागर
प्रश्न➜धार के दुर्ग का पुनर्निमाण किस मुस्लिम शासक ने करवाया था?
उत्तर➜मुहम्मद तुगलक
प्रश्न➜मध्यभारत के पठार का प्रमुख चीनी कारखाना डबरा किस जिले मे है?
उत्तर➜ग्वालियर
मध्यप्रदेश का कौनसा संभाग क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा हैं ?
उत्तर➜जबलपुर संभाग
प्रश्न➜मध्यप्रदेश राज्य में कितने प्रतिशत सिंचाई तालाबों द्वारा होती हैं ?
उत्तर➜23 प्रतिशत
प्रश्न➜झाबुआ में मंहगाई विरोधी आन्दोलन कब चलाया गया था ?
उत्तर➜1935
प्रश्न➜कपिलधारा व दुग्धधारा जलप्रपात किस जिले मे है?
उत्तर➜शहडोल
प्रश्न➜निम्न में से ग्रेफाइट का उत्पादन मध्यप्रदेश के किस स्थान से होता हैं ?
उत्तर➜बैतूल
प्रश्न➜मध्य्प्रदेश राज्य का सबसे पुराना चिकित्सा महाविद्यालय कहां पर हैं ?
उत्तर➜गजराराजे चिकित्सा महाविश्वविद्यालय (ग्वालियर)
प्रश्न➜मध्यप्रदेश के किस जिले में सर्वाधिक वन पाया जाता हैं ?
उत्तर➜मण्डला
प्रश्न➜म.प्र. मे प्रथम ग्राम न्यायालय कहा प्रारम्भ किया गया?
उत्तर➜झातला(नीमच)
प्रश्न➜1923 मे कहा से झण्डा सत्याग्रह क शुभारम्भ हुआ?
उत्तर➜जबलपुर
प्रश्न➜मध्यप्रदेश का एक मात्र शहर जहां पर IIT और IIM विश्वविद्यालय खोले गये हैं ?
उत्तर➜इन्दौर
प्रश्न➜मध्य भारत पर हूणों ने किस शताब्दी में आक्रमण किया था ?
उत्तर➜छठी शताब्दी
प्रश्न➜मध्यप्रदेश में पगल्या किस अंचल की लोकचित्र कला हैं ?
उत्तर➜मालवा
प्रश्न➜म.प्र. उत्सव कहा होता है?
उत्तर➜दिल्ली
मध्यप्रदेश के सॉंची में किस समुदाय का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं ?
उत्तर➜बौद्ध

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Posted by: Namit Gupta - 03-23-2019, 09:42 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

Mission SSC For Students
जानकारियां दुनिया की

1✔विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप - एशिया ( विश्व के क्षेत्रफल का 30%)
2✔विश्व का सबसे छोटा महाद्वीप - आस्ट्रेलिया
3✔विश्व का सबसे बड़ा महासागर - प्रशांत महासागर
4✔विश्व का सबसे छोटा महासागर - आर्कटिक महासागर
5✔विश्व का सबसे गहरा महासागर - प्रशांत महासागर
6✔विश्व का सबसे बड़ा सागर - दक्षिणी चीन सागर
7✔विश्व की सबसे बड़ी खाड़ी - मेक्सिको की खाड़ी
8✔विश्व का सबसे बड़ा द्वीप - ग्रीनलैण्ड
9✔विश्व का सबसे बड़ा द्वीप समूह - इण्डोनेशिया
10✔विश्व की सबसे लम्बी नदी - नील नदी ल. 6650 किमी
11✔विश्व की सबसे बड़ी अपवाह क्षेत्र वाली नदी - अमेजन नदी
12✔विश्व की सबसे बड़ी सहायक नदी - मेडिरा ( अमेजन की )
13✔विश्व की सबसे व्यस्त व्यापारिक नदी - राइन नदी
6✔विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप - माजुली, भारत
17✔विश्व का सबसे बड़ा देश - रूस
18✔विश्व का सबसे छोटा देश - वेटिकन सिटी ( 44 हेक्टेयर)
19✔विश्व में सर्वाधिक मतदाताओं वाला देश - भारत
20✔विश्व में सबसे लंबी सीमा रेखा वाला देश - कनाडा
21✔विश्व में सबसे ज्यादा सीमा रेखा वाला देश - चीन ( 13 देश )
22✔विश्व का सबसे बड़ा रेगिस्तान - सहारा ( आफ्रीका )
23✔एशिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान - गोबी
24✔विश्व की सबसे ऊंची पर्वत चोटी - माउण्ट एवरेस्ट ( 8848 मी. )
25✔विश्व की सबसे लम्बी पर्वतमाला - एणडीज ( दक्षिण अमेरिका )
26✔विश्व का सबसे गर्म प्रदेश - अल्जीरिया ( लीबिया )
27✔विश्व का सबसे ठंडा स्थान - वोस्तोक अंटार्कटिका
32✔विश्व की सबसे बड़ी खारे पानी की झील - केस्पियन सागर
33✔विश्व की सबसे बड़ी ताजा पानी की झील - लेक सुपीरियर
34✔विश्व की सबसे गहरी झील - बैकाल झील
35✔विश्व सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित झील - टिटिकाका
36✔विश्व की सबसे बड़ी कृत्रिम झील - वोल्गा झील
37✔विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा - सुन्दरवन डेल्टा
38✔विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य - महाभारत
39✔विश्व का सबसे बड़ा अजायबघर - अमेरिकन म्यूजियम आँफ नेचुरल हिस्ट्री
40✔विश्व का सबसे बड़ा चिड़ियाघर - क्रूजर नेशनल पार्क ( द. आफ्रीका )
41✔विश्व का सबसे बड़ा पक्षी - आस्ट्रिच ( शुतुरमुर्ग )
42✔विश्व का सबसे छोटा पक्षी - हमिंग बर्ड
43✔विश्व का सबसे बड़ा स्तनधारी - नीली व्हेल
44✔विश्व का सबसे विशाल मंदिर - अंकोरवाट का मंदिर
46✔विश्व की सबसे ऊंची मीनार - कुतुबमीनार
47✔विश्व का सबसे बड़ा घंटाघर - द ग्रेट बेल आँफ मास्को
48✔विश्व की सबसे बड़ी मूर्ति - स्टैच्यू आँफ लिबर्टी
49✔विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर परिसर - अक्षरधाम मंदिर दिल्ली
50✔विश्व की सबसे बड़ी मस्जिद -अल हयात,रियाध, सऊदी अरब
51✔विश्व की सबसे ऊंची मस्जिद - सुल्तान हसन मस्जिद,कहिरा
52✔विश्व की सबसे ऊँची ईमारत -बुर्ज खलीफा, दुबई(यूनाइटेड अरब एमिरेट्स)
52✔विश्व का सबसे बड़ा चर्च - वेसिलिका आँफ सेंट पीटर ( वेटिकन सिटी )
53✔दुनिया की सबसे बड़ी हिन्दू आबादी-भारत
54✔दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी -इंडोनिशिया
55✔दुनिया की सबसे बड़ी ख्रिस्ती (ईसाई)आबादी -नेकोटिना वालाकिसी
56✔दुनिया की सबसे बड़ी यहूदी आबादी - इजराइल
57✔दुनिया की सबसे बड़ी बुद्धिस्ट अबादी-चाइना
58✔विश्व का सबसे बड़ा आतंकी संगठन-आईएसआईएस,इराक-सीरिया
59✔दुनिया का सबसे मोस्ट वॉन्टेड -अबु-बक्र अल-बगदादी(आईएस का सरगना)
60✔ दुनिया का सबसे बड़ा डोनर-बिल गेट्स
61✔दुनिया की सबसे शक्तिशाली व्यक्ति -बराक ओबामा
62✔विश्व का सबसे लम्बा रेलवे प्लेटफार्म - कज़ाख़िस्तान
63✔विश्व का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन - ग्रांड सेंट्रल टर्मिनल न्यूयॉर्क
64✔विश्व में सबसे व्यस्त हवाई अड्डा - शिकागो - इंटरनेशनल एयरपोर्ट
65✔विश्व का सबसे बड़ा हवाई अड्डा - किंग खालिद हवाई अड्डा रियाद, सऊदी अरब
66✔विश्व का सबसे बड़ा बंदरगाह - उज़्बेकिस्तान
67✔विश्व का सबसे लंबा बांध - हीराकुण्ड बांध उड़ीसा
68✔विश्व का सबसे ऊंचा बांध - रेगुनस्की ( ताजिकिस्तान )
69✔विश्व की सबसे ऊंची सड़क - लेह मनाली मार्ग
70✔विश्व का सबसे बड़ा सड़क पुल - महात्मा गांधी सेतु पटना
65✔विश्व का सबसे ऊंचा ज्वालामुखी - माउंट कॅाटोपैक्सी
66✔विश्व में सबसे अधिक कर्मचारियों वाला विभाग - भारतीय रेलवे
67✔विश्व में सबसे ऊंचा क्रिकेट मैदान - चैल हिमाचल प्रदेश
68✔विश्व का सबसे बड़ा पुस्तकालय - कांग्रेस पुस्तकालय लंदन
69✔विश्व का सबसे बड़ा संग्रहालय - ब्रिटिश संग्रहालय लंदन
70✔विश्व की सबसे बड़ी कार्यलयी इमारत - पेट

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Posted by: Namit Gupta - 03-23-2019, 09:40 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

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रक्त से संबंधित कुछ जानकारी 

 ☞. सर्वग्राही रक्त समूह है : → ?‌?‌
☞. सर्वदाता रक्त समूह है : → ?‌
☞. आर० एच० फैक्टर सबंधित है : → रक्त से
☞. ?‌?‌ फैक्टर के खोजकर्ता : → लैंड स्टीनर एवं विनर
☞. रक्त को शुद्ध करता है : → वॄक्क (?‌?‌?‌?‌?‌?‌)
☞. वॄक्क का भार होता है : → ❶❺⓿ ग्राम
☞. रक्त एक विलयन है : → क्षारीय
☞. रक्त का ?‌?‌ मान होता है : → ❼.❹
☞. ह्र्दय की धडकन का नियंत्रक है : → पेसमेकर
☞. शरीर से ह्रदय की ओर रक्त ले जाने वाली रक्तवाहिनी कहलाती है : → शिरा
☞. ह्रदय से शरीर की ओर रक्त ले जाने वाली रक्तवाहिनी कहलाती है : → धमनी
☞. जराविक-❼ है : → कृत्रिम ह्रदय
☞. शरीर में आक्सीजन का परिवहन : → रक्त द्वारा
☞. सबसे छोटी अस्थि : → स्टेपिज़ (मध्य कर्ण में)
☞. सबसे बड़ी अस्थि : → फिमर (जंघा में)
☞. सबसे लम्बी पेशी : → सर्टोरियास
☞. सबसे बड़ी ग्रंथि : → यकृत
☞. सर्वाधिक पुनरुदभवन की क्षमता : → यकृत में
☞. सबसे कम पुनरुदभवन की क्षमता : → मस्तिष्क में
☞. शरीर का सबसे कठोर भाग : → दांत का इनेमल
☞. सबसे बड़ी लार ग्रंथि : → पैरोटिड ग्रंथि
☞. सबसे छोटी ?‌?‌?‌ : → लिम्फोसाइट
☞. सबसे बड़ी ?‌?‌?‌ : → मोनोसाइट

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Posted by: Namit Gupta - 03-23-2019, 09:37 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

Mission ? SSC For Students


Q.1 आहड़ सभ्यता में मिले बर्तनों का रंग कौनसा है ?
Ans. भूरा व लाल

Q.2 कालीबंगा सभ्यता के लोग किस लिपि का उपयोग करते थे ? 
Ans. सैन्धव

Q.3 किस पुरातात्विक स्थल का प्राचीन नाम मालव नगर था ?
Ans. नगर

Q.4 बड़ी मात्रा में मालव सिक्के व आहत मुद्राएं कहां से प्राप्त हुई हैं ?
Ans. नगर

Q.5 शिवि जनपद सिक्के राजस्थान के किस शहर से प्राप्त हुए ?
Ans. नगरी

Q.6 गणेश्वर सभ्यता कौनसी है ?
Ans. ताम्र सभ्यता

Q.7 रणथम्भौर के चौहान वंश का संस्थापक कौन था ?
Ans. गोविन्द राय

Q.8 राजस्थान का कौनसा दुर्ग कायनगिरी के नाम से जाना जाता है ?
Ans. जालौर दुर्ग

Q.9 बनी - ठनी पेंटिंग शैली का संबंध किस शहर से है ?
Ans. किशनगढ़

Q.10 जीण माता का मंदिर कहां स्थित है ?
Ans. सीकर

Q.11 बीकानेर के 'राठोरान री ख्यात' के लेखक कौन है ?
Ans. दयालदास

Q.12 तारागढ़ का किला कहां स्थित है ?
Ans. अजमेर

Q.13 भरतपुर का संबंध किस राजघराने से है ?
Ans. जाट

Q.14 जैसलमेर का गुंडाराज के लेखक कौन है ?
Ans. सागरमल गोपा

Q.15 मीराबाई के पति का नाम क्या था ?
Ans. भोजराज

Q.16 शेखावाटी क्षेत्र का प्रमुख नृत्य है ?
Ans. गीदड़

Q.17 बादशाह का मेला कहां लगता है ?
Ans. ब्यावर

Q.18 चौरासी खंभों वाली छतरी कहां स्थित है ?
Ans. बूंदी

Q.19 ऊंट के बीमार होने पर किस लोक देवता की पूजा की जाती है ?
Ans. पाबूजी

Q.20 गोगुंदा राजस्थान के किस जिले में स्थित है ?
Ans. उदयपुर

Q.21 आनासागर कहां स्थित है ?
Ans. अजमेर

Q.22 जोधपुर से पहले राठौड़ों की राजधानी कहां पर थी ?
Ans. मंडोर

Q.23 तराइन के प्रथम युद्ध का परिणाम क्या रहा ?
Ans. पृथ्वीराज चौहान की विजय

Q.24 हल्दीघाटी राजस्थान के किस जिले में स्थित है ?
Ans. राजसमंद

Q.25 राजस्थान का राज्य वृक्ष खेजड़ी को राज्य वृक्ष कब घोषित किया गया ?
Ans. सन् 1983 में

Q.26 मूसी महारानी की छतरी राजस्थान के किस जिले में स्थित है ?
Ans. अलवर

Q.27 बापा रावल का वास्तविक नाम क्या था ?
Ans. कालभोज

Q.28 किसने पिछोला झील का निर्माण करवाया था ?
Ans. बनजारे ने

Q.29 सन् 1576 ई. में हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर की सेना का नेतृत्व किसने किया था ?
Ans. राजा मानसिंह

Q.30 राजा मानसिंह ने आमेर के महल का निर्माण कब करवाया था ?
Ans. सन् 1592 ई. में

Q.31 8 जून 1576 को कौनसा प्रसिद्ध युद्ध लड़ा गया ?
Ans. हल्दीघाटी

Q.32 राजस्थान में बाला दुर्ग किस जिले में स्थित है ?
Ans. अलवर

Q.33 राजस्थान में चांदी के गोले दागने हेतु चर्चित दुर्ग कौनसा है ?
Ans. चूरू का किला

Q.34 मिर्जा राजा मानसिंह का संबंध किस वंश से है ?
Ans. कच्छवाह

Q.35 राजस्थान राज्य के किस जिले को अन्न का कटोरा कहते हैं ?
Ans. श्री गंगानगर

Q.36 राजस्थान राज्य का सबसे गर्म जिला कौनसा है ?
Ans. चूरू

Q.37 राजस्थान राज्य का सबसे पूर्वी जिला है ?
Ans. धौलपुर

Q.38 राजस्थान राज्य की सबसे पुरानी डेयरी पदमा डेयरी किस जिले में स्थित है ?
Ans. अजमेर

Q.39 कचरे से बिजली बनाने का प्रथम कारखाना राजस्थान में कहां लगाया गया है ?
Ans. पदमपुर [ गंगानगर ]

Q.40 दीनबंधु मॉडल का संबंध किससे है ?
Ans. बायोगैस ऊर्जा से

Q.41 राजस्थान राज्य की इकाई ऑयल इंडिया का कार्यालय स्थित हैं ?
Ans. बीकानेर

Q.42 सरिस्का अभ्यारण को राष्ट्रीय पार्क का स्तर कब घोषित किया गया ?
Ans. सन् 1990 में

Q.43 राजस्थान के राज्य पक्षी का नाम है ?
Ans. गोडावन

Q.44 महारानी कॉलेज कहां स्थित है ?
Ans. जयपुर

Q.45 राजस्थान में मार्बल नगरी के नाम से मशहूर शहर का नाम है ?
Ans. किशनगढ़

Q.46 श्री तेजाजी धाम सुरसुरा राजस्थान के किस जिले में स्थित है ?
Ans. अजमेर

Q.47 उदयपुर क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा है ?
Ans. मेवाड़ी

Q.48 राजस्थान में झिलो की नगरी किस शहर को कहा जाता है ?
Ans. उदयपुर

Q.49 पांचना बांध किस जिले में स्थित है ?
Ans. करौली

Q.50 सेवन घास किस जिले में पाई जाती है ?
Ans. जैसलमेर

Q.51 अंता पावर प्लांट किस प्रकार का है ?
Ans. गैस

Q.52 राजस्थान के किन दो जिलों में होकर कर्क रेखा गुजरती है ?
Ans. बांसवाड़ा व डूंगरपुर

Q.53 राजस्थान की सर्वाधिक लंबी सीमा किस राज्य से लगती है ?
Ans. मध्य प्रदेश

Q.54 राजस्थान राज्य की स्थलीय सीमा की कुल कितनी लंबाई है ?
Ans. 5920 कि. मी.

Q.55 राजस्थान की पाकिस्तान से लगने वाली सीमा रेखा को क्या कहते हैं ?
Ans. रैडक्लिप रेखा

Q.56 राजस्थान के किस जिले की सीमा मध्यप्रदेश को स्पर्श नहीं करती हैं ?
Ans. सिरोही

Q.57 राजस्थान के किस जिले का मुख्यालय सर्वाधिक पाक सीमा के नजदीक है ?
Ans. श्रीगंगानगर

Q.58 राजस्थान की किस जिले की सीमा सर्वाधिक आठ जिलों में लगती हैं ?
Ans. पाली

Q.59 राजस्थान राज्य का एकमात्र ऐसा जिला जिसमें एक भी उप तहसील नहीं है ?
Ans. पाली

Q.60 स्वतंत्रता प्राप्ति के समय राजस्थान राज्य में कितने जिले थे ?
Ans. 25 जिले

Q.61 राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावन को राज्य पक्षी घोषित किस वर्ष किया गया ?
Ans. सन् 1981 में

Q.62 राजस्थान के राज्य पशु चिंकारा को राज्य पशु कब घोषित किया गया ?
Ans. सन् 1981 में

Q.63 राजस्थान के जिला बांसवाड़ा और डूंगरपुर के मध्य के भू भाग को क्या कहते हैं ?
Ans. मेवल

Q.64 काठल किस नदी के आसपास के क्षेत्र को कहा जाता है ?
Ans. माही

Q.65 राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान कौनसा है ?
Ans. माउंट आबू

Q.66 राजस्थान का सर्वाधिक वर्षा वाला जिला कौनसा है ?
Ans. झालावाड़

Q.67 राजस्थान मे सबसे कम वर्षा किस जिले में होती है ?
Ans. जैसलमेर

Q.68 चित्तौड़ जिले के निर्माता शासक चित्रागंद का संबंध किस राजवंश से है ?
Ans. मोरी 

Q.69 राजा रायसिंह राठौर द्वारा बनाया गया जूनागढ़ दुर्ग राजस्थान के किस जिले में स्थित है ?
Ans. बीकानेर

Q.70 पोथीखाना चित्रकला संग्रहालय कहां स्थित है ?
Ans. जयपुर

Q.71 रागमाला का चित्र किस चित्र शैली का है ?
Ans. अलवर शैली का

Q.72 राजस्थानी लोक कला में कपड़ों पर निर्मित चित्रों को क्या कहते हैं ?
Ans. पटचित्र

Q.73 राजस्थानी लोक चित्र शैली में 'पाने' क्या है ?
Ans. कागज पर चित्रण

Q.74 पिछवाइयों के चित्रण का मुख्य विषय है ?
Ans. श्री कृष्ण लीला

Q.75 पट चित्रण को राजस्थानी में क्या कहा जाता है ?
Ans. फड़

Q.76 मोरध्वज व निहालचंद किस चित्रकला शैली से संबंधित है ?
Ans. किशनगढ़ शैली

Q.77 कौनसा चित्रकार भैंसों के चितेरे के रूप में विख्यात हैं ?
Ans. परमानंद चोयल

Q.78 कौनसा चित्रकार भीलो के चितेरे के रूप में विख्यात है ?
Ans. गोवर्धन लाल बाबा

Q.79 किस चित्र शैली में पीला रंग प्रधान रहा है ?
Ans. बीकानेर शैली

Q.80 राजस्थान की कौनसी चित्रकला सबसे प्राचीन मानी जाती है ?
Ans. मेवाड़ शैली

Q.81 ऊट की खाल पर किया गया चित्रांकन किस चित्र शैली की विशेषता है ?
Ans. बीकानेर शैली

Q.82 किस शैली पर मुगल प्रभाव अधिक पड़ा है ?
Ans. आमेर शैली

Q.83 किस राजस्थानी रियासत में प्रधानमंत्री को 'मुसाहिब' कहा जाता था ?
Ans. जयपुर रियासत

Q.84 नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना धौलपुर की जनता को जागृत करने के लिए किस वर्ष की गई थी ?
Ans. सन् 1934 में

Q.85 मिहिर भोज का राज्यारोपण कब हुआ था ?
Ans. सन् 836 ई. में

Q.86 सन् 967 ई. में किस वंश द्वारा आमेर राज्य की स्थापना की गई थी ?
Ans. कछावाहा वंश

Q.87 सन् 967 ई. में कछावाहा वंश के किस शासक ने आमेर राज्य की स्थापना की थी ?
Ans. धोलाराय

Q.88 पहिए का आविष्कार किस काल में हुआ था ?
Ans. नव पाषाण काल

Q.89 जैसलमेर में सागरमल गोपा का देहांत कैसे हुआ था ?
Ans. हत्या कर दी गई थी

Q.90 वंश भास्कर के रचयिता कौन है ?
Ans. सूर्यमल्ल मिश्रण

Q.91 राजस्थान के किस जिले में चिरवा अभिलेख है ?
Ans. उदयपुर

Q.92 कौन हड़प्पा सभ्यता के उत्खनन कर्ता है ?
Ans. उदयपुर

Q.93 राजस्थान में गणेश्वर सभ्यता किस नदी के किनारे विकसित हुई ?
Ans. कांतली

Q.94 राजस्थान की किस सभ्यता को ताम्रवती सभ्यता के नाम से जाना जाता है ?
Ans. आहड़ सभ्यता

Q.95 राजस्थान दिवस किस तिथि को मनाया जाता है ?
Ans. 30 मार्च

Q.96 राजस्थान में कालीबंगा किस जिले में है ?
Ans. हनुमानगढ़

Q.97 सहायक संधि का जन्मदाता कौन था ?
Ans. लॉ - वेलेजली

Q.98 राजस्थान के किस जिले में नीमूचाणा है ?
Ans. अलवर

Q.99 किसी व्यक्ति द्वारा सम्प सभा की स्थापना की गई ?
Ans. गोविंद गुरु

Q.100 किस राज्य ने सबसे पहले अंग्रेजों के साथ संधि की थी ?
Ans. करौली

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Star निमाड़ी साहित्य: डॉ. मीना साकल्ले Nimadi sahitya: Dr. Meena Sakalle
Posted by: admin - 03-19-2019, 06:37 AM - Forum: Post Advertisement - No Replies

निमाड़ी साहित्य: डॉ. मीना साकल्ले Nimadi sahitya: Dr. Meena Sakalle

डॉ. मीना साकल्ले द्वारा निमाड़ी साहित्य एवं लोक-संस्कृति को सहेजने संजोने का अनूठा प्रयास.

   
   
   
   
   
   
   
   
   

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Posted by: Jyot singh - 03-16-2019, 01:15 PM - Forum: Share your stuff - No Replies


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Posted by: Jamex55sWhova - 03-15-2019, 03:57 AM - Forum: Share your stuff - Replies (2)

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Star जन्म शताब्दी महोत्सव !!
Posted by: admin - 03-11-2019, 11:49 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

जन्म शताब्दी महोत्सव !!

जय गुरूदेव !

सभी भूदेवताओ को प्रणाम,हर्ष का विषय है परमपूज्य गुरुदेव श्री बालीपुर वाले बाबा के जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में  गुरु आशीर्वाद से "गायत्री पुरूश्चरण" का आयोजन दिनांक 13 से 20 मार्च तक होना तय हुआ है , जिसमे 24 लाख गायत्री मंत्र जप होंगे,जिसमें आप सभी सादर आमंत्रित है। निवेदन है इस दिव्य आयोजन का हिस्सा बनें और यथाशक्ति गायत्री जप कर ब्रह्म शक्ति को बढ़ाएं। आयोजन में अंशकालिक रूप से भी हिस्सा लिया जा सकता है। अतः ब्राह्मण समाज से निवेदन है कम से कम एक दिन अवश्य आश्रम पधारें और यथाशक्ति जप समर्पण करें।

आयोजन मे ठहरने ,भोजन प्रसादी, की पूर्ण व्यवस्था रहेगी।



   

   

   

   

   

   

नोट:-- कृपया अपनी स्वीकृति व अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें 
श्री अंबिका आश्रम बालीपुर  धाम
ते. -मनावर जि.- धार (म.प्र.)
जन्म शताब्दी महोत्सव !!

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Thumbs Up एक अमेरिकी वैज्ञानिक का केस, रेकी हीलिंग के साथ-साथ ज्योतिष परामर्श से हल हुआ
Posted by: admin - 03-08-2019, 06:16 PM - Forum: Reiki cases - No Replies

एक अमेरिकी वैज्ञानिक का केस, रेकी हीलिंग के साथ-साथ ज्योतिष परामर्श से हल हुआ.

नमस्ते,  मैं एक अमेरिकी वैज्ञानिक हूं और मुझे अपने शोध कार्य के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार मिला. सबकुछ ठीक चल रहा था लेकिन पुरस्कार मिलने के कुछ महीनों बाद बाद, मेरे सीनियर्स ने मेरे साथ काम करने से इनकार कर दिया और बताया कि वे नहीं चाहते कि मैं उनके साथ रहूँ या इस विभाग में कार्य करूँ. उनका कहना था की मेरी कार्य-कुशलता में कमी आ गई है. उन्होंने मेरे सामने मेरे विगत वर्ष का ट्रेक रिकॉर्ड भी प्रस्तुत किया. मैं आश्चर्यचकित थी कि यह कैसे हुआ मेरे प्रदर्शन के लिए मुझे पुरस्कार भी मिला. मैंने बेहतर स्थिति और सामंजस्य बनाने के लिए रेकी करने का अनुरोध किया. मैं रेकी लेने लगी और कुछ दिनों तक रेकी सेशन चलते रहे. जैसा कि रेकी मास्टर ज्योतिष का भी अभ्यास करते हैं, उन्होंने मुझे सुझाव दिया "यदि आप चाहें तो हम ज्योतिष द्वारा समस्या का निदान भी कर सकते हैं लेकिन मैं इसके लिये आपको मजबूर नहीं कर सकता". मैं सहमत थी,  उन्होंने मेरे जन्म विवरण के बारे में पूछा और उस पर काम करना शुरू किया. उन्होंने अपनी रीडिंग की और मुझे बताया कि वर्तमान में नौकरी छोड़ने की कोई संभावना नहीं है इसलिए यह निश्चित है कि आने वाले समय के लिए आप अपनी नौकरी जारी रखेंगे. उन्होंने मुझे समस्या के जल्द से जल्द हल करने के लिए कुछ उपाय करने का भी सुझाव दिया. मैंने भी ज्यादातर सभी उपायों का पालन किया. इस बीच हमने रेकी भी जारी रखी. यहाँ एक ओर वरिष्ठ पैनल मुझे स्वीकार करने के लिए सहमत नहीं थे. जब भी मैं संगोष्ठी या प्रस्तुति के लिए जाना चाहती थी, मैं हमेशा रेकी मास्टर से सलाह लेती थी. उन्होंने मुझे रत्न पहनने के लिए, विशेष रंग की पोशाक पहनने, खाने की आदतों आदि के लिए उपाय दिए, मैं अपने प्रयोगों की सफलता भी पूछती थी, कुंडली पढ़कर उन्होंने मुझे इसके बारे में भविष्यवाणी बताई जिससे मुझे भी मदद मिली. एक बार उन्होंने मुझसे कहा कि आपका प्रयोग इस बार सफल नहीं होगा, लेकिन अगले प्रयास में आपको सफलता मिलेगी. इस तरह की कई भविष्यवाणियां कीं जो मैंने पाया बिल्कुल सही थीं. हम साथ ही रेकी भी करते रहे. कई बार जब सीनियर्स के साथ मेरी जॉब को लेकर मीटिंग चलती थी, उन्होंने यह भी भविष्यवाणी की कि सीनियर्स मुझे कैसे जवाब देने वाले हैं या वे मेरी मदद कैसे करेंगे या नहीं करेंगे, मुझे यह भी सही लगा. हमारे सभी प्रयासों के अंत में मेरे विभाग ने मुझे जॉब पर बने रहने के लिये कहा मैंने अपने उसी पद पर नौकरी जारी रखी. इस प्रकार मैंने रेकी हीलिंग और ज्योतिषीय परामर्श द्वारा अपने कैरियर को स्थिर रख पाई. मैं आभारी हूँ, धन्यवाद.

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Posted by: Shreyas Gupta - 03-07-2019, 08:59 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

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Thumbs Up निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव 2019 की तारीख निर्धारित कर दी गयी है।
Posted by: Kapil mohan - 03-07-2019, 10:55 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव 2019 की तारीख निर्धारित कर दी  गयी है जिसकी प्रदेश अनुसार तिथि निम्न है ।

1)Bihar : April 10, 17, 24, 30 and May 7,12.
2)Odisha : April 10, 17
3)West Bengal : April 17, 24, 30 and may 7, 12
4)Jhadkhand : April 10, 17, 24
5) Chatisgarh : 10, 17, 24
6)MP : April 10, 17, 24
7) Goa : April 17
8)Gujarat : April 30
9) Maharashtra :April 17, 24
10) Rajasthan : April 17, 24
11) Haryana : April 10
12)Himnchal P : May 17
13)J&K : April 10, 17, 24, 30 and May 7
14) Uttarakhand : May
15) Karnataka : April 17
16) Kerala : April 10
17)Tamilnadu : April 24
18)AP : April 30,May
19)Manipur : April 9,17
20) Meghalaya : April 9
21) Mijoram : April 9
22) Nagaland : April 9
23) Arunanchal Pradesh : April 9
24) Assam : April 7,12,24
25)Simon : April 12
25)Tripura : April 7,12
26) Andaman : April 10
27) Chandigarh : April 10
28) Badranagar habeli : April 30
29) Laxyadip : April 10
30) Delhi : April 10
31)Punjab : April 10
32)Utter Prdesh : Aprill 10, 17, 24, 30 and May 7, 12
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Heart गीता दर्शन भाग–5, अध्‍याय—11 ओशो
Posted by: Osho Prem - 03-07-2019, 08:27 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

एक बहुत अदभुत घटना मुझे याद आती है। बंगाल में एक बहुत अनूठे संन्यासी हुए, युक्तेश्वर गिरि। वे योगानंद के गुरु थे। योगानंद ने पश्चिम में फिर बहुत ख्याति पाई। गिरि अदभुत आदमी थे। ऐसा हुआ एक दिन कि गिरि का एक शिष्य गांव में गया। किसी शैतान आदमी ने उसको परेशान किया, पत्थर मारा, मार—पीट भी कर दी। वह यह सोचकर कि मैं संन्यासी हूं क्या उत्तर देना, चुपचाप वापस लौट आया। और फिर उसने सोचा कि जो होने वाला है, वह हुआ होगा, मैं क्यों अकारण बीच में आऊं। तो वह अपने को सम्हाल लिया। सिर पर चोट आ गई थी। खून भी थोड़ा निकल आया था। खरोंच भी लग गई थी। लेकिन यह मानकर कि जो होना है, होगा। जो होना था, वह हो गया है। वह भूल ही गया।

जब वह वापस लौटा आश्रम कहीं से भिक्षा मांगकर, तो वह भूल ही चुका था कि रास्ते में क्या हुआ। गिरि ने देखा कि उसके चेहरे पर चोट है, तो उन्होंने पूछा, यह चोट कहां लगी? तो वह एकदम से खयाल ही नहीं आया उसे कि क्या हुआ। फिर उसे खयाल आया। उसने कहा कि आपने अच्छी याद दिलाई। रास्ते में एक आदमी ने मुझे मारा। तो गिरि ने पूछा, लेकिन तू भूल गया इतनी जल्दी! तो उसने कहा कि मैंने सोचा कि जो होना था, वह हो गया। और जो होना ही था, वह हो गया, अब उसको याद भी क्या रखना! अतीत भी निश्चिंतता से भर जाता है, भविष्य भी। लेकिन एक और बड़ी बात इस घटना में है आगे।

गिरि ने उसको कहा, लेकिन तूने अपने को रोका तो नहीं था? जब वह तुझे मार रहा था, तूने क्या किया? तो उसने कहा कि एक क्षण तो मुझे खयाल आया था कि एक मैं भी लगा दूं। फिर मैंने अपने को रोका कि जो हो रहा है, होने दो। तो गिरि ने कहा कि फिर तूने ठीक नहीं किया। फिर तूने थोड़ा रोका। जो हो रहा था, वह पूरा नहीं होने दिया। तूने थोड़ी बाधा डाली। उस आदमी के कर्म में तूने बाधा डाली, गिरि ने कहा।

उसने कहा, मैंने बाधा डाली! मैंने उसको मारा नहीं, और तो मैंने कुछ किया नहीं। क्या आप कहते हैं, मुझे मारना था! गिरि ने कहा, मैं यह कुछ नहीं कहता। मैं यह कहता हूं जो होना था, वह होने देना था। और तू वापस जा, क्योंकि तू तो निमित्त था। कोई और उसको मार रहा होगा।

और बड़े मजे की बात है कि वह संन्यासी वापस गया। वह आदमी बाजार में पिट रहा था। लौटकर वह गिरि के पैरों में पड़ गया। और उसने कहा कि यह क्या मामला है?
 गिरि ने कहा कि जो तू नहीं कर पाया, वह कोई और कर रहा है। तू क्या सोचता है, तेरे बिना नाटक बंद हो जाएगा!
 तू निमित्त था।

बड़ी अजीब बात है यह। और सामान्य नीति के नियमों के बड़े पार चली जाती है।

कृष्ण अर्जुन को यही समझा रहे हैं। वे यह कह रहे हैं कि जो होता है, तू होने दे। तू मत कह कि ऐसा करूं, वैसा करूं, संन्यासी हो जाऊं, छोड़ जाऊं। कृष्‍ण उसको रोक नहीं रहे हैं संन्यास लेने से। क्योंकि अगर संन्यास होना ही होगा, तो कोई नहीं रोक सकता, वह हो जाएगा।

इस बात को ठीक से समझ लें।

अगर संन्यास ही घटित होने को हो अर्जुन के लिए, तो कृष्ण रोकने वाले नहीं हैं। वे सिर्फ इतना कह रहे हैं कि तू चेष्टा करके कुछ मत कर। तू निश्चेष्ट भाव से, निमित्त मात्र हो जा और जो होता है, वह हो जाने दे। अगर युद्ध हो, तो ठीक। और अगर तू भाग जाए और संन्यास ले ले, तो वह भी ठीक। तू बीच में मत आ, तू स्रष्टा मत बन। तू केवल निमित्त हो।

गीता दर्शन 
 भाग–5, 
अध्‍याय—11
 ओशो

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Heart अचेतन को सजगता के द्वारा रूपांतरित करना कठिन है, और पर्याप्त भी नहीं है, इसलिए सजगता
Posted by: Osho Prem - 03-07-2019, 08:24 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

अचेतन को सजगता के द्वारा रूपांतरित करना कठिन है, और पर्याप्त भी नहीं है, इसलिए सजगता के अलावा और क्या अभ्यास करें?


कृपया इसके बारे में इसके प्रायोगिक आयाम को अधिक ध्यान में रखते हुए समझाए।


अचेतन को रूपांतरित केवल सजगता से ही किया जा सकता है। यह कठिन है, किंतु दूसरा कोई मार्ग नहीं है। सजग होने के लिए कितनी ही विधियां हैं। परंतु सजगता अनिवार्य है। आप विधियां का उपयोग जागरण के लिए कर सकते हैं; किंतु आपको जागना तो पड़ेगा ही।


 
यदि कोई पूछता है कि क्या कोई विधि है अंधकार को मिटाने की सिवा प्रकाश के, तो वह चाहे कितना ही कठिन हो, किंतु वही एकमात्र उपाय है, क्योंकि अंधकार केवल अभाव है, प्रकाश का। इसलिए आपकोप्रकाश का उपस्थित करना होगा और तब अंधकार वहां नहीं होगा।

 

अचेतना, मूर्च्छा-कुछ और नहीं है बल्कि चेतना का अभाव है। वह अपने में कोई विधायक वस्तु नहीं है, इसलिए आप कुछ और नहीं कर सकते सिवाय जागने के। यदि मूर्च्छा अपने ही आप में कुछ होती, तो फिर बात ही दूसरी होती। परंतु वह अपने आप में कुछ भी नहीं है। अचेतना-मूर्च्छा-इसका मतलब कुछ विधायक होना नहीं होता। इसका मतलब है सिर्फ चैतन्य का अभाव। यह सिर्फ अभाव है। इसकी अपनी कोई सत्ता नहीं है। इसका अपना कोई अस्तित्व नहीं है। अचेतन शब्द केवल चैतन्य का अभाव दर्शाता है, इससे अधिक कुछ भी नहीं। जब हम कहते हैं-अंधकार, तो यह शब्द एक गलतफहमी की ओर ले जाता है, क्योंकि जैसी ही हम कहते हैं, अंधकार तो ऐसा प्रतीत होता है कि अंधकार कुछ ऐसी चीज है जो कि है। वस्तुतः वह है नहीं। इसलिए सीधे अंधकार के साथ आप कुछ भी नहीं कर सकते। कैसे कर सकते हैं आप?


आपने चाहे इस तथ्य को कभी न देखा हो, परंतु अंधकार के साथ सीधे आप कुछ भी नहीं कर सकते। जो कुछ भी आप अंधकार के साथ करना चाहते हैं, उसके लिए आपकी प्रकाश के ही साथ कुछ करना पड़ेगा, न कि अंधकार के साथ। यदि आप चाहते हैं कि अंधेरा हो जाए, तो प्रकाश बुझा दें। यदि आप अंधकार को नहीं चाहते, तो प्रकाश जला दें। परंतु सीधे अंधकार के साथ आप कुछ भी नहीं कर सकते। आपको प्रकाश के मार्फत ही कुछ करना पड़ेगा।



क्यों? आप सीधे कुछ नहीं कर सकते? आप सीधे कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि अंधकार जैसी कोई चीज है ही नहीं, इसलिए प्रत्यक्ष आप उसे नहीं छू सकते। आपको कुछ प्रकाश के साथ ही करना पड़ेगा। और तब अंधकार के साथ भी कुछ किया जा सकेगा।



यदि प्रकाश है, तो अंधेरा नहीं है। यदि प्रकाश नहीं है, तो अंधेरा है। आप इस कमरे में प्रकाश ला सकते हैं, किंतु आप अंधेरा नहीं ला सकते। आप यहां से प्रकाश ले जा सकते हैं, अंधेरा नहीं। आप में और अंधकार में कोई संबंध नहीं है। क्यों? यदि अंधकार हो तभी न आदमी उससे संबंधित हो सकता है? परंतु अंधेरा तो है ही नहीं।



भाषा से यह भ्रम पैदा होता है, कि अंधकार जैसी कोई वस्तु है। अंधकार एक नकारात्मक शब्द है। वह इतना ही बतलाता है कि प्रकाश नहीं है, इससे यादा कुछ नहीं; और वही बात के अलावा और क्या करें, तो आप एक असंगत प्रश्न पूछते हैं। आपको सजग होना पड़ेगा, आप इसके अलावा कुछ और नहीं कर सकते।



सचमुच, बहुत सी विधियां हैं, सजग होने के लिए; यह एक दूसरी बात है। प्रकाश को पैदा करने की कितनी ही विधियां हैं, परंतु प्रकाश को ही पैदा करना पड़ेगा। आप आग जला सकते हैं और अंधकार नहीं होगा; आप एक मिट्टी के तेल का दिया जला सकते हैं। और तब भी कोई अंधकार नहीं होगा। और बिजली का उपयोग कर सकते हैं और तब भी कोई अंधेरा नहीं होगा। परंतु कुछ भी किया जाए, कोई भी विधिप्रकाश को उत्पन्न करने की काम में लाई जाए पैदा प्रकाश ही करना होगा।


आत्मपूजा उपनिषद 


ओशो

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Thumbs Up Hattrik Indore N. 1
Posted by: Lalit Vyas - 03-06-2019, 04:04 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

Hattrik Indore N. 1
   
   
   
   

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Exclamation बहुत से हिन्दुओं को कहते हम सभी ने सुना है की सालों से पूजा पाठ कर रहा हूँ लेकिन अभी
Posted by: Govind Acharya - 03-05-2019, 12:42 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

महाशिवरात्रि का महापर्व

बहुत से हिन्दुओं को कहते हम सभी ने सुना है की सालों से पूजा पाठ कर रहा हूँ लेकिन अभी तक कुछ मिला नहीं , कोई फायदा नहीं हुआ  ...........

हिन्दू पूजा पाठ तो करते हैं लेकिन ...बस करते हैं ...न उसके कारण की समझ न उसके तरीके की न नियम न को कानून बस हम पूजा पाठ करते हैं .....और फल नहीं मिल रहा?

*?इसका मुख्य कारण है धर्म ज्ञान का अभाव ... साधना आरधना , धर्म शास्त्रों के पठन पठान का अभाव और ईस्वरीय आराधना में स्वार्थ का समावेश* 

*एक छोटासा उदाहरण देखिये सायद कुछ समझ आ जाए???*
 
?शिव पुराण में कहीं भी यह वर्णन नहीं आया कि भगवान शिव ने गांजा या चीलम व चरस फुकी हो
?किसी भी वेद पुराण में इसका वर्णन नही मिलता 
?भगवान शिव के कुल 108 नाम है कोई भी एक नाम का जुड़ाव इन चीजों से नही है , 


?विपरीत इसके महादेव जी ने संसार की रक्षा के लिए हलाहल विष पिया था , लेकिन इसके बारे में कोई बात तक भी नहीं करता (विष पीने से डॉ जो लगता है ) 




?80 % गंजेडी - चरसी जब गांजा चरस फुकते है तो वे यही कहते हैं कि फिर क्या हुआ यह तो भोले का प्रसाद है । इन जैसे लोगों ने ना तो कभी भगवान शिव को जाना होता है ना कभी पढ़ा और ना कभी जानने की कोशिश करते हैं परंतु कश लगाते  समय इनको शिव जी की याद आ जाती है । 

?ऐसे लोग फ़र्ज़ी फूहड़  भोजपुरी और हरियाणवी भक्ति गाने सुन प्रभावित होते है जिन गानों में शिव जी की भांग और गाजा पीते दिखाया जाता है जो कि बहुत ही शर्मनाक है। ऐसे लोग नकल करने से पहले शिव जी बारे पूरा ज्ञान क्यों नही लेते ऐसी भक्ति के नाम पर वे हम हिन्दुओ की बदनामी करवा रहे। 

?ऐसे लोगों को मैं कहना चाहूंगा कि ज़रा सोचो जो शिव ब्रह्मांड के पिता है ब्रह्मांड के  रचियता व ब्रह्मांड की आत्मा है , जो कण कण में समाए हुए है , जिसका त्रिनेत्र खुलते ही भयंकर प्रलय आ जाए । जो आदियोगी है महातपस्वी व मार्शल आर्ट के जनक है क्या ऐसे शिव को किसी भी तरह के नशे की क्या जरूरत है ? ? 

?वे भगवान है ना कि हम जैसे तुच्छ मानव । उनको किसी सहारे की जरूरत नहीं है , अपने आप में ही संपूर्ण हैं शिव। 
हां उन्हें भांग के पत्ते अवश्य चढ़ते हैं क्योंकि आयुर्वेद में भांग को एक बहुत ही उपयोगी औषधि माना जाता है और आज इसे  पूरा विश्व भी स्वीकार कर रहा है । 

?शिव पुराण के अनुसार समुद्र मंथन सावन के महीने में हुआ था तो जब मंथन में से अमृत निकला था तो उस अमृत को पाने के लिए तो देवता दैत्यों में भगदड़ मच गई थी परंतु ठीक जब अमृत के बाद पृथ्वी को नष्ट कर देने वाला हलाहल विष निकला तो कोई आगे ना आया , तब भगवान शिव आए और उन्होंने उस भयानक विष को अपने कंठ में धारण किया , जिसके कारण वे नीलकंठ व देवों के देव महादेव कहलाए । 

?भगवान शिव के सहस्त्र नाम में एक नाम है कर्पूरगौरम , जिसका अर्थ है पूर्णतः सफेद । लेकिन उस हलाहल विष के सेवन के बाद उनका शरीर नीला पड़ना शुरू हो गया था , भगवान शिव का शरीर तपने लगा लेकिन शिव फिर भी पूर्णतः शांत थे लेकिन देवताओं ने सेवा भावना से भगवान शिव की तपण शांत करने  के लिए उन्हें जल चढ़ाया और विष के प्रभाव कम करने के लिए विजया ( भांग का पौधा ) को दूध में मिला कर भगवान शिव को औषधि रूप में पिलाया । बस यही एक प्रमाण है भगवान शिव के भांग सेवन का , और हमने उन्हें चरस गांजा फुकने वाला एक साधारण सा इंसान  बना दिया , अब आप ही बताइए कि क्या हम सही न्याय कर रहे हैं उस ब्रह्मांड पिता की छवि के साथ ? ?
हम शिव जी के पूजा करते है तो हमने अपने आराध्य से उनकी दी गयी शिक्षा से सीख ले कर तपस्वी, योगी और पवित्र बनाना है और सनातन धर्म की रक्षा करनी है समय समय पर होने वाली मिलावटों को रोकना है

*?महाशिवरात्रि  पर शिवलिंग और जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करे साथ ही अपने मन और आत्मा का भी अभिषेक तप संयम और ज्ञान से करे शिव जी की तरह*

*अपने आराध्यों पर चुटुकुला न बनाये न शेयर करे यह सभी एक निवेदन है?*

*?हमारी कमी यह है कि जब हमारे सामने कुछ गलत हो रहा हो हम उसे बर्दास्त कर जाते है अगर हम उसी समय उन गलत चीजो का उपचार न करे तो वही आगे फैल और समस्या खड़ी कर सकती है*

एक जागरूक सच्चा सनातनी व शिव भक्त होने के नाते। यह मैसेज औरो को भी शेयर कीजियेगा

हर हर महादेव

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  महाशिवरात्रि के दुर्लभ संयोग के बारे में...
Posted by: Govind Acharya - 03-04-2019, 06:06 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

महाशिवरात्रि के दुर्लभ संयोग के बारे में...

1. महाशिवरात्रि का दुर्लभ संयोग

महाशिवरात्रि का पहला दुर्लभ संयोग तो ये है कि इस वर्ष 'महाशिवरात्रि सोमवार' के दिन है। सोमवार को भगवान शिव का दिन माना जाता है। सोमवार को शिवरात्रि का व्रत रखने वाले अविवाहितों का जल्द विवाह हो जाता है। इस दिन शिवजी का अभिषेक पंचामृत से करें तो अविवाहितों का विवाह का योग बन जाता है।



2. महाशिवरात्रि का दुर्लभ संयोग

महाशिवरात्रि का दूसरा दुर्लभ संयोग यह है कि मानशिवरात्रि तिथि के अनुसार सर्वश्रेष्ठ 'श्रवण नक्षत्र' का संयोग बना है। चन्द्रमा इस नक्षत्र के स्वामी हैं और शिवजी के सिर पर चंद्रमा विराजमान है और इसे भगवान विष्णु के वामन अवतार का चरण चिह्न भी माना गया है। इस नक्षत्र में शिवपुराण के अनुसार धन, वैभव, सुख और समृद्धि के लिए शिवलिंग का अभिषेक गन्ने के रस से करना चाहिए।



3. महाशिवरात्रि का दुर्लभ संयोग

महाशिवरात्रि का तीसरा दुर्लभ संयोग ये है कि इस साल महाशिवरात्रि का व्रत 5 मार्च को है और इस दिन 'शिव योग' बन रहा है। शिवरात्रि पर शिव योग में शिव की पूजा करने से पुण्य प्राप्त होता है। शिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा में केसर युक्त दूध से शिव का अभिषेक करने से नौकरी में सफलता का योग बनता है और घर में सुख समृद्धि आती है। शिवलिंग का अभिषेक करने के बाद शिवजी को भोग में खीर अर्पित करने से आत्मा को शांति, पितरों को शांति और नव गृह शांति के योग बनते हैं।



4. महाशिवरात्रि का दुर्लभ संयोग

महाशिवरात्रि का चौथा दुर्लभ संयोग यह है कि महाशिवरात्रि पर योगों में महायोग कहे जाने वाले सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि को सर्वसिद्धि योग भी कहा जाता है, इस योग में शिवरात्रि का व्रत भी है जिससे महाशिवरात्रि का महत्व कई गुना बढ़ गया है। सर्वार्थ सिद्धि में शिवरात्रि पर शिवतांडव स्तोत्र या शिव सहस्रनाम का पाठ करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है और इस सर्वसिद्धि योग में रुद्राभिषेक करने से आरोग्य जीवन प्राप्त होता है और जीवन में आने वाली सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है और आपके सभी कार्य सफल होते हैं।



5. महाशिवरात्रि का दुर्लभ संयोग

महाशिवरात्रि का पांचवा दुर्लभ संयोग ये है कि शिवरात्रि का व्रत पांच मार्च को है और इस दिन 'धनिष्ठा नक्षत्र' है। वैदिक ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार 'धनिष्ठा नक्षत्र' में महाशिवरात्रि पूजाविधि अनुसार करने से रंक भी राजा बन जाता है। 27 नक्षत्रों में से 23वां 'धनिष्ठा नक्षत्र' का स्वामी मंगल और देवता वसु को माना गया है। 'धनिष्ठा नक्षत्र' में शिवलिंग की पूजा में शहद, लाल चंदन और गुलाब के इत्र से पूजा करना शुभ फलदाई माना गया है। शिवलिंग का अभिषेक इन तीनों चीजों से करने से गरीब भी धनवान बन जाता है।

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  महा​शिवरात्रि 2019
Posted by: Govind Acharya - 03-04-2019, 06:04 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

महाशिवरात्रि 2019

 महाशिवरात्रि 4 मार्च को है। इस दिन शिव जी को रुद्राक्ष चढ़ाने से लेकर कुछ अन्य उपाय करने से भोलेनाथ को प्रसन्न किया जा सकता है। इससे रुपए-पैसों की दिक्कत दूर होने के साथ विवाह में हो रही देरी या दूसरी समस्याएं भी सुलझ जाएंगी।*
*यदि किसी जातक के विवाह में अड़चन आ रही है तो उसे महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर केसर मिला हुआ मीठा दूध चढ़ाना चाहिए। इससे विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती है उत्तम विवाह के योग बनने लगते है*
*धन लाभ के लिए महाशिवरात्रि के दिन नंदी(बैल) को हरा चारा खिलाना चाहिए। इससे जीवन में हर्ष उल्लास, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है*। 
*शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर एक आँवला अथवा आँवले के मुरब्बे का पीस चढ़ाकर उसके ऊपर शहद चढ़ाएं , इससे भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते है । ऐसा करने से भगवान आशुतोष की कृपा से जीवन में प्रेम, पारिवारिक सहयोग, यश और प्रचुर मात्रा में स्थाई धन सम्पति के योग प्रबल होते है । इस उपाय को प्रत्येक सोमवार को भी अवश्य ही करना चाहिए ।*
*शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर अनार के फूल चढ़ाकर उसपर शहद चढ़ाएं , इसको करने से उस जातक के जीवन में , घर कारोबार में कभी भी किसी भी प्रकार का आर्थिक संकट नहीं आता है ।*
*अगर कोई व्यक्ति किसी रोग से पीड़ित है तो उसे शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर काले तिल अवश्य ही चढ़ाने चाहिए । इससे रोग दूर होते है और जातक को दीर्घायु की प्राप्ति होती है । इस उपाय को शिवरात्रि से शुरू करते हुए प्रत्येक सोमवार को अवश्य ही करना चाहिए ।*
*?1.जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है उन्हें महाशिवरात्रि के दिन 3 मुखी रुद्राक्ष की पूजा करके, उसे गले में धारण करना चाहिए। आप चाहें तो उसका ब्रेसलेट बनावाकर हाथ में भी धारण कर सकते हैं। इससे धन लाभ होगा।*
*?2.कई बार ग्रहों की खराब हालत के चलते भी धन का नाश होता है। इससे बचने के लिए शिवरात्रि के दिन शिव मन्दिर में जाकर भगवान को चावल अर्पित करने चाहिए और चरण छूकर भगवान का आशीर्वाद लें, इससे समस्या दूर होगी।*
*?3.जिन लोगों की कुंडली में मृत्यु योग है या बुरा समय है तो आप महाशिवरात्रि के दिन घर में महामृत्युंजय यंत्र की स्थापना करें और इसके मंत्र का जाप करें।*
*?4.महाशिवरात्रि को सुबह स्नान आदि के बाद शिवलिंग पर 5 बेल पत्र चढ़ाएं और हर बार बेलपत्र चढ़ाते समय "ऊँ नमः शिवाय" मंत्र का जप करें। इससे आपको हर कार्य में सफलता मिलेगी।*
*?5.अगर व्यापार में नुकसान हो रहा है तो काली गुंजा के 11 दाने लेकर, उन्हें भगवान शिव को अर्पण करके अपनी दुकान में रख दें। इससे हालात सुधर जाएंगे।*
*?6.अगर वैवाहिक जीवन में दिक्कतें आ रही हैं तो महाशिवरात्रि के दिन किसी सुहागन स्त्री को लाल साड़ी और श्रृंगार की वस्तुएं दान दें। इससे समस्या हल हो जाएगी।*
*?7.मोक्ष की प्राप्ति के लिए एक मुखी रुद्राक्ष में गंगाजल छिड़ककर इसे शुद्ध कर लें। अब रोजाना ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। इससे मृत्यु के बाद आपको मोक्ष मिलेगा।*
*?8.शिव जी की कृपा पाने के लिए उन्हें खीर समेत दूसरी सफेद वस्तुओं का भोग लगाएं। इससे आपके जीवन में भी खुशियों की मिठास बढ़ेगी।*
*?9.अगर आपके शत्रु आप पर हावी हो जाते हैं तो महाशिवरात्रि के दिन से रुद्राष्टक का पाठ करें। अब ये प्रक्रिया नियमित रूप से जारी रखें। इससे आपके दुश्मन घुटने टेक देंगे।*
*?10.महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का पंचामृत से स्नान और जलाभिषेक करने से व्यक्ति को सफलता की प्राप्ति होती है।*
*जो व्यक्ति घोर आर्थिक संकट से जूझ रहे हों, कर्ज में डूबे हों, व्यापार व्यवसाय की पूंजी बार-बार फंस जाती हो उन्हें दारिद्रय दहन स्तोत्र से शिवजी की आराधना करनी चाहिए.*
*?महर्षि वशिष्ठ द्वारा रचित यह स्तोत्र बहुत असरदायक है. यदि संकट बहुत ज्यादा है तो शिवमंदिर में या शिव की प्रतिमा के सामने प्रतिदिन तीन बार इसका पाठ करें तो विशेष लाभ होगा.*
*?जो व्यक्ति कष्ट में हैं अगर वह स्वयं पाठ करें तो सर्वोत्तम फलदायी होता है लेकिन परिजन जैसे पत्नी या माता-पिता भी उसके बदले पाठ करें तो लाभ होता है.*
*?शिवजी का ध्यान कर मन में संकल्प करें. जो मनोकामना हो उसका ध्यान करें फिर पाठ आरंभ करें.*
*?श्लोकों को गाकर पढ़े तो बहुत अच्छा, अन्यथा मन में भी पाठ कर सकते हैं. आर्थिक संकटों के साथ-साथ परिवार में सुख शांति के लिए भी इस मंत्र का जप बताया गया है.*
*।।दारिद्रय दहन स्तोत्रम्।।*
विश्वेशराय नरकार्ण अवतारणाय
कर्णामृताय शशिशेखर धारणाय।
कर्पूर कान्ति धवलाय, जटाधराय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।1
गौरी प्रियाय रजनीश कलाधराय,
कलांतकाय भुजगाधिप कंकणाय।
गंगाधराय गजराज विमर्दनाय
द्रारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।2
भक्तिप्रियाय भवरोग भयापहाय
उग्राय दुर्ग भवसागर तारणाय।
ज्योतिर्मयाय गुणनाम सुनृत्यकाय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।3
चर्माम्बराय शवभस्म विलेपनाय,
भालेक्षणाय मणिकुंडल-मण्डिताय।
मँजीर पादयुगलाय जटाधराय
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।4
पंचाननाय फणिराज विभूषणाय
हेमांशुकाय भुवनत्रय मंडिताय।
आनंद भूमि वरदाय तमोमयाय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।5
भानुप्रियाय भवसागर तारणाय,
कालान्तकाय कमलासन पूजिताय।
नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।6
रामप्रियाय रधुनाथ वरप्रदाय
नाग प्रियाय नरकार्ण अवताराणाय।
पुण्येषु पुण्य भरिताय सुरार्चिताय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।7
मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय
गीतप्रियाय वृषभेश्वर वाहनाय।
मातंग चर्म वसनाय महेश्वराय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।8
वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्व रोग निवारणम्
सर्व संपत् करं शीघ्रं पुत्र पौत्रादि वर्धनम्।।
शुभदं कामदं ह्दयं धनधान्य प्रवर्धनम्
त्रिसंध्यं यः पठेन् नित्यम् स हि स्वर्गम् वाप्युन्यात्।।9
।।इति श्रीवशिष्ठरचितं दारिद्रयुदुखदहन शिवस्तोत्रम संपूर्णम्।।

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  महाशिवरात्रि पर कैसे करे शिव पूजा
Posted by: Govind Acharya - 03-04-2019, 06:01 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

महाशिवरात्रि पर कैसे करे शिव पूजा :--

सामान्य मंत्रो से सम्पूर्ण शिवपूजन प्रकार और पद्धति:---
देवों के देव भगवान भोले नाथ के भक्तों के लिये श्री महाशिवरात्रि का व्रत विशेष महत्व रखता हैं। यह पर्व फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस वर्ष यह उपवास 4 मार्च - सोमवार के दिन का रहेगा। इस दिन का व्रत रखने से भगवान भोले नाथ शीघ्र प्रसन्न होकर, उपवासक की मनोकामना पूरी करते हैं। इस व्रत को सभी स्त्री-पुरुष, बच्चे, युवा, वृद्धों के द्वारा किया जा सकता हैं।

4 मार्च के दिन विधिपूर्वक व्रत रखने पर तथा शिवपूजन,रुद्राभिषेक, शिवरात्रि कथा, शिव स्तोत्रों का पाठ व "ॐ नम: शिवाय" का पाठ करते हुए रात्रि जागरण करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता हैं। व्रत के दूसरे दिन  यथाशक्ति वस्त्र-क्षीर सहित भोजन, दक्षिणादि प्रदान करके संतुष्ट किया जाता हैं।

चार प्रहर पूजन अभिषेक विधान :--
प्रथम प्रहर- सायं 6:48 से रात्रि 9:58 तक

द्वितीय प्रहर- रात्रि 9:58 से रात्रि 1:08 तक

तृतीय प्रहर- रात्रि 1:08 से रात्रि 4:18 तक

चतुर्थ प्रहर- रात्रि 4:18 से प्रातः 7:28 बजे तक पहर की गणना अपने स्थानीय सूर्योदय से करना विधि सम्मत है।

शिवरात्री व्रत की महिमा :--
इस व्रत के विषय में यह मान्यता है कि इस व्रत को जो जन करता है, उसे सभी भोगों की प्राप्ति के बाद, मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत सभी पापों का क्षय करने वाला है, व इस व्रत को लगातार 14 वर्षो तक करने के बाद विधि-विधान के अनुसार इसका उद्धापन कर देना चाहिए।

महाशिवरात्री व्रत की विधि :--
महाशिवरात्री व्रत को रखने वालों को उपवास के पूरे दिन, भगवान भोले नाथ का ध्यान करना चाहिए। प्रात: स्नान करने के बाद भस्म का तिलक कर रुद्राक्ष की माला धारण की जाती है। इसके ईशान कोण दिशा की ओर मुख कर शिव का पूजन धूप, पुष्पादि व अन्य पूजन सामग्री से पूजन करना चाहिए।

इस व्रत में चारों पहर में पूजन किया जाता है। प्रत्येक पहर की पूजा में "उँ नम: शिवाय" व " शिवाय नम:" का जाप करते रहना चाहिए। अगर शिव मंदिर में यह जाप करना संभव न हों, तो घर की पूर्व दिशा में, किसी शान्त स्थान पर जाकर इस मंत्र का जाप किया जा सकता हैं। चारों पहर में किये जाने वाले इन मंत्र जापों से विशेष पुन्य प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त उपावस की अवधि में 4 पहर का रुद्राभिषेक करने से भगवान शंकर अत्यन्त प्रसन्न होते है।

शिवपूजन में ध्यान रखने जैसे कुछ खास बाते 
(१)? स्नान कर के ही पूजा में बेठे
(२)? साफ सुथरा वस्त्र धारण कर ( हो शके तो शिलाई बिना का तो बहोत अच्छा )
(३)? आसन एक दम स्वच्छ चाहिए ( दर्भासन हो तो उत्तम )
(४)? पूर्व या उत्तर दिशा में मुह कर के ही पूजा करे
(५)? बिल्व पत्र पर जो चिकनाहट वाला भाग होता हे वाही शिवलिंग पर चढ़ाये ( कृपया खंडित बिल्व पत्र मत चढ़ाये )
(६)? संपूर्ण परिक्रमा कभी भी मत करे ( जहा से जल पसार हो रहा हे वहा से वापस आ जाये )
(७)? पूजन में चंपा के पुष्प का प्रयोग ना करे
(८)? बिल्व पत्र के उपरांत आक के फुल, धतुरा पुष्प या नील कमल का प्रयोग अवश्य कर शकते हे
(९)? शिव प्रसाद का कभी भी इंकार मत करे ( ये सब के लिए पवित्र हे )

  पूजन सामग्री :--
शिव की मूर्ति या शिवलिंगम, अबीर- गुलाल, चन्दन ( सफ़ेद ) अगरबत्ती धुप ( गुग्गुल ) बिलिपत्र बिल्व फल, तुलसी, दूर्वा, चावल, पुष्प, फल,मिठाई, पान-सुपारी,जनेऊ, पंचामृत, आसन, कलश, दीपक, शंख, घंट, आरती यह सब चीजो का होना आवश्यक है।

पूजन करने का विधि-विधान:--
महाशिवरात्री के दिन शिवभक्त का जमावडा शिव मंदिरों में विशेष रुप से देखने को मिलता है। भगवान भोले नाथ अत्यधिक प्रसन्न होते है, जब उनका पूजन बेल- पत्र आदि चढाते हुए किया जाता है। व्रत करने और पूजन के साथ जब रात्रि जागरण भी किया जाये, तो यह व्रत और अधिक शुभ फल देता है। इस दिन भगवान शिव की शादी हुई थी, इसलिये रात्रि में शिव की बारात निकाली जाती है। सभी वर्गों के लोग इस व्रत को कर पुन्य प्राप्त कर सकते हैं।

पूजन विधि :--
महाशिव रात्रि के दिन शिव अभिषेक करने के लिये सबसे पहले एक मिट्टी का बर्तन लेकर उसमें पानी भरकर, पानी में बेलपत्र, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग को अर्पित किये जाते है। व्रत के दिन शिवपुराण का पाठ सुनना चाहिए और मन में असात्विक विचारों को आने से रोकना चाहिए। शिवरात्रि के अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है।

जो इंसान भगवन शंकर का पूजन करना चाहता हे उसे प्रातः कल जल्दी उठकर प्रातः कर्म पुरे करने के बाद पूर्व दिशा या इशान कोने की और अपना मुख रख कर .. प्रथम आचमन करना चाहिए बाद में खुद के ललाट पर तिलक करना चाहिए बाद में निन्म मंत्र बोल कर शिखा बांधनी चाहिए

शिखा मंत्र?  ह्रीं उर्ध्वकेशी विरुपाक्षी मस्शोणित भक्षणे। तिष्ठ देवी शिखा मध्ये चामुंडे ह्य पराजिते।।

आचमन मंत्र :--
ॐ केशवाय नमः / ॐ नारायणाय नमः / ॐ माधवाय नमः 
तीनो बार पानी हाथ में लेकर पीना चाहिए और बाद में ॐ गोविन्दाय नमः बोल हाथ धो लेने चाहिए बाद में बाये हाथ में पानी ले कर दाये हाथ से पानी .. अपने मुह, कर्ण, आँख, नाक, नाभि, ह्रदय और मस्तक पर लगाना चाहिए और बाद में ह्रीं नमो भगवते वासुदेवाय बोल कर खुद के चारो और पानी के छीटे डालने चाहिए
ह्रीं नमो नारायणाय बोल कर प्राणायाम करना चाहिए

स्वयं एवं सामग्री पवित्रीकरण:--

'ॐ अपवित्र: पवित्रो व सर्वावस्था गतोपी व।
 य: स्मरेत पूंडरीकाक्षम सह: बाह्याभ्यांतर सूचि।।

(बोल कर शरीर एवं पूजन सामग्री पर जल का छिड़काव करे - शुद्धिकरण के लिए )

न्यास?  निचे दिए गए मंत्र बोल कर बाजु में लिखे गए अंग पर अपना दाया हाथ का स्पर्श करे।
ह्रीं नं पादाभ्याम नमः / ( दोनों पाव पर ),
ह्रीं मों जानुभ्याम नमः / ( दोनों जंघा पर )
ह्रीं भं कटीभ्याम नमः / ( दोनों कमर पर )
ह्रीं गं नाभ्ये नमः / ( नाभि पर )
ह्रीं वं ह्रदयाय नमः / ( ह्रदय पर )
ह्रीं ते बाहुभ्याम नमः / ( दोनों कंधे पर )
ह्रीं वां कंठाय नमः / ( गले पर )
ह्रीं सुं मुखाय नमः / ( मुख पर )
ह्रीं दें नेत्राभ्याम नमः / ( दोनों नेत्रों पर )
ह्रीं वां ललाटाय नमः / ( ललाट पर )
ह्रीं यां मुध्र्ने नमः / ( मस्तक पर )
ह्रीं नमो भगवते वासुदेवाय नमः / ( पुरे शरीर पर )
तत्पश्चात भगवन शंकर की पूजा करे

(पूजन विधि निम्न प्रकार से है):--
तिलक मन्त्र?   स्वस्ति तेस्तु द्विपदेभ्यश्वतुष्पदेभ्य एवच / स्वस्त्यस्त्व पादकेभ्य श्री सर्वेभ्यः स्वस्ति सर्वदा //

नमस्कार मंत्र? हाथ मे अक्षत पुष्प लेकर निम्न मंत्र बोलकर नमस्कार करें।
 श्री गणेशाय नमः 
 इष्ट देवताभ्यो नमः 
 कुल देवताभ्यो नमः 
 ग्राम देवताभ्यो नमः 
 स्थान देवताभ्यो नमः 
 सर्वेभ्यो देवेभ्यो नमः 
 गुरुवे नमः  
 मातृ पितरेभ्यो नमः
ॐ शांति शांति शांति

गणपति स्मरण :--
 सुमुखश्चैकदंतश्च कपिलो गज कर्णक  लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायक।।
धुम्र्केतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः  द्वाद्शैतानी नामानी यः पठेच्छुनुयादापी।।
विध्याराम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमेस्त्था। संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते।।
शुक्लाम्बर्धरम देवं शशिवर्ण चतुर्भुजम। प्रसन्न वदनं ध्यायेत्सर्व विघ्नोपशाताये।।
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि सम प्रभु। निर्विघम कुरु में देव सर्वकार्येशु सर्वदा।।

संकल्प? 
(दाहिने हाथ में जल अक्षत और द्रव्य लेकर निम्न संकल्प मंत्र बोले Smile
'ऊँ विष्णु र्विष्णुर्विष्णु : श्रीमद् भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्त्तमानस्य अद्य श्री ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय परार्धे श्री श्वेत वाराह कल्पै वैवस्वत मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे युगे कलियुगे कलि प्रथमचरणे भूर्लोके जम्बूद्वीपे भारत वर्षे भरत खंडे आर्यावर्तान्तर्गतैकदेशे ---*--- नगरे ---**--- ग्रामे वा बौद्धावतारे विजय नाम संवत्सरे श्री सूर्ये दक्षिणायने वर्षा ऋतौ महामाँगल्यप्रद मासोत्तमे शुभ भाद्रप्रद मासे शुक्ल पक्षे चतुर्थ्याम्‌ तिथौ भृगुवासरे हस्त नक्षत्रे शुभ योगे गर करणे तुला राशि स्थिते चन्द्रे सिंह राशि स्थिते सूर्य वृष राशि स्थिते देवगुरौ शेषेषु ग्रहेषु च यथा यथा राशि स्थान स्थितेषु सत्सु एवं ग्रह गुणगण विशेषण विशिष्टायाँ चतुर्थ्याम्‌ शुभ पुण्य तिथौ -- +-- गौत्रः --++-- अमुक शर्मा, वर्मा, गुप्ता, दासो ऽहं मम आत्मनः श्रीमन्‌ महागणपति प्रीत्यर्थम्‌ यथालब्धोपचारैस्तदीयं पूजनं करिष्ये।''
इसके पश्चात्‌ हाथ का जल किसी पात्र में छोड़ देवें।

नोट?  ------ यहाँ पर अपने नगर का नाम बोलें ------ यहाँ पर अपने ग्राम का नाम बोलें ---- यहाँ पर अपना कुल गौत्र बोलें ---- यहाँ पर अपना नाम बोलकर शर्मा/ वर्मा/ गुप्ता आदि बोलें

द्विग्रक्षण - मंत्र?  यादातर संस्थितम भूतं स्थानमाश्रित्य सर्वात:/ स्थानं त्यक्त्वा तुं तत्सर्व यत्रस्थं तत्र गछतु //
यह मंत्र बोल कर चावालको अपनी चारो और डाले।

वरुण पूजन?  
अपाम्पताये वरुणाय नमः। 
सक्लोप्चारार्थे गंधाक्षत पुष्पह: समपुज्यामी।
यह बोल कर कलश के जल में चन्दन - पुष्प डाले और कलश में से थोडा जल हाथ में ले कर निन्म मंत्र बोल कर पूजन सामग्री और खुद पर वो जल के छीटे डाले

दीप पूजन? दिपस्त्वं देवरूपश्च कर्मसाक्षी जयप्रद:। 
साज्यश्च वर्तिसंयुक्तं दीपज्योती जमोस्तुते।।
( बोल कर दीप पर चन्दन और पुष्प अर्पण करे )

शंख पूजन?   लक्ष्मीसहोदरस्त्वंतु विष्णुना विधृत: करे। निर्मितः सर्वदेवेश्च पांचजन्य नमोस्तुते।।
( बोल कर शंख पर चन्दन और पुष्प चढ़ाये )

घंट पूजन? देवानं प्रीतये नित्यं संरक्षासां च विनाशने।
 घंट्नादम प्रकुवर्ती ततः घंटा प्रपुज्यत।।
( बोल कर घंट नाद करे और उस पर चन्दन और पुष्प चढ़ाये )

ध्यान मंत्र?  ध्यायामि दैवतं श्रेष्ठं नित्यं धर्म्यार्थप्राप्तये। 
धर्मार्थ काम मोक्षानाम साधनं ते नमो नमः।।
( बोल कर भगवान शंकर का ध्यान करे )

आहवान मंत्र?   आगच्छ देवेश तेजोराशे जगत्पतये।
पूजां माया कृतां देव गृहाण सुरसतम।।
( बोल कर भगवन शिव को आह्वाहन करने की भावना करे )

आसन मंत्र?   सर्वकश्ठंयामदिव्यम नानारत्नसमन्वितम। कर्त्स्वरसमायुक्तामासनम प्रतिगृह्यताम।।
( बोल कर शिवजी कोई आसन अर्पण करे )

खाध्य प्रक्षालन? उष्णोदकम निर्मलं च सर्व सौगंध संयुत। 
पद्प्रक्षलानार्थय दत्तं ते प्रतिगुह्यतम।।
( बोल कर शिवजी के पैरो को पखालने हे )

अर्ध्य मंत्र?  जलं पुष्पं फलं पत्रं दक्षिणा सहितं तथा। गंधाक्षत युतं दिव्ये अर्ध्य दास्ये प्रसिदामे।।
( बोल कर जल पुष्प फल पात्र का अर्ध्य देना चाहिए )

पंचामृत स्नान? पायो दाढ़ी धृतम चैव शर्करा मधुसंयुतम। पंचामृतं मयानीतं गृहाण परमेश्वर।।
( बोल कर पंचामृत से स्नान करावे )

स्नान मंत्र? गंगा रेवा तथा क्षिप्रा पयोष्नी सहितास्त्था। स्नानार्थ ते प्रसिद परमेश्वर।।
(बोल कर भगवन शंकर को स्वच्छ जल से स्नान कराये और चन्दन पुष्प चढ़ाये )

संकल्प मन्त्र? अनेन स्पन्चामृत पुर्वरदोनोने आराध्य देवता: प्रियत्नाम। ( तत पश्यात शिवजी कोई चढ़ा हुवा पुष्प ले कर अपनी आख से स्पर्श कराकर उत्तर दिशा की और फेक दे ,बाद में हाथ को धो कर फिर से चन्दन पुष्प चढ़ाये )

अभिषेक मंत्र?  सहस्त्राक्षी शतधारम रुषिभी: पावनं कृत। तेन त्वा मभिशिचामी पवामान्य : पुनन्तु में।।
( बोल कर जल शंख में भर कर शिवलिंगम पर अभिषेक करे ) बाद में शिवलिंग या प्रतिमा को स्वच्छ जल से स्नान कराकर उनको साफ कर के उनके स्थान पर विराजमान करवाए

वस्त्र मंत्र? सोवर्ण तन्तुभिर्युकतम रजतं वस्त्र्मुत्तमम। परित्य ददामि ते देवे प्रसिद गुह्यतम।।
( बोल कर वस्त्र अर्पण करने की भावना करे )

जनेऊ मन्त्र?  नवभिस्तन्तुभिर्युकतम त्रिगुणं देवतामयम। उपवीतं प्रदास्यामि गृह्यताम परमेश्वर।।
( बोल कर जनेऊ अर्पण करने की भावना करे )

चन्दन मंत्र? मलयाचम संभूतं देवदारु समन्वितम। विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रति गृह्यताम।।
( बोल कर शिवजी को चन्दन का लेप करे )

अक्षत मंत्र? अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ कंकुमुकदी सुशोभित। 
माया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वर।। 
(बोल चावल चढ़ाये )

पुष्प मंत्र? नाना सुगंधी पुष्पानी रुतुकलोदभवानी च। मायानितानी प्रीत्यर्थ तदेव प्रसिद में।।
( बोल कर शिवजी को विविध पुष्पों की माला अर्पण करे )

तुलसी मंत्र? तुलसी हेमवर्णा च रत्नावर्नाम च मजहीम / प्रीती सम्पद्नार्थय अर्पयामी हरिप्रियाम।।
( बोल कर तुलसी पात्र अर्पण करे )

बिल्वपत्र मन्त्र?  त्रिदलं त्रिगुणा कारम त्रिनेत्र च त्र्ययुधाम। 
त्रिजन्म पाप संहारमेकं बिल्वं शिवार्पणं।।
( बोल कर बिल्वपत्र अर्पण करे )

दूर्वा मन्त्र?  दुर्वकुरण सुहरीतन अमृतान मंगलप्रदान।
आतितामस्तव पूजार्थं प्रसिद परमेश्वर शंकर :।।
( बोल करे दूर्वा दल अर्पण करे )

सौभाग्य द्रव्य?  हरिद्राम सिंदूर चैव कुमकुमें समन्वितम।
सौभागयारोग्य प्रीत्यर्थं गृहाण परमेश्वर शंकर :।।
( बोल कर अबिल गुलाल चढ़ाये और होश्के तो अलंकर और आभूषण शिवजी को अर्पण करे )

धुप मन्त्र? वनस्पति रसोत्पन्न सुगंधें समन्वित :।
देव प्रितिकारो नित्यं धूपों यं प्रति गृह्यताम।।
( बोल कर सुगन्धित धुप करे )

दीप मन्त्र?  त्वं ज्योति : सर्व देवानं तेजसं तेज उत्तम :.।
आत्म ज्योति: परम धाम दीपो यं प्रति गृह्यताम।।
( बोल कर भगवन शंकर के सामने दीप प्रज्वलित करे )

नैवेध्य मन्त्र?  नैवेध्यम गृह्यताम देव भक्तिर्मेह्यचलां कुरु।
इप्सितम च वरं देहि पर च पराम गतिम्।।
( बोल कर नैवेध्य चढ़ाये )

भोजन (नैवेद्य मिष्ठान मंत्र) ?
ॐ प्राणाय स्वाहा.
ॐ अपानाय स्वाहा.
ॐ समानाय स्वाहा
ॐ उदानाय स्वाहा.
ॐ समानाय स्वाहा 
( बोल कर भोजन कराये )

नैवेध्यांते हस्तप्रक्षालानं मुख्प्रक्षालानं आरामनियम च समर्पयामि 

निम्न ५ मंत्र से भोजन करवाए और ३ बार जल अर्पण करें और बाद में देव को चन्दन चढ़ाये।

मुखवास मंत्र? एलालवंग संयुक्त पुत्रिफल समन्वितम। 
नागवल्ली दलम दिव्यं देवेश प्रति गुह्याताम।। 
( बोल कर पान सोपारी अर्पण करे )

दक्षिणा मंत्र? ह्रीं हेमं वा राजतं वापी पुष्पं वा पत्रमेव च।
दक्षिणाम देवदेवेश गृहाण परमेश्वर शंकर।।
( बोल कर अपनी शक्ति अनुसार दक्षिणा अर्पण करे )

आरती मंत्र? सर्व मंगल मंगल्यम देवानं प्रितिदयकम।
निराजन महम कुर्वे प्रसिद परमेश्वर।। ( बोल कर एक बार आरती करे )
बाद में आरती की चारो और जल की धरा करे और आरती पर पुष्प चढ़ाये सभी को आरती दे और खुद भी आरती ले कर हाथ धो ले।

अथवा भगवान गंगाधर की आरती करें

? भगवान् गंगाधर की आरती ?

ॐ जय गंगाधर जय हर जय गिरिजाधीशा। त्वं मां पालय नित्यं कृपया जगदीशा॥ हर...॥ 
कैलासे गिरिशिखरे कल्पद्रमविपिने। गुंजति मधुकरपुंजे कुंजवने गहने॥ 
कोकिलकूजित खेलत हंसावन ललिता। रचयति कलाकलापं नृत्यति मुदसहिता ॥ हर...॥ 
तस्मिंल्ललितसुदेशे शाला मणिरचिता। तन्मध्ये हरनिकटे गौरी मुदसहिता॥ 
क्रीडा रचयति भूषारंचित निजमीशम्‌। इंद्रादिक सुर सेवत नामयते शीशम्‌ ॥ हर...॥ 
बिबुधबधू बहु नृत्यत नामयते मुदसहिता। किन्नर गायन कुरुते सप्त स्वर सहिता॥ 
धिनकत थै थै धिनकत मृदंग वादयते। क्वण क्वण ललिता वेणुं मधुरं नाटयते ॥हर...॥ 
रुण रुण चरणे रचयति नूपुरमुज्ज्वलिता। चक्रावर्ते भ्रमयति कुरुते तां धिक तां॥ 
तां तां लुप चुप तां तां डमरू वादयते। अंगुष्ठांगुलिनादं लासकतां कुरुते ॥ हर...॥ 
कपूर्रद्युतिगौरं पंचाननसहितम्‌। त्रिनयनशशिधरमौलिं विषधरकण्ठयुतम्‌॥ 
सुन्दरजटायकलापं पावकयुतभालम्‌। डमरुत्रिशूलपिनाकं करधृतनृकपालम्‌ ॥ हर...॥ 
मुण्डै रचयति माला पन्नगमुपवीतम्‌। वामविभागे गिरिजारूपं अतिललितम्‌॥ 
सुन्दरसकलशरीरे कृतभस्माभरणम्‌। इति वृषभध्वजरूपं तापत्रयहरणं ॥ हर...॥ 
शंखनिनादं कृत्वा झल्लरि नादयते। नीराजयते ब्रह्मा वेदऋचां पठते॥ 
अतिमृदुचरणसरोजं हृत्कमले धृत्वा। अवलोकयति महेशं ईशं अभिनत्वा॥ हर...॥ 
ध्यानं आरति समये हृदये अति कृत्वा। रामस्त्रिजटानाथं ईशं अभिनत्वा॥ 
संगतिमेवं प्रतिदिन पठनं यः कुरुते। शिवसायुज्यं गच्छति भक्त्या यः श्रृणुते ॥ हर...॥

पुष्पांजलि मंत्र? पुष्पांजलि प्रदास्यामि मंत्राक्षर समन्विताम।
तेन त्वं देवदेवेश प्रसिद परमेश्वर।।
( बोल कर पुष्पांजलि अर्पण करे )

प्रदक्षिणा? यानी पापानि में देव जन्मान्तर कृतानि च।
तानी सर्वाणी नश्यन्तु प्रदिक्षिने पदे पदे।।
( बोल कर प्रदिक्षिना करे )
बाद में शिवजी के कोई भी मंत्र स्तोत्र या शिव शहस्त्र नाम स्तोत्र का पाठ करे अवश्य शिव कृपा प्राप्त होगी।

पूजा में हुई अशुद्धि के लिये निम्न स्त्रोत्र पाठ से क्षमा याचना करें।

।।देव्पराधक्षमापनस्तोत्रम्।।

न मन्त्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो
न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथा:।
न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं
परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम्

विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया
विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत्।
तदेतत् क्षन्तव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे
कुपुत्रो जायेत क्व चिदपि कुमाता न भवति

पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहव: सन्ति सरला:
परं तेषां मध्ये विरलतरलोहं तव सुत:।
मदीयोऽयं त्याग: समुचितमिदं नो तव शिवे
कुपुत्रो जायेत क्व चिदपि कुमाता न भवति

जगन्मातर्मातस्तव चरणसेवा न रचिता
न वा दत्तं देवि द्रविणमपि भूयस्तव मया।
तथापि त्वं स्नेहं मयि निरुपमं यत्प्रकुरुषे
कुपुत्रो जायेत क्व चिदपि कुमाता न भवति

परित्यक्ता देवा विविधविधिसेवाकुलतया
मया पञ्चाशीतेरधिकमपनीते तु वयसि।
इदानीं चेन्मातस्तव यदि कृपा नापि भविता
निरालम्बो लम्बोदरजननि कं यामि शरणम्

श्वपाको जल्पाको भवति मधुपाकोपमगिरा
निरातङ्को रङ्को विहरित चिरं कोटिकनकै:।
तवापर्णे कर्णे विशति मनुवर्णे फलमिदं
जन: को जानीते जननि जपनीयं 

चिताभस्मालेपो गरलमशनं दिक्पटधरो
जटाधारी कण्ठे भुजगपतिहारी पशुपति:।
कपाली भूतेशो भजति जगदीशैकपदवीं
भवानि त्वत्पाणिग्रहणपरिपाटीफलमिदम्

न मोक्षस्याकाड्क्षा भवविभववाञ्छापि च न मे
न विज्ञानापेक्षा शशिमुखि सुखेच्छापि न पुन:।
अतस्त्वां संयाचे जननि जननं यातु मम वै
मृडानी रुद्राणी शिव शिव भवानीति जपत:

नाराधितासि विधिना विविधोपचारै:
किं रुक्षचिन्तनपरैर्न कृतं वचोभि:।
श्यामे त्वमेव यदि किञ्चन मय्यनाथे
धत्से कृपामुचितमम्ब परं तवैव

आपत्सु मग्न: स्मरणं त्वदीयं
करोमि दुर्गे करुणार्णवेशि।
नैतच्छठत्वं मम भावयेथा:
क्षुधातृषार्ता जननीं स्मरन्ति

जगदम्ब विचित्रमत्र किं परिपूर्णा करुणास्ति चेन्मयि।
अपराधपरम्परापरं न हि माता समुपेक्षते सुतम्

मत्सम: पातकी नास्ति पापन्घी त्वत्समा न हि।
एवं ज्ञात्वा महादेवि यथा योग्यं तथा कुरु।।

टंकण अशुद्धि के लिए क्षमा प्रार्थी।

भगवान भोलेनाथ आपकी मनोकामना पूर्ण करें

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Heart महाशिवरात्रि
Posted by: Rajat Gupta - 03-04-2019, 02:15 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

महाशिवरात्रि,  
4 मार्च सोमवार


संस्कृति में रात्रि शब्द का अर्थ है- वह जो तीन प्रकार की व्यथाओं से आप को मुक्त करे। यह तीन साधनों-शरीर, मन और वाणी को विश्राम देती है। 

? शाब्दिक अर्थ
शिवरात्रि का शाब्दिक अर्थ है वह रात्रि जो तीन साधनों में शिवतत्व को समाहित करती है, वह तत्व जो सबसे परे है। समाधि को शिवसंयुज्ञ्न, शिव की उपस्थिति भी कहा जाता है, जिसका का वर्णन अत्याधिक कठिन है। कबीरदास जी ने इसे कोटि कल्प विश्राम- एक क्षण में समाहित करोड़ों वर्षो का विश्राम, कहा है। यह सजगता से युक्त गहनतम विश्राम की स्थिति है जो सभी प्रकार की पहचान से मुक्ति दिलाती है। 

? शिवतत्व
शिवतत्व सर्वव्याप्त है। अभिज्ञान, गहन समाधि में, स्वयं की चेतना में इसके अद्वैत स्वरूप के प्रति सजग रहते हुए, इसकी सघन व्यापकता के प्रति सजग होता है। यह ऐसे ही है जैसे कोई लहर कुशलतापूर्वक समुद्र की व्यापक विशालता के प्रति सजग रहे। जागरण का अर्थ केवल ऊंची आवाज में भजन गाना या बलपूर्वक स्वयं को जगाए रखना नहीं है। यह है स्वयं को जागृत रखना, आत्मोन्मुख होना एवं अपने अंदर उस विश्राम के प्रति सजग होना, जो नींद में आप को वैसे भी प्राप्त होता है। 

? रात्रिजागरण अभिप्राय
जागरण का अर्थ है अपने मन को आत्मोन्मुख करना। जब भी आप का मन स्वयं की ओर मुड़ता है, यह असजगता से पूर्ण नींद में चला जाता है। कई बार जब लोग ध्यान करते हैं, वे समझ नहीं पाते कि वे ध्यान में थे या सो रहे थे। जब वे इससे बाहर आते हैं, वे मन तथा इंद्रियों को अतुल्य विश्राम देने वाले, एक निश्चित सुख तथा स्थिरता का अनुभव करते हैं। शिव तथा शक्ति के मिलन की एक कहानी शिवरात्रि से संबंधित है। आदि तथा चैतन्य शक्ति का विश्वातीत से  गठबंधन है। शिव मौन साक्षी, चिदाकाश है तथा शक्ति, चित्ति अथवा चित्तविलास है, वह शक्ति जो इस अनंत आकाश में भिन्न-भिन्न आकार, विचार रचती है। केवल जागृत अवस्था में ही यह ज्ञान चेतना में प्राप्त होता है और शिवरात्रि सर्वव्याप्त चेतना की जागृति के उत्सव की रात है, निश्चेतन नींद में न जाते हुए, निश्चेतन नींद के स्वरूप के टूटने से आपको आभास होता है कि आप केवल यांत्रिक ढांचा नहीं बल्कि सृष्टि में एक महान कृति हैं। 

शिव तत्त्व के अनुभव के लिए आप को जागृत होना होगा।

? शिव हैं शाश्वत का प्रतीक
शिव को अपनी प्रिया देवी के साथ देखो। वे दो नहीं मालूम होते, एक ही हैं। यह एकता इतनी गहरी है कि प्रतीक बन गई है। ध्यान की पहली विधि शिव प्रेम से शुरू करते हैं: प्रिय देवी, प्रेम किए जाने के क्षण में प्रेम में ऐसे प्रवेश करो जैसे कि वह नित्य जीवन हो।
शिव प्रेम से शुरू करते हैं। पहली विधि प्रेम से संबंधित है क्योंकि तुम्हारे शिथिल होने के अनुभव में प्रेम का अनुभव निकटतम है। अगर तुम प्रेम नहीं कर सकते हो तो तुम शिथिल भी नहीं हो सकते। अगर तुम शिथिल हो सके तो तुम्हारा जीवन प्रेमपूर्ण हो जाएगा। एक तनावग्रस्त आदमी प्रेम नहीं कर सकता, क्योंकि तनावग्रस्त आदमी सदा उद्देश्य से, प्रयोजन से जीता है। हिसाब-किताब रखने वाला मन, तार्किक मन, प्रयोजन की भाषा में सोचने वाला मन प्रेम नहीं कर सकता। प्रेम सदा यहां है और अभी है। प्रेम का कोई भविष्य नहीं है। यही वजह है कि प्रेम ध्यान के इतने करीब है। मृत्यु भी ध्यान के इतने करीब है क्योंकि मृत्यु भी यहां है और अभी है, वह भविष्य में नहीं घटती। मृत्यु, प्रेम, ध्यान, सब वर्तमान में घटित होते हैं। इन तीनों को एक साथ रखना अजीब मालूम पड़ेगा। वह अजीब नहीं है। वे समान अनुभव हैं। इसलिए अगर तुम एक में प्रवेश कर गए तो शेष दो में भी प्रवेश पा जाओगे।

? शिव-शक्ति संवाद वर्णित प्रेम 
‘प्रिय देवी, प्रेम किए जाने के क्षण में प्रेम में ऐसे प्रवेश करो जैसे कि वह नित्य जीवन हो।’ पहली चीज कि प्रेम के क्षण में अतीत व भविष्य नहीं होते हैं। जब अतीत व भविष्य नहीं रहते तब क्या तुम इस क्षण को वर्तमान कह सकते हो? यह वर्तमान है दो के बीच, अतीत व भविष्य के बीच, यह सापेक्ष है। अगर अतीत व भविष्य नहीं रहे तो इसे वर्तमान कहने में क्या तुक है! इसलिए शिव वर्तमान शब्द का व्यवहार नहीं करते। वे कहते हैं, नित्य जीवन। उनका मतलब शाश्वत से है। शाश्वत में प्रवेश करो। अगर यह यात्रा क्षणिक न रहे, यह यात्रा ध्यानपूर्ण हो जाए, अर्थात अगर तुम अपने को भूल जाओ व प्रेमी-प्रेमिका विलीन हो जाएं व केवल प्रेम प्रवाहित होता रहे, 

तो शिव कहते हैं- शाश्वत जीवन तुम्हारा है। 
ॐ शिव पार्वती

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Star नार्मदीय समाज वार्षिकोत्सव 2019
Posted by: admin - 03-03-2019, 09:02 AM - Forum: Gift Voucher - No Replies

नार्मदीय समाज वार्षिकोत्सव 2019

नर्मदे-हर !!

नार्मदीय समाज वार्षिकोत्सव 2019 में अलंकृत सभी वर्ग में वेबसाइट द्वारा रू. 1000 के कुल 28 वाउचर उपहार स्वरुप भेंट किये गए. सम्मानित समस्त समाजजनों को हार्दिक बधाई. आशा करते हैं की जिस प्रकार पिछले 6 वर्षों में देश-विदेश के करीब 5000 से अधिक लोगों ने फ्री और पेड सेवाओं का लाभ लिया है आपको और आपके परिवार को भी इस सेवा का अधिकतम लाभ प्राप्त हो. नार्मदीय समाज के विवाह योग्य युवक-युवती फ्री परामर्श सेवा का लाभ भी ले सकते हैं.

   

   



.pdf   Gift Voucher.pdf (Size: 345.75 KB / Downloads: 20)



सम्मानित समस्त समाजजनों के नाम निम्न प्रकार से हैं.

   


   
   
   
   
   

विशिष्ट युवा परिचय सम्मलेन "मीत-मिलन" 9 मार्च 2019

ईश्वर और माँ नर्मदा से प्रार्थना करते है हर युवक-युवती जीवनसाथी की खोज में शीघ्र सफल हो और उनका जीवन मंगलमय हो।


   

नार्मदीय समाज वार्षिकोत्सव 10 मार्च 2019

   

   

   

   

   

   



नर्मदे-हर !!

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Heart एक ओंकार सतनाम (गुरू नानक) प्रवचन--10
Posted by: Osho Prem - 03-03-2019, 08:52 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

सूफी फकीर हुआ, बायजीद। 
वह अपनी प्रार्थना में परमात्मा से कहता था, 
मेरी प्रार्थनाओं का खयाल मत करना। 
तू उन्हें पूरी मत करना। 
क्योंकि मेरे पास इतनी बुद्धिमत्ता कहां है 
कि मैं वही मांग लूं जो शुभ है!

आदमी बिलकुल बुद्धिहीन है। 
वह जो भी मांगता है, 
उसी के जाल में भटकता है। 
अगर पूरा हो जाता है, 
तो मुश्किल खड़ी हो जाती है। 

पूरा नहीं होता, 
तो मुश्किल खड़ी होती है। 
तुम सोच कर देखो, अतीत में लौटो। 

अपनी जिंदगी का एक दफा लेखा-जोखा करो। 
तुमने जो मांगा, उसमें से कुछ पूरा हुआ है, 
उससे तुम्हें सुख मिला? तुमने जो मांगा, 
उसमें से कुछ पूरा नहीं हुआ है, उससे तुम्हें सुख मिला? 

तुम दोनों हालत में दुख पा रहे हो। 
जो मांगा है, उससे उलझ गए। 
जो मिला है, उससे उलझ गए। 
जो नहीं मिला है, उससे उलझे हुए हो।

बुद्धिमानी क्या है? 
बुद्धिमत्ता का लक्षण क्या है? 
बुद्धिमत्ता का लक्षण है, 

उस सूत्र को मांग लेना जिसे मांग 
लेने से फिर दुख नहीं होता। 
इसलिए धार्मिक व्यक्ति के 
अतिरिक्त कोई बुद्धिमान नहीं है। 

क्योंकि सिर्फ परमात्मा को 
मांगने वाला ही पछताता नहीं। 
बाकी तुम जो भी मांगोगे, पछताओगे। 

इसे तुम गांठ बांध कर रख लो। 
तुम जो भी मांगोगे, पछताओगे। 
सिर्फ परमात्मा को मांगने वाला कभी नहीं पछताता। 

उससे कम में काम भी नहीं चलेगा। 
वही जीवन का गंतव्य है।
लेकिन क्या तुम उस 
परमात्मा को शास्त्रों में पा सकोगे?

नानक कहते हैं, वहां तुम उसे न पा सकोगे। 
वहां तुम्हें शब्द मिल जाएंगे, सिद्धांत मिल जाएंगे, 
सत्य नहीं मिलेगा। सत्य कहां मिलेगा? 
सत्य, नानक कहते हैं--

वह सबसे महान है। 
और वह अपने को आप ही जानता है।'
तुम उसे दूर-दूर रह कर न जान सकोगे। 
तुम जब उसमें डूब जाओगे, 
तभी उसे जान सकोगे। 

सत्य का वही एक मार्ग है। 
परमात्मा के साथ एक हुए बिना 
कोई सत्य को नहीं जान सकता।

हम पदार्थ के संबंध में जानकारी ले सकते हैं। 
विज्ञान इसी तरह की जानकारी है। 

दूर खड़े हो कर, बाहर खड़े हो 
कर वैज्ञानिक परीक्षण करते हैं, 
पदार्थ के संबंध में ज्ञान हो जाता है। 
लेकिन परमात्मा के संबंध में कोई 
ज्ञान बाहर से नहीं हो सकता। 

वहां तो भीतर ही जाना होगा। 
वहां तो इतने भीतर जाना होगा जहां 
कि तुम्हारी और उसकी सीमा खो जाती है। 

तुम उसके हृदय की धड़कन बन जाते हो, 
वह तुम्हारे हृदय की धड़कन बन जाता है। 
जहां इतनी एकता सध जाती है, वहीं ज्ञान है।

शास्त्रों से यह कैसे होगा? 
शब्दों से यह कैसे होगा? 
यह तो प्रेम से ही हो सकता है।

इसलिए नानक कहते हैं, बस, प्रेम कुंजी है। 
और अगर उसके नाम का प्रेम जग जाए, 
अगर उसकी धुन तुम्हारे भीतर बजने लगे, 
और तुम उसके प्रेम में पागल हो जाओ, 
तो तुम जान सकोगे।

एक ओंकार सतनाम (गुरू नानक) प्रवचन--10

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Heart समर्पण की महिमा
Posted by: Osho Prem - 03-03-2019, 08:50 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

समर्पण की महिमा


अहंकार सलाह लेने से डरता है। अहंकार अपनी उलझन खुद ही सुलझा लेना चाहता है। यह भी स्वीकार करने में कि मैं उलझा हूं, अहंकार को चोट लगती है। अहंकार गुरु के पास इसीलिए नहीं जा सकता है।

 
और मजा यह है कि तुम्हारी सारी उलझन अहंकार से पैदा होती है और तुम उसी से सुलझाने की कोशिश करते हो। सुलझाने में और उलझ जाते हो। उलझोगे ही, क्योंकि अहंकार उलझाने का सूत्र है, सुलझाने का नहीं। 

तुम्हारे जीवन की जैसी दशा है, जैसी विकृती है, जैसी रुग्ण अराजकता है, जिसके कारण पैदा हुई उस बीमारी को ही तुम औषधि बना रहे हो। औषधि तुम्हें और मारे डालती है। बीमारी से शायद तुम बच भी जाते, लेकिन औषधि से बचने का कोई उपाय नहीं। और जिसने बीमारी को ही औषधि समझ रखा हो, उसकी उलझन का तो कोई अंत कभी भी न होगा।


एक बात सबसे पहले समझ लेनी जरूरी है..अपने भीतर सदा खोजना, किसके कारण उलझन है और तब कुछ विपरीत की तरफ जाना, वहां से सुलझाव आ सकेगा।

 
अहंकार उलझन है, समर्पण सुलझाव होगा। अहंकार ने रोग निर्मित किया है; समर्पण से मिटेगा। इसलिए तो समस्त शास्त्रों ने, समस्त परंपराओं ने समर्पण की महिमा गायी है।


 
समर्पण का अर्थ हैः मैं नहीं सुलझा पाता हूं अपने को, और उलझाए चला जाता हूं तो अब मैं अपने को छोड़ता हूं और अपने से बाहर, अपने से विपरीत से सलाह मांगता हूं।



गुरु के पास जाना अहंकार को छोड़े बिना नहीं हो सकता। और तुम अगर गुरु के पास भी जाते हो तो भी अहंकार से ही पूछ के जाते हो। जब वह कह देता है, हां ठीक, तभी तुम्हारी गाड़ी आगे बढ़ती है। तब तो तुम्हारा अहंकार तुम्हारे गुरु से भी बड़ा हो गया; तुम्हारे अहंकार की स्वीकृति से ही गुरु निर्मित हुआ। ऐसे गुरु से भी बहुत सहारा न मिलेगा।



अहंकार के कारण ही सारी दुनिया में हमने विशेषज्ञ पैदा किये। वे ऐसे गुरु हैं जिनके चरणों में तुम्हें समर्पण नहीं करना पड़ता; ज्यादा से ज्यादा फीस चुका दी, उसमें कुछ हर्जा नहीं है। तुम विशेषज्ञ के पास जाते हो, क्योंकि विशेषज्ञ तुम्हारा नौकर हो जाता है। वहां तुम्हें समर्पण नहीं करना पड़ता। बिना समर्पण किये विशेषज्ञ तुम्हारे उलझाव को सुल झाने की कोशिश करता है। विशेषज्ञ दुनिया में बढ़ते जाते हैं, लेकिन उलझाव कम नहीं होता।


गूंगे केरी सर्करा 


ओशो

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Exclamation तो ये है हमारे भयानक मीडिया
Posted by: Rimmi Kapoor - 03-03-2019, 08:15 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

Angel Angel

विंग कमांडर अभिनंदन पैराशूट से पाकिस्तान में उतरने के बाद पाकिस्तानी आतंकियों और सेना के कब्जे में आ गए ।

लेकिन उसके बाद
 भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया
ने जिस तरह जाने या अनजाने में सेना के अभियान को *बर्बाद* करने का प्रयास किया वह पूरी तरह निंदनीय है ।

पाकिस्तानियों ने अभिनंदन से पूछताछ का वीडियो वायरल किया उसके अंश और साथ में भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया की महामूर्खता

आइए इसे समझे कि क्या हुआ ?

पाक :- आप वास्तव में भारत में कहां से हैं?

विंग कमांडर अभिनंदन :- मैं आपको यह बताने वाला नहीं हूं

(ठीक उसी समय)
भारतीय मीडिया एवं सोशल मीडिया :- हम इस वक्त चेन्नई में विंग कमांडर अभिनंदन के घर से रिपोर्ट कर रहे हैं । उनके माता पिता पत्नी उनके घर पर है । उनके पिताजी रिटायर्ड एयर मार्शल है ।



पाक : आप कौन सा विमान उड़ाते हैं

विंग कमांडर अभिनंदन :- क्षमा करें, मैं आपको यह बताने वाला नहीं हूं

(ठीक उसी समय)
भारतीय मीडिया :-  विंग कमांडर अभिनंदन मिग 21 बाइसन उड़ा रहे थे । आइये अब हम आपको मिग 21 बाइसन के बारे मे विस्तार से बतायें 



पाक :- आपका मिशन क्या था ?
विंग कमांडर अभिनंदन :- क्षमा करें, मैं आपको यह बताने वाला नहीं हूं

(ठीक उसी समय)
भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया :- विंग कमांडर अभिनंदन पाक लड़ाकू विमानों को रोकने के मिशन में था। वह एक एफ-16 को गिराने में सफल रहा



पाक :- धन्यवाद भारतीय मीडिया ।
*आप हमेशा से हमारे मददगार रहे है ।*
आपकी मदद से ही हम 26/11 वाले हमले में ज्यादा लोगो को मार सके थे ।

और आपका इसी तरह सहयोग रहा तो ये युद्ध भी हम जीत ही जाएंगे


तो ये है हमारे भयानक मीडिया
 और अपरिपक्व सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की आज की विडंबना । 




भगवान हमारे देश को इन नालायकों से बचाएं .... 
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Thumbs Up तंत्र-सूत्र-(भाग-5)-प्रवचन-72 असुरक्षा में जीना बुद्धत्व का मार्ग है। भाग-II
Posted by: Osho Prem - 03-02-2019, 05:03 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

तंत्र-सूत्र-(भाग-5)-प्रवचन-72


असुरक्षा में जीना बुद्धत्व का मार्ग है-

दूसरा प्रश्न :

कल रात आपने कहा कि प्रेम जीवंत होता है क्योंकि असुरक्षित होता है, और विवाह मृत
होता है क्योंकि सुरक्षित होता है। लेकिन क्या यह सच नहीं है कि प्रेम ही। आध्यात्मिक गहरई में विवाह बन जाता है?

नहीं। प्रेम कभी विवाह नहीं बनता। वह जितना गहरा जाता है उतना ही अधिक प्रेम बन जाता है लेकिन विवाह कभी नहीं बनता। विवाह से मेरा अर्थ है एक बाह्य बंधन, एक कानूनी स्वीकृति, एक सामाजिक समर्थन। और मैं कहता हूं कि प्रेम कभी विवाह नहीं बनता क्योंकि वह कभी सुरक्षित नहीं होता। वह प्रेम ही रहता है। वह अधिक प्रेम और अधिक प्रेम होता चला जाता है, लेकिन जितना अधिक होता है उतना ही असुरक्षित होता जाता है। कोई सुरक्षा नहीं होती। लेकिन यदि तुम प्रेम करते हो तो सुरक्षा की कोई फिक्र नहीं करते। जब तुम प्रेम नहीं करते तभी सुरक्षा की फिक्र होती है।
जब तुम प्रेम करते हो तो वह क्षण ही इतना पर्याप्त होता है कि तुम दूसरे क्षण की चिंता
नहीं करते भविष्य की चिंता नहीं करते। तुम्हें इससे कुछ मतलब नहीं होता कि कल क्या होगा, क्योंकि अभी जो हो रहा है पर्याप्त है, बहुत अधिक है। इतना अधिक है कि संभलता नहीं। तुम कोई चिंता नहीं करते।
मन में सुरक्षा की बात क्यों उठती है? यह चिंता भविष्य के कारण उठती है। वर्तमान पर्याप्त नहीं है इसलिए तुम भविष्य की चिंता करते हो। वास्तव में तुम वर्तमान में नहीं हो। तुम वर्तमान में नहीं जी रहे। तुम इसका आनंद नहीं ले रहे। यह क्षण आनंद नहीं है। वर्तमान आनंद नहीं है। इसलिए तुम भविष्य की आशा करते हो। फिर तुम भविष्य की योजना बनाते हो, फिर तुम भविष्य के लिए हर सुरक्षा जुटा लेना चाहते हो।

प्रेम कभी भी सुरक्षा जुटाना नहीं चाहता, वह स्वयं में ही सुरक्षित होता है। यही सत्य है। प्रेम स्वयं में ही इतना सुरक्षित होता है कि किसी और सुरक्षा की बात ही नहीं सोचता; भविष्य में क्या होगा, इससे कुछ मतलब ही नहीं है। क्योंकि भविष्य इसी वर्तमान से विकसित होगा। उसके बारे में चिंता क्यों करें?
जब वर्तमान आनंदपूर्ण नहीं होता, विषाद होता है, तब तुम भविष्य के लिए चिंतित होते हो। तब तुम उसे सुरक्षित करना चाहते हो। लेकिन याद रखी, कोई भी कुछ भी सुरक्षित नहीं कर सकता। प्रकृति का ऐसा स्वभाव नहीं है। भविष्य तो असुरक्षित रहेगा ही। तुम केवल एक काम कर सकते हो : वर्तमान को और गहनता से जी लो। तुम इतना ही कर सकते हो। यदि उससे कोई सुरक्षा होती है तो वही एकमात्र सुरक्षा है। और यदि सुरक्षा नहीं हो रही तो नहीं हो रही, कुछ भी किया नहीं जा सकता।
लेकिन हमारा मन सदा आत्मघाती ढंग से व्यवहार करता है। वर्तमान जितना विषादयुक्त होता है उतना ही तुम भविष्य के बारे में सोचते हो और उसे सुरक्षित करना चाहते हो। और जितने तुम भविष्य में जाओगे, वर्तमान उतना ही विषादयुक्त होता चला जाएगा। फिर तुम एक दुम्बक्र में फंस गए। यह चक्र तोड़ा जा सकता है, लेकिन इसे तोड़ने का एकमात्र उपाय यही है : वर्तमान क्षण इतनी गहनता से जीया जाए कि यह क्षण ही अपनी गहराई में शाश्वतता बन जाए। इसी से भविष्य पैदा होगा, भविष्य अपना मार्ग स्वयं बना लेगा, तुम्हें इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है।
तो मैं कहता हूं कि प्रेम सुरक्षा के बारे में कभी नहीं सोचता, क्योंकि वह स्वयं में ही इतना सुरक्षित होता है। प्रेम कभी असुरक्षा से भयभीत नहीं होता। यदि जरा भी प्रेम है तो वह असुरक्षा से भयभीत नहीं होता। प्रेम असुरक्षित है, लेकिन प्रेम असुरक्षा से भयभीत नहीं होता। बल्कि, प्रेम असुरक्षा का आनंद लेता है क्योंकि असुरक्षा जीवन को रंग देती है, बदलती हुई ऋतुएं और मौसम देती है धार देती है। यही सौंदर्य है। बदलता हुआ जीवन सुंदर होता है, क्योंकि सदा ही आविष्कृत करने के लिए कुछ शेष रहता है, सदा ही किसी ऐसी चीज से साक्षात्कार होता है जो नई है।
वास्तव में दो प्रेमी सतत एक-दूसरे में नए-नए आविष्कार करते रहते हैं। और गहराई असीम है। एक प्रेम से भरा हृदय असीम है अनंत है। तुम उसे कभी समाप्त नहीं कर सकते। उसका कोई अंत नहीं है। वह बढ़ता ही चला जाता है, आगे फैलता चला जाता है। वह आकाश जैसा ही विशाल है।
प्रेम असुरक्षा की परवाह नहीं करता, प्रेम उसका आनंद ले सकता है। इससे एक पुलक मिलती है। जो प्रेम नहीं कर सकते वे ही असुरक्षा से डरते हैं, क्योंकि उनकी जड़ें जीवन में नहीं जमी हुई हैं। जो प्रेम नहीं कर सकते, वे जीवन में सदा सुरक्षित रहते हैं। वे सुरक्षित करने में ही अपना जीवन व्यर्थ कर देते हैं, और जीवन सुरक्षित कभी होता नहीं, हो नहीं सकता।

सुरक्षा मृत्यु का गुण है; सुरक्षा मृत्यु का गुणधर्म है। जीवन असुरक्षित है, अरि प्रेम इससे नहीं डरता। प्रेम जीवन से, असुरक्षा से नहीं डरता, क्योंकि वह धरती में थिर होता है।’ यदि तुम धरती में थिर नहीं हो और देखो कि झंझावात आ रहा है तो तुम डर जाओगे। लेकिन यदि तुम धरती में थिर हो तो तुम झंझावात का स्वागत करोगे, वह एक पुलक बन जाएगा। यदि तुम थिर हो तो आता हुआ झंझावात एक चुनौती बन जाएगा, उससे तुम्हारी जड़ें हिल जाएंगी, हर तंतु जीवंत हो उठेगा। फिर जब झंझावात गुजर जाएगा तो तुम यह नहीं सोचोगे कि यह बुरा था, कोई दुर्भाग्य था। तुम कहोगे कि यह तो सौभाग्य था, एक आशीर्वाद था, क्योंकि झंझावात ने सारी मृतवत्ता दूर कर दी। जो कुछ भी मृत था वह उसके साथ बह गया और जो भी जीवंत था वह और जीवंत हो गया।
जब झंझावात गुजर जाए तो वृक्षों की ओर देखो। वे जीवन से तरंगायित हैं, जीवन से धड़क रहे हैं, दीप्तिमान हैं, जीवंत हैं ऊर्जा उन्हें ओत-प्रोत कर रही है। क्योंकि झंझावात ने एक अवसर दिया उन्हें अपनी जड़ों को अनुभव करने का, अपनी थिरता को अनुभव करने का। यह स्वयं के अनुभव का एक अवसर था।
तो जो प्रेम में थिर है वह किसी भी चीज से नहीं डरता। जो कुछ भी आए सुंदर है-परिवर्तन आए, असुरक्षा आए। जो भी होता है शुभ है 1 लेकिन प्रेम कभी विवाह नहीं बनता। और जब मैं कहता हूं कि प्रेम विवाह नहीं बन सकता तो मेरा यह अर्थ नहीं है कि प्रेमियों को विवाह नहीं करना चाहिए, लेकिन यह विवाह प्रेम का विकल्प नहीं बन जाना चाहिए। यह केवल बाहरी आवरण होना चाहिए, यह विकल्प नहीं होना चाहिए।
और प्रेम कभी विवाह नहीं बनता, क्योंकि प्रेमी कभी एक-दूसरे के प्रति सुनिश्चित धारणा नहीं रखते कोई प्रतिमा नहीं रखते। मेरा जो अर्थ है वह गहन रूप से मनोवैज्ञानिक है, प्रेमी एक-दूसरे के प्रति कभी तय नहीं होते, कोई धारणा नहीं रखते। एक बार तुम एक-दूसरे के प्रति सुनिश्चित हो जाओ तो दूसरा एक वस्तु बन गया। अब वह व्यक्ति न रहा। तो विवाह प्रेमियों को वस्तुओं में बदल देता है। पति एक वस्तु है पत्नी एक वस्तु है, उनके बारे में पहले से ही भविष्यवाणी की जा सकती है।
मैं पूरे देश में बहुत से परिवारों में ठहरता रहा हूं और मुझे बहुत से पति-पत्नियों को जानने का अवसर मिला है। वे व्यक्ति हैं ही नहीं। उनके बारे में पहले से सब कुछ बताया जा सकता है। यदि पति कुछ कहे तो यह बताया जा सकता है कि पत्नी क्या कहेगी, कैसे व्यवहार करेगी। और यदि पत्नी यंत्रवत रूप से कुछ कहती है तो पति भी यंत्रवत उत्तर देगा।
यह सब सुनिश्चित है। वे वही अभिनय बार-बार कर रहे हैं। उनका जीवन बस उस ग्रामोफोन रिकार्ड की तरह है जिसमें कुछ गड़बड़ी हो जाए जिसमें सुई एक जगह अटक जाए और वह बार-बार वही दोहराता जाए। यह इतना ही सुनिश्चित है। तुम बता सकते हो कि आगे क्या होने वाला है। पति और पत्नी कहीं अटक गए हैं वे ग्रामोफोन रिकार्ड बन गए हैं और दोहराए चले जाते हैं। वह पुनरुक्ति ही ऊब पैदा करती है।
मैं एक घर में ठहरा हुआ था। पति ने मुझसे कहा, 'मैं तो अपनी पत्नी के साथ अकेला रहने से डरने लगा हूं। जब कोई और साथ होता है तभी हम दोनों सुखी होते हैं। हम किसी दूसरे को साथ लिए बिना छुट्टी पर भी नहीं जा सकते, क्योंकि वह दूसरा कुछ नवीनता लाता है। वरना तो हम जानते ही हैं कि क्या होने वाला है। यह सब इतना सुनिश्चित हो गया है कि किसी योग्य ही नहीं रहा। हम पहले से ही सब जानते हैं। यह ऐसे ही है जैसे तुम उसी किताब को बार-बार और बार-बार पढ़ते जाओ।'
प्रेमियों के बारे में पहले से भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। यही असुरक्षा है। तुम नहीं जानते कि क्या होने वाला है। और यही सौंदर्य है। तुम नए और युवा और जीवंत रह सकते हो। लेकिन हम एक-दूसरे को वस्तु बना लेना चाहते हैं, क्योंकि वस्तु आसानी से नियंत्रित की जा सकती है। और तुम्हें वस्तु से डरने की भी जरूरत नहीं होती। तुम जानते हो कि वह कहां है उसका व्यवहार क्या है। तुम पहले से ही योजना बना सकते हो कि क्या करना है और क्या नहीं करना है।
विवाह से मेरा अर्थ है एक ऐसी व्यवस्था जिसमें दो व्यक्ति वस्तुओं के तल पर गिर जाते हैं। प्रेम कोई व्यवस्था नहीं है यह तो एक साक्षात्कार है- क्षण- क्षण, जीवंत। निश्चित ही खतरे से भरा है, पर जीवन ऐसा ही है। विवाह सुरक्षित है उसमें कोई खतरा नहीं है; प्रेम असुरक्षित है। तुम नहीं जानते कि क्या होने वाला है अगला क्षण अज्ञात है, और अज्ञात ही रहता है।
तो प्रेम हर क्षण अज्ञात में प्रवेश है। जब जीसस कहते हैं 'परमात्मा प्रेम है', तो उनका यही अर्थ है। परमात्मा उतना ही अज्ञात है जितना प्रेम। और यदि तुम जीवंत होने को, प्रेम में होने को, असुरक्षित होने को तैयार नहीं हो तो तुम परमात्मा में प्रवेश नहीं कर सकते, क्योंकि वह तो परम असुरक्षा है परम अज्ञात है।
तो प्रेम तुम्हें प्रार्थना के लिए तैयार करता है। यदि तुम प्रेम कर सको, और किसी अज्ञात व्यक्ति को बिना वस्तु बनाए, बिना यंत्रवत व्यवहार के क्षण- क्षण जीते हुए प्रेम कर सको तो तुम प्रार्थना के लिए तैयार हो रहे हो।
प्रार्थना और कुछ नहीं प्रेम ही है समस्त अस्तित्व के प्रति प्रेम। तुम अस्तित्व के साथ ऐसे जीते हो जैसे अपने प्रेमी के साथ जी रहे हो। न तुम्हें भाव-दशा का पता है, न ऋतु का पता है, तुम्हें कुछ पता ही नहीं कि क्या होने वाला है। कुछ भी ज्ञात नहीं है। तुम बस उघाडते चले जाते हो-यह एक अनंत यात्रा है।

तीसरा प्रश्न :

क्या ऐसा हो सकता है कि जो व्यक्ति संबुद्ध नहीं है वह पूर्ण असुरक्षा में जीए और फिर
भी संतप्त, हताश और दुखी न हो?

पूर्ण असुरक्षा और उसमें जीने की क्षमता बुद्धत्व के पर्याय हैं। तो जो व्यक्ति संबुद्ध नहीं है वह पूर्ण असुरक्षा में नहीं रह सकता और जो पूर्ण असुरक्षा में नहीं रह सकता वह संबुद्ध नहीं हो सकता। ये दो बातें नहीं हैं, ये एक ही बात को कहने के दो ढंग हैं। तो तुम असुरक्षा में रहने की तब तक प्रतीक्षा न करो जब तक तुम संबुद्ध न हो जाओ, नहीं! क्योंकि फिर तो तुम कभी संबुद्ध न हो पाओगे।
असुरक्षा में जीना शुरू करो, यही बुद्धत्व का मार्ग है। और पूर्ण असुरक्षा के बारे में मत सोचो। जहां तुम हो वहीं से शुरू करो। जैसे तुम हो वैसे तो किसी चीज में समग्र नहीं हो सकते लेकिन कहीं से तो शुरू करना ही होता है। शुरू में इससे संताप होगा, शुरू में इससे दुख होगा। लेकिन बस शुरू में ही। यदि तुम शुरुआत पार कर सको, यदि तुम शुरुआत सह का, दुख मिट जाएगा, सताप मिट जाएगा।
इस प्रक्रिया को समझना पड़ेगा। जब तुम असुरक्षित अनुभव करते हो तो संतप्त क्यों होते हो? यह असुरक्षा के कारण नहीं बल्कि सुरक्षा की मांग के कारण है। जब तुम असुरक्षित अनुभव करते हो तो संतप्त हो जाते हो संताप पैदा होता है। वह असुरक्षा के कारण पैदा नहीं हो रहा बल्कि जीवन को एक सुरक्षा बनाने की मांग से पैदा हो रहा है। यदि तुम असुरक्षा में रहने तंगी और सुरक्षा की मांग न करो तो जब मांग चली जाएगी तो संताप भी चला जाएगा। वह मांग ही संताप पैदा कर रही है।
असुरक्षा जीवन का स्वभाव है। बुद्ध के लिए संसार असुरक्षित है; जीसस के लिए भी असुरक्षित है। लेकिन वे संतप्त नहीं हैं क्योंकि उन्होंने इस तथ्य को स्वीकार कर लिया है। वे इस वास्तविकता की स्वीकृति के लिए प्रौढ़ हो गए हैं।
प्रौढ़ता और अप्रौढ़ता की मेरी यही परिभाषा है। उस व्यक्ति को मैं अपरिपक्व कहता हूं जो कल्पनाओं और सपनों के लिए वास्तविकता से लड़ता रहता है। वह व्यक्ति अपरिपक्व है। प्रौढ़ता का अर्थ है वास्तविकता का साक्षात्कार करना, सपनों को एक ओर फेंक देना और वास्तविकता जैसी है वैसी स्वीकार कर लेना।
बुद्ध प्रौढ़ हैं। वह स्वीकार कर लेते हैं कि यह ऐसा ही है।
उदाहरण के लिए, हालांकि मृत्यु सुनिश्चित है, पर अपरिपक्व व्यक्ति सोचे चला जाता है कि बाकी सब चाहे मर जाएं लेकिन वह नहीं मरने वाला। अपरिपक्व व्यक्ति सोचता है कि उसके मरने के समय तक कुछ खोज लिया जाएगा, कोई दवा खोज ली जाएगी, जिससे वह नहीं मरेगा। अपरिपक्व व्यक्ति सोचता है कि मरना कोई नियम नहीं है। निश्चित ही, बहुत से लोग मरे हैं लेकिन हर चीज में अपवाद होते हैं और वह सोचता है कि वह अपवाद है।
जब भी कोई मरता है तो तुम सहानुभूति अनुभव करते हो, तुम्हें लगता है, बेचारा मर गया। लेकिन तुम्हारे मन में यह कभी नहीं आता कि उसकी मृत्यु तुम्हारी मृत्यु भी है। नहीं, तुम उससे बचकर निकल जाते हो। इतनी सूक्ष्म बातों को तो तुम छूते ही नहीं। तुम सोचते रहते हो कि कुछ न कुछ तुम्हें बचा लेगा-कोई मंत्र, कोई चमत्कारी गुरु। कुछ हो जाएगा और तुम बच जाओगे। तुम कहानियों में बच्चों की कहानियों में जी रहे हो।
प्रौढ़ व्यक्ति वह है जो इस तथ्य की ओर देखता है और स्वीकार कर लेता है कि जीवन और मृत्यु साथ-साथ हैं। मृत्यु जीवन का अंत नहीं है वह तो जीवन का शिखर है। वह जीवन के साथ घटी कोई दुर्घटना नहीं है वह तो जीवन के हृदय में विकसित होती है। विकसित होती है और एक शिखर पर पहुंचती है। तो प्रौढ़ व्यक्ति स्वीकार कर लेता है और मृत्यु का कोई भय नहीं रहता। वह समझ लेता है कि सुरक्षा असंभव है।
तुम चाहे एक चारदीवारी बना लो, बैंक बैलेंस रख लो, स्वर्ग में सुरक्षा पाने के लिए धन दान दे दो तुम सब कर लो लेकिन गहरे में तुम जानते हो कि असल में कुछ भी सुरक्षित नहीं है। बैंक तुम्हें धोखा दे सकता है। और पुरोहित धोखेबाज हो सकता है, वह सबसे बड़ा धोखेबाज हो सकता है, कोई नहीं जानता। वे चिट्ठियां लिख देते...... ।
भारत में मुसलमानों का एक संप्रदाय है, उसका प्रधान पुरोहित परमात्मा के नाम चिड़िया लिखता है। तुम कुछ धन दान दे दो और वह चिट्ठी लिख देगा। चिट्ठी तुम्हारे साथ तुम्हारे मकबरे में, तुम्हारी कब में रख दी जाएगी। वह तुम्हारे साथ रख दी जाएगी ताकि तुम उसे दिखा सको। धन पुरोहित के पास चला जाता है और चिट्ठी तुम्हारे साथ चली जाती लेकिन कुछ भी तो सुरक्षित नहीं हुआ।
परिपक्व व्यक्ति वास्तविकता का सामना करता है, वह उसको जैसी है वैसी ही स्वीकार कर लेता है। वह कुछ मांग नहीं करता। वह मांगने वाला नहीं होता। वह यह नहीं कहता कि यह ऐसे होना चाहिए। वह तथ्य की ओर देखता है और कहता है, 'हा, यह ऐसा है।’ वास्तविकता का सीधा साक्षात्कार तुम्हारे लिए दुखी होना असंभव कर देगा। क्योंकि दुख तभी आता है जब तुम कुछ मांग करते हो। असल में दुख और कुछ नहीं बस इसी बात का संकेत है कि तुम वास्तविकता के विपरीत चल रहे हो। और वास्तविकता तुम्हारे अनुसार नहीं बदल सकती, तुम्हें वास्तविकता के अनुसार बदलना पड़ेगा। तुम्हें स्वयं को छोड़ना पड़ेगा। तुम्हें समर्पण करना पड़ेगा।
समर्पण का यही अर्थ है : तुम्हें स्वयं को छोड़ना पड़ेगा। वास्तविकता समर्पण नहीं कर सकती, वह तो जैसी है वैसी है। जब तक तुम समर्पण न करो, तुम दुखी रहोगे। दुख तुम्हारे द्वारा ही निर्मित होता है क्योंकि तुम संघर्ष करते हो।
यह ऐसे ही है जैसे नदी की धारा सागर की तरफ बह रही हो और तुम धारा के विपरीत तैरने की कोशिश कर रहे हो। तुम्हें लगता है कि नदी तुम्हारे विरुद्ध है। नदी तुम्हारे विरुद्ध नहीं है। उसने तो तुम्हारे बारे में सुना भी नहीं है। वह तुम्हें जानती भी नहीं है। नदी तो बस सागर की ओर बहे जा रही है। यह नदी का स्वभाव है कि सागर की ओर बहे, सागर की ओर चले और उसमें समाहित हो जाए। तुम धारा के विपरीत जाने की कोशिश कर रहे हो।
और हो सकता है किनारे पर कुछ मूरख खड़े हों जो तुम्हें बढ़ावा दे रहे हों : 'तुम बहुत अच्छा कर रहे हो। कोई फिक्र न करो देर-अबेर नदी को समर्पण करना पड़ेगा। तुम तो महान हो, चलते रहो! जो महान हैं उन्होंने नदी पर विजय पाई है !' सदा ऐसे मूरख लोग होते ही हैं जो तुम्हें प्रेरणा देते हैं, तुम्हारा हौसला बढ़ाते हैं। लेकिन कोई सिकंदर, कोई नेपोलियन, कोई महान व्यक्ति उलटा स्रोत तक नहीं पहुंच सका। देर-अबेर नदी की विजय होती है। लेकिन मरने के बाद तुम वह आनंद नहीं ले सकते जो तब संभव था जब तुम जीवित थे : समर्पण का आनंद, स्वीकृति का आनंद, नदी के साथ ऐसे एक हो जाने का आनंद कि कोई संघर्ष न बचे। लेकिन किनारे पर खड़े वे मूर्ख लोग कहेंगे 'तुमने समर्पण कर दिया, तुम हार गए, तुम असफल हुए।’ उनकी मत सुनो उस तरिक स्वतंत्रता का आनंद लो जो समर्पण से आती है। उनकी मत सुनो।
जब बुद्ध ने धारा के विपरीत तैरने की कोशिश छोड़ दी तो जो उनको जानते थे, उन्होंने कहा, तुम भगोड़े हो। तुम पराजित हो। तुमने हार मान ली। दूसरे क्या कहते हैं वह मत सुनो। भीतर के भाव को अनुभव करो। तुम्हें क्या घट रहा है उसको अनुभव करो। यदि धारा के साथ बहने में तुम्हें अच्छा लगता है तो यही मार्ग है। यही ताओ है तुम्हारे लिए। किसी की मत सुनो, बस अपने हृदय की सुनो। प्रौढ़ता है यथार्थ का स्वीकार।
मैंने एक कहानी सुनी है। एक मुसलमान, एक ईसाई और एक यहूदी से एक प्रश्न पूछा गया। प्रश्न एक ही था। किसी ने उन तीनों से पूछा, 'यदि तूफानी लहरें सागर को जमीन पर आएं तुम उसमें डूब जाओ तो तुम क्या करोगे?' ईसाई ने कहा, 'मैं अपने हृदय पर क्रास का चिह्न बनाऊंगा और परमात्मा से प्रार्थना करूंगा कि मुझे स्वर्ग में आने के लिए द्वार खोल दे।’ मुसलमान ने कहा, 'मैं अल्लाह का नाम लूंगा और कहूंगा कि यही किस्मत है, यही भाग्य है, और डूब जाऊंगा।’ यहूदी ने कहा, 'मैं परमात्मा को धन्यवाद दूंगा, उसकी मर्जी को स्वीकार करूंगा और पानी के नीचे रहना सीख लूंगा।’
यही करना है। अस्तित्व की मर्जी को, विराट की मर्जी को स्वीकार करना है और उसमें जीना सीखना है। यही सारी कला है। प्रौढ़ व्यक्ति यथार्थ को स्वीकार कर लेता है, कोई मांग नहीं करता, किसी स्वर्ग की बात नहीं करता। ईसाई मांग कर रहा था, वह मांग रहा था, वह कह रहा था, स्वर्ग के द्वार खोल दो। लेकिन वह भी निराशावादी है जो बस स्वीकार कर लेता है और डूब जाता है। मुसलमान भी यही कर रहा था। यहूदी ने स्वीकार किया, बल्कि स्वागत किया और कहा, यही उसकी मर्जी है, अब मुझे पानी के नीचे रहना सीखना है। यही परमात्मा की मर्जी है। वास्तविकता को ऐसा का ऐसा स्वीकार कर लो, और सीखो कि समर्पित हृदय, समर्पित चित्त के साथ उसमें कैसे जीना है।


अंतिम प्रश्न :

कल आपने कहा कि जीवन और मृत्यु साथ-साथ हैं। फिर कृपया बताएं कि अतिक्रमण
की क्या आवश्यकता है? 

यही आवश्यकता है। इसीलिए आवश्यकता है। जीवन मृत्यु के साथ ही हैं--यदि तुम इसे समझ सको तो तुमने अतिक्रमण कर लिया।
तुम जीवन को स्वीकार करते हो, मृत्यु को स्वीकार नहीं करते। या कि करते हो? तुम जीवन को स्वीकार करते हो लेकिन मृत्यु को अस्वीकार करते हो, और इसी कारण तुम सदा कठिनाई में रहते हो। तुम कठिनाई में पड़ते हो क्योंकि मृत्यु जीवन का अंग है, जब तुम जीवन को अस्वीकार करते हो तो मृत्यु तो होगी ही, लेकिन तुम मृत्यु को अस्वीकार कर देते हो। जब तुमने मृत्यु को अस्वीकार किया तो जीवन को भी अस्वीकार कर दिया, क्योंकि वे दो नहीं हैं। तो तुम कठिनाई में रहोगे। या तो पूरे को स्वीकार करो या पूरे को अस्वीकार करो। यही अतिक्रमण है।
और अतिक्रमण करने के दो उपाय है। या तो जीवन और मृत्यु दोनों को एक साथ स्वीकार करो, या दोनों को एक साथ अस्वीकार करो, तब तुम अतिक्रमण कर गए। यही दो उपाय हैं, विधायक और नकारात्मक। नकारात्मक कहता है, 'दोनों को अस्वीकार कर दो।’ विधायक कहता है, 'दोनों को स्वीकार कर लो।’ लेकिन जोर इस बात पर है कि दोनों साथ होने चाहिए, चाहे स्वीकार करो चाहे अस्वीकार करो। जब जीवन और मृत्यु दोनों होते हैं तो एक-दूसरे को काट डालते हैं। और जब वे दोनों ही नहीं रहते तो तुम अतिक्रमण कर जाते हो।
तुम या तो जीवन से जुड़े होते हो या कभी-कभी मृत्यु से, लेकिन तुम कभी दोनों को स्वीकार नहीं करते। मैं कई लोगों से मिला हूं जो जीवन से इतने हताश हो गए हैं. कि वे आत्महत्या करने की सोचने लगते हैं। पहले उनका जीवन में रस होता है, फिर जीवन उबाने लगता है। ऐसा नहीं कि जीवन उबाता है, वह मोह उबाता है, लेकिन लोग सोचते हैं कि जीवन उबा रहा है। तो वे मृत्यु में रस लेने लगते हैं। अब वे सोचने लगते हैं कि अपने को कैसे नष्ट कर लें और कैसे आत्महत्या कर लें, कैसे मर जाएं। लेकिन मोह तो है ही। पहले जीवन का था, अब मृत्यु का है। तो जो व्यक्ति जीवन के मोह में है और जो व्यक्ति मृत्यु के मोह में है, वे भिन्न नहीं हैं। मोह तो है ही और मोह ही समस्या है। दोनों को स्वीकार करो।
जरा सोचो, यदि तुम जीवन और मृत्यु दोनों को स्वीकार कर लोगे तो क्या होगा? तत्क्षण एक मौन उतर आएगा, क्योंकि वे दोनों एक-दूसरे को काट डालेंगे। जब तुम स्वीकार कर लेते हो तो जीवन और मृत्यु दोनों समाप्त हो जाते हैं, तब तुम अतिक्रमण कर गए तुम पार चले गए। या दोनों को अस्वीकार कर दो-यह एक ही बात है।
अतिक्रमण का अर्थ है द्वैत के पार चले जाना। मोह का अर्थ है द्वैत में रहना, एक में रस लेना और दूसरे के विपरीत होना। जब तुम दोनों को स्वीकार करते हो या दोनों को अस्वीकार करते हो तो मोह गिर जाता है। तुम्हारी गांठ खुल जाती है। अचानक तुम अपने प्राणों के तीसरे आयाम पर पहुंच जाते हो, जहां न जीवन है न मृत्यु। वही निर्वाण है, वही मोक्ष है। वहां द्वैत नहीं है, अद्वैत है, तथाता है। और जब तक तुम अतिक्रमण न कर जाओ, तुम सदा दुख में ही रहोगे। भले ही तुम अपने मोह को इससे हटाकर उस पर लगा लो, लेकिन तुम दुख में ही रहोगे।
मोह दुख पैदा करता है। अस्वीकार भी दुख पैदा करता है। तुम कुछ भी चुन सकते हो, यह तुम पर निर्भर है। तुम कृष्ण की तरह विधायक मार्ग चुन सकते हो। वह कहते हैं, 'स्वीकार करो। दोनों को स्वीकार करो।’ या तुम बुद्ध का मार्ग चुन सकते हो। बुद्ध कहते हैं, 'दोनों को अस्वीकार करो।’ लेकिन दोनों को साथ-साथ कर लो, फिर अतिक्रमण तत्क्षण होता है। यदि तुम दोनों के बारे में सोचो भी तो भी अतिक्रमण हो जाएगा। और यदि वास्तविक जीवन में तुम यह कर पाओ तो एक नई चेतना का आविर्भाव होगा। वह चेतना द्वैत के जगत की नहीं है, वह एक अज्ञात जगत की चेतना है-निर्वाण के जगत की।

आज इतना ही।

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Thumbs Up तंत्र-सूत्र-(भाग-5)-प्रवचन-72 असुरक्षा में जीना बुद्धत्व का मार्ग है। भाग-I
Posted by: Osho Prem - 03-02-2019, 04:57 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

तंत्र-सूत्र-(भाग-5)-प्रवचन-72

असुरक्षा में जीना बुद्धत्व का मार्ग है-

प्रश्नसार-
1-कृपया बुद्ध के प्रेम को समझाएं।
2-क्या प्रेम गहरा होकर विवाह नहीं बन सकता?
3-क्या व्यक्ति असुरक्षा में जीते हुए निशिंचत रह सकता है? 
4-अतिक्रमण की क्या अवश्यकता है? 
पहला प्रश्न : 
 आपने कहा कि प्रेम केवल मृत्यु के साथ ही संभव है। फिर क्या आप कृपया बुद्ध पुरुष के प्रेम के विषय में समझाएंगे?
व्यक्ति के लिए तो प्रेम सदा घृणा का ही अंग होता है सदा घृणा के साथ ही आता है। अज्ञानी मन के लिए तो प्रेम और घृणा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अज्ञानी मन के लिए प्रेम कभी शुद्ध नहीं होता। और यही प्रेम का विषाद है क्योंकि वह घृणा जो है, विष बन जाती है। तुम किसी से प्रेम करते हो और उसी से घृणा भी करते हो।

लेकिन हो सकता है, तुम घृणा और प्रेम दोनों एक साथ न कर रहे होओ तो तुम्हें कभी इसका पता ही नहीं चलता। जब तुम किसी से प्रेम करते हो तो तुम घृणा वाले हिस्से को भूल जाते हो वह नीचे चला जाता है, अचेतन मन में चला जाता है और वहां प्रतीक्षा करता है। फिर जब तुम्हारा प्रेम थक जाता है तो वह अचेतन में गिर जाता है और घृणा वाला हिस्सा ऊपर आ जाता है।
फिर तुम उसी व्यक्ति से घृणा करने लगते हो। और जब तुम घृणा करते हो तो तुम्हें पता भी नहीं होता कि तुम प्रेम भी करते हो, अब प्रेम गहरे अचेतन में चला गया है। यह चलता रहता है बिलकुल दिन और रात की तरह यह एक वर्तुल में चलता चला जाता है। यही विषाद बन जाता है।


लेकिन एक बुद्ध, एक जाग्रत व्यक्ति के लिए दुई, द्वैत मिट जाते हैं। सब तरफ-न केवल प्रेम के ही संबंध में बल्कि पूरा जीवन एक अद्वैत बन जाता है। फिर कोई दुई नहीं रहती, विरोधाभास नहीं बचता।
तो वास्तव में, बुद्ध के प्रेम को प्रेम कहना ठीक नहीं है, लेकिन हमारे पास और कोई शब्द नहीं है। बुद्ध ने स्वयं कभी प्रेम शब्द का उपयोग नहीं किया। उन्होंने करुणा शब्द का उपयोग किया। लेकिन वह भी कोई बहुत अच्छा शब्द नहीं है। क्योंकि तुम्हारी करुणा सदा तुम्हारी क्रूरता के साथ संबंधित है, तुम्हारी अहिंसा सदा तुम्हारी हिंसा के साथ संबंधित है। तुम कुछ भी करो उसका विपरीत सदा ही साथ होगा। तुम विरोधाभासों में जीते हो; इसीलिए तनाव, दुख और संताप होते हैं।
तुम एक नहीं हो, तुम हमेशा बंटे हुए हो। तुम बहुत से खंडों में बंटी हुई एक भीड़ हो। और वे सब खंड एक-दूसरे का विरोध कर रहे हैं। तुम्हारा होना एक तनाव है; बुद्ध का होना एक गहन विश्राम है। स्मरण रखो, तनाव दो विरोधी ध्रुवों के बीच में होता है, और विश्राम होता है ठीक मध्य में, जहां दो विरोधी ध्रुव विरोधी नहीं रहते। वे एक-दूसरे को काट देते हैं, और एक रूपांतरण घटित होता है।
तो बुद्ध का प्रेम उससे मूलत: भिन्न होता है, जिसे तुम प्रेम जानते हो। तुम्हारा प्रेम तो एक बेचैनी है; बुद्ध का प्रेम है पूर्ण विश्राम 1 उसमें मस्तिष्क का कोई भाग नहीं होता, इसलिए उसका गुणधर्म पूर्ण्त: बदल जाता है। बुद्ध के प्रेम में ऐसा बहुत कुछ होगा जो साधारण प्रेम में नहीं होता।
पहली बात तो यह कि वह ऊष्ण नहीं होगा। ऊष्णता आती है घृणा से। बुद्ध का प्रेम वासना नहीं, करुणा होता है; ऊष्ण नहीं, शीतल होता है। हमारे लिए तो शीतल प्रेम का अर्थ होता है कि इसमें कुछ कमी है। बुद्ध का प्रेम शीतल होता है, उसमें कोई ऊष्णता नहीं होती 1 वह सूर्य की तरह नहीं होता, चांद की तरह होता है। वह तुम में उत्तेजना नहीं लाता, वरन एक गहन शीतलता निर्मित करता है।
दूसरे, बुद्ध का प्रेम वास्तव में कोई संबंध नहीं होता, तुम्हारा प्रेम एक संबंध होता है। बुद्ध का प्रेम तो उनके होने की अवस्था ही है। असल में वह तुम्हें प्रेम नहीं करते वह प्रेम ही हैं। यह भेद स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए। यदि तुम किसी व्यक्ति को प्रेम करते हो तो तुम्हारा प्रेम एक कृत्य होता है, तुम कुछ करते हो, कोई निश्चित व्यवहार करते हो, कोई संबंध कोई सेतु निर्मित करते हो। बुद्ध का प्रेम तो बस उनका होना ही है, बस ऐसे ही वह हैं। वह तुम्हें प्रेम नहीं कर रहे, वह प्रेम ही हैं। वह तो बगीचे में खिले फूल की तरह हैं। तुम उधर से गुजरी, और सुगंध तुम तक पहुंच जाती है। ऐसा नहीं है कि फूल विशेष रूप से तुम तक सुगंध पहुंचा रहा है; जब कोई नहीं भी गुजर रहा था, तब भी वहां सुगंध थी। और यदि कभी भी कोई नहीं गुजरे, तब भी सुगंध रहेगी।
जब तुम्हारा प्रेमी तुम्हारे साथ नहीं होता, तुम्हारी प्रेमिका तुम्हारे साथ नहीं होती, प्रेम विदा हो जाता है, सुवास नहीं रहती। यह प्रेम तुम्हारा प्रयास है, तुम्हारा होना मात्र नहीं है। इसे लाने के लिए तुम्हें कुछ करना पड़ता है। जब कोई भी नहीं है और बुद्ध अकेले अपने बोधिवृक्ष के नीचे बैठे हैं तो भी वह प्रेम में होते हैं। अब यह जरा अजीब लगता है कि तब भी वह प्रेम में होते हैं। वहां कोई भी नहीं है जिसे प्रेम किया जाए लेकिन फिर भी वह प्रेम में हैं। यह प्रेमपूर्ण होना उनकी अवस्था है। और क्योंकि यह उनकी अवस्था है, इसलिए उसमें तनाव नहीं होता। बुद्ध अपने प्रेम से थक नहीं सकते।
तुम थक जाओगे, क्योंकि तुम्हारा प्रेम ऐसा है जिसे तुम कर रहे हो। तो यदि बहुत प्रेम होता है तो प्रेमी एक-दूसरे से थक जाते हैं। वे थक जाते हैं, और दोबारा ऊर्जा से भरने के लिए उन्हें अवकाश की, अंतराल की जरूरत पड़ती है। यदि तुम चौबीस घंटे अपने प्रेमी के साथ रहो तो वह ऊब जाएगा, क्योंकि इतना ध्यान देना बहुत अधिक हो जाएगा। कुछ भी चौबीसों घंटे करते रहना अति हो जाती है।
बुद्ध कुछ कर नहीं रहे, वह अपने प्रेम से थकते नहीं हैं। यह तो उनका होना ही है, यह तो ऐसे ही है जैसे वह श्वास ले रहे हों। जैसे तुम श्वास लेने से कभी थकते नहीं, अपने होने से कभी थकते नहीं, ऐसे ही वह भी कभी अपने प्रेम से थकते नहीं।
और तीसरी बात यह है कि तुम्हें पता चलता है कि तुम प्रेम कर रहे हो, बुद्ध बिलकुल पता नहीं होता। क्योंकि पता चलने के लिए विपरीत की आवश्यकता होती है। तो प्रेम से इतने भरे हैं कि उन्हें पता ही न चलेगा। यदि तुम उनसे पूछो तो वह कहेंगे, 'मैं तुमसे प्रेम करता है।' लेकिन इसका उन्हें पता नहीं होगा। प्रेम इतना चुपचाप उनसे बह रहा है, उनका इतना अंतरंग हिस्सा बन गया है, कि उन्हें इसका पता हो ही नहीं सकता।
तुम्हें पता चलेगा कि वह प्रेम करते हैं, और यदि तुम खुले तथा ग्रहणशील हो तो तुम्हें अधिक पता चलेगा कि वह तुम्हें और भी प्रेम करते हैं। तो यह तुम्हारी क्षमता पर निर्भर करता है कि तुम कितना ग्रहण कर सकते हो। लेकिन उनकी तरफ से यह कोई भेंट नहीं है। वह तुम्हें कुछ दे नहीं रहे हैं ऐसे वह हैं ही, यही उनका होना है। जब भी तुम अपने समग्र अस्तित्व के प्रति जागते हो, प्रबुद्ध होते हो मुक्त होते हो, तो तुम्हारे जीवन से विरोधाभास मिट जाता है। फिर कोई द्वैत नहीं रहता। फिर जीवन एक लयबद्धता बन जाता है कुछ भी किसी भी चीज के विरुद्ध नहीं होता।
इस लयबद्धता के कारण एक गहन शांति घटित होती है, कोई अशांति नहीं रहती। अशांति बाहर पैदा नहीं होती, तुम्हारे भीतर ही होती है। विरोधाभास ही अशांति पैदा करता रहता है, जब कि बहाने तुम बाहर खोज ले सकते हो। उदाहरण के लिए जरा गौर से देखो कि अपने प्रेमी या किसी मित्र, किसी गहन, अंतरंग, निकटस्थ मित्र के साथ होने पर तुम्हें क्या होता है। उसके साथ रहो और बस देखो कि तुम्हें क्या हो रहा है। जब तुम मिलते हो तो तुम बहुत उत्साहित, आनंदित और नृत्यपूर्ण होते हो। लेकिन कितना नृत्य तुम कर सकते हो? और कितने आनंदित तुम हो सकते हो?
कुछ ही मिनटों में तुम नीचे उतरने लगते हो, उत्साह चला जाता है। और कुछ घंटों बाद तो तुम ऊब जाते हो तुम कहीं और भाग जाने की सोचने लगते हो। और कुछ दिनों बाद तो तुम लड़ने लगोगे। जरा गौर से देखो कि क्या हो रहा है। यह सब भीतर से आ रहा है लेकिन तुम बाहर बहाने खोज लोगे। तुम कहोगे कि यह व्यक्ति अब उतना प्रेमपूर्ण नहीं रहा जितना कि जब यह आया था, तब था; अब यह व्यक्ति मुझे अशांत कर रहा है मुझे क्रोधित
कर रहा है। और तुम हमेशा ही कोई बहाना खोज लोगे कि वह तुम्हें कुछ कर रहा है, तुम्हें
कभी भी पता न चलेगा कि तुम्हारा विरोधाभास, तुम्हारे मन का द्वैत या अंतर्द्वंद्व कुछ कर रहा
है। हमें कभी भी हमारे अपने मन के कृत्यों का पता नहीं चल पाता।
मैंने सुना है कि एक बहुत प्रसिद्ध, सुंदर, हालीवुड अभिनेत्री एक स्ट्रडयो में अपना फोटो लेने गई। फोटो एक दिन पहले खींचा गया था। फोटोग्राफर ने फोटो उसे दिया, पर वह तो बहुत नाराज हो गई, तमतमा गई। उसने कहा, 'यह तुमने क्या कर डाला है? पहले भी तुमने मेरे फोटो लिए हैं, पर वे सब कितने गजब के थे !' फोटोग्राफर ने अभिनेत्री को कहा, 'ही, लेकिन आप यह भूल रही हैं कि जब मैंने वे फोटो खींचे थे तो मैं बारह वर्ष छोटा था। मैं तब बारह वर्ष छोटा था, यह आप भूल रही हैं।’
हम भीतर कभी नहीं देखते कि क्या हो रहा है। यदि फोटो तुम्हें ठीक नहीं लग रहा हो तो फोटोग्राफर में कुछ गड़बड़ है। यह नहीं कि बारह वर्ष बीत चुके हैं और अब तुम बड़ी हो गई हो। यह तो एक आंतरिक प्रक्रिया है, फोटोग्राफर का इससे कुछ भी लेना-देना नहीं है। लेकिन फोटोग्राफर बड़ा बुद्धिमान रहा होगा! उसने कहा, 'आप भूल रही हैं कि मैं तब बारह वर्ष छोटा था।’
बुद्ध का प्रेम बिलकुल भिन्न है, लेकिन उसके -लिए हमारे पास कोई और शब्द नहीं है। सबसे अच्छा शब्द जो हमारे पास है, वह प्रेम ही है। लेकिन यदि तुम यह स्मरण रख सकी तो उसका गुणधर्म बिलकुल बदल जाता है।
और एक बात गौठ बांध लो इस पर गहन विचार करो : यदि बुद्ध तुम्हारे प्रेमी हों तो क्या तुम संतुष्ट ही जाओगे? तुम संतुष्ट नहीं होओगे। क्योंकि तुम्हें लगेगा कि यह प्रेम तो शीतल है इसमें कोई उत्तेजना नहीं है। तुम्हें लगेगा कि वह तुम्हें ऐसे ही प्रेम करते हैं जैसे वह सबको करते है तुम कोई विशेष नहीं हो। तुम्हें लगेगा कि उनका प्रेम कोई भेंट नहीं है वह तो ऐसे है ही इसीलिए प्रेम कर रहे हैं। तुम्हें उनका प्रेम इतना स्वाभाविक लगेगा कि तुम उससे संतुष्ट नहीं होओगे।
भीतर विचार करो। जो प्रेम घृणा-रहित है उससे तुम कभी भी तृप्त नहीं हो सकते। और उस प्रेम से भी तुम कभी तृप्त नहीं हो सकते जिसमें घृणा हो। यही समस्या है। किसी भी तरह तुम अतृप्त ही रहोगे। यदि प्रेम घृणा के साथ है तो तुम अतृप्त रहोगे, सदा रुग्ण रहोगे, क्योंकि वह घृणा का अंश तुम्हें अशांत करेगा। यदि प्रेम घृणा-रहित है तो तुम्हें लगेगा कि यह शीतल है। और बुद्ध को यह इतने स्वाभाविक रूप से घटित हो रहा है कि तुम न भी होते तो भी होता तो यह कोई विशेष रूप से तुम्हारे लिए नहीं है। इसलिए तुम्हारा अहंकार तृप्त नहीं होता। और मुझे ऐसा लगता है कि यदि तुम्हारे सामने किसी बुद्ध और अबुद्ध में से अपना प्रेमी चुनने का सवाल हो तो तुम अबुद्ध को चुनोगे क्योंकि उसकी भाषा तुम समझ सकते हो। अबुद्ध कम से कम तुम्हारे जैसा तो है। तुम लड़ोगे-झगडोगे, सब अस्तव्यस्त हो जाएगा, सब गड़बड़ हो जाएगा, लेकिन फिर भी तुम अबुद्ध को ही चुनोगें। क्योंकि बुद्ध इतने ऊंचे होंगे कि जब तक तुम भी ऊंचे न उठो तुम नहीं समझ पाओगे कि बुद्ध कैसे प्रेम करते हैं।
एक अबुद्ध के साथ, एक अज्ञानी के साथ, तुम्हें स्वयं को रूपांतरित करने की जरूरत नहीं होती। तुम वैसे के वैसे ही बने रह सकते हो। वह प्रेम कोई चुनौती नहीं है। वास्तव में प्रेमियों के साथ बिलकुल विपरीत ही होता है। जब दो प्रेमी मिलते हैं और प्रेम में पड़ते हैं तो वे दोनों एक-दूसरे को विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि वे बहुत महान हैं। जो भी सर्वोत्तम गुण हैं उन्हें वे बाहर लाते हैं। ऐसा लगता है कि वे शिखर पर हैं। लेकिन इसमें बहुत प्रयास करना पड़ता है! इस शिखर पर तुम टिके नहीं रह सकते। तो जब तुम थोड़े व्यवस्थित होने लगते हो तो धरती पर वापस लौट आते हो।
तो प्रेमी सदा एक-दूसरे से असंतुष्ट रहते हैं क्योंकि उन्होंने सोचा था कि दूसरा तो बस दिव्य है और जब वे कुछ परिचित होते हैं, थोड़ा समय साथ होते हैं, तो सब कुछ धूमिल हो जाता है, साधारण हो जाता है। तो उन्हें लगता है कि दूसरा धोखा दे रहा था।
नहीं, वह धोखा नहीं दे रहा था, वह तो सर्वोत्तम रंगों में स्वयं को प्रस्तुत कर रहा था। बस इतना ही था। वह किसी को धोखा नहीं दे रहा था, वह जान-बूझकर कुछ भी नहीं कर रहा था। वह तो बस अपने सर्वोत्तम रंगों में स्वयं को प्रस्तुत कर रहा था। और ऐसा ही दूसरे ने भी किया था। लेकिन तुम स्वयं को बहुत देर तक इसी तरह प्रस्तुत नहीं कर सकते, क्योंकि यह बड़ा दुष्कर हो जाता है, कठिन हो जाता है, बोझिल हो जाता है। तो तुम नीचे उतर आते है।
जब दो प्रेमी व्यवस्थित हो जाते हैं, जब वे मानने लगते हैं कि दूसरा तो उपलब्ध ही है तब वे बड़े निकृष्ट, बड़े सामान्य, बड़े साधारण दिखाई पड़ने लगते हैं। जैसे वे पहले दिखाई पड़ते थे उसके बिलकुल विपरीत दिखाई पड़ने लगते हैं। उस समय तो वे फरिश्ते थे; अब तो बस शैतान के शिष्य नजर आते हैं। तुम नीचे गिर जाते हो तुम अपने सामान्य तल पर लौट आते हो।
साधारण प्रेम कोई चुनौती नहीं है लेकिन किसी बुद्ध पुरुष के प्रेम में पड़ जाना बड़ी दुर्लभ घटना है। केवल बहुत सौभाग्यशाली ही ऐसे प्रेम में पड़ते हैं। यह बड़ी दुर्लभ घटना है। ऐसा तो केवल तभी होता है जब तुम जन्मों-जन्मों से किसी बुद्ध पुरुष की खोज करते रहे होओ। यदि ऐसा हुआ हो, केवल तभी तुम बुद्ध पुरुष के प्रेम में पड़ते हो। एक बुद्ध पुरुष के प्रेम में पड़ना स्वयं में ही एक महान उपलब्धि है 1 लेकिन फिर एक कठिनाई होती है। कठिनाई यह है कि बुद्ध पुरुष एक चुनौती है। वह तुम्हारे तल पर तो उतर नहीं सकता, ऐसा संभव ही नहीं है, यह असंभव है। तुम्हें ही उसके शिखर पर जाना होगा; तुम्हें यात्रा करनी होगी, तुम्हें रूपांतरित होना होगा।
तो यदि तुम किसी बुद्ध पुरुष के प्रेम में पड़ जाओ तो प्रेम एक साधना बन जाता है। प्रेम साधना बन जाता है महानतम साधना बन जाता है। इसी कारण से जब भी कोई बुद्ध होते हैं, या कोई जीसस, या कोई लाओत्से तो उनके आस-पास बहुत से लोग एक ही जन्म में उन शिखरों पर पहुंच जाते हैं जहां वे कई जन्मों में भी न पहुंच पाते। लेकिन इसका सारा राज इतना है कि वे प्रेम में पड़ सकें। यह अकल्पनीय नहीं है, कल्पनीय है। हो सकता है तुम बुद्ध के समय में रहे होओ तुम जरूर कहीं आस-पास रहे होओगे। बुद्ध शायद तुम्हारे गांव या नगर से गुजरे होंगे। और हो सकता है तुमने उन्हें सुना भी न हो, तुमने उन्हें देखा भी न हो। क्योंकि किसी बुद्ध को सुनने या किसी बुद्ध को देखने या उसके करीब जाने के लिए भी एक प्रेम चाहिए तुम्हारी ओर से एक खोज चाहिए।
जब कोई बुद्ध पुरुष के प्रेम में पड़ता है तो यह बात अर्थपूर्ण होती है बहुत अर्थपूर्ण होती है। लेकिन कठिन होता है मार्ग। बहुत सरल है किसी साधारण व्यक्ति के प्रेम में पड़ जाना, उसमें कोई चुनौती नहीं है। लेकिन बुद्ध पुरुष के साथ चुनौती बड़ी होगी, मार्ग कठिन होगा, क्योंकि तुम्हें ऊपर उठना होगा। और ये सब बातें तुम्हें दिक्कत देंगी। उसका प्रेम शीतल होगा, उसका प्रेम तो लगेगा कि सबके लिए है, उसके प्रेम में घृणा नहीं होगी।
ऐसा मेरा अनुभव रहा है। कई लोग मेरे प्रेम में पड़ जाते हैं, और फिर वे चाल चलने लगते हैं, साधारण चालें। जाने या अनजाने वे ऐसा करते हैं। एक तरह से यह स्वाभाविक भी है। वे मुझसे अपेक्षाएं करने लगते हैं-साधारण सी अपेक्षाएं-और उनका मन द्वैत की भाषा में सोचता है। उदाहरण के लिए, तुम मुझे प्रेम करते हो तो यदि तुम मुझे सुखी कर सको तो तुम सुखी अनुभव करोगे; लेकिन तुम मुझे सुखी नहीं कर सकते मैं तो सुखी हूं ही।
इसलिए यदि तुम मेरे प्रेम में पड़ते हो तो तुम बहुत हताशा अनुभव करोगे, बहुत निराश होओगे, क्योंकि तुम मुझे सुखी नहीं कर सकते और कुछ करने को बचा नहीं। यदि तुम मुझे सुखी न कर सको तो तुम दुखी हो जाओगे और फिर तुम मुझे दुखी करने का प्रयास करोगे! क्योंकि कम से कम यदि तुम उतना भी कर सको तो तुम्हें तृप्ति मिलेगी। तुम मुझे दुखी करने का प्रयास करोगे-अनजाने, तुम जागरूक नहीं हो, तुम्हें इसकी खबर नहीं है। यदि तुम्हें पता हो तो तुम ऐसा नहीं करोगे। लेकिन तुम प्रयास करोगे, तुम्हारा अचेतन मन मुझे दुखी करने का प्रयास करेगा।
यदि तुम मुझे दुखी कर सको तो तुम्हें पक्का हो जाएगा कि तुम मुझे सुखी भी कर सकते हो। लेकिन यदि तुम मुझे दुखी न कर सको के तुम बिलकुल निराश हो जाते हो। फिर तुम्हें लगेगा कि तुम मुझसे संबंधित नहीं हो, क्योंकि संबंध का तुम्हारे लिए यही अर्थ है।
साधारण प्रेम तो एक रोग है क्योंकि द्वंद्व चलता रहता है। और बुद्ध पुरुष के प्रेम को समझना कठिन है। उसे बौद्धिक रूप से समझने का कोई उपाय नहीं है। तुम्हें प्रेम में पड़ना होगा। और फिर तुम्हें अपने ही मन के प्रति सजग रहना होगा, क्योंकि वह मन उलझनें खड़ी करता रहेगा।
बुद्ध शान को उपलब्ध हुए फिर वह अपने घर लौटे बारह वर्षों बाद वापस लौटे। उनकी पत्नी जिसे उन्होंने बहुत प्रेम किया था, बहुत क्रोधित थी, बहुत नाराज थी। इन बारह वर्षो में वह प्रतीक्षा ही करती रही थी कि किसी दिन यह व्यक्ति लौटेगा। और उसके मन में बदले की बड़ी भावना थी क्योंकि इस व्यक्ति ने उसके साथ अन्याय किया था, वह उचित नहीं था। एक रात अचानक ही वह गायब हो गया था। कम से कम वह कुछ कह तो सकता था। तब बात न्यायसंगत हो जाती। लेकिन बिना कुछ कहे उसे और अपने छोटे से बच्चे को छोड्‌कर वह गायब हो गया था। बारह वर्ष तक उसने प्रतीक्षा की, और फिर बुद्ध आए। वह आग-बबूला थी पागल हो रही थी।
बुद्ध का सबसे निकट का, निकटस्थ शिष्य था आनंद। आनंद सदा छाया की तरह उनका अनुसरण करता था। जब बुद्ध महल में प्रवेश कर रहे थे तो उन्होंने आनंद से कहा, 'तू मेरे साथ मत आ।’
आनंद ने पूछा कि क्यों? क्योंकि उसके पास तो साधारण मन था, वह संबुद्ध नहीं था। वह तो जब बुद्ध मरे तभी संबुद्ध हुआ। उसने पूछा, 'क्यों? क्या आप अभी भी पति और पत्नी की भाषा में सोच रहे हैं? कि आप अपनी पत्नी से मिलने जा रहे हैं? क्या आप अभी भी पति-पत्नी की भाषा में सोच रहे हैं?' उसे तो धक्का लगा। एक बुद्ध, एक प्रज्ञावान व्यक्ति कैसे कह सकता है कि मेरे साथ मत आ, मैं अपनी पत्नी से मिलने जा रहा हूं?
बुद्ध ने कहा 'यह बात नहीं है। यह देखकर कि मैं किसी के साथ आया हूं वह और भी नाराज हो जाएगी। वह बारह वर्ष से प्रतीक्षा कर रही है। उसे अकेले ही पागल हो लेने दो। वह बड़े प्रतिष्ठित, सुसंस्कृत कुल से है। तो वह तुम्हारे सामने नाराज नहीं होगी, वह कुछ भी प्रकट नहीं करेगी, और बारह वर्ष से वह प्रतीक्षा कर रही है। तो उसे विस्फोट कर लेने दो। मेरे साथ मत आओ। मैं अब उसका पति नहीं हूं लेकिन वह तो अभी भी पत्नी है। मैं बदल गया हूं लेकिन वह नहीं बदली है।’
बुद्ध अकेले ही गए। निश्चित ही वह नाराज थी, वह रोने और चीखने-चिल्लाने लगी और तरह-तरह की बातें कहने लगी। और बुद्ध सुनते रहे। वह बार-बार पूछती, 'यदि तुम मुझे थोड़ा भी प्रेम करते थे तो छोड्‌कर क्यों चले गए? तुम क्यों चले गए? और वह भी मुझे बिना बताए। यदि तुम मुझे थोड़ा भी प्रेम करते थे तो कहो मुझे!' और बुद्ध ने कहा, 'यदि मैं तुझे प्रेम न करता तो मैं वापस क्यों आता?'
लेकिन ये दो अलग बातें हैं, बिलकुल अलग बातें हैं। वह क्या कह रहे हैं उसे सुनने को वह तैयार ही नहीं थी। वह पूछती ही रही, 'तुम मुझे अकेला क्यों छोड्‌कर गए? तुम इतना कह दो कि तुमने मुझे कभी प्रेम नहीं किया तो फिर सब ठीक है।’ और बुद्ध ने कहा, 'मैं तुझे प्रेम करता था, मैं तुझे अभी भी प्रेम करता हूं। इसीलिए तो बारह वर्ष बाद मैं वापस लौटा हूं।’ लेकिन यह प्रेम भिन्न है। वह क्रोधित थी और बुद्ध क्रोधित नहीं थे। यदि वह भी क्रोधित हो जाते, क्योंकि वह रो रही थी और चीख-चिल्ला रही थी तो वह समझ सकती थी। यदि वह भी क्रोधित हो जाते और उसकी पिटाई करते तो वह समझ सकती थी। तो सब कुछ ठीक हो जाता। तो वह पुराने ही व्यक्ति होते। बारह वर्ष पूरी तरह मिट जाते और वे दोबारा प्रेम करने लगते। उसमें कोई कठिनाई न थी। लेकिन वह तो चुपचाप खड़े थे और वह पागल हो रही थी। बस वही पागल हो रही थी, वह तो मुस्कुरा रहे थे। यह जरा ज्यादा था। यह कैसा प्रेम? यह समझना उसके लिए बहुत कठिन रहा होगा।
बुद्ध को ताना देने के लिए उसने अपने बेटे से जो अब बारह वर्ष का था, कहा, 'ये तेरे पिता हैं देख इनकी ओर, भगोड़े की ओर। तू बस एक दिन का था जब ये भाग गए थे। ये तेरे पिता हैं। ये एक भिखारी हैं और इन्होंने तुझे जन्म दिया था। अब अपना उत्तराधिकार मांग। इनके सामने अपने हाथ फैला, ये तेरे पिता है। पूछ इनसे कि तुझे देने के लिए इनके पास क्या है?' वह तो बुद्ध को ताना दे रही थी, वह नाराज थी, स्वभावत:।
और बुद्ध ने आनंद को बुलाया जो बाहर खड़ा था और कहा, 'आनंद, मेरा भिक्षा-पात्र ले आ।’ जब भिक्षा-पात्र बुद्ध को. दिया गया तो वह उन्होंने अपने बेटे राहुल को दे दिया और कहा, 'यही मेरा उत्तराधिकार है मैं तुझे संन्यास में दीक्षित करता हूं।’
यह उनका प्रेम था। लेकिन यशोधरा तो और भी पागल हो गई। उसने कहा, 'यह तुम क्या कर रहे हो? यदि तुम अपने बेटे को प्रेम करते हो तो उसे भिखारी नहीं बनाओगे, संन्यासी नहीं बनाओगे।’ बुद्ध ने कहा, 'मैं उसे इसीलिए भिखारी बना रहा हूं क्योंकि मैं उसे प्रेम करता हूं। मैं जानता हूं कि वास्तविक उत्तराधिकार क्या है और वही मैं उसे दे रहा हूं। मेरे पिता इतने बुद्धिमान नहीं थे, लेकिन मैं जानता हूं कि क्या देने योग्य है और वही मैं दे रहा हूं।’
ये दो अलग-अलग आयाम हैं, दो अलग-अलग भाषाएं हैं जिनका कहीं मिलन नहीं होता। वह प्रेम कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पत्नी से जरूर प्रेम किया होगा, इसीलिए वह वापस आए। उन्होंने अपने बेटे को प्रेम किया होगा, इसीलिए उन्होंने उसे दीक्षा दी। लेकिन कोई पिता यह नहीं समझ सकता।
जब बुद्ध के पिता ने इस बारे में सुना-वह बूढ़े थे बीमार थे-वह बाहर दौड़े आए और बोले, 'यह तूने क्या किया? क्या तू मेरे पूरे वंश को नष्ट करने पर तुला है? तू घर से भाग गया, तू मेरा इकलौता बेटा था। अब राहुल पर मेरी आशाएं टिकी हैं, वह तेरा इकलौता बेटा है। और तूने उसे भी संन्यास दे दिया! तो मेरा वंश तो अब समाप्त हो गया। अब भविष्य की कोई संभावना न रही। तू क्या कर रहा है? क्या तू मेरा शत्रु है? 
और बुद्ध ने कहा, 'क्योंकि मैं अपने बेटे को प्रेम करता हूं इसलिए इसे वही दे रहा हूं जो देने योग्य है। न तो आपका राज्य, न आपका वंश और वंश-वृक्ष ही किसी महत्व का है। संसार को इससे कोई अंतर नहीं पड़ता कि यह वंश-वृक्ष आगे बढ़ता है या नहीं। लेकिन यह संन्यास जिसमें मैं राहुल को दीक्षित कर रहा हूं बहुत महत्वपूर्ण है। मैं भी अपने पुत्र को प्रेम करता हूं।’
दो पिता बारत कर रहे हैं! बुद्ध के पिता फिर उनसे प्रार्थना करने लगे 'तू वापस आ जा। मैं तेरा पिता-हूं। मैं आ हूं। मैं नाराज हूं। तूने मुझे निराश किया है। लेकिन फिर भी मेरे पास पिता का हृदय है और मैं तुझे क्षमा कर दूंगा। आ जा, मेरे द्वार खुले हैं। वापस आ जा। छोड़ दे यह संन्यास, वापस आ जा, मेरे द्वार खुले हैं। यह राज्य तेरा है, मैं प्रतीक्षा कर रहा हूं। मै बहुत बूढ़ा हूं लेकिन मेरे मन में तेरे लिए बहुत प्रेम है और मैं क्षमा कर सकता हूं।’
यह एक प्रेम है। फिर यह दूसरे पिता, गौतम बुद्ध स्वयं हैं, जो संसार छोड़ने के लिए अपने बेटे को संन्यास दे रहे हैं। यह भी प्रेम है।
लेकिन दोनों प्रेम इतने भिन्न हैं कि दोनों को एक ही नाम से, एक ही शब्द से बुलाना ठीक नहीं है। लेकिन हमारे पास कोई दूसरा शब्द नहीं है।

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Star Why and what we are promoting
Posted by: admin - 03-01-2019, 08:45 AM - Forum: About us - No Replies

Why and what we are promoting

   


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Smile गुजरात के साड़ी निर्माताओं ने निकाली सर्जिकल स्ट्राइक साड़ी
Posted by: Nisha Jain - 02-28-2019, 10:27 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

गुजरात के साड़ी निर्माताओं ने निकाली सर्जिकल स्ट्राइक साड़ी
Smile Smile
   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

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Star Our Responsibilities As Civilians When India Is On High Alert
Posted by: Manmeet Chhabra - 02-28-2019, 08:03 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

Our Responsibilities As Civilians When India Is On High Alert

For the next six months at least India is under threat of retaliation by our enemies. Here are some ways to behave as a responsible citizen during this time of national emergency. 

1. What's done is done. Forwarding jokes is fine but the situation is grim. So let's come back to senses and ask ourselves, "What is my responsibility in a crisis". Understand that *this is an hour of national high alert in India.*  STOP and THINK for a moment.

2. "Loose lips, sink ships". *Your facebook, Whatsapp & Instagram messages could go to our enemies within minutes.* if you have friends in defence, DO NOT share their messages to civilian groups. Just be silent for a few months on security matters. Your brilliant insights may be just what the enemy needs to understand the Indian psyche.

4. *Do not photograph or take videos of anything related to local or national security. No selfies with tanks or jawans*.  The enemy is monitoring social media activity, city by city and tracking our forces.

5. *Do not take pictures in airports, railway stations, government facilities, etc. or circulate them*.

6. *Do not forward any sensitive videos and if anyone sends it in a group, caution the sender and insist on the admin removing it immediately.* 

7. *Be on high alert personally,  in public spaces* and in case of any security threat,  alert local authorities immediately ( suspicious packages, panicked drivers near sensitive facilities, etc.) Become the eyes and ears of India's security forces.

8. *If you have a flight/train to catch, arrive early* and help make the security checks smooth. Don't throw tantrums and become a headache for the CRPF/security teams there. Instead greet them with a Jai Hind or Thank you, and receive a broad smile.
 
9.  *Prepare yourself to be useful to the country in its time of need.* What can you offer:  Learn first aid. Or traffic management. Or volunteer somewhere. Become useful in real life.

10. *Sensitize others* - family, children, youth, drivers, maids, friends, -  that this is a time of national emergency. Make them feel their responsibility.

Google  to see what your responsibility is as a civilian in times of war. Share more of what you find. Be a responsible Indian citizen.

Jai Hind ! Vande Mataram !! 

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Heart ब्लड डोनेशन में दूसरों के साथ अपना फायदा भी
Posted by: admin - 02-28-2019, 07:58 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

ब्लड डोनेशन में दूसरों के साथ अपना फायदा भी

?ब्लड डोनेशन को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट न होने के चलते बहुत से लोगों के मन में ब्लड डोनेशन को लेकर दुविधा बनी रहती है। ब्लड डोनेट करना क्यों जरूरी है और जरूरत पड़ने पर क्या करें, बता रहे हैं  मित्र:

क्यों है जरूरी

? ब्लड डोनेट कर एक शख्स दूसरे शख्स की जान बचा सकता है।

? ब्लड का किसी भी प्रकार से उत्पादन नहीं किया जा सकता और न ही इसका कोई विकल्प है।

? देश में हर साल लगभग 250 सीसी की 4 करोड़ यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। सिर्फ 5,00,000 यूनिट ब्लड ही मुहैया हो पाता है।

? हमारे शरीर में कुल वजन का 7% हिस्सा खून होता है।

? आंकड़ों के मुताबिक 25 प्रतिशत से अधिक लोगों को अपने जीवन में खून की जरूरत पड़ती है।

*क्या हैं फायदे*

? ब्लड डोनेशन से हार्ट अटैक की आशंका कम हो जाती है। डॉक्टर्स का मानना है कि डोनेशन से खून पतला होता है, जो कि हृदय के लिए अच्छा होता है।

? एक नई रिसर्च के मुताबिक नियमित ब्लड डोनेट करने से कैंसर व दूसरी बीमारियों के होने का खतरा भी कम हो जाता है, क्योंकि यह शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है।

? ब्लड डोनेट करने के बाद बोनमैरो नए रेड सेल्स बनाता है। इससे शरीर को नए ब्लड सेल्स मिलने के अलावा तंदुरुस्ती भी मिलती है।

? ब्लड डोनेशन सुरक्षित व स्वस्थ परंपरा है। इसमें जितना खून लिया जाता है, वह 21 दिन में शरीर फिर से बना लेता है। ब्लड का वॉल्यूम तो शरीर 24 से 72 घंटे में ही पूरा बन जाता है।

   *ब्लड डोनेट करने से पहले*
?ब्लड देने से पहले मिनी ब्लड टेस्ट होता है, जिसमें हीमोग्लोबिन टेस्ट, ब्लड प्रेशर व वजन लिया जाता है। ब्लड डोनेट करने के बाद इसमें हेपेटाइटिस बी व सी, एचआईवी, सिफलिस व मलेरिया आदि की जांच की जाती है। इन बीमारियों के लक्षण पाए जाने पर डोनर का ब्लड न लेकर उसे तुरंत सूचित किया जाता है।

? ब्लड की कमी का एकमात्र कारण जागरूकता का अभाव है।

? 18 साल से अधिक उम्र के स्त्री-पुरुष, जिनका वजन 50 किलोग्राम या अधिक हो, वर्ष में तीन-चार बार ब्लड डोनेट कर सकते हैं।

? ब्लड डोनेट करने योग्य लोगों में से अगर मात्र 3 प्रतिशत भी खून दें तो देश में ब्लड की कमी दूर हो सकती है। ऐसा करने से असमय होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।

? ब्लड डोनेट करने से पहले व कुछ घंटे बाद तक धूम्रपान से परहेज करना चाहिए।

? ब्लड डोनेट करने वाले शख्स को रक्तदान के 24 से 48 घंटे पहले ड्रिंक नहीं करनी चाहिए।

? ब्लड डोनेट करने से पहले पूछे जाने वाले सभी प्रश्नों के सही व स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

       *नोट:*
 ब्लड डोनेट करने के बाद आप पहले की तरह ही कामकाज कर सकते हैं। इससे शरीर में किसी भी तरह की कमी नहीं होती।

?इस मैसेज को हर आदमी व हर ग्रुप में पहुचाऎ ताकि रक्तदान करने वालो की गलतफहमी दूर हो सके तथा रक्तदान नहीं करने वाले भी ज्यादा से ज्यादा रक्तदान करके खुद भी स्वस्थ रहे तथा कई लोगों की जान बचा सके|                   

_मौका दीजिये अपने खून को, किसी की रगों में बहने का......_

_ये लाजवाब तरीका है , कई जिस्मों में ज़िंदा रहने का......._

❣❣❣

? *ब्लड ग्रुप की तुलना*  ?

आपका ब्लड कौनसा है और उसकी उपलब्धता कितनी है?

O+       1 in 3        37.4%
(प्रचुरता में उपलब्ध)

A+        1 in 3        35.7%

B+        1 in 12       8.5%

AB+     1 in 29        3.4%

O-        1 in 15        6.6%

A-        1 in 16        6.3%

B-        1 in 67        1.5%

AB-     1 in 167        .6%
*(दुर्लभ)*

*Compatible Blood Types*

O-    ले सकता है      O-

O+   ले सकता है      O+, O-

A-    ले सकता है       A-, O-

A+ले सकता है A+, A-,O+,O-

B- ले सकता है  B-, O-

B+ ले सकता है B+,B-,O+,O-

AB-ले सकता है AB-,B-,A-,O-

AB+ ले सकता है  AB+, AB-, B+, B-, A+,  A-,  O+,  O-

?ये एक महत्वपूर्ण मेसेज है जो किसी की जिंदगी बचा सकता है ...?
         Donate blood ....                       ?

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Heart Jai Hind
Posted by: admin - 02-28-2019, 11:55 AM - Forum: Share your stuff - No Replies



Jai hind 

#AirSurgicalStrikes #JaiHind #VandeMataram #Abhinandan #AbhinandanVarthaman #AbhinandanMyHero #IndiaStrikesBack #indianairforce

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Exclamation एक जरुरी सुचना....कृपया पूरी पढ़ें।
Posted by: Navin Sharma - 02-28-2019, 09:37 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

एक जरुरी सुचना....कृपया पूरी पढ़ें।

भारत की वायुसेना ने जो अदम्य साहस दिखाया है पाक को घर में घुस कर मारा है उसके लिए सेना को ढेर सारी बधाई।
आज इस मुश्किल घडी में हम सब देश के साथ है देश की सेना के साथ है हर उस फैसले के साथ है जो राष्ट्र हित में होगा।
पर आज अब कुछ जिम्मेदारी हम आम नागरिको की भी बनती है पाक अभी बौखलाया हुआ है तनाव में है और ये भी तय है कि वो अब हमारी इस AirStrike का जवाब भी ढूंढ रहा होगा।
अब हमे बहुत सचेत और सावधान रहना होगा। अपने आसपास बस स्टेण्ड..रेलवे स्टेशन..मंदिर..होटल..मॉल..भीड़भाड़ वाले बाजार..सिनेमा हॉल..अन्य ऐसी जगह जन्हा बहुत ज्यादा भीड़ रहती है वँहा हमे सतर्क रहना होगा।
कुछ भी जो आपको संदिग्ध लगे..अप्रत्याशित सा लगे तो तुरन्त पुलिस को खबर करे।
हमे आज पाक से खतरा कम है और देश के अंदर बेठे गद्दारो और पाक परस्त लोगो से ज्यादा है। उन्हें कोई LOC या बोर्डर पार नही करना पड़ेगा और वो हमारी थोड़ी सी लापरवाही से हमे और हमारे देश को बड़ा नुकसान पहुँचा सकते है।
इसीलिए आप सभी से गुजारिश है कि आने वाले कुछ दिनों तक अत्यंत सावधानी रखे और सदैव हरपल सतर्क रहे और आसपास के लोगो को भी ऐसा करने को कहे।

पाकिस्तान से तो देश की सेना आराम से निपट लेगी पर आस्तीनों के सांपो से तो हमे ही निपटना होगा।
कृपया इस सन्देश को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाये।

भारत माता की जय
जय हिन्द

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Heart भगवान उनके भक्त और प्रेम
Posted by: Payal Singh - 02-28-2019, 09:33 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

भगवान उनके भक्त और प्रेम
एक गांव में भोली-भाली गरीब लड़की पंजिरी रहती थी। वह भगवान मदनमोहन जी की अनन्य भक्त थी। भगवान मदनमोहन भी उससे बहुत प्रसन्न रहते थे।वे उसे स्वप्न में दर्शन देते और उससे कभी कुछ खाने को माँगते, कभी कुछ।

*वह दूसरे दिन ही उन्हें वह चीज भेंट कर आती, पर वह उनकी दूध की सेवा नित्य करती। वह रोज उनके दर्शन करने जाती और दूध दे आती।सबसे पहले उनके लिए प्रसाद निकालती।*

दूध वह नगर में दूसरे लोगों को भी देती। लेकिन मदनमोहन जी को दूध अपनी ओर से देती।उसके पैसे न लेती।

इस प्रकार वह दूध बेच कर अपनी जीवन नैय्या चलाती थी। लेकिन वह गरीब पंजिरी को चढ़ावे के बाद बचे दूध से इतने पैसे मिलते कि दो वक्त का खाना भी खा पाये।

अतः मंदिर जाते समय पास की नदी से थोड़ा सा जल  दूध में सहज रुप से मिला लेती । फिर लौटकर अपने प्रभु की आराधना में मस्त बाकी समय अपनी कुटिया में बाल गोपाल के भजन कीर्तन करके बिताती।

*कृष्ण कन्हैया तो अपने भक्तों की टोह में रहते ही हैं ,नित नए रुप में प्रकट होते,कभी प्रत्यक्ष में और वह पंजिरी संसार की सबसे धनी स्त्री हो जाती।*

लेकिन एक दिन उसके सुंदर जीवन क्रम में रोड़ा आ गया। दूध में जल के साथ-साथ एक छोटी मछली दूध में आ गई और संयोगवश वह मदनमोहन जी के चढ़ावे में चली गई।

दूध डालते समय मंदिर के गोसाई की दृष्टि पड़ गई। गोसाईं जी को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने दूध वापस कर पंजिरी को खूब डांटा फटकारा और मंदिर में उस का प्रवेश निषेध कर दिया।

*पंजिरी पर तो आसमान टूट पड़ा ।रोती-बिलखती घर पहुंची-" ठाकुर मुझसे बड़ा अपराध हो गया ।क्षमा करो ,पानी तो रोज मिलाती हूं ,तुमसे कहां छिपा है ।ना मिलाओ तो गुजारा कैसे हो*। 

लेकिन, प्रभु आज तक तो तुमने कोई आपत्ति कि नहीं प्रेम से पीते रहे ,हां मेरा दोष था कि पानी छानकर नहीं मिलाया । लेकिन दुख इसलिए है कि तुम्हारे मंदिर के गोसाई ने पानी मिलाने पर मुझे इतनी खरी खोटी सुनाई और तुम कुछ ना बोले। 

ठाकुर अगर यही मेरा अपराध है तो में प्रतिज्ञा करती हूं कि ऐसा काम आगे ना करूंगी और अगर रूठे रहोगे, मेरा चढ़ावा स्वीकार न करोगे तो मैं यहीं प्राण त्याग दूंगी।
 
*तभी पंजिरी के कानों में एक मधुर कंठ सुनाई दिया-"माई ओ माई ।उठी दरवाजे पर देखा तो द्वार पर एक सुदर्शन किंतु थका-हारा भूखा-प्यासा एक युवक कुटिया में झांक रहा है।*

"कौन हो बालक"

 मैया बृजवासी हूं मदन मोहन के दर्शन करने आया था। बड़ी भूख लगी है कुछ खाने का मिल जाए और रात भर सोने की जगह दे दो तो बड़ा आभारी रहूंगा।"

पंजिरी के शरीर में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई। "कोई पूछने की बात है बेटा, घर तुम्हारा है। ना जाने तुम कौन हो जिसने आते ही मेरे जीवन में ऐसा जादू बिखेर दिया।दूर से आए हो क्या भोजन करोगे।"

*"दूध के सिवा कुछ लेता नहीं ।तनिक दूध दे दो वही पी कर सो जाऊंगा।" दूध की बात सुनते ही पंजिरी की आंखें डबडबा आयी, फिर अपने आप को संभालते हुए बोली-"पुत्र दूध तो है पर सवेरे का बासी है, जरा ठहरो अभी गाय को सेहला कर थोड़ा ताजा दूध दूह लेती हूं।"*

"अरे मैया नहीं नहीं ।उसमें समय लगेगा। सवेरे का भूखा प्यासा हूं दूध का नाम लेकर तूने मुझे अधीर बना दिया ।अरे वही सुबह का दे दो, तुम बाद में दूहते रहना।"

डबडबायीआंखों से बोली" थोडा पानी मिला हुआ दूध है, पर उसमें मछली आ गई थी।" "अरे मैया तुम मुझे भूखा मारोगी क्या? जल्दी से कच्चा दूध छान कर ऐसे ही दे दो वरना मैं यही दम तोड़ दूंगा।"

पंजिरी को आश्चर्य हुआ कि कैसी बात कर बैठा यह युवक,दौड़ी-दौड़ी गई झटपट दूध दे दिया। इधर दूध पीकर युवक का चेहरा खिल उठा।                          

*"मैया कितना स्वादिष्ट दूध है। तू तो यूं ही ना जाने क्या-क्या कह रही थी ,अब तो मेरी आंखों में नींद उतर आई है इतना कहकर युवक वही सो गया।*

पंजिरी अकेली हो गई है तो दिन भर की कांति, दुख और अवसाद ने उसे फिर घेर लिया।जाड़े के दिन थे ,भूखे पेट उसकी आंखों में नींद कहां।

जाडा़ बढ़ने लगा तो अपनी ओढ़नी बालक को ओढा दी।
रात के अंतिम प्रहर जो आंख लगी कि कृष्ण कन्हैया को सामने खड़ा पाया।
 
मदन मोहन भगवान ने आज फिर से स्वप्न मे दर्शन दिए और बोले,"यह क्या मैया, मुझे को मारेगी क्या?

*गोसाई की बात का बुरा मान कर रूठ गयी। खुद पेट में अन्न का एक दाना तक न डाला और मुझे दूध पीने का कह रही हो।*

मैंने तो आज तुम्हारे घर आकर दूध पी लिया अब तू भी अपना व्रत तोड़ कर के कुछ खा पी ले और देख दूध की प्रतीक्षा में व्याकुल रहता हूं, उसी से मुक्ति मिलती है। अपना नियम कभी मत तोड़ना।

गोसाईं भी अब तेरे को कुछ ना कहेंगे। दूध में पानी मिलाती हो, तो, क्या हुआ?वह तो जल्दी हज़म हो जाता है।अब उठो और भोजन करो। पंजिरी हड़बड़ाकर के उठी देखा बालक तो कुटिया में कहीं नहीं था।

सचमुच भेस बदल कर कृष्ण कन्हैया ही कुटिया में पधारे थे। पंजिरी का रोम-रोम हर्षोल्लास का सागर बन गया। झटपट दो टिक्कड़ बनाए और मदन मोहन को भोग लगाकर के साथ आनंदपूर्वक खाने लगी। उसकी आंखों से अश्रुधारा बह रही थी। 

थोड़ी देर में सवेरा हो गया पंजिरी ने देखा कि कृष्ण कन्हैया उसकी ओढ़नी ले गये हैं और अपना पीतांबर कुटिया में ही छोड़ गए हैं।

*इधर मंदिर के पट खुलते ही पुजारी ने मदन मोहनजी को देखा तो पाया की प्रभु फटी ओढ़नी ओडे़ आनंद के सागर में डूबे हैं। पुजारी समझ गये कि  प्रभु तुमने अवश्य फिर कोई लीला की है, लेकिन इसका रहस्य मेरी समझ में नहीं आ रहा है।*

लीलाउद्घाटन के लिए पंजिरी मंदिर के द्वार पर पहूंची। खड़ी होकर पुजारी जी से कह रही थी,"गुसाई महाराज देखो तो प्रभु की लीला और माया,पीतांबर मेरे घर छोड़ आये  है और मेरी फटी ओढ़नी ले आये।

*कल सवेरे आपने मुझे भगा दिया था ,लेकिन भूखा प्यासा मेरा कन्हैया दूध के लिये घर आ गया।"* 

पुजारी देवी के सामने बैठ गए। "भक्त और भगवान के बीच मेंने क्या कर डाला ,भक्ति बंधन को ठेस पहुंचा कर मैंने कितना बड़ा अपराध कर डाला देवी मुझे क्षमा कर दो "पंजिरी के चरणों में रो-रो कर कह रहे थे पुजारी।

लेकिन उनका भक्ति सागर था जो भक्त में भगवान के दर्शन पाकर निर्बाध बह चला था।पंजिरी भी क्या कम भावावेश मे थी ।आनंद भक्ति के सागर मे हिलोरे लेती हुई कह रही थी।

"गुसाई जी देखी तुमने बाल गोपाल की चतुराई अपना पीतांबर मेरी कुटिया मे जानबूझकर छोड मेरी फटी-चिथड़ी ओढ़नी उठा लाये।लो भक्तों को सम्मान देना तो की पुरानी इनकी पुरानी आदत है।"

मूर्ति में विराजमान कन्हैया धीरे-धीरे मुस्कुरा कर कह रहे थे अरे मैया तू क्या जाने कि तेरे प्रेम से भरी ओढ़नी ओढ़ने में जो सुख है वो पीतांबर में कहां!!

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Thumbs Up नरेंद्र मोदी के बारे में 25 अज्ञात और रोचक तथ्य
Posted by: Nirmal Jain - 02-28-2019, 08:45 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

नरेंद्र मोदी के बारे में 25 अज्ञात और रोचक तथ्य

1. नरेंद्र मोदी भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री है जो आजादी के बाद पैदा हुए हैं।

2. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नरेंद्र मोदी की कुंडली काफी हद तक बाल गंगाधर तिलक से मिलती है

3.1958 को 8 साल की उम्र में नरेंद्र मोदी ने दिवाली के दिन rss की शपथ ली थी।

4. मोदी बचपन में एक्टिंग और नाटकों में भाग लेते थे, मोदी NCC में भी शामिल थे।

5. नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेची है।

6. बचपन में मोदी पास के तालाब से मगरमच्छ पकड़कर घर ले आए थे, बाद में माँ के कहने पर वापिस छोड़ कर आए।

7. नरेंद्र मोदी की शादी 18 वर्ष की उम्र में ही कर दी गई थी. लेकिन शादी के 2 साल बाद ही उन्होनें घर छोड़कर सन्यासी बनने का फैसला किया। 

8. मोदी ने अमेरिका में मैनेजमेंट और पब्लिक रिलेशन से संबंधित कोर्स किया था।

9. मोदी कोई भी नया काम करने से पहले अपनी माँ का आशीर्वाद लेते हैं और स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श मानते हैं।

10. मोदी शाकाहारी है और सिगरेट, शराब को कभी हाथ नही लगाते।

11. जब मोदी 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे तब उनकी माँ ने कहा था कि बेटा कभी रिश्वत मत लेना।

12. गुजरात के 13 साल के शासन में मोदी ने एक भी छुट्टी नही ली।

13. नरेन्द्र मोदी जब अहमदाबाद संघ मुख्यालय में रहते थे तो वहां सारे छोटे काम करते जैसे साफ-सफाई, चाय बनाना, और बुर्जुग नेताओं के कपड़े धोना शामिल हैं।

14. RSS के प्रचारक दाढ़ी नहीं रखते, लेकिन मोदी दाढ़ी रखते थे।

15. 1975 में आपातकाल के दौरान RSS जैसी संस्थाओं पर प्रतिबंध लग गया था. उस समय मोदी सरदार का भेष बदलकर रहते थे।

16. नरेंद्र मोदी की शिक्षा: मोदी पोस्ट ग्रेजुएट हैं, उन्होने Political Science से M.A की हैं।

17. नरेंद्र मोदी की जाति ‘मोध घांची’ है।

18. नरेंद्र मोदी की एक साल की सैलरी 19 लाख रूपए हैं।

19. भारत के कई लोगो के विरोध के कारण 2004 से 2013 तक अमेरिका ने मोदी को वीजा नही दिया था, लेकिन PM बनने के बाद अमेरिका का खुद बुलावा आया था।

20. नरेन्द्र मोदी को नई तकनीकों का इस्तेमाल करने में अच्छा लगता हैं 2014 के लोकसभा इलेक्शन में सबसे पहले मोदी ने ही 3D तकनीक का प्रयोग कर भाषण दिया था।

21. मोदी ने कई साल हिमालय में सन्यासी बनकर तपस्या भी की है। किसी साधु के कहने पर वो राजनीति में आ गए।

22. नरेद्र मोदी स्विट्जरलैंड के फेमस ब्रांड मोवादो की घड़ी पहनते है। इस घड़ी की कीमत 39 हजार से 1 लाख रूपए तक है, एक बात ये भी है कि पीएम उल्टी घड़ी पहनते है क्योंकि वो इसे लकी मानते है।

24. नरेंद्र मोदी के कपड़े बिपिन और जीतेंद्र चौहान की दुकान पर सिले जाते है,  1989 के बाद से नरेंद्र मोदी के कपड़े यही सिलते आ रहे है। मोदी अपने सूट का फैब्रिक, कलर और डिजाइन खुद सेलेक्ट करते हैं।

25.नरेंद्र मोदी अपने पुराने कपड़ो की नीलामी करते है साथ ही साल में मीले 200 से 500 गिफ्ट की भी करोड़ो में नीलामी होती है जिसे वो नमामि गंगे प्रोजेक्ट को दान में देते है।

26.नरेंद्र मोदी ने 5 साल में भारत की इकोनॉमी को दुनिया की टॉप 5 इकोनॉमी में लाकर खड़ा कर दिया और अमेरिका से लेकर कोरिया,ईरान से लेकर अफगानिस्तान तक सबको भारत के समर्थन में ले लिया।

27.पिछले 5 साल से भारत दुनिया का सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वाला देश है जिस कारण पाकिस्तानी न्यूज़ चेनल इसे मोदी का जंगी जुनून भी कहते है।
हाल ही में भारत को न्यूक्लियर सबमरीन मिली ,स्वदेशी तेजस,धनुष,से लेकर स्वदेशी की लहर दौड़ पड़ी।
ओर भारत का डिफेंस बजट रशिया के बराबर ला दिया।

28.नरेन्द्र मोदी पर आजतक रिश्वत या घोटाले का आरोप नही है जिस कारण उनकी संपत्ति कम ओर प्रसिद्धि ज्यादा है।

29.पढ़ने के बाद शेयर जरूर करे ?‍?‍?‍??‍?‍?‍??‍?‍?‍?

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Tongue SOME IRONIES THAT - EXIST IN INDIA
Posted by: Priyaka Mishra - 02-27-2019, 05:33 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

*SOME IRONIES THAT*
             *EXIST IN INDIA :*






1.
Politicians *Divide* Us, 
          Terrorists *Unite* Us.
  





2. 
Everyone Is In Hurry ,
But 
*NO ONE* Reaches In Time






3. 
Priyanka Chopra Earned More Money Playing *Mary Kom*, 
Than The Mary Kom Earned In Her Entire Career. 






4. 
Most People Who Fight Over *Gita And Quran*, 
Have Probably Never Read Any Of Them.






5. 
We Rather Spend More On Our Daughter's *WEDDING* 
Than On Her *EDUCATION*






6. 
The *SHOES* That We Wear Are Sold In Air Conditioned Show Rooms,
The *VEGETABLES* That We Eat Are Sold On The Footpaths.






7. 
We Live In A Country Where Seeing A *POLICEMAN* Makes Us Nervous Rather Than Feeling Safe.






8. 
In IAS Exam, A Person Writes A Brilliant 1500 Words Essay About How Dowry Is A Social Evil And *CRACKS THE EXAM* By Impressing Everyone. 
One Year Later His Parents Demand  A Dowry In Crores, Because He Is An IAS Officer.






9. 
Indians Are Obsessed With Screen Guards On Their Smartphones Even Though Most Come With Scratch Proof Gorilla Glass But Never Bother Wearing A HELMET While Riding Bikes















      
One Of The Best Ever Lines :



                      
Try To Understand People Before Trusting Them
BECAUSE
We Are Living In Such A World,
Where Artificial Lemon Flavor Is Used For 
"WELCOME DRINK"
And Real Lemon Is Used In 
"FINGER BOWL"

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Thumbs Up छाछ, जानिए इसे पीने के फायदे और नुस्खे
Posted by: Vinay Goyal - 02-27-2019, 04:36 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

अत्यधिक तनाव कम कर दिमाग को ठंडा रखती है छाछ, जानिए इसे पीने के फायदे और नुस्खे
 
1 छाछ का सेवन भुने जीरे के साथ किया जाए, तो पाचन अच्छे से होता है और पेट की गर्मी व अन्य समस्याओं से बचा जा सकता है। यह तरलता बनाए रखने में भी मददगार है।
2 मोटापा अधिक होने पर छाछ को छौंककर सेंधा नमक डालकर पीने से फायदा होता है। उच्च रक्तचाप होने पर गिलोय का चूर्ण मट्ठे के साथ लेना चाहिए। वहीं सुबह-शाम मट्ठा या दही की पतली लस्सी पीने से स्मरण शक्ति तेज होती है।
3 बार-बार हिचकी आने की समस्या हो, तो छाछ में एक चम्मच सौंठ डालकर सेवन करना लाभदायक होगा। ऊल्टी आने या जी मचलाने पर छाछ में जायफल घिसकर इसके मिश्रण को पीने से लाभ मिलता है।
4 सौंदर्य समस्याओं के लिए भी छाछ बेहद फायदेमंद चीज है। छाछ में आटा मिलाकर बनाए गए लेप को लगाने से त्वचा की झुर्रियां कम होती हैं। इसके अलावा गुलाब की जड़ को छाछ में पीसकर चेहरे पर लगाने से मुहांसे खत्म हो जाते हैं।
5 अगर आप अत्यधिक तनाव से गुजर रहे हैं, तो नियमित छाछ का सेवन आपके लिए लाभदायक होगा। वहीं शरीर के साथ-साथ दिमाग की गर्मी को कम करने में भी छाछ का सेवन लाभप्रद है।
6 शरीर के किसी भाग में जल जाने पर तुरंत छाछ लगाने से लाभ होता है। खुजली की समस्या होने पर अमलतास के पत्ते छाछ में पीस लें और शरीर पर मलें। कुछ देर बाद स्नान करें। शरीर की खुजली नष्ट हो जाती है।
7 बाल झड़ने पर भी छाछ असरकारी है। इसके लिए बासी छाछ से सप्ताह में दो दिन बालों को धोना लाभप्रद होता है।

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Thumbs Up चमेली के फूल जहां खुशबू देते हैं, वहीं इन्हें कई बीमारियों में उपयोगी माना गया है।
Posted by: Vinay Goyal - 02-27-2019, 04:33 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

*चमेली के फूल जहां खुशबू देते हैं, वहीं इन्हें कई बीमारियों में उपयोगी माना गया है।*
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_आयुर्वेद के अनुसार चमेली स्वाद में कड़वी व कसैली, पचने में हल्की, तासीर में गर्म और कफ व पित्त नाशक होती है। जानते हैं इसके फायदों के बारे में।_

1. चमेली के पत्तों को मुंह में रखकर पान की तरह चबाने से मुंह के छाले, घाव व इस अंग से जुडे सभी प्रकार के रोगों में राहत मिलती है।

2. आंखों में दर्द होने पर चमेली के फूलों का लेप लगाएं, लाभ होगा।

3. चमेली के पत्तों को पीसकर पीने से पेट में कीड़े नष्ट हो जाते हैं।

4. चमेली के फूलों को पीसकर लेप बनाकर लगाने से दाद, खाज और खुजली जैसे त्वचा रोगों में आराम मिलता है।

5. बवासीर होने पर चमेली, बरगद और गिलोय के पत्तों को पीसकर सोंठ, सेंधा नमक और छाछ के साथ पीने से लाभ होता है। 

6. पुराना सिर दर्द होने पर चमेली के फूलों का लेप सिर पर लगाने से सिरदर्द में आराम मिलता है।

7. चेहरे पर नियमित रूप से चमेली के फूलों का रस लगाने से चमक बढ़ती है।

8. चमेली के फूलों की डंडी व मिश्री समान अनुपात में मिलाकर आंखों पर लगाने से थकान दूर होती है।

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Thumbs Up शक्तिवर्धक भोजन
Posted by: Vinay Goyal - 02-27-2019, 04:30 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

शक्तिवर्धक भोजन
?परिचय-
            किसी भी व्यक्ति को जब कोई रोग हो जाता है तो उसके कुछ दिनों के बाद वह कहता है कि मुझे बहुत कमजोरी सी लग रही है। लेकिन कोई स्वस्थ व्यक्ति भी अगर थोड़ी दूर पैदल चल लेता है या कोई भारी काम करता है तो वह भी बोलता है कि वह थक गया है। अब तो मुझे कमजोरी दूर करने वाली और ताकत बढ़ाने वाली दवा लेनी पड़ेगी। ये कुछ न होकर लोगों की एक दिमागी सोच बन गई है कि चिकित्सा में कोई ऐसी औषधि भी होनी चाहिए जिससे कि शरीर में ताकत बढ़ जाए। परन्तु ऐसी औषधि बस थोड़े समय तक ही अपना असर दिखाती है। यह नशे की तरह थोड़े समय के लिए ताकत को बढ़ाकर अपनी क्रिया को समाप्त कर देती है।
         
          ?  मनुष्य सिर्फ अपने खाने वाले भोजन के सहारे ही जिंदा रहता है। अगर उसी भोजन को सही तरीके से और पौष्टिकता के आधार पर किया जाए तो वह ही किसी भी व्यक्ति के लिए ताकत बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।
ताकत बढ़ाने वाले पदार्थ-  

?1. नींबू-
1 नींबू को 1 गिलास गर्म पानी में (बिना नमक या चीनी मिलाएं) निचोड़कर पीने से पूरे शरीर में एक नई ताकत सी पैदा हो जाती है। इससे आंखों की रोशनी तेज हो जाती है, दिमागी कमजोरी, सिर में दर्द रहना आदि रोग समाप्त हो जाते हैं। इसको पीने से किसी भी काम को करने से जल्दी थकान नहीं होती है।

6 मुनक्के, 6 बादाम, 40 ग्राम किशमिश और 6 पिस्तों को रात में करीब आधा लीटर पानी में डालकर किसी कांच के बर्तन में भीगने के लिए रख दें। सुबह इन सबको पीसकर और छानकर इसमें 1 चम्मच शहद और 1 नींबू को निचोड़कर खाली पेट पीने से दिमागी और शारीरिक थकान दूर हो जाती है। ये इन्द्रियों की ताकत बढ़ाने का भी एक बहुत ही नायाब नुस्खा है।
किसी कांच के गिलास में लगभग 3 चौथाई तक अजवाइन को भर दें। फिर इसमे नींबू का रस भरकर इसके मुंह पर कपड़ा डालकर धूप में रख दें। जब इसके अन्दर का नींबू का रस सूख जाए तो इसे दुबारा नींबू के रस से भर दें और धूप में ही पड़ा रहने दें। इस तरह से इसमें लगभग 7 बार नींबू का रस भरकर अजवाइन को सुखा लें। फिर इस सुखाई हुई अजवाइन को कांच की बोतल में भर दें। रोजाना चौथाई चम्मच इस अजवाइन की फंकी लेने से शरीर में ताकत बढ़ जाती है तथा यौन शक्ति में भी बढ़ोतरी होती है। इस अजवाइन का सेवन करने के दौरान दूध और घी का सेवन भी करते रहना चाहिए।
?2. मौसमी- मौसमी का रस दिमाग, जिगर और भोजन पचाने की क्रिया को ताकत देता है। इस रस को पीने से खाया हुआ भोजन शरीर में लगता है और शरीर में ताकत बढ़ती है। बुखार और काफी पुराने रोगों में मौसमी का रस पीने से रोगी को कमजोरी महसूस नहीं होती है। इसके द्वारा रोगी के शरीर से रोगों का जहरीला पदार्थ बाहर निकल जाता है। इसका रस कई दिनों तक पीते रहने से दस्त प्राकृतिक रूप में आने लगते हैं। कब्ज, सिरदर्द, काम करने में मन न लगना, कोई सा भी काम करने पर थक जाना, रात को नींद न आना आदि रोग दूर हो जाते हैं। इससे नई चुस्ती और फुर्ती आ जाती है।  
?3. सेब- सेब में `मैलिक एसिड होता है। यह खटाई आंतों, जिगर और दिमाग के लिए लाभकारी है। इसके अन्दर फॉस्फोरस होता है यानी कि जलन पैदा करने वाला पदार्थ जिसे खाने से पेट साफ रहता है और आमाशय मजबूत बनता है। सेब और सेब के रस में काफी मात्रा में खनिज पदार्थ होते हैं। सेब के 2 छोटे-छोटे टुकड़ों को लगभग आधा सेर पानी में डालकर रख दें। जब यह पानी ठंडा हो जाए तो इसमें सेब के टुकड़ों को मसलकर और छानकर उस पानी को पी लें। अगर इसमें स्वाद बढ़ाना हो तो चीनी की जगह मिश्री डालकर पी सकते हैं। यह सेब का बहुत ही पौष्टिक और स्वादिष्ट शर्बत होता है। यह खून में मिलकर दिल, दिमाग, जिगर और शरीर के हर भाग में चुस्ती-फुर्ती पैदा करता है। सेब के रस को पीने से दिल को ताकत मिलती है, आंखों की रोशनी तेज होती है। यह शरीर के अन्दर से खून के अन्दर के जहरीले पदार्थों को बाहर निकालकर व्यक्ति को हष्ट-पुष्ट बनाता है। जो लोग चाहते हैं कि वे हमेशा ताकतवर और सुन्दर बने रहें उनको रोजाना सेब का रस पीना चाहिए। खाली पेट सेब खाने से शरीर की गर्मी और खुश्की समाप्त हो जाती है। 
4. ?4. पपीता- पपीता अगर देखकर लिया जाए कि वह अच्छी तरह से पका हुआ है या नहीं तो ठीक है क्योंकि अच्छी तरह से पका हुआ पपीता ही सबसे ज्यादा गुणों वाला होता है। सुबह उठते ही खाली पेट पपीता खाना सबसे ज्यादा गुणकारी होता है। इसके बाद दोपहर का भोजन करने के बाद पपीता खाने से भोजन आसानी से पच जाता है। शाम को 5-6 बजे भी पपीते को नाश्ते के रूप में खाया जा सकता है। पपीते में मिलने वाला एन्जाइम कठोर मांस-तंतुओं और रोग के कीटाणुओं को समाप्त कर देता है। पपीता टी.बी. रोग के कीटाणुओं को बिल्कुल समाप्त कर देता है। पपीते को खाने से खून को बहाने वाली नसें कठोर नहीं होती हैं और रक्तसंचार सही तरीके से काम करता है। दिल के रोग में भी पपीता खाने से लाभ होता है। स्वस्थ जीवन जीने की राह में पपीता खाना बहुत ही लाभदायक है।  
?5. आम- रोजाना आम खाने से शरीर के अन्दर खून काफी मात्रा में बनता है। इससे जिन लोगों का शारीरिक वजन कम होता है वह बढ़ जाता है। आम खाने से पेशाब खुलकर आता है, शरीर में चुस्ती-फुर्ती पैदा होती है। आम का मुरब्बा खाना भी काफी लाभकारी होता है। शरीर में ताकत बढ़ाने के लिए रोजाना भोजन करने के बाद आम खाना लाभकारी होता है।
?6. अंगूर- कमजोर व्यक्तियों के लिए रोजाना ताजे अंगूरों का रस पीना काफी लाभकारी सिद्ध होता है। अंगूर शरीर में खून को बनाता है और उसे पतला भी करता है। इससे शरीर मोटा-ताजा हो जाता है। रोजाना दिन में 2 बार अंगूर का रस पीने से भोजन पचाने की क्रिया तेज हो जाती है, कब्ज का रोग समाप्त हो जाता है, पेट में गैस नही बनती। अगूंर का रस सिरदर्द, बेहोशी, चक्कर आना, छाती के रोग तथा टी.बी. के रोग में लाभकारी है। यह खून की खराबी को भी दूर करता है। अंगूर का सेवन करने से शरीर मे मौजूद जहर बाहर निकल जाता है। यह स्त्रियों के श्वेतप्रदर के रोग में भी काफी लाभकारी है। अंगूर खून में आयरन की मात्रा को बढ़ाता है।
?7. केला- भोजन करने के बाद केला खाने से शरीर में ताकत बढ़ती है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। केला वीर्य और शुक्राणुओं को बढ़ाने वाला है। यह आंखों के रोगों को दूर करता है। केला किसी तरह का फल नहीं है, इसे रोटी की जगह भी खाया सकता है। ताजा केला सबसे अच्छा है। एक समय में ज्यादा से ज्यादा 3 केले खाने चाहिए लेकिन थोड़ा सा घी लगाकर। सुबह दो केलों को खाकर ऊपर से दूध पीने से शरीर में ताकत बढ़ती है। इसी तरह से संभोग करने के बाद केला खाने से शक्ति बढ़ती है।
8. ?8. मुनक्का-
सर्दियों के मौसम में रोजाना मुनक्का खाने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
रात को सोने से पहले 20 मुनक्कों को गर्म पानी से धोकर पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उठते ही जिस पानी में मुनक्के भीगे हुए हो उस पानी को पीकर मुनक्कों को खा लें। इस तरह रोजाना मुनक्कों को खाने से शरीर की कमजोरी दूर हो जाती है। इससे शरीर में खून की मात्रा बढ़ जाती है और ताकत भी पैदा होती है। फेफड़ों को ताकत मिलती है।स्नेहा समुह
सर्दियों में 250 मिलीलीटर दूध में 20 मुनक्कों को डालकर उबाल लें। फिर इन मुनक्कों को खा लें और उस दूध को पी लें। सर्दियों के मौसम में रोजाना दूध और मुनक्का सेवन करने से बुखार के कारण आई हुई शारीरिक कमजोरी समाप्त हो जाती है। इससे पुराना बुखार भी उतर जाता है।
6 मुनक्के, 6 बादाम, 25 किशमिश और 2 अंजीर को रात में सोने से पहले एक कांच के बर्तन में इतना पानी डालकर भिगो लें कि ये सारे पानी को सोख लें। सुबह इन सब चीजों को खाने के बाद बचे हुए पानी को पीने से कमजोर व्यक्ति की कमजोरी दूर हो जाती है और वह ताकतवर बन जाता है।

?9.  आंवला-
आंवले का मुरब्बा रोजाना खाने से शरीर में ताकत पैदा होती है। यह गर्भवती स्त्रियों के लिए बहुत ही लाभकारी है। एक आंवला शरीर में एक अण्डे से ज्यादा ताकत बढ़ाता है। इसके सेवन से दिल में घबराहट होना, तिल्ली का रोग, ब्लडप्रेशर का रोग आदि दूर हो जाते हैं।
आंवला का सेवन करने से हर तरह के रोग दूर होते हैं। आंवला का सेवन करने से बूढ़ों में भी जवानों जैसी ताकत पैदा हो जाती है।
आंवला का नियमित सेवन करने से वीर्य की कमजोरी समाप्त हो जाती है।
1 चम्मच पिसे हुए आंवले को लगभग 2 चम्मच शहद में मिलाकर चाटने से और ऊपर से दूध पीने से स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है।
2 चम्मच पिसा हुआ आंवला, 1 चम्मच देशी घी और 3 चम्मच शहद को एकसाथ मिलाकर कुछ सप्ताह तक रोजाना खाने से बदसूरत व्यक्ति भी सुन्दर हो जाता है।
गर्मियों के मौसम में दिल घबराना, धूप में चक्कर आना आदि परेशानियों में आंवले का शर्बत पीने से लाभ होता है।
दिल की तेज धड़कन को सामान्य बनाने के लिए आंवले का मुरब्बा खाना उपयोगी होता है।
किसी भी व्यक्ति को रोजाना कम से कम 50 मिलीग्राम विटामिन `सी´ की जरूरत पड़ती है और आंवले में सबसे ज्यादा मात्रा में विटामिन `सी´ पाया जाता है। लगभग आधा लीटर आंवले के रस को रोजाना पीने से शरीर में विटामिन `सी´ की जरूरत पूरी हो जाती है।
गुणों की दृष्टि से एक आंवला लगभग 2 संतरों के बराबर होता है।
आंवला के सेवन से दांत और मसूढ़े स्वस्थ बनते हैं और शरीर में रोगों से लड़ने की ताकत पैदा होती है।
घर में सब्जी आदि बनाते समय आंवला को खटाई के रूप में डालने से उसका स्वाद बढ़ जाता है।
आंवले की चटनी बनाकर खानी चाहिए।
आंवले के रस में शहद को मिलाकर शर्बत की तरह पीएं।
आंवले का अचार या मुरब्बा बनाकर खाना लाभकारी होता है।
अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति भी रोजाना आंवले का सेवन करता रहे तो उसके शरीर की सारी शारीरिक क्रियाएं अच्छी होकर उसका स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है।
10. अनन्नास-
अनन्नास दिल की घबराहट को समाप्त कर देता है। यह बढ़ी हुई प्यास को शान्त कर देता है। अनन्नास शरीर को मजबूत बनाकर तरोताजगी पैदा करता है।
अनन्नास शरीर में कफ की मात्रा को बढ़ाता है लेकिन खांसी-जुकाम को नहीं होने देता।
सुबह खाली पेट अनन्नास खाने से भोजन पचाने की क्रिया तेज होती है।
अनन्नास का शर्बत पीने से पेट की गर्मी दूर हो जाती है, पेशाब काफी मात्रा में आता है। इसी कारण से डाक्टर पथरी होने पर अनन्नास का शर्बत पीने की राय देते हैं।
अनन्नास का सेवन करने से दिल और दिमाग को ताकत मिलती है।

?11. अमरूद-
100 ग्राम अमरूद में 300 मिलीग्राम से लेकर 450 मिलीग्राम विटासिन `सी´ पाया जाता है।
अमरूद का सेवन करने से दिल को ताकत मिलती है और शरीर में चुस्ती-फुर्ती पैदा होती है।
अमरूद बढ़ी हुई प्यास को कम करता है और दिमाग को तेज करता है।
12. खजूर:
रोजाना खजूर खाने से आमाशय और दिल को ताकत मिलती है।
रोजाना खजूर का सेवन करने से शरीर में खून की मात्रा बढ़ जाती है और शरीर में मोटापा भी बढ़ता है।
खजूर को खाने से व्यक्ति की संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है।
 
?13. टिंडा- टिंडा शरीर को ताकत देता है और दिमाग को तेज करता है।
?14. गाजर- आधा गिलास गाजर का रस और आधा गिलास दूध को एकसाथ मिलाकर उसमें स्वाद के मुताबिक शहद मिलाकर रोजाना पीने से शरीर में खून बढ़ता है और कमजोरी भी दूर हो जाती है।
?15. छुहारा- छुहारे में काफी ज्यादा मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है। छुआरे खाकर उसके ऊपर गर्म-गर्म दूध पीने से शरीर में कैल्शियम की कमी के कारण होने वाले रोग जैसे- हड्डियों का कमजोर होना, दांतों का हिलना आदि दूर हो जाते हैं और इससे व्यक्ति का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।
?16. बबूल-   बबूल एक जंगली और कांटे वाला पेड़ होता है। बबूल की गोंद को घी में भूनकर इसके लड्डू बनाकर गर्भवती स्त्री को रोजाना खिलाने से उसके शरीर में ताकत पैदा होती है।स्नेहा समुह
?17. तुलसी-
सुबह उठते ही तुलसी के 5 पत्ते लेकर पानी के साथ निगलने से याद्दाश्त तेज होती है और शारीरिक ताकत बढ़ती है।
रोजाना 8 बून्द पानी में तुलसी का रस मिलाकर पीने से शरीर की मांसपेशियां और हडि्डयां मजबूत बन जाती हैं।
तुलसी के बीजों को दूध में डालकर उबाल लें। फिर इसमें शक्कर मिलाकर पीने से शरीर में शक्ति बढ़ती है।
?18. शकरकंदी-
रोजाना शकरकंदी खाने से शरीर में खून की मात्रा बढ़ जाती है और शरीर मोटा-ताजा बनता है।
शकरकंदी का सेवन करने से यौनशक्ति बढ़ जाती है।
शकरकंदी को चीनी के साथ खाना ज्यादा उपयोगी होता है।
??19. शक्कर-2 चम्मच चीनी और 2 चम्मच घी में लगभग 10 काली मिर्च के दाने मिलाकर रोजाना सुबह खाली पेट चाटने से दिमाग तेज होता है और कमजोरी के कारण होने वाला सिर का दर्द भी ठीक हो जाता है।
?20. नमक-  अगर कोई व्यक्ति किसी लंबे रोग के ठीक होने के बाद शरीर में कमजोरी महसूस करे तो उसे गर्म पानी में नमक मिलाकर नहलाने से उसकी कमजोरी दूर हो जाती है।
?21. खसखस -
खसखस की खीर बनाकर सेवन करने से शरीर में ताकत बढ़ जाती है।
2 चम्मच खसखस को रात के समय पानी में भिगोकर रख दें। फिर सुबह उठने पर उसे पीसकर उसमें स्वाद के मुताबिक मिश्री मिलाकर पानी में घोलकर लस्सी बनाकर पीने से गर्मी के मौसम में दिमाग ताजा रहता है और गर्मी भी कम लगती है।
खसखस का शर्बत पीना भी काफी लाभदायक होता है।
?22. सहजन- सहजन के फूलों की सब्जी का नियमित सेवन करने से शरीर में ताकत बढ़ती है।
?23. हींग- भुनी हुई हींग, कालीमिर्च, पीपल और सोंठ को बराबर मात्रा में मिलाकर पीसकर रोजाना चौथाई चम्मच की गर्म पानी से फंकी लेने से शरीर में ताकत बढ़ जाती है।
?24. पापड़-  किसी व्यक्ति के किसी खतरनाक रोग से उठने के कारण उसकी भोजन पचाने की क्रिया कमजोर हो जाती है। उस व्यक्ति को भोजन में पापड़ खिलाने से भोजन जल्दी पच जाता है और शरीर में खून ज्यादा मात्रा में बनता है।
?25. दूध-
लगभग आधा लीटर दूध में 250 मिलीलीटर गाजर को घिसकर उबालने से और सेवन करने से दूध जल्दी हजम हो जाता है, दस्त साफ आते हैं तथा दूध में आयरन (लोहे) की मात्रा बढ़ जाती है।
1 गिलास दूध में 1 चम्मच देशी घी और लगभग 3 चम्मच शहद मिलाकर रोजाना पीने से शरीर में ताकत, वीर्य और खूबसूरती बढ़ जाती है। इसका नियमित सेवन करने से व्यक्ति को जल्दी से बुढ़ापा भी नहीं आता।
1 गिलास दूध के अन्दर लगभग 15 बीज निकाले हुए मुनक्के डालकर उबाल लें। फिर इस दूध को हल्का सा ठंडा होने पर इसमें 1 चम्मच देशी घी ओर 3 चम्मच शहद डालकर पीने से शरीर का वजन बढ़ जाता है।
तिल और गुड़ को बराबर मात्रा में मिलाकर लड्डू बना लें। इस 1 लड्डू को रोजाना सुबह के समय खाकर दूध पीने से शरीर को ताकत मिलती है तथा दिमागी कमजोरी तथा तनाव समाप्त हो जाते हैं। इससे ज्यादा भारी शारीरिक काम करने पर व्यक्ति की सांस भी नही फूलती है। तिल व्यक्ति पर जल्दी बुढ़ापा आने से रोकता है।
?26. बेल-  पके हुए बेल के गूदे को सुखाकर और पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को एक चम्मच रोजाना फंकी के रूप में गर्म दूध के साथ लेने से सिर्फ 1-2 महीनों में ही शरीर और दिमाग चुस्त-दुरूस्त बन जाता है।स्नेहा समुह
?27. बादाम-  रात को सोने से पहले 12 बादाम की गिरियों को पानी में भिगो दें। सुबह इसे पीसकर किसी पीतल की कढ़ाई में घी के साथ सेक लें। सिकते समय इसके लाल होने से पहले ही इसके अन्दर 125 मिलीलीटर दूध डाल दे और इसे गर्म-गर्म ही पी लें। इससे शरीर की कमजोरी दूर होकर शरीर मजबूत बन जाता है।
?28. तिल-
तिल और गुड़ को बराबर मात्रा में मिलाकर लड्डू बना लें। इस 1 लड्डू रोजाना सुबह के समय खाकर दूध पीने से शरीर को ताकत मिलती है तथा दिमागी कमजोरी और तनाव समाप्त हो जाते हैं। इससे ज्यादा भारी शारीरिक काम करने पर व्यक्ति की सांस भी नहीं फूलती है। तिल व्यक्ति पर जल्दी बुढ़ापा आने से रोकता है।
 
?भारतीयों में एक त्यौहार आता है संक्राति जिसमें ज्यादातर तिल से बनी हुई चीजें इस्तेमाल की जाती हैं। तिल की चीजें और शरीर पर तिल के तेल की मालिश करने से शरीर की ताकत बढ़ जाती है।
है।
??29. अखरोट- अखरोट को खाने से दिमाग तेज होता है। 8 अखरोटों की गिरी, 4 बादामों की गिरी और 10 मुनक्के रोजाना खाकर उसके ऊपर दूध पीने से शरीर में ताकत बढ़ जाती है।
?30. गन्ना-  गन्ना भोजन को जल्दी हजम कराता है, कब्ज के रोग को ठीक करता है, शरीर को मोटा करता है, इसको खाने से पेट की गर्मी और दिल की जलन समाप्त हो जाती है।
?31. अजवाइन-  अजवाइन, इलायची, कालीमिर्च और सोंठ को बराबर मात्रा में मिलाकर पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की आधा चम्मच सुबह और शाम 2 बार पानी के साथ फंकी लेने से शरीर में ताकत पैदा हो जाती है।
?32. शहद- 
शहद के अंदर विटामिन ए और बी काफी मात्रा में पाये जाते हैं। जिनसे आंखों की रोशनी तेज होती है और शरीर में खून भी ज्यादा बनता है।
शहद के अंदर खून बनाने वाले तत्व होते हैं। शहद भोजन पचाने वाले अंगों में गैस बनने से रोकता है। यह भूख न लगने वाले रोगों को दूर करके भूख को बढ़ाता है।
बच्चों को रोजाना 3 बार शहद चटाने से वे ताकतवर औऱ चुस्त-दुरुस्त बन जाते हैं। इससे बच्चों का स्नायविक संस्थान काफी मजबूत हो जाता है।
गर्म पानी में शहद और नींबू मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से सारे दिन शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी रहती है।
लंबे समय तक शारीरिक रोग रहने के कारण शरीर में आई हुई कमजोरी को दूर करने के लिए दोपहर का भोजन करने के बाद 1 चम्मच शहद पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है।
?33. मेथी-  2 चम्मच दाना मेथी को 1 गिलास पानी में लगभग 5 घंटे तक भिगोने के लिए रख दें। फिर इसको आग पर रखकर इतनी देर तक उबालें कि पानी सिर्फ चौथाई हिस्सा बाकी रह जाए। इसके बाद इसको छानकर इसमें 2 चम्मच शहद मिलाकर रोजाना 1 बार पीने से शरीर में ताकत बढ़ती है।
?34. मक्का-
जिस मौसम में मक्के की खेती होती है उस मौसम में मक्के का सिरा और भुट्टा खाने से आमाशय मजबूत बनता है। यह शरीर में खून को भी बढ़ाता है।
मक्के के तेल की मालिश करने से शरीर में ताकत बढ़ती है। तेल बनाने की विधि- ताजी दूधिया मक्का के दानों को पीसकर किसी कांच की शीशी में भरकर शीशी को खोलकर धूप में रखें। दूध सूखकर उड़ जाएगा और तेल शीशी में रह जाएगा। इसे छानकर तेल को शीशी में भर लें और मालिश करें। कमजोर बच्चों के पैरों पर मालिश करने से बच्चा जल्दी चलने लगता है। एक चम्मच तेल शर्बत में मिलाकर पीने से शरीर में ताकत बढ़ती है।
?35. हरड़:
हरड़ आमाशय को मजबूत बनाती है और बुद्धि को तेज करती है। इसके सेवन से याद्दाश्त तेज होती है। यह बुद्धि पर पड़ी हुई परत को हटाकर ज्ञान को बढ़ाती है। हरड़ को किसी बेहोश व्यक्ति को सुंघाने से उसकी बेहोशी दूर हो जाती है।
छोटी हरड़ को घी में मिलाकर सेंककर पीस लेना चाहिए। फिर इसके एक चम्मच चूर्ण में थोड़ा सा घी मिलाकर भोजन करते समय खाएं। इसे ऐसे ही सुबह और शाम दोनों समय भोजन करते समय सेवन करने से शरीर में ताकत बढ़ती है। इस चूर्ण का इस्तेमाल कम से कम 1 महीने तक करने से लाभ होता है।स्नेहा समुह
?36. असगंध-   असगंध को अच्छी तरह से पीसकर उसमें बराबर मात्रा में पिसी हुई मिश्री मिलाकर रोजाना रात को 2 चम्मच की मात्रा में गर्म दूध के साथ फंकी लेते रहने से शरीर में बल और वीर्य दोनों की बढ़ोत्तरी होती है।
?37. टमाटर-
सुबह नाश्ता करते समय एक गिलास टमाटर के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर पीने से चेहरा बिल्कुल टमाटर की तरह लाल हो जाता है।
टमाटर शरीर में जिगर और फेफड़ों को ताकत देता है और याद्दाश्त को तेज करता है।
टमाटर का सेवन करने से हाई ब्लडप्रेशर कम हो जाता है।
टमाटर का रस दस्तों को साफ तरह से लाकर पेट को ठीक करता है तथा मोटापे को बढ़ने से रोकता है।
टमाटर का सेवन शरीर में से खून की कमी को दूर करके थकावट और कमजोरी को समाप्त कर देता है और चेहरे पर रौनक पैदा करता है।
टमाटर में तांबे के गुण ज्यादा मात्रा में होते हैं जो खून में मौजूद लाल कणों को बढ़ाते हैं।
टमाटर भूख को तेज करता है और शरीर में ताकत पैदा करता है।
1 बड़ा ताजा लाल टमाटर रोजाना खाने से व्यक्ति के बहुत से रोग दूर हो जाते हैं।
टमाटर में लोहे की मात्रा दूध से दोगुनी होती है।
?38. चुकन्दर-
चुकन्दर का सेवन करने से स्त्रियों के स्तनों में दूध की बढ़ोत्तरी होती है।
चुकन्दर खाने से जोड़ों का दर्द नष्ट हो जाता है।
चुकन्दर को रोजाना सेवन करने से जिगर मजबूत बनता है और दिमाग तरोताजा रहता है।
 
?39. आलू-बढ़ती हुई उम्र के लोगों के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी होता है। आलुओं को खाने से बूढ़े लोगों के शरीर में प्रोटीन की कमी पूरी हो जाती है। आलू के अन्दर मुर्गी के चूजों की ही तरह प्रोटीन होती है।
?40. प्याज-
2 चम्मच प्याज के रस को 2 चम्मच शहद में मिलाकर चाटने से लाभ होता है।
?2 चम्मच प्याज के रस में थोड़ा सा गुड़ मिलाकर रोजाना 1 बार बच्चों को पिलाने से लाभ होता है।
?41. चने-
लगभग 250 ग्राम चनों को रात में सोते समय 1 लीटर पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इनको उबालने के लिए रख दें। जब उबलने पर इनका पानी चौथाई हिस्सा बाकी रह जाए तो इसको उतारकर ठंडा करके पीने से शरीर में ताकत बढ़ जाती है।
?हरे ताजे चने खाने से शरीर में ताकत की वृद्धि होती है।
?42. उड़द-
उड़द खाने में भारी होते हैं। उड़द सबसे ज्यादा गुणकारी भी होती है। उड़द को किसी भी रूप में सेवन करने से शरीर में ताकत बढ़ती है।
?रात को सोते समय लगभग 30 ग्राम उड़द की दाल को पानी में भिगों दें। फिर सुबह उठकर इस दाल को पीसकर इसमें दूध और मिश्री मिलाकर पीने से दिल, दिमाग और वीर्य की ताकत बढ़ती है।
?जिन लोगों की पाचनशक्ति तेज होती है, उन्हें उड़द का सेवन करना चाहिए।
?छिलके वाली उड़द की दाल को खाने से शरीर में मांस की बढ़ोत्तरी होती है।
?उड़द की दाल को भिगोकर उसे पीसकर उसमें 1 चम्मच देशी घी, आधा चम्मच शहद मिलाकर चाटे। इसके ऊपर से मिश्री मिला हुआ दूध लगातार सेवन करने से व्यक्ति काफी ताकतवर बन जाता है।
?43. मूंग:
मूंग के लड्डू खाने से ताकत बढ जाती है।
काफी समय तक भयंकर रोग से घिरे रहने के बाद ठीक होने पर शरीर में कमजोरी आने पर रोजाना मूंग की दाल खाने से कमजोरी दूर होकर शरीर में ताकत बढ़ जाती है।
कमजोर रोगियों को जिन्हें भोजन में अन्न देना मना हो, उनको साबुत मूंग पानी में उबालकर फिर पानी को छानकर और थोड़ी-थोड़ी देर बाद उस पानी को पीना चाहिए। यह स्वादिष्ट, जल्दी पचने वाला अन्न का रस है जो शरीर को ताकत भी देता है।

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Thumbs Up नमो का हवाई हमला
Posted by: Rohit Shukta - 02-26-2019, 02:54 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

   
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नोट बंदी रात में, जी एस टी रात में सर्जिकल स्ट्राइक रात में और एयर स्ट्राइक फिर रात में

मतलब चोकीदार जाग रहा है.

   

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पाक को डरने की जरूरत नही ये तो उन आतंकियों पर हमला हो रहा है जिनका पता पाकिस्तान को नही है।पाकिस्तान तो हमारा पड़ोसी देश है।
Big Grin Big Grin Big Grin

   

ये जो पाकिस्तान पर हवाई हमला देख रहे हैं ना आप, इसका बटन आपने ही 2014 में दबाया था।

मोदी है तो मुमकिन है!!
#विश्वास_है

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त्रेतायुग- श्रीराम ने केवट के पाँव धोये
द्वापरयुग- श्रीकृष्ण ने सुदामा के पाँव धोये

कलयुग- नमो ने सफाई कर्मियों के पांव धोये

Smile Smile Smile
   

आज शाम सभी अपने अपने घर दीपावली मनाएँ। भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम के प्रकटीकरण का उत्साह हर हिंदुस्तानी में दिखना चाहिए। आज सेना के जवानों के दिलों को ठंडक मिली होगी।

हम भी घर घर दीप जलाकर सेना के सम्मान में आज की शाम को प्रकाश से भर देंगे।

Smile Smile Smile Smile Smile Smile

   

   

हित-वचन नहीं तूने माना, 
मैत्री का मूल्य न पहचाना, 
तो ले, मैं भी अब जाता हूँ, 
अन्तिम संकल्प सुनाता हूँ। 

याचना नहीं, अब रण होगा, 
जीवन-जय या कि मरण होगा। 
फण शेषनाग का डोलेगा, 
विकराल काल मुँह खोलेगा। 

दुर्योधन! रण ऐसा होगा। 
फिर कभी नहीं जैसा होगा। 

~ रामधारी सिंह 'दिनकर'

   

   
कहाँ है वो चमचे ? जो पूछ रहे थे कि टमाटर ? और पानी से लडाई लड़नी थी तो
लड़ाकू विमान क्यों खरीदे ? सामने तो आओ

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Posted by: Justinaanore - 02-25-2019, 02:48 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

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Страна: Россия Год выхода: 2018 Жанр кино: военный, драма Режиссер: Алексей Сидоров Роли сыграли: Александр Петров, Виктор Добронравов, Ирина Старшенбаум, Винценц Кифер, Петр Скворцов, Семен Трескунов, Артем Быстров, Микаэль Джанибекян, Антон Богданов, Софья Синицына. Бюджет: 600 000 000 руб. Танковые баталии во время Второй Мировой войны были обыкновенным событием на полях сражений. Эта пара борется за главенство еще с 1941 года Смотреть Т-34 онлайн бесплатно в хорошем качестве на нашем кинопортале . Фильмы и сериалы поддерживают просмотр на телефоне, айфоне, андроид и планшете. Смотреть онлайн Т-34 (2018) в hd 1080. Смотреть онлайн Трейлер в HD.
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Пробег танков А-34 по маршруту Харьков - Москва - Харьков в ходе войсковых испытаний. Танк А-34. 1-й опытный образец Танк Т-34 передан в дар Мемориальному комплексу "Музей истории танка т-34" Московским Физико-Техническим Институтом, август 2001г. Я застыл, как забытый бой. Пламенеют мои бока.
Очередной шлак снимут по трейлеру спи танк с села Кукуево пару зеков, при этом пришили героев СССР (судя по медалям) и разбомбили стоящих в поле пантер (что по факту уже не реально, так как пантера не крепость а танк была и работала на ходу) и убило это всё снятие фильма в стиле 300 спартанцев Вам смешно, б А у нас все крупные предприятия работают на Москву. Налог на прибыль делится на налог в федеральный бюджет и на налог в местный бюджет. Только местный - это тот, где организация зарегистрирована. У наших предприятий все ИНН - московские и питерские. Выкупили все. Одно предприятие держало оборону, пока и его не забрали. В Москве вон, смотрю, парки бл строят, пятиэтажки сносят.
Московская обл., Дмитровское направление, д. Шолохово, д. 89а, Единственный в мире музейный комплекс "История танка Т34" посвящен созданию, фронтовой биографии и бессмертной славе боевой машинылегендарной "Тридцатьчетверки", которая по итогам ХХ столетия была признана шедевром мирового танкостроения. Экспозиция музея знакомит с Музейный комплекс "История танка Т-34". отзывы (29) даты статьи (6) фотоальбомы (3) объединения (1) карта написать отзыв. Рубрика: Музеи Подмосковья и областей. События: Афиша. Период: День защитника Отечества 2019. телефоны: (495) 577-71-94, (495) 577-74-01 прочитать отзывы (28), все (41). РЕКОМЕНДАЦИИ. Си М Yowka Аленка SMoroz.
Т-34 (2018) скачать торрент. Название: Т-34 Жанр: военная драма Режиссер: Алексей Сидоров В ролях: Александр Петров, Ирина Старшенбаум, Виктор Добронравов, Семен Трескунов, Петр Скворцов, Артем Быстров,Антон Богданов, Софья Синицына, Винценц Кифер, Микаэль Джанибекян Производство: Россия. Дата выхода: 7 мая 2018 года. Описание: 1941-й год. Вчерашний курсант Ивушкин вступает в неравный бой против танкового аса Ягера.
Русский трейлер к фильму Пышка с Дженнифер Энистон. Трейлеры. 0 305. Под Сильвер-Лейк - рецензия на один из самых неоднозначных фильмов года 23 мая 2017 года в рамках 70-го Каннского кинофестиваля продюсеры Рубен Дишдишян, Леонард Блаватник и Юлия Иванова впервые представили широкой публике фильм Т-34 — военно-приключенческий экшн о противостоянии двух танковых асов - немецкого гауптмана Ягера и младшего лейтенанта Ивушкина, совершившего дерзкий побег из немецкого плена На июнь также запланированы съемки в Москве и области. Картина Т-34 выйдет в российский прокат в 2018 году.
Создано:12:49. Просмотров: 7062 Т-34 создан в конце 1930-х годов, находился в вооруженных силах СССРРоссии с июня 1940 г. по сентябрь 1997 г. Он стал самым массовым танком в мире, состоял на вооружении в 46 государствах и успешно применялся во всех часовых поясах и на всех широтахот Заполярья до Южной Африки. В 1942 году за создание Т-34нового типа среднего танка Сталинская премия первой степени присуждена Михаилу Кошкину (посмертно), Александру Морозову и Николаю Кучеренко Танк Т-34 передан в дар Мемориальному комплексу "Музей истории танка т-34" Московским Физико-Техническим Институтом, август 2001г. Я застыл, как забытый бой.


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Star सशक्त महिला सम्मान में वेबसाइट द्वारा गिफ्ट वाउचर प्रदान किए गए।
Posted by: admin - 02-24-2019, 08:18 PM - Forum: Gift Voucher - No Replies

सशक्त महिला सम्मान में वेबसाइट द्वारा गिफ्ट वाउचर प्रदान किए गए।

नर्मदा प्रखर की प्रथम  वर्षगांठ के अवसर पर  आयोजित नार्मदीय सशक्त महिला सम्मान में वेबसाइट रेकी एंड एस्ट्रोलाॅजी प्रिडिक्शंस द्वारा रू. 1000 के गिफ्ट वाउचर प्रदान किए गए। समाज में उल्लेखनीय योगदान देने वाली समस्त महिलाओं को नमन और हार्दिक बधाई।

1.   श्रीमती अंजलि पारे (सिविल जज), जबलपुर.
2.   श्रीमती संस्कृति पगारे, देवास शहर स्वच्छता अभियान की ब्राण्ड एम्बेसेडर.
3.   श्रीमती मृदुला बिल्लौरे, डीन, ग्वालियर.
4.   श्रीमती आरती शर्मा, मंडी डायरेक्टर, महू.
5.   श्रीमती स्वाति वशिष्ठ, (नृत्य विधा में उपलब्धियां)
6.   श्रीमती दर्शना मोयदे (नायब तहसीलदार)
7.   सुश्री रूचिका शर्मा (महिला पुलिस आरक्षक)
8.   श्रीमती सरोज बिल्लौरे (दलितों के लिये समाज सेवा का कार्य)
9.   श्रीमती वन्दिता बिल्लौरे (भाभा अनुसन्धान केंद्र में कार्यरत)
10. श्रीमती साधना शर्मा (भागवत कथा वाचन, व्यास विदुषी अलंकरण से सम्मानित) योगी आदित्यनाथ जी के साथ भागवत कथा वाचन किया है.
11. श्रीमती गरिमा शर्मा 
12. श्रीमती मनीषा बजाज (महेश्वर टीम)
13. श्रीमती अनुषा शर्मा (मांडव महोत्सव में प्रस्तुतियाँ)
14. श्रीमती प्रज्ञा गीते (तहसीलदार)
15. श्रीमती करुणा पारे
16. श्रीमती ममता सुशील गीते
17. श्रीमती प्रिया शर्मा
18. श्रीमती निधि शर्मा



कार्यकृम के मुख्य अतिथि श्री पी सी शर्मा जी (केबिनेट मंत्री म.प्र.)
विशेष अतिथि श्री सुभाष महोदय जी (महासभा अध्यक्ष) 
श्री योगेश महाराज जी (बालीपुर आश्रम)
अतिथि श्री विश्वदीप मोयदे (युवा महासभा अध्यक्ष)
अतिथि श्रीमती सुनीता शकरगाये (महिला महासभा अध्यक्ष)
अतिथि श्रीमति अनिता राजवैद्य (महिला महासभा उपाध्यक्ष)
अतिथि श्रीमती मोहिनी शर्मा (महिला अध्यक्ष इंदौर)
अतिथि श्री आलोक बिल्लोरे (नर्मदा भवन ट्रस्ट अध्यक्ष)
अतिथि श्री जे पी शर्मा (नार्मदीय पारमार्थिक ट्रस्ट अध्यक्ष)

कार्यकृम अध्यक्ष श्री शैलेन्द्र पूरे (अध्यक्ष इंदौर)

कार्यक्रम दिनांक 24 फरबरी 2019।
समय दोपहर 12 बजे से 5 बजे तक।
स्थान :- नार्मदीय मांगलिक भवन द्वारकापुरी इंदौर।

इस कार्यक्रम में नार्मदीय संस्कार प्रखर किताब व एक सीडी का विमोचन किया गया।


कार्यक्रम संयोजक
नर्मदा प्रखर परिवार

   
   
   
   
   

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Star ज्योतिष सीखें, समाधान के लिये संपर्क करें
Posted by: admin - 02-15-2019, 05:54 PM - Forum: Post Advertisement - No Replies

पण्डित गिरीश राजौरिया, भिंड ज़िला के एक जानकार और ज्ञानी ज्योतिषी।

   

शोध लेख:
   

   

   



कुंडली में लग्न से आप व्यक्ति की सेहत का पता लगा सकते है? 
कुंडली में ग्रहों के बीच सम्बन्ध कैसे देखें?
ज्योतिष सीखें - पहला भाव (लग्न) (Ascendant)
प्रेम सम्बन्ध और ज्योतिष
कुंडली में त्रिकोण भावो से फलित कैसे करते है?

और बहुत से विषयों पर चर्चा या समाधान के लिये संपर्क करें!

श्री गिरीश रा[b]जौरिया जी [/b]
Mob.7509930140

   


ग्रहों की निगेटिव उर्जा का प्रभाव और निवारण: 

ज्योतिष अर्थात ज्योति + इश अर्थात इश की ज्योति अर्थात इश के नेत्र जिनसे इश इस श्रृष्टि का संचार व नियंत्रण करते है। ये आज का अध्युनिक विज्ञानं भी मानता है के हर ग्रह की हर जीव की हर प्राणी की हर अणु की  अपनी एक निश्चित नकारात्मक व सकारात्मक उर्जा होती है। अगर हम उस उर्जा का सही संतुलन अपने जीवन में बना ले तो वही ईश्वर की प्राप्ति का सच्चा साधन है। यहाँ हम चर्चा करेंगे ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव की और उससे कैसे दूर कर के हम अपने जीवन को सफल व सुफल कर सकते है। ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार संक्षिप्त में ग्रह दोष से उत्पन्न रोग और उसके निवारण तथा किस ग्रह के क्या नकारात्मक प्रभाव है और साथ ही उक्त ग्रहदोष से मुक्ति हेतु अचूक उपाय। 

1. सूर्य:   सूर्य पिता, आत्मा समाज में मान, सम्मान, यश, कीर्ति, प्रसिद्धि, प्रतिष्ठा का करक होता है | इसकी राशि है सिंह | कुंडली में सूर्य के अशुभ होने पर पेट, आँख, हृदय का रोग हो सकता है साथ ही सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न होती है। इसके लक्षण यह है कि मुँह में बार-बार बलगम इकट्ठा हो जाता है, सामाजिक हानि, अपयश, मनं का दुखी या असंतुस्ट होना, पिता से विवाद या वैचारिक मतभेद सूर्य के पीड़ित होने के सूचक है |
                    उपाय:     ऐसे में भगवान राम की आराधना करें। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करे, सूर्य को आर्घ्य दे, गायत्री मंत्र का जाप करें। ताँबा, गेहूँ एवं गुड का दान करें। प्रत्येक कार्य का प्रारंभ मीठा खाकर करें। ताबें के एक टुकड़े को काटकर उसके दो भाग करें। एक को पानी में बहा दें तथा दूसरे को जीवन भर साथ रखें। ॐ रं रवये नमः या ॐ घृणी सूर्याय नमः 108 बार (1 माला) जाप करें। 

2. चंद्र:    चन्द्रमा माँ का सूचक है और मन का करक है  शास्त्र कहता है की "चंद्रमा मनसो जात:"  इसकी कर्क राशि है  कुंडली में चंद्र अशुभ होने पर। माता को किसी भी प्रकार का कष्ट या स्वास्थ्य को खतरा होता है, दूध देने वाले पशु की मृत्यु हो जाती है। स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है। घर में पानी की कमी आ जाती है या नलकूप, कुएँ आदि सूख जाते हैं मानसिक तनाव,मन में घबराहट,तरह तरह की शंका मन में आती है और मन में अनिश्चित भय व शंका रहती है और सर्दी बनी रहती है। व्यक्ति के मन में आत्महत्या करने के विचार बार-बार आते रहते हैं।
                उपाय:      सोमवार का व्रत करना, माता की सेवा करना, शिव की आराधना करना, मोती धारण करना, दो मोती या दो चाँदी का टुकड़ा लेकर एक टुकड़ा पानी में बहा दें तथा दूसरे को अपने पास रखें। कुंडली के छठवें भाव में चंद्र हो तो दूध या पानी का दान करना मना है। यदि चंद्र बारहवाँ हो तो धर्मात्मा या साधु को भोजन न कराएँ और ना ही दूध पिलाएँ। सोमवार को सफ़ेद वास्तु जैसे दही,चीनी, चावल,सफ़ेद वस्त्र, १ जोड़ा जनेऊ,दक्षिणा के साथ दान करना और ॐ सोम सोमाय नमः का १०८ बार नित्य जाप करना श्रेयस्कर होता है। 

3. मंगल:       मंगल सेना पति होता है,भाई का भी द्योतक और रक्त का भी करक माना गया है | इसकी मेष और वृश्चिक राशि है |कुंडली में मंगल के अशुभ होने पर भाई, पटीदारो से विवाद, रक्त सम्बन्धी समस्या, नेत्र रोग, उच्च रक्तचाप, क्रोधित होना, उत्तेजित होना, वात रोग और गठिया हो जाता है। रक्त की कमी या खराबी वाला रोग हो जाता। व्यक्ति क्रोधी स्वभाव का हो जाता है। मान्यता यह भी है कि बच्चे जन्म होकर मर जाते हैं। 
                                   उपाय:          ताँबा, गेहूँ एवं गुड,लाल कपडा,माचिस का दान करें। तंदूर की मीठी रोटी दान करें। बहते पानी में रेवड़ी व बताशा बहाएँ, मसूर की दाल दान में दें। हनुमद आराधना करना,हनुमान जी को चोला अर्पित करना,हनुमान मंदिर में ध्वजा दान करना, बंदरो को चने खिलाना,हनुमान चालीसा,बजरंग बाण,हनुमानाष्टक,सुंदरकांड का पाठ और ॐ अं अंगारकाय नमः का 108 बार नित्य जाप करना श्रेयस्कर होता है। 
4. बुध:         बुध व्यापार व स्वास्थ्य का करक माना गया है। यह मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है | बुध वाक् कला का भी द्योतक है। विद्या और बुद्धि का सूचक है। कुंडली में बुध की अशुभता पर दाँत कमजोर हो जाते हैं। सूँघने की शक्ति कम हो जाती है। गुप्त रोग हो सकता है। व्यक्ति वाक् क्षमता भी जाती रहती है। नौकरी और व्यवसाय में धोखा और नुक्सान हो सकता है।
            उपाय:           भगवान गणेश व माँ दुर्गा की आराधना करें। गौ सेवा करें। काले कुत्ते को इमरती देना लाभकारी होता है। नाक छिदवाएँ। ताबें के प्लेट में छेद करके बहते पानी में बहाएँ। अपने भोजन में से एक हिस्सा गाय को, एक हिस्सा कुत्तों को और एक हिस्सा कौवे को दें, या अपने हाथ से गाय को हरा चारा, हरा साग खिलाये। उड़दकी दाल का सेवन करे व दान करें। बालिकाओं को भोजन कराएँ। किन्नेरो को हरी साडी, सुहाग सामग्री दान देना भी बहुत चमत्कारी है। ॐ बुं बुद्धाय नमः का 108 बार नित्य जाप करना श्रेयस्कर होता है आथवा गणेशअथर्वशीर्ष का पाठ करें। पन्ना धारण करे या हरे वस्त्र धारण करे यदि संभव न हो तो हरा रुमाल साथ रक्खे।
5. गुरु:        वृहस्पति की भी दो राशि है धनु और मीन कुंडली में गुरु के अशुभ प्रभाव में आने पर सिर के बाल झड़ने लगते हैं। परिवार में बिना बात तनाव, कलह - क्लेश का माहोल होता है। सोना खो जाता या चोरी हो जाता है। आर्थिक नुक्सान या धन का अचानक व्यय,खर्च सम्हलता नहीं, शिक्षा में बाधा आती है। अपयश झेलना पड़ता है। वाणी पर सयम नहीं रहता।
           उपाय:        ब्रह्मण का यथोचित सामान करे। माथे या नाभी पर केसर का तिलक लगाएँ। कलाई में पीला रेशमी धागा बांधें संभव हो तो पुखराज धारण करे अन्यथा पीले वस्त्र या हल्दी की कड़ी गांड साथ रक्खें। कोई भी अच्छा कार्य करने के पूर्व अपना नाक साफ करें। दान में हल्दी, दाल, पीतल का पत्र, कोई धार्मिक पुस्तक, 1 जोड़ा जनेऊ, पीले वस्त्र, केला, केसर,पीले मिस्ठान, दक्षिणा आदि देवें। विष्णु आराधना करें। ॐ व्री वृहस्पतये नमः का १०८ बार नित्य जाप करना श्रेयस्कर होता है।
6. शुक्र:      शुक्र भी दो राशिओं का स्वामी है, वृषभ और तुला शुक्र तरुण है, किशोरावस्था का सूचक है, मौज मस्ती,घूमना फिरना,दोस्त मित्र इसके प्रमुख लक्षण है। कुंडली में शुक्र के अशुभ प्रभाव में होने पर मनं में चंचलता रहती है, एकाग्रता नहीं हो पाती खान पान में अरुचि, भोग विलास में रूचि और धन का नाश होता है। अँगूठे का रोग हो जाता है। अँगूठे में दर्द बना रहता है। चलते समय अगूँठे को चोट पहुँच सकती है। चर्म रोग हो जाता है। स्वप्न दोष की शिकायत रहती है।
             उपाय:       माँ लक्ष्मी की सेवा आराधना करें। श्री सूक्त का पाठ करें। खोये के मिस्ठान व मिश्री का भोग लगायें। ब्रह्मण ब्रह्मणि की सेवा करें। स्वयं के भोजन में से गाय को प्रतिदिन कुछ हिस्सा अवश्य दें। कन्या भोजन करायें। ज्वार दान करें। गरीब बच्चो व विद्यार्थिओं में अध्यन सामग्री का वितरण करें। नि:सहाय, निराश्रय के पालन-पोषण का जिम्मा ले सकते हैं। अन्न का दान करें। ॐ सुं शुक्राय नमः का 108 बार नित्य जाप करना भी लाभकारी सिद्ध होता है।
7. शनि:         शनि की गति धीमी है। इसके दूषित होने पर अच्छे से अच्छे काम में गतिहीनता आ जाती है। कुंडली में शनि के अशुभ प्रभाव में होने पर मकान या मकान का हिस्सा गिर जाता या क्षतिग्रस्त हो जाता है। अंगों के बाल झड़ जाते हैं। शनिदेव की भी दो राशिया है, मकर और कुम्भ शरीर में विशेषकर निचले हिस्से में ( कमर से नीचे ) हड्डी या स्नायुतंत्र से सम्बंधित रोग लग जाते है। वाहन से हानि या क्षति होती है। काले धन या संपत्ति का नाश हो जाता है। अचानक आग लग सकती है या दुर्घटना हो सकती है।
         उपाय:         हनुमद आराधना करना, हनुमान जी को चोला अर्पित करना, हनुमान मंदिर में ध्वजा दान करना, बंदरो को चने खिलाना, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमानाष्टक, सुंदरकांड का पाठ और ॐ हन हनुमते नमः का 108 बार नित्य जाप करना श्रेयस्कर होता है। नाव की कील या काले घोड़े की नाल धारण करें। यदि कुंडली में शनि लग्न में हो तो भिखारी को ताँबे का सिक्का या बर्तन कभी न दें यदि देंगे तो पुत्र को कष्ट होगा। यदि शनि आयु भाव में स्थित हो तो धर्मशाला आदि न बनवाएँ।कौवे को प्रतिदिन रोटी खिलाएँ। तेल में अपना मुख देख वह तेल दान कर दें (छाया दान करे ) । लोहा, काली उड़द, कोयला, तिल, जौ, काले वस्त्र, चमड़ा, काला सरसों आदि दान दें।
      8. राहु :     मानसिक तनाव, आर्थिक नुक्सान,स्वयं को ले कर ग़लतफहमी,आपसी तालमेल में कमी, बात बात पर आपा खोना, वाणी का कठोर होना व आप्शब्द बोलना, व कुंडली में राहु के अशुभ होने पर हाथ के नाखून अपने आप टूटने लगते हैं। राजक्ष्यमा रोग के लक्षण प्रगट होते हैं। वाहन दुर्घटना,उदर कस्ट, मस्तिस्क में पीड़ा आथवा दर्द रहना, भोजन में बाल दिखना, अपयश की प्राप्ति, सम्बन्ध ख़राब होना, दिमागी संतुलन ठीक नहीं रहता है, शत्रुओं से मुश्किलें बढ़ने की संभावना रहती है। जल स्थान में कोई न कोई समस्या आना आदि। 
                     उपाय:       गोमेद धारण करें। दुर्गा, शिव व हनुमान की आराधना करें। तिल, जौ किसी हनुमान मंदिर में या किसी यज्ञ स्थान पर दान करें।  जौ या अनाज को दूध में धोकर बहते पानी में बहाएँ, कोयले को पानी में बहाएँ, मूली दान में देवें, भंगी को शराब, माँस दान में दें। सिर में चोटी बाँधकर रखें। सोते समय सर के पास किसी पत्र में जल भर कर रक्खे और सुबह किसी पेड़ में दाल दे,यह प्रयोग 43 दिन करें। इसके साथ हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमानाष्टक, हनुमान बाहुक, सुंदरकांड का पाठ और ॐ रं राहवे नमः का 108 बार नित्य जाप करना लाभकारी होता है |
9. केतु :        कुंडली में केतु के अशुभ प्रभाव में होने पर चर्म रोग, मानसिक तनाव, आर्थिक नुक्सान,स्वयं को ले कर ग़लतफहमी, आपसी तालमेल में कमी, बात बात पर आपा खोना, वाणी का कठोर होना व आप्शब्द बोलना, जोड़ों का रोग या मूत्र एवं किडनी संबंधी रोग हो जाता है। संतान को पीड़ा होती है। वाहन दुर्घटना,उदर कस्ट, मस्तिस्क में पीड़ा आथवा दर्द रहना, अपयश की प्राप्ति, सम्बन्ध ख़राब होना, दिमागी संतुलन ठीक नहीं रहता है, शत्रुओं से मुश्किलें बढ़ने की संभावना रहती है।
                                    उपाय:      दुर्गा, शिव व हनुमान की आराधना करें। तिल, जौ किसी हनुमान मंदिर में या किसी यज्ञ स्थान पर दान करें। कान छिदवाएँ। सोते समय सर के पास किसी पत्र में जल भर कर रक्खे और सुबह किसी पेड़ में दाल दे,यह प्रयोग 43 दिन करें। इसके साथ हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमानाष्टक, हनुमान बाहुक, सुंदरकांड का पाठ और ॐ कें केतवे नमः का 108 बार नित्य जाप करना लाभकारी होता है। अपने खाने में से कुत्ते,कौव्वे को हिस्सा दें। तिल व कपिला गाय दान में दें। पक्षिओं को बाजरा दें। चिटिओं के लिए भोजन की व्यस्था करना अति महत्व्यपूर्ण है।
          किसी भी उपाय को 43 दिन करना चहिये तब ही फल प्राप्ति संभव होती है। मंत्रो के जाप के लिए रुद्राक्ष की माला सबसे उचित मानी गई है | इन उपायों का गोचरवश प्रयोग करके कुण्डली में अशुभ प्रभाव में स्थित ग्रहों को शुभ प्रभाव में लाया जा सकता है। सम्बंधित ग्रह के देवता की आराधना और उनके जाप, दान उनकी होरा, उनके नक्षत्र में अत्यधिक लाभप्रद होते हैं।

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

   

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Heart शहीद सैनिकों, परिवारों के लिए रेकी Reiki healing for martyrs and family members
Posted by: admin - 02-15-2019, 08:53 AM - Forum: Free Reiki Healing - Replies (1)

पुलवामा में शहीद हुए सैनिकों की आत्मा की शांति के लिए हम सब प्रार्थना करते हैं। सभी रेकी हीलरर्स को रेकी सर्कल में आमंत्रित करते हैं। 7 दिन के सेशन में हम वीर शहीदों को श्रद्धांजली देंगे। घायल सैनिकों एवं समस्त सैनिकों के परिवारों के लिए रेकी करेंगे। शाम 7 बजे। हमारी ओर से यह प्रयास अवश्य होना चाहिए अपने देश के लिए यह हमारा कर्तव्य हैं। ॐ शांति

We invite all distance healers (II degree or above) join us from your city. We are going to do 7 days distance healing session for all martyrs in Fulwama (J&K) attack, injured soldiers. Reiki healing for their family members. Session timings IST 7 PM. Please comment or contact on whatsapp n. to confirm and join. If they can do we can also serve  its our duty for them. Prayers for all martyrs. Love and light ॐ shanti.

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Exclamation पुलवामा अटैक: शहीद पुण्यात्माओं को श्रद्धांजली ॐ शांति
Posted by: Ramit Yadav - 02-14-2019, 10:44 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

   

पुलवामा अटैक: शहीद पुण्यात्माओं को श्रद्धांजली ॐ शांति
जिस बस पर हमला हुआ उसमें 42 जवान थे सवार, जिनमें 30 शहीद हुए, यहां पढ़ें सभी के नाम
ये विस्फोट इतना जबरदस्त था कि बस के परखच्चे उड़ गए और तकरीबन पांच किलो मीटर तक इसकी आवाज सुनाई थी. ये हमला तब किया गया जब सीआरपीएफ जवानों काफिला श्रीनगर से पुलवामा ले जाया जा रहा था. बस पर हमले के बाद आतंकियों ने फायरिंग भी की.
   

पुलवामा अटैक: जिस बस पर हमला हुआ उसमें 42 जवान थे सवार, जिनमें 30 शहीद हुए, यहां पढ़ें सभी के नाम
नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर के अवंतीपुरा में आतंकी हमले में जिस बस को निशाना बनाया गया उसमें 42 जवान सवार थे. अब तक मिली जानकारी के मुताबिक 30 से ज्यादा जवान शहीद हो गए हैं. जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ने बस पर फिदायीन हमला किया. फिदायीन हमले में जिस गाड़ी का इस्तेमाल किया गया उसमें 200 किलोग्राम विस्फोटक भरा हुआ था. ये विस्फोट इतना जबरदस्त था कि बस के परखच्चे उड़ गए और तकरीबन पांच किलो मीटर तक इसकी आवाज सुनाई थी. ये हमला तब किया गया जब सीआरपीएफ जवानों काफिला श्रीनगर से पुलवामा ले जाया जा रहा था. बस पर हमले के बाद आतंकियों ने फायरिंग भी की.


यहां बस में सवार जवानों के नाम दिए गए है.



1. जयमाल सिंह- 76 बटालियन
2. नसीर अहमद- 76 बटालियन
3. सुखविंदर सिंह- 76 बटालियन
4. रोहिताश लांबा- 76 बटालियन
5. तिकल राज- 76 बटालियन
6. भागीरथ सिंह- 45 बटालियन
7. बीरेंद्र सिंह- 45 बटालियन
8. अवधेष कुमार यादव- 45 बटालियन
9. नितिन सिंह राठौर- 3 बटालियन
10. रतन कुमार ठाकुर- 45 बटालियन
11. सुरेंद्र यादव- 45 बटालियन
12. संजय कुमार सिंह- 176 बटालियन
13. रामवकील- 176 बटालियन
14. धरमचंद्रा- 176 बटालियन
15. बेलकर ठाका- 176 बटालियन
16. श्याम बाबू- 115 बटालियन
17. अजीत कुमार आजाद- 115 बटालियन
18. प्रदीप सिंह- 115 बटालियन
19. संजय राजपूत- 115 बटालियन
20. कौशल कुमार रावत- 115 बटालियन
21. जीत राम- 92 बटालियन
22. अमित कुमार- 92 बटालियन
23. विजय कुमार मौर्य- 92 बटालियन
24. कुलविंदर सिंह- 92 बटालियन
25. विजय सोरंग- 82 बटालियन
26. वसंत कुमार वीवी- 82 बटालियन
27. गुरु एच- 82 बटालियन
28. सुभम अनिरंग जी- 82 बटालियन
29. अमर कुमार- 75 बटालियन
30. अजय कुमार- 75 बटालियन
31. मनिंदर सिंह- 75 बटालियन
32. रमेश यादव- 61 बटालियन
33. परशाना कुमार साहू- 61 बटालियन
34. हेम राज मीना- 61 बटालियन
35. बबला शंत्रा- 35 बटालियन
36. अश्वनी कुमार कोची- 35 बटालियन
37. प्रदीप कुमार- 21 बटालियन
38. सुधीर कुमार बंशल- 21 बटालियन
39. रविंदर सिंह- 98 बटालियन
40. एम बाशुमातारे- 98 बटालियन
41. महेश कुमार- 118 बटालियन
42. एलएल गुलजार- 118 बटालियन

   

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Rainbow Facebook group links फेसबुक ग्रुप लिंक्स
Posted by: Ritika - 02-14-2019, 03:32 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

Facebook group links फेसबुक ग्रुप लिंक्स

Heart JAI SHREE GANESHA: https://www.facebook.com/groups/ganesh.g....gananayak

Cool Mumbai: https://www.facebook.com/groups/mumbai.world
Cool INDORE: https://www.facebook.com/groups/khajrana11
Cool Indore N.1: https://www.facebook.com/groups/indore.life
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Heart Help patients: https://www.facebook.com/groups/1437755246491990
Heart India free services for hospital patient: https://www.facebook.com/groups/india.life

Smile Reiki Healing: https://www.facebook.com/groups/Reiki.Lover
Smile REIKI CIRCLE: https://www.facebook.com/groups/REIKIAND...REDICTIONS
Smile Facts of Astrology: https://www.facebook.com/groups/Astrolog...ctions.all
Smile Free Horoscope Reading फ्री 2 प्रश्न: https://www.facebook.com/groups/Free.Horoscope.Reading


Big Grin  चुटकुले jokes: https://www.facebook.com/groups/joke.fun.jokes

Cool WhatsApp Fun: https://www.facebook.com/groups/whatsapp.chat.fun
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Cool Nifty Mcx: https://www.facebook.com/groups/niftymcx
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Rainbow Shopping
Posted by: Sagar vhankhande - 02-14-2019, 10:58 AM - Forum: Post Advertisement - No Replies

OnLike shopping  Heart

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Heart Ek Ek Point Dhayaan Se Padhiyega
Posted by: Megha Tyagi - 02-13-2019, 09:15 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

*Ek Ek Point Dhayaan Se Padhiyega*

*Quote 1 .* जब लोग आपको *Copy* करने लगें तो समझ लेना जिंदगी में *Success* हो रहे हों.

*Quoted 2 .* कमाओ…कमाते रहो और तब तक कमाओ, जब तक महंगी चीज सस्ती न लगने लगे.

*Quote 3 .* जिस व्यक्ति के सपने  खत्म, उसकी तरक्की भी खत्म.

*Quote 4 .* यदि *“Plan A”* काम नही कर रहा, तो कोई बात नही *25* और *Letters* बचे हैं उन पर *Try* करों.

*Quote 5 .* जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की.

*Quote 6 .* भीड़ हौंसला तो देती हैं लेकिन पहचान छिन लेती हैं.

*Quote 7 .* अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने में लग जाती हैं.

*Quote 8 .* कोई भी महान व्यक्ति अवसरों की कमी के बारे में शिकायत नहीं करता.

*Quote 9 .* महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है.

*Quote 10 .* जिस चीज में आपका *Interest* हैं उसे करने का कोई टाईम फिक्स नही होता. चाहे रात के *1* ही क्यों न बजे हो.

*Quote 11 .* अगर आप चाहते हैं कि, कोई चीज अच्छे से हो तो उसे खुद कीजिये.

*Quote 12 .* सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी नहीं पार कर सकते.

*Quote 13 .* जीतने वाले अलग चीजें नहीं करते, वो चीजों को अलग तरह से करते हैं.

*Quote 14 .* जितना कठिन संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी.

*Quote 15 .* यदि लोग आपके लक्ष्य पर *हंस* नहीं रहे हैं तो समझो *आपका लक्ष्य बहुत छोटा हैं.*

*Quote 16 .* विफलता के बारे में चिंता मत करो, आपको बस एक बार ही सही होना हैं.

*Quote 17 .* सबकुछ कुछ नहीं से शुरू हुआ था.

*Quote 18 .* हुनर तो सब में होता हैं फर्क बस इतना होता हैं किसी का *छिप* जाता हैं तो किसी का *छप* जाता हैं.

*Quote 19 .* दूसरों को सुनाने के लिऐ अपनी आवाज ऊँची मत करिऐ, बल्कि अपना व्यक्तित्व इतना ऊँचा बनाऐं कि आपको सुनने की लोग मिन्नत करें.

*Quote 20 .* अच्छे काम करते रहिये चाहे लोग तारीफ करें या न करें आधी से ज्यादा दुनिया सोती रहती है ‘सूरज’ फिर भी उगता हैं.

*Quote 21 .* पहचान से मिला काम थोडे बहुत समय के लिए रहता हैं लेकिन काम से मिली पहचान उम्रभर रहती हैं.

*Quote 22 .* जिंदगी अगर अपने हिसाब से जीनी हैं तो कभी किसी के *फैन* मत बनो.

*Quote 23 .* जब गलती अपनी हो तो हमसे बडा कोई वकील नही जब गलती दूसरो की हो तो हमसे बडा कोई जज नही.

*Quote 24 .* आपका खुश रहना ही आपका बुरा चाहने वालो के लिए सबसे बडी सजा हैं.

*Quote 25 .* कोशिश करना न छोड़े, गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल सकती हैं.

*Quote 26 .* इंतजार करना बंद करो, क्योकिं सही समय कभी नही आता.

*Quote 27 .* जिस दिन आपके *Sign  Autograph* में बदल जाएंगे, उस दिन आप *बड़े आदमी बन जाओगें.*

*Quote 28 .* काम इतनी शांति से करो कि सफलता शोर मचा दे.

*Quote 29 .* तब तक पैसे कमाओ जब तक तुम्हारा बैंक बैलेंस तुम्हारे फोन नंबर की तरह न दिखने लगें.

*Quote 30 .* *अगर एक हारा हुआ इंसान हारने के बाद भी मुस्करा दे तो जीतने वाला भी जीत की खुशी खो देता हैं. ये हैं मुस्कान की ताकत.*

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Heart नर्मदाष्टकम्
Posted by: Ragini Sharma - 02-12-2019, 03:58 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

   

 नर्मदाष्टकम्

सबिन्दुसिन्धुसुस्खलत्तरंगभंगरञ्जितम्
द्विषत्सु पापजातजातकारिवारिसंयुतं  ।
कृतान्तदूतकालभूतभीतिहारिवर्मदे
त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥ १॥

त्वदंबुलीनदीनमीनदिव्यसंप्रदायकं
कलौमलौघभारहारिसर्वतीर्थनायकम्।
सुमच्छकच्छनक्रचक्रवाकचक्रशर्मदे
त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥२॥

महागभीरनीरपूरपातधूतभूतलं
ध्वनत्समस्तपातकारिदारितापदाचलम्।
जगल्लये महाभये मृकण्डुसूनुहर्म्यदे
त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥३॥

गतं तदैव मे भयं त्वदंबु वीक्षितं यदा
मृकण्डुसूनुशौनकासुरारिसेवितं सदा ।
पुनर्भवाब्धिजन्मजं भवाब्धिदुःखवर्मदे
त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥४॥

अलक्ष्यलक्षकिन्नरामरासुरादिपूजितं
सुलक्षनीरतीरधीरपक्षिलक्षकूजितम्।
वसिष्ठशिष्टपिप्पलादिकर्दमादि शर्मदे
त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥५॥

सनत्कुमारनाचिकेतकश्यपात्रिषट्पदै
र्धृतं स्वकीयमानसेषु नारदादिषट्पदैः।
रवीन्दुरन्तिदेवदेवराजकर्मशर्मदे
त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥६॥

अलक्षलक्षलक्षपापलक्षसारसायुधं
ततस्तु जीवजन्तुतन्तुभुक्तिमुक्तिदायकं।
विरिञ्चिविष्णुशंकरस्वकीयधामवर्मदे
त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥७॥

अहोऽमृतं स्वनं श्रुतं महेशिकेशजातटे
किरातसूतवाडबेषु पण्डिते शठे नटे ।
दुरन्तपापतापहारि सर्वजन्तुशर्मदे
त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे॥८॥

इदं तु नर्मदाष्टकं त्रिकालमेव ये सदा
पठन्ति ते निरन्तरं न यान्ति दुर्गतिं कदा।
सुलभ्यदेहदुर्लभं महेशधामगौरवं
पुनर्भवा नरा न वै विलोकयन्ति रौरवम् ॥९॥
   
 नर्मदे हर

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Thumbs Up रूपए के नोट और उसपर छपी तस्वीरें Rupee note and pictures
Posted by: Sumit Panchal - 02-12-2019, 12:16 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

रूपए के नोट और उसपर छपी तस्वीरें Rupee note and pictures

   
   
   
   
   
   
   
   
   

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Thumbs Up Survey 2019 सर्वे 2019: आपका वोट किसके लिए Which party you support.
Posted by: admin - 02-11-2019, 01:30 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

आपका वोट किसके लिए
Which party you support.


                      [Image: 113px-PM_Modi_Portrait%28cropped%29.jpg]        [Image: 112px-Rahul_Gandhi_%28headshot%29.jpg]
Leader            
Narendra Modi               Rahul Gandhi
             

Party               BJP                                     INC


Alliance           NDA                                    UPA


Leader's seat  Varanasi                              Amethi

Last election   282                                      44

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Star बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं।।
Posted by: Pooja - 02-10-2019, 09:23 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

हे ! सरस्वती माँ, हमे विधा, बुद्धि, विद्या मधुर वाणी का वर दो
जीवन साहस, शील हृदय में भर दो 
जीवन, त्याग तपोमय कर दो।

आपको बसंत पंचमी की  हार्दिक शुभकामनाएं।।

   
   

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Thumbs Up Michael Jackson wanted to live for 150 years
Posted by: Navin Sharma - 02-08-2019, 04:09 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

Michael Jackson wanted to live for 150 years.

He appointed 12 doctors at home who would daily examine him from hair to toenails.

His food was always tested in laboratory before serving.

Another 15 people were appointed to look after his daily exercise and workout.

His bed had the technology to regulate the oxygen level.

Organ donors were kept ready so that whenever needed they could immediately donate their organ . The maintenance of these donors were taken care of by him.

He was proceeding with a dream of living for 150 years.

Alas ! He failed.

On 25th June 2009, at the age of 50, his heart stopped functioning. The constant effort of those 12 doctors didn't work.

Even, the combined efforts of doctors from Los Angeles and California too couldn't save him.

The person who would never put a step forward without the doctors suggestion for his last 25 years, couldn't fufill his dream of living 150 years.

Jackson's final journey was watched live by 2.5 million people which is the longest live telecast till date.

On the day he died,i.e. 25th June '09 at 3.15 pm, Wikipedia, Twitter,AOL's instant messenger stopped working. About 8 lakh people together searched Michael Jackson on Google.

Jackson tried to challenge death but death challenged him back.

The materialistic life in this materialistic world embraces materialistic death instead of a normal one. This is the rule of life.

Now let's think.

Are we earning for the builders,engineers,designers or decorators?

Whom do we want to impress by showing expensive house,car and extravagant wedding ?

Do you remember the food items in the wedding reception which you had attended couple of days ago?

Why are we working like an animal in life ?

For the comfort of how many generations do we want to save?

Most of us have one or two children. Have you ever thought how much do we need and how much do we want?

Do we consider that our children won't be able to earn much and so its necessary to save some extra for them?

Do you spend some time with yourself, family or friends in the week?

Do you spend 5% of your earning on yourself?

Why don't we find happiness in life along with what we earn ?

If you think deeply, your heart might fail to work. You will suffer from slip disc, high cholesterol, insomnia etc. etc.

Conclusion : Spend some time for yourself. We don't own any property,its only in some documents that our name is written temporarily.

When we say “ this is my property ”, God passes a crooked smile.

Don't create an impression on a person seeing his car or dress. Our great mathematicians and scientists used bicycle or scooter for commuting.

Its not a sin to be rich, but to be rich only with money is a sin.

Control life or else life will control you.

The things which really matter at the end of life is contentment, satisfaction and peace.

Sadly,these cannot be bought.

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Thumbs Up हिंदू धर्मग्रंथों का सार, जानिए किस ग्रंथ में क्या है..??
Posted by: Ravi Joshi - 02-04-2019, 12:48 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

हिंदू धर्मग्रंथों का सार, जानिए किस ग्रंथ में क्या है..??
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अधिकतर हिंदुओं के पास अपने ही धर्मग्रंथ को पढ़ने की फुरसत नहीं है। वेद, उपनिषद पढ़ना तो दूर वे गीता तक को नहीं पढ़ते जबकि गीता को एक घंटे में पढ़ा जा सकता है। हालांकि कई जगह वे भागवत पुराण सुनने या रामायण का अखंड पाठ करने के लिए समय निकाल लेते हैं या घर में सत्यनारायण की कथा करवा लेते हैं। लेकिन आपको यह जानकारी होना चाहिए कि पुराण, रामायण और महाभारत हिन्दुओं के धर्मग्रंथ नहीं है। धर्मग्रंथ तो वेद ही है। 

*शास्त्रों को दो भागों में बांटा गया है:-*
श्रुति और स्मृति। श्रुति के अंतर्गत धर्मग्रंथ वेद आते हैं और स्मृति के अंतर्गत इतिहास और वेदों की व्याख्‍या की पुस्तकें पुराण, महाभारत, रामायण, स्मृतियां आदि आते हैं। हिन्दुओं के धर्मग्रंथ तो वेद ही है। वेदों का सार उपनिषद है और उपनिषदों का सार गीता है। आओ जानते हैं कि उक्त ग्रंथों में क्या है।

*वेदों में क्या है?*
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वेदों में ब्रह्म (ईश्वर), देवता, ब्रह्मांड, ज्योतिष, गणित, रसायन, औषधि, प्रकृति, खगोल, भूगोल, धार्मिक नियम, इतिहास, संस्कार, रीति-रिवाज आदि लगभग सभी विषयों से संबंधित ज्ञान भरा पड़ा है। वेद चार है ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। ऋग्वेद का आयुर्वेद, यजुर्वेद का धनुर्वेद, सामवेद का गंधर्ववेद और अथर्ववेद का स्थापत्यवेद ये क्रमशः चारों वेदों के उपवेद बतलाए गए हैं।
 
*ऋग्वेद?* ऋक अर्थात् स्थिति और ज्ञान। इसमें भौगोलिक स्थिति और देवताओं के आवाहन के मंत्रों के साथ बहुत कुछ है। ऋग्वेद की ऋचाओं में देवताओं की प्रार्थना, स्तुतियां और देवलोक में उनकी स्थिति का वर्णन है। इसमें जल चिकित्सा, वायु चिकित्सा, सौर चिकित्सा, मानस चिकित्सा और हवन द्वारा चिकित्सा आदि की भी जानकारी मिलती है।

*यजुर्वेद?* यजु अर्थात गतिशील आकाश एवं कर्म। यजुर्वेद में यज्ञ की विधियां और यज्ञों में प्रयोग किए जाने वाले मंत्र हैं। यज्ञ के अलावा तत्वज्ञान का वर्णन है। तत्व ज्ञान अर्थात रहस्यमयी ज्ञान। ब्रम्हांड, आत्मा, ईश्वर और पदार्थ का ज्ञान। इस वेद की दो शाखाएं हैं शुक्ल और कृष्ण।
 
*सामवेद?*  साम का अर्थ रूपांतरण और संगीत। सौम्यता और उपासना। इस वेद में ऋग्वेद की ऋचाओं का संगीतमय रूप है। इसमें सविता, अग्नि और इंद्र देवताओं के बारे में जिक्र मिलता है। इसी से शास्त्रिय संगीत और नृत्य का जिक्र भी मिलता है। इस वेद को संगीत शास्त्र का मूल माना जाता है। इसमें संगीत के विज्ञान और मनोविज्ञान का वर्णन भी मिलता है।

*अथर्ववेद?* थर्व का अर्थ है कंपन और अथर्व का अर्थ अकंपन। इस वेद में रहस्यमयी विद्याओं, जड़ी बूटियों, चमत्कार और आयुर्वेद आदि का जिक्र है। इसमें भारतीय परंपरा और ज्योतिष का ज्ञान भी मिलता है।
 
*उपनिषद् क्या है?*
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उपनिषद वेदों का सार है। सार अर्थात निचोड़ या संक्षिप्त। उपनिषद भारतीय आध्यात्मिक चिंतन के मूल आधार हैं, भारतीय आध्यात्मिक दर्शन के स्रोत हैं। ईश्वर है या नहीं, आत्मा है या नहीं, ब्रह्मांड कैसा है आदि सभी गंभीर, तत्व ज्ञान, योग, ध्यान, समाधि, मोक्ष आदि की बातें उपनिषद में मिलेगी। उपनिषदों को प्रत्येक हिन्दुओं को पढ़ना चाहिए। इन्हें पढ़ने से ईश्वर, आत्मा, मोक्ष और जगत के बारे में सच्चा ज्ञान मिलता है।
 
वेदों के अंतिम भाग को 'वेदांत' कहते हैं। वेदांतों को ही उपनिषद कहते हैं। उपनिषद में तत्व ज्ञान की चर्चा है। उपनिषदों की संख्या वैसे तो 108 हैं, परंतु मुख्य 12 माने गए हैं, जैसे- 1. ईश, 2. केन, 3. कठ, 4. प्रश्न, 5. मुण्डक, 6. माण्डूक्य, 7. तैत्तिरीय, 8. ऐतरेय, 9. छांदोग्य, 10. बृहदारण्यक, 11. कौषीतकि और 12. श्वेताश्वतर।

*षड्दर्शन क्या है?*
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वेद से निकला षड्दर्शन : वेद और उपनिषद को पढ़कर ही 6 ऋषियों ने अपना दर्शन गढ़ा है। इसे भारत का षड्दर्शन कहते हैं। दरअसल यह वेद के ज्ञान का श्रेणीकरण है। ये छह दर्शन हैं:- 1.न्याय, 2.वैशेषिक, 3.सांख्य, 4.योग, 5.मीमांसा और 6.वेदांत। वेदों के अनुसार सत्य या ईश्वर को किसी एक माध्यम से नहीं जाना जा सकता। इसीलिए वेदों ने कई मार्गों या माध्यमों की चर्चा की है।
 
*गीता में क्या है?*
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महाभारत के 18 अध्याय में से एक भीष्म पर्व का हिस्सा है गीता। गीता में भी कुल 18 अध्याय हैं। 10 अध्यायों की कुल श्लोक संख्या 700 है। वेदों के ज्ञान को नए तरीके से किसी ने व्यवस्थित किया है तो वह हैं भगवान श्रीकृष्ण। अत: वेदों का पॉकेट संस्करण है गीता जो हिन्दुओं का सर्वमान्य एकमात्र ग्रंथ है। किसी के पास इतना समय नहीं है कि वह वेद या उपनिषद पढ़ें उनके लिए गीता ही सबसे उत्तम धर्मग्रंथ है। गीता को बार बार पढ़ने के बाद ही वह समझ में आने लगती है।
 
गीता में भक्ति, ज्ञान और कर्म मार्ग की चर्चा की गई है। उसमें यम-नियम और धर्म-कर्म के बारे में भी बताया गया है। गीता ही कहती है कि ब्रह्म (ईश्वर) एक ही है। गीता को बार-बार पढ़ेंगे तो आपके समक्ष इसके ज्ञान का रहस्य खुलता जाएगा। गीता के प्रत्येक शब्द पर एक अलग ग्रंथ लिखा जा सकता है।

गीता में सृष्टि उत्पत्ति, जीव विकासक्रम, हिन्दू संदेवाहक क्रम, मानव उत्पत्ति, योग, धर्म, कर्म, ईश्वर, भगवान, देवी, देवता, उपासना, प्रार्थना, यम, नियम, राजनीति, युद्ध, मोक्ष, अंतरिक्ष, आकाश, धरती, संस्कार, वंश, कुल, नीति, अर्थ, पूर्वजन्म, जीवन प्रबंधन, राष्ट्र निर्माण, आत्मा, कर्मसिद्धांत, त्रिगुण की संकल्पना, सभी प्राणियों में मैत्रीभाव आदि सभी की जानकारी है।
 
श्रीमद्भगवद्गीता योगेश्वर श्रीकृष्ण की वाणी है। इसके प्रत्येक श्लोक में ज्ञानरूपी प्रकाश है, जिसके प्रस्फुटित होते ही अज्ञान का अंधकार नष्ट हो जाता है। ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है। गीता को अर्जुन के अलावा और संजय ने सुना और उन्होंने धृतराष्ट्र को सुनाया। गीता में श्रीकृष्ण ने- 574, अर्जुन ने- 85, संजय ने 40 और धृतराष्ट्र ने- 1 श्लोक कहा है।
 
*उपरोक्त ग्रंथों के ज्ञान का सार बिंदूवार :*
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*1.ईश्वर के बारे में :*
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ब्रह्म (परमात्मा) एक ही है जिसे कुछ लोग सगुण (साकार) कुछ लोग निर्गुण (निराकार) कहते हैं। हालांकि वह अजन्मा, अप्रकट है। उसका न कोई पिता है और न ही कोई उसका पुत्र है। वह किसी के भाग्य या कर्म को नियंत्रित नहीं करता। ना कि वह किसी को दंड या पुरस्कार देता है। उसका न तो कोई प्रारंभ है और ना ही अंत। वह अनादि और अनंत है। उसकी उपस्थिति से ही संपूर्ण ब्रह्मांड चलायमान है। सभी कुछ उसी से उत्पन्न होकर अंत में उसी में लीन हो जाता है। ब्रह्मलीन।
 
*2.ब्रह्मांड के बारे में :*
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यह दिखाई देने वाला जगत फैलता जा रहा है और दूसरी ओर से यह सिकुड़ता भी जा रहा है। लाखों सूर्य, तारे और धरतीयों का जन्म है तो उसका अंत भी। जो जन्मा है वह मरेगा। सभी कुछ उसी ब्रह्म से जन्में और उसी में लीन हो जाने वाले हैं। यह ब्रह्मांड परिवर्तनशील है। इस जगत का संचालन उसी की शक्ति से स्वत: ही होता है। जैसे कि सूर्य के आकर्षण से ही धरती अपनी धूरी पर टिकी हुई होकर चलायमान है। उसी तरह लाखों सूर्य और तारे एक महासूर्य के आकर्षण से टिके होकर संचालित हो रहे हैं। उसी तरह लाखों महासूर्य उस एक ब्रह्मा की शक्ति से ही जगत में विद्यमान है।
 
*3.आत्मा के बारे में :*
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आत्मा का स्वरूप ब्रह्म (परमात्मा) के समान है। जैसे सूर्य और दीपक में जो फर्क है उसी तरह आत्मा और परमात्मा में फर्क है। आत्मा के शरीर में होने के कारण ही यह शरीर संचालित हो रहा है। ठीक उसी तरह जिस तरह कि संपूर्ण धरती, सूर्य, ग्रह नक्षत्र और तारे भी उस एक परमपिता की उपस्थिति से ही संचालित हो रहे हैं।

आत्मा का ना जन्म होता है और ना ही उसकी कोई मृत्यु है। आत्मा एक शरीर को छोड़कर दूसरा शरीर धारण करती है। यह आत्मा अजर और अमर है। आत्मा को प्रकृति द्वारा तीन शरीर मिलते हैं एक वह जो स्थूल आंखों से दिखाई देता है। दूसरा वह जिसे सूक्ष्म शरीर कहते हैं जो कि ध्यानी को ही दिखाई देता है और तीसरा वह शरीर जिसे कारण शरीर कहते हैं उसे देखना अत्यंत ही मुश्लिल है। बस उसे वही आत्मा महसूस करती है जो कि उसमें रहती है। आप और हम दोनों ही आत्मा है हमारे नाम और शरीर अलग अलग हैं लेकिन भीतरी स्वरूप एक ही है।
 
*4.स्वर्ग और नरक के बारे में :*
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वेदों के अनुसार पुराणों के स्वर्ग या नर्क को गतियों से समझा जा सकता है। स्वर्ग और नर्क दो गतियां हैं। आत्मा जब देह छोड़ती है तो मूलत: दो तरह की गतियां होती है:- 1.अगति और 2. गति।

*1.अगति:?* अगति में व्यक्ति को मोक्ष नहीं मिलता है उसे फिर से जन्म लेना पड़ता है।

*2.गति ?* गति में जीव को किसी लोक में जाना पड़ता है या वह अपने कर्मों से मोक्ष प्राप्त कर लेता है।

*अगति के चार प्रकार है-* 1.क्षिणोदर्क, 2.भूमोदर्क, 3. अगति और 4.दुर्गति।

*क्षिणोदर्क ?* क्षिणोदर्क अगति में जीव पुन: पुण्यात्मा के रूप में मृत्यु लोक में आता है और संतों सा जीवन जीता है।

*भूमोदर्क ?* भूमोदर्क में वह सुखी और ऐश्वर्यशाली जीवन पाता है।

अगति ? अगति में नीच या पशु जीवन में चला जाता है।

दुर्गति ? दुर्गति में वह कीट, कीड़ों जैसा जीवन पाता है।

*गति के भी 4 प्रकार :-*
गति के अंतर्गत चार लोक दिए गए हैं:- 1.ब्रह्मलोक, 2.देवलोक, 3.पितृलोक और 4.नर्कलोक। जीव अपने कर्मों के अनुसार उक्त लोकों में जाता है।
 
*तीन मार्गों से यात्रा :*
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जब भी कोई मनुष्य मरता है या आत्मा शरीर को त्यागकर यात्रा प्रारंभ करती है तो इस दौरान उसे तीन प्रकार के मार्ग मिलते हैं। ऐसा कहते हैं कि उस आत्मा को किस मार्ग पर चलाया जाएगा यह केवल उसके कर्मों पर निर्भर करता है। ये तीन मार्ग हैं- अर्चि मार्ग, धूम मार्ग और उत्पत्ति-विनाश मार्ग। अर्चि मार्ग ब्रह्मलोक और देवलोक की यात्रा के लिए होता है, वहीं धूममार्ग पितृलोक की यात्रा पर ले जाता है और उत्पत्ति-विनाश मार्ग नर्क की यात्रा के लिए है।
 
*5.धर्म और मोक्ष के बारे में :*
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धर्मग्रंथों के अनुसार धर्म का अर्थ है यम और नियम को समझकर उसका पालन करना। नियम ही धर्म है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में से मोक्ष ही अंतिम लक्ष्य होता है। हिंदु धर्म के अनुसार व्यक्ति को मोक्ष के बारे में विचार करना चाहिए। मोक्ष क्या है? स्थितप्रज्ञ आत्मा को मोक्ष मिलता है। मोक्ष का भावर्थ यह कि आत्मा शरीर नहीं है इस सत्य को पूर्णत: अनुभव करके ही अशरीरी होकर स्वयं के अस्तित्व को पूख्‍ता करना ही मोक्ष की प्रथम सीढ़ी है।

*6.व्रत और त्योहार के बारे में :*
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हिन्दु धर्म के सभी व्रत, त्योहार या तीर्थ सिर्फ मोक्ष की प्राप्त हेतु ही निर्मित हुए हैं। मोक्ष तब मिलेगा जब व्यक्ति स्वस्थ रहकर प्रसन्नचित्त और खुशहाल जीवन जीएगा। व्रत से शरीर और मन स्वस्थ होता है। त्योहार से मन प्रसन्न होता है और तीर्थ से मन और मस्तिष्क में वैराग्य और आध्यात्म का जन्म होता है।
 
मौसम और ग्रह नक्षत्रों की गतियों को ध्यान में रखकर बनाए गए व्रत और त्योहार का महत्व अधिक है। व्रतों में चतुर्थी, एकादशी, प्रदोष, अमावस्या, पूर्णिमा, श्रावण मास और कार्तिक मास के दिन व्रत रखना श्रेष्ठ है। यदि उपरोक्त सभी नहीं रख सकते हैं तो श्रावण के पूरे महीने व्रत रखें। त्योहारों में मकर संक्रांति, महाशिवरात्रि, नवरात्रि, रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी और हनुमान जन्मोत्सव ही मनाएं। पर्व में श्राद्ध और कुंभ का पर्व जरूर मनाएं।
 
व्रत करने से काया निरोगी और जीवन में शांति मिलती है। सूर्य की 12 और 12 चंद्र की संक्रांति होती है। सूर्य संक्रांतियों में उत्सव का अधिक महत्व है तो चंद्र संक्रांति में व्रतों का अधिक महत्व है। चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, अषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक, अगहन, पौष, माघ और फाल्गुन। इसमें से श्रावण मास को व्रतों में सबसे श्रेष्ठ मास माना गया है।

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Thumbs Up 9 मसाले कौन कौन से हैं
Posted by: Sanjay Sharma - 02-04-2019, 12:44 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

9 मसाले कौन कौन  से हैं
और ये किस प्रकार ग्रहों का प्रतिनिधित्व करते है व इनके पीछे छिपी वैज्ञानिकता क्या है ?

?1. नमक      (पिसा हुआ) सूर्य

?2. लाल मिर्च   (पिसी हुई) मंगल

?3. हल्दी ,,,,,,,    (पिसी हुई ) गुरु

?4. जीरा   (साबुत या पिसा हुआ) राहु केतु

?5. धनिया,,,,,,  (पिसा हुआ) बुध

?6. काली मिर्च (साबुत या पाउडर) शनि

?7. अमचूर ,,,,  (पिसा हुआ) केतु

?8. गर्म मसाला,. (पिसा हुआ) राहु

?9. मेथी,,,,,,,,,,,.      मंगल....

   ?मसाले के सेवन से अपने
  स्वास्थ्य और ग्रहो को ठीक करे
              ???
? भारतीय रसोई में मिलने वाले मसाले सेहत के लिए तो अच्छे होते ही है ,पर साथ में उन के सेवन से हमारे ग्रह भी अच्छे होते है

                ?सौंफ?
सौंफ का जिक्र हम पहले भी कर चुके है की सौंफ खाने से हमारा शुक्र और चंद्र अच्छा होता है

? इसे मिश्री के साथ ले या उस के बिना भी ले खाने के बाद , एसिडिटि और जी मिचलाने जैसी समस्या कम होने लगेंगी
? सौंफ को गुड के साथ सेवन करें जब आप घर से किसी काम के लिए निकाल रहे हो , इस से आप का मंगल ग्रह आप का  पूरा काम करने में साथ देता है ....

             ?दालचीनी?
मंगल ओर शुक्र ग्रह को ठीक करती है

? अगर किसी का मंगल और शुक्र कुपित है ,तो थोड़ी सी दालचीनी को शहद में मिलाकर ताज़े पानी के साथ ले , इस से आप की शरीर में शक्ति बढ़ेगी और सर्दियों में कफ की समस्या कम परेशान करती है .......

             ?काली मिर्च?
काली मिर्च के सेवन से हमारा शुक्र और चंद्रमा अच्छा होता है

? इस के सेवन से कफ की समस्या कम होती है और हमारी स्मरण शक्ति भी बढ़ती है
तांबे के किसी बर्तन में काली मिर्च डालकर Dining Table पर रखने से घर को नज़र नहीं लगती है....

                ?जौं?
जौ के प्रयोग से सूर्य ग्रह और गुरु ग्रह ठीक होता है

? जौं के आटे की रोटी खाने से पथरी कभी नहीं होती है.....

             ?हरी इलायची?
 इस के प्रयोग से बुध ग्रह मजबूत होता है

? अगर किसी को दूध पचाने में परेशानी होती है....
तो हरी इलायची उस में पका कर फिर दूध का सेवन करें  इस से ऐसी परेशानी नहीं होगी ....
यह उन लोगो के लिए उपकारी है की जिन को दूध अपनी सेहत बनाए रखने या कैल्सियम के लिए दूध तो पीना पड़ता है पर उसको पीकर पचाने में समस्या आती है ...

                  ?हल्दी?
हल्दी के गुण हम सबसे छुपे नहीं है , हल्दी के सेवन से बृहस्पति ग्रह अच्छा होता है ,

? हल्दी की गांठ को पीले धागे में बांधकर गुरुवार को गले में धारण करने से बृहस्पति के अच्छे  फल मिलते है  और यह तो हम सब को पता है की हल्दी का दूध पीने से Arthritis , Bones और Infections में ज़बरदस्त फायदा मिलता है....

                 ?जीरा?
 जीरा राहू व केतू का प्रतिनिधित्व  करता है.

? जीरा का सेवन खाने में करने से आप के दैनिक जीवन में सौहार्द व शांति बने रहते हैं.

                   ?हींग?
हींग बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है

 ? हींग का नित्य प्रतिदिन सेवन करने से वात व पित्त के रोग नियंत्रित होते हैं हींग आप की पाचन शक्ति भी बढाती है व क्रोध समस्या से भी निजात दिलाती है.

                  ?सौंफ :?
          शुक्र ग्रह मजबूत होता है

? सौंफ हम रोज़ तो इस्तेमाल करते है ,पर क्या आप को पता है
*की सौंफ के सेवन 
से आपका शुक्र ग्रह मजबूत होता हैं .,,
खुश रहो मस्त रहो ,

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Star मेधावी छात्र छात्राओं को गिफ्ट वाउचर प्रदान किये गए।
Posted by: admin - 02-03-2019, 11:35 PM - Forum: Gift Voucher - No Replies

सम्माननीय स्वजन, 

हम सब के लिये अत्यन्त हर्ष का विषय है कि बाल प्रतिभा सम्मान (आयुवर्ग 5 से 18 वर्ष ) के अन्तर्गत प्रतिभाओं को वेबसाइट रेकी एंड एस्ट्रोलोजी प्रिडिक्शंस द्वारा समस्त मेधावी 25 छात्र छात्राओं को 1000रू. के गिफ्ट वाउचर प्रदान किये गए। आपके सफल भविष्य की कामना के साथ !!
   

.pdf   Gift Voucher.pdf (Size: 344.54 KB / Downloads: 25)


1. कुमारी अपूर्वा कराहे उम्र (हा.से.94.6%)

2. कुमारी सुरभि कराहे उम्र 
 (हाई स्कुल 94.2%) 

3. कु. आस्था नेगी उम्र 
(राष्ट्रीय खिलाड़ी- ताइक्वांडो, गोल्ड मेडलीस्ट)

4. कु. परागी भाटेय उम्र 
(किड्स फैशन शो राष्ट्रीय स्तर) 

5. अनय उपाध्याय उम्र 
(जिला स्तरीय खिलाड़ी- ताइक्वांडो, सिल्वर मेडलीस्ट)

6. कु. मुस्कान शर्मा 
राष्ट्रीय टी वी कलाकार 
डांसिंग "रोबोटिक गर्ल"

7. कु. राशी चौकड़े
राष्ट्रीय एरोबिक्स चेम्पियन

8. तान्या शर्मा 
उम्र :-  14 साल
शास्त्रीय संगीत
निवासी : - भोपाल

9. अनंत शर्मा
उम्र 14 साल
(राष्ट्रीय खिलाड़ी- एल्बो बाक्सींग, ब्रांज मेडलीस्ट)

10. कु. समृद्धि शर्मा उम्र 11 वर्ष
(राष्ट्रीय एरोबिक्स चेम्पियन गोल्ड मेडलिस्ट) 

11. ध्रुव शर्मा उम्र 17 साल
कक्षा 10 टॉपर  आय पी एस

12. समृद्धि शर्मा उम्र 16 वर्ष
 (राष्ट्रीय खिलाड़ी- ताइक्वांडो, गोल्ड मेडलीस्ट)

13. ऋषीका शर्मा उम्र 17 वर्ष
(राष्ट्रीय खिलाड़ी - वोविनम,  गोल्ड मेडलिस्ट) 

14.शान्तनु खरे , गोल्ड मेडलिस्ट ( शतरंज )

15. शिवांकर S/O डॉ विपिन शर्मा
उम्र :- 15 साल
N. S. O. सिल्वर मेडल
निवासी :-  सुदामा नगर, इंदौर

16) केशव S/O श्री संजय सोहनी
राष्ट्रीय खिलाड़ी बेडमेन्टन
गोल्ड मेडलिस्ट -जिला स्तर
निवासी 174 सिद्धि पुरम, इंदौर

17. कु कीर्ति सकरगाये
कबड्डी, दौड़, में राष्ट्रीय स्तर में 
म. प्र. का प्रातिनिधित्व
निवास संगम नगर इंदौर

18 कु स्तुति भट्ट
क्लास 6th में 92/:
उम्र 10 वर्ष
निवासी लिम्बोदी इंदौर

19. राधिका कश्यप उम्र 17 वर्ष
कक्षा 10वीं में 92.8%

20. मिहिका पूरे
गोल्ड मैडल - इंटरनेशनल शूटिंग

21. वेद शर्मा
तबला वादन

22. श्लोक शर्मा
गायन

अन्य उपस्थित छात्र छात्राओं को भी गिफ्ट वाउचर दिये गये जिनके नाम इस लिस्ट में नहीं हैं.
आप सभी से अनुरोध हे कि आप भी समाज के एसे प्रतिभाशाली बच्चों की जानकारी दें जिन्होने किसी विशिष्ट विधा जैसे अध्यापन, गीत, संगीत, नृत्य, खेल आदि मे विशिष्ट स्थान प्राप्त किया हो। 

Giving information about reiki healing and astrology counseling. About our website work and success. We gifted 1000 rs vouchers to 25 bright students for excellence in different fields.

   
   
   
   
   
   
   
   

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Thumbs Up ROLE OF HARDA KRISHI UPAJ MANDI IN FARMER EMPOWERMENT किसान सशक्तिकरण में हरदा कृषि
Posted by: admin - 02-02-2019, 10:09 PM - Forum: New videos - No Replies

ROLE OF HARDA KRISHI UPAJ MANDI IN FARMER EMPOWERMENT किसान सशक्तिकरण में हरदा कृषि उपज मंडी की भूमिका
Assistant Producer / Director --- Ms. Deepa Billorey


Produced in 2011 and shown in Malaysia.

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Thumbs Up पिता - बेटी
Posted by: Rohit Mishra - 02-02-2019, 04:10 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

 पिता - बेटी 

 पापा मैने आपके लिए हलवा बनाया है 11 साल की बेटी बोली

 अपने पिता से बोली जो की अभी ऑफिस से घर में पहुंचे ही थे 

 पिता - वाह क्या बात है,लाकर खिलाओ फिर पापा को !! 

 बेटी दौड़ती हुई फिर रसोई में गई और बड़ा कटोरा भरकर हलवा लेकर आई 

 पिता ने खाना शुरू किया और बेटी को देखा पिता की आखों में आंशू आ गये  

 क्या हुआ पापा हलवा अच्छा नहीं लगा क्या 

 पिता - नहीं मेरी बेटी बहुत अच्छा बना है , और देखते देखते पूरा कटोरा खाली कर दिया 

 इतने में माँ बाथरूम से नहाकर बाहर आई, और बोली : ला मुझे खिला अपना हलवा !! 

 पिता ने बेटी को 50 रुपए इनाम में दिये ।
 बेटी खुशी से मम्मी के लिए रसोई से हलवा लेकर आई 

 मगर ये क्या जेसे ही उसने हलवा की पहली चम्मच मुँह में डाली तो तुरंत थूक दिया । 

 और बोली ये क्या बनाया है ... ये कोई हलवा है इसमें चीनी नहीं नमक भरा है, 

 और आप इसे कैसे खा गए ये तो एकदम कड़वा है !! 

 पत्नी :- मेरे बनाये खाने में तो कभी नमक कम है कभी मिर्च तेज है कहते रहते हो 

 और बेटी को बजाय कुछ कहने के इनाम देते हो !! 

 पिता हँसते हुए : पगली ... तेरा मेरा तो जीवन भर का साथ है ...
 रिश्ता है पति पत्नी का, जिसमे नोक झोक .. रूठना मनाना सब चलता है !! 
 मगर ये तो बेटी है कल चली जाएगी ।
 आज इसे वो अहसास ... वो अपनापन महसूस हुआ जो मुझे इसके जन्म के समय हुआ था । 

 आज इसने बड़े प्यार से पहली बार मेरे लिए कुछ बनाया है , 
 फिर बो जैसा भी हो मेरे लिए सबसे बेहतर और सबसे स्वादिष्ट है !! 
 ये बेटिया अपने पापा की परीया और राजकुमारी होती है जैसे तुम अपने पापा की परी हो !! 

 वो रोते हुए पति के सीने से लग गई और सोच रही थी ... इसी लिए हर लड़की अपने पति में  अपने पापा की छवि ढूंढ़ती है !! 

 दोस्तों ... यही सच है, 

 हर बेटी अपने पिता के बड़े करीब होती है या यूँ कहें कलेजे का टुकड़ा 
 इसलिए शादी में विदाई के समय सबसे ज्यादा पिता ही रोता है !!
 
 कई जन्मों की जुदाई के बाद बेटी का जन्म होता है ,  इसलिए तो कन्या दान करना सबसे बड़ा पूण्य होता है !!

 यदि आप अपनी बेटी से pyaar करते है तो इसे आगे जरूर share करे !! 
Please Please
???????
             ✍

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Thumbs Up महान क्रांतिकारी 'पंजाब केसरी' लाला लाजपतराय जी
Posted by: Govind Acharya - 02-02-2019, 02:56 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

*⚜⛳सनातन धर्म की जय⛳⚜*


*⚜⛳सनातन धर्म रक्षक समिति⛳⚜*

*स्वतंत्रता संग्राम के महान महान क्रांतिकारी 'पंजाब केसरी' लाला लाजपतराय जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन??????*

*लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी , 1865 ई. को अपने ननिहाल के ग्राम ढुंढिके, ज़िला फ़रीदकोट , पंजाब में हुआ था....उनके पिता लाला राधाकृष्ण लुधियाना ज़िले के जगराँव क़स्बे के निवासी अग्रवाल वैश्य थे....* 
*लाला राधाकृष्ण अध्यापक थे....वे उर्दू तथा फ़ारसी के अच्छे जानकार थे...इसके साथ ही इस्लाम के मन्तव्यों में भी उनकी गहरी आस्था थी...वे मुसलमानी धार्मिक अनुष्ठानों का भी नियमित रूप से पालन करते थे...नमाज़ पढ़ना और रमज़ान के महीने में रोज़ा रखना उनकी जीनवचर्या का अभिन्न अंग था, यथापि वे सच्चे धर्म- जिज्ञासु थे...!!⛳*

 *अपने पुत्र लाला लाजपत राय के आर्य समाजी बन जाने पर उन्होंने वेद के दार्शनिक सिद्धान्त 'त्रेतवाद' को समझने में भी रुचि दिखाई... पिता की इस जिज्ञासु प्रवृत्ति का प्रभाव उनके पुत्र लाजपत राय पर भी पड़ा था....लाजपत राय के पिता वैश्य थे, किंतु उनकी माती सिक्ख परिवार से थीं...दोनों के धार्मिक विचार भिन्न-भिन्न थे...*
*इनकी माता एक साधारण महिला थीं...वे एक हिन्दू नारी की तरह ही अपने पति की सेवा करती थीं....*



*शिक्षा*

*लाजपत राय की शिक्षा पाँचवें वर्ष में आरम्भ हुई... सन 1880 में उन्होंने कलकत्ता तथा पंजाब विश्वविद्यालय से एंट्रेंस की परीक्षा एक वर्ष में उत्तीर्ण की और आगे पढ़ने के लिए लाहौर आ गए...यहाँ वे गर्वमेंट कॉलेज में प्रविष्ट हुए और 1882 में एफ. ए. की परीक्षा तथा मुख़्तारी की परीक्षा साथ-साथ उत्तीर्ण की...यहीं वे आर्य समाज के सम्पर्क में आये और उसके सदस्य बन गये....???*

*भारत के पंजाब प्रदेश में जन्मे लाजपत राय देश के अमर क्रांति कारी व स्वतंत्रता सेनानी थे । सन् 1865 ई॰ में छोटे से गाँव में जन्मे लाला लाजपत राय ने देशभक्ति में वे आदर्श स्थापित किए जिसके लिए संपूर्ण देश उनका सदैव ऋणी रहेगा ...*
*मातृभूमि के लिए उनका बलिदान आज भी देश के नागरिकों में देशभक्ति की भावना का संचार करता है ...*
 *संपूर्ण भारत उन्हें ‘पंजाब केसरी’ के नाम से जानता है ...*
*लाला लाजपत राय वकालत का कार्य करते थे .... परंतु पराधीन भारत का दर्द उन्हें हमेशा कचोटता रहता था ...* *गाँधी जी के संपर्क में आने पर वे उनसे अत्यधिक प्रभावित हुए तथा बाद में अपने व्यवसाय को तिलांजलि देकर वे समर्पित भाव से गाँधी जी द्वारा चलाए गए स्वतंत्रता आदोलन में शामिल हो गए ...*
*वे सदैव से ही अंग्रेजों व अंग्रेजी सरकार का विरोध करते रहे जिससे क्षुब्ध अंग्रेजों ने सन् 1907 ई॰ में उन्हें बर्मा जेल में डाल दिया ...*
 *जेल से लौटने के पश्चात् वे और भी अधिक सक्रिय हो गए ... उन्होंने महात्मा गाँधी की अध्यक्षता में होने वाले असहयोग आदोलन में खुलकर उनका साथ दिया ...उन्हें कई बार अंग्रेजों ने जेल भेजा परंतु वे अपने उद्देश्य से तनिक भी विचलित नहीं हुए ...*
 *भारत के स्वतंत्रता आदोलन के दौरान जब साइमन कमीशन भारत आया तब कांग्रेस के द्वारा उसका खुलकर विरोध किया गया ... साइमन कमीशन की नियुक्ति हालाँकि 1926 ई॰ में ब्रिटिश सरकार द्वारा की गई थी, परंतु इसका भारत आगमन सन् 1928 में हुआ था ....* 
*लाला लाजपत राय उस समय कांग्रेस के अध्यक्ष थे ...*
*लाहौर में साइमन कमीशन के विरोध में वे विशाल रैली को संबोधित कर रहे थे तब अंग्रेजों ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया ... उस घातक चोट के तीन हफ्ते पश्चात् भारत माता का वह वीर सपूत चिर निद्रा में लीन हो गया ..* 
*समस्त देश में शोक की लहर उठ गई...*
 *क्रोधित व क्षुब्ध देशवासियों ने जगह -जगह आगजनी व हिंसात्मक प्रदर्शन किए ...परंतु कांग्रेस के नेताओं ने अपने प्रयासों से इसे बंद करवाया ...!!*
*लाला लाजपत राय एक सच्चे देशभक्त के साथ ही एक सच्चे समाज सुधारक भी थे... वे जीवन पर्यंत अछूतों के उद्धार के लिए प्रयासरत रहे ...!!*
*इसके अतिरिक्त उन्होंने देश में शिक्षा के क्षैत्र में कई कार्य किए ... उन्होंने नारियों को भी शिक्षा का समान अधिकार देने हेतु सदैव प्रयास किए ...!!*


*उन्होंने विभिन्न स्थानों पर अनेक विद्यालयों*
*की स्थापना की ...वै*
*मूलत: आर्य समाज के प्रवर्तक थे.* ⛳⛳

*इसके अतिरिक्त वे एक प्रभावशाली वक्ता भी थे।उनकी वाणी में जोश उत्पन्न करने की वह क्षमता थी जो कमजोर व्यक्तियों को भी ओजस्वी बना देती थी।*
*लाला लाजपत राय एक धार्मिक व्यक्ति थे पर उन्होंने हिंदू धर्म मैं व्याप्त कुछ कट्टरताओं और रूढ़ियों का सदैव विरोध किया।.ईश्वर पर उनकी सच्ची आस्था थी। वे निडर एवं बहादुर इंसान थे । मातृभूमि के लिए उनका त्याग और बलिदान अतुलनीय है।।*
*देश की स्वतंत्रता के लिए उनके प्रयासों के लिए राष्ट्र उनका सदैव ऋणी रहेगा। वे एक सच्चे महामानव थे जिन्होंने सदैव मानवता का संदेश दिया ।उनकी देशभक्ति , साहस और आत्म-बलिदान आज भी प्रेरणा के स्रोत बनकर हमारे हृदयों में विद्यमान हैं ।*
*इतिहास उन्हें कभी भुला नहीं सकेगा, वास्तव में लाला लाजपत राय भारत के उन अमर स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे जिन्होंने मातृभूमि की गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने में अपनी ओर से पूरा प्रयत्न किया।*
*ऐसे ही कई देशभक्तों के बलिदानों के पश्चात् देश को आजादी की प्राप्ति हुई ..!!*
*हमें अपनी आजादी की रक्षा इन नेताओं के आदर्शों पर चलकर ही करनी होगी। लाला लाजपत राय ने देश के नवनिर्माण का जो स्वप्न देखा था, उसे हम उनके बताए मार्ग पर चलकर साकार कर सकते हैं...!!*
*तो क्यो न हम भी एकता के सूत्र मे बंधकर..उनके स्वपन को पूरा करें*


       *_जनजागृति हेतु लेख को पढ़ने के उपरांत साझा अवश्य करें_*

*जय श्रीराम*⛳⛳
*वन्दे मातरम्*⛳⛳
                  ⚜?⛳?⚜

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Thumbs Up पत्नी क्या होती है।
Posted by: Kavita Sharma - 02-02-2019, 11:13 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

??  पत्नी क्या होती है। ???...                          .
रामलाल तुम अपनी बीबी से इतना क्यों डरते हो ? मैने अपने नौकर से पुछा।।
"मै डरता नही साहब उसकी कद्र करता हूँ , उसका सम्मान करता हूँ।"उसने जबाव दिया।
मैं हंसा और बोला-" ऐसा क्या है उसमें।
ना सुरत ना पढी लिखी।"
जबाव मिला-" कोई फरक नही पडता साहब कि वो कैसी है पर मुझे सबसे प्यारा रिश्ता उसी का लगता है।"
"जोरू का गुलाम।"मेरे मुँह से निकला।"
और सारे रिश्ते कोई मायने नही रखते तेरे लिये।"मैने पुछा।
*उसने बहुत इत्मिनान से जबाव दिया-* साहब जी माँ बाप रिश्तेदार नही होते। वो भगवान होते हैं।उनसे रिश्ता नही निभाते उनकी पूजा करते हैं।
भाई बहन के रिश्ते जन्मजात होते हैं!
दोस्ती का रिश्ता भी मतलब का ही होता है।
आपका मेरा रिश्ता भी दजरूरत और पैसे का है।
*पर,*
पत्नी बिना किसी करीबी रिश्ते के होते हुए भी हमेशा के लिये हमारी हो जाती है
अपने सारे रिश्ते को पीछे छोडकर।
और हमारे हर सुख दुख की सहभागी बन जाती है
आखिरी साँसो तक।
*मै अचरज से उसकी बातें सुन रहा था।*
वह आगे बोला-"साहब जी, पत्नी अकेला रिश्ता नही है, बल्कि वो पुरा रिश्तों की *भण्डार* है।
जब वो हमारी सेवा करती है हमारी देख भाल करती है ,
हमसे दुलार करती है तो एक माँ जैसी होती है।
जब वो हमे जमाने के उतार चढाव से आगाह करती है,और मैं अपनी सारी कमाई उसके हाथ पर रख देता हूँ क्योकि जानता हूँ वह हर हाल मे मेरे घर का भला करेगी तब पिता जैसी होती है।
जब हमारा ख्याल रखती है हमसे लाड़ करती है, हमारी गलती पर डाँटती है, हमारे लिये खरीदारी करती है तब बहन जैसी होती है।
जब हमसे नयी नयी फरमाईश करती है, नखरे करती है, रूठती है , अपनी बात मनवाने की जिद करती है तब बेटी जैसी होती है।
जब हमसे सलाह करती है मशवरा देती है ,परिवार चलाने के लिये नसीहतें देती है, झगडे करती है तब एक दोस्त जैसी होती है।

जब वह सारे घर का लेन देन , खरीददारी , घर चलाने की जिम्मेदारी उठाती है तो एक मालकिन जैसी होती है।
और जब वही सारी दुनिया को यहाँ तक कि अपने बच्चो को भी छोडकर हमारे बाहों मे आती है. . तब वह पत्नी, प्रेमिका, अर्धांगिनी , हमारी प्राण और आत्मा होती है जो अपना सब कुछ सिर्फ हमपर न्योछावर करती है।"
*मैं उसकी इज्जत करता हूँ तो क्या गलत करता हूँ साहब ।"*
मैं उसकी बात सुनकर अकवका रह गया।।
? *एक अनपढ़ और सीमित साधनो मे जीवन निर्वाह करनेवाले से जीवन का यह मुझे एक नया अनुभव हुआ ।*

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Posted by: admin - 02-02-2019, 08:13 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

सम्माननीय स्वजन, 
हम सब के लिये अत्यन्त हर्ष का विषय है कि बाल प्रतिभा सम्मान (आयुवर्ग 5 से 18 वर्ष ) के अन्तर्गत प्रतिभाओं को वेबसाइट रेकी एंड एस्ट्रोलोजी प्रिडिक्शंस द्वारा समस्त मेधावी छात्र छात्राओं को 1000रू. के गिफ्ट वाउचर प्रदान किये जा रहे हैं। आपके सफल भविष्य की कामना के साथ !!
   

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Thumbs Up Be positive
Posted by: Mohit - 01-22-2019, 01:19 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

*श्रीलंका* का एक *खिलाड़ी* था,
 उसके दिमाग में बस *एक ही चीज* चलती थी;

✔ *क्रिकेट...*
✔ *क्रिकेट...* और बस 
✔ *क्रिकेट...*

?अपनी कड़ी *मेहनत और लगन* के दम पर उसे *श्रीलंकन टेस्ट टीम* में डेब्यू करने का *मौका* मिला...

? *पहली इन्निंग्स :-* जीरो पे आउट

? *दूसरी इन्निंग्स :-* जीरो पे आउट
.
.
.
टीम से *निकाल दिया* गया...
.
.
.
*प्रैक्टिस… प्रैक्टिस… प्रैक्टिस…*
.
.
*1st क्लास मैच* में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया
.
.
.
? *21 महीने बाद* फिर से मौका मिला।
.
.
? *पहली इन्निंग्स :-* जीरो पे आउट

? *दूसरी इन्निंग्स :-* 1 रन पे आउट
.
.
*फिर टीम से बाहर।*
.
.
*प्रैक्टिस… प्रैक्टिस… प्रैक्टिस…*
.
.
☄ *1st क्लास* मैचेस में *हजारों रन* बना डाले; 
और
☄ *17 महीने बाद* एक बार फिर से मौका मिला...
.
.
? *पहली इन्निंग्स :-* जीरो पे आउट
? *दूसरी इन्निंग्स :-* जीरो पे आउट
.
.
फिर टीम से *निकाल दिया*;
.
.
*प्रैक्टिस… प्रैक्टिस… प्रैक्टिस…*
.
.
*3 साल* बाद एक बार फिर उस खिलाड़ी को *मौका दिया* गया...
.
.
.
?? जिसका नाम:- *मर्वन अट्टापट्टू*

*इस बार;*
? *अट्टापट्टू* नहीं चूका...
? उसने *जम कर* खेला...
☄श्रीलंका की और से *16 शतक* और *6 दोहरे* शतक जड़ डाले...
            *और*
☄श्रीलंका का सबसे *सफल कप्तान* बना!

� *सोचिये;*
?जिसको *दूसरा रन* बनाने में *6 साल* लगा;
?वो इतना *बड़ा कारनामा* कर सकता है;
?तो *कोई भी* आदमी *कुछ भी* कर सकता है!

☄कुछ करने के लिए *डंटे रहना* पड़ता हैं;
☄लगे रहना पड़ता है;
☄मैदान *छोड़ देना आसान* होता है;
☄मुश्किल होता है टिके रहना;
☄और जो *टिका* रहता है;
☄वो आज नहीं तो कल ज़रूर *सफल* होता है।

? *इसलिए;*
? आपने जो कुछ *पाने* का *निश्चय* किया है;
? उसे पाने की *अपनी जिद मत छोडिये…*

☄ *मन* से किये छोटे प्रयास;
☄ हमेशा बड़ा *परिणाम* देते है...

*??So Be positive ?

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Thumbs Up मोदी ने क्या दिया
Posted by: Nayan Pande - 01-22-2019, 11:41 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

सुनिए, मोदी ने मुझे कुछ दिया हो या न दिया हो पर मोदी मेरी कल्पना को हकीक़त में बदलने का काम अवश्य कर रहे है.

मेरी कल्पना जो मैंने हॉलीवुड फिल्में देख कर भारत के लिए सोची थी वो आज भारत की हकीक़त बन चुकी है :

? भारतीय सेना भी अमेरिका, रूस की तरह आधुनिक हथियारों से लैस हो : हो गई.

? भारत के पास भी अमेरिका, रूस की तरह अपना एक सैटेलाइट हो जो सेना को लाइव फुटेज दिखा सके : हो गया. 

? भारत के पास भी अमेरिका, रूस की तरह आधुनिक तकनीक से युक्त “वॉर रूम” हो जहां बैठ कर दुश्मन की हरकतों पर लाइव नजर रखी जा सके : यह भी हो गया.

? भारत के पास भी आधुनिक युद्धक हेलीकॉप्टर हो, 2 पंखों वाला हेलीकॉप्टर हो : मोदी जी ने वैसा ही अपाचे और शिनूक खरीद दिया जो मार्च तक भारतीय सेना को मिल भी जाएगा.

? भारतीय सेना के पास भी आधुनिक ऑटोमेटिक हथियार हो, नाइट विजन हो, ड्रोन हो, ऑटोमेटिक गाइडेड मिसाइल हो : ये सब भी हो गया.

? भारत में भी ऐसा ही अस्पताल हो जैसा हमने GTA गेम में देखा था, जिसपर हेलीकॉप्टर भी उतर सके, बड़ा सा आधुनिक अस्पताल जो सभी सुविधाओं से लैस हो : यह भी पूरा हो गया अभी हाल ही में, एसवीपीआईएमएसआर के रूप में.

? भारतीय सेना के पास रेत में, बर्फ में चलने वाले वाहन हो : हो गए.

? विदेशों की तरह देश में सिर्फ एक (डॉक्यूमेंट) से सब कुछ हो, पैसा भी निकले, पहचान पत्र का भी काम करे इत्यादि : ये भी कर दिया मोदी जी ने आधार के रूप में 

? एक ऐसा सेंटर हो जहां से पूरे शहर की निगरानी रखी जा सके : ये भी हो गया कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के रूप में.

? भारत में भी आधुनिक एक्सप्रेस हाइवे हो : वो भी बना कर दिखा दिया 14 लेन का दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस हाइवे.

? नदियों पर जहाज चले : ये भी कर के दिखा दिया मोदी जी ने.

? नदियों और समुद्रों पर ऐसे जहाज चले जिसमें गाड़ियां भी जा सके : ये भी कर दिया रो रो फेरी के रूप में.

? आधुनिक रेलवे स्टेशन हो, बस स्टेशन हो, बुलेट ट्रेन जैसी दिखने वाली आधुनिक ट्रेनें भारत में भी चलें : ये सब भी मोदी जी ने पूरा कर दिया, ट्रेन 18 के रूप में सेमी बुलेट ट्रेन ही चलवा दी.

? अभी मेरी कुछ कल्पनाएं और है जो पूरी होना बाकी है और मुझे विश्वास है मोदी जी इसको जरूर पूरा करेंगे.

? भारतीय पुलिस भी आधुनिक तकनीक और हथियारों से लैस हो, वर्दी पर कैमरा, माइक लगा हो जो सीधा कंट्रोल रूम से जुड़ा हो भारतीय पुलिस बल के पास भी अपना हेलीकॉप्टर हो. 

? हर प्रकार की आपातकाल स्थिति के लिए सिर्फ एक ही नंबर हो, वहां से संबंधित विभाग को कॉल ट्रांसफर हो. 

? इत्यादि बहुत सारी कल्पनाएं आज हकीक़त बन चुकी है, बन रही है. और ये सब मोदी जी ने स्वविवेक से किया है. मतलब हमारे फेसबुक वाले चुटियापे से नहीं जो दिन रात हम फेसबुक पर मोदी जी को सिखाते रहते है कि उनको काम क्या करना चाहिए और कैसे करना चाहिए. 

हो सकता है जो हमारी आपकी कल्पना इस देश के प्रति है वही सोच इस देश के लिए मोदी जी भी रखते हो, इसीलिए कहता हूं मित्रों : *#TrustNaMo #ModiMatters*


*जागरूकता के लिए पढ़ने के बाद सन्देश को आगे भेजना न भूलें??*

????????

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Thumbs Up World's 8 superb lessons:
Posted by: Nilima Jain - 01-22-2019, 10:12 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

*World's 8 superb lessons:*

*Shakespeare :*??

Never  play  with the feelings

of  others  because  you may

win the  game but the  risk is

that  you  will surely  lose 

the person  for a  life time.

--------------------------------

*Napoleon:*??

The world  suffers  a  lot. Not

because  of  the  violence  of

bad people, But because   of

the silence of good people!

--------------------------------

*Einstein :*??

I  am  thankful  to  all those

who  said  NO  to  me   It's

because  of  them  I  did  it

myself.

--------------------------------

*Abraham Lincoln :*??

If friendship is your weakest

point  then  you  are  the

strongest  person  in the

world.

--------------------------------

*Chralie Chaplin :*??

Laughing  faces  do  not

mean that  there is  absence

of sorrow!  But it means that

they  have the ability to deal

with it. 

----------------------

*William  Arthur :* ??

Opportunities   are  like

sunrises, if  you  wait too

long  you  can miss them. 

------------------------------

*Hitler :* ??

When  you  are  in  the light,

Everything follows  you, But

when  you  enter  into   the

dark, Even your own shadow

doesn't  follow  you.

--------------------------------

*Vivekananda :* ??

Coin  always  makes  sound

but  the  currency  notes are

always  silent.  So  when

your value  increases

keep quiet.

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Big Grin Funny
Posted by: Navin Sharma - 01-21-2019, 04:53 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

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Thumbs Up ब्राह्मण-परम्परा
Posted by: Govind Acharya - 01-21-2019, 11:58 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

ब्राह्मण-परम्परा

एक कुलीन ब्राह्मण को अपनी कुल परम्परा का सम्पूर्ण परिचय निम्न  ११ (एकादश) बिन्दुओं के माध्यम से ज्ञात होना चाहिए -

[१]  गोत्र।

[२]  प्रवर।

[३]  वेद।

[४]  उपवेद।

[५]  शाखा।

[६]  सूत्र।

[७]  छन्द।

[८]  शिखा।

[९]  पाद।

[१०]  देवता।

[११]  द्वार।


[१] गोत्र: गोत्र का अर्थ है कि वह कौन से ऋषिकुल का है या उसका जन्म किस ऋषिकुल से सम्बन्धित है । किसी व्यक्ति की वंश-परम्परा जहां से प्रारम्भ होती है, उस वंश का गोत्र भी वहीं से प्रचलित होता गया है। हम सभी जानते हें की हम किसी न किसी ऋषि की ही संतान है, इस प्रकार से जो जिस ऋषि से प्रारम्भ हुआ वह उस ऋषि का वंशज कहा गया । इन गोत्रों के मूल ऋषि – विश्वामित्र, जमदग्नि, भारद्वाज, गौतम, अत्रि, वशिष्ठ, कश्यप- इन सप्तऋषियों और आठवें ऋषि अगस्त्य की संतान गोत्र कहलाती है। यानी जिस व्यक्ति का गौत्र भारद्वाज है, उसके पूर्वज ऋषि भारद्वाज थे और वह व्यक्ति इस ऋषि का वंशज है। इन गोत्रों के अनुसार इकाई को "गण" नाम दिया गया, यह माना गया की एक गण का व्यक्ति अपने गण में विवाह न कर अन्य गण में करेगा। इस प्रकार कालांतर में ब्राह्मणो की संख्या बढ़ते जाने पर पक्ष ओर शाखाये बनाई गई । इस तरह इन सप्त ऋषियों पश्चात उनकी संतानों के विद्वान ऋषियों के नामो से अन्य गोत्रों का नामकरण हुआ ।
गोत्र शब्द  एक अर्थ  में  गो अर्थात्  पृथ्वी का पर्याय भी है ओर 'त्र' का अर्थ रक्षा करने वाला भी हे। यहाँ गोत्र का अर्थ पृथ्वी की रक्षा करें वाले ऋषि से ही है। गो शब्द इन्द्रियों का वाचक भी है, ऋषि- मुनि अपनी इन्द्रियों को वश में कर अन्य प्रजाजनों का मार्ग दर्शन करते थे, इसलिए वे गोत्रकारक कहलाए। ऋषियों के गुरुकुल में जो शिष्य शिक्षा प्राप्त कर जहा कहीं भी जाते थे , वे अपने गुरु या आश्रम प्रमुख ऋषि का नाम बतलाते थे, जो बाद में उनके वंशधरो में स्वयं को उनके वही गोत्र कहने की परम्परा आविर्भूत हुई । जाति की तरह गोत्रों का भी अपना महत्‍व है, यथा -

१. गोत्रों से व्‍यक्ति और वंश की पहचान होती है ।

२. गोत्रों से व्‍यक्ति के सम्बन्धों की पहचान होती है ।

३. गोत्र से सम्बन्ध स्थापित करने में सुविधा रहती है ।

४. गोत्रों से निकटता स्‍थापित होती है और भाईचारा बढ़ता है ।

५. गोत्रों के इतिहास से व्‍यक्ति गौरवान्वित महसूस करता है और प्रेरणा लेता है ।

[२] प्रवर: प्रवर का अर्थ हे 'श्रेष्ठ" । अपनी कुल परम्परा के पूर्वजों एवं महान ऋषियों को प्रवर कहते हें । अपने कर्मो द्वारा ऋषिकुल में प्राप्‍त की गई श्रेष्‍ठता के अनुसार उन गोत्र प्रवर्तक मूल ऋषि के बाद होने वाले व्यक्ति, जो महान हो गए वे उस गोत्र के प्रवर कहलाते हें। इसका अर्थ है कि आपके कुल में आपके गोत्रप्रवर्त्तक मूल ऋषि के अनन्तर तीन अथवा पाँच आदि अन्य ऋषि भी विशेष महान हुए थे ।

[३] वेद:  वेदों का साक्षात्कार ऋषियों ने लाभ किया है , इनको सुनकर याद किया जाता है , इन वेदों के उपदेशक गोत्रकार ऋषियों के जिस भाग का अध्ययन, अध्यापन, प्रचार प्रसार, आदि किया, उसकी रक्षा का भार उसकी संतान पर पड़ता गया इससे उनके पूर्व पुरूष जिस वेद ज्ञाता थे तदनुसार वेदाभ्‍यासी कहलाते हैं। प्रत्येक ब्राह्मण का अपना एक विशिष्ट वेद होता है , जिसे वह अध्ययन -अध्यापन करता है ।

[४] उपवेद:  प्रत्येक वेद  से  सम्बद्ध  विशिष्ट  उपवेद  का  भी  ज्ञान  होना  चाहिये  । 

[५]  शाखा: वेदो के विस्तार के साथ ऋषियों ने प्रत्येक एक गोत्र के लिए एक वेद के अध्ययन की परंपरा डाली है , कालान्तर में जब एक व्यक्ति उसके गोत्र के लिए निर्धारित वेद पढने में असमर्थ हो जाता था तो ऋषियों ने वैदिक परम्परा को जीवित रखने के लिए शाखाओं का निर्माण किया। इस प्रकार से प्रत्येक गोत्र के लिए अपने वेद की उस शाखा का पूर्ण अध्ययन करना आवश्यक कर दिया। इस प्रकार से उन्‍होने जिसका अध्‍ययन किया, वह उस वेद की शाखा के नाम से पहचाना गया।

[६]  सूत्र: व्यक्ति शाखा के अध्ययन में असमर्थ न हो , अतः उस गोत्र के परवर्ती ऋषियों ने उन शाखाओं को सूत्र रूप में विभाजित किया है, जिसके माध्यम से उस शाखा में प्रवाहमान ज्ञान व संस्कृति को कोई क्षति न हो और कुल के लोग संस्कारी हों !

[७]  छन्द: उक्तानुसार ही प्रत्येक ब्राह्मण को  अपने परम्परासम्मत   छन्द का  भी  ज्ञान  होना  चाहिए  ।

[८]  शिखा: अपनी कुल परम्परा के अनुरूप शिखा को दक्षिणावर्त अथवा वामावार्त्त रूप से बांधने  की परम्परा शिखा कहलाती है ।

[९]  पाद: अपने-अपने गोत्रानुसार लोग अपना पाद प्रक्षालन करते हैं । ये भी अपनी एक पहचान बनाने के लिए ही, बनाया गया एक नियम है । अपने -अपने गोत्र के अनुसार ब्राह्मण लोग पहले अपना बायाँ पैर धोते, तो किसी गोत्र के लोग पहले अपना दायाँ पैर धोते, इसे ही पाद कहते हैं ।

[१०]  देवता: प्रत्येक वेद या शाखा का पठन, पाठन करने वाले किसी विशेष देव की आराधना करते है वही उनका कुल देवता [गणेश , विष्णु, शिव , दुर्गा, सूर्य इत्यादि पञ्च देवों में से कोई एक] उनके आराध्‍य देव है । इसी प्रकार कुल के भी  संरक्षक  देवता या कुलदेवी होती हें । इनका ज्ञान कुल के वयोवृद्ध  अग्रजों [माता-पिता आदि ] के द्वारा अगली पीड़ी को दिया जाता  है । एक कुलीन ब्राह्मण को अपने तीनों प्रकार के देवताओं का बोध  तो अवश्य ही  होना चाहिए -

(क) इष्ट देवता अथवा इष्ट देवी ।
(ख) कुल देवता अथवा कुल देवी ।
(ग) ग्राम देवता अथवा ग्राम देवी ।

[११]  द्वार: यज्ञ मण्डप में अध्वर्यु (यज्ञकर्त्ता)  जिस दिशा अथवा द्वार से प्रवेश करता है अथवा जिस दिशा में बैठता है, वही उस गोत्र वालों की द्वार होता है।

संकलित✍

।। जयतु ब्राह्मणम ।।

।। जय परशुरामजी ।।

।। जयति जय जय  सरस्वती माता ।।

।। जयति पूण्य सनातन संस्कृति ।।

।। जय महादेव ।।

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Star सनातन धर्म की जय हो
Posted by: Govind Acharya - 01-20-2019, 10:54 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

सनातन धर्म की जय हो


सनातन धर्म रक्षक समिति


*सनातन धर्म : विज्ञान आधारित धर्म*

सनातन धर्म विश्व का पहला व सबसे प्राचीन पुरातन धर्म है। कुछ मनीषियों के मत के अनुसार यह धर्म नहीं अपितु जीवन जीने की संस्कृति है। सनातन धर्म में विभिन्न देवी देवताओं की पूजा होती है और सभी देवता प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से प्रकृति से जुड़े होते है। सनातन धर्म वास्तव में प्रकृति के विभिन्न रूपों की पूजा करने की शिक्षा देता है जो अन्य किसी धर्म संस्कृति में नहीं है। इसलिए हम सनातन धर्म को विज्ञान पर आधारित धर्म कहते व मानते है। इसलिए आज हम आपको बताते है कि हमारी परम्पराएँ व हमारा धर्म पूर्णत: विज्ञान पर आधारित है जिसमे अवैज्ञानिक कुछ नहीं है।

*जनेऊ धारण करना*
जनेऊ शरीर के लिए एक्युप्रेशर का काम करता है, जिससे कई प्रकार की बीमारियाँ कम होती है। लघु शंका के समय जनेऊ को दायें कान पर लगाया जाता है, जिससे लीवर और मूत्र सम्बन्धी रोग विकार दूर होते है।

*मन्त्र*
मन्त्र भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग है जिसे हम पूजा पाठ व यज्ञ आदि के समय प्रयोग करते है। कई मंत्रो से मष्तिष्क शांत होता है, जिससे तनाव से मुक्ति मिलती है वही ब्लडप्रेशर नियंत्रण में भी मंत्रो का प्रयोग किया जाता है।

*शंख बजाना*
प्रत्येक धार्मिक कार्यो पर शंख बजाते है जो सनातन संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है। शंख बजाने से जो ध्वनी निकलती है उससे सभी हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाते है। शंख मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों को भी दूर रखता है साथ ही यह कर्ण सम्बन्धी रोगों से बचाता है। शंख बजाने से श्वास सम्बन्धी रोग भी समाप्त हो जाते है।

*तिलक लगाना*
माथे के बीच में दोनों आँखों के बीच के भाग को नर्व पॉइंट बताया जाता है जिस कारण यहाँ पर तिलक लगाने से आध्यात्मिक शक्ति का संचार होता है। इससे किसी वस्तु पर ध्यान केन्द्रित करने की शक्ति बढती है। साथ ही यह मष्तिष्क में रक्त की आपूर्ति को नियंत्रण में रखता है।

*तुलसी पूजन*
सनातन धर्म में तुलसी को बहुत ही पवित्र माना जाता है जिसका अपना वैज्ञानिक कारण है। तुलसी अपने आप में एक उत्तम औषधि है जो कई प्रकार की बीमारियों से छुटकारा दिलाती है। खांसी, जुकाम और बुखार में तुलसी एक अचूक रामबाण है। घर में तुलसी लगाने से कई हानिकारक जीवाणु और मच्छर आदि दूर रहते है।

*पीपल की पूजा*
वैज्ञानिक प्रयोगों से सिद्ध हो चूका है की पूरी पृथ्वी पर एकमात्र पीपल का पेड़ ही 24 घंटे ऑक्सीजन छोड़ता है। जिस कारण से पीपल का महत्व और भी बढ़ जाता है। इसलिए आज भी पीपल को सींच कर उसकी परिक्रमा की जाती है। पीपल के पत्ते हृदयरोग की ओषधि में भी प्रयोग होते है।

*शिखा रखना*
आयुर्वेद के प्रसिद्ध आचार्य सुश्रुत के अनुसार, सिर का पिछला उपरी भाग संवेदनशील कोशिका का समूह है जिसकी सुरक्षा के लिए शिखा रखने का नियम होता है। योग क्रिया अनुसार इस भाग में कुण्डलिनी जागरण का सातवाँ चक्र होता है जिसकी ऊर्जा शिखा रखने से एकत्रित हो जाती है।

*गोमूत्र व गाय का गोबर*
गाय के मूत्र को सनातन धर्म में पवित्र माना जाता है क्यूंकि गौमूत्र कई भंयकर बीमारियों में रामबाण है। मोटापे के शिकार लोगों के लिए गौमूत्र एक अचूक दवा है साथ ही यह हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट कर देता है। गाय के गोबर का लेप करने से कई हानिकारक कीटाणु नष्ट हो जाते है इसलिए पुराने समय में घरो में गोबर से घरो के फर्श लिपे जाते थे।

*योग व प्राणायाम*
योग व् प्राणायाम का लाभ किसी से छुपा नहीं है। योग व प्राणायाम का आविष्कार भारत के ऋषि मुनियों द्वारा समस्त मानव जाति के कल्याण के लिए किया गया है। योग से स्ट्रेस व हाइपरटेंशन से मुक्ति मिलती है। मोटापे से लेकर कई जटिल बीमारियों में योग व प्राणायाम लाभकारी है। प्रतिदिन का प्राणायाम श्वास सम्बन्धी सभी रोगों से मुक्ति दिलाता है।

*हल्दी का प्रयोग*
हल्दी अपने आप में एक उत्तम एंटीबायोटिक है जिसका प्रयोग दुनिया के कई देश कर चुके है और ये सिद्ध कर चुके है की कैंसर जैसे भयंकर रोगों के उपचार में हल्दी एक अचूक औषधि है। हल्दी एक सौन्दर्यवर्धक औषधि भी है जिसका प्रयोग मुहं के दाग धब्बे हटाने व शरीर का रूप निखारने में किया जाता है इसलिए विवाह में एक रस्म हल्दी की भी होती है।

*घी के दिए जलाना*
दीपावली के समय हम अक्सर घरों की साफ़ सफाई करके दिये जलाते है और रौशनी करते है। दिए जलाने से केवल घर ही नहीं जीवन में भी प्रकाश होता है क्यूंकि दिए जलाने से सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है। घी का दिया कार्बन डाईऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों को समाप्त करता है। साथ ही तेल के दिए से हानिकारक कीटाणु भी समाप्त हो जाते है इसलिए वर्षा ऋतु के बाद दीपावली मनाई जाती है क्यूंकि वर्षा ऋतु के बाद कीट कीटाणु बढ़ जाते है।

*दाह संस्कार*
शव को जलाना अंतिम संस्कार का सबसे स्वच्छ उपाय है क्यूंकि इससे भूमि प्रदूषण नहीं होता। साथ ही चिता की लकडियो के साथ घी व अन्य सामग्री प्रयोग की जाती है जिससे वायु शुद्ध होती है। दाह संस्कार के लिए अधिक भूमि की आवश्यकता भी नहीं पड़ती। एक ही स्थान पर कई दाह संस्कार किये जा सकते है। सनातन हिन्दू धर्म के साथ साथ जैन, बोद्ध व सिक्ख भी इसी प्रकार से दाह संस्कार करते है।

*क्यों लगाया जाता है सिंदूर*
शादीशुदा महिलाएं सिंदूर लगाती हैं।
वैज्ञानिक तर्क : सिंदूर में हल्दी, चूना और मरकरी होता है। यह मिश्रण शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करता है। चूंकि इससे यौन उत्तेजनाएं भी बढ़ती हैं, इसीलिये विधवा औरतों के लिये सिंदूर लगाना वर्जित है। इससे स्ट्रेस कम होता है।

*व्रत रखना*
कोई भी पूजा-पाठ या त्योहार होता है, तो लोग व्रत रखते हैं।
वैज्ञानिक तर्क : आयुर्वेद के अनुसार व्रत करने से पाचन क्रिया अच्छी होती है और फलाहार लेने से शरीर का डीटॉक्सी फिकेशन होता है, यानी उसमें से खराब तत्व बाहर निकलते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार व्रत करने से कैंसर का खतरा कम होता है। हृदय संबंधी रोगों, मधुमेह, आदि रोग भी जल्दी नहीं लगते।

*सूर्य नमस्कार*
हिंदुओं में सुबह उठकर सूर्य को जल चढ़ाते हुए नमस्कार करने की परम्परा है।
वैज्ञानिक तर्क : पानी के बीच से आने वाली सूर्य की किरणें जब आंखों में पहुंचती हैं, तब हमारी आंखों की रौशनी अच्छी होती है।

*दक्ष‍िण की तरफ सिर करके सोना*
दक्ष‍िण की तरफ कोई पैर करके सोता है, तो लोग कहते हैं कि बुरे सपने आयेंगे, भूत प्रेत का साया आ जायेगा, आदि। इसलिये उत्तर की ओर पैर करके सोयें।
वैज्ञानिक तर्क : जब हम उत्तर की ओर सिर करके सोते हैं, तब हमारा शरीर पृथ्वी की चुंबकीय तरंगों की सीध में आ जाता है। शरीर में मौजूद आयरन यानी लोहा दिमाग की ओर संचारित होने लगता है। इससे अलजाइमर, परकिंसन, या दिमाग संबंधी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं रक्तचाप भी बढ़ जाता है।

*दीपक के ऊपर हाथ घुमाना*
वैज्ञानिक कारण : आरती के बाद सभी लोग दिए पर या कपूर के ऊपर हाथ रखते हैं और उसके बाद सिर से लगाते हैं और आंखों पर स्पर्श करते हैं। ऐसा करने से हल्के गर्म हाथों से दृष्टि इंद्री सक्रिय हो जाती है और बेहतर महसूस होता है।

*महिलाये क्यों पहनती है बिछिया ?*
वैज्ञानिक तर्क : पैर की दूसरी ऊँगली में चांदी का बिछिया पहना जाता है और उसकी नस का कनेक्शन बच्चेदानी से होता है| बिछिया पहनने से बच्चेदानी तक पहुचने वाला रक्त का प्रवाह सही बना रहता है इससे बच्चेदानी स्वस्थ बनी रहती है और मासिक धर्म नियमित रहता है |  चांदी पृथ्वी से ऊर्जा को ग्रहण करती है और उसका संचार महिला के शरीर में करती है |

*जयतु वैदिक विज्ञान...*
*जयतु  सनातन वैदिक धर्म...*

*वैदिक धर्म...विश्व  धर्म...*?



 

जनजागृति हेतु संदेश को  पढ़ने के उपरांत अवश्य साझा करें..

जय श्रीराम⛳⛳
वन्देमातरम्⛳⛳
⚜?⛳?⚜

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Tongue HOW ENGLISH AND ENGLISHMEN MAKE FUN OF EACH OTHER
Posted by: Sonali Chandra - 01-20-2019, 10:28 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

HOW ENGLISH AND ENGLISHMEN MAKE FUN OF EACH OTHER

*Enjoy the fun & the pun.*

*Q: Can February March?*
*A: No. But April May!*

*Q: Did you hear about the painter who was hospitalised?*
*A: Reports say it was due to too many strokes!*

*Q: Have you heard the joke about the butter?*
*A: I better not tell you, it might spread!*

*Q: How do you know that carrots are good for your eyesight?*
*A: Have you ever seen a rabbit wearing glasses?*

*Q: Music Teacher: What's your favourite musical instrument?*
*A: Kid: The lunch bell!*

*Q: What did the triangle say to the circle?*
*A: You’re pointless!*

*Q: What do you call a ghosts mom and dad?*
*A: Transparents!*

*Q: What do you call a group of men waiting for a haircut?*
*A: A Barbercue!*

*Q: What do you call a person that chops up cereal*
*A: A cereal killer!*

*Q: What do you call a South American girl who is always in a hurry?*
*A: Urgent Tina!*

*Q: What do you call two fat people having a chat?*
*A: A heavy discussion!*

*Q: What kind of emotions do noses feel?*
*A: Nostalgia!*

*Q: What kind of shorts do clouds wear?*
*A: Thunderwear!*

*Q: What's easy to get into but hard to get out of?*
*A: Trouble!*

*Q: Where do boats go to when they get sick?*
*A: The dock!*

*Q: Who cleans the bottom of the ocean?*
*A: A Mer-Maid!*

*Q: Why can't a leopard hide?*
*A: Because he's always spotted!*

*Q: Why can't your nose be 12 inches long?*
*A: Because then it would be a foot!*

*Q: Why did the barber win the race?*
*A: Because he took a short cut!*

*Q: Why did the boy tiptoe past the medicine cabinet?*
*A: He didn't want to wake the sleeping pills!*

*Q: Why did the tomato turn red?*
*A: It saw the salad dressing!*

*Q: Why did the tree go to the dentist?*
*A: To get a root canal!*

*Q: Why don't you see giraffes in elementary school?*
*A: Because they're all in High School!*

*Q: Why was the maths book sad?*
*A: Because it had too many problems!*

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Thumbs Up सिर्फ नेटवर्क लीडरों के लिए
Posted by: Sachin Goyal - 01-19-2019, 03:53 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

??????

*सिर्फ नेटवर्क लीडरों के लिए* :- 

 *" JIO " में अंबानी ने 8000 करोड़ खर्च किये । 6 महीने फ्री सुविधा दी । सब को नेट फ्री  और 4G की आदत डाल दी और 10 करोड़ ग्राहक अपने यानी कि JIO के बना लिए।*

    *1 अप्रैल 2017 से रोज 5 रूपये एक ग्राहक के पास से यानी कि महीने के 150 ले रहा है। मतलब के 10 करोड़ ग्राहक के 50 करोड़ रूपये रोज , महीने के 1500 करोड़ और साल भर के 18,000 करोड़ की आवक अम्बानी ग्रुप ने बनाली।*

     *और हाँ 100 रूपये मेंबरशिप के हिसाब से 1000 करोड़ तो पहले ही कमा लिए थे।*

      *महज 1 साल भर में ही अम्बानी ग्रुप 4 से 5 गुना पैसा कमा लिया।*

*इस बात से हमे यह पता चलता है कि अमीर लोग ईसी लिए अमीर बनते है कि वह अमीरी के सिद्धांत पे काम करते है, और गरीब लोग इसी लिए गरीब ही रह जाते है कि वह गरीबी के सिंद्धात को छोड़ते नही।*

*आइये देखे क्या है यह दोनो सिद्धान्त।*

 *गरीबी का सिद्धान्त* --

*व्यकि x काम का समय = इन्कम*
*1 व्यक्ति x 1 घंटे काम = 100 रुपये*
*1 व्यक्ति x 8 घंटे काम = 800 रुपये*

    *यदि यह 1 व्यक्ति काम करने लायक न रहे या किसी कारणवश यह व्यक्ति काम पर न जा पाए तो इस व्यक्ति की आय बंध हो जाएगी...क्योकि इसने ऐसा कोई नेटवर्क नही बनाया की खुद काम न कर पाए फिर भी पैसा आता रहे।*
      *(हार्ड वर्क)*

 *अमीरी का सिंद्धात* -

 *व्यक्तिआय  x काम का समय = आय*
*100 व्यक्ति x 100 घंटे काम = 10,000 रुपये*

*इसको कहते है नेटवर्क मार्केटिंग = स्मार्ट वर्क (Making Network of people like Ambani) लोगों का नेटवर्क बनाओ अंबानी की तरह*

*जो नेटवर्क नहीं बनायेगा ! वो कभी अमीर नही बन सकता, क्योकि वो अकेले कितना भी हार्ड वर्क कर ले, लेकिन सिर्फ अपनी, जरूरत ही पूरी कर सकता !

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Big Grin हंस हंस कर पेट दुख जाएगा.....
Posted by: Manish chaudhary - 01-19-2019, 12:42 PM - Forum: Share your stuff - Replies (1)

हंस हंस कर पेट दुख जाएगा.....

एक छात्र ने संस्कृत के शिक्षक से पूछा कि 
गुरुजी

एरिक तम नपाम्रधू।
एरिक तम नपाद्यम।।

इस श्लोक का अर्थ क्या होता है।
गुरूजी ने यह श्लोक सभी संस्कृत की पुस्तकों एवं ग्रंथों में खूब ढूंढा ,
सभी संस्कृत के ज्ञाताओं से भी इस श्लोक का अर्थ पूछा,
खूब मेहनत की, रात दिन एक कर दिए
लेकिन कहीं भी इसका अर्थ उन्हें नहीं मिला

लेकिन छात्र उनसे बार बार यही प्रश्न पूछता
अब तो गुरुजी छात्र को देखकर अपना रास्ता ही बदल देते थे।

आखिर हारकर गुरुजी ने छात्र से पूछा कि बताओ यह श्लोक तुमने कहां पढ़ा
तब छात्र ने कहा कि उसने यह श्लोक प्रिंसिपल के केबिन के बाहर पढ़ा।

गुरुजी उसे तत्काल प्रिंसिपल के कैबिन की ओर ले गए 
वहां छात्र ने उन्हें वह श्लोक कांच के गेट पर लिखा हुआ दिखाया....

गुरुजी ने छात्र को चप्पल टूटने तक मारा
क्योंकि वह कांच की उल्टी साइड से पढ़ रहा था
सीधी साइड पर लिखा था

धूम्रपान मत करिए।
मद्यपान मत करिए।।

Big Grin Big Grin

रजनीकांत ने सिर्फ मुख्यमंत्री बनने का सोचा ही था कि भगवान ने,,, 

जयललिता और करुणानिधि दोनों को उठा लिया ??????

Big Grin Big Grin
मेरा एक दोस्त हमेशा मुझसे कहता था कि कुछ अलग किया करो ...?

मैंने उसकी गर्लफ्रेंड को उससे अलग करवा दिया !?

अब बन्दूक लेकर मुझको ढूंढ रहा हैं!!!! 
?????
एक लड़की ने मुझे मेसेज भेजा की, 

"माता-पिता से बढ़कर कोई नही होता"

मैंने जवाब दिया - "तो हम भी माता-पिता बन जाये"!!!! ??

तो Block कर दिया डाकण ने????????????
अमेरिका चाहे जितनी मर्जी खोज कर ले लेकिन कभी ये नहीं पता लगा सकते कि ? ? ? ? ? साउथ की फिल्मों में बाप काला और बेटी गोरी कैसे हो जाती है..? ??????????????
जिंदगी बर्बाद करने के कई तरीके थे???

लेकिन उनमें मुझे ......whatsup चलाना  सबसे ठीक लगा?????????
कमरे की लाइट बन्द करके फ़ोन चलाओ तो ये,
कीड़े ?? मकोड़े मुँह पर ऐसे झपट्टा मारते हैं...

जैसे इनकी बीबियों से चैट कर रहा हूँ..
??????
एक चाइनीज़_श्लोक गौर फरमाएं.

"ल्यू शाओ चिंग पिन सिन जिन ते, 
कि होया ज्यूँ जिंग शिन हुन चिन ते, 
आऊं माउं चाऊँ.
??

भावार्थ:
जो मनुष्य संसार की सभी चिंताओं को त्याग कर चैन की नींद सोता है, सही अर्थ में वही मनुष्य इस संसार में सुखी है.
???
जो लोग  उलटे तरफ  बाइक  को तेज  रफ़्तार ? में चलाते है...*
????




????
*वो बहुत प्यारे होते है .....*



????
*भगवान_को.*


??????

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Wink Who said car names don't have meaning...???
Posted by: Pallavi - 01-19-2019, 12:35 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

Who said car names don't have meaning...???

*FIAT*: Failure in Italian Automotive Technology.

*FORD*: For Only Rough Drivers.

*HYUNDAI*: Hope You Understand Nothing's Drivable And Inexpensive....

*VOLVO*: Very Odd Looking Vehicular Object.

*PORSCHE*: Proof Of Rich Spoiled Children Having Everything.

*OPEL*: Old People Enjoying Life

*TOYOTA*: The One You Only Trust, Always.

*HONDA*: Hung Over, Now Driving Away.

*BMW*: Big Money Waste

*AUDI* : An unwanted debt invitation

*Mercedes*: Maximum enthusiasm , recurring cost, ego developed, eagerness to sell

And d best..

*MARUTI*:.

Made According to Roads & Users Typically Indian. ??

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Smile बड़े बावरे हिन्दी के मुहावरे
Posted by: Pallavi - 01-19-2019, 12:32 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

बड़े बावरे हिन्दी के मुहावरे
          
हिंदी के मुहावरे, बड़े ही बावरे है,
खाने पीने की चीजों से भरे है...
कहीं पर फल है तो कहीं आटा-दालें है,
कहीं पर मिठाई है, कहीं पर मसाले है ,
चलो, फलों से ही शुरू कर लेते है,
एक एक कर सबके मजे लेते है...
 
 
आम के आम और गुठलियों के भी दाम मिलते हैं,
कभी अंगूर खट्टे हैं,
कभी खरबूजे, खरबूजे को देख कर रंग बदलते हैं,
कहीं दाल में काला है,
तो कहीं किसी की दाल ही नहीं गलती है,
 
 
कोई डेड़ चावल की खिचड़ी पकाता है,
तो कोई लोहे के चने चबाता है,
कोई घर बैठा रोटियां तोड़ता है,
कोई दाल भात में मूसरचंद बन जाता है,
मुफलिसी में जब आटा गीला होता है,
तो आटे दाल का भाव मालूम पड़ जाता है,
 
 
सफलता के लिए कई पापड़ बेलने पड़ते है,
आटे में नमक तो चल जाता है,
पर गेंहू के साथ, घुन भी पिस जाता है,
अपना हाल तो बेहाल है, ये मुंह और मसूर की दाल है,
 
 
गुड़ खाते हैं और गुलगुले से परहेज करते हैं,
और कभी गुड़ का गोबर कर बैठते हैं,
कभी तिल का ताड़, कभी राई का पहाड़ बनता है,
कभी ऊँट के मुंह में जीरा है,
कभी कोई जले पर नमक छिड़कता है,
किसी के दांत दूध के हैं,
तो कई दूध के धुले हैं,
 
 
कोई जामुन के रंग सी चमड़ी पा के रोई है,
तो किसी की चमड़ी जैसे मैदे की लोई है,
किसी को छटी का दूध याद आ जाता है,
दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंक पीता है,
और दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता है,
 
 
शादी बूरे के लड्डू हैं, जिसने खाए वो भी पछताए,
और जिसने नहीं खाए, वो भी पछताते हैं,
पर शादी की बात सुन, मन में लड्डू फूटते है,
और शादी के बाद, दोनों हाथों में लड्डू आते हैं,
 

कोई जलेबी की तरह सीधा है, कोई टेढ़ी खीर है,
किसी के मुंह में घी शक्कर है, सबकी अपनी अपनी तकदीर है...
कभी कोई चाय-पानी करवाता है,
कोई मख्खन लगाता है
और जब छप्पर फाड़ कर कुछ मिलता है,
तो सभी के मुंह में पानी आ जाता है,

 
भाई साहब अब कुछ भी हो,
घी तो खिचड़ी में ही जाता है,
जितने मुंह है, उतनी बातें हैं,
सब अपनी-अपनी बीन बजाते है,
पर नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुनता है,
सभी बहरे है, बावरें है
ये सब हिंदी के मुहावरें हैं...
 

ये गज़ब मुहावरे नहीं बुजुर्गों के अनुभवों की खान हैं...
सच पूछो तो हिन्दी भाषा की जान हैं...

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Smile ? इतनी गर्मी क्यों????
Posted by: Pallavi - 01-19-2019, 12:29 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

? *इतनी गर्मी क्यों???* ?

कृप्या इस संदेश को अपने मित्रों को भेजिए और उन्हें आगे भी भेजने को कहिये !

*अति महत्वपूर्ण :-*

कुछ शहरों के मापे गए अधिकतम तापमान :

?लखनऊ - 47 डिग्री
?दिल्ली - 47 डिग्री
?आगरा - 45 डिग्री
?नागपुर - 45 डिग्री
?कोटा - 48 डिग्री
?हैदराबाद - 45 डिग्री
?पुणे - 42 डिग्री
?अहमदाबाद - 46 डिग्री
?मुम्बई - 42 डिग्री
?नाशिक - 40 डिग्री
?बैंगलोर - 40 डिग्री
?चेन्नई - 45 डिग्री

आने वाले साल में इन शहरो का तापमान 50 डिग्री पार कर जायेगा । यहाँ तक कि AC और पंखे भी आपको इस तापमान से नही बचा पाएंगे।

*इतनी गर्मी क्यों ??*

पिछले 10 सालों में सड़कों तथा हाईवे चौड़ीकरण के लिए 10 करोड़ से भी ज्यादा पेड़ काटे जा चुके है

जिसके मुकाबले सरकार 1 लाख पेड़ भी नही लगा पायी है ।

*भारत को ठंडा कैसे किया जाए ??*

पेड़ लगाने के लिए सरकार की प्रतीक्षा न करे

बीज बोने या पेड़ लगाने के लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च नही करने पड़ेंगे 

आप कुछ पेड़ो के बीज इकट्ठा कर लीजिये । जैसे :- शतावरी, बेल, पीपल, आम, जामुन, नीम, करंज इत्यादि ।

फिर किसी खुले जगह पर या सड़को के किनारे पर , गार्डनों में , हाईवे के किनारे पर और अपने घरों , मोहल्लों में  दो से तीन इंच का गड्ढा खोदिये। 

बीजो को मिट्टी के साथ उन गड्ढो में डाल दीजिए तथा गर्मी में हर दूसरे दिन उसे पानी देते रहिये ।

बरसात में आपको पानी देने की भी जरूरत नही पड़ेगी।

पन्द्रह से तीस दिनों में वहाँ एक छोटा सा पौधा उगता हुआ आपको दिखाई देगा।

कृप्या उसका परिपोषण करे तथा सुनिश्चित करे कि वो पौधे बड़े होकर पेड़ का रूप ले ले ।
चलिये इसे एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप देते हुए पूरे देश में दस करोड़ पेड़ लगाते है ।

हमे तापमान 50 डिग्री पार करने से रोकना होगा।

कृप्या अधिक से अधिक पेड़ लगाये तथा इस संदेश को सभी लोगो तक पहुँचाये।

चलिये समारोह तथा जन्मदिन की पार्टियों में छोटे पौधे ?और अंकुरित? हुए बीज तोहफे के तौर पर भेंट करे

 एक पौधे ?, एक संदेश ?के जरिये हम दस करोड़ पेड़ के लक्ष्य को आराम से हासिल कर सकते है।

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*तो देर किस बात की है*

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Smile देने वाला कौन ?
Posted by: Pallavi - 01-19-2019, 12:27 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

देने वाला कौन ?
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आज हमने भंडारे में भोजन करवाया। आज हमने ये बांटा, आज हमने वो दान किया...
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 हम अक्सर ऐसा कहते और मानते हैं। इसी से सम्बंधित एक अविस्मरणीय कथा सुनिए...
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एक लकड़हारा रात-दिन लकड़ियां काटता, मगर कठोर परिश्रम के बावजूद उसे आधा पेट भोजन ही मिल पाता था।
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एक दिन उसकी मुलाकात एक साधु से हुई। लकड़हारे ने साधु से कहा कि जब भी आपकी प्रभु से मुलाकात हो जाए, मेरी एक फरियाद उनके सामने रखना और मेरे कष्ट का कारण पूछना।
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कुछ दिनों बाद उसे वह साधु फिर मिला। 
लकड़हारे ने उसे अपनी फरियाद की याद दिलाई तो साधु ने कहा कि- "प्रभु ने बताया हैं कि लकड़हारे की आयु 60 वर्ष हैं और उसके भाग्य में पूरे जीवन के लिए सिर्फ पाँच बोरी अनाज हैं। इसलिए प्रभु उसे थोड़ा अनाज ही देते हैं ताकि वह 60 वर्ष तक जीवित रह सके।"
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समय बीता। साधु उस लकड़हारे को फिर मिला तो लकड़हारे ने कहा---
"ऋषिवर...!! अब जब भी आपकी प्रभु से बात हो तो मेरी यह फरियाद उन तक पहुँचा देना कि वह मेरे जीवन का सारा अनाज एक साथ दे दें, ताकि कम से कम एक दिन तो मैं भरपेट भोजन कर सकूं।"
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अगले दिन साधु ने कुछ ऐसा किया कि लकड़हारे के घर ढ़ेर सारा अनाज पहुँच गया। 
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लकड़हारे ने समझा कि प्रभु ने उसकी फरियाद कबूल कर उसे उसका सारा हिस्सा भेज दिया हैं। 
उसने बिना कल की चिंता किए, सारे अनाज का भोजन बनाकर फकीरों और भूखों को खिला दिया और खुद भी भरपेट खाया।
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लेकिन अगली सुबह उठने पर उसने देखा कि उतना ही अनाज उसके घर फिर पहुंच गया हैं। उसने फिर गरीबों को खिला दिया। फिर उसका भंडार भर गया। 
यह सिलसिला रोज-रोज चल पड़ा और लकड़हारा लकड़ियां काटने की जगह गरीबों को खाना खिलाने में व्यस्त रहने लगा।
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कुछ दिन बाद वह साधु फिर लकड़हारे को मिला तो लकड़हारे ने कहा---"ऋषिवर ! आप तो कहते थे कि मेरे जीवन में सिर्फ पाँच बोरी अनाज हैं, लेकिन अब तो हर दिन मेरे घर पाँच बोरी अनाज आ जाता हैं।"
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साधु ने समझाया, "तुमने अपने जीवन की परवाह ना करते हुए अपने हिस्से का अनाज गरीब व भूखों को खिला दिया। 
इसीलिए प्रभु अब उन गरीबों के हिस्से का अनाज तुम्हें दे रहे हैं।"
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??????
कथासार- किसी को भी कुछ भी देने की शक्ति हम में है ही नहीं, हम देते वक्त ये सोचते हैं, की जिसको कुछ दिया तो  ये मैंने दिया !
दान, वस्तु, ज्ञान, यहाँ तक की अपने बच्चों को भी कुछ देते दिलाते हैं, तो कहते हैं मैंने दिलाया । 
वास्तविकता ये है कि वो उनका अपना है आप को सिर्फ परमात्मा ने निमित्त मात्र बनाया हैं। ताकी उन तक उनकी जरूरते पहुचाने के लिये। तो निमित्त होने का घमंड कैसा ??
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दान किए से जाए दुःख, दूर होएं सब पाप।।
नाथ आकर द्वार पे, दूर करें संताप।।☺☺
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कथा अच्छी लगी हो तो शेयर अवश्य करना ?☺️
राधे-राधे
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Smile महर्षि दयानंद जी ने हरिद्वार कुम्भ मेले
Posted by: Sourav Gupta - 01-19-2019, 12:03 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

महर्षि दयानंद जी ने हरिद्वार कुम्भ मेले पर पाखंड खण्डनी पताका गाडी थी और कथित साधुसंतों से पूछा था -गंगा वा संगम में स्नान करने से पाप धुलते हैं वा मुक्ति होती है तो मेंढक मछलियों मगरमच्छों की मुक्ति क्यों नहीं हो जाती ?*
....................................
*मैं एक ही बार कुंभ गया हूं। सिर्फ देखने गया था कि किस-किस तरह की मूढ़ताएं वहां चलती हैं। उनमें सबसे बड़ी मूढ़ता नागा साधु हैं। और जो मैंने उनके चेहरे पर देखा, उसमें साधुता तो है ही नहीं; साधुता का नाममात्र नहीं है। जो हाव-भाव गुंडों के चेहरों पर होते हैं, वही हाव-भाव इन नागा साधुओं के चेहरों पर होते हैं। जरा भी भेद नहीं है। वही दुष्टता, वही दंभ, वही उपद्रव की वृत्ति। हर कुंभ के मेले में जो उपद्रव होते हैं, झगड़े होते हैं, खून-खराबे होते हैं, वे नागा साधुओं की वजह से हो जाते हैं। मगर दमन ऐसी चीज है कि इसके ये परिणाम होने वाले हैं-  दुनिया में कोई और देश होता, तो इन नागा साधुओं को पकड़ कर पागलखाने में रख दिया जाता। इनका इलाज किया जाता। इनको बिजली के शॉक दिए जाते। ये होश में नहीं हैं। ये क्या कर रहे हैं! ये विक्षिप्त हैं। मगर यहां ये महात्मा हैं! यहां पागल परमहंस समझे जाते हैं! यहां विक्षिप्त मुक्त समझे जाते हैं! और भीड़ तो वहां सबसे ज्यादा होगी, क्योंकि ऐसा मौका क्यों चूकना! नग्न आदमी को देखने की आकांक्षा तो बड़ी प्रबल है। और फिर इस तरह के बेहूदे प्रदर्शन... तुम्हारा प्रश्न ठीक है कि इस तरह के बेहूदे प्रदर्शनों को देखने लिए भीड़ इकट्ठी होती है और इसका कोई विरोध नहीं है। विरोध क्यों होगा? यह सदियों पुरानी परंपरा है। यह परंपरावादी देश है। यह रूढ़िवादी देश है। यहां कोई भी मूर्खता पुरानी होनी चाहिए, बस फिर ठीक है। जितनी पुरानी हो उतनी ज्यादा ठीक है-ओशो*

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Smile ?पूण्य कम॔ का उचित फल?
Posted by: Sourav Gupta - 01-19-2019, 12:01 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

?पूण्य कम॔ का उचित फल?

        *एक गांव मे एक बहुत गरीब सेठ रहता था जो कि किसी जमाने बहुत बड़ा धनवान था जब सेठ धनी था उस समय सेठ ने बहुत पुण्य किए,गउशाला बनवाई, गरीबों को खाना खिलाया,अनाथ आश्रम बनवाए और भी बहुत से पुण्य किए थे लेकिन जैसे जैसे समय गुजरा सेठ निर्धन हो गया।*
    *एक समय ऐसा आया, कि राजा ने ऐलान कर दिया कि यदि किसी व्यक्ति ने कोई पुण्य किए हैं तो वह अपने पुण्य बताएं और अपने पुण्य का जो भी उचित फल है ले जाए।*
     *यह बात जब सेठानी ने सुनी, तो सेठानी, सेठ को कहती है, कि हमने तो बहुत पुण्य किए हैं तुम राजा के पास जाओ और अपने पुण्य बताकर उनका जो भी फल मिले ले आओ। सेठ इस बात के लिए सहमत हो गया और दुसरे दिन राजा के महल जाने के लिए तैयार हो गया जब सेठ महल जाने लगा तोसेठानी ने सेठ के लिए चार रोटी बनाकर बांध दी कि रास्ते मे जब भूख लगी तो रोटी खा लेना। सेठ राजा के महल को रवाना हो गया।*
      *गर्मी का समय, दोपहर हो गई, सेठ ने सोचा सामने पानी की कुंड भी है वृक्ष की छाया भी है क्यों ना बैठकर थोड़ा आराम किया जाए व रोटी भी खा लूंगा।*
       *सेठ वृक्ष के नीचे रोटी रखकर पानी से हाथ मुंह धोने लगा तभी वहां पर एक कुतिया अपने चार पांच छोटे छोटे बच्चों के साथ पहुंच गई और सेठ के सामने प्रेम से दुम हिलाने लगी क्योंकि कुतिया को सेठ के पास के अनाज की खुशबु आ रही थी।*
     *कुतिया को देखकर सेठ को दया आई सेठ ने दो रोटी निकाल कुतिया को डाल दी अब कुतिया भूखी थी और बिना समय लगाए कुतिया दोनो रोटी खा गई और फिर से सेठ की तरफ देखने लगी,  सेठ ने सोचा कि कुतिया के चार पांच बच्चे इसका दूध भी पीते है दो रोटी से इसकी भूख नही मिट सकती और फिर सेठ ने बची हुई दोनो रोटी भी कुतिया को डाल कर पानी पीकर अपने रास्ते चल दिया।*
     *सेठ राजा के दरबार मे हाजिर हो गया और अपने किए गए पुण्य के कामों की गिनती करने लगा, और सेठ ने अपने द्वारा किए गए सभी पुण्य कर्म विस्तार पुर्वक राजा को बता दिए और अपने द्वारा किए गए पुण्य का फल देने बात कही।*
      *तब राजा ने कहा कि आपके इन पुण्य का कोई फल नही है यदि आपने कोई और पुण्य किया है तो वह भी बताएं शायद उसका कोई फल मै आपको दे पाऊँ।*
     *सेठ कुछ नही बोला और यह कहकर बापिस चल दिया कि यदि मेरे इतने पुण्य का कोई फल नही है तो और पुण्य गिनती करना बेकार है अब मुझे यहां से चलना चाहिए।*
     *जब सेठ बापिस जाने लगा तो राजा ने सेठ को आवाज लगाई कि सेठ जी आपने एक पुण्य कल भी किया था वह तो आपने बताया ही नही, सेठ ने सोचा कि कल तो मैनें कोई पुण्य किया ही नही राजा किस पुण्य की बात कर रहा है क्योंकि सेठ भुल चुका था कि कल उसने कोई पुण्य किया था  सेठ ने कहा, कि राजा जी, कल मैनें कोई पुण्य नहीं किया।*
    *तो राजा ने सेठ को कहा -  कि कल तुमने एक कुतिया को चार रोटी खिलाई और तुम उस पुण्य कर्म को भूल गए, कल किए गए तेरे पुण्य के बदले तुम जो भी मांगना चाहते हो मांग लो वह तुझे मिल जाएगा।*
*सेठ ने पूछा - कि राजा जी ऐसा क्यों? मेरे किए पिछले सभी कर्म का कोई मूल्य नही है और एक कुतिया को डाली गई चार रोटी का इनका मोल क्यों?*
    *राजा के कहा - हे सेठ, जो पुण्य करके तुमने याद रखे और गिनकर लोंगों को बता दिए, वह सब बेकार है, क्यों कि तेरे अन्दर मै बोल रही है कि यह मैनें किया?  तेरा सब कर्म व्यर्थ है जो तु करता है और लोगों को सुना रहा है।*
     *जो सेवा कल तुमने रास्ते मे कुतिया को चार रोटी पुण्य करके की वह तेरी सबसे बड़ी सेवा है उसके बदले तुम मेरा सारा राज्य भी ले लो, वह भी बहुत कम है।*
    कहानी का अर्थ --
       *दान व पुण्य वही है जो एक हाथ से करें तो दूसरे हाथ को भी पता न हो, कि दान किया है।*

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Thumbs Up आयुष्मान भारत योजना में सुविधा देने वाले इंदौर के सभी अस्पताल,नाम,पता,नम्बर
Posted by: Sunil Verma - 01-18-2019, 03:56 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

आयुष्मान भारत योजना में सुविधा देने वाले इंदौर के सभी अस्पताल,नाम,पता,नम्बर

 आकांक्षा नर्सिंग होम 
 सुदामा नगर 
0731-2483754

 आदित्य नर्सिंग होम 
 315,उषानगर एक्सटेंशन,रणजीत हनमान मंदिर के पास 
0731-2483311, 4045239

 आनंद हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर 
 7,सिंधु नगर,भंवरकुआ रोड 
0731-2472121-23-24

 अपूर्वा नर्सिंग होम 
 75,ओल्ड अग्रवाल नगर, नवलखा 
0731-4096539

 अरिहंत हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर 
 283-ए गुमास्ता नगर 
0731-2785172, 73, 74

 आरोग्य नर्सिंग होम 
 156 नयापुरा मेन रोड, 
 घड़ीवाली मस्जिद के सामने 
0731-2538184, 2547590

 अर्पण नर्सिंग होम 
 151/2 इमली बाजार,राजवाडा 
0731-2433911, 93032-71447

 अर्पित मेटरनिटी एवं नर्सिंग होम 
 18-बी,बख्तावरराम नगर,
 तिलकनगर टेम्पो स्टैंड के पास 
0731-2494690

 आशीष नर्सिंग होम 
 163 एएफ, स्कीम नं 54,
 विजय नगर 0731-2552909

 बाफना हॉस्पिटल एवं आर्थो सिर्च सेंटर 
 18/1 नॉर्थ राजमोहल्ला, 
 वैष्णव स्कूल के सामने 
0731-418081,82, 4010400

 बांठिया हॉस्पिटल 
 10 तिरुपतिनगर,एरोड्रम रोड़ 
0731-2623000, 2621874

 बापट हॉस्पिटल एवं लेपरोस्कोपी सेंटर एएचडी-30 सुखलिया 
0731-2552228

 भगवती मेटरनिटी एवं नर्सिंग होम 
 1/3,संविद नगर, कनाडिया रोड 
0731-2492448

 भाईजी हॉस्पिटल 
 47 कालानी नगर, एरोड्रम रोड
0731-2621028

 भंडारी ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल 
 21/22 स्कीम नं 54, 
 मेघदूत गार्डन के सामने 
0731-4002327, 2552833

 भार्गव नर्सिंग होम 
 64 सुभाष नगर 
0731-2433301

 भोरास्कर हॉस्पिटल एवं मेटरनिटी होम 
 29/7 साउथ तुकोगंज 
0731-2515462

 बॉम्बे हॉस्पिटल 
 रिंग रोड अनुराग नगर के पास 
0731-4077400

 स्कीन केयर सेंटर 
 5-ए नवलखा मेनरोड़, 
 सेंट्रल बैंक के पास 
0731-2401259

 शासकीय कैंसर हॉस्पिटल एमवाय हॉस्पिटल कैंपस के पास 
0731-2524466

 शासकीय चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय 
 एमवाय हॉस्पिटल कैंपस के पास 
0731-2520126

 चरक हॉस्पिटल प्रायवेट लिमिटेड 
 फिल्म भवन, रानी सती गेट, वायएन रोड 0731-2548101,02,03

 छाबड़ा नर्सिंग होम 
 काली मंदिर के पास, खजराना 
0731-2590808

 चिरायु हॉस्पिटल
 79-80 सीताराम पार्क कॉलोनी, 
 बड़ा गणपति 
0731-2412353, 2411130

 चोइथराम हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर 
 माणिक बाग रोड 0731-2362491/99

 सिटी नेत्रालय 
 9-बी सीताराम पार्क कॉलोनी, 
 बड़ा गणपति 
0731-2411406, 2413689

 सिटी नर्सिंग होम प्रायवेट लिमिटेड 
 209 जवाहर मार्ग, राजमोहल्ला 
0731-2340666

 सीएचएल ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स 
 अनूप नगर,एबी रोड,एलआईजी स्क्वेयर 0731-2549090, 4072550

 नीमा हॉस्पिटल्स प्रायवेट लिमिटेड 715-716,विजय सिंडीकेट,अन्नपूर्णा मेन रोड 0731-4099224, 25, 2799881-4

 सिनर्जी हॉस्पिटल 
 स्कीम नं 74-सी,सेक्टर बी, विजय नगर 0731-2550400

 एसएनजी हॉस्पिटल 
 16/1,साउथ तुकोगंज,कंचनबाग मेन रोड 0731-2525555, 4219191

 क्रिस्टल लिथोट्रिप्सी एंड यूरोलॉजी सेंटर 
 307 मौर्या आर्केड, 1/2 ओल्ड पलासिया 0731-4067904/98933-33598

 क्यूरवेल हॉस्पिटल प्रायवेट लिमिटेड 
 19/1 सी न्यू पलासिया 0731-2434445/4001116

 देवी अहिल्या हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर 
 1 आनंद नगर, चितावद-नेमावर रोड़ 0731-4050693

 डॉ. हार्डिया एडवांस्ड आई सर्जरी एंड रिसर्च सेंटर 
 69 हार्डिया कंपाउंड 
0731-2705351

 ईएनटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर 
 16/1 साउथ तुकोगंज, राजशाही पैलेस के पास 0731-4025511

 शासकीय ईएसआई जनरल हॉस्पिटल 
 नंदा नगर मेन रोड 
0731-2553444

 ईएसआई टीबी हॉस्पिटल 
 127 कंचनबाग
0731-2527938

 गोकुलदास हॉस्पिटल लिमिटेड 
 11,डॉ.सरजू प्रसाद मार्ग,
 ढक्कन वाले कुएं के पास 
0731-2519212, 18

 ग्रेटर कैलाश हॉस्पिटल 
 11/12 ओल्ड पलासिया 
0731-4051160/65

 गुर्जर हॉस्पिटल एंड एंडोस्कोपी सेंटर 
 2-3 स्कीम नं 44,भंवरकुआ 0731-2363716-17-18

 इंदौर आई हॉस्पिटल एमओजी लाईंस, 
 धार रोड 
0731-2380821, 2380554

 कैलाश सिंह नर्सिंग होम 
 1/3 साउथ तुकोगंज 
0731-2524409, 2521994

 कालांतरी नर्सिंग होम 
 219 जवाहर मार्ग, नॉर्थ राजमोहल्ला 0731-2610439

 के.डी. केयर हॉस्पिटल
 347 साकेत नगर मेन रोड 
0731-2565793, 2465794

 खंडेलवाल हॉस्पिटल एंड नर्सिंग होम 
 14-बी सुदामा नगर 
94240-10041

 खुर्पे नर्सिंग होम 
 218 खातीवाला टैंक 
0731-2364989

 कृष्णा नर्सिंग होम 
 ई-23 एचआईजी कॉलोनी 
0731-2550050

 लाहोटी मेडीकेयर प्रायवेट लिमिटेड 
 4/5 ओल्ड पलासिया, रविंद्र नगर 0731-2490577, 2492621

 लक्ष्मी मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर 
 1/2 न्यू पलासिया, नेहरू नगर पुलिया के पास 0731-2545104/98260-56380

 लक्ष्मीदेवी आई हॉस्पिटल 
 गोराकुंड स्क्वेयर, क्लॉथ मार्केट के पास, 
 केनरा बैंक के सामने 
0731-2451803

 लाईफ केयर हॉस्पिटल 
 2 पीएसपी, स्कीम नं 78, 
 प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड कार्यालय के पास 0731-2570600, 2421999

 लाईफ लाईन हॉस्पिटल 
 14,अनूप नगर,एमआईजी एबी रोड़ 0731-2575611, 2575615

 शासकीय महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (एमवाय) एमवायएच रोड 
0731-2528301

 महाशब्दे नेत्रालय एंड चाइल्ड केयर सेंटर 
 6 इंदिरा गांधी नगर 
0731-2471688

 महाशब्दे नेत्रालय 
 106 जवाहर मार्ग 
0731-2471688, 98260-47658

 माहेश्वरी नर्सिंग होम
 289,जवाहर मार्ग,मालगंज स्क्वेयर 0731-2456453, 2451648

 मखानी नर्सिंग होम
 37,पलसीकर कॉलोनी 
0731-2476060

 मल्हारगंज टीबी हॉस्पिटल
 मालगंज स्क्वेयर 
0731-2454560

 मलिक नर्सिंग होम 
 स्कीम नं 102, माणिकबाग रोड़, 
 सत्यम टॉकिज के पास 
0731-2473773, 2477172

 मनोरमा नर्सिंग होम 
 139 आरएनटी मार्ग 
0731-2527938, 2706099

 माता गुजरी हॉस्पिटल 
 पिपल्यापाला के पास एबी रोड 
0731-2368636

 मारूति नंदन हॉस्पिटल 
 31 गांधी नगर 
0731-2882355

 मयूर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर 
 स्कीम नं 94-ईई, पी-304 रिंग रोड़ 0731-2595111, 2595222, 2595000, 2595444

 मेडी स्क्वेयर सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल 
 9 विष्णुपुरी कॉलोनी, 
 भंवरकुआ स्क्वेयर के पास 
0731-4004111, 13

 मेहुल नर्सिंग होम 
 पिपलियाहाना 
0731-2764871

 शासकीय मानसिक चिकित्सालय 
 बाणगंगा 
0731-2424414,2421545

 मिनेश हॉस्पिटल 
 6 साजन नगर, नवलखा, नेमावर रोड़ 0731-2400647, 2400047

 मिशन हॉस्पिटल 
 2 मुराई मोहल्ला, संयोगितागंज 
0731-2700196

 मदर केयर नर्सिंग होम 
 200 डीएच, स्कीम नं 54-सी, 
 पावर हाउस के पास 
0731-2550220, 2550110

 एमएसजे हॉस्पिटल 
 7,प्रीति नगर 
0731-2591903

 नाहर हॉस्पिटल 
 एएम-35, दीनदयाल उपाध्याय नगर, 
 सुखलिया सर्कल 
0731-2570251, 2570271

 नाहर नर्सिंग होम 
 70/4 सम्विद नगर, कनाडिया रोड़ 0731-2594233

 न्यू पर्ल नर्सिंग होम 
 18 आरएनटी मार्ग 
0731-2703222,4203285

 निर्मल हॉस्पिटल 
 157/2 शिक्षक नगर, एरोड्रम रोड 0731-2522882

 नोबल हॉस्पिटल एंड इंटेंसिव केयर युनिट 
 28/1 साउथ तुकोगंज, जाल ऑडिटोरियम के सामने 
0731-2524649, 50,51

 द रिकवरी हॉस्पिटल
 2/3 नारायण कोठी चौराहा, न्यू पलासिया 0731-2541166, 2544466

 आरएलबी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर 
 20-ए स्कीम नं 71 सी सेक्टर रिंग रोड़ 0731-2786960

 रोहित आई हॉस्पिटल एंड चाइल्ड केयर सेंटर 202 सेफायर हाउस, 
 9 स्नेह नगर मेन रोड़, लोटस के पास 0731-2460911, 4093919

 साई बाबा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर 
 साई मंदिर छत्रीबाग 
0731-2342955, 2341790

 शकुंतलादेवी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर 
 442/3 गोयल नगर, रिंग रोड़ 
0731-4035196, 4035401

 सलूजा आई केयर सेंटर 
 एलजी-8 एंड 3, बीसीएस हाइट्स, बॉम्बे हॉस्पिटल के पास 
0731-4064040

 सर्वोदय नर्सिंग होम 
 28 न्यू पलासिया, ओम शांति भवन के पास 0731-2434987, 4037000, 2537000

 श्रीपद हॉस्पिटल एंड सर्जिकल सेंटर 
 1-ए स्वस्तिक नगर, एमओजी लाइंस 0731-2788988, 2380866

 सूरज विजन केयर 
 3/1 एच-ए, साउथ तुकोगंज 
0731-2522988

 सुयश हॉस्पिटल प्रायवेट लिमिटेड एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सामने, एबी रोड 0731-4064911, 2493911

 सुयोग हॉस्पिटल 
 195 भंवरकुआ 
0731-4088580, 4086307, 2472880

 सुंदरम हॉस्पिटल 
 657, उषानगर एक्सटेंशन 
0731-4057080

 द आई हॉस्पिटल 
 127, कंचनबाग, क्राउन पैलेस के सामने 0731-2527385

 राजश्री हॉस्पिटल 
 स्कीम नं 74 सेक्टर डी विजयनगर 0731-2445566

 यूनिक हॉस्पिटल 
 335, जवाहर मार्ग, माधव मंदिर कैंपस 0731-2534124, 2533525

 वर्मा युनियन हॉस्पिटल 
 120 धार रोड, लाबरिया भेरू 
0731-2787694, 2380609

 विशेष हॉस्पिटल 
 2/1 रेसीडेंसी एरिया, एबी रोड 
0731-4067111

 विजन केयर 
 102 सिल्वर संचोरा कैसल, आरएनटी मार्ग 0731-2529921

 व्यास चिल्ड्रन हॉस्पिटल 
 361, जवाहर मार्ग, बॉम्बे बाजार स्क्वेयर 0731-2432939

 रॉबर्ट नर्सिंग होम 
 रेसीडेंसी
, रेड चर्च के पास 
0731-2492051
? *"ब्लड बैंक" यह पूर्णतया निशुल्क है "भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी"* द्वारा इन्दौर मे खोला गया है *देश* का पहला ब्लड काल सेंटर अगर किसी *व्यक्ति को ब्लड की आवश्यकता है या ब्लड डोनेट करना है।* तो कृपया निम्नाकित *हेल्प लाईन नंबर* पर सम्पर्क कर सकते है.
9200250000
9827666866
7024512345
7316008090
7314002816
 देश के किसीभी जगह से संपर्क कर सकते है

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Wink Hasna jaroori hai
Posted by: Siya - 01-17-2019, 05:19 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

Big Grin Big Grin Big Grin Big Grin Big Grin Big Grin Big Grin Big Grin Big Grin Big Grin Big Grin

एक शहर में कलेक्टर के घर के सामने एक पटवारी ने घर खरीद लिया ।  दोनों के दो दो बच्चे थे ।

 एक दिन मोहल्ले में आइसक्रीम बेचने वाला आया तो पटवारी के बच्चों ने बोला कि हमें आइसक्रीम खानी है ।'  पटवारी ने झट 20 रूपये दिये और कहा जाओ खा लो। 
आइसक्रीम वाला कलेक्टर के घर के सामने पहुंचा तो उसके बच्चों ने भी आइसक्रीम खाने के लिए कहा कलेक्टर बोला बच्चों यह डर्टी होती है  अच्छी नहीं है बीमार हो जाओगे ।  बच्चे बेचारे मन मसोस कर बैठ गए ।  

दो दिन बाद रेवड़ी गजक वाला मोहल्ले में आया फिर पटवारी के बच्चों ने गजक खाने की इच्छा जताई तो पटवारी ने झट 20 रूपये दिये और बच्चों ने गजक खा ली । 
 अब गजक वाला कलेक्टर के घर के पास पहुंचा तो उसके बच्चों ने भी गजक खाने की जिद करी कलेक्टर ने कहा कि बेटा इस पर डस्ट लगी होती है बीमारी हो जाती है बच्चे फिर मुँह लटका कर बैठ गए ।

  कुछ दिन बाद मोहल्ले में मदारी आया जो बंदर नचा रहा था ।  पटवारी के बच्चों ने कहा हमे बंदर के साथ खेलना है ।  पटवारी ने मदारी को 50 रूपये दिए और थोड़ी देर बच्चों को बंदर से खेलने को कह दिया ।  बच्चे खुश । 
 अब कलेक्टर के बच्चों ने भी कह कि उन्हें भी बंदर के साथ खेलना है  कलेक्टर बोला अरे कैसी गंदी बात है बंदर जानवर है काट लेता है यह कोई खेलने वाली चीज है ?  बच्चे बेचारे फिर चुप चाप बैठ गए । 
 कुछ दिन बाद  कलेक्टर ने अपने बच्चों से पूछा कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं तो बच्चों ने तपाक से उत्तर दिया।
                   
 ---------- पटवारी --------
Tongue Tongue Tongue Tongue Tongue Tongue Tongue Tongue Tongue


Big Grin Big Grin Shy Shy Rolleyes Rolleyes Tongue Wink Smile Cool Cool

हमारे आस पास के एरिया में कई घरों में चोरियां हो गयी, मुझे डर था अपने घर का ..✋??












फिर एक दिन मैं अपनी गर्लफ्रैंड को घर ले आया,✋??
 और तब से पूरा मोहल्ला मेरे घर पर नजर रखता है, अब चोरों से डरने वाली कोई बात नहीं..
Shy Big Grin Cool Rolleyes Rolleyes Rolleyes Wink Smile Tongue Tongue


Angry Angry

लडकियों ??की लाईन तो मे भी लगा दू....











पर मम्मी का कहना है कि, गोलगप्पा का ठेला लगाना ठीक नही..!!
Cool Cool Big Grin Big Grin Big Grin Wink Smile Smile Rolleyes Shy

चश्मा लगा के Cool Big Grin



जितने मेरे #चाहने वाले





Facebook or WhatsApp पे हैं...






अगर #उतने_गांव में होते







 तो कब का मैं   #सरपंच  बन गया  होता .!!!
Cool Big Grin Tongue


Cool Cool Wink Wink Smile Tongue Rolleyes Shy Sad
Teacher : What is India Gate ?
Student : Basmati Rice
Teacher : What is Charminar ?
Student : Cigarettes
Teacher : What is Taj Mahal ?
Student : Tea, Sir !
Teacher : You stupid boy ?...You have made a joke of all our National Monuments. You have failed the test. Get your father's signature tomorrow.
.
.
.
.
.
Next day Student comes to class and puts a giftwrapped parcel on the Teacher's table.
Teacher : What is this ?
Student : Signature, Sir. 
You had asked for my father's signature. I have brought you his whole bottle.?

The teacher is very happy and hugs him and said चल पागल... रूलादिया... जा पास होगाया तू.... Cool Big Grin Big Grin Tongue Rolleyes


PM की कुर्सी के इतने दावेदार हो गए की  Cool Big Grin
मैं तो बोल रहा हूँ कुर्सी को हटाकर , दरी ही बिछा दो ताकि सब बैठ जाए ll
Big Grin Big Grin Cool
#महाठगबंधन

आपसे सच्ची मोहब्बत वही करता है

जो आपको 
“मटर छीलकर दे" 
और
“गाजर कसकर दे”

मेथी तोड़कर दे 

बाकी ये तारे वारे तोडना सब
ड्रामे हैं ड्रामे

Cool Cool Shy Angry Angry Rolleyes Tongue Smile Tongue Wink Tongue Confused Cool Big Grin Shy



Caller : Are you Santosh Kumar ?,
 
You: Yes

Caller : Govt is planning to  sell Air India. Are you interested in buying them?

You : Me?... I am a  middle class fellow. I can't afford. 












Caller: That's why we asked. Later don't blame Modi sold Air India to Ambani, Adani etc.?
Big Grin Big Grin Cool Cool Cool Tongue Tongue Tongue

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Thumbs Up ICC_Cricket_WORLD_CUP_2019
Posted by: Rohit Gupta - 01-16-2019, 07:15 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

*?#ICC_Cricket_WORLD_CUP_2019?*

30 May  ???????ENG vs ??RSA 2:30pm
31 May  ??PAK vs  ??WI 2:30pm
01 June ??NZ  vs  ?? SL
01 June ??AFG vs ??AUS 5:30pm
02 June ??RSA vs ??BD 2:30pm
03 June ??PAK vs ???????ENG 2:30pm
04 June ??AFG vs ??SL 2:30pm
05 June ??RSA vs ??IND 2:30pm
05 June ??BD   vs ??NZ 5:30pm
06 June ??AUS vs ??WI 2:30pm
07 June ??PAK vs ??SL 2:30pm
08 June ???????ENG vs ??BD 2:30pm
08 June ??AFG vs ??NZ 5:30pm
09 June ??IND  vs ??AUS 2:30pm
10 June ??RSA vs ??WI 2:30pm
11 June ??BD  vs  ??SL 2:30pm
12 June ??PAK vs ??AUS 2:30pm
13 June ??IND  vs ??NZ 2:30pm
14 June ???????ENG vs ??WI 2:30pm
15 June ??SL    vs ??AUS 2:30pm
15 June ??RSA vs ??AFG 5:30pm
___________________
                 ❤❤❤❤❤❤❤
16 June PAK?? vs  IND?? 2:30pm
                 ❤❤❤❤❤❤❤
___________________
17 June ??WI    vs ??BD 2:30pm
18 June ???????ENG vs ??AFG 2:30pm
19 June ??NZ    vs ??RSA 2:30pm
20 June ??AUS  vs ??BD 2:30pm
21 June ???????ENG vs  ??SL 2:30pm
22 June ??IND   vs ??AFG 2:30pm
22 June ??WI     vs ??NZ 5:30pm
23 June ??PAK  vs ??RSA 2:30pm
24 June ??BD    vs ??AFG 2:30pm
25 June ???????ENG vs ??AUS 2:30pm
26 June ??PAK  vs ??NZ 2:30pm
27 June ??WI     vs ??IND 2:30pm
28 June ??SL     vs ??RSA 2:30pm
29 June ??PAK vs  ??AFG 2:30pm
29 June ??NZ    vs ??AUS 5:30pm
30 June ???????ENG vs  ??IND 2:30pm
01 July  ??SL    vs  ??WI 2:30pm
02 July  ??BD.  vs   ??IND 2:30pm
03 July  ???????ENG vs  ??NZ  2:30pm
04 July  ??AFG vs  ??WI 2:30pm
05 July  ??PAK vs  ??BD 2:30pm
06 July  ??SL  vs   ??IND 2:30pm
06 July  ??AUS vs ??RSA 2:30pm
09 July #1st_Semi_Final 2:30pm
11 July #2nd_Semi_Final 2:30pm
14 July #The_FINAL? 2:30pm

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  वक़्त बदलते देर नहीं लगती..
Posted by: Ravi - 01-16-2019, 05:58 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

✍ बाहर  बारिश  हो  रही  थी, और अन्दर  क्लास  चल रही  थी.
तभी  टीचर  ने  बच्चों  से  पूछा - अगर तुम  सभी  को  100-100 रुपया  दिए जाए  तो  तुम  सब  क्या  क्या खरीदोगे ?

किसी  ने  कहा - मैं  वीडियो  गेम खरीदुंगा..

किसी  ने  कहा - मैं  क्रिकेट  का  बेट खरीदुंगा..

किसी  ने  कहा - मैं  अपने  लिए  प्यारी सी  गुड़िया  खरीदुंगी..

तो, किसी  ने  कहा - मैं  बहुत  सी चॉकलेट्स  खरीदुंगी..

एक  बच्चा  कुछ  सोचने  में  डुबा  हुआ  था  
टीचर  ने  उससे  पुछा - तुम  
क्या  सोच  रहे  हो, तुम  क्या खरीदोगे ?

बच्चा  बोला -टीचर  जी  मेरी  माँ  को थोड़ा  कम  दिखाई  देता  है  तो  मैं अपनी  माँ  के  लिए  एक  चश्मा खरीदूंगा !

टीचर  ने  पूछा  -  तुम्हारी  माँ  के  लिए चश्मा  तो  तुम्हारे  पापा  भी  खरीद सकते  है  तुम्हें  अपने  लिए  कुछ  नहीं खरीदना ?

बच्चे  ने  जो  जवाब  दिया  उससे टीचर  का  भी  गला  भर  आया !

बच्चे  ने  कहा -- मेरे  पापा  अब  इस दुनिया  में  नहीं  है  
मेरी  माँ  लोगों  के  कपड़े  सिलकर मुझे  पढ़ाती  है, और  कम  दिखाई  देने  की  वजह  से  वो  ठीक  से  कपड़े नहीं  सिल  पाती  है  इसीलिए  मैं  मेरी माँ  को  चश्मा  देना  चाहता  हुँ, ताकि मैं  अच्छे  से  पढ़  सकूँ  बड़ा  आदमी बन  सकूँ, और  माँ  को  सारे  सुख  दे सकूँ.!

टीचर -- बेटा  तेरी  सोच  ही  तेरी कमाई  है ! ये 100 रूपये  मेरे  वादे के अनुसार  और, ये 100 रूपये  और उधार  दे  रहा  हूँ। जब  कभी  कमाओ तो  लौटा  देना  और, मेरी  इच्छा  है, तू  इतना  बड़ा  आदमी  बने  कि  तेरे सर  पे  हाथ  फेरते  वक्त  मैं  धन्य  हो जाऊं !

20  वर्ष  बाद..........

बाहर  बारिश  हो  रही है, और अंदर क्लास चल रही है !

अचानक  स्कूल  के  आगे  जिला कलेक्टर  की  बत्ती  वाली  गाड़ी आकर  रूकती  है  स्कूल  स्टाफ चौकन्ना  हो  जाता  हैं !

स्कूल  में  सन्नाटा  छा  जाता  हैं !

मगर ये क्या ?

जिला  कलेक्टर  एक  वृद्ध  टीचर के पैरों  में  गिर  जाते  हैं, और  कहते हैं -- सर  मैं ....   उधार  के  100  रूपये  लौटाने  आया  हूँ !

पूरा  स्कूल  स्टॉफ  स्तब्ध !

वृद्ध  टीचर  झुके  हुए  नौजवान कलेक्टर  को उठाकर भुजाओं में कस लेता है, और रो  पड़ता  हैं !

दोस्तों --
*मशहूर  होना, पर मगरूर  मत  बनना।*
*साधारण रहना, कमज़ोर  मत  बनना।*

*वक़्त  बदलते  देर  नहीं  लगती..*

शहंशाह  को  फ़कीर, और  फ़क़ीर को शहंशाह  बनते,

*देर  नही  लगती ....*

यह छोटी सी कहानी आप  के साथ शेयर की है, अगर दिल को छू गयी हो तो कृपया शेयर करें।

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Tongue इंदौर का कचौरी शास्त्र : Here are the best Kachoris of Indore… इंदौर खाने वालों और बो
Posted by: Indori - 01-16-2019, 10:48 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

इंदौर का कचौरी शास्त्र : Here are the best Kachoris of Indore…

इंदौर खाने वालों और बोलने वालों का शहर है ….तो लीजिये पेश है एक अत्यंत महत्वपूर्ण कचोरी सर्वे आपके लिए …इंदौर आयें तो ये ज़रूर खाएं | यह सिर्फ उन दुकानों की लिस्टिंग हैं जिन्होंने कचोरी बनाने और अनोखे स्वाद के साथ खिलाने की धूम मचा दी है | इन्होने इन्दोरियों को कचोरी खिलाना सिखाया है |
1. लाल बाल्टी की कचोरी – LAl balti kachori | Address: Tilak Path, Martand Chowk, Indore, Ram Bag Road, Indore
Specialty: Aaloo ki Kachori, Green Spicy Chatnee
विशेष : “If “Lal balti” means Red Bucket Bulb is on then you are lucky and will get Awesome Kachori.”
2. इंजीनीयर की कचोरी – जी एस आई टी एस कालेज – Engineer ki kachori, | Lantern Sq. GSITS Chauraha, Colege of Design ke Saamne, Indore
Specialty: Aaloo ki Kachori, Green Chatnee, Fried Mirchi , चाय भी १ नंबर बनता है ये 
3. सुरेश की कचोरी – Suesh Ke Namkeen | At Malwa mill Square, indore
Specialty: Dal with heeng, Pyaz and Aaloo ki Kachori, Green & red Chatnee
4. बम की कचोरी – “Bam” Badri guru ki Kachori | Malhar ganj Chauraha , Khajuri bazar ka end, Indore
Specialty: Small Size Dal Kachoris, Malhaarganj Chauraha, Awesome taste with heeng falvored Moong dal masala
He is also Famous for his Kachoris in Schools , Specially In Balvinay mandir, malhar Aashram and Ahilya Aashram School in old days.
5 विजय चाट की कचोरी – Vijay Chat House | Address : 56 Dukan and Sarafa
Specialty: Dal , Matar ki Kachoris with Red & Green Chatnee with “SEV”
6. अनंतानंद उपहार गृह की उसल कचोरी Anantanad Uphaar Grah – झन्नाट कचोरी | Jail road, Indore
Specialty: Very Spicy Usal Kachoriwith Sev and Pyaz Chatnee , Sadi Aaloo Kachori with Signeture Pyaz Chatnee make this place the best of all.
विशेष : कमजोर पेट वाले, NRI , अंग्रेज़ इसे नहीं खाएं | जनहित में जारी | इसे खाने के लिए वाकई में कलेजा चाहिए 
7. रवि अल्पाहार – Ravi alpahar | Nagar nigam Compaunt and Anand bazar Indore
Specialty: Aaloo Kachori with Pyaz Chatnee
8 . बाबा कचोरी, राऊ – “Baba Kulfi” Rau Ki kachori - Rau, Bus stand , Near Rajendra nagar , Indore
Specialty: More then Kulfi (Icecream Desi Version ) he is famous for his Kachori.
Baba kachori is famous for Special Chatnee Sev with Dal Kachori. Once Kachori is enough for lunch .
9.स्वादिष्ठ कचोरी भंडार :-नलिया बाखल, शाहजी नमकीन के सामने इसकी दाल की कचोरी में बहुत मोन डाला जाता है ...जिससे यह बहुत सॉफ्ट होती है....मालिक खुद भी दुकान में बैठने के बाद मोनव्रत धारण कर लेता है....सिर्फ इशारो में बात करता है!
Specialty:- bahut hi soft dal ki kachori with lahsun chatni
10. अग्रवाल की कचोरी,छावनी:- इसकी कचोरी का दाल का मसाला बड़ा ही स्वादिष्ठ है...हरी चटनी के साथ खाने का अपना आनंद है....
Specialty:- humesha garam kachori milti he....
यह लेख हमारे फूडीज़ (खाऊ ) टीम के द्वारा लिखा गया है और यह कोई रेंक नहीं दर्शाता है | व्यक्तिगत स्वाद के हिसाब से इसे परखा और जांचा गया है.....

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Big Grin भाई साहब..
Posted by: Navin - 01-16-2019, 10:34 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

भाई साहब..

*जब उम्र  बढ़ जाएगी*
*इत्र की जगह आयोडेक्स की खुशबू आएगी*

*कहता हूँ अब भी मिल लो*
*ये घड़ियाँ पलटकर नहीं आएंगी*

*अभी तो आँखो मे नूर बाकी है*
*फिर खूबसूरती नज़र नहीं आएगी*

*अभी तो यार होंगे अपने साथ* 
*फिर केवल छड़ी ही नज़र आएगी* 

*आवाज़ सुन लो दोस्तों की*
*फिर कानों में मशीन नज़र आएगी*

*हंस लो खिलखिला कर आज*
*फिर नकली बत्तीसी झलक दिखाएगी*

*जब दोस्त बुलायें, चले जाओ*
*फिर डॉक्टर से फुर्सत नहीं मिल पाएगी* 

*समझ जाओ यारों समझ जाओ* 
*ये चलती फिरती उम्र फिर नहीं आएगी*

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Big Grin Joke
Posted by: Joke - 01-16-2019, 10:32 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

एक राजा था,,,उसने एक सर्वे करने का सोचा कि 
मेरे राज्य के लोगों की घर गृहस्थी पति से चलती है या पत्नी से...??
??‍♂??‍♂

उसने एक ईनाम रखा कि "  जिसके घर में पति का हुक्म चलता हो, उसे मनपसंद घोडा़ ईनाम में मिलेगा और जिसके घर में पत्नी की चलती है वह एक सेब ले जाए.. ।
??

एक के बाद एक सभी नगरवासी सेब उठाकर जाने लगे ।
राजा को चिंता होने लगी.. क्या मेरे राज्य में सभी घरों में पत्नी का हुक्म चलता है,,??
इतने में एक लम्बी लम्बी मुछों वाला, मोटा तगडा़ और लाल लाल आखोंवाला जवान आया और बोला.....
" राजा जी मेरे घर में मेरा ही हुक्म चलता है .. घोडा़ मुझे दीजिए .."

राजा खुश हो गए और कहा जा अपना मनपसंद घोडा़ ले जाओ..चलो कोई एक घर तो मिला जहाँ पर आदमी की चलती है ??
जवान काला घोडा़ लेकर रवाना हो गया । 
!
घर गया और फिर थोडी़ देर में घोडा लेकर दरबार में वापिस लौट आया।
!
राजा: "क्या हुआ जवाँ मर्द...??? वापिस क्यों आ गये..??"
!
जवान : " महाराज,मेरी घरवाली कह रही है काला रंग अशुभ होता है, सफेद रंग शांति का प्रतिक होता है आप सफेद रंग वाला घोडा लेकर आओ... इसलिए आप मुझे सफेद रंग का घोडा़ दीजिए।
!
राजा: अच्छा... "घोडा़ रख ..और सेब लेकर चलता बन,,,
!
इसी तरह रात हो गई ...दरबार खाली हो गया,, लोग सेब लेकर चले गए ।
!
आधी रात को महामंत्री ने दरवाजा खटखटाया,,,
!
राजा : "बोलो महामंत्री कैसे आना हुआ...???"
!
महामंत्री : " महाराज आपने सेब और घोडा़ ईनाम में रखा है,इसकी जगह अगर एक मण अनाज या सोना वगेरहा रखा होता तो लोग  कुछ दिन खा सकते या जेवर बना सकते थे,,,
!
राजा : "मैं भी ईनाम में यही रखना चाह रहा था लेकिन महारानी ने कहा कि सेब और घोडा़ ही ठीक है इसलिए वही रखा,,,,
!
महामंत्री : " महाराज आपके लिए सेब काट दूँ..!!!  
????

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Smile श्री महालक्ष्मै नम:
Posted by: Navin - 01-16-2019, 10:24 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

*श्री महालक्ष्मै नम:* 

*दिवाली की रात में कहां-कहां दीपक लगाने चाहिए।*
 

*1- पीपल के पेड़ के नीचे दीपावली की रात एक दीपक लगाकर घर लौट आएं। दीपक लगाने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। ऐसा करने पर आपकी धन से जुड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं।*

*2- यदि संभव हो सके तो दिवाली की रात के समय किसी श्मशान में दीपक लगाएं। यदि यह संभव ना हो तो किसी सुनसान इलाके में स्थित मंदिर में दीपक लगा सकते हैं।*

*3- धन प्राप्ति की कामना करने वाले व्यक्ति को दीपावली की रात मुख्य दरवाजे की चौखट के दोनों ओर दीपक अवश्य लगाना चाहिए।*

*4- हमारे घर के आसपास वाले चौराहे पर रात के समय दीपक लगाना चाहिए। ऐसा करने पर पैसों से जुड़ी समस्याएं समाप्त हो सकती हैं।*

*5- घर के पूजन स्थल में दीपक लगाएं, जो पूरी रात बुझना नहीं चाहिए। ऐसा करने पर महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।*

*6- किसी बिल्व पत्र के पेड़ के नीचे दीपावली की शाम दीपक लगाएं। बिल्व पत्र भगवान शिव का प्रिय वृक्ष है। अत: यहां दीपक लगाने पर उनकी कृपा प्राप्त होती है।*

*7- घर के आसपास जो भी मंदिर हो वहां रात के समय दीपक अवश्य लगाएं। इससे सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।*

*8- घर के आंगन में भी दीपक लगाना चाहिए। ध्यान रखें यह दीपक भी रातभर बुझना नहीं चाहिए।*

*9- घर के पास कोई नदी या तालब हो तो बहा पर रात के समय दीपक अवश्य लगाएं। इस से दोषो से मुक्ति मिलती है !*

*10- तुलसी जी और के पेड़ और सालिगराम के पास रात के समय दीपक अवश्य लगाएं। ऐसा करने पर महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।*

*11- पित्रो का दीपक गया तीर्थ के नाम से घर के दक्षिण में लगाये ! इस से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।*

*लक्ष्मी प्राप्ति के सूत्र :-*

*प्रत्येक गृहस्थ इन सूत्रों-नियमों का पालन कर जीवन में लक्ष्मी को स्थायित्व प्रदान कर सकता है। आप भी अवश्य अपनाएं -*

*1. जीवन में सफल रहना है या लक्ष्मी को स्थापित करना है तो प्रत्येक दशा में सर्वप्रथम दरिद्रता विनाशक प्रयोग करना ही होगा। यह सत्य है की लक्ष्मी धनदात्री हैं, वैभव प्रदायक हैं, लेकिन दरिद्रता जीवन की एक अलग स्थिति होती है और उस स्थिति का विनाश अलग ढंग से सर्वप्रथम करना आवश्यक होता है। उद्यमी बनें*

*2. लक्ष्मी का एक विशिष्ट स्वरूप है "बीज लक्ष्मी"। एक वृक्ष की ही भांति एक छोटे से बीज में सिमट जाता है - लक्ष्मी का विशाल स्वरूप। बीज लक्ष्मी साधना में भी उतर आया है भगवती महालक्ष्मी के पूर्ण स्वरूप के साथ-साथ जीवन में उन्नति का रहस्य।*

*3. लक्ष्मी समुद्र तनया है, समुद्र से उत्पत्ति है उनकी, और समुद्र से प्राप्त विविध रत्न सहोदर हैं उनके, चाहे वह दक्षिणवर्ती शंख हो या मोती शंख, गोमती चक्र, स्वर्ण पात्र, कुबेर पात्र, लक्ष्मी प्रकाम्य क्षिरोदभव, वर-वरद, लक्ष्मी चैतन्य सभी उनके भ्रातृवत ही हैं और इनकी गृह में उपस्थिति आह्लादित करती है, लक्ष्मी को विवश कर देती है उन्हें गृह में स्थापित कर देने को।*

*4. समुद्र मंथन में प्राप्त कर रत्न "लक्ष्मी" का वरण यदि किसी ने किया तो वे साक्षात भगवान् विष्णु। आपने पति की अनुपस्थिति में लक्ष्मी किसी गृह में झांकने तक की भी कल्पना नहीं कर करतीं और भगवान् विष्णु की उपस्थिति का प्रतीक है शालिग्राम, अनंत महायंत्र एवं शंख। शंख, शालिग्राम एवं तुलसी का वृक्ष - इनसे मिलकर बनता है पूर्ण रूप से भगवान् लक्ष्मी - नारायण की उपस्थिति का वातावरण।*

*5. लक्ष्मी का नाम कमला है। कमलवत उनकी आंखे हैं अथवा उनका आसन कमल ही है और सर्वाधिक प्रिय है - लक्ष्मी को पदम। कमल - गट्टे की माला स्वयं धारण करना आधार और आसन देना है लक्ष्मी को आपने शरीर में लक्ष्मी को समाहित करने के लिए।*

*6. लक्ष्मी की पूर्णता होती है विघ्न विनाशक श्री गणपति की उपस्तिथि से,जो मंगल कर्ता है और प्रत्येक साधना में प्रथम पूज्य, भगवान् गणपति के किसी भी विग्रह की स्थापना किए बिना लक्ष्मी की साधना तो ऐसी है, ज्यों कोई अपना धन भण्डार भरकर उसे खुला छोड़ दे।*

*7. लक्ष्मी का वास वही सम्भव है, जहां व्यक्ति सदैव सुरुचिपूर्ण वेशभूषा में रहे, स्वच्छ और पवित्र रहे तथा आन्तरिक रूप से निर्मल हो। गंदे, मैले, व्यक्तियों के जीवन में लक्ष्मी का वास संभव ही नहीं।*

*8. लक्ष्मी का आगमन होता है, जहां पौरुष हो, जहां उद्यम हो, जहां गतिशीलता हो। उद्यमशील व्यक्तित्व ही प्रतिरूप होता है भगवान् श्री नारायण का, जो प्रत्येक क्षण गतिशील है, पालन में संलग्न है, ऐसे ही व्यक्तियों के जीवन में संलग्न है। ऐसे ही व्यक्तियों के जीवन में लक्ष्मी गृहलक्ष्मी बनकर, संतान लक्ष्मी बनकर आय, यश, श्री कई-कई रूपों मे प्रकट होती है।*

*9. जो साधक गृहस्थ है, उन्हें अपने जीवन मे हवन को अवश्य स्थान देना चाहिए और प्रत्येक माह की शुक्ल पंचमी को श्री सूक्त के पदों से एक कमल गट्टे का बीज और शुद्ध घृत के द्वारा आहुति प्रदान करना फलदायक होता है।*

*10. आपने दैनिक जीवन क्रम में नित्य महालक्ष्मी की किसी ऐसी साधना - विधि को सम्मिलित करना है, जो आपके अनुकूल हो, और यदि इस विषय में निर्णय - अनिर्णय की स्थिति हो तो नित्य प्रति, सूर्योदय काल में निम्न मन्त्र की एक माला का मंत्र जप तो कमल गट्टे की माला से अवश्य करना चाहिए।*

*मंत्र:- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ कमले कमलालाये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मै नम:।*

 *मम गृहे आगच्छ आगच्छ महालक्ष्म्यै नम:*

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Lightbulb शुभकामनाएं
Posted by: Reena - 01-16-2019, 10:03 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

बाकी   शुभकामनाएं   तो   ठीक   है......सब  लोग  फारवर्ड  कर  ही  रहे  हैं,  लेकिन  आज  मैं  आपको  नये  साल  के   लिए  ऐसी  शुभकामनाएं  देती हू  कि  आपका   जीवन  खुशियों  से  भर  जाएगा-------

1 - आपके  घर  के   लोग  आपका  दिमाग  कम  खाएं!
2 - आपके   नौकर  चाकर  सदा  आपके  साथ  रहे!
3-आप  चाहे  जितना  भी  खाना  खाए, आपका  वजन  न  बढे!
4 - आपके   मोबाइल   की  बैटरी  हमेशा  फुल चार्ज  रहे--
5 - आपको  सदा  पार्किंग  की  जगह  मिल  जाए!
6- घर  के  सारे  लोग  अपना  काम  खुद  करें!
7- आपकी  अलमारी  हमेशा  परफेक्शन  से  सैट रहे!
8- फैशन  अनुरूप  कपडे  हमेशा  आपकी  अलमारी  में  भरे रहें!
9- आपको  बहुत  सारी  फिल्में  देखने  का  मौका  मिले!
10 - कोई  भी  प्रोग्राम  या  पार्टी  में  आपको क्या कपडे  पहनने  है, वो पता  हो!
11- आपके  घूमने   जाने  का  प्लान  फटाफट  हो  और  सफल  हो!
12- And  last  but not  the least!..... *पिंक  नोटों , से*  *आपका  बटुआ  हमेशा भरा  रहे!*
Reach at the Top in Yr  Passionate field. God bless. 

???

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  Update rahiye
Posted by: Sheetal - 01-14-2019, 10:30 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

```1998 में Kodak में 1,70,000 कर्मचारी काम करते थे और वो दुनिया का 85% फ़ोटो पेपर बेचते थे..चंद सालों में ही Digital photography ने उनको बाज़ार से बाहर कर दिया.. Kodak दिवालिया हो गयी और उनके सब कर्मचारी सड़क पे आ गए।

HMT (घडी)
BAJAJ (स्कूटर)
DYNORA (टीवी)
MURPHY (रेडियो)
NOKIA (मोबाइल)
RAJDOOT (बाईक)
AMBASDOR (कार)

मित्रों,
इन सभी की गुणवक्ता में कोई कमी नहीं थी फिर भी बाजार से बाहर हो गए!!
कारण???
उन्होंने समय के साथ बदलाव नहीं किया.!!

आपको अंदाजा है कि आने वाले 10 सालों में दुनिया पूरी तरह बदल जायेगी और आज चलने वाले 70 से 90% उद्योग बंद हो जायेंगे।

चौथी औद्योगिक क्रान्ति में आपका स्वागत है...

Uber सिर्फ एक software है। उनकी अपनी खुद की एक भी Car नहीं इसके बावजूद वो दुनिया की सबसे बड़ी Taxi Company है।

Airbnb दुनिया की सबसे बड़ी Hotel Company है, जब कि उनके पास अपना खुद का एक भी होटल नहीं है।

Paytm, ola cabs , oyo rooms जैसे अनेक उदाहरण हैं।

US में अब युवा वकीलों के लिए कोई काम नहीं बचा है, क्यों कि IBM Watson नामक Software पल भर में ज़्यादा बेहतर Legal Advice दे देता है। अगले 10 साल में US के 90% वकील बेरोजगार हो जायेंगे... जो 10% बचेंगे... वो Super Specialists होंगे।

Watson नामक Software मनुष्य की तुलना में Cancer का Diagnosis 4 गुना ज़्यादा Accuracy से करता है। 2030 तक Computer मनुष्य से ज़्यादा Intelligent हो जाएगा।

2018 तक Driverless Cars सड़कों पे उतरने लगेंगी। 2020 तक ये एक अकेला आविष्कार पूरी दुनिया को बदलने की शुरुआत कर देगा।

अगले 10 सालों में दुनिया भर की सड़कों से 90% cars गायब हो जायेंगी... जो बचेंगी वो या तो Electric Cars होंगी या फिर Hybrid...सडकें खाली होंगी,Petrol की खपत 90% घट जायेगी,सारे अरब देश दिवालिया हो जायेंगे।

आप Uber जैसे एक Software से Car मंगाएंगे और कुछ ही क्षणों में एक Driverless कार आपके दरवाज़े पे खड़ी होगी...उसे यदि आप किसी के साथ शेयर कर लेंगे तो वो ride आपकी Bike से भी सस्ती पड़ेगी।

Cars के Driverless होने के कारण 99% Accidents होने बंद हो जायेंगे.. इस से Car Insurance नामक धन्धा बंद हो जाएगा।

ड्राईवर जैसा कोई रोज़गार धरती पे नहीं बचेगा। जब शहरों और सड़कों से 90% Cars गायब हो जायेंगी, तो Traffic और Parking जैसी समस्याएं स्वतः समाप्त हो जायेंगी... क्योंकि एक कार आज की 20 Cars के बराबर होगी।

आज से 5 या 10 साल पहले ऐसी कोई ऐसी जगह नहीं होती थी जहां PCO न हो। फिर जब सब की जेब में मोबाइल फोन आ गया, तो PCO बंद होने लगे.. फिर उन सब PCO वालों ने फोन का recharge बेचना शुरू कर दिया। अब तो रिचार्ज भी ऑन लाइन होने लगा है।

आपने कभी ध्यान दिया है..?

आजकल बाज़ार में हर तीसरी दुकान आजकल मोबाइल फोन की है।
sale, service, recharge , accessories, repair, maintenance की।

अब सब Paytm से हो जाता है.. अब तो लोग रेल का टिकट भी अपने फोन से ही बुक कराने लगे हैं.. अब पैसे का लेनदेन भी बदल रहा है.. Currency Note की जगह पहले Plastic Money ने ली और अब Digital हो गया है लेनदेन।

दुनिया बहुत तेज़ी से बदल रही है.. आँख कान नाक खुले रखिये वरना आप पीछे छूट जायेंगे..।

समय के साथ बदलने की तैयारी करें।

इसलिए...
व्यक्ति को समयानुसार अपने व्यापार एवं अपने स्वभाव में भी बदलाव करते रहना चाहिये।
 
"Time to Time Update & Upgrade"

समयके साथ चलिये और सफलता पाईये ।```

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Smile यही जीवन है।
Posted by: Navin Sharma - 01-13-2019, 06:44 PM - Forum: Share your stuff - No Replies

यही जीवन है।

एक औरत बहुत महँगे कपड़े में अपने मनोचिकित्सक के पास गई और बोली
"डॉ साहब ! मुझे लगता है कि मेरा पूरा जीवन बेकार है, उसका कोई अर्थ नहीं है। क्या आप मेरी खुशियाँ ढूँढने में मदद करेंगें?"
मनोचिकित्सक ने एक बूढ़ी औरत को बुलाया जो वहाँ साफ़-सफाई का काम करती थी और उस अमीर औरत से बोला - "मैं इस बूढी औरत से तुम्हें यह बताने के लिए कहूँगा कि कैसे उसने अपने जीवन में खुशियाँ ढूँढी। मैं चाहता हूँ कि आप उसे ध्यान से सुनें।"
तब उस बूढ़ी औरत ने अपना झाड़ू नीचे रखा, कुर्सी पर बैठ गई और बताने लगी - "मेरे पति की मलेरिया से मृत्यु हो गई और उसके 3 महीने बाद ही मेरे बेटे की भी सड़क हादसे में मौत हो गई। मेरे पास कोई नहीं था। मेरे जीवन में कुछ नहीं बचा था। मैं सो नहीं पाती थी, खा नहीं पाती थी, मैंने मुस्कुराना बंद कर दिया था।"
मैं स्वयं के जीवन को समाप्त करने की तरकीबें सोचने लगी थी। तब एक दिन,एक छोटा बिल्ली का बच्चा मेरे पीछे लग गया जब मैं काम से घर आ रही थी। बाहर बहुत ठंड थी इसलिए मैंने उस बच्चे को अंदर आने दिया। उस बिल्ली के बच्चे के लिए थोड़े से दूध का इंतजाम किया और वह सारी प्लेट सफाचट कर गया। फिर वह मेरे पैरों से लिपट गया और चाटने लगा।"
"उस दिन बहुत महीनों बाद मैं मुस्कुराई। तब मैंने सोचा यदि इस बिल्ली के बच्चे की सहायता करने से मुझे ख़ुशी मिल सकती है,तो हो सकता है कि दूसरों के लिए कुछ करके मुझे और भी ख़ुशी मिले। इसलिए अगले दिन मैं अपने पड़ोसी, जो कि बीमार था,के लिए कुछ बिस्किट्स बना कर ले गई।"
"हर दिन मैं कुछ नया और कुछ ऐसा करती थी जिससे दूसरों को ख़ुशी मिले और उन्हें खुश देख कर मुझे ख़ुशी मिलती थी।"
"आज,मैंने खुशियाँ ढूँढी हैं, दूसरों को ख़ुशी देकर।"
यह सुन कर वह अमीर औरत रोने लगी। उसके पास वह सब था जो वह पैसे से खरीद सकती थी।
लेकिन उसने वह चीज खो दी थी जो पैसे से नहीं खरीदी जा सकती।
मित्रों! हमारा जीवन इस बात पर निर्भर नहीं करता कि हम कितने खुश हैं अपितु इस बात पर निर्भर करता है कि हमारी वजह से कितने लोग खुश हैं।
तो आईये आज शुभारम्भ करें इस संकल्प के साथ कि आज हम भी किसी न किसी की खुशी का कारण बनें।

?  *मुस्कुराहट का महत्व*  ?
?_अगर आप एक अध्यापक हैं और जब आप मुस्कुराते हुए कक्षा में प्रवेश करेंगे तो देखिये सारे बच्चों के चेहरों पर मुस्कान छा जाएगी।
?_अगर आप डॉक्टर हैं और मुस्कराते हुए मरीज का इलाज करेंगे तो मरीज का आत्मविश्वास दोगुना हो जायेगा।
?_अगर आप एक ग्रहणी है तो मुस्कुराते हुए घर का हर काम किजिये फिर देखना पूरे परिवार में खुशियों का माहौल बन जायेगा।
?_अगर आप घर के मुखिया है तो मुस्कुराते हुए शाम को घर में घुसेंगे तो देखना पूरे परिवार में खुशियों का माहौल बन जायेगा।
?_अगर आप एक बिजनेसमैन हैं और आप खुश होकर कंपनी में घुसते हैं तो देखिये सारे कर्मचारियों के मन का प्रेशर कम हो जायेगा और माहौल खुशनुमा हो जायेगा।
?_अगर आप दुकानदार हैं और मुस्कुराकर अपने ग्राहक का सम्मान करेंगे तो ग्राहक खुश होकर आपकी दुकान से ही सामान लेगा।
?_कभी सड़क पर चलते हुए अनजान आदमी को देखकर मुस्कुराएं, देखिये उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ जाएगी।

*मुस्कुराइए*
?क्यूंकि मुस्कराहट के पैसे नहीं लगते ये तो ख़ुशी और संपन्नता की पहचान है।

*मुस्कुराइए*
?क्यूंकि आपकी मुस्कराहट कई चेहरों पर मुस्कान लाएगी।

*मुस्कुराइए*
?क्यूंकि ये जीवन आपको दोबारा नहीं मिलेगा।

*मुस्कुराइए*
?क्योंकि क्रोध में दिया गया आशीर्वाद भी बुरा लगता है और मुस्कुराकर कहे गए बुरे शब्द भी अच्छे लगते हैं।

*मुस्कुराइए*
?क्योंकि दुनिया का हर आदमी खिले फूलों और खिले चेहरों को पसंद करता है।

*मुस्कुराइए*
?क्योंकि आपकी हँसी किसी की ख़ुशी का कारण बन सकती है।

*मुस्कुराइए*
? क्योंकि परिवार में रिश्ते तभी तक कायम रह पाते हैं जब तक हम एक दूसरे को देख कर मुस्कुराते रहते है
                    और सबसे बड़ी बात

*मुस्कुराइए*
? क्योंकि यह मनुष्य होने की पहचान है। एक पशु कभी भी मुस्कुरा नही सकता।
इसलिए स्वयं भी मुस्कुराए और औराें के चहरे पर भी मुस्कुराहट लाएं.

*यही जीवन है।*

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Thumbs Up लोहड़ी का पर्व मनाते हैं !!
Posted by: admin - 01-13-2019, 11:34 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

लोहड़ी का पर्व मनाते हैं !!


आओ हम सब मिलकर अपने  गुरु  जी से लोहड़ी माँगते हैं और लोहड़ी का पर्व मनाते हैं!!

सतगुरु लोहड़ी दे, guru ji लोहड़ी दे
दाता लोहड़ी दे, किरपा वाली लोहड़ी दे..

1. असीं लैना नहीं रूपया, -guru ji पार करो मेरी नैया -2
सतगुरु लोहड़ी दे......❤
2. असीं लैनी नहीं मिठाई, -2
सानूं श्री चरणां विच बिठाईं -2
सतगुरु लोहड़ी दे......?
3. असीं लैना नहीं पतासा, -2
मैं तां  guru ji दर्शन दा प्यासा -2
सतगुरु लोहड़ी दे......❤
4. असीं लैना नहीं हार, -2
सानूं चाहिदा तेरा प्यार -2
सतगुरु लोहड़ी दे......?
5. असीं लैनी नहीं बधाई, -2
हो जावे रब नाल सगाई -2
सतगुरु लोहड़ी दे......❤
6. साड्डे तां वेड़े विच छाइयां बहारां, -2
सतगुरु प्यारे तों मैं तन मन वारां -2
सतगुरु लोहड़ी दे......?
7. साड्डे तां वेड़े विच वजदे छैने, -2
नाम दे हीरे मोती सतगुरु तों लेने -2
सतगुरु लोहड़ी दे......❤
8. साड्डे तां वेड़े विच लगियां कतारां, -2
रेवड़ी ते फुल्ले लैके भोग लगावां -2
सतगुरु लोहड़ी दे......?
    ??Jai Guru ji ??
?????????

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Heart पिता दिवस पर
Posted by: admin - 01-13-2019, 11:26 AM - Forum: Share your stuff - No Replies

पिता दिवस पर
कमजोर दिल वाले इस कविता को न पढ़े, रुला देगी ये कविता


  

वो पिता? होता है

 

वो पिता? ही होता है

 

 

 

जो अपने बच्चो? को अच्छे

 

विद्यालय में पढ़ाने के लिए

 

दौड?भाग करता है...

 

 

 

उधार लाकर donation भरता

 

है, जरूरत पड़ी तो किसी के भी

 

हाथ? पैर भी पड़ता है

 

....... वो पिता? होता हैं ।।

 

 

 

हर कॉलेज? में साथ?साथ

 

घूमता है, बच्चे के रहने के

 

लिए होस्टल? ढुँढता है...

 

स्वतः फटे कपडे पहनता है

 

और बच्चे के लिए नयी जीन्स?

 

टी-शर्ट? लाता है

 

.......... वो पिता? होता है ।।

 

 

 

खुद खटारा फोन? चलाता है पर

 

बच्चे के लिए स्मार्ट? फोन लाता है...

 

 

 

बच्चे की एक आवाज सुनने के

 

लिए, उसके फोन  में पैसा? भराता है

 

....... वो पिता? होता है ।

 

 

 

बच्चे के प्रेम विवाह के निर्णय पर

 

वो नाराज़? होता है और गुस्से

 

में कहता है सब ठीक से देख

 

लिया है ना, "आप कुछ

 

समझते भी है?" यह सुन कर

 

बहुत रोता? है

 

.......वो पिता? होता हैं ।।

 

 

 

बेटी की विदाई पर दिल की

 

गहराई से रोता? है,

 

मेरी बेटी का ख्याल रखना हाथ

 

जोड़? कर कहता है

 

......... वो पिता? होता है ।।

 

 

 

 

 

पिता का प्यार दिखता नहीं है

 

सिर्फ महसूस किया जात